हिंदी फिल्म संगीत की दुनिया के प्रमुख संगीतकार अनु मलिक ने कहा है देश में पुराने सुरीले संगीत का दौर वापस लौट रहा है क्योंकि लोग आज के दौर के मशीनी संगीत से ऊब चुके हैं और पुराने संगीत की ओर उनका रूझान बढ़ रहा है।
बॉलीवुड के मशहूर संगीतकार अनु मलिक ने कहा, ‘‘आज के दौर का संगीत टिकाउ नहीं है। कोई गीत कुछ देर के लिए अच्छा लगता भी है तो ज्यादा देर तक याद नहीं रहता। पुराने संगीत में वह कशिश थी कि वह लोगों को आज तक याद है।’’
विदेशी धुनों की चोरी करने वालों को आड़े हाथों लेते हुए मलिक ने कहा, ‘‘आज के युग में नए संगीतकारों ने भारत के असली संगीत को समाप्त कर दिया है। वह क्या करते हैं उन्हें खुद ही नहीं पता। आज न वैसे गीतकार हैं और न ही संगीतकार। आज के गीतों में मुखड़े और अंतरे का कहीं पता ही नहीं चलता। यही वजह है कि लोग इस ‘शोर’ से उब कर पुराने संगीत की माँग कर रहे हैं।’’
वर्तमान दौर के फिल्मों के संगीत के बारे में पूछे जाने पर मलिक ने कहा, ‘‘आज का संगीत मशीनी है उसमें सुरों की आत्मा नहीं है। तकनीक के इस युग में लोग कमरे में बैठक कर लैपटॉप से संगीत बनाते हैं। विदेशी धुनें और खास तौर से पाकिस्तानी धुनें चुरा कर हमारे यहाँ धुनें बनाई जा रही हैं। ऐसे में चोरी का यह संगीत कब तक चलेगा और कितना लोकप्रिय होगा इसका अंदाजा आप स्वयं लगा सकते हैं।’’
संगीतकार के रूप में कई पुरस्कार पा चुके मलिक ने कहा कि कुल मिला कर यह कहा जा सकता है कि आज संगीत फैक्ट्री में बनने लगा है। लैपटॉप और इंटरनेट के युग में अब ‘‘संगीत डाउनलोड’’ होने लगा है। ‘‘संगीत एक साधना है। इसकी साधना की जाती है तब जा कर धुन बनती है। यह ऐसे ही नहीं बन जाती है।’’
मलिक ने कहा कि शंकर-जयकिशन, मदन मोहन, सरदार मलिक और एस डी बर्मन जैसे संगीतकारों ने जो धुनें बनाई थीं उनमें आज भी आत्मा और महक महसूस होती है। उन्होने कहा कि उसी पुराने संगीत का युग फिर से लौट रहा है।
मलिक के अनुसार यह बदलाव मैने भी महसूस किया है और मैं इसी आधार पर काम करने की कोशिश कर रहा हूँ ताकि लोगों को जो चाहिए उन्हें मैं दे सकूँ क्योंकि यह उनका ही प्यार है कि मैं यहाँ तक पहुँचा हूँ। इसलिए उनकी सेवा करना मेरा धर्म है।
‘कम्बख्त इश्क’ फिल्म के संगीत के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि लोगों को अब ऐसा संगीत पसंद नही है। इसे निर्माता-निर्देशकों ने भी महसूस किया है। मलिक ने हालाँकि यह भी कहा कि इस फिल्म में उन्होंने अच्छा संगीत देने की कोशिश की थी।
अनु इस समय शाहरुख खान अभिनीत फिल्म ‘‘हैप्पी न्यू ईयर’’ में संगीत दे रहे हैं। इसके अलावा भी उनके हाथ में कुछ फिल्में हैं। मलिक ने शाहरूख को बॉलीवुड का सर्वश्रेष्ठ अभिनेता बताते हुए संजय लीला भंसाली, करण जौहर, और सूरज बड़जात्या को सर्वश्रेष्ठ निर्माता-निर्देशक बताया। उन्होंने कहा कि आमिर खान के साथ काम करना भी उन्हें बहुत अच्छा लगता है।
मनमोहन देसाई तथा एफ सी मेहरा जैसे लोगों के साथ काम करने वाले अनु मलिक के नाम से मशहूर अनवर मलिक को पहले अच्छा संगीतकार नहीं माना जाता था। शुरुआती दौर में उन्होंने ‘एक जान हैं हम’, ‘सोहनी महिवाल’ तथा ‘गंगा जमुना सरस्वती’ जैसी फिल्मों में अपने हाथ आजमाए, लेकिन उन्हें वो सफलता नहीं मिली जिसकी उन्हें तलाश थी।
मलिक ने वर्ष 1993 में ‘फिर तेरी कहानी याद आई’, ‘जानम’, ‘सर’ तथा ‘बाजीगर’ जैसी सुपरहिट फिल्में दीं। ‘बाजीगर’ के लिए उन्हें फिल्म फेयर अवार्ड भी मिला। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा और सफलता ने उनके कदम चूमे।
इसके बाद दौर आया ‘बॉर्डर’, ‘रिफ्यूजी’ ‘एलओसी कारगिल’ ‘अक्स’, ‘फिजा’ और ‘मै हूँ ना’ का। इन फिल्मों ने उन्हें बालीवुड में एक अलग पहचान दिलाई।