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फर्क नहीं पड़ता...
- श्रीकांत भाटे
Devendra SharmaND

लुटेरा (बूढ़े राहगीर से)- 'हैंड्स अप, जो भी कीमती सामान और रुपए हों, चुपचाप मेरे हवाले कर दो वरना...।'

तभी लुटेरे के साथी ने कहा- 'उस्ताद, लगता है गलती से आप खिलौने वाली बंदूक उठा लाए।'

यह सुनकर राहगीर बोला- 'क्या फर्क पड़ता है भाई, मुझे तो आँखों से वैसे भी कम दिखाई देता है।'
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