फिल्मों का आकर्षण ही कुछ ऐसा है कि लोग अपने अच्छे भले करियर को ठुकराकर इस दुनिया में आ जाते हैं। ‘सुपरस्टार’ के निर्देशक रोहित जुगराज भी उन लोगों में शामिल हैं जिन्हें फिल्मों का आकर्षण फिल्म उद्योग की तरफ खींच लाया।
रोहित की कहानी फिल्मी लगती है। रोहित के माता-पिता और बहन डॉक्टर हैं इसलिए रोहित भी इसी क्षेत्र में आगे बढ़े। उन्होंने मौलाना मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई कर डिग्री हासिल की।
पढ़ाई के दौरान ही रोहित को अहसास हो गया था कि वे जो करना चाहते हैं, वो यह नहीं है। उसी दरमियान बीबीसी चैनल 4 की टीम कार्बोरेट पार्क में शूटिंग करने आई। रोहित सहायक के रूप में उस टीम के साथ जुड़ गए।
उन्हें यह काम पसंद आया और लगा कि यही वो काम है, जो वे करना चाहते हैं। इस मीडियम में हर पल कुछ नया किया जा सकता है। हर बार नया रोमांच है। इसके बाद उन्होंने अमेरिका जाकर फिल्म मेकिंग की डिग्री हासिल की। कुछ लघु फिल्में भी बनाईं।
अमेरिका से वापस आने के बाद वे संजय लीला भंसाली के सहायक बन गए। भंसाली उस समय ‘देवदास’ बना रहे थे। भंसाली के काम करने का तरीका रोहित को पसंद नहीं आया। सात दिन बाद ही उन्होंने भंसाली से इजाजत ली और रामगोपाल वर्मा के ‘भूत’ फिल्म में सहायक निर्देशक बन गए।
रोहित से प्रभावित रामू ने उन्हें ‘जेम्स’ का निर्देशन सौंपा। फिल्म बुरी तरह असफल रही। इस फिल्म की असफलता की पहली जिम्मेदारी रोहित अपने सिर पर लेते हैं, लेकिन साथ में वे यह भी कहते हैं कि फिल्म निर्माण एक टीम के द्वारा होता है। उनका कहना है कि ‘जेम्स’ बनने के दौरान जरूरत से ज्यादा दखलअंदाजी हुई और इसका असर फिल्म पर हुआ।
‘जेम्स’ की असफलता को भुलाकर रोहित ने कुणाल खेमू को लेकर ‘सुपरस्टार’ बनाई, जो प्रदर्शित होने वाली है। कुणाल जैसे जीरो मार्केट वैल्यू कलाकार को लेने की वजह बताते हुए रोहित कहते हैं ‘मेरी फिल्म ऐसे युवक की कहानी है जो बॉलीवुड में सुपरस्टार बनने का ख्वाब देख रहा है। इसलिए मुझे ऐसे कलाकार की तलाश थी, जिसकी इमेज एक संघर्षरत कलाकार की हो। कुणाल इस भूमिका में बिलकुल फिट बैठते हैं। वे बहुत प्रतिभाशाली कलाकार हैं। इस फिल्म में उनका डबल रोल है। दोहरी भूमिका निभाना आसान नहीं है, परंतु कुणाल ने कुशलतापूर्वक अपने इस काम को अंजाम दिया।‘
‘सुपरस्टार’ में उन्होंने इंसान के सपनों की बात की है। इस फिल्म के जरिये युवा वर्ग को यह संदेश देने की कोशिश की है कि सपनों को पूरा करने के लिए वे इस हद से नहीं गुजर जाएँ कि सब कुछ गलत हो जाए। रोहित को विश्वास है कि दर्शकों को फिल्म पसंद आएगी। शायद वे भी इस फिल्म के बाद स्टार निर्देशक कहलाना पसंद करें।
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