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विश्व का पहला जनजातीय फिल्म समारोह
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पूरे विश्व में फिल्म समारोह तो कई होते रहते हैं, लेकिन जनजातीय फिल्म समारोह शायद ही कभी हुआ हो। शायद इसीलिए वन्या संस्थान (भोपाल) और आयआयएमसी (मुंबई) ने इंदौर में हुए तीन दिवसीय फिल्म समारोह को विश्व में पहला जनजातीय समारोह कहा।

इस समारोह का उद्‍घाटन करने बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा आए थे। शत्रु ने इस अवसर पर कहा कि हमारी संस्कृति, कला और परम्परा को इन्हीं लोगों ने संजो कर रखा है। इसलिए यह पहल सराहनीय है। इस अवसर पर रणधीर कपूर भी मौजूद थे।

फिल्म समारोह में 40 देशों की 69 फिल्में दिखाई गईं। यह फिल्में दर्शकों ने नि:शुल्क देखी। फिल्म समारोह के दरमियान पटकथा लेखन कार्यशाला का भी आयोजन किया गया। पटकथा लेखक राजेश दुबे ने पटकथा लेखन की बारीकियाँ समझाईं।

गीतकार इब्राहिम अश्क ने गीत लेखन पर प्रकाश डाला। उनके अनुसार गीत शब्द न होकर विचार है और उसे विचार की तरह शामिल करने से वह महत्वपूर्ण गीत बन जाता है।

निर्णायक मंडल में रमेश तलवार, स्वप्न मलिक, केएस शशिधरन, रीटा भादुड़ी, श्रीकांत जोशी, मेहरुन्निसा परवेज, नितिन मवानी, डॉ. पी श्रीनिवास, राजशेखर व्यास और श्रीराम ताम्रकर शामिल थे। इनके द्वारा पुरस्कृत फिल्मों की बनाई गई सूची इस प्रकार है :

सर्वोत्तम फिल्म (अंतरराष्ट्रीय वर्ग) : थिन आइस (स्वीडन)
निर्देशक : हैकन बरथास

सर्वोत्तम फिल्म (राष्ट्रीय वर्ग) : इतिकेला पांडुगा (भारत)
निर्देशक : विजया प्रताप

सर्वोत्तम फिल्म (जनजातीय वर्ग) : स्वानी (जार्जिया)
निर्देशक : जोसेब सोसो

सर्वोत्तम फिल्म (मध्यप्रदेश के फिल्मकार) : ओह, लौह गुंडी राजा हो!
निर्देशक : रवि विलियम्स

सर्वोत्तम फिल्म (विद्यार्थी वर्ग) : प्लीज डोंट डिस्टर्ब अस (भारत)
निर्देशक : एम. यशवंत रेड्डी

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