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गंभीर मुद्दों पर बहस करता एक ब्लॉग

इस बार ब्लॉग चर्चा में समाजवादी जनपरिषद पर चर्चा

रवींद्र व्यास|
WDWD
दुनिया पर एक आरोप यह लगता रहा है कि यह दुनिया ज्यादातर भावुक और निजी किस्मों के अनुभवों की अभिव्यक्तियों का मामला बनकर रह गया है और यहाँ अब भी गंभीर विचार-विमर्श और देश की अधिकांश शोषित-वंचित जनता की आवाज को बुलंद करने की कोशिशों का अभाव है। इस परिप्रेक्ष्य में कुछ ब्लॉग गंभीर काम कर रहे हैं। इन ब्लॉगों में एक है समाजवादी जनपरिषद।

अफलातून के इस ब्लॉग को पढ़ें तो यह कहा जा सकता है कि यहाँ देश के वर्तमान हालातों के प्रति गहरी चिंता भी है। सुचिंतित विचार-विमर्श भी और व्यापक हितों के मद्देनजर राजनीतिक-आर्थिक-सामाजिक बदलावों की बेचैनी भी है।

इसकी कुछ ताजा पोस्टों पर नजर डाली जाए तो ये पोस्टें एक पार्टी विशेष के नजरिए से मप्र विधानसभा के मद्देनजर अपना घोषणा पत्र बताती हैं, वहीं वर्तमान हालातों, सत्ताधारी पार्टी और दूसरी पार्टियों की नीतियों और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपना नजरिया स्पष्ट करती है। अब तक इस सीरिज की चार पोस्टें हैं। पहली पोस्ट है मध्यप्रदेश चुनाव : घोषणा पत्र क्यों? इसमें ब्लॉगर और पार्टी के फुलटाइम एक्टिविस्ट अफलातून प्रदेश के मौजूदा हालातों को बयाँ करते हुए यह कहने की कोशिश करते हैं कि देश की तरह ही इस प्रदेश के हालात पहले से बदतर हुए हैं।

  गरीबों-किसानों का हक मारा जा रहा है। वे इस बात पर जोर देते हैं कि प्रदेश का सही विकास करना है तो गरीबों और किसानों के हित में काम करते हुए ग्रामीण विकास पर ध्यान केंद्रित करना होगा।      
बिजली, पानी, सड़क की समस्या विकराल हुई है, तो दूसरी तरफ विपक्ष की पार्टियाँ भी एक राजनीतिक षड्यंत्र के तहत चुप रहकर जनता की समस्या को और विकराल करने में जुटी रहती हैं ताकि अगली बार वे सत्ता में आ सकें। इस पोस्ट में यह भी विवेचन है कि कैसे पार्टियाँ घोषणा पत्रों की अनदेखी करती हैं और अपने वादों को पूरा करने के लिए कभी राजनीतिक इच्छाशक्ति का परिचय नहीं देतीं। अफलातून इन विश्लेषणों के बीच समाजवादी जनपरिषद के घोषणा पत्र की खासियतों को रेखांकित करते हुए विभिन्न अहम मुद्दों पर पार्टी का नजरिया पेश करते हैं और कहते हैं कि पार्टी किस तरह से शोषितों-वंचितों और इस तरह आम जनता के हित में किन मुद्दों पर कैसे लड़ेगी।

इसी सीरिज की दूसरी किस्त मप्र की विकास और कृषि नीति में वे यह बताने की कोशिश करते जान पड़ते हैं कि कैसे निजीकरण के कारण प्रदेश के संसाधनों को निजी कंपनियों को सौंपा जा रहा है। गरीबों-किसानों का हक मारा जा रहा है। वे इस बात पर जोर देते हैं कि प्रदेश का सही विकास करना है तो गरीबों और किसानों के हित में काम करते हुए ग्रामीण विकास पर ध्यान केंद्रित करना होगा। किसानों के लिए विकास नीति बनाते हुए खाद-बीज-बिजली-पानी की माकूल व्यवस्था करना होगी।
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