’ओम शांति ओम’ के प्रदर्शित होने के कुछ दिनों बाद ही मुश्ताक शेख द्वारा लिखित किताब ‘दि मेकिंग ऑफ ओम शांति ओम’ बाजार में आ गई है। शायद फिल्म से जुड़े लोगों को फिल्म के सफल होने का अहसास पहले से ही था और किताब की सारी तैयारियाँ उन्होंने कर रखी थीं। हाल ही में इस किताब का विमोचन हुआ है। मुश्ताक ने ही ‘ओम शांति ओम’ की पटकथा भी लिखी है और इस फिल्म को उन्होंने बनते देखा है। किताब को आठ अध्यायों में बाँटा गया है।
अध्याय एक : इसमें बताया गया है कि लंदन में किस तरह फरहा खान के दिमाग में ‘ओम शांति ओम’ की कहानी आई। जब शाहरुख ने कहानी को ओके कर दिया तो फरहा ने मुश्ताक को स्क्रीन-प्ले लिखने को कहा।
पटकथा तैयार होने के बाद मुख्य कलाकारों, जूनियर कलाकारों, तकनीशियनों और सहायक निर्देशकों का चुनाव किया गया। चूँकि फिल्म के पहले भाग में 70 का दशक दिखाया गया है, इसलिए उस दौर के बारे में अध्ययन किया गया। उस दौर में स्टुडियो कैसे होते थे? किस तरह की बातें होती थी? किस तरह की फिल्में बनती थी? क्या फैशन था? इसके आधार पर सेट तैयार किए गए।
अध्याय दो : ‘रिफलेक्टेड ग्लोरी’ नामक यह अध्याय जूनियर कलाकारों को समर्पित है। वर्षों से बॉलीवुड की चकाचौंध भरी दुनिया लोगों को आकर्षित करती रही है। वे यहाँ आकर नाम और दाम दोनों कमाना चाहते हैं। उन्हें पता है कि यह राह बेहद कठिन है। फिर भी वे उन लोगों का उदाहरण सामने रखकर आते हैं जो अजनबियों की तरह यहाँ आएँ और बॉलीवुड के बादशाह बने। जैसे शाहरुख खान। जब उनके सपने पूरे नहीं होते तो वे जूनियर कलाकार के रूप में तब्दील होकर भी खुश हो जाते हैं। कम से कम इस बहाने वे परदे पर तो दिखाई देते हैं।
अध्याय तीन : इस अध्याय को ‘बोर्न अगेन’ का नाम दिया गया है। फिल्म पुनर्जन्म पर आधारित है, इसलिए इसमें पुनर्जन्म पर बात की गई है।
अध्याय चार : ‘दैट सेंवटीज़ शो’ में भी 70 के दशक की चर्चा है। उस दौर को फिर से दिखाने के लिए यूनिट के सदस्यों और तकनीशियनों ने किस कदर मेहनत की। हेअर स्टाइल से लेकर उस दौर के कैमरे तक जुटाए गए। 70 के दशक का स्टुडियो उसी तरह काम भी करें, इसका भी ध्यान रखा गया।
अध्याय पाँच : इस अध्याय में फिल्म निर्माण के दौरान हुई बातें, चर्चाएँ शामिल हैं। गर्भवती फरहा की समस्याओं के साथ दीपिका के नर्वस होने का भी किस्सा है। ‘अंडर द आर्कलाइट’ नामक इस अध्याय में शूटिंग से जुड़े पहलूओं को बताया गया है।
अध्याय छ: : ‘ओम शांति ओम’ की सफलता में गानों का विशेष योगदान है। ‘फुटलुज़’ में बताया गया है कि किस तरह संगीतकार विशाल-शेखर और फरहा ने मिलकर संगीत तैयार किया। हर गाने के पीछे क्या विचार है, उसे किस तरह फिल्माया गया, इस बात का उल्लेख है।
अध्याय सात : इकतीस सुपरस्टार एक ही गाने में किसी अजूबे से कम नहीं है। ‘स्टार स्ट्रक सांग’ इसी गीत को आधार बनाकर लिखा गया है। इसमें गीत के फिल्मांकन के हर क्षण की व्याख्या की गई है। हर कलाकार के दृश्य और उसकी छोटी-छोटी बातों का समावेश किया गया है।
अध्याय आठ : अंतिम अध्याय में फरहा के विचार हैं। फरहा ने अपने कलाकारों, तकनीशियनों के बारे में अपने विचार व्यक्त किए हैं। उसने अपने गर्भवती होने और बच्चों के नाम के बारे में भी चर्चा की है।
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