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फिल्म समीक्षा
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26th July at Barista
IFM
निर्माता : सुमीत चावला
निर्देशक : मोहन शर्मा
संगीत : संदर्भ
कलाकार : सिमरन वेद, परमवीर, आशीष दुग्गल, रिता जोशी, कबीर साहनी, सीमा पांडे


26 जुलाई की तारीख मुंबईवासी कभी भी भूल नहीं पाएँगे। कुछ वर्ष पूर्व इसी दिन मुंबई में मूसलधार बारिश हुई थी और इससे मुंबई में रहने वाला हर शख्स प्रभावित हुआ था।

घरों में पानी घुस गया था। बस और रेल सेवाएँ ठप हो गई थीं। मोबाइल और फोन ने काम करना बंद कर दिया था। बिजली गुल हो गई थी। लोग यहाँ-वहाँ सुरक्षित स्थानों को ढूँढ रहे थे। करोड़ों रुपए का आर्थिक नुकसान हुआ था। प्रत्येक व्यक्ति के पास इस दिन का कोई न कोई किस्सा मौजूद है।

इसी घटना को लेकर ’26 जुलाई एट बरिस्ता’ नामक फिल्म बनाने का प्रयास किया गया है। कॉफी शॉप पर एकत्रित लोगों के जरिये कहानी कही गई है। इस कॉफी शॉप में एक पटकथा लेखक, एक अभिनेत्री, युवा लोगों का एक समूह और कुछ लोग मौजूद हैं।

एक घंटे बाद पुलिस ऑफिसर आता है, एक महिला आती है जिसके साथ सामूहिक बलात्कार हुआ है, एक बच्चा अपने पिता और एक माँ अपने बच्चे की तलाश में वहाँ आते हैं।

पूरी फिल्म एक बचकाना प्रयास है। फिल्म इस प्राकृतिक आपदा के शिकार लोगों के प्रति किसी भी तरह का दु:ख या हमदर्दी नहीं जगा पाती है। फिल्म का अधिकांश हिस्सा अँधेरे में फिल्माया गया है, क्योंकि बिजली नहीं है।

26th July at Barista
IFM
पटकथा और निर्देशन के बारे में कुछ भी बात करना समय की बर्बादी है। फिल्म में ज्यादातर नए चेहरे हैं। कबीर साहनी और सिमरन वेद का अभिनय ठीक है।

कुल मिलाकर ‘26 जुलाई एट बरिस्ता’ देखने के बजाय घर पर कॉफी पीना बेहतर है।