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मुख पृष्ठ मनोरंजन  बॉलीवुड  मुलाकात > कलम का सच्चा सिपाही बना हूँ : आशुतोष राणा
मुलाकात
Ashutosh
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अभिनेता आशुतोष राणा की अभिनय प्रतिभा के हम सब कायल हैं। उन्होंने जब भी किसी फिल्म में किसी भूमिका को निभाया है तो पूरी तरह से उसमें डूबकर, चाहे वो दुश्मन की भूमिका हो या फिर चाहे संघर्ष, राज, शबनम मौसी या अन्य किसी ‍भी फिल्म की। आशुतोष की ‘कॉफी हाउस’ जल्दी प्रदर्शित होने वाली है। इसमें उनके साथ ‘कहानी घर-घर की’ की पार्वती भाभी यानी की साक्षी तँवर हैं। पेश है इस फिल्म को लेकर आशुतोष से बातचीत :

‘कॉफी हाउस’ के बारे में कुछ बताइए।
यह फिल्म सिखाती है कि केवल बैठकर बहस करने से समस्या का समाधान संभव नहीं है, वरन् सब लोगों को एकजुट होकर काम करना चाहिए।

आपकी इस फिल्म में क्या भूमिका है?
इस फिल्म में मैं कलम का ‍सच्चा सिपाही बना हूँ और अपनी कलम की ताकत से कोशिश करता हूँ कि समस्याओं को दूर कर सकूँ। अच्छी भूमिका है मेरी, काफी दिनों बाद किसी अच्छी फिल्म में काम करने का मौका मिला है।

निर्देशक गुरबीर सिंह ग्रेवाल के साथ काम करना कैसा रहा?
गुरबीर सुलझे हुए निर्देशक हैं। उन्होंने टीवी पर काम किया है। इसके अलावा पंजाबी फिल्म ‘मन्नत’ को ‍भी निर्देशित किया है। दर्शकों की नब्ज पहचानने में वे माहिर हैं। उनकी यह फिल्म भी दर्शकों पर अपना प्रभाव अवश्य जमाएगी।

छोटे पर्दे से आपने अभिनय का सफर आरंभ किया था। एक बार फिर आप टीवी पर हैं। इतने सालों बाद कैसा लग रहा है छोटे पर्दे पर काम करना।
बहुत अच्छा। मेरा करियर तो टीवी से ही आरंभ हुआ। मैंने स्वाभिमान, फर्ज, साजिश, कभी-कभी जैसे कई धारावाहिकों में काम किया। ‘बाजी किसकी’ में एकंरिंग की।

आपको अपनी सबसे अच्छी भूमिका किस फिल्म की लगती है?
मुझे तो सभी भूमिकाएँ पसंद हैं, लेकिन दर्शकों को मेरी दुश्मन, संघर्ष, शबनम मौसी, कलयुग की भूमिकाएँ ज्यादा पसंद है। दुश्मन और संघर्ष के लिए तो मुझे फिल्मफेयर की ओर से सर्वश्रेष्ठ खलनायक अवॉर्ड भी मिला था।