दर्जन से अधिक कॉमेडी फिल्मों में ओमपुरी और परेश रावल साथ मिलकर दर्शकों को गुदगुदाने में कामयाब रहे हैं, आज आलम यह है कि ओमपुरी, परेश रावल का नाम देखते ही दर्शक यह धारणा बना लेते हैं कि यह कॉमेडी फिल्म होगी। पर एक बात यह जरूर कहनी होगी कि अभिनय के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित यह दोनों कलाकारों ने कॉमेडी फिल्मों तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है। इनकी अभिनय प्रतिभा का दायरा इतना विशाल है कि इसमें अभिनय का हर रंग समा जाता है। आज भी वे सही पटकथा मिलने पर किसी नये निर्देशक की फिल्म के लिए भी हां कहने से कतई नहीं हिचकिचाते, ऐसे ही नये निर्देशक हैं अमित राय कि जिनकी फिल्म ''रोड टू सगम'' में यह दोनों धाकड़ कलाकार साथ काम कर रहे हैं। यह कॉमेडी फिल्म नहीं है और एक मर्मस्पर्शी मगर अलग से विषय पर यह फिल्म बन रही है। इस फिल्म के सिलसिले में ओमपुरी से हुई बातचीत यहाँ पेश है-
‘रोड टू संगम’ यह अलग सा नाम है। अलग से नाम वाली इस फिल्म में आपकी भूमिका किस तरह की है? इस फिल्म के टायटल से ही यह बात तो साफ हो जाती है कि यह टिपिकल फिल्म नहीं है। इस फिल्म के लिए मैं इतना जरूर कहना चाहूँगा कि यह फिल्म आज के माहौल की जरूरत को पूरा करने के लिए पूर्ण रूप से सक्षम है। आज सांप्रदायिक नफरत की आग ने जो जहरीला माहौल बनाया है उसके खिलाफ इस फिल्म में संदेश दिया गया है। इसमें कौमी भाईचारे की बात कही गई है पर इसका अर्थ यह नहीं कि यह एक उपदेशात्मक फिल्म है, फिल्म में कहानी है, किरदार है, कटाक्ष है और साथ ही मनोरंजन भी है, इसमें एक बुजुर्ग नवाब की भूमिका निभा रहा हूँ, यह नवाब साहब एक मस्जिद की कमेटी के चेयरमैन भी हैं, ये जनाब नमाज नियमित रूप से पढ़ते हैं पर वे कठमुल्ले किस्म के नहीं हैं, हाँ, इनके दिल में इस बात का गुस्सा भी है कि इस देश में मुसलमानों के प्रति अन्याय बरता जा रहा है। इस वजह से वे सरकार से भी नाराज हैं, किन हालातों के चलते नवाब साहब के विचारों में कैसा बदलाव आता है यह इसमें बड़े ही खूबसूरत अंदाज में दर्शाया गया है।
यह फिल्म नए निर्देशक अमित राय द्वारा निर्देशित की जा रही है, साथ ही इसके निर्माता अमित छेड़ा भी फिल्म निर्माण में नये हैं तो नये निर्माता निर्देशक की फिल्म के लिये हाँ कहने की कोई खास वजह? माना कि दोनों नए हैं पर इस फिल्म को लेकर दोनों में जबर्दस्त उत्साह है। दोनों पर एक जूनुन सा सवार है। जब इस फिल्म के सिलसिले में अमित राय ने मुझसे संपर्क किया तो सबसे पहली बात उसमें मैंने यह देखी कि उसने इस फिल्म के लिए खूब होमवर्क किया है। अपनी इस फिल्म के लिए क्या-क्या चीजें जरूरी होगी इसका उसे पूरा अंदाज है। साथ ही मैंने पाया कि वह पूरी निष्ठा से यह फिल्म बनाएगा। उसके बर्ताव में जो ईमानदारी थी वह मुझे छू गई। साथ ही मुझे मेरा रोल भी खूब पसंद आया। अब तक मैंने जो फिल्में की हैं उससे यह फिल्म अलग है। और एक अलग तरह की फिल्म में काम करने का अपना अलग ही मजा होता है।
इस नए निर्माता-निर्देशक की फिल्म में शूटिंग करने का अनुभव कैसा रहा? अमित छेड़ा फिल्म निर्माण में भले ही नए हों पर वे यह फिल्म प्रोफेशनल तरीके से बना रहे हैं। पूरी तैयारियाँ करने के बाद ही उन्होंने इसकी शूटिंग शुरू की और इस वजह से शूटिंग में कहीं भी न तो कोई दिक्कत आई न ही रुकावट। अपने टाइटल को यथार्थ ठहराते हुए इस फिल्म की पूरी शूटिंग इलाहाबाद में की गई है, यह शहर दुनियाभर में ''संगम सिटी'' के नाम से मशहूर है और इस फिल्म की खास बात यह है कि इसमें इलाहाबाद शहर को भी एक कैरेक्टर के तौर पर पेश किया गया है। मेरे ख्याल से शायद यह पहली हिन्दी फिल्म है जो पूरी इलाहाबाद में शूट की गई है।''
तो ''संगम सिटी'' में शूटिंग करने का अनुभव कैसा रहा? वहाँ के लोग शांत हैं और शूटिंग के दौरान हमें पूरा सहयोग दिया। हमनें इलाहाबाद के हेविट रोड, चंद्रशेखर आजाद पार्क, रानीगंज, सिविल लाइंस, खुशरू बाग, केयेड्रॉल चर्च, त्रिवेण संगम आदि लोकेशंस पर इस फिल्म की शूटिंग की और पूरी शूटिंग इत्मिनान से की। यह जयशंकर प्रसाद, उपेंद्रनाथ अश्क, निराला आदि महान साहित्यकारों का शहर है। ऐसे साहित्यकारों की भूमि पर अपने कदम रख काम करने में बड़ा ही संतोष मिला।
रोड टू संगम'' को लेकर आपने किस तरह की उम्मीदें बांध रखी हैं? पहली बात तो यह कि आज मैं अपने कॅरियर के जिस मकाम पर हूँ वहाँ उसी फिल्म के लिये हां कहता हूँ जहाँ मुझे किसी फिल्म में कोई खास बात नजर आती है। मुझे पता है कि अपने चाहने वालों के प्रति मेरा क्या दायित्व है और इसीलिए अब मैं सोच समझकर ही फिल्म के लिए हाँ कहता हूँ। इस फिल्म में वाकई कुछ बात है और फिल्म में काम कर मैं बड़े ही विश्वास के साथ कह सकता हूँ कि यह फिल्म आपको ''तमस'' की याद दिला देगी। आज भी मैं जब नए लोगों से मिलता हूँ तो वे मेरे ''तमस'' का जिक्र अवश्य करते हैं। मेरे ख्याल से भविष्य में जब लोग मुझसे मिलेंगे तो ''रोड टू संगम'' का जिक्र भी जरूर करेंगे, क्योंकि यह एक खास फिल्म है और यह तो फिल्म इंडस्ट्री का नियम है कि खास फिल्में ही इतिहास रचने में कामयाब रहती हैं। मैं खुद इस फिल्म की रीलिज का बेचैनी से इंतजार करने लगा हूँ और मेरे ख्याल से यह फिल्म फरवरी अंत या मार्च में प्रदर्शित होगी। तब तक इंतजार करने के सिवा कोई चारा नहीं है।''