पत्नी की मृत्यु शैया पर पति बैठा था।
- प्रिये- आखिरी वक्त पत्नी अपने गुनाह कबूलने लगी- मुझे माफ कर देना। तुम्हारे जो दस हजार चोरी गए थे, वह मैंने उठाए थे। तुम्हारे दोस्त के साथ ऐय्याशी में वो खत्म हो गए। तुम्हारी चहेती सेक्रेटरी ने मेरे कहने पर त्यागपत्र दिया था। उस दिन...
- छोड़ो भी इसे। गलती सभी से होती है। तुम्हारी शर्बत में जहर मैंने ही मिलाया है।
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