निर्माता : मुक्ता सर्चलाइट फिल्म्स निर्देशक : नागेश कुकुनूर संगीत : सलीम-सुलेमान, रोनी शिरीष, सुखविंदर सिंह, प्रीतम चक्रवर्ती कलाकार : श्रेयस तलपदे, लेना, विक्रम इनामदार, यतिन कारयेकर, नसीरूद्दीन शाह (विशेष भूमिका)
‘डोर’ और ‘इकबाल’ जैसी फिल्म बनाने वाले नागेश कुकुनूर ‘बॉम्बे टू बैंकॉक’ लेकर हाजिर हो रहे हैं। गंभीर फिल्म बनाने वाले नागेश ने इस बार हास्य कथा चुनी है। इस फिल्म के जरिए थाईलैंड की अभिनेत्री लेना बॉलीवुड में अपना करियर आरंभ कर रही है। थाईलैंड में वे जाना-पहचाना नाम है और टीवी तथा अलबम में काम कर चुकी है।
कहानी है शंकर नामक एक रसोइए की। मुंबई में रहने वाले शंकर को पैसे की सख्त जरूरत है। जब कहीं से भी उसे पैसा नहीं मिलता तो वह एक डॉन का ही पैसा चुरा लेता है। जब डॉन के आदमी उसके पीछे पड़ते हैं तो उसे समझ में आता है कि जिसका पैसा उसने चुराया है वह डॉन है।
डॉन के आदमियों से बचने की फिराक में वह डॉक्टरों के उस दल में शामिल हो जाता है जो राहत कार्य के लिए थाईलैंड जाने वाले हैं। वहाँ पहुँचकर दौड़-भाग में उसका रुपयों से भरा बेग गुम हो जाता है।
बैकॉक में रुपए ढूँढते हुए शंकर की मुलाकात जस्मिन से होती है। जस्मिन को देखते ही शंकर उस पर फिदा हो जाता है। जस्मिन थाई भाषा बोलती है और शंकर को यह भाषा बिलकुल समझ में नहीं आती। दोनों को विचारों का आदान-प्रदान करने में तकलीफ होती है।
शंकर अपने रूपयों की तलाश में दोस्त रचविंदर और जस्मिन को भी शामिल कर लेता है। इसी बीच डॉन का बेटा जैम अपने पैसे और शंकर की तलाश में बैंकॉक आ धमकता है। इससे शंकर की मुश्किलें और बढ़ जाती है।
कई मजेदार गड़बडि़याँ होती हैं और उनसे हास्य उत्पन्न होता है। क्या शंकर, डॉन और उसके बेटे से बच पाएगा? क्या वह जस्मिन का दिल जीत पाएगा? क्या वह अपने पैसों को तलाश लेगा? इनके उत्तर मिलेंगे ‘बॉम्बे टू बैंकॉक’ में।
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