दद्दू, मुझे सालभर दीपावली का बेकरारी से इंतजार रहता है। दीपावली पर मुझे अपनी सुंदर पड़ोसन के बनाए हुए स्वादिष्ट शक्करपारे जो खाने को मिलते हैं। पर दद्दू, जीवन में हर रोज दिवाली क्यों नहीं आती?
- उद्यमशील मनुष्य के लिए कुछ भी असंभव नहीं है भाई। वर्ना पड़े-पड़े यही दोहराते रहिए... तू नहीं, तेरे वार्षिक शक्करपारे ही सही!
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