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सोफी का सिद्धांत  Search similar articles
Sophie
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सोफी चौधरी के लिए उन भूमिकाओं का कोई मतलब नहीं है, जिनमें दम नहीं है। उन्होंने दर्जनों ऐसे प्रस्ताव इसी वजह से ठुकरा दिए।

एक तरह से सोफी ने फिल्मकारों को स्पष्ट कर दिया है कि वे उनके पास महत्वहीन भू‍मिकाएँ लेकर न आएँ। सोफी की निगाह सशक्त भूमिकाओं पर है। वे अपने मनमुताबिक रोल आगामी फिल्मों ‘फ्रीज़’, ‘अलीबाग’ और ‘डैडी कूल’ में निभा रही हैं।

‘डैडी कूल’ एक हास्य फिल्म है और सोफी को अवसर मिला है यह साबित करने का कि वे भी हास्य भूमिकाएँ निभा सकती हैं। ‘फ्रीज़’ एक थ्रिलर है और इस फिल्म में सोफी का किरदार रहस्यमय है। ‘अलीबाग’ में उनकी भूमिका भावनाओं से भरी है। सभी फिल्मों में उनके रोल एक-दूसरे से जुदा है।
फिल्म में होना और फिल्म में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाना दो अलग-अलग बातें हैं। सोफी दूसरी बात पर विश्वास करती हैं।
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