शाहरुख को नंबर दो कहकर आमिर ने माहौल गरमा दिया है। यह बात शाहरुख कहते तो इसे गंभीरता से नहीं लिया जाता, क्योंकि वे ‘आई एम द बेस्ट’ वाला बयान दिन-रात बड़बड़ाते रहते हैं। सुपरस्टार या बादशाह कहलाने की उनमें बहुत ज्यादा चाहत है। अपने करियर की शुरुआत में उन्होंने इस तरह के कई बयान दिए थे।
आमिर एक संजीदा इनसान हैं। वे कभी भी नंबरों के फेर में न पड़कर चुपचाप अपना काम करने में विश्वास करते हैं। वे बे-फिजूल की इस चूहा दौड़ में कभी भी शामिल नहीं हुए। अपने इस बयान से पता नहीं वे क्या साबित करना चाहते हैं।
उनका यह बयान यह दर्शाता है कि उनके मन के अंदर कहीं न कहीं नंबर वन बनने की चाहत है। शाहरुख की लोकप्रियता से उनके अंदर जलन की भावना पैदा हुई है और वर्षों से वे इस बात को दबाते आए हैं। उन्होंने अपने दिल की बात को जुबाँ पर आने नहीं दिया, लेकिन जब उनसे रहा नहीं गया तो दिल का गुबार सामने आ ही गया।
इस मामले में शाहरुख ने कूटनीति से काम लिया। एक अच्छे कूटनीतिज्ञ की तरह उन्होंने अपनी पत्नी की आड़ ले ली। उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी ने आमिर के खिलाफ एक भी शब्द बोलने से मना किया है, क्योंकि वे आमिर की बहुत बड़ी प्रशंसक हैं। यदि वे आमिर के खिलाफ कुछ भी बोलेंगे तो गौरी उनकी पिटाई कर देगी।
नंबर वन का पैमाना क्या है? लोकप्रियता या उम्दा अभिनय? या फिर दोनों? लोकप्रियता की बात की जाए तो शाहरुख और आमिर भले ही भारत में बराबरी पर हों, लेकिन विदेश में शाहरुख अपने प्रतिद्वंद्वियों से मीलों आगे हैं। अभिनय की बात की जाए तो शाहरुख के ऊपर आमिर को रखने वाले ज्यादा मिल जाएँगे। दोनों के बीच ज्यादा फासला नहीं है। वक्त के साथ-साथ यह फासला कम-ज्यादा होता रहता है।
दोनों खान के बीच अहं की भावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। दोनों को कई निर्देशकों ने साथ में लाने की कोशिश की, लेकिन अब तक वे किसी भी फिल्म में साथ काम नहीं कर पाए। दोनों को एक-दूसरे से डर लगता है कि कहीं सामने वाला भारी नहीं पड़ जाए। इस भावना से सलमान खान मुक्त हैं और उन्होंने तकरीबन बॉलीवुड के सारे नायकों के साथ काम किया है।
इन दोनों अभिनेताओं को बजाय निरर्थक विवाद में अपनी ऊर्जा व्यय करने के सार्थक काम करना चाहिए।
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