दीपों के पर्व दिवाली पर प्रदर्शित फिल्मों की सफलता लगभग सुनिश्चित रहती है, लेकिन हाल के वर्षों में बड़े परदे पर इस त्योहार को कम ही स्थान मिला है।
अन्य त्योहारों की तुलना में होली, गणेश उत्सव, दिवाली, दही हांडी को हिंदी फिल्मों में बहुत बड़ा तो नहीं लेकिन गानों या किन्हीं खास दृश्यों में स्थान मिलता रहता है, लेकिन कुछ समय से परदे से दिवाली तो बिल्कुल ही गायब हो गई है।
निर्देशक अनीस बज्मी ने कहा, ‘‘ आज के समय में बड़े परदे पर दिवाली का दृश्य देखने को नहीं मिलता है। फिल्मकार नई शैली के साथ प्रयोग कर रहे हैं और कुछ नया करना चाहते हैं। वैश्विक पटल पर बॉलीवुड के पहुंचने के साथ ही फिल्मकार भारतीय और वैश्विक सिनेमा के प्रशंसकों दोनों को लुभाने वाले विषय पर फिल्म बनाना चाहते हैं।’’
पहले की कुछ फिल्में ‘दिवाली’ विषय के इर्द-गिर्द घूमती रहती थी। मसलन, जयंत देसाई निर्देशित 1940 में आई फिल्म ‘दिवाली’ को याद करें। इसके अलावा-1955 में गजानन जागीरदार की ‘घर घर में दिवाली’, वर्ष 1956 में दीपक आशा की ‘दिवाली की रात’ भी महत्वपूर्ण है।
वर्ष 2001 में सुपरस्टार अमिताभ बच्चन की कंपनी एबीसीएल ने आमिर खान और रानी मुखर्जी के साथ ‘हैप्पी दिवाली’ बनाने का निश्चय किया था लेकिन बाद में कुछ कारणों से यह योजना परवान नहीं चढ़ सकी।(भाषा)