‘साँवरिया’ नामक सदमे को संजय लीला भंसाली ताउम्र याद रखेंगे। वे अपनी इस फिल्म को असफल नहीं मानते और जिस तरह से उन्होंने मीडिया को फिल्म की गलत रिपोर्ट के लिए जिम्मेदार ठहराया उससे भंसाली की गरिमा कम हुई है।
मीडिया ने भंसाली की हमेशा तारीफ की और पलकों पर बैठाया। शायद उन्हें आलोचना सुनने की आदत नहीं थी। जब फिल्म को खराब बताया गया तो भंसाली को मीडिया जगत काँटे की तरह चुभने लगा।
एक फिल्मकार के रूप में सभी को भंसाली पर अभी भी भरोसा है। ‘साँवरिया’ के निर्माता भी भंसाली के पक्ष में हैं। इस बात की पूरी संभावना है कि भंसाली अपनी अगली फिल्म में कोई कसर नहीं बाकी रखेंगे।
जिस तरह घायल शेर खतरनाक हो जाता है उसी तरह भंसाली भी ‘साँवरिया’ की असफलता से आहत है और एक अच्छी फिल्म की उम्मीद उनसे की जा सकती है। राजकपूर और गुरुदत्त जैसे फिल्मकारों ने भी अपनी असफल फिल्मों के बाद सफलतापूर्वक अपनी वापसी की थी। भंसाली ने इस असफलता को दिल पर नहीं लेकर इसे एक चुनौती के रूप में लिया होगा तो हो सकता है कि अगली फिल्म उनकी अब तक की श्रेष्ठ फिल्म हो।
इस समय वे विभिन्न पटकथाओं पर गौर कर रहे हैं। प्रेमकथा और भावना में डूबी हुई फिल्में भंसाली की हमेशा खासियत रही है। उनकी अगली फिल्म भी इसी तर्ज पर होगी। खबर है कि भंसाली के सामने पाँच पटकथाएँ हैं जिनमें से एक वे चुनेंगे। ‘बेकरार’, बाजीराव मस्तान’, ‘हमारी जान हो तुम’, ‘गुजारिश’ और ‘हमेशा तुमको चाहा’ नामक पटकथाओं में से किसी एक पर वे फिल्म बनाने की सोच रहे हैं।
‘बाजीराव मस्तान’ पर फिल्म बनाने का विचार भंसाली के मन में वर्षों से हैं। ‘हम दिल दे चुके सनम’ और ‘ब्लैक’ बनाने के बाद वे इस पर फिल्म बनाने के काफी करीब पहुँच गए थे। पटकथा अथवा कहानी के चयन के मामले में अब भंसाली विशेष सतर्क होंगे और व्यावसायिक पहलू का भी ध्यान रखेंगे।
भंसाली अपनी अगली फिल्म में नए कलाकारों को लेने की सोच रहे हैं। यह इस बात का सूचक है कि उन्होंने आत्मविश्वास नहीं खोया है और बिना सितारों के भी वे फिल्म बनाने का दम रखते हैं। तो इंतजार कीजिए भंसाली की नई फिल्म की घोषणा का।
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