अभिनेता और नेता गोविंदा के तरह-तरह के किस्से सुनाई दे रहे हैं। गोविंदा असुरक्षा से ग्रस्त हैं। उन्हें हर समय यह भय सताता रहता है कि कोई उन्हें जान से मार देगा। उन्हें डर लगता है कि कोई उनका पीछा कर रहा है। खाना खाने के पहले चखता कोई और है, तसल्ली होने के बाद ही गोविंदा उसे ग्रहण करते हैं।
गोविंदा की सफलता के किस्से कम दिलचस्प नहीं हैं। गरीबी में रहते हुए उन्होंने अपनी माँ से प्रेरणा पाकर जमकर संघर्ष किया और सफलता पाई। ढेर सारी फिल्में साइन करने की वजह से उन्होंने निर्माताओं का गुस्सा भी झेला।
सफल होने के बाद उन्होंने अपने रिश्तेदारों का खूब भला किया। उनके भाई ने कुछ असफल फिल्म बनाकर गोविंदा का बेड़ा गर्क किया। मल्टीप्लेक्स आने के बाद फार्मूला फिल्में अंतिम साँसें गिनने लगीं और गोविंदा का नई फिल्मों में कोई स्थान नहीं बन पाया।
सफलता के शिखर पर बैठा सितारा हमेशा प्रशंसकों की भीड़ से घिरा रहता है। चमकते हुए फ्लैश की आवाज और तालियों की गूँज हमेशा उसे सुनाई देती है। उसके हर काम के लिए सेवकों की भीड़ उसके इर्दगिर्द जमा रहती है।
धीरे-धीरे वह इन चीजों का आदी हो जाता है। अकेलेपन से उसे डर लगने लगता है। जब गोविंदा का अकेलापन बढ़ने लगा तो वे नेता बन गए और एक बार फिर उनके इर्दगिर्द भीड़ जमा हो गई।
राजनीति गोविंदा को रास नहीं आई क्योंकि उसमें टुच्चापन था। सलमान खान के सहारे गोविंदा ने एक बार फिर सफलता की सीढ़ी चढ़ी, लेकिन उन्हें असफलता के साँप से डर लगने लगा। वे अब रस्सी को भी साँप समझने लगे हैं।
ताजा किस्सा यह है कि गोविंदा को एक ज्योतिषी ने बता दिया कि वे मुर्गी के साथ अभिनय करें तो यह उनके लिए लाभप्रद होगा। फिल्म के दृश्य में मुर्गी कहीं फिट नहीं होती थी, लेकिन गोविंदा की जिद के आगे निर्माता को झुकना पड़ा।
गोविंदा कई ऊलजलूल जिद करने लगे हैं और यदि ऐसा चलता रहा तो निर्माता उनसे मुँह मोड़ लेंगे। गोविंदा को बड़े दिनों बाद सफलता मिली है और उसे गँवाने का उन्हें डर सता रहा है। इस असुरक्षा के भय से वे अजीबोगरीब हरकत कर रहे हैं।
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