जॉम्बीज (जिंदा मुर्दों) पर हॉलीवुड में बहुत सी हॉरर फिल्में बन चुकी हैं। पॉप के शहंशाह माइकल जैक्सन के सबसे हिट एलबम 'थ्रिलर' की थीम भी इसी पर आधारित थी। 'डॉन ऑफ दी डेड' और '28 डेज लेटर' की सफलता के बाद हॉलीवुड ने एक बार फिर इसी विषय-वस्तु पर एक और फिल्म बनाई है।
कोलम्बिया पिक्चर्स की हॉरर-कॉमेडी की थीम पर बनी ‘जॉम्बीलैंड’ को निर्देशित किया है रुबेन फ्लॉइस्चर ने और इसके निर्माता हैं गेविन पोलोन।
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ओहियो का रहने वाला कोलम्बस (जेसन आइसनबर्ग) दुनिया भर में फैले जॉम्बीज के कहर से अपनी बहादुरी और काबिलियत से बचा हुआ है, उसका मानना है कि सबसे अच्छा जॉम्बी है मरा हुआ जॉम्बी। उसकी मुलाकात होती है तलाहसी (वूडी हार्लीसन) से, जो किसी से नहीं डरता। उसके पास बेहतरीन हथियारों का जखीरा है जिससे वह जॉम्बीज का शिकार करता है।
मुर्दों से भरे इलाके में इन दोनों को विचिटा (एमा स्टोन) और लिटिल रॉक (ऐबीगिल ब्रेस्लिन) नामक दो बहने मिलती हैं। विचिटा को देख तलाहसी उसका दीवाना हो जाता है।
ये सब मिल कर साउथ कैलिफोर्निया के एक ऐसे इलाके की और बढते हैं, जहाँ अभी तक जॉम्बीज नहीं पहुँचे हैं। यह इलाका पैसिफिक पैलैंड सेफ जोन माना जाता है। इनके सामने मुश्किल होती है खूँखार जॉम्बीज से भरे लंबे रास्ते को पार करना और इस लंबे सफर के लिए जरूरी सामान जुटाना। हर कदम पर खून के प्यासे जॉम्बीज से मुकाबला करते हुए ये चारों किस तरह अपनी मंजिल तक पहुँचते हैं यह इस फिल्म में बखूबी दिखाया गया है।
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फिल्म के कुछ दृश्य बहुत ही उम्दा तरीके से फिल्माए गए हैं। बार-बार फिल्मों में जॉम्बीज दिखाए जाने पर भी इस फिल्म में इन्हें देखना बोर नहीं लगता। जहाँ बेवरली हिल्स में जॉम्बीज से मुकाबले के दृश्यों में कॉमेडी का पुट दिया गया है वहीं अंतिम रीलों में अम्युसमेंट पार्क की लड़ाई देखकर सिहरन भी पैदा होती है।
कुल मिला कर कहा जा सकता है कि एक घिसी-पिटी स्टोरी होने के बावजूद अभिनेताओं के शानदार परफॉर्मेंस, स्पेशल इफेक्ट्स और मेकअप के सहारे जॉम्बीलैंड दर्शकों को 81 मिनिट तक बाँधे रखने में सफल हुई है।