बॉक्स ऑफिस पर फिल्मों का धराशायी होना जारी है और इसका सारा दोष जाता है फिल्मों की गुणवत्ता को। इन फिल्मों की कहानी और पटकथा बेहद कमजोर है और दर्शकों को बाँधकर रखने की क्षमता इनमें नहीं है।
20 जून को एक डब सहित पाँच फिल्में प्रदर्शित हुईं, लेकिन अधिकांश फिल्मों ने निराश किया। इन फिल्मों की शुरुआत शर्मनाक रही। ईश्वर निवास की ‘दे ताली’ में ताली बजाने लायक दृश्य गिने-चुने थे। फिल्म के प्रोमो बड़े शानदार थे, लेकिन फिल्म नहीं।
‘खुशबू’ और ‘हाल-ए-दिल’ नए कलाकारों को लेकर बनाई गई। ये फिल्में हर लिहाज से लचर है। जो भी दर्शक इनको देखने पहुँचे उनका हाल और अनुभव बेहद बुरा रहा। पता नहीं क्या सोचकर इन फिल्मों के निर्माता ने इतना पैसा खर्च किया।
युक्ता मुखी अभिनीत ‘मेमसाब’ ने वर्षों बाद सिनेमाघरों का मुँह देखा। यह फिल्म कुछ सर्किटों में प्रदर्शित हुई है और बिना प्रचार-प्रसार के इस फिल्म को प्रदर्शित कर दिया गया। दर्शकों को पता भी नहीं चला कि इस नाम की कोई फिल्म उनके नजदीकी सिनेमाघर में लगी है। इनके फिल्मों के मुकाबले ‘’महाबली-हल्क’ (डब) की शुरुआत अच्छी रही।
13 जून को प्रदर्शित फिल्म ‘मेरे बाप पहले आप’ कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई। देश के सवा दो सौ सिनेमाघरों के आँकड़ों के मुताबिक फिल्म ने लगभग 8 करोड़ 35 लाख का व्यवसाय किया।
इसी के साथ प्रदर्शित हुई ‘समर 2007’ बुरी तरह पिटी। कई शहरों में तो यह एक सप्ताह भी पूरा नहीं कर पाई। 80 सिनेमाघरों में यह फिल्म लगभग 22 लाख जुटा पाई। सिकंदर खेर की दोनों फिल्में असफल रहीं।
‘सरकार राज’ सिर्फ महाराष्ट्र में अच्छा व्यवसाय कर रही है। कई सर्किट के वितरकों को इस फिल्म से घाटा उठाना पड़ेगा। रामगोपाल वर्मा को यह प्रचारित करना पड़ रहा है कि उनकी फिल्म हिट है।
सप्ताह की टॉप पाँच फिल्में (13 से 19 जून) 1) मेरे बाप पहले आप (पहला सप्ताह) 2) सरकार राज (दूसरा सप्ताह) 3) आमिर (दूसरा सप्ताह) 4) जन्नत (पाँचवाँ सप्ताह) 5) समर 2007 (पहला सप्ताह)
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