देश के कई क्षेत्रों में शीत लहर जारी है और फिल्म व्यवसाय भी इस समय एकदम ठंडा है। नई फिल्में दर्शकों को आकर्षित नहीं कर पा रही है। कई क्षेत्रों में शीत लहर का भी असर हुआ है और रात वाले शो में दर्शकों की संख्या एकदम घट गई है।
आठ फरवरी को प्रदर्शित ‘सुपरस्टार’ और ‘मिथ्या’ की शुरुआत बेहद कमजोर हुई। कुणाल खेमू एक छोटे-से स्टार भी नहीं है, उन्हें सुपरस्टार के रूप में भला कोई कैसे पसंद करता। फिल्म की रिपोर्ट भी अच्छी नहीं है।
‘मिथ्या’ की फिल्म समीक्षकों ने सराहना जरूर की, लेकिन दर्शक नदारद रहे। फिल्म समझना तो दूर कई लोगों को तो फिल्म के नाम का अर्थ ही समझ में नहीं आया।
एक फरवरी को प्रदर्शित ‘रामा रामा क्या है ड्रामा’ फ्लॉप साबित हुई। राजपाल यादव को इस असफलता से यह सबक लेना चाहिए कि नायक के रूप में दर्शक उन्हें पसंद नहीं करते हैं। इस फिल्म ने देश भर में उपलब्ध आँकडों के अनुसार 88 लाख का व्यवसाय किया।
‘संडे’, ‘जॉन रैम्बो’ और ‘हल्ला बोल’ देखने में दर्शकों की रूचि नहीं है। ‘तारे जमीं पर’ को कई जगह कर मुक्त कर दिया गया है और दर्शक नई फिल्म देखने की बजाय इस फिल्म को देखने में रूचि ले रहे हैं।
सप्ताह की टॉप फाइव फिल्म्स (1 से 7 फरवरी 2008) 1) संडे (दूसरा सप्ताह) 2) तारे जमीं पर (सातवाँ सप्ताह) 3) रामा रामा क्या है ड्रामा (पहला सप्ताह) 4) जॉन रैम्बो (डब) (दूसरा सप्ताह) 5) वेलकम (सातवाँ सप्ताह)
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