इक ख्वाब तो आँखों में है, इक चाँद तेरे तकिए तले

ब्लॉग-चर्चा में इस बार 'गुलजारनामा'

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मेरे पसंदीदा शायर मिर्जा गालिब के एक शेर को यदि अपने प्रिय गीतकार गुलजार के लिए इस्तेमाल करूँ तो वह कुछ यूँ होगा कि यूँ तो और भी गीतकार हैं बॉलीवुड में लेकिन कहते हैं कि गुलजार का है अंदाजे बयाँ और। अपने अंदाजे बयाँ के कारण ही गुलजार आज भी बॉलीवुड में न केवल टिके हुए हैं बल्कि अपने कहने के अंदाज को लगातार बदलते हुए और नया करते हुए ताजादम बने हुए हैं।

बंटी और बबली तथा झूम बराबर झूम फिल्मों के गीतों की जबर्दस्त लोकप्रियता इसकी एक बेहतर मिसाल है। कजरारे कजरारे तेरे नैना कारे कारे गीत का जादू तो लोगों को सिर चढ़कर बोला था और झूम बराबर झूम पर तो पूरी युवा पीढ़ी झूमने लगी थी। उनके इस गीत पर गौर करिए-

मकई की रोटी, गुड़ रखके मिसरी से मीठे लब चख के तंदूर जलाके झूम झूम गुलजार के इस जादू को समझने की जरूरत है। गुलजार के इस अंदाजे बयाँ को महसूस करने की जरूरत है। इस गीत में मक्का की रोटी है जिसे हम भूल चूके हैं, गुड़ का स्वाद भी हम लगभग भूल चुके हैं। और शायद इस भागती-दौड़ती जिंदगी में मिसरी से मीठे लबों को चखने का गहरा अहसास भी भूल चुके हैं।
  यूँ तो और भी गीतकार हैं बॉलीवुड में लेकिन कहते हैं कि गुलजार का है अंदाजे बयाँ और। अपने अंदाजे बयाँ के कारण ही गुलजार आज भी बॉलीवुड में न केवल टिके हुए हैं बल्कि अपने कहने के अंदाज को लगातार बदलते हुए और नया करते हुए ताजादम बने हुए हैं।      


शायद रिश्तों को गाढ़ा, संवेदनशील और ताकतवर बना देने वाली वह आदिम ऊष्मा या आँच को भी भूल रहे हैं। गुलजार अपने बेहद सादा लफ्जों में बताते हैं कि असल जीवन का स्वाद असल चीजों में हैं और इसी का स्वाद लेने से हम जीवन का आनंद ले सकते हैं। तभी तो वे यह कह सके हैं कि मिसरी से मीठे लब चख के, तंदूर जलाके झूम। मैं जब इस बेहतरीन फनकार के बारे में सोचता हूँ तो लगता है कि वे हिंदी फिल्मों के गीतकारों की उस परंपरा के गीतकार हैं जिन्होंने लोकप्रियता और साहित्यिकता के भेद को अपनी गजब की रचनात्मकता से मिटा दिया था। और यह भी कि हरदम उन गीतों की मधुर गीतात्मकता से नशीली-फड़कती धुनों पर सवार होकर हर दौर में वे लोगों के जेहन और जीवन में जिंदा रहे हैं।

रवींद्र व्यास|
रीमिक्स के इस दौर में भी उन गीतकारों के गीत आज भी किसी आधुनिक बीट्स और रिदम के साथ एफएम और टीवी चैनल्स पर सुने-देखे जा सकते हैं तो यह उन गीतों के कालजयी होने का प्रमाण है। ...और यही कारण है कि ब्लॉग जैसे आधुनिक मीडियम में भी ऐसे गीतकारों का जलवा बरकरार है। इसीलिए आज ब्लॉग की दुनिया में एक पूरा ब्लॉग ही गुलजार साहब के लिए समर्पित है। गुलजारनामा के नाम से यह ब्लॉग कुश एक खूबसूरत खयाल का ब्लॉग है।

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