‘खोसला का घोसला’ जैसी फिल्म बनाकर चर्चित हो चुके निर्देशक दिबाकर बैनर्जी ‘ओए लकी, लकी ओए’ लेकर आ रहे हैं। इसमें उन्होंने चोर को अपनी फिल्म का प्रमुख पात्र बनाया है। पेश है दिबाकर से बातचीत :
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आपकी पिछली फिल्म ‘खोसला का घोसला’ दिल्ली के भू-माफियाओं के बारे में थी, जबकि ताजा फिल्म ‘ओए लकी..’ चोर की कहानी है। किस वजह से आप एक चोर पर फिल्म बनाने के लिए प्रेरित हुए? मेरा यकीन कानून तोड़ने में रहा है, लेकिन मैं ऐसा नहीं कर सकता हूँ, इसलिए फिल्मों के जरिए कर रहा हूँ। यदि हम एक चोर की निगाह से सोचें तो वह अपने आपको कभी गलत नहीं मानता। वह जो काम करता है उसे समाज अवैध मानता है।
एक बार फिर आपकी फिल्म में दिल्ली को प्रमुखता दी गई है। आपको यह शहर क्यों आकर्षित करता है? मैं इस शहर को नजदीक से जानता हूँ क्योंकि इसी शहर में मेरा जन्म हुआ है और यहीं पर मैं बड़ा हुआ हूँ। मैं अवैध धंधा करने वाली कई गैंग को जानता हूँ। जिस स्थान पर मैं बड़ा हुआ हूँ वहाँ पर लोग हफ्ता वसूलते थे। मैंने इन चीजों को गौर से देखा है, इसलिए मेरी फिल्मों में दिल्ली नजर आता है।
फिल्म की कहानी के बारे में कुछ बताना पसंद करेंगे? विषमता मुझे हमेशा आकर्षित करती है। फिल्म का किरदार लकी का चरित्र कुछ अलग ढंग का है। एक तरफ वह चोर है वहीं दूसरी ओर वह प्रसिद्ध भी होना चाहता है। उसके चरित्र की इसी विषमता ने मुझे फिल्म बनाने के लिए प्रेरित किया है और उसी की कहानी है।
फिल्म का नाम कुछ अजीब-सा नहीं लगता? आप ऐसा सोचते हैं। मुझे कुछ भी अजीब नजर नहीं आता। लकी मेरे किरदार का नाम है, इसलिए फिल्म के टाइटिल में लकी नाम जोड़ा गया है। ‘ओए लकी, लकी ओए’ ये एक दिल्ली का स्टाइल है, वहाँ इसी तरह लोगों को पुकारा जाता है। मैं चाहता था कि दिल्ली का फ्लेवर फिल्म के नाम में नजर आए।
क्या आपने अपनी जिंदगी के कुछ हिस्सों को भी फिल्म में दिखाया है? ’खोसला का घोसला’ में मेरी जिंदगी के कई दृश्य थे, लेकिन इस फिल्म में मैंने उन दृश्यों को रखा है, जिनके बारे में मैंने सुना है या फिर जिनका मैं गवाह रहा हूँ।
दिल्ली में आपने कहाँ-कहाँ शूटिंग की? हमने उन स्थानों पर शूटिंग की जो ज्यादा चर्चित नहीं हैं। बॉलीवुड की फिल्मों में शायद ही इन जगहों को दिखाया गया होगा। मैंने उन स्थानों पर शूटिंग की, जहाँ मैं बड़ा हुआ।
‘खोसला का घोसला’ की मार्केटिंग लाइन ‘यहाँ पेशाब करना मना है’ काफी चर्चित हुई थी। क्या ‘ओए लकी, लकी ओए’ के लिए भी आपने ऐसी लाइनें सोची हैं? वह लाइन फिल्म के प्रदर्शित होने के बाद ज्यादा चर्चित हुई थी। इस फिल्म के लिए भी एक-दो लाइनें बनाई गई हैं।
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अभय देओल को फिल्म का नायक चुनने की वजह? अभय को चोर के किरदार के रूप में चुनना कुछ लोगों को थोड़ा अजीब लग सकता है और इसी वजह से मैंने उन्हें चुना। अभय एक ऐसे चोर दिखते हैं, जिन्हें प्यार किया जा सके। वे बेहद कूल दिखाई देते हैं और नैसर्गिक कलाकार हैं। अभय की इन्हीं खूबियों को देखते हुए मैंने उन्हें इस रोल के लिए उन्हें चुना।
क्या आपने बचपन में चोरी की? मैंने अपने सबसे अच्छे दोस्त के कुछ सिक्के चुराए थे।
यदि आपको चोरी करने का मौका मिले तो क्या चुराना पसंद करेंगे? कुछ समय पहले मैं अपनी पत्नी के साथ ग्रीस गया था। वहाँ पर ‘एंटिक शॉप’ में मैंने एक बेहद खूबसूरत कुर्सी देखी थी। वह बहुत महँगी थी। मैं उसे ही चुराना पसंद करूँगा।