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सिर्फ : लाइफ लुक्स ग्रीनर ऑन द अदर साइड
Manisha
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निर्माता : संजय कोटाडिया, कनू पटेल, घनश्याम पटेल
निर्देशक : रजतेश नायर
संगीत : सोहेल सेन, शिबानी कश्यप
कलाकार : केके मेनन, मनीषा कोईराला, प्रवीण डबास, सोनाली कुलकर्णी, रणवीर शौरी, रितुपर्णा सेनगुप्ता, अंकुर खन्ना, नौहीद

जिंदगी की तुलना हम हाई-वे से कर सकते हैं, क्योंकि हाई-वे की तरह जिंदगी में भी हम यह नहीं जान पाते कि अगले मोड़ पर क्या होने वाला है? बावजूद इसके लोग आशावादी होते हैं और उनकी आँखों में सपने होते हैं।

‘सिर्फ’ फिल्म में शहरों की तेज रफ्तार में जीने वाले लोगों की जिंदगी पर व्यंग्यात्मक तरीके से गहरा कटाक्ष किया गया है। कैसे जिंदगी की भाग-दौड़ और रफ्तार उनके आपसी रिश्तों पर असर डालती है? कैसे एक इनसान की परेशानियाँ दूसरों के लिए हँसी का सबब बन जाती हैं?

इस फिल्म की कहानी चार जोडि़यों के आसपास घूमती है। ये जोडि़याँ हैं केके मेनन-मनीषा कोईराला, रणबीर शौरी-सोनाली कुलकर्णी, प्रवीण दबास-रितुपर्णा सेनगुप्ता और अंकुर खन्ना- नौहीद सायरसी।

Ritu-Praveen
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ये सभी लोग समाज के अलग-अलग तबकों से आए हैं तथा जिंदगी में किसी न किसी कमी से दु:खी हैं। किसी के पास पैसा है पर प्यार नहीं, किसी के पास प्यार है तो पैसा नहीं। एक जोड़ी में आपसी विश्वास समाप्त हो गया है तो एक जोड़ी के पास एक-दूसरे के लिए समय नहीं है।

जिंदगी के सफर में चलते हुए एक मोड़ ऐसा आता है जब सारी जोडि़याँ एक-दूसरे के आमने-सामने आ जाती हैं।

जीवन के इस मोड़ पर क्या सभी लोग परेशानियों से छुटकारा पा सकेंगे? क्या वे परेशानियों का हल निकाल पाएँगे या फिर और जटिलता की ओर चले जाएँगे? जानने के लिए देखिए ‘सिर्फ’।

निर्देशक के बारे में :
रजतेश नायर की बतौर निर्देशक यह पहली फिल्म है। वे सहायक निर्देशक के रूप में राजकुमार संतोषी के साथ ‘लज्जा’, ‘पुकार’ और ‘चायना गेट’ में काम कर चुके हैं। रजतेश कार्यकारी निर्माता केके नायर के पुत्र हैं। वे दूरदर्शन तथा गैर सरकारी संगठनों के लिए कई वृत्तचित्र बना चुके हैं।

Sirf
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अपनी फिल्म के बारे में रजतेश का कहना है ‘यह फिल्म दर्शाती है कि जब भी हम दूसरों की जिंदगियों में झाँकते हैं तब हमें यह महसूस होता है कि हमारी जिंदगी में कई कमियाँ हैं। जो चीजें हमारी जिंदगी में शामिल हैं, उनसे हम कभी संतुष्ट नहीं होते। निराश होकर हम हमेशा यही सोचते हैं कि कुछ ऐसा हो जाए कि हमारी जिंदगी बदलकर उनके जैसी हो जाए। ‘सिर्फ’ में चार जोडि़याँ हैं। विचारों में अलगाव होने के बावजूद सभी में एक चीज समान है। वे सब आशावादी हैं और सोचते हैं कि एक दिन सब कुछ ठीक हो जाएगा।‘
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