किसी जगह के लोग हँसते नहीं थे, केवल मुस्कुराते नहीं, हमेशा गंभीर चेहरा लिए बैठे रहते थे। कम्प्यूटर से बातचीत करते हैं और सारा काम कम से कम समय में कर लेते हैं। एक शराबखाने में इस जगह के 20-25 लोग बैठे हुए शराब पी रहे थे। पीने के बाद उनमें से एक बोला, ‘अब लतीफे होंगे।’
एक व्यक्ति उठा और कहा, ‘नंबर 35।’
सभी लोग एकदम ठहाका मारकर हँसने लगे। दूसरा उठा और बोला, ‘नंबर 65’। फिर ठहाका। तीसरा कहा, ‘नंबर 27’, लोग खूब हँसे।
उनके साथ ही बैठे एक विदेशी को यह सब समझ में नहीं आ रहा था। उसने उत्सुकता से पूछा, ‘यह सब क्या हो रहा है?’
उनमें से एक शराबी ने बताया कि, ‘हमारे पास 100 लतीफे हैं और उनको हमने अलग-अलग नंबर दे रखा है। जैसे ही किसी लतीफे का नंबर बोला जाता है, सभी समझ लेते हैं कि लतीफा कौन-सा है और ठहाके मारने लगते हैं।’
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