ऐश्वर्या राय मेरे लिए विशेष हैं : संजय लीला भंसाली
IFM
‘साँवरिया’ के बाद संजय लीला भंसाली एक बार फिर निर्देशन के मैदान में लौट रहे हैं। अपनी प्रिय नायिका ऐश्वर्या राय के साथ रितिक रोशन को उन्होंने इस फिल्म के लिए चुना है। पेश है संजय से बातचीत :
सुना है कि आपने पाकिस्तानी अभिनेता इमरान अब्बास को अपनी फिल्म ‘हीरा मंडी’ के लिए चुना है? मैंने किसी को साइन नहीं किया है। फिलहाल मैं ‘हीरा मंडी’ नहीं बना रहा हूँ। जब बनाऊँगा तब कलाकारों के नाम पर विचार करूँगा।
तो फिर आप कौन-सी फिल्म पर काम कर रहे हैं? मैं ऐश्वर्या और रितिक को लेकर फिल्म बनाने जा रहा हूँ और इस फिल्म को लेकर बेहद उत्साहित हूँ।
फिल्म में कोई नया चेहरा नजर नहीं आएगा? नहीं। इसमें अनुभवी कलाकारों की जरूरत है। इस्माइल दरबार, श्रेया घोषाल, मोंटी शर्मा, रणबीर कपूर और सोनम जैसे न्यूकमर्स के साथ मैं काम कर चुका हूँ।
क्या ‘साँवरिया’ की असफलता के बावजूद आप अपने मन के मुताबिक फिल्म बनाएँगे? यह समय प्रयोग के हिसाब से बहुत अच्छा है। मैंने हमेशा बेखौफ होकर फिल्में बनाई है। मैं लोगों की रुचि के मुताबिक फिल्म नहीं बनाता। मेरी पहली फिल्म ‘खामोशी : द म्यूजिकल’ भले ही चल नहीं पाई हो, लेकिन लोगों का कहना है कि वह मेरी श्रेष्ठ फिल्म है।
क्या ‘साँवरिया’ को लेकर भी उतना ही गर्व है? बिलकुल। ‘देवदास’ या ‘हम दिल दे चुके सनम’ फिर बनाई जा सकती है, लेकिन ‘साँवरिया’ को दोबारा नहीं बनाया जा सकता। ट्रीटमेंट के हिसाब से यह मेरा अद्भुत कार्य है। मैंने स्टेज प्ले को फिल्म में दिखाने की कोशिश की थी, लेकिन दर्शकों ने अपना फैसला सुना दिया। मेरे ख्याल से दर्शक यह मन बनाकर आए थे कि उन्हें साँवरिया को पसंद नहीं करना है।
सुना है कि रणबीर कपूर आपके साथ काम नहीं करना चाहते हैं? ये सब अफवाहें हैं। सच तो यह है कि रणबीर और सोनम की जब भी मुझे आवश्यकता होगी वे मेरे साथ होंगे। फिलहाल मैं ऐश और रितिक के साथ काम कर रहा हूँ।
रितिक को साइन करने की वजह? रितिक और मैं लंबे समय से साथ काम करना चाहते थे। एक अभिनेता के रूप में उन्होंने मुझे हमेशा प्रभावित किया। मैं सही अवसर का इंतजार कर रहा था।
ऐश्वर्या के साथ आपने ‘हम दिल दे चुके सनम’ और ‘देवदास’ के रूप में दो बार सफलता हासिल की। क्या अब हैटट्रिक पूरी होगी? ऐश्वर्या मेरे लिए हमेशा विशेष हैं। मेरी नई फिल्म के लिए वे उपयुक्त हैं। जब उन्होंने पटकथा पढ़ी तो वे बेहद प्रभावित हुईं। वे मेरी इतनी अच्छी दोस्त हैं कि उन्होंने बताया कि यदि मैं उनके पास पटकथा नहीं भी भेजता तो भी वे मेरे साथ फिल्म करतीं। लेकिन एक कलाकार को यह जानना जरूरी होता है कि वह क्या करने वाला है।
क्या यह फिल्म आप अंतरराष्ट्रीय मार्केट को ध्यान में रखकर अँग्रेजी में बना रहे हैं? ’ब्लैक’ भी अँग्रेजी में थी। मैं अपने मार्केट को ध्यान में रखकर फिल्म बनाता हूँ। हम सिनेमा को विश्व के दूरस्थ कोनों तक ले जाना चाहते हैं। आज भाषा किसी किस्म की बाधा नहीं है। हमारे देश में अँग्रेजी भी उतनी ही बोली जाती है, जितनी कि हिंदी। मैं रोजमर्रा में बोली जाने वाली बातचीत को फिल्म में दिखाऊँगा।
वर्ष 2008 आपके लिए अच्छा रहा। पेरिस में पहली बार किसी भारतीय निर्देशक को ओपेरा निर्देशित करने के लिए बुलाया गया? हाँ, यह मेरे लिए बेहतरीन समय रहा। ओपेरा निर्देशित करने में आनंद आया। मुझे बेहद सम्मान और अनुभव मिला। मैं बतौर निर्माता कुछ फिल्में बनाने जा रहा हूँ और 2009 में मुझे काफी मेहनत करना पड़ेगी।