किसी भी फिल्म से आमिर खान का नाम जुड़ा हो तो उम्मीद बढ़ना स्वाभाविक है। अपने भाँजे इमरान खान को लेकर आमिर ने बतौर निर्माता ‘जाने तू...या जाने ना’ नामक फिल्म बनाई है, जो 4 जुलाई को प्रदर्शित होने जा रही है। इस फिल्म की प्रचार-पुस्तिका में आमिर ने इस फिल्म के बारे में अपने विचार लिखे हैं, जो इस प्रकार है :
‘तारे जमीं पर’ फिल्म का निर्देशन का भार लेने के बाद मेरी जिंदगी कई मायनों में बदल गई। इसका तात्कालिक प्रभाव ‘जाने तू... या जाने ना’ पर हुआ क्योंकि बतौर निर्माता मैं इस फिल्म के लिए उपलब्ध नहीं था।
यह फिल्म मेरे लिए कई कारणों से खास थी। इमरान के अलावा यह आमिर खान प्रोडक्शन की पहली ऐसी फिल्म है, जिसमें मैं अभिनय नहीं कर रहा हूँ, इसके बावजूद यह फिल्म मेरे लिए उतनी ही खास है जिनमें मैंने अभिनय किया है।
जितना मैं अभिनय के जरिए जुड़कर किसी फिल्म में रूचि लेता हूँ उतना ही मैं निर्माता के रूप में भी फिल्म में रूचि लेता हूँ। मैं हर उस चीज पर खास ध्यान देता हूँ जिससे मेरा नाम जुड़ा है।
जब मैंने ‘तारे जमीं पर’ का भार संभाला तो मुझे ‘जाने तू... या जाने ना’ को तब तक के लिए स्थगित करना पड़ा जब तक कि ममुझे ऐसा व्यक्ति नहीं मिल जाता जो इसका भार संभाल सके। जिस पर मैं पूरा विश्वास कर सकूँ। यह काम आसान नहीं था।
फिल्म मेकिंग में मैं अपने से ज्यादा सिर्फ एक ही व्यक्ति पर विश्वास कर सकता हूँ और वे हैं मंसूर खान। उनको वापस बुलाना आसान नहीं था। मैंने बहुत पुराना फार्मूला अपनाया ‘इमोशनल ब्लैकमेकिंग’ का।
मंसूर ने फिल्मों से अनिश्चिकालीन ब्रेक ले लिया था। उन्हें मनाना मुश्किल था, लेकिन मैंने उनका पीछा आसानी से नहीं छोड़ा। आखिरकार मंसूर को मानना ही पड़ा। उन्होंने कहा कि वे सिर्फ शूटिंग स्टेज तक ही फिल्म से जुड़ेंगे। मैंने उन्हें हाँ कहते हुए कहा कि बाकी मैं सब संभाल लूँगा।
मंसूर हमें भगवान द्वारा भेजे गए व्यक्ति मालूम पड़े। मैं प्रार्थना करता हूँ कि इस फिल्म से कुछ महीने जुड़ने की वजह से उन्हें फिल्म बनाने का रोग फिर से लग जाए। सिनेमा एक संक्रामक रोग है। यदि वे फिर से फिल्मों में आते हैं तो मुझे शुक्रिया कहना मत भूलिएगा।
मैं अब्बास और उनकी पूरी युवा टीम का शुक्रिया अदा करता हूँ कि उन्होंने आमिर खान प्रोडक्शन्स के लिए ऐसी फिल्म बनाई है, जिसके साथ मैं बेहिचक अपना नाम जोड़ सकता हूँ।
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