‘जोधा अकबर’ से बॉलीवुड वालों को बहुत उम्मीदें हैं, लेकिन 15 फरवरी को प्रदर्शित इस फिल्म की शुरुआत अपेक्षाकृत नहीं हुई।
सोचा यह गया था कि पहले दिन दर्शक इस फिल्म को देखने को टूट पड़ेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कहीं इस फिल्म की शुरुआत ठीक थी, तो कहीं खराब। फिल्म की लंबाई और इसकी कहानी का इतिहास से जुड़ा होना इसके कारण हो सकते हैं। आजकल लोग ज्यादा लंबी फिल्म देखना पसंद नहीं करते और उन्हें हल्की-फुल्की फिल्में देखना पसंद है।
बड़े शहरों में शुरुआती दिन इसके कलेक्शन 60 से 80 प्रतिशत तक थे तो छोटे शहरों में 30 से 40 प्रतिशत। शनिवार और रविवार के दिन फिल्म का व्यवसाय पहले दिन के मुकाबले बेहतर रहा।
पहले दिन यह फिल्म मल्टीप्लेक्स मालिकों और फिल्म निर्माता के बीच लाभ को लेकर सहमति न होने के कारण कई मल्टीप्लेक्सेस में प्रदर्शित नहीं हुई। बाद में सहमति होने पर कुछ सिनेमाघरों में यह फिल्म शनिवार और रविवार को प्रदर्शित हुई। इस वजह से निर्माता को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा।
भारत के कई क्षेत्रों में इसका विरोध हो रहा है और कुछ स्थानों पर यह फिल्म प्रदर्शित नहीं हो पाई। इससे भी फिल्म से जुड़े लोगों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
8 फरवरी को प्रदर्शित ‘मिथ्या’ का व्यवसाय कुछ बड़े शहरों को छोड़ हर जगह निराशाजनक रहा। 116 सिनेमाघरों के उपलब्ध आँकड़ों के मुताबिक इस फिल्म ने लगभग दो करोड़ रुपयों का व्यवसाय किया।
कुणाल खेमू के ‘सुपरस्टार’ बनने के सपने चकनाचूर हो गए हैं। उनकी फिल्म सुपरफ्लॉप साबित हुई। 169 सिनेमाघरों के उपलब्ध आँकड़ों के मुताबिक इस फिल्म ने लगभग सवा करोड़ रुपयों का व्यवसाय किया। दूसरे सप्ताह के बाद शायद ही यह फिल्म सिनेमाघरों में नजर आए।
सप्ताह की टॉप फाइव फिल्म्स (8 से 14 फरवरी 2008) 1) मिथ्या (पहला सप्ताह) 2) संडे (तीसरा सप्ताह) 3) सुपरस्टार (पहला सप्ताह) 4) तारे जमीं पर (आठवाँ सप्ताह) 5) वेलकम (आठवाँ सप्ताह)
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