बॉलीवुड से हॉलीवुड के स्टार्स इस हद तक प्रभावित हो चुके हैं कि भारतीय फिल्मों में काम कर रहे हैं। इन कलाकारों में ‘रेम्बो’ फेम सिल्वेस्टर स्टेलॉन के बाद अब गॉर्डन लियू का भी जुडा है, जो रोहन सिप्पी की अगली फिल्म ‘चाँदनी चौक टू चाइना’ में नकारात्मक भूमिका करते हुए दिखाई देंगे।
चाँदनी चौक टू चाइना में गॉर्डन ‘होजो’ नामक एक खूँखार स्मगलर की भूमिका निभा रहे हैं, जिसने एक गाँव पर पूरा कब्जा जमाकर रखा है। फिल्म का नायक अक्षय ‘होजो’ का सामना कर उस गाँव को उसके आतंक से छुड़वाता है।
गॉर्डन लियू ने हॉलीवुड में कई हिट फिल्में दी हैं। चीन के मार्शल आर्ट में माहिर गॉर्डन का नाम तब सुर्खियों मे आया था जब उन्होने वर्ष 2003 में प्रदर्शित एक्शन फिल्म ‘किल बिल : वाल्यूम 1’ में जोनी मो और वर्ष 2004 की ‘किल विल : वाल्यूम 2’ में पाई मेय की भूमिका निभाई थी।
फिल्म में पाई मेय अपने ऊपर हुए अत्याचारों से पीडि़त एक महिला (उमा थर्मन) को मार्शल आर्ट और तलवारबाज़ी के गुर सिखाता है और बाद में वही महिला एक-एक कर अपने दुश्मनों का सफाया करती है।
हॉलीवुड की अन्य एक फिल्म 36 चेम्बर ऑफ शाउलिन में गॉर्डन की भूमिका को उनके प्रशंसकों ने इस हद तक सराहा कि उन्हें ‘मास्टर ऑफ किलर’ का खिताब दे दिया ।
जैकी चेन और जेट ली के बाद अगर मार्शल आर्ट में जिस अभिनेता का नाम लिया जाता है तो वह गॉर्डन लियू है। उन्हें बचपन से ही मार्शल आर्ट का शौक था। वे माता-पिता से छुपकर स्कूल के बजाय मार्शल आर्ट सीखने चले जाते थे क्योंकि उनके माता-पिता का यह मानना था कि हमेशा बुरे लड़के ही मार्शल आर्ट सीखते हैं।
लियू ने 1970 में एक स्टंटमेन के पेशे से फिल्मों में प्रवेश किया। बाद में यह सितारा कुंग फू फिल्मों मे ऎसा चमका कि उसकी रोशनी से पूरी दुनिया चौकन्नी हो गई। कोई भी यह मानने के लिए तैयार नहीं था कि एक समय क्लर्क की नौकरी करने वाला यह चीनी शख्स फिल्मों में इतनी जल्दी सफलता के शिखर तक पहुँच जाएगा।
1974 में आई ‘5 सोलिन मास्टर’ से शुरू हुआ यह सफर इस साल 16 जनवरी 2009 को रिलीज होने वाली ‘चाँदनी चौक टू चाइना’ तक जारी है।
निर्माता रोहन सिप्पी और निर्देशक निखिल आडवाणी की इस फिल्म में लियू ने अभिनय के साथ-साथ एक्शन डायरेक्टर का काम भी किया है।