क्या रोना तकदीर पे?
- एमके सांघी
प्रश्न : दद्दू, क्या कभी आपको अपनी तकदीर पर अफसोस होता है? उत्तर : कभी भी नहीं। क्योंकि इंसान की तकदीर उसकी हाथों की लकीरों में लिखी होती है और हाथों की ये लकीरें उसकी मां की दी हुई होती हैं। मां की दी हुई हर चीज से सिर्फ प्यार ही किया जाना चाहिए। अफसोस तो किसी भी सूरत में नहीं।