देव डी और गुलाल जैसी फिल्में बनाने वाले फिल्मकार अनुराग कश्यप बचपन में जंतुविज्ञानी बनना वाहते थे और चोरी छिपे फिल्में देखने की बजाए उनका ज्यादातर समय प्रयोगशाला में ही बीतता था।
अनुराग कश्यप ने भारत के 10 शीर्ष पब्लिक स्कूलों के पूर्व छात्र सम्मेलन में ये बातें कही। उन्होंने बताया कि स्कूल के दिनों में प्राणी विज्ञान उनका पसंदीदा विषय था और वे उसी में अपना करियर बनाना चाहते थे।
अब तक दिए साक्षात्कारों में उन्होंने अपने स्कूली जीवन के बारे में नकारात्मक बातें ही कही हैं। 2005 में तहलका में उन्होंने लिखा था ‘‘सिंधिया स्कूल मेरे लिए नर्क था। वहाँ मेरा सालों तक यौन शोषण होता रहा। मैं समझ नही पाता था कि ये मेरे साथ ही क्यों हो रहा है। मुझे चुन लिया जाता और फिर शौचालय ले जाया जाता। मार से बचने के लिए मैं यौन शोषण के लिए तैयार हो जाता।’’