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    <title><![CDATA[धर्म-दर्शन]]></title>
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    <description><![CDATA[Hinduism, India Religion, Islam, Christianity, Sikhism, Jainism, Hindu Dharma, India Religion, Religion in India, Indian Festival, India Culture, The Indian Traditions, धर्म दर्शन, हिन्दू धर्म.]]></description>
    <copyright>Copyright webdunia.com</copyright>
    <lastBuildDate>Tue, 16 Jun 2026 12:32:08 +0530</lastBuildDate>
    <language>en-us</language>
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      <title>धर्म-दर्शन</title>
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    <item>
      <title><![CDATA[Saur Ashadha Month 2026: सौर आषाढ़ माह प्रारंभ, जानिए महत्व]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/religious-article/solar-ashadha-month-2026-126061600008_1.html</link>
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      <description><![CDATA[Hindu Solar Month Ashadha: सौर आषाढ़ माह हिंदू सौर कैलेंडर और ज्योतिष विज्ञान का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब हम 'सौर' आषाढ़ की बात करते हैं, तो इसका सीधा संबंध सूर्य देव के गोचर यानी राशि परिवर्तन से होता है।]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="An image related to the solar month of Ashadha 2026, showing devotees performing worship and a scene conveying information about the environment and agriculture" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/16/full/1781591846-9593.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Ashadha Month Significance: </strong>हिंदू पंचांग में सौर मास का विशेष महत्व माना गया है। जब सूर्य मिथुन राशि में प्रवेश करते हैं, तब सौर आषाढ़ माह का आरंभ होता है। यह माह धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। सौर आषाढ़ के आगमन के साथ ही वर्षा ऋतु का प्रभाव बढ़ने लगता है और प्रकृति में हरियाली का विस्तार होने लगता है। यह समय भगवान विष्णु, सूर्यदेव और देवपूजन के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-nakshatra-sign/budh-ka-punarvasu-nakshatra-me-pravesh-11-june-2026-rashiyon-par-prabhav-126061000049_1.html" target="_blank">11 जून को बुध का पुनर्वसु नक्षत्र में प्रवेश, जानिए किन राशियों को मिलेगा लाभ और किन्हें रहना होगा सावधान</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	कब से हो रहा है शुरू? </h3>
<p>
	साल 2026 में सौर आषाढ़ माह की शुरुआत 16 जून, दिन मंगलवार से हो रही है, जो कि 16 जुलाई 2026, गुरुवार तक जारी रहेगा।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	सौर आषाढ़ माह क्या है?</h3>
<p>
	भारतीय ज्योतिष और पंचांग में दो तरह के महीने होते हैं- चंद्र मास अर्थात् चंद्रमा की कलाओं पर आधारित और सौर मास यानी सूर्य की गति पर आधारित। सौर पंचांग के अनुसार सूर्य जिस राशि में स्थित होते हैं, उसी के आधार पर सौर मास की गणना की जाती है।<br />
	<br />
	सूर्य के मिथुन राशि में प्रवेश करने से सौर आषाढ़ मास प्रारंभ होता है। दक्षिण भारत और कई क्षेत्रों में सौर मासों का विशेष महत्व है तथा धार्मिक कार्यों और पर्व-त्योहारों का निर्धारण भी इसी आधार पर किया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	सौर आषाढ़ माह का महत्व</h3>
<p>
	* यह माह वर्षा ऋतु के आगमन का संकेत देता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	* कृषि कार्यों की शुरुआत के लिए यह समय शुभ माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	* भगवान विष्णु की पूजा और जप-तप का विशेष फल प्राप्त होता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	* सूर्य उपासना से स्वास्थ्य, ऊर्जा और सकारात्मकता प्राप्त होती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	* इस माह में दान-पुण्य और सेवा कार्यों का महत्व बढ़ जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	सौर आषाढ़ माह का आध्यात्मिक संदेश</h3>
<p>
	सौर आषाढ़ माह हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने, सेवा, दान और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। यह समय आत्मचिंतन, आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का संदेश देता है। इस माह में किए गए शुभ कर्म और ईश्वर की उपासना जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/other-festivals/ashadha-month-2026-126060600038_1.html" target="_blank">आषाढ़ का महीना 2026: क्या करें और किन गलतियों से बचें?</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 12:15:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 16 Jun 2026 12:12:26 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Religious Article]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Rambha Teej 2026: रम्भा तीज व्रत का क्या है महत्व, उपवास की विधि]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/rambha-teej-significance-and-vrat-vidhi-126061600004_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/16/thumb/1_1/1781583119-8934.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Rambha Teej Vrat 2026: रम्भा तीज या रम्भा तृतीया सनातन धर्म में महिलाओं के लिए बेहद खास और उत्तम फल देने वाला व्रत माना गया है। आइए यहां जानते हैं साल 2026 में रम्भा तीज कब है, इसका महत्व क्या हैं और पूजन विधि आदि यहां सब कुछ आसान शब्दों में समझते ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="The image caption features a depiction of the Apsara Rambha- a symbol of beauty and youth- associated with the Rambha Teej fast" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/16/full/1781583119-8934.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Rambha Teej Festival 2026:</strong> हिंदू धर्म में तीज व्रतों का विशेष महत्व माना गया है। इन्हीं में से एक है रम्भा तीज व्रत, जो सुहाग, सौभाग्य और वैवाहिक सुख की प्राप्ति के लिए किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने पर दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है तथा अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। अविवाहित कन्याएं भी मनचाहे वर की प्राप्ति के लिए यह व्रत रखती हैं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-zodiac-signs/mangal-gochar-in-vrishabh-rashi-2026-5-rashiyon-ko-milega-bada-fayda-126061500048_1.html" target="_blank">शुक्र की वृषभ राशि में मंगल का प्रवेश, 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, धन और करियर में मिल सकता है बड़ा लाभ</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व महिलाओं को अखंड सौभाग्य, सौंदर्य, आरोग्य/ अच्छी सेहत और सुखी वैवाहिक जीवन का वरदान देता है। वर्ष 2026 में यह व्रत 17 जून, दिन बुधवार को मनाया जा रहा है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	आइए यहां जानते हैं रम्भा तीज व्रत का क्या महत्व है और इसकी सरल पूजा विधि व उपाय क्या हैं...</h3>
<h3>
	* क्यों रखा जाता है यह व्रत, रम्भा तीज का महत्व</h3>
<p>
	पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले 14 रत्नों में से एक अति सुंदर अप्सरा &#39;रम्भा&#39; भी थीं। रम्भा को सौंदर्य और यौवन का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने ही सबसे पहले सौभाग्य और शाश्वत सुंदरता पाने के लिए यह व्रत किया था, जिसके कारण इसका नाम &#39;रम्भा तीज&#39; पड़ा।<br />
	<br />
	बता दें कि यह व्रत मुख्य रूप से दो वजहों से रखा जाता है, पहला सुहागिन महिलाओं के लिए यानी पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और संतान सुख के लिए। और दूसरा अविवाहित कन्याओं के लिए, जो मनचाहा और सुयोग्य जीवनसाथी (वर) पाने के लिए किया जाता है।<br />
	<br />
	मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से महिलाओं को न सिर्फ देवी रम्भा, बल्कि माता पार्वती, भगवान शिव और माता लक्ष्मी का भी संयुक्त आशीर्वाद मिलता है, जिससे शरीर निरोगी रहता है और सौंदर्य बढ़ता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	* पूजा विधि</h3>
<p>
	रम्भा तीज की पूजा बहुत ही पवित्रता और नियम के साथ की जाती है। इसकी सबसे मुख्य बात यह है कि इस दिन चूड़ियों के जोड़े (हाथीदांत या कांच की हरी-लाल चूड़ियां) को देवी रम्भा का प्रतीक मानकर पूजा जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>1. स्नान और संकल्प</strong></p>
<p>
	सुबह ब्रह्म मुहूर्त में जल्दी उठकर स्नान करें और संभव हो तो लाल, पीले या हरे रंग के साफ वस्त्र पहनें। हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>2. पूजा की तैयारी</strong></p>
<p>
	महिलाएं इस दिन स्वयं का 16 श्रृंगार यानी खुद का अच्छी तरह 16 श्रृंगार करें। हाथों में मेहंदी लगाना इस दिन बहुत शुभ माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>3. देवताओं की स्थापना</strong></p>
<p>
	पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठें। पूजा स्थल सजाएं। एक चौकी पर साफ लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। उस पर भगवान शिव, माता पार्वती और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>4. रम्भा के प्रतीक रूप में चूड़ियों का पूजन</strong></p>
<p>
	मूर्तियों के पास ही साफ अक्षत (चावल) की ढेरी बनाकर उस पर चूड़ियों का एक सुंदर जोड़ा रखें। इसे अप्सरा रम्भा का प्रतीक माना जाता है। इसके अलावा गेहूं या अन्य अनाज भी रखें। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>5. धूप-दीप और भोग</strong></p>
<p>
	मुख्य पूजा के रूप में घी का दीपक जलाएं। सभी देवी-देवताओं और चूड़ियों को चंदन, कुमकुम, हल्दी, लाल फूल, अबीर और अक्षत चढ़ाएं। मौसमी फल और मिठाई का भोग लगाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>6. कथा और आरती</strong></p>
<p>
	रम्भा तीज व्रत की कथा पढ़ें या सुनें। इसके बाद माता पार्वती, शिव जी और लक्ष्मी जी की आरती करें। भूल-चूक के लिए क्षमा मांगें और समापन के पश्चात अगले दिन पारण कर व्रत खोलें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	रम्भा तीज व्रत महिलाओं के लिए अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। यह व्रत केवल वैवाहिक सुख ही नहीं, बल्कि परिवार की खुशहाली, समृद्धि और सौभाग्य की कामना का भी पर्व है। श्रद्धा और नियमपूर्वक शिव-पार्वती की पूजा करने से जीवन में सकारात्मकता और मंगलकारी फल प्राप्त होने की मान्यता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/sanatan-dharma-mahapurush/sindhu-samrat-raja-dahir-shaurya-aur-sarvochch-balidan-ki-amar-gatha-126061500053_1.html" target="_blank">सिंधु सम्राट राजा दाहिर: शौर्य और सर्वोच्च बलिदान की अमर गाथा</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 10:02:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 16 Jun 2026 09:47:52 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Other Festivals]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Bada Mangal 2026: सातवें बड़े मंगल पर अवश्य करें ये 10 कार्य, हनुमान जी देंगे वरदान]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/7th-bada-mangal-remedies-2026-126061500047_1.html</link>
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      <description><![CDATA[Bada Mangal 2026 Par Hanuman Ji Ke Upay: जेठ या ज्येष्ठ मास में आने वाले सभी मंगलवार को 'बड़ा मंगल' या 'बुढ़वा मंगल' कहा जाता है। यह दिन हनुमान जी की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र और फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इसी महीने में हनुमान जी की ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="Bajrangbali on the occasion of Bada Mangal, along with the organization of a Bhandara and temple decorations" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/05/full/1777954970-817.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1209px; height: 675px;" title="" /></p>
</p>
<p>
	<strong>Hanuman Ji Blessings Remedies: </strong>ज्येष्ठ मास के बड़े मंगल का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन संकटमोचन भगवान हनुमान की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। सातवां बड़ा मंगल भक्तों के लिए विशेष अवसर होता है, जब वे हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए विभिन्न धार्मिक कार्य करते हैं। कहा जाता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्यों का कई गुना फल मिलता है। इस बार 7वां बड़ा मंगल 16 जून 2026, दिन मंगलवार को पड़ रहा है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/bada-mangal-2026-dates-126050100016_1.html" target="_blank">Bada Mangal Dates: ज्येष्ठ माह में कब-कब रहेगा बड़ा मंगल, जानें संपूर्ण तिथियां</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	यदि आप जीवन में संकटों से मुक्ति, सुख-समृद्धि और बजरंगबली की विशेष कृपा चाहते हैं, तो सातवें बड़े मंगल पर ये 10 कार्य अवश्य करें:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. हनुमान जी को चोला चढ़ाएं</h3>
<p>
	सातवें बड़े मंगल के दिन हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल (चोला) अर्पित करें। चोला चढ़ाते समय अपनी मनोकामना मन में दोहराएं। ऐसा करने से ग्रह दोष शांत होते हैं और दुर्घटनाओं से रक्षा होती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ</h3>
<p>
	इस विशेष दिन पर घर में या मंदिर जाकर सुंदरकांड का पाठ करें। यदि समय की कमी हो, तो कम से कम 7 बार हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ अवश्य करें। इससे मानसिक तनाव दूर होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग</h3>
<p>
	बजरंगबली को बूंदी, बेसन के लड्डू या मलाईदार पेड़े अत्यंत प्रिय हैं। सातवें बड़े मंगल पर हनुमान जी को इनका भोग लगाएं और फिर इस प्रसाद को अधिक से अधिक लोगों और बच्चों में बांटें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. राम नाम का कीर्तन या जप</h3>
<p>
	हनुमान जी को प्रसन्न करने का सबसे आसान तरीका है भगवान श्री राम की आराधना। इस दिन तुलसी की माला से ॐ राम रामाय नमः या श्री राम जय राम जय जय राम मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/8-bade-mangals-in-jyeshtha-why-is-this-month-becoming-special-126050600006_1.html" target="_blank">Jyeshtha Month Bada Mangal 2026: ज्येष्ठ में 8 बड़े मंगल: क्यों बन रहा है यह महीना खास</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. &#39;ऋणमोचक मंगल स्तोत्र&#39; का पाठ</h3>
<p>
	यदि आप लंबे समय से कर्ज के बोझ से दबे हैं, तो सातवें बड़े मंगल के दिन ऋणमोचक मंगल स्तोत्र का पाठ करें। इससे कर्ज से मुक्ति के मार्ग खुलते हैं और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	6. पीपल के पत्तों की माला</h3>
<p>
	पीपल के 11 साबुत यानी बिना फटे पत्ते लें। उन्हें साफ पानी से धोकर उन पर लाल चंदन या कुमकुम से &#39;श्री राम&#39; लिखें। इन पत्तों की माला बनाकर हनुमान जी को पहनाएं। इससे धन संबंधी परेशानियां दूर होती हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	7. चमेली के तेल का दीपक</p>
<p>
	शाम के समय किसी हनुमान मंदिर में जाएं और उनके सामने मिट्टी का एक बड़ा दीपक चमेली के तेल का जलाएं। उसमें दो लौंग भी डाल दें। यह उपाय नौकरी और व्यापार में आ रही बाधाओं को दूर करता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	8. बंदरों और गायों को भोजन</h3>
<p>
	हनुमान जी के प्रतीक स्वरूप इस दिन बंदरों को गुड़ और चना खिलाएं। इसके अलावा, काली गाय को भी भीगे हुए चने या मीठी रोटी खिलाने से शनि देव और हनुमान जी दोनों की कृपा प्राप्त होती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	9. जरूरतमंदों को दान</h3>
<p>
	इस दिन गर्मी से राहत दिलाने वाली वस्तुओं का दान करें, जैसे- मिट्टी का घड़ा/ मटका, छाता, सूती वस्त्र, या जूते-चप्पल। नि:स्वार्थ भाव से किया गया दान हनुमान जी को तुरंत प्रसन्न करता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	10. भंडारा और ठंडे पानी का वितरण</h3>
<p>
	जेठ के महीने में भीषण गर्मी होती है। बड़े मंगल पर राहगीरों के लिए ठंडे पानी, शरबत या शिकंजी की व्यवस्था करना और आम जनता के लिए भंडारे (पूड़ी-सब्जी या हलवा) का आयोजन करना महापुण्य का काम माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	बजरंगबली का महामंत्र:</h3>
<p>
	इस दिन पूजा के दौरान <strong>ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकायं हुं फट्।&#39;</strong> मंत्र का जप करने से सभी नकारात्मक शक्तियां और शत्रु बाधा दूर हो जाती है। ध्यान रहे कि इस दिन पूरी तरह से सात्विक रहें, ब्रह्मचर्य का पालन करें और किसी का भी अनादर न करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सातवें बड़े मंगल पर श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर भय, बाधाएं और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती हैं। साथ ही साहस, आत्मविश्वास, सफलता और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। हनुमान जी अपने भक्तों के सभी संकट हरकर उन्हें सुखमय जीवन का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/a-unique-combination-of-eight-major-tuesdays-in-the-month-of-jyeshtha-worship-lord-hanuman-in-this-way-126052500014_1.html" target="_blank">ज्येष्ठ मास में 8 बड़े मंगल का अद्भुत संयोग: इस तरह करेंगे हनुमानजी की उपासना तो मिलेंगे अनेक शुभ फल</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 17:06:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 15 Jun 2026 16:59:09 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[astrology articles]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Muharram month 2026: मोहर्रम मास का इस्लाम धर्म में महत्व और परंपरा जानें]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/islam-religion/learn-about-the-significance-and-traditions-of-the-month-of-muharram-in-islam-126061500057_1.html</link>
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      <description><![CDATA[Muharram 2026: इस्लाम धर्म में मोहर्रम (मुहर्रम) वर्ष का पहला महीना होता है और इसे सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। दुनिया भर के मुस्लिम समुदाय के लिए मोहर्रम विशेष धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है। मोहर्रम इस्लाम के उन चार पवित्र महीनों ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Image depicting the significance of Muharram in Islam" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/15/full/1781522627-332.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>significance of the month of Muharram: </strong>मोहर्रम इस्लामिक कैलेंडर यानी हिजरी संवत का पहला महीना होता है। इस्लाम धर्म में इस महीने का ऐतिहासिक, धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से बहुत बड़ा महत्व है। यह महीना केवल इस्लामी नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक नहीं है, बल्कि त्याग, धैर्य, सत्य और न्याय के लिए संघर्ष की प्रेरणा भी देता है। यह महीना खुशियां मनाने का नहीं, बल्कि इंसाफ, सच्चाई, सब्र/ धैर्य और महान शहादत को याद करने का समय है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	1. मोहर्रम मास का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व</p>
<p>
	2. मोहर्रम मास की मुख्य परंपराएं</p>
<p>
	3. एक आम गलतफहमी का निवारण: क्या मोहर्रम कोई त्योहार है?</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>आइए समझते हैं कि इस्लाम में इस महीने का क्या महत्व है और इसके दौरान कौन सी परंपराएं निभाई जाती हैं:</strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. मोहर्रम मास का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व</h3>
<p>
	<strong>* चार पवित्र महीनों में से एक (अशहुरुम हुरुम)</strong></p>
<p>
	कुरान और इस्लाम की मान्यताओं के अनुसार, साल के 12 महीनों में से 4 महीने बेहद पवित्र और अदब के माने गए हैं, जिनमें से मोहर्रम एक है। अल्लाह के रसूल पैगंबर हजरत मोहम्मद (स.अ.व.) ने इसे &#39;अल्लाह का महीना&#39; कहा है। इन चार पवित्र महीनों में किसी भी प्रकार की लड़ाई-झगड़े या युद्ध को पूरी तरह प्रतिबंधित (हराम) माना गया है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>* कर्बला की ऐतिहासिक शहादत</strong></p>
<p>
	मोहर्रम महीने का महत्व इतिहास की एक ऐसी घटना से जुड़ा है जिसने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया। सन 61 हिजरी (680 ईस्वी) में इराक के &#39;कर्बला&#39; नामक स्थान पर एक तरफ इस्लाम के सिद्धांतों को बचाने वाले पैगंबर मोहम्मद के नवासे (नाती) हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथी, जिनमें उनके परिवार के छोटे बच्चे और महिलाएं भी थीं, और दूसरी तरफ अत्याचारी शासक यजीद की बड़ी सेना थी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	यजीद चाहता था कि इमाम हुसैन उसके गलत तौर-तरीकों और क्रूर शासन को जायज ठहराते हुए उसके आगे झुक जाएं। लेकिन इमाम हुसैन ने हक यानी सच्चाई और इंसानियत की रक्षा के लिए झुकने से मना कर दिया। यजीद की सेना ने इमाम हुसैन और उनके परिवार का पानी तक बंद कर दिया और अंत में 10वें मोहर्रम (यौम-ए-आशुरा) के दिन इमाम हुसैन और उनके साथियों को बेहद बेरहमी से शहीद कर दिया गया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	इमाम हुसैन की यह शहादत दुनिया को यह सिखाती है कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, अत्याचार के आगे कभी सिर नहीं झुकाना चाहिए और हमेशा सच्चाई का साथ देना चाहिए।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. मोहर्रम मास की मुख्य परंपराएं</h3>
<p>
	दुनिया भर के मुसलमान, विशेषकर शिया समुदाय और कई जगहों पर सुन्नी समुदाय भी इस महीने में इमाम हुसैन और उनके परिवार की कुर्बानियों को याद करते हुए कई परंपराएं निभाते हैं:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मजालिस (धार्मिक सभाएं): </strong>मोहर्रम के शुरुआती 10 दिनों में &#39;मजालिस&#39; का आयोजन किया जाता है। इसमें धार्मिक गुरु (उलेमा) कर्बला के इतिहास, इमाम हुसैन के संदेशों और उनके परिवार पर ढाए गए जुल्मों की दास्तान सुनाते हैं, जिसे सुनकर लोग शोक व्यक्त करते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मातम और नोहा ख्वानी: </strong>शिया समुदाय के लोग काले कपड़े पहनकर इमाम हुसैन के गम में मातम करते हैं। इस दौरान &#39;नोहा&#39; (शोक गीत) पढ़े जाते हैं, जिसमें कर्बला के शहीदों के दर्द को बयां किया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>ताजिया निकालना: </strong>भारत, पाकिस्तान और कई अन्य देशों में मोहर्रम की 10वीं तारीख (आशुरा) को बांस, लकड़ी और रंग-बिरंगे कागजों से इमाम हुसैन के रौजे (मकबरे) की प्रतिकृति बनाई जाती है, जिसे &#39;ताजिया&#39; कहा जाता है। लोग अकीदत (श्रद्धा) के साथ जुलूस के रूप में इन ताज़ियों को निकालते हैं और अंत में इन्हें कर्बला या स्थानीय कब्रिस्तान या निश्चित स्थान पर सुपुर्द-ए-खाक यानी दफन कर देते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सबील और लंगर लगाना: </strong>इमाम हुसैन और उनके भूखे-प्यासे बच्चों की याद में मोहर्रम के दिनों में जगह-जगह &#39;सबील&#39; अर्थात् ठंडे पानी, शरबत या दूध के स्टॉल लगाए जाते हैं, जहाँ से गुजरने वाले हर राहगीर को बिना किसी भेदभाव के पानी या शरबत पिलाया जाता है। साथ ही गरीबों के लिए मुफ्त भोजन/ लंगर का इंतजाम किया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>आशुरा के रोजे (उपवास): </strong>सुन्नी समुदाय में मोहर्रम की 9वीं और 10वीं तारीख (या 10वीं और 11वीं तारीख) को रोजा रखने की विशेष परंपरा है। पैगंबर मोहम्मद साहब इस दिन रोजा रखा करते थे और उन्होंने इसे रमजान के बाद सबसे उत्तम रोजा बताया है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. एक आम गलतफहमी का निवारण: क्या मोहर्रम कोई त्योहार है?</h3>
<p>
	अक्सर गैर-मुस्लिम समाज में लोग इसे &#39;मोहर्रम का त्योहार&#39; कह देते हैं, जो कि गलत है। मोहर्रम कोई त्योहार या उत्सव नहीं है, बल्कि यह इस्लाम का एक शोक (गम) का महीना है। यही कारण है कि इस महीने में कोई भी खुशी का काम (जैसे शादी-ब्याह, नया घर खरीदना या जश्न मनाना) नहीं किया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/islam-religion/when-does-the-month-of-muharram-begin-find-out-the-exact-date-126061300044_1.html" target="_blank">Muharram 2026: कब से शुरू हो रहा है मोहर्रम मास, जानें सही डेट</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 16:40:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 15 Jun 2026 16:58:24 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Islam Religion]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Muharram 2026: कब से शुरू हो रहा है मोहर्रम मास, जानें सही डेट]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/islam-religion/when-does-the-month-of-muharram-begin-find-out-the-exact-date-126061300044_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/islam-religion/when-does-the-month-of-muharram-begin-find-out-the-exact-date-126061300044_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/13/thumb/1_1/1781349871-4277.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Muharram Festival 2026: मोहर्रम इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना होता है और 680 ईस्वी में इस महीने के दसवें दिन इराक के मैदान-ए-कर्बला में इस्लाम के आखिरी पैगंबर मोहम्मद के नवासे इमाम हुसैन की शहादत हुई थी। इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार इस बार 16 जून ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="A photo providing information about Muharram, the first month of the Islamic calendar" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/13/full/1781349871-4277.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Muharram Month 2026:</strong> इस्लाम धर्म में मोहर्रम वर्ष का पहला महीना माना जाता है और इसे अत्यंत पवित्र एवं सम्मानित महीनों में शामिल किया गया है। मोहर्रम केवल इस्लामिक नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह त्याग, बलिदान, सत्य और इंसाफ की याद दिलाने वाला महीना भी है। विशेष रूप से मोहर्रम की 10वीं तारीख, जिसे यौम-ए-आशूरा (Ashura) कहा जाता है, का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व बहुत अधिक है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	इतिहास के अनुसार, इमाम हुसैन और उनके साथियों ने करबला की लड़ाई में सत्य और न्याय की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। इसी घटना की स्मृति में दुनिया भर के मुसलमान मोहर्रम के दौरान शोक सभाएं, मजलिस और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करते हैं। यह महीना मानवता, धैर्य, करुणा और अन्याय के खिलाफ संघर्ष का संदेश देता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, मोहर्रम साल का पहला महीना होता है, जिससे इस्लामिक नए साल (हिजरी वर्ष 1448) की शुरुआत होती है। साल 2026 में मोहर्रम का पवित्र महीना जून के मध्य से शुरू होने जा रहा है। इसकी सटीक तिथियां चांद दिखने पर निर्भर करती हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. मोहर्रम 2026 की शुरुआत (पहला मोहर्रम)</h3>
<p>
	चांद दिखने के आधार पर, साल 2026 में मोहर्रम का महीना 16 जून 2026 (मंगलवार) या 17 जून 2026 (बुधवार) से शुरू होगा।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>चांद का नियम:</strong> इस्लामिक तारीखों की सटीक शुरुआत हमेशा &#39;चांद देखने&#39; (Moon Sighting) पर निर्भर करती है। यदि 15 जून की शाम को मोहर्रम का चांद नजर आ जाता है, तो पहला मोहर्रम 16 जून को होगा। यदि चांद 15 जून को नहीं दिखता, तो यह महीना 17 जून से शुरू होगा।</p>
<h3>
	 </h3>
<h3>
	2. आशुरा की तारीख (10वां मोहर्रम)</h3>
<p>
	मोहर्रम महीने का सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक दिन 10वां दिन होता है, जिसे &#39;यौम-ए-आशुरा&#39; (Ashura) कहा जाता है। इसी दिन इराक के कर्बला में पैगंबर मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत हुई थी, जिसकी याद में शोक (मातम) मनाया जाता है।</p>
<h3>
	 </h3>
<h3>
	भारत में आशुरा (10वें मोहर्रम) की मुख्य तिथि इस प्रकार रहने वाली है:</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सही डेट: </strong>25 जून 2026 (गुरुवार) या 26 जून 2026 (शुक्रवार)।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	कैलेंडर और सरकारी छुट्टियों की सूची के अनुसार, आशुरा की संभावित छुट्टी 26 जून 2026 (शुक्रवार) को तय की गई है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	मोहर्रम के मुख्य दिनों की संभावित सूची (2026):</h3>
<p>
	विशेष दिन तारीख (यदि चांद 15 जून को दिखा)</p>
<p>
	01 मोहर्रम (इस्लामिक नया साल) 16 जून 2026 (मंगलवार)</p>
<p>
	09 मोहर्रम (आशुरा से पहले का रोजा) 24 जून 2026 (बुधवार)</p>
<p>
	10 मोहर्रम (यौम-ए-आशुरा / मातम का दिन) 25 या 26 जून 2026 (गुरुवार/शुक्रवार)</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 16:55:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 13 Jun 2026 17:03:29 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Islam Religion]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Adhik Maas Remedies 2026: अधिकमास के समापन करें ये 5 प्रभावशाली उपाय, मिलेगा श्रीविष्‍णु का आशीर्वाद]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/perform-these-5-effective-rituals-to-conclude-adhik-maas-and-receive-the-blessings-of-lord-vishnu-126061300040_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/perform-these-5-effective-rituals-to-conclude-adhik-maas-and-receive-the-blessings-of-lord-vishnu-126061300040_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/13/thumb/1_1/1781347662-4527.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/13/thumb/1_1/1781347662-4527.jpg</image>
      <description><![CDATA[Adhik Maas 2026: इस बार 15 जून को पुरुषोत्तम मास का समापन हो रहा है। हिंदू पंचांग में अधिकमास, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक महत्व वाला महीना माना जाता है। यह मास लगभग हर 32 महीने 16 दिन 8 घंटे के अंतराल पर आता है और ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Scenes depicting the worship of Shri Hari Narayan upon the conclusion of the Purushottam Maas. The image show the temple, the idol of Shri Lakshmi-Narayan, devotees floating lamps in the river, and worshippers immersed in devotional kirtan and aarti" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/13/full/1781347662-4527.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Purushottam Month 2026:</strong>अधिक मास (जिसे मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है) भगवान श्रीहरि विष्णु को अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि इस पवित्र महीने के समापन पर किए गए कुछ विशेष उपाय व्यक्ति के जीवन से सारे कष्ट मिटाकर सुख-समृद्धि और विष्णु जी की असीम कृपा दिलाते हैं। इस बार 15 जून को अधिकमास की समाप्ति हो रही है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/other-festivals/what-are-the-maha-daans-performed-during-adhik-maas-and-what-are-the-rewards-associated-with-them-126061200011_1.html" target="_blank">अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) में किए जाने वाले महादान कौन से हैं और उनका क्या फल मिलता है?</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	यदि आप भी अधिक मास के समापन पर भगवान विष्णु का आशीर्वाद पाना चाहते हैं, तो ये 5 प्रभावशाली उपाय जरूर करें:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. पीले वस्त्र और फलों का दान</h3>
<p>
	भगवान विष्णु को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। अधिक मास के अंतिम दिन किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को पीले कपड़े, चने की दाल, केला, और केसरिया मिठाई दान करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>लाभ: </strong>ऐसा करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है और घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. तुलसी पूजा और दीपदान</h3>
<p>
	अधिक मास के समापन पर शाम के समय तुलसी के पौधे के सामने गाय के घी का दीपक जलाएं। तुलसी जी की 11 या 21 बार परिक्रमा करें और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	विशेष ध्यान रखें: इस दिन तुलसी पत्र तोड़ने से बचें, केवल उनकी पूजा करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>लाभ: </strong>इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं और घर का वास्तु दोष दूर होता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. पंचामृत से भगवान विष्णु का अभिषेक</h3>
<p>
	समापन के दिन सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु या लड्डू गोपाल का दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने पंचामृत से अभिषेक करें। अभिषेक के दौरान शंख का उपयोग करना बेहद शुभ माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>महत्वपूर्ण: </strong>इस पंचामृत में तुलसी का पत्ता जरूर डालें, क्योंकि तुलसी के बिना विष्णु जी भोग स्वीकार नहीं करते।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. पीपल के वृक्ष की सेवा</h3>
<p>
	शास्त्रों के अनुसार पीपल के पेड़ में त्रिदेवों यानी ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। अधिक मास के अंतिम दिन पीपल के वृक्ष की जड़ में जल अर्पित करें और वहां एक चौमुखी यानी चार मुख वाला दीपक जलाएं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/purushottam-mas-2026-mein-kaunse-tirth-ki-yatra-se-milta-hai-punya-phal-126051800025_1.html" target="_blank">पुरुषोत्तम मास 2026: इस पवित्र महीने में इन तीर्थों की यात्रा से मिलेगा कई जन्मों का पुण्यफल</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	जल चढ़ाते समय मन में अपनी मनोकामना का स्मरण करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>लाभ:</strong> इससे पितृदोष से मुक्ति मिलती है और अटके हुए काम पूरे होने लगते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. श्रीसूक्त और विष्णु सहस्रनाम का पाठ</h3>
<p>
	अधिक मास के आखिरी दिन घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने के लिए &#39;विष्णु सहस्रनाम&#39; या &#39;श्रीसूक्त&#39; का पाठ करें या इसे ऑडियो के माध्यम से घर में बजाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	यदि आप स्वयं पाठ कर रहे हैं, तो पीले आसन पर बैठकर पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>लाभ: </strong>यह उपाय मानसिक शांति देता है और घर से नकारात्मक शक्तियों को हमेशा के लिए दूर रखता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>एक छोटा सा टिप: </strong>अधिक मास के समापन पर अपनी सामर्थ्य के अनुसार भूखे लोगों को भोजन जरूर कराएं या किसी गोशाला में हरी घास का दान करें। निस्वार्थ भाव से की गई सेवा का फल भगवान विष्णु कई गुना बढ़ाकर वापस देते हैं।<br />
	<br />
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/religious-stories/purushottam-maas-ki-pauranik-katha-in-hindi-126050200017_1.html" target="_blank">पुरुषोत्तम मास की पौराणिक कथा</a></strong></p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 16:40:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 13 Jun 2026 16:35:52 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[astrology articles]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Somvati Amavasya 2026: सोमवती अमावस्या पर इन 5 शुभ उपायों से चमकेगी आपकी किस्मत]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/your-fortune-will-shine-with-these-5-auspicious-remedies-on-somvati-amavasya-126061300003_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/your-fortune-will-shine-with-these-5-auspicious-remedies-on-somvati-amavasya-126061300003_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/13/thumb/1_1/1781324395-5559.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Somvati Amavasya Upay 2026: सोमवती अमावस्या, जो अमावस्या और सोमवार का मिलन होती है, विशेष रूप से शिवजी की कृपा और लक्ष्मीजी की वर्षा का प्रतीक मानी जाती है। इस दिन किए गए शुभ उपाय न केवल जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं, बल्कि किस्मत और संपत्ति में ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Images related to rituals such as the worship of Lord Bholenath and Pitru Tarpan on Somvati Amavasya" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/13/full/1781324395-5559.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Hindu Festival Somvati Amavasya: </strong>हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तब उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। यह दिन भगवान शिव, पितृ देवताओं और पीपल वृक्ष की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या पर स्नान, दान, व्रत, जप और विशेष उपाय करने से जीवन के अनेक कष्ट दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/mithun-sankranti-2026-puja-vidhi-aur-upay-126061200058_1.html" target="_blank">मिथुन संक्रांति 2026: पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और धन-समृद्धि के अचूक उपाय</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन किए गए कुछ सरल और प्रभावशाली उपाय व्यक्ति की किस्मत बदलने की क्षमता रखते हैं। आइए जानते हैं सोमवती अमावस्या पर किए जाने वाले 5 ऐसे चमत्कारी उपाय, जिनसे आपकी किस्मत चमक सकती है और जीवन में सकारात्मक बदलाव आ सकते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	पितृ दोष और सुख-समृद्धि के अचूक उपाय</h3>
<p>
	<strong>यदि आपकी कुंडली में पितृ दोष है, घर में बार-बार क्लेश होता है या आर्थिक तंगी बनी रहती है, तो इस खास अवसर पर ये 3 उपाय जरूर करें:</strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>1. पितृ दोष शांति के लिए/ काले तिल का उपाय: </strong>अमावस्या की सुबह एक तांबे के लोटे में शुद्ध जल लें। उसमें थोड़े से काले तिल, कच्चा दूध और गंगाजल मिलाएं। इसे पीपल के पेड़ की जड़ में चढ़ाते हुए अपने पूर्वजों से गलतियों के लिए क्षमा मांगें। मान्यता है कि बिना काले तिल के पितर जल स्वीकार नहीं करते।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>2. शिवजी का विशेष पूजन: </strong></p>
<p>
	सोमवार के दिन शिवजी का विशेष पूजन करें। सोमवती अमावस्या के दिन भगवान शिव का जलाभिषेक करें। बेलपत्र, धतूरा और गाय के घी का दीपक जलाएं। इससे परिवार में सुख-शांति और स्वास्थ्य की वृद्धि होती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>3. पंचबलि भोग: </strong>इस दिन भोजन बनाने के बाद सबसे पहली 5 रोटियां निकालकर गाय, कुत्ते, कौए, देव और चींटियों के लिए अलग रखें। कौए को भोजन कराने से पितर सीधे तौर पर तृप्त होते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>4. अंधकार दूर करने के लिए दीपदान/ गुप्त दान:</strong> सोमवती अमावस्या की शाम को सूर्यास्त के बाद किसी पुराने पीपल के पेड़ या मंदिर के पास जाकर गाय के शुद्ध घी का एक चौमुखी यानी 4 बत्तियों वाला मिट्टी का दीपक जलाएं। इससे पितरों का मार्ग आलोकित होता है और 3 पीढ़ियों के पितृ शांत होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>5. कौन-सा मंत्र जपें: </strong>ज्येष्ठ अधिक मास की अमावस्या/ सोमवती अमावस्या पर<strong> &#39;ॐ नमः शिवाय&#39;, &#39;ॐ नमो भगवते वासुदेवाय&#39; </strong>तथा पितृ शांति के लिए पितृ गायत्री मंत्र <strong>&#39;ॐ पितृगणाय विद्महे जगत धारिणी धीमहि तन्नो पितृो प्रचोदयात्।&#39;</strong> का श्रद्धापूर्वक जाप करना शुभ माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	धार्मिक मान्यता है कि सोमवती अमावस्या पर पीपल वृक्ष की पूजा, शिव अभिषेक, तिल दान, पितृ तर्पण और दीपदान करने से ग्रह दोष शांत होते हैं, पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और धन, वैभव तथा सफलता के नए मार्ग खुलते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>ध्यान रखें:</strong> अमावस्या की तिथि पूरी तरह नकारात्मक ऊर्जाओं से बचने और आध्यात्मिक शुद्धता की होती है, इसलिए इस दिन घर में तामसिक भोजन यानी प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा का प्रयोग बिल्कुल न करें।<br />
	<br />
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/why-is-this-somvati-amavasya-special-learn-about-auspicious-timings-and-the-ritual-procedure-126061200006_1.html" target="_blank">सोमवती अमावस्या क्यों हैं इस बार खास, जानें महासंयोग, पूजा मुहूर्त और विधि</a></strong></p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 10:40:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 13 Jun 2026 11:05:13 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Other Festivals]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) में किए जाने वाले महादान कौन से हैं और उनका क्या फल मिलता है?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/what-are-the-maha-daans-performed-during-adhik-maas-and-what-are-the-rewards-associated-with-them-126061200011_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/what-are-the-maha-daans-performed-during-adhik-maas-and-what-are-the-rewards-associated-with-them-126061200011_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/12/thumb/1_1/1781255468-2754.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/12/thumb/1_1/1781255468-2754.jpg</image>
      <description><![CDATA[Adhik Maas items for donation: अधिकमास, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि पुरुषोत्तम मास में किए गए दान का फल सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना अधिक प्राप्त होता है। आइए जानते हैं इस पवित्र माह ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="The image depicts a scene providing information about items suitable for donation during Adhikmaas" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/12/full/1781255468-2754.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="adhik mass" /></p>
	<br />
	<strong>Purushottam Maas 2026: </strong>अधिकमास (जिसे पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहा जाता है) को सनातन धर्म में आध्यात्मिक शुद्धि और पुण्य कमाने का सबसे सर्वोत्तम समय माना गया है। भगवान विष्णु ने इस महीने को अपना नाम &#39;पुरुषोत्तम&#39; दिया है, इसलिए मान्यता है कि इस मास में किए गए दान और पूजा का फल सामान्य दिनों की तुलना में अनंत गुणा या कई गुना अधिक प्राप्त होता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/purushottam-mas-2026-mein-ye-5-kaam-karne-se-milta-hai-apar-dhan-sukh-samriddhi-126051800032_1.html" target="_blank">पुरुषोत्तम मास 2026: इस पवित्र महीने में करें ये 5 काम, धन-दौलत और सुख-समृद्धि की होगी वर्षा</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	हिंदू धर्मग्रंथों में इस माह को जप, तप, व्रत, दान और पुण्य कर्मों के लिए अत्यंत शुभ बताया गया है। इस पवित्र महीने में कुछ विशेष वस्तुओं के दान को &#39;महादान&#39; की श्रेणी में रखा गया है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	1. 33 मालपुए का दान (सबसे प्रमुख दान)</p>
<p>
	2. दीपदान (घृत दीप दान)</p>
<p>
	3. धार्मिक पुस्तकों का दान (ग्रंथ दान)</p>
<p>
	4. सुहाग सामग्री और वस्त्र दान</p>
<p>
	5. अन्न और रसीले फलों का दान<br />
	6. तिथि के अनुसार विशेष दान सूची<br />
	7. अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) महादान (FAQ)</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	आइए जानते हैं कि वे महादान कौन से हैं और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उनका क्या फल मिलता है:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	अधिकमास के 5 महादान और उनके फल</h3>
<h3>
	<strong>1. 33 मालपुए का दान (सबसे प्रमुख दान)</strong></h3>
<p>
	अधिकमास में कांसे के बर्तन में 33 मालपुए रखकर दान करने का सबसे बड़ा महत्व है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>33 की संख्या ही क्यों? </strong>ज्योतिषीय गणना के अनुसार अधिकमास लगभग 32-33 महीने के बाद आता है, इसलिए 32 महीनों के प्रतीक स्वरूप और एक अतिरिक्त विषम संख्या जोड़कर कुल 33 मालपुए दान किए जाते हैं। धार्मिक रूप से इसे 33 कोटि यानी प्रकार देवी-देवताओं के सम्मान से भी जोड़ा जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मिलने वाला फल: </strong>शास्त्रों के अनुसार, जो व्यक्ति पूरी श्रद्धा से यह दान करता है, उसके जीवन के सभी मानसिक, शारीरिक और आर्थिक संकट दूर हो जाते हैं। इसे &#39;दरिद्रता नाशक दान&#39; भी कहा जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. दीपदान (घृत दीप दान)</h3>
<p>
	इस पूरे महीने में प्रतिदिन शाम के समय पीपल के पेड़ के पास, मंदिर में, तुलसी जी के सम्मुख या बहती नदी में घी का दीपक जलाना या कांसे के पात्र में घी भरकर दीपक सहित दान करना महापुण्यदायी माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>फल: </strong>दीपदान करने से वंश की वृद्धि होती है, अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है और घर का अंधकार अर्थात् कष्ट, कलह और नकारात्मकता दूर होकर सुख-समृद्धि का आगमन होता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/purushottam-maas-2026-mantra-path-aur-chalisa-ke-labh-126051600036_1.html" target="_blank">पुरुषोत्तम मास 2026: कौन से मंत्र, पाठ और चालीसा दिलाते हैं अपार पुण्य और सुख-समृद्धि?</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	<strong>3. धार्मिक पुस्तकों का दान (ग्रंथ दान)</strong></h3>
<p>
	अधिकमास विशुद्ध रूप से भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की भक्ति का महीना है। इस दौरान श्रीमद्भागवत गीता, विष्णु सहस्रनाम या रामायण जैसी पवित्र पुस्तकों का दान किसी योग्य ब्राह्मण या जिज्ञासु व्यक्ति को करना चाहिए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>फल: </strong>शास्त्रों में ज्ञान और धर्मग्रंथ के दान को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इससे व्यक्ति को वैकुंठ धाम/ मोक्ष की प्राप्ति होती है और पितर प्रसन्न होते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. सुहाग सामग्री और वस्त्र दान</h3>
<p>
	सुहागिन महिलाओं को इस महीने में लाल वस्त्र, हरी चूड़ियां, सिंदूर, कुमकुम, मेहंदी जैसी सुहाग की 16 सामग्रियां दान करनी चाहिए। साथ ही जरूरतमंदों को मौसम के अनुकूल- जैसे सूती या ऊनी साफ वस्त्र देने चाहिए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मिलने वाला फल: </strong>सुहाग सामग्री के दान से महिलाओं को अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और संतान सुख का वरदान मिलता है। वस्त्र दान से व्यक्ति का मान-सम्मान समाज में बढ़ता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. अन्न और रसीले फलों का दान</h3>
<p>
	किसी भूखे व्यक्ति या ब्राह्मण को अनाज- जैसे गेहूं, चावल, दाल और इस मौसम के रसीले फल- आम, खरबूजा या जल से भरा कलश दान करना।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>फल: </strong>अन्न और जल दान को जीवन दान के समान माना गया है। इससे अन्नपूर्णा माता प्रसन्न रहती हैं और घर के भंडार कभी खाली नहीं होते। कुंडली के कई ग्रह दोष भी इस दान से शांत हो जाते हैं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/aarti-chalisa/purushottam-maas-ki-aarti-126052100017_1.html" target="_blank">अधिकमास: पुरुषोत्तम मास की आरती</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	<span style="font-size: 16px;">6. </span>तिथि के अनुसार विशेष दान सूची</h3>
<p>
	यदि आप पूरे महीने महादान नहीं कर पा रहे हैं, तो अधिकमास की अलग-अलग तिथियों पर इन चीजों का लघु दान भी कर सकते हैं:</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	तिथि: दान की जाने वाली वस्तु</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>प्रतिपदा (पहली तिथि):</strong> चांदी के पात्र या दीये में शुद्ध घी का दान</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>द्वितीया:</strong> कांसे के पात्र में सोने या मिश्री का दान</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>तृतीया: </strong>उत्तम चने की दाल या दही का दान</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>चतुर्थी व पंचमी: </strong>रेशमी या सूती वस्त्रों का दान</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अष्टमी:</strong> तिल और गुड़ का दान (राहु-केतु दोष शांति के लिए)</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>एकादशी व द्वादशी: </strong>गाय का शुद्ध दूध और गेहूं का दान</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अमावस्या/पूर्णिमा: </strong>33 मालपुए, खीर या कद्दू (पेठा) का दान</p>
<p>
	 </p>
<p>
	दान का मूल नियम: पुरुषोत्तम मास में कोई भी दान करते समय मन में अहंकार नहीं होना चाहिए। गुप्त रूप से और बिना किसी दिखावे के, निस्वार्थ भाव से किया गया छोटा सा दान भी भगवान विष्णु तुरंत स्वीकार कर लेते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	पुरुषोत्तम मास में दान का महत्व केवल वस्तु देने तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा, करुणा और परोपकार की भावना भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार किया गया दान भगवान विष्णु की कृपा दिलाने वाला माना गया है। इस पवित्र माह में अन्नदान, जलदान, गौसेवा, वस्त्रदान और धर्मग्रंथ दान जैसे कार्य विशेष पुण्य प्रदान करते हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	7. अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) महादान (FAQ)</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>1. अधिकमास या पुरुषोत्तम मास क्या है?</strong></p>
<p>
	अधिकमास हिंदू पंचांग का एक विशेष माह है, जो लगभग हर 32 महीने 16 दिन 8 घंटे बाद आता है। इसे भगवान विष्णु ने अपना नाम "पुरुषोत्तम मास" प्रदान किया था, इसलिए यह अत्यंत पवित्र माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>2. पुरुषोत्तम मास में दान का क्या महत्व है?</strong></p>
<p>
	धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस माह में किया गया दान, जप, तप और पूजा कई गुना अधिक पुण्यफल प्रदान करती है। दान से पापों का क्षय और पुण्य की वृद्धि होती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>3. पुरुषोत्तम मास में सबसे श्रेष्ठ दान कौन-सा माना गया है?</strong></p>
<p>
	अन्नदान को सबसे श्रेष्ठ दान माना गया है, क्योंकि इससे भूखे व्यक्ति की तृप्ति होती है और इसे महापुण्यदायक बताया गया है।<br />
	<br />
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/when-will-adhikmas-end-126052100023_1.html" target="_blank">पुरुषोत्तम मास 2026: कब समाप्त होगा अधिकमास?</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 16:15:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 13 Jun 2026 12:15:38 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Other Festivals]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[चातुर्मास कब से होंगे प्रारंभ, क्या है इसका महत्व?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/chaturmas-start-and-end-date-2026-126060900042_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/chaturmas-start-and-end-date-2026-126060900042_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/09/thumb/1_1/1781005412-9666.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/09/thumb/1_1/1781005412-9666.jpg</image>
      <description><![CDATA[आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं। इसी दिन चार माह के लिए देव सो जाते हैं। देवशयनी एकादशी से ही चातुर्मास प्रारंभ होता है जो देवउठनी एकादशी तक रहता है। हिंदू धर्म और पंचांग में चातुर्मास (चार महीने की अवधि) का बहुत बड़ा आध्यात्मिक ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="chaturmas start and end date 2026" class="imgCont" height="800" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/09/full/1781005412-9666.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="chaturmas start and end date 2026" width="1200" /></p>
	</p>
	आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं। इसी दिन चार माह के लिए देव सो जाते हैं। देवशयनी एकादशी से ही चातुर्मास प्रारंभ होता है जो देवउठनी एकादशी तक रहता है। हिंदू धर्म और पंचांग में चातुर्मास (चार महीने की अवधि) का बहुत बड़ा आध्यात्मिक महत्व है। इस दौरान ऋषि-मुनि, साधु-संत और आम श्रद्धालु व्रत, साधना और आत्म-संयम का पालन करते हैं। वर्ष 2026 में चातुर्मास की शुरुआत और इसके महत्व से जुड़ी पूरी जानकारी नीचे दी गई है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	चातुर्मास 2026 की महत्वपूर्ण तिथियां:</h3>
<p>
	साल 2026 में चातुर्मास की अवधि 119 दिनों की होगी:</p>
<p>
	<strong>प्रारंभ तिथि:</strong> 25 जुलाई 2026 (शनिवार)- आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू होगा।</p>
<p>
	<strong>समापन तिथि: </strong>20 November 2026 (शुक्रवार)- कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी (प्रबोधिनी एकादशी) पर इसका समापन होगा।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/other-festivals/ashadha-month-2026-126060600038_1.html" target="_blank">आषाढ़ का महीना 2026: क्या करें और किन गलतियों से बचें?</a></strong></p>
</p>
<h3>
	क्या है चातुर्मास?</h3>
<p>
	&#39;चातुर्मास&#39; का शाब्दिक अर्थ है चार महीने। हिंदू कैलेंडर के अनुसार इसमें मुख्य रूप से ये चार महीने आते हैं:</p>
<ul>
	<li>
		श्रावण (सावन)</li>
	<li>
		भाद्रपद (भादो)</li>
	<li>
		आश्विन (कुआर)</li>
	<li>
		कार्तिक (कार्तिका)</li>
</ul>
<p>
	 </p>
<p>
	पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु राजा बलि के आग्रह पर अगले चार महीनों के लिए पाताल लोक में जाकर योग निद्रा (Divine Slumber) में लीन हो जाते हैं। इसके बाद वे कार्तिक महीने की देवउठनी एकादशी को जागते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	चातुर्मास का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व</h3>
<p>
	मांगलिक कार्यों पर रोक: चूंकि इन चार महीनों में सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु विश्राम अवस्था में होते हैं, इसलिए इस दौरान विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत (जनेऊ), गृह प्रवेश और नए व्यापार की शुरुआत जैसे सभी शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>साधना और पुण्य संचय का समय: </strong>मांगलिक कार्य बंद होने के कारण यह समय पूरी तरह से भगवान की भक्ति, ध्यान, जप और दान-पुण्य के लिए आरक्षित हो जाता है। माना जाता है कि इस दौरान किए गए जप-तप का फल सामान्य दिनों से कई गुना अधिक मिलता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>साधु-संतों का वर्षावास: </strong>यह समय भारत में मानसून (वर्षा ऋतु) का होता है। पुराने समय से ही जैन और हिंदू साधु-संत इन चार महीनों में यात्राएं बंद कर देते हैं और एक ही स्थान पर रुककर साधना करते हैं, जिसे &#39;वर्षावास&#39; या &#39;चौमासा&#39; भी कहा जाता है। इससे रास्ते में आने वाले छोटे जीव-जंतुओं की पैरों तले कुचलने से रक्षा होती है।</p>
<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="" class="imgCont" height="675" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2025-12/15/full/1765774400-602.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="" width="1200" /></p>
</p>
<h3>
	स्वास्थ्य और वैज्ञानिक दृष्टिकोण (नियम और परहेज)</h3>
<p>
	चातुर्मास के दौरान खान-पान को लेकर हमारे शास्त्रों में कड़े नियम बनाए गए हैं, जिनका वैज्ञानिक आधार भी है। चूंकि यह समय पूरी तरह से वर्षा ऋतु और मौसम के बदलाव का होता है, इसलिए पाचन क्रिया (Digestion) कमजोर हो जाती है और संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। शास्त्रों के अनुसार इन चार महीनों में अलग-अलग चीजें छोड़ने का नियम है:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>पहले महीने (सावन): </strong>हरी पत्तेदार सब्जियां खाने से बचना चाहिए (क्योंकि बारिश में इनमें कीड़े और बैक्टीरिया पनपते हैं)।</p>
<p>
	<strong>दूसरे महीने (भाद्रपद): </strong>दही और उससे बनी चीजों का त्याग किया जाता है।</p>
<p>
	<strong>तीसरे महीने (आश्विन): </strong>दूध का सेवन कम या बंद किया जाता है।</p>
<p>
	<strong>चौथे महीने (कार्तिक):</strong> प्याज, लहसुन, तामसिक भोजन और दालों (विशेषकर द्विदल जैसे चना, मसूर) से परहेज किया जाता है।</p>
<p>
	<strong>डीटॉक्स: </strong>संक्षेप में कहें तो, चातुर्मास शरीर को डीटॉक्स (शुद्ध) करने, मन को शांत करने और अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा को बढ़ाने का एक अद्भुत वार्षिक अवसर है।</p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 09 Jun 2026 17:10:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 09 Jun 2026 17:15:39 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Hindu Religion]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[दुनिया की प्रमुख विचारधाराएं कौन-कौन सी हैं? जानिए पूरी सूची और उनकी खासियतें]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/religious-article/capitalism-socialism-communism-and-other-ideologies-list-126060800024_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/08/thumb/1_1/1780906769-1825.jpg"/>
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      <description><![CDATA[ideologies list: विश्व के इतिहास में दर्शन (Philosophy), राजनीति, समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में विचारों और सिद्धांतों की एक विशाल श्रृंखला रही है। इन सिद्धांतों को ही हिंदी में 'वाद' और अंग्रेजी में '-ism' कहा जाता है। दुनिया के सभी ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="ideologies list" class="imgCont" height="675" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/08/full/1780906769-1825.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="ideologies list" width="1200" /></p>
	</p>
	ideologies list: विश्व के इतिहास में दर्शन (Philosophy), राजनीति, समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में विचारों और सिद्धांतों की एक विशाल श्रृंखला रही है। इन सिद्धांतों को ही हिंदी में &#39;वाद&#39; और अंग्रेजी में &#39;-ism&#39; कहा जाता है। दुनिया के सभी प्रमुख &#39;वादों&#39; को उनके विषय के आधार पर निम्नलिखित प्रमुख श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. धार्मिक और आध्यात्मिक वाद (Religious & Spiritual Isms)</h3>
<p>
	ये वाद ईश्वर, ब्रह्मांड और आत्मा के अस्तित्व की व्याख्या करते हैं:</p>
<p>
	<strong>आस्तिकता (Theism):</strong> ईश्वर के अस्तित्व और उसकी सर्वोच्च सत्ता को स्वीकार करना।</p>
<p>
	<strong>नास्तिकता (Atheism):</strong> ईश्वर और अलौकिक शक्तियों के अस्तित्व को पूरी तरह खारिज करना (जैन, बौद्ध)।</p>
<p>
	<strong>अज्ञेयवाद (Agnosticism): </strong>यह मानना कि ईश्वर है या नहीं, इसे मनुष्य निश्चित रूप से नहीं जान सकता। (ताओ, जैन, बौद्ध और हिंदू धर्म का सांख्य एवं अद्वैत दर्शन इसके करीब हैं)।</p>
<p>
	<strong>एकेश्वरवाद (Monotheism): </strong>केवल एक ही ईश्वर को मानना (जैसे यहूदी, ईसाई और इस्लाम)।</p>
<p>
	<strong>बहुदेववाद (Polytheism):</strong> एक से अधिक को ईश्‍वर मानना या अधिक देवी-देवताओं की पूजा और अस्तित्व को मानना।</p>
<p>
	<strong>सर्वेश्वरवाद (Pantheism): </strong>यह मानना कि संपूर्ण ब्रह्मांड और प्रकृति ही ईश्वर है; प्रकृति से अलग कोई भगवान नहीं है।</p>
<p>
	<strong>एकात्मवाद (Monism): </strong>यह मानना कि संपूर्ण जगत में केवल एक ही तत्व (जैसे ब्रह्म या चेतना) सत्य है, बाकी सब उसका रूप हैं।</p>
<p>
	<strong>नियतिवाद: (Determinism): </strong>सबकुछ नियत है। ईश्वर या कर्म में जैसा कुछ नहीं है। जो कुछ है नियतिवाद है। पुरुषार्थ, पराक्रम वीर्य से नहीं, किंतु नियति से ही जीव की शुद्धि या अशुद्धि होती है। इन्हें आजीवक भी कहते हैं।<br />
	 </p>
<p>
	<strong>नोट:</strong> हिंदू धर्म में उपरोक्त सभी दर्शनों का समावेश है, क्योंकि हिंदुइज्म मानता है कि सत्य को किसी वाद में नहीं समेट सकते हैं। ऋग्वेद में सभी तरह के वादों का वर्णन मिलता है। हिंदू दर्शन मुलत: खोज और मोक्ष को महत्व देता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. राजनैतिक और आर्थिक वाद (Political & Economic Isms)</h3>
<p>
	इन वादों ने दुनिया की सरकारों, देशों की सीमाओं और अर्थव्यवस्थाओं को आकार दिया है:</p>
<p>
	<strong>पूंजीवाद (Capitalism): </strong>मुक्त बाजार (Free Market) और निजी संपत्ति का समर्थन करने वाली व्यवस्था, जहां उत्पादन के साधनों पर निजी स्वामित्व होता है।</p>
<p>
	<strong>समाजवाद (Socialism): </strong>संपत्ति और संसाधनों पर समाज या सरकार के नियंत्रण का समर्थन, ताकि अमीरी-गरीबी की खाई कम हो। (हालांकि कोई भी सरकार ऐसा कर नहीं पाती है और संभव भी नहीं है, बगीचे में एक ही तरह के फूल को उगाना तर्कसंगत नहीं है)</p>
<p>
	<strong>साम्यवाद (Communism): </strong>कार्ल मार्क्स के विचारों पर आधारित, जो एक वर्गहीन और राज्यहीन समाज की कल्पना करता है जहां सब कुछ सबका होता है (जैसे सोवियत संघ या चीन का मूल मॉडल)। (हालांकि कोई भी सरकार ऐसा कर नहीं पाती है और संभव भी नहीं है, बगीचे में एक ही तरह के फूल को उगाना तर्कसंगत नहीं है)</p>
<p>
	<strong>फासीवाद / नाजीवाद (Fascism / Nazism): </strong>उग्र राष्ट्रवाद और तानाशाही का समर्थन करने वाली विचारधारा, जहां राष्ट्र सर्वोपरि होता है और व्यक्तिगत स्वतंत्रता खत्म कर दी जाती है।</p>
<p>
	<strong>साम्राज्यवाद (Imperialism):</strong> किसी शक्तिशाली देश द्वारा अपनी सीमाओं का विस्तार करने और दूसरे कमजोर देशों को गुलाम बनाने की नीति।</p>
<p>
	<strong>उपनिवेशवाद (Colonialism): </strong>एक देश द्वारा दूसरे देश पर आर्थिक और राजनैतिक नियंत्रण स्थापित करना (जैसे अंग्रेजों का भारत पर राज)।</p>
<p>
	<strong>अराजकतावाद (Anarchism):</strong> किसी भी प्रकार की सरकार, राज्य या कानून का विरोध करना; इनका मानना है कि समाज बिना किसी सत्ता के खुद चल सकता है।</p>
<p>
	<strong>लोकतंत्रवाद (Democratism): </strong>जनता के शासन और लोकतांत्रिक मूल्यों (चुनाव, समानता) का समर्थन।</p>
<p>
	<strong>नोट: </strong>भारतीय दर्शन और परंपरा लोकतंत्र और अधिनायकवाद को बीच के रास्ते का समर्थन करता है। जैसे रामराज्य और विक्रमादित्य का राज्य।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. दार्शनिक और ज्ञानमीमांसीय वाद (Philosophical Isms)</h3>
<p>
	ये मनुष्य की बुद्धि, सत्य की खोज और जीवन जीने के नजरिए से जुड़े हैं:</p>
<p>
	<strong>आदर्शवाद (Idealism):</strong> भौतिक संसार की तुलना में विचारों (Ideas), चेतना और आत्मा को प्राथमिक मानना।</p>
<p>
	<strong>भौतिकवाद (Materialism):</strong> यह मानना कि केवल पदार्थ (Matter) ही सत्य है, आत्मा या चेतना जैसी कोई चीज नहीं होती।</p>
<p>
	<strong>यथार्थवाद (Realism): </strong>चीजों को वैसी ही देखना जैसी वे वास्तव में हैं, न कि कल्पना या आदर्श के रूप में।</p>
<p>
	<strong>अस्तित्ववाद (Existentialism): </strong>यह मानना कि मनुष्य का अस्तित्व पहले आता है और वह अपने जीवन का अर्थ और उद्देश्य खुद चुनता है (फ्री विल)।</p>
<p>
	<strong>बुद्धिवाद (Rationalism): </strong>ज्ञान प्राप्ति के लिए केवल तर्क और बुद्धि को ही एकमात्र साधन मानना।</p>
<p>
	<strong>अनुभववाद (Empiricis</strong>m): यह मानना कि सच्चा ज्ञान केवल इंद्रियों के अनुभव और प्रयोगों (Observations) से ही मिल सकता है।</p>
<p>
	<strong>उपयोगितावाद (Utilitarianism):</strong> वह सिद्धांत जो कहता है कि वही कार्य सही है जिससे "अधिकतम लोगों को अधिकतम सुख" मिले।</p>
<p>
	<strong>घोर निराशावाद (Nihilism): </strong>यह मानना कि जीवन का कोई अंतर्निहित अर्थ, उद्देश्य या नैतिक मूल्य नहीं है; सब कुछ शून्य है।</p>
<p>
	<strong>नोट: </strong>भारतीय दर्शन और धर्म में यथार्थवाद, अस्तित्ववाद, बुद्धिवाद और अनुभववाद की चर्चा अधिक होती है। </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. सामाजिक और सांस्कृतिक वाद (Social & Cultural Isms)</h3>
<p>
	ये समाज के ढांचे, अधिकारों और इंसानी व्यवहार को प्रभावित करते हैं:</p>
<p>
	<strong>नारीवाद (Feminism): </strong>महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक अधिकारों और लैंगिक समानता (Gender Equality) का समर्थन।</p>
<p>
	<strong>मानवतावाद (Humanism):</strong> किसी दैवीय शक्ति के बजाय मनुष्य, उसकी भलाई और उसकी क्षमताओं को केंद्र में रखना।</p>
<p>
	<strong>व्यक्तिवाद (Individualism): </strong>समाज या राज्य की तुलना में व्यक्ति की स्वतंत्रता और अधिकारों को अधिक महत्व देना।</p>
<p>
	<strong>राष्ट्रवाद (Nationalism): </strong>अपने देश के प्रति वफादारी, गर्व और देशहित को सर्वोपरि रखने की भावना।</p>
<p>
	<strong>वैश्वीकरण / भूमंडलीकरण (Globalism): </strong>पूरी दुनिया को एक साझा बाजार और समाज के रूप में देखना (वसुधैव कुटुंबकम का आधुनिक रूप)।</p>
<p>
	<strong>पर्यावरणवाद (Environmentalism): </strong>प्रकृति, पर्यावरण और वन्यजीवों के संरक्षण को समर्पित विचारधारा।</p>
<p>
	नोट: भारतीय धर्म, दर्शन और परंपरा में सभी को महत्व दिया गया है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	संक्षेप में कहें तो:</h3>
<p>
	इंसानी दिमाग ने जब भी किसी एक विचार को बहुत गहराई से पकड़ा और उसे जीवन जीने का आधार बनाया, तो वहां एक नए &#39;वाद&#39; का जन्म हुआ। आज भी दुनिया इन्हीं वादों के टकराव और तालमेल से चल रही है, लेकिन जरूरत इस बात की है कि मनुष्‍य को यह समझना होगा कि सभी वादों से ज्याद महत्वपूर्ण है मनुष्‍य-मनुष्‍यता, व्यक्ति स्वतंत्रता, ज्ञान-विज्ञानता और प्रकृति संवरक्षण।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>संकलन: अनिरुद्ध जोशी</strong></p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 08 Jun 2026 13:47:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 08 Jun 2026 16:32:13 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Religious Article]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[भानु सप्तमी की पौराणिक कथा]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/religious-stories/bhanu-saptami-ki-katha-kahani-126060500055_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/05/thumb/1_1/1780660994-1984.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/05/thumb/1_1/1780660994-1984.jpg</image>
      <description><![CDATA[धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भानु सप्तमी (जिसे सूर्य सप्तमी भी कहा जाता है) भगवान सूर्य देव को समर्पित एक अत्यंत शुभ दिन है। जब भी शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि रविवार के दिन पड़ती है, तो उसे 'भानु सप्तमी' कहा जाता है। इस व्रत और दिन की महिमा से जुड़ी 3 ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Lord surya and Sun" class="imgCont" height="675" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/05/full/1780660994-1984.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="Bhanu Saptami ki katha" width="1200" /></p>
	</p>
	धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भानु सप्तमी (जिसे सूर्य सप्तमी भी कहा जाता है) भगवान सूर्य देव को समर्पित एक अत्यंत शुभ दिन है। जब भी शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि रविवार के दिन पड़ती है, तो उसे &#39;भानु सप्तमी&#39; कहा जाता है। इस व्रत और दिन की महिमा से जुड़ी 3 पौराणिक कथाएं सबसे ज्यादा प्रचलित हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	कथा 1: सूर्य देव के प्रकट होने की कथा (मुख्य कथा)</h3>
<p>
	<strong>सूर्यदेव: </strong>पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, सृष्टि के प्रारंभ में भगवान सूर्य देव इसी दिन पहली बार अपने दिव्य रूप में प्रकट हुए थे।</p>
<p>
	<strong>कथा का सार: </strong>महर्षि कश्यप और उनकी पत्नी अदिति के पुत्र के रूप में सूर्य देव का जन्म हुआ था। शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को सूर्य देव ने पहली बार ब्रह्मांड को अपने प्रकाश से आलोकित किया था और उनका रथ सात घोड़ों पर सवार होकर आकाश में निकला था।</p>
<p>
	चूंकि यह उनका &#39;जन्मदिन&#39; माना जाता है, इसलिए इस दिन को &#39;भानु सप्तमी&#39; (भानु यानी सूर्य) के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से व्यक्ति को आरोग्य (अच्छी सेहत) और तेज की प्राप्ति होती है।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/other-festivals/adhikmas-bhanu-saptami-2026-date-shubh-muhurat-mahatva-surya-puja-126053000030_1.html" target="_blank">अधिकमास की भानु सप्तमी 2026 कब है? जानें तिथि, महत्व, शुभ मुहूर्त और सूर्यदेव को प्रसन्न करने के उपाय</a></strong></p>
</p>
<h3>
	कथा 2: इंदुमती की कथा (व्रत का महत्व बताने वाली कथा)</h3>
<p>
	भविष्य पुराण में भानु सप्तमी के व्रत के महत्व को समझाने के लिए एक वेश्या की कथा आती है, जो इस प्रकार है:</p>
<p>
	प्राचीन काल में इन्दुमती नाम की एक वेश्या थी। उसने अपने जीवन में कभी कोई पुण्य या धार्मिक कार्य नहीं किया था, लेकिन जैसे-जैसे उसका बुढ़ापा नजदीक आया, उसे परलोक सुधारने की चिंता सताने लगी। वह मुक्ति का मार्ग खोजने के लिए महर्षि वसिष्ठ के पास पहुंची। उसने मुनि से प्रार्थना की, "हे ऋषिवर! मैंने जीवनभर कोई सत्कर्म नहीं किया। कृपा कर मुझे कोई ऐसा सरल उपाय या व्रत बताएं, जिससे मुझे मोक्ष मिल सके और मेरे सारे पाप धुल जाएं।"</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	महर्षि वसिष्ठ ने उपाय बताया:</h3>
<p>
	महर्षि वसिष्ठ ने कहा, "हे इन्दुमती! महिलाओं के लिए मुक्ति और सौभाग्य देने वाला &#39;अचला सप्तमी&#39; या &#39;भानु सप्तमी&#39; का व्रत सबसे उत्तम है। शुक्ल पक्ष की जिस सप्तमी को रविवार हो, उस दिन पवित्र नदी में स्नान करके सूर्य देव को दीपदान करो और पूरे दिन निराहार रहकर उनकी पूजा करो।"<br />
	 </p>
<p>
	इन्दुमती ने महर्षि के कहे अनुसार पूरी श्रद्धा और नियम के साथ भानु सप्तमी का व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से जब उसने अपना शरीर त्यागा, तो उसके सारे पाप नष्ट हो चुके थे। उसे स्वर्ग लोक की प्राप्ति हुई और वहां उसे अप्सराओं की प्रधान (नायिका) बनने का गौरव प्राप्त हुआ।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	कथा 3: श्री कृष्ण के पुत्र शाम्ब की कथा:</h3>
<p>
	जिसके अनुसार शाम्ब, जो कि भगवान श्री कृष्ण के पुत्र थे, उन्हें अपने शारीरिक बल और सुंदरता पर बहुत अधिक अभिमान हो गया था। अपने इसी अभिमान के चलते उन्होंने ऋषि दुर्वासा का अपमान कर दिया। और शाम्ब की यह धृष्ठता को देखकर मुनि दुर्वासा ने क्रोध में आकर शाम्ब को कुष्ठ रोग होने का श्राप दे दिया। तब भगवान श्री कृष्ण ने अपने पुत्र शाम्ब को भगवान सूर्य देव की उपासना करने के लिए कहा था और शाम्ब ने पिता की आज्ञा मानकर सूर्य भगवान की आराधना की थी, जिसके फलस्वरूप उन्हें कुष्ठ रोग मुक्ति मिली थी।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	भानु सप्तमी का धार्मिक संदेश</h3>
<p>
	यह कथा बताती है कि भानु सप्तमी के दिन जो भी व्यक्ति सूर्य देव की पूजा, व्रत और दान करता है, उसके कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। विशेषकर गंभीर बीमारियों से मुक्ति और मान-सम्मान की प्राप्ति के लिए इस कथा को सुनना और व्रत रखना बेहद फलदायी माना गया है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अत: इस व्रत का बहुत अधिक महत्व होने के कारण जो भी व्यक्ति भानु सप्तमी का व्रत रखकर विधिपूर्वक सूर्य देव का पूजन तथा अर्चना करते हैं उन्हें सेहत, संतान की प्राप्ति तथा सुख और धनदायक जीवन प्राप्त होता है। अत: हर व्यक्ति को भानु सप्तमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में जागकर स्नानादि से निवृत्त होकर सूर्यदेव को जल का अर्घ्य जरूर अर्पित करना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 17:26:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 05 Jun 2026 17:34:14 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[religious stories]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[World Environment Day 2026: वृक्ष से जुड़े हिंदू व्रत एवं त्योहार]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/hindu-vratas-and-festivals-associated-with-trees-126060400060_1.html</link>
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      <description><![CDATA[हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में वृक्षों को देवतुल्य माना गया है, इसलिए कई ऐसे त्योहार और व्रत हैं जो पूरी तरह से वृक्षों की पूजा, उनके संरक्षण और प्रकृति के प्रति आभार जताने के लिए समर्पित हैं। मुख्य रूप से वृक्षों से जुड़े प्रमुख त्योहार और व्रत ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Neem, Banyan, and Peepal trees in the picture." class="imgCont" height="1024" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/04/full/1780579285-4685.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="Fasts and Festivals of Tree Worship in Hinduism" width="1536" /></p>
	</p>
	हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में वृक्षों को देवतुल्य माना गया है, इसलिए कई ऐसे त्योहार और व्रत हैं जो पूरी तरह से वृक्षों की पूजा, उनके संरक्षण और प्रकृति के प्रति आभार जताने के लिए समर्पित हैं। मुख्य रूप से वृक्षों से जुड़े प्रमुख त्योहार और व्रत निम्नलिखित हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. वट सावित्री व्रत (बरगद/वट वृक्ष)</h3>
<p>
	यह त्योहार पूरी तरह से बरगद (वट) के वृक्ष को समर्पित है। ज्येष्ठ मास की अमावस्या (और कुछ क्षेत्रों में पूर्णिमा) को महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए वट वृक्ष की पूजा करती हैं, उसमें जल अर्पित करती हैं और उसके चारों ओर सूत का धागा लपेटकर परिक्रमा करती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार वट वृक्ष में त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) का वास होता है और इसकी आयु बहुत लंबी होती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. आंवला नवमी या अक्षय नवमी (आंवला वृक्ष)</h3>
<p>
	कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला नवमी मनाई जाती है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है और इसके नीचे बैठकर भोजन बनाने व ग्रहण करने की परंपरा है। आयुर्वेद में आंवले को आरोग्य बढ़ाने वाला &#39;सुपरफूड&#39; माना गया है, और धार्मिक दृष्टि से इस दिन आंवले के संरक्षण का संकल्प लिया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. तुलसी विवाह (तुलसी का पौधा)</h3>
<p>
	कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवोत्थान एकादशी) के दिन तुलसी के पौधे का विवाह भगवान शालिग्राम (विष्णु जी) के साथ अत्यंत धूमधाम से कराया जाता है। तुलसी को सभी वनस्पतियों का प्रतिनिधि और औषधियों की रानी माना गया है। यह त्योहार घर-घर में तुलसी के रोपण और उसकी देखरेख के महत्व को रेखांकित करता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. विजयादशमी / दशहरा (शमी वृक्ष)</h3>
<p>
	दशहरे के दिन शमी के वृक्ष (जिसे खिजड़े का पेड़ भी कहा जाता है) की विशेष पूजा करने की प्राचीन परंपरा है। महाभारत काल में पांडवों ने अपने अस्त्र-शस्त्र शमी के वृक्ष में ही छुपाए थे। ज्योतिष और वनस्पति शास्त्र के अनुसार, शमी का वृक्ष पर्यावरण और कृषि के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यह आने वाले मौसम का पूर्वानुमान लगाने में भी सहायक माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. हरियाली तीज (प्रकृति और वनस्पति)</h3>
<p>
	श्रावण (सावन) मास में मनाई जाने वाली हरियाली तीज सीधे तौर पर प्रकृति के हरे-भरे स्वरूप और वनस्पतियों के स्वागत का त्योहार है। इस दिन बागों में पेड़ों पर झूले डाले जाते हैं और लोक गीतों के माध्यम से वृक्षों व प्रकृति की सुंदरता का उत्सव मनाया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	6. अश्वत्थोपनयन व्रत (पीपल वृक्ष पूजा): </h3>
<p>
	जब भी अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है, तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस दिन पीपल के वृक्ष की 108 बार परिक्रमा करने और जल चढ़ाने का विशेष विधान है। पीपल को &#39;प्राणवायु (ऑक्सीजन) का भंडार&#39; कहा जाता है, इसलिए इसकी पूजा का सीधा संबंध दीर्घायु और आरोग्य से जुड़ा है। हिंदू धर्म में एक अत्यंत पवित्र और फलदायी अनुष्ठान है, जिसमें पीपल के वृक्ष को साक्षात त्रिदेव का स्वरूप मानकर पूजा की जाती है। इस व्रत को करने से आरोग्य, दीर्घायु, सौभाग्य और सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति प्राप्त होती है। इसके अलावा सावन महीने में पड़ने वाले शनिवार के दिन &#39;अश्वत्थ मारुति पूजन&#39; किया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	विशेष: दक्षिण भारत में करगा उत्सव और जनजातीय समाजों में सरहुल जैसे त्योहार मनाए जाते हैं, जो पूरी तरह से पेड़ों, जंगलों और प्रकृति की पूजा पर आधारित हैं।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 18:44:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 04 Jun 2026 18:52:17 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Hindu Religion]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Adhik Panchami 2026: अधिक पंचमी क्या है, जानें महत्व, पूजा विधि और उपाय]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/religious-article/what-is-adhik-panchami-know-its-importance-method-of-worship-and-remedies-126060400006_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/religious-article/what-is-adhik-panchami-know-its-importance-method-of-worship-and-remedies-126060400006_1.html</guid>
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      <description><![CDATA[Adhik Panchami Significance: धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अधिक मास या पुरुषोत्तम मास के शुक्ल या कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को अधिक पंचमी कहा जाता है। अधिक मास लगभग हर तीन वर्ष में एक बार आता है, इसी कारण उस महीने की पंचमी तिथि को 'अधिक पंचमी' के नाम से ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt=" Scene of worship of Shri Hari Vishnu on Adhik Panchami of Purushottam month" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/04/full/1780551237-3048.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Purushottam Maas Panchami 2026: </strong>हिंदू पंचांग में &#39;अधिक पंचमी&#39; का संबंध अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) से है। जब अधिक मास के कृष्ण पक्ष या शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि आती है, तो उसे &#39;अधिक पंचमी&#39; कहा जाता है। चूंकि अधिक मास भगवान विष्णु को समर्पित है, इसलिए इस पूरे महीने की हर तिथि का महत्व सामान्य दिनों से कहीं अधिक बढ़ जाता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/adhikmaas-guru-pradosh-vrat-2026-mahatva-puja-vidhi-katha-126052000039_1.html" target="_blank">3 वर्ष बाद आया अधिकमास का गुरु प्रदोष, जानिए महत्व और कथा</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक पंचमी के दिन भगवान विष्णु की पूजा, व्रत, जप, दान और पुण्य कर्म करने से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का आगमन होता है। यह दिन आत्मशुद्धि, आध्यात्मिक उन्नति और भगवान की कृपा प्राप्त करने के लिए विशेष माना गया है। कई श्रद्धालु इस दिन गीता पाठ, विष्णु सहस्रनाम का पाठ और गरीबों को दान देकर पुण्य अर्जित करते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अधिक पंचमी पर किए गए धार्मिक उपाय ग्रह दोषों को शांत करने और जीवन की बाधाओं को दूर करने में सहायक माने जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान, जप और पूजा कई गुना फल प्रदान करता है। इसलिए अधिक पंचमी को पुण्य संचय और ईश्वर भक्ति का श्रेष्ठ अवसर माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<ul>
	<li>
		अधिक पंचमी का महत्व</li>
	<li>
		अधिक पंचमी पर क्या करें? जानें पूजा विधि और उपाय</li>
</ul>
<p>
	 </p>
<h3>
	आइए यहां जानते हैं अधिक पंचमी का क्या महत्व है और इस दिन क्या करना फलदायी होता है। पढ़ें अधिक पंचमी का महत्व, पूजन की विधि और उपाय... </h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	अधिक पंचमी का महत्व</h3>
<p>
	हिंदू धर्म में अधिक मास को बहुत पवित्र माना गया है। इस महीने में किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना होकर मिलता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>दोषों से मुक्ति:</strong> इस दिन भगवान विष्णु (श्रीहरि) और माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन के सभी कष्टों, पापों और कुंडली के दोषों से मुक्ति मिलती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अक्षय फल की प्राप्ति: </strong>मान्यता है कि अधिक पंचमी के दिन किए जाने वाले दान-पुण्य और व्रत का फल कभी नष्ट नहीं होता, वह अक्षय बना रहता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मानसिक शांति:</strong> इस तिथि पर पूजा-पाठ और ध्यान करने से मानसिक तनाव दूर होता है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	अधिक पंचमी पर क्या करें? जानें पूजा विधि और उपाय</h3>
<p>
	यदि आप अधिक पंचमी के दिन विशेष लाभ पाना चाहते हैं, तो निम्नलिखित कार्य कर सकते हैं:<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/when-will-adhikmas-end-126052100023_1.html" target="_blank">पुरुषोत्तम मास 2026: कब समाप्त होगा अधिकमास?</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. श्रीहरि विष्णु और लक्ष्मी जी की पूजा</h3>
<p>
	सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले रंग के वस्त्र धारण करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	भगवान विष्णु को पीले फूल, पीले फल, चंदन और तुलसी दल यानी तुलसी के पत्ते अर्पित करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	माता लक्ष्मी को मखाने की खीर या सफेद मिठाई का भोग लगाएं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. महामंत्रों का जाप</h3>
<p>
	इस दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना या नीचे दिए गए मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	- &#39;ॐ नमो भगवते वासुदेवाय&#39;</p>
<p>
	- &#39;ॐ श्री विष्णवे नमः&#39;</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. दीपदान का विशेष महत्व</h3>
<p>
	अधिक मास में दीपदान (दीपक जलाना) सबसे उत्तम माना गया है। पंचमी की शाम को घर के मंदिर में, तुलसी के पौधे के पास और संभव हो तो किसी पवित्र नदी या पीपल के पेड़ के नीचे घी का दीपक जरूर जलाएं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. दान-पुण्य</h3>
<p>
	पंचमी तिथि पर भूखे लोगों को भोजन कराना, पीले अनाज- जैसे चने की दाल, पीले कपड़े या केले का दान करने से बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है और भाग्य का साथ मिलता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>ध्यान दें: </strong>अधिक मास (मलमल मास) में विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक व शुभ कार्य वर्जित होते हैं। इसलिए अधिक पंचमी के दिन केवल ईश्वर की भक्ति, साधना, व्रत और दान-पुण्य पर ही ध्यान देना चाहिए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vastu-fengshui/the-astrological-connection-of-plants-and-trees-126060400004_1.html" target="_blank">पेड़-पौधों का ज्योतिष कनेक्शन: 100 यज्ञों के बराबर पुण्य देता है सिर्फ एक पौधा! जानें किस्मत चमकाने वाली 11 जादुई बातें</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 11:11:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 04 Jun 2026 11:14:54 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Religious Article]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[जून 2026 में शुक्र प्रदोष व्रत कब है? कैसे करें पूजन, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और कथा]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/shukra-pradosh-vrat-date-june-2026-126060300044_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/shukra-pradosh-vrat-date-june-2026-126060300044_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/03/thumb/1_1/1780486725-8383.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Shukra Pradosh Vrat 2026: इस बार अधिक मास के कृष्ण पक्ष में शुक्र प्रदोष व्रत शुक्रवार, 12 जून 2026 को मनाया जा रहा है। शास्त्रों के अनुसार प्रदोष काल में भगवान शिव की आराधना करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और सभी प्रकार के दोषों से मुक्ति मिलती ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Picture depicting the worship of Lord Shiva on Shukra Pradosh fast" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/03/full/1780486725-8383.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>June 2026 Shukra Pradosh Vrat: </strong>हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने के लिए सबसे उत्तम माना गया है। हर महीने के दोनों पक्षों (कृष्ण और शुक्ल) की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। जब त्रयोदशी तिथि शुक्रवार के दिन पड़ती है, तो उसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। शुक्रवार के दिन पड़ने वाले इस प्रदोष व्रत से सुख-समृद्धि मिलती है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-zodiac-signs/conjunction-of-venus-and-jupiter-126060300034_1.html" target="_blank">कर्क राशि में गुरु और शुक्र की युति से बना ये खास राजयोग, 4 राशियों के लिए धनवर्षा</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>इस साल जून 2026 में ज्येष्ठ मास (अधिकमास) के कृष्ण पक्ष में शुक्र प्रदोष व्रत  12 जून 2026 को पड़ रहा है। आइए जानते हैं इसकी सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्व और व्रत कथा:</strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	जून 2026 शुक्र प्रदोष व्रत: तिथि व शुभ मुहूर्त</h3>
<p>
	इस बार त्रयोदशी तिथि की शुरुआत और प्रदोष काल (शाम का समय) का संयोग शुक्रवार को बन रहा है, इसलिए व्रत 12 जून को ही रखा जाएगा। साथ ही इस दिन सुबह के समय सर्वार्थ सिद्धि योग का महासंयोग भी बन रहा है, जो पूजा के फल को कई गुना बढ़ा देता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	शुक्र प्रदोष व्रत की तारीख: 12 जून 2026, शुक्रवार</h3>
<p>
	त्रयोदशी तिथि आरंभ- 12 जून 2026 को शाम 07:36 बजे से</p>
<p>
	त्रयोदशी तिथि समाप्त- 13 जून 2026 को शाम 04:07 बजे तक</p>
<p>
	<strong>दिन का प्रदोष समय -</strong> 07:19 पी एम से 09:20 पी एम</p>
<p>
	<strong>शिव प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त-</strong> शाम 07:36 बजे से रात 09:20 बजे तक</p>
<p>
	कुल अवधि: 1 घंटा 44 मिनट</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	शुक्र प्रदोष व्रत की सरल पूजन विधि</h3>
<p>
	प्रदोष व्रत की मुख्य पूजा हमेशा शाम को सूर्यास्त के समय (प्रदोष काल) की जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	सुबह का संकल्प और स्नान</h3>
<p>
	प्रातःकाल/ सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र, यदि संभव हो तो सफेद या पीले पहनें। हाथ में जल लेकर भगवान शिव के सामने व्रत का संकल्प लें। सुबह सामान्य पूजा करें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	शाम की तैयारी (प्रदोष काल)</h3>
<p>
	सूर्यास्त से थोड़ा पहले यानी शाम को सूर्यास्त से करीब 1 घंटा पहले दोबारा स्नान करें या हाथ-पैर धोकर स्वच्छ हो जाएं। पूजा स्थल पर उत्तर या पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	शिवलिंग का अभिषेक</h3>
<p>
	मुख्य पूजा के रूप में पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से शिवलिंग का अभिषेक करें। इसके बाद शुद्ध जल चढ़ाएं। भगवान शिव को चंदन का तिलक लगाएं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	सामग्री अर्पित करना और मंत्र जप</h3>
<p>
	महादेव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल और अक्षत (साबुत चावल) चढ़ाएं। माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। इसके बाद &#39;ॐ नमः शिवाय&#39; मंत्र का जप करें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	कथा और आरती</h3>
<p>
	शुक्र प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें। धूप-दीप से शिव जी की आरती करें और भोग लगाएं। अगले दिन सुबह सूर्योदय के बाद पारण करें या व्रत खोलें। </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	शुक्र प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व</h3>
<p>
	धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अलग-अलग दिनों को पड़ने वाले प्रदोष व्रत का फल भी अलग होता है। शुक्र प्रदोष व्रत रखने से निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सौभाग्य और समृद्धि: </strong>यह व्रत जीवन से दरिद्रता को मिटाकर सुख, समृद्धि और वैभव लाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>दांपत्य जीवन में मधुरता: </strong>यदि पति-पत्नी के बीच अनबन रहती है, तो यह व्रत रखने से आपसी प्रेम बढ़ता है और वैवाहिक जीवन सुखमय होता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>संतान सुख: </strong>संतान प्राप्ति की कामना रखने वाले दंपत्तियों के लिए भी यह व्रत बेहद फलदायी माना गया है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>ग्रह दोष शांत:</strong> इस व्रत से कुंडली में शुक्र ग्रह मजबूत होता है और मानसिक शांति मिलती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	शुक्र प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा</h3>
<p>
	पौराणिक कथा के अनुसार, एक नगर में तीन मित्र रहते थे- राजकुमार, ब्राह्मण कुमार और तीसरा धनिक पुत्र। राजकुमार और ब्राह्मण कुमार विवाहित थे। धनिक पुत्र का भी विवाह हो गया था, लेकिन गौना शेष था। एक दिन तीनों मित्र स्त्रियों की चर्चा कर रहे थे। ब्राह्मण कुमार ने स्त्रियों की प्रशंसा करते हुए कहा- &#39;नारीहीन घर भूतों का डेरा होता है।&#39; धनिक पुत्र ने यह सुना तो तुरंत ही उसने अपनी पत्‍नी को लाने का निश्‍चय कर लिया। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	तब धनिक पुत्र के माता-पिता ने समझाया कि अभी शुक्र देवता डूबे हुए हैं। ऐसे में बहू-बेटियों को उनके घर से विदा करवा लाना शुभ नहीं माना जाता लेकिन धनिक पुत्र ने एक नहीं सुनी और ससुराल पहुंच गया। ससुराल में भी उसे मनाने की कोशिश की गई लेकिन वो जिद पर अड़ा रहा और कन्या के माता-पिता को उनकी विदाई करनी पड़ी। विदाई के बाद पति-पत्‍नी शहर से निकले ही थे कि बैलगाड़ी का पहिया निकल गया और बैल की टांग टूट गई। दोनों को चोट लगी लेकिन फिर भी वो चलते रहे।<br />
	 </p>
<p>
	कुछ दूर जाने पर उनका पाला डाकुओं से पड़ा। जो उनका धन लूटकर ले गए। दोनों घर पहूंचे। वहां धनिक पुत्र को सांप ने डंस लिया। उसके पिता ने वैद्य को बुलाया तो वैद्य ने बताया कि वो तीन दिन में मर जाएगा। जब ब्राह्मण कुमार को यह खबर मिली तो वो धनिक पुत्र के घर पहुंचा और उसके माता-पिता को शुक्र प्रदोष व्रत करने की सलाह दी और कहा कि इसे पत्‍नी सहित वापस ससुराल भेज दें। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	धनिक ने ब्राह्मण कुमार की बात मानी और ससुराल पहुंच गया, जहां उसकी हालत ठीक होती गई और शुक्र प्रदोष के माहात्म्य से सभी घोर कष्ट दूर हो गए। इस दिन व्रत रखकर कथा सुनें अथवा सुनाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	कथा समाप्ति के बाद हवन सामग्री मिलाकर 11 या 21 या 108 बार &#39;ॐ ह्रीं क्लीं नम: शिवाय स्वाहा&#39; मंत्र से आहुति दें। उसके बाद शिवजी की आरती तथा प्रसाद वितरित करें, उसके बाद भोजन करें। कहा जाता है कि शुक्रवार को प्रदोष व्रत सौभाग्य और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि भर देता है। यही कारण है कि शुक्र प्रदोष व्रत बहुत खास माना जाता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/kumbh-par-shani-ki-sadesati-kab-khatm-hogi-126060300018_1.html" target="_blank">कुंभ राशि पर चल रहा है शनि की उतरती हुई साढ़ेसाती, पढ़ें क्या होगा इसका प्रभाव</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 17:14:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 03 Jun 2026 17:13:16 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Other Festivals]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Vibhuvan Chaturthi 2026: विभुवन संकष्टी चतुर्थी व्रत कब है, जानें महत्व, पूजा विधि और मंत्र]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/vibhuvan-sankashti-chaturthi-2026-126060200004_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-01/06/thumb/1_1/1767679855-1196.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Vibhuvan Sankashti Chaturthi Significance: हिंदू धर्म में संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व माना जाता है। यह दिन भगवान श्री गणेश की आराधना और व्रत के लिए समर्पित होता है। विभुवन संकष्टी चतुर्थी का संबंध विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा और गणपति कृपा से माना जाता ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="Scene of worship of Lord Ganesha on the auspicious occasion of Vibhuvan Sankashti Chaturthi, pictured with garlands of flowers and burning lamps" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-01/06/full/1767679855-1196.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
</p>
<p>
	<strong>Vibhuvan Sankashti Chaturthi 2026: </strong>विभुवन संकष्टी चतुर्थी सनातन धर्म में एक अत्यंत दुर्लभ और विशेष व्रत माना जाता है। सामान्यतः हर महीने एक संकष्टी चतुर्थी आती है, लेकिन जब हिंदू कैलेंडर में अधिक मास (पुरुषोत्तम मास या मलमास) आता है, तब उस महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को &#39;विभुवन संकष्टी चतुर्थी&#39; कहा जाता है। यह संयोग लगभग ढाई से तीन साल में एक बार बनता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/nirjala-ekadashi-date-n-muhurat-2026-126052800032_1.html" target="_blank">Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा?</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	इसीलिए वर्ष 2026 में आने वाली विभुवन संकष्टी चतुर्थी धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ और फलदायी मानी जा रही है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन के सभी संकट, बाधाएं और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं। साथ ही भक्तों को सुख, समृद्धि, बुद्धि, सफलता और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जो व्यक्ति इस व्रत को श्रद्धा और भक्ति के साथ करता है, उसके जीवन के कष्ट कम होते हैं तथा परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।</p>
<p>
	 </p>
<ul>
	<li>
		विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026 तिथि व शुभ मुहूर्त</li>
	<li>
		विभुवन संकष्टी चतुर्थी का महत्व</li>
	<li>
		सरल पूजा विधि</li>
</ul>
<p>
	 </p>
<p>
	यदि आप विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026 की सही तिथि, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, व्रत कथा, महत्व और गणेश मंत्रों के बारे में जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए उपयोगी साबित होगा।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026 तिथि व शुभ मुहूर्त</h3>
<p>
	साल 2026 में ज्येष्ठ का अधिक मास चल रहा है। इस वजह से विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत 3 जून 2026, बुधवार को रखा जाएगा। चूंकि संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्रोदय यानी चंद्रमा दिखने के समय ही खोला जाता है, इसलिए रात के मुहूर्त का विशेष महत्व है।</p>
<p>
	<br />
	<strong>चतुर्थी तिथि का प्रारंभ: 3 जून 2026 को रात 09:21 बजे से</strong></p>
<p>
	<strong>चतुर्थी तिथि की समाप्ति: 4 जून 2026 को रात 11:30 बजे तक</strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>संकष्टी के दिन चंद्रोदय का समय: </strong>3 जून 2026 को 10:04 पी एम से 04 जून को 10:43 पी एम तक।</p>
<p>
	कुल अवधि - 24 घण्टे 39 मिनट्स</p>
<p>
	बता दें कि अलग-अलग शहरों के अनुसार समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है। </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	विभुवन संकष्टी चतुर्थी का महत्व</h3>
<p>
	यह व्रत साधारण संकष्टी चतुर्थी से कई गुना अधिक फलदायी माना गया है क्योंकि यह भगवान विष्णु के प्रिय &#39;अधिक मास&#39; में आता है। &#39;विभुवन&#39; का अर्थ तीनों लोकों के स्वामी से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि इस दिन विघ्नहर्ता गणेश जी की पूजा करने से जीवन के बड़े से बड़े आर्थिक, शारीरिक या मानसिक संकट चुटकियों में खत्म हो जाते हैं। इस दिन व्रत रखने और दान करने से कुंडली के ग्रह दोष विशेषकर चंद्र दोष दूर होते हैं।<br />
	<br />
	पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, राजा नहुष ने भी इस व्रत को करके अपने सारे संकटों से मुक्ति पाई थी और उन्हें इंद्र का सिंहासन प्राप्त हुआ था। इस तरह यह व्रत समस्त दोषों से मुक्ति दिलाने वाला, संकटों का नाश करने वाला तथा इच्छा पूर्ति को पूर्ण करने वाला माना गया है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	सरल पूजा विधि</h3>
<p>
	विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत सुबह सूर्योदय से शुरू होकर रात को चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद पूरा होता है। इसकी स्टेप-बाय-स्टेप विधि नीचे दी गई है:</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1 प्रातः काल का संकल्प</h3>
<h3>
	सुबह सूर्योदय से पहले</h3>
<p>
	सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ और यदि संभव हो तो लाल या पीले वस्त्र पहनें। हाथ में जल लेकर भगवान गणेश के सामने व्रत का संकल्प लें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2 गणेश जी की स्थापना और अभिषेक</h3>
<h3>
	पूजा का शुभ समय</h3>
<p>
	पूजा स्थान को साफ करके उत्तर या पूर्व दिशा में मुंह करके बैठें। गणेश जी की मूर्ति या तस्वीर को चौकी पर स्थापित करें। उन्हें गंगाजल से स्नान कराएं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3 पूजन सामग्री अर्पित करना</h3>
<h3>
	गणेश जी के प्रिय भोग</h3>
<p>
	बप्पा को सिंदूर का तिलक लगाएं। इसके बाद उन्हें दूर्वा यानी दूब घास, लाल फूल, अक्षत, और चंदन अर्पित करें। भगवान गणेश को भोग में उनके सबसे प्रिय मोदक या लड्डू चढ़ाएं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4 कथा और आरती</h3>
<h3>
	शाम के समय</h3>
<p>
	शाम को दोबारा हाथ-पैर धोकर दीपक जलाएं। विभुवन संकष्टी चतुर्थी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें। इसके बाद गणेश जी की कपूर से आरती करें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5 चंद्र दर्शन और अर्घ्य</h3>
<h3>
	रात 10:04 पी एम के बाद</h3>
<p>
	रात को जब चंद्रमा उदय हो, तब एक तांबे या चांदी के लोटे में पानी, थोड़ा सा दूध, अक्षत/ चावल और फूल डालकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद ही अपना व्रत खोलें अर्थात् पारणा करें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	सफलता और समृद्धि के लिए विशेष मंत्र</h3>
<p>
	पूजा के दौरान या फुर्सत के समय शांत मन से भगवान गणेश के इन प्रभावशाली मंत्रों का कम से कम 108 बार जाप करें:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>* मुख्य मंत्र:</strong></p>
<p>
	ॐ गं गणपतये नमः।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>* संकट नाश के लिए:</strong></p>
<p>
	वक्रतुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ निर्विघ्नम कुरू मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा।।<br />
	 </p>
<p>
	* अधिक मास विशेष मंत्र:</p>
<p>
	क्योंकि यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित है, इसलिए गणेश जी के साथ श्री हरि का ध्यान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। अत: &#39;ॐ नमो भगवते वासुदेवाय&#39; मंत्र की माला का जाप अवश्य करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	इस दुर्लभ चतुर्थी पर श्रद्धापूर्वक व्रत रखने से आपके घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होगा। </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	<strong>गणपति बप्पा मोरया!</strong></h3>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/other-festivals/benefits-and-importance-of-chaturthi-vrat-126020300010_1.html" target="_blank">Chaturthi Vrat 2026: चतुर्थी का व्रत रखने से क्या होगा फायदा, जानिए महत्व</a></strong></p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 09:20:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 03 Jun 2026 09:58:58 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Other Festivals]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[भाग्य बदलने वाली रात: परमा एकादशी व्रत की अमर कथा]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/parama-ekadashi-vrat-katha-126060200032_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/parama-ekadashi-vrat-katha-126060200032_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/02/thumb/1_1/1780394325-5738.jpg"/>
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      <description><![CDATA[parama ekadashi vrat katha: यह बात द्वापर युग की है। महाभारत के युद्ध की कगार पर खड़े अर्जुन के मन में कई दुविधाएं थीं। तब उनके सारथी और मार्गदर्शक, भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें एक ऐसी कहानी सुनाई, जो यह सिखाती है कि जब इंसान के पास सब कुछ खत्म हो जाता ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="lord vishnu:  parama ekadashi vrat katha" class="imgCont" height="800" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/02/full/1780394325-5738.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="parama ekadashi vrat katha" width="1200" /></p>
	</p>
	parama ekadashi vrat katha: यह बात द्वापर युग की है। महाभारत के युद्ध की कगार पर खड़े अर्जुन के मन में कई दुविधाएं थीं। तब उनके सारथी और मार्गदर्शक, भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें एक ऐसी कहानी सुनाई, जो यह सिखाती है कि जब इंसान के पास सब कुछ खत्म हो जाता है, तब भी धर्म और धैर्य उसका साथ नहीं छोड़ते।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	अभावों के बीच महकता प्रेम और संतोष</h3>
<p>
	सदियों पहले, काम्पिल्य नाम के एक खूबसूरत नगर में सुमेधा नाम के एक ब्राह्मण रहते थे। उनकी पत्नी का नाम था पवित्रा—जो अपने नाम की तरह ही पवित्र, शांत और ऊंचे विचारों वाली महिला थीं। दोनों के जीवन में एक बहुत बड़ी परीक्षा थी—घोर दरिद्रता। खाने को ठीक से अनाज नहीं था, पहनने को फटे-पुराने कपड़े थे, लेकिन उनके घर का दरवाज़ा कभी किसी अतिथि के लिए बंद नहीं होता था। खुद भूखे सो जाते, पर मेहमान को भूखा नहीं लौटने देते।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	एक दिन गरीबी के इस अंतहीन सिलसिले से टूटकर सुमेधा ने अपनी पत्नी से कहा, "पवित्रा, अब यह मुफ़लिसी मुझसे देखी नहीं जाती। मैं धन कमाने के लिए परदेस जा रहा हूँ।"</p>
<p>
	 </p>
<p>
	पवित्रा ने मुस्कुराते हुए अपने पति का हाथ थामा और बड़े शांत भाव से कहा, "स्वामी, धन और संतान तो पूर्वजन्मों के कर्मों और दान से मिलते हैं। अगर हमारे भाग्य में इस समय संघर्ष लिखा है, तो जगह बदलने से भाग्य नहीं बदलेगा। आप यहीं रहिए, हम मिलकर इस संकट का सामना करेंगे।"</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/parama-ekadashi-2026-date-significance-puja-vidhi-and-rules-126060200028_1.html" target="_blank">परमा एकादशी 2026: कब है व्रत? जानें तिथि, महत्व, पूजा विधि और जरूरी नियम</a></strong></p>
</p>
<h3>
	जब कुटिया में आए महर्षि कौडिन्य</h3>
<p>
	वक्त गुज़रा और एक दोपहर उनकी कुटिया में साक्षात महर्षि कौडिन्य पधारे। ब्राह्मण दंपत्ति के पास देने के लिए कोई धन-दौलत नहीं थी, लेकिन उन्होंने अपने तन-मन की श्रद्धा से महर्षि की ऐसी सेवा की कि ऋषि का हृदय पिघल गया। दोनों की आंखों में छिपे दर्द को महर्षि ने भांप लिया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	महर्षि कौडिन्य ने प्यार से कहा, "हे सुमेधा! तुम्हारी इस कंगाली का अंत अब निकट है। मैं तुम्हें इस दरिद्रता के चक्रव्यूह से निकलने का सबसे सीधा और दिव्य रास्ता बताता हूँ। अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) के कृष्ण पक्ष में एक चमत्कारी तिथि आती है, जिसे &#39;परमा एकादशी&#39; कहते हैं। तुम दोनों मिलकर पूरी श्रद्धा से इस दिन व्रत रखो और रात में सोओ मत, बल्कि ईश्वर की भक्ति में लीन रहकर जागरण करो। याद रखो, इसी व्रत के पुण्य से कभी राजा हरिश्चंद्र को उनका खोया राजपाठ मिला था और कुबेर देवताओं के धनाधीश बने थे।"</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	श्रद्धा का फल और बदला हुआ भाग्य</h3>
<p>
	ऋषि की बात मानकर सुमेधा और पवित्रा ने पूरे नियम और अटूट विश्वास के साथ परमा एकादशी का व्रत किया। रात भर दोनों ने प्रभु के नाम के दीप जलाए और कीर्तन किया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	कहते हैं कि सच्ची श्रद्धा कभी खाली हाथ नहीं लौटती। अगले ही दिन सुबह, उनकी कुटिया के बाहर घोड़े की टापों की आवाज़ गूंजी। उन्होंने देखा कि एक दिव्य राजकुमार वहां खड़ा था। राजकुमार ने सुमेधा के त्याग और धार्मिकता से प्रभावित होकर उन्हें उपहार स्वरूप एक भव्य, आलीशान घर और इतनी धन-सम्पदा दी कि उनकी सात पीढ़ियों की गरीबी एक पल में गायब हो गई।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सीख: </strong>श्री कृष्ण अर्जुन को समझाते हैं कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत हों, जो इंसान अपने धर्म पर टिका रहता है और ईश्वर पर भरोसा रखता है, समय आने पर उसका भाग्य ज़रूर बदलता है। परमा एकादशी का व्रत सिर्फ धन नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और समृद्धि देता है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 15:24:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 02 Jun 2026 15:29:22 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[ekadashi vrat katha]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Bada Mangal 2026: बड़ा मंगल: नवाबों के शहर से कैसे शुरू हुई बजरंगबली की ये खास परंपरा, पढ़ें गौरव गाथा]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/how-did-this-special-tradition-of-bajrangbali-start-from-the-city-of-nawabs-read-the-glorious-story-126060100013_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/how-did-this-special-tradition-of-bajrangbali-start-from-the-city-of-nawabs-read-the-glorious-story-126060100013_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/02/thumb/1_1/1775128808-0325.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/02/thumb/1_1/1775128808-0325.jpg</image>
      <description><![CDATA[Jai Shri Ram echoing in the streets of Lucknow: इस बार 2 जून 2026 को पांचवां बड़ा मंगल मनाया जा रहा है तथा 23 जून को आठवां बड़ा मंगल मनाने के साथ ही ज्येष्ठ महीने के अधिकमास के बड़ा मंगल पर्व का समापन होगा। इस बड़े मंगल का इतिहास, लखनऊ की गलियों में ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p>
		<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
			<img align="center" alt="Attending the Hanuman temple on Bada Mangal festival averts troubles; pictured is Jai Bajrangbali and a view of his temple" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/02/full/1775128808-0325.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
	<p>
		<strong>the history of Bada Mangal: </strong>इस बार 2 जून 2026 को पांचवां बड़ा मंगल मनाया जा रहा है तथा 23 जून को आठवां बड़ा मंगल मनाने के साथ ही ज्येष्ठ महीने के अधिकमास के बड़ा मंगल पर्व का समापन होगा। इस बड़े मंगल का इतिहास, लखनऊ की गलियों में गूंजता जय श्री राम और भंडारे की कहानी बहुत अनूठी है। आइए यहां जानते हैं आखिर नवाबों ने क्यों बनवाया था यह हनुमान मंदिर?<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/bada-mangal-2026-dates-126050100016_1.html" target="_blank">Bada Mangal Dates: ज्येष्ठ माह में कब-कब रहेगा बड़ा मंगल, जानें संपूर्ण तिथियां</a></strong></p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		जब ज्येष्ठ की तपती गर्मी शुरू होती है, तो उत्तर प्रदेश, खासकर लखनऊ की रूह एक अलग ही रंग में रंग जाती है। इसे हम &#39;बड़ा मंगल&#39; कहते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक हिंदू त्योहार के पीछे नवाबी रियासत और आपसी भाईचारे की कितनी गहरी जड़ें हैं?</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		1. जब बेगम की मन्नत ने दूर की &#39;महामारी&#39;</h3>
	<p>
		कहानी शुरू होती है अलीगंज के पुराने हनुमान मंदिर से। नवाब शुजाउद्दौला की बेगम, आलिया ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। कहा जाता है कि जब शहर में महामारी फैली, तो बेगम ने बजरंगबली का सुमिरन कराया। ज्येष्ठ के मंगलवार को ही वह संकट टला और तभी से यह दिन &#39;बड़ा&#39; हो गया। आज भी इस मंदिर के गुंबद पर बना &#39;चांद&#39; हिंदू-मुस्लिम एकता की गवाही देता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		2. नवाब के बेटे की सेहत और गुड़-पानी का प्याऊ</h3>
	<p>
		एक और दिलचस्प किस्सा नवाब मोहम्मद अली शाह से जुड़ा है। उनका बेटा जब मौत के मुंह से वापस आया, तो बेगम रूबिया ने मंदिर का जीर्णोद्धार कराया। ज्येष्ठ की चिलचिलाती धूप में प्यासे राहगीरों के लिए नवाब ने जगह-जगह गुड़ और ठंडे पानी की व्यवस्था की। यही परंपरा आज आधुनिक &#39;भंडारे&#39; का रूप ले चुकी है।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		3. इत्र, केसर और जाटमल की मन्नत</h3>
	<p>
		व्यापार और भक्ति का भी यहां अनूठा मेल है। जाटमल नाम के एक व्यापारी का सारा इत्र और केसर जब नवाब वाजिद अली शाह ने खरीद लिया, तो उन्होंने अपनी मन्नत पूरी करते हुए ज्येष्ठ के पहले मंगल को हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित की।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		4. क्यों है यह मंगल इतना खास?</h3>
	<p>
		ज्योतिष शास्त्र और परंपराओं का मानना है कि ज्येष्ठ के महीने में हनुमान जी का दर्जा स्वयं प्रभु श्री राम से भी ऊंचा हो जाता है। इस दिन कुछ विशेष करने से बजरंगबली तुरंत प्रसन्न होते हैं:</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>दान का महत्व: </strong>इस दिन गुड़, गेहूं और मीठी पूड़ी का दान &#39;महादान&#39; माना जाता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>संकटों का समाधान: </strong>मान्यता है कि लखनऊ के इन ऐतिहासिक मंदिरों या किसी भी हनुमान मंदिर में हाजिरी लगाने से बड़े से बड़ा संकट टल जाता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/bada-mangal-puja-shubh-muhurat-2026-126050400021_1.html" target="_blank">Bada Mangal 2026: क्या आप जानते हैं ज्येष्ठ मंगल को &#39;बड़ा मंगल&#39; क्यों कहते हैं? जानें सटीक पूजा विधि और शुभ मुहूर्त</a></strong></p>
</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 11:30:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 01 Jun 2026 10:54:19 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Jay Hanuman]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[जून माह में रहेगी ज्येष्ठ माह की 2 एकादशियां, जानिए तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/june-2026-ekadashi-date-time-and-muhurat-126052900015_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/june-2026-ekadashi-date-time-and-muhurat-126052900015_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/29/thumb/1_1/1780037844-8206.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Jyeshtha Month Ekadashi 2026: ज्येष्ठ माह की एकादशियां विशेष रूप से भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित होती हैं। इस दिन भक्त विधिपूर्वक उपवास रखकर विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ और भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि एकादशी के दिन किया गया ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Shri Hari Narayan in the picture and information related to Parama and Nirjala Ekadashi of Jyeshtha month in 2026 in the image caption" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/29/full/1780037844-8206.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Jyeshtha Month Ekadashi Date and Time: </strong>सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना गया है। प्रत्येक माह में दो एकादशी आती हैं- एक कृष्ण पक्ष में और दूसरी शुक्ल पक्ष में। जून 2026 का महीना ज्येष्ठ मास के अंतर्गत अत्यंत पुण्यदायी माना जाएगा, क्योंकि इस दौरान भगवान विष्णु की आराधना हेतु दो महत्वपूर्ण एकादशी व्रत रखे जाएंगे।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/other-festivals/adhikmaas-ki-jyeshtha-purnima-vrat-ka-mahatva-pujan-vidhi-aur-shubh-muhurat-126052800046_1.html" target="_blank">अधिकमास की ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत का महत्व, पूजन विधि और शुभ मुहूर्त</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	इस बार जून 2026 का महीना धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत ही विशेष और पवित्र होने वाला है। इस महीने में हिंदू कैलेंडर के सबसे कठिन और फलदायी माने जाने वाले ज्येष्ठ मास की दोनों एकादशियां आ रही हैं। पहली एकादशी ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की परम एकादशी और दूसरी ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की सुप्रसिद्ध निर्जला एकादशी होगी। इस बार 11 जून 2026, गुरुवार को परमा एकादशी और 25 जून 2026 को निर्जला एकादशी व्रत रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी व्रत रखने से पापों का नाश होता है, मन की शुद्धि प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	आइए जानते हैं इन दोनों एकादशियों की सटीक तिथियां, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	1.  परमा एकादशी व्रत- 11 जून 2026 (गुरुवार)</h3>
<p>
	ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को परमा एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को अपार पुण्य की प्राप्ति होकर अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	परमा एकादशी व्रत तिथि और शुभ मुहूर्त 2026</h3>
<p>
	एकादशी तिथि का आरंभ: 11 जून, 2026 को 12:57 ए एम बजे</p>
<p>
	 </p>
<p>
	एकादशी तिथि का समापन: 11 जून 2026 को 10:36 पी एम बजे</p>
<p>
	 </p>
<p>
	उदयातिथि के अनुसार ज्येष्ठ परम एकादशी बृहस्पतिवार, 11 जून 2026 को मनाई जाएगी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>पारण (व्रत तोड़ने का) समय-</strong> 12 जून को, 05:23 ए एम से 08:10 ए एम बजे के बीच।</p>
<p>
	पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय- 07:36 पी एम पर।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. निर्जला एकादशी- 25 जून 2026 (गुरुवार)</h3>
<p>
	ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहते हैं। इसे सभी 24 एकादशियों में सबसे महत्वपूर्ण और कठिन माना गया है क्योंकि इसमें पूरे दिन बिना अन्न और जल यानी बूंद भर पानी भी नहीं, के रहना होता है। ऐसी मान्यता है कि केवल इस एक एकादशी का व्रत रखने से साल की सभी एकादशियों का फल मिल जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	निर्जला एकादशी तिथि और शुभ मुहूर्त 2026</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि का आरंभ: 24 जून 2026 को शाम 06:12 बजे से</p>
<p>
	एकादशी तिथि का समापन: 25 जून 2026 को रात 08:09 बजे तक</p>
<p>
	उदयातिथि के अनुसार व्रत की तारीख: 25 जून 2026, गुरुवार</p>
<p>
	पूजन का सबसे उत्तम समय: सुबह 10:39 बजे से दोपहर 02:09 बजे तक।</p>
<p>
	रवि योग- सुबह 05:25 से शाम 04:29 तक।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	व्रत पारण (व्रत खोलने) का समय 2026</h3>
<p>
	व्रत पारण का शुभ समय: 26 जून 2026, शुक्रवार को सुबह 05:25 बजे से सुबह 08:13 बजे के बीच।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	एकादशी की प्रामाणिक पूजा विधि</h3>
<p>
	दोनों ही एकादशियों में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विधान एक समान होता है। आप इस विधि से पूजा संपन्न कर सकते हैं:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सुबह का संकल्प:</strong> एकादशी के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र या पीले रंग के वस्त्र धारण करें और हाथ में जल लेकर भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>पूजा स्थल की तैयारी: </strong>घर के मंदिर में दीपक जलाएं। एक चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अभिषेक और श्रृंगार: </strong>भगवान विष्णु को गंगाजल और पंचामृत से स्नान कराएं। उन्हें पीले फूल, तुलसी के पत्ते/दल, गोपी चंदन, और धूप-दीप अर्पित करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>ध्यान रखें: </strong>एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़े जाते, इसलिए पूजा के लिए एक दिन पहले ही तुलसी दल तोड़कर रख लें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>भोग लगाना: </strong>श्रीहरि को ऋतु फल और मिठाई का भोग लगाएं। याद रखें कि विष्णु जी के भोग में तुलसी का पत्ता अवश्य होना चाहिए, इसके बिना वे भोग स्वीकार नहीं करते।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>कथा और आरती:</strong> एकादशी व्रत की कथा पढ़ें या सुनें। इसके बाद विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और अंत में घी के दीपक से &#39;ॐ जय जगदीश हरे&#39; की आरती करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>रात्रि जागरण:</strong> एकादशी की रात को सोना नहीं चाहिए। रात में भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करना बेहद फलदायी माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>दान और पारण: </strong>अगले दिन द्वादशी तिथि को शुभ मुहूर्त में ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन कराएं, दान-दक्षिणा जिसमें विशेषकर निर्जला एकादशी पर पानी का घड़ा, छाता, पंखा दें और फिर स्वयं भोजन या जल ग्रहण कर व्रत का पारण करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/nirjala-ekadashi-date-n-muhurat-2026-126052800032_1.html" target="_blank">Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा?</a></strong></p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 29 May 2026 12:30:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 29 May 2026 16:41:03 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[ekadashi vrat katha]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Vat Savitri Purnima 2026: वट सावित्री पूर्णिमा व्रत का महत्व, पूजन विधि और शुभ मुहूर्त]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/vat-savitri-vrat/vat-savitri-purnima-date-2026-126052900007_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/vat-savitri-vrat/vat-savitri-purnima-date-2026-126052900007_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/29/thumb/1_1/1780029091-9176.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Vat Savitri Purnima 2026: वट सावित्री पूर्णिमा हिंदू धर्म में विवाहित महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और शुभ पर्व माना जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए रखा जाता है। वर्ष 2026 में वट सावित्री ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Scene of worship by married women on Vat Savitri Purnima fast" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/29/full/1780029091-9176.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Vat Savitri Purnima Hindi: </strong>ज्येष्ठ मास में सुहागिन महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत का बहुत अधिक महत्व है। इस व्रत को दो अलग-अलग तिथियों (अमावस्या और पूर्णिमा) पर मनाने की परंपरा है। उत्तर भारत में यह ज्येष्ठ अमावस्या को मनाया जाता है, जबकि गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में इसे ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है, जिसे वट सावित्री पूर्णिमा व्रत कहते हैं। साल 2026 में वट सावित्री पूर्णिमा का व्रत 29 जून 2026, सोमवार को रखा जाएगा।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vat-savitri-vrat/the-banyan-tree-holds-the-secret-of-eternal-good-fortune-learn-its-religious-and-scientific-significance-126051400008_1.html" target="_blank">Banyan tree worship: वट सावित्री व्रत: बरगद के पेड़ में छिपा है अखंड सौभाग्य का रहस्य, जानें धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	आइए इसके महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि के बारे में विस्तार से जानते हैं:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	वट पूर्णिमा 2026: शुभ मुहूर्त और तिथियां</h3>
<p>
	वट सावित्री पूर्णिमा सोमवार, जून 29, 2026 को</p>
<p>
	 </p>
<p>
	पूर्णिमा तिथि का आरंभ: 29 जून 2026 को सुबह 03:06 बजे से</p>
<p>
	पूर्णिमा तिथि का समापन: 30 जून 2026 को सुबह 05:26 बजे तक</p>
<p>
	उदयातिथि के अनुसार, पूर्णिमा का व्रत और पूजन सोमवार, 29 जून को ही किया जाएगा।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	पूजा का सबसे उत्तम समय: सुबह का मुहूर्त: सुबह 08:55 बजे से सुबह 10:40 बजे तक</p>
<p>
	अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:57 बजे से दोपहर 12:52 बजे तक</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	वट सावित्री पूर्णिमा व्रत का महत्व</h3>
<p>
	यह व्रत विवाहित सुहागिन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य, पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के लिए बेहद खास माना जाता है। पौराणिक मान्यता तथा कथा के अनुसार, इसी दिन माता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प और पातिव्रत धर्म के बल पर यमराज से अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापस मांग लिए थे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बरगद के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और महेश (शिव) तीनों देवों का वास होता है। इसके साथ ही यह वृक्ष अपनी लंबी आयु के लिए जाना जाता है, इसलिए इसकी पूजा करने से पति को दीर्घायु प्राप्त होती है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vat-savitri-vrat/at-savitri-vrat-arth-puja-vidhi-aarti-chalisa-katha-126051500015_1.html" target="_blank">Vat Savitri Vrat: वट सावित्री व्रत का अर्थ, पूजा विधि, आरती, चालीसा और कथा</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	संपूर्ण पूजन विधि</h3>
<p>
	वट सावित्री पूर्णिमा के दिन महिलाएं पूरी श्रद्धा के साथ सोलह श्रृंगार करके पूजा करती हैं। इसकी प्रामाणिक पूजा विधि इस प्रकार है:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>स्नान और संकल्प: </strong>सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ या नए वस्त्र (संभव हो तो लाल, पीले या हरे रंग के) पहनकर व्रत का संकल्प लें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>पूजा सामग्री तैयार करना: </strong>एक थाली में धूप, दीप, रोली, अक्षत (चावल), भीगे हुए चने, कलावा (कच्चा सूत), फल और मिठाई रख लें। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	माता सावित्री और सत्यवान की मिट्टी की मूर्तियां या तस्वीर भी साथ रखें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>वट वृक्ष की पूजा: </strong>बरगद के पेड़ के पास जाकर सबसे पहले जल अर्पित करें। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	इसके बाद वृक्ष को रोली, अक्षत, फूल और भीगे चने चढ़ाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सूत लपेटना और परिक्रमा:</strong> कच्चा सूत या कलावा हाथ में लेकर बरगद के पेड़ की 7, 11, 21 या 108 बार परिक्रमा करें और सूत को तने पर लपेटते जाएं। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	हर परिक्रमा के साथ पति की लंबी उम्र की प्रार्थना करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>कथा श्रवण: </strong>पूजा स्थल पर बैठकर सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा जरूर पढ़ें या सुनें। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	इसके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>आरती और आशीर्वाद:</strong> अंत में धूप-दीप से आरती करें और पेड़ के नीचे लगे पंखे (बांस का पंखा) से हवा करें। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	पूजा समाप्त होने के बाद अपने घर के बड़ों और सास के पैर छूकर आशीर्वाद लें और उन्हें बायना यानी अनाज या सुहाग सामग्री भेंट करें।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vat-savitri-vrat/vat-savitri-katha-in-hindi-126051500019_1.html" target="_blank">Vat Savitri Vrat Katha: वट सावित्री व्रत पर पढ़ें ये महत्वपूर्ण पौराणिक कथा</a></strong><br />
	<br />
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।</p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 29 May 2026 10:30:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 29 May 2026 10:25:35 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Vat Savitri Vrat]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[अधिकमास की ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत का महत्व, पूजन विधि और शुभ मुहूर्त]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/adhikmaas-ki-jyeshtha-purnima-vrat-ka-mahatva-pujan-vidhi-aur-shubh-muhurat-126052800046_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/adhikmaas-ki-jyeshtha-purnima-vrat-ka-mahatva-pujan-vidhi-aur-shubh-muhurat-126052800046_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/28/thumb/1_1/1779971443-3564.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/28/thumb/1_1/1779971443-3564.jpg</image>
      <description><![CDATA[हिंदू कैलेंडर के अनुसार, जब कोई महीना दो बार आता है, तो पहले महीने को 'अधिकमास' (मलमास या पुरुषोत्तम मास) कहा जाता है। यह संयोग हर तीन साल में एक बार बनता है। इस साल ज्येष्ठ का महीना अधिकमास है। अधिकमास पूरी तरह भगवान विष्णु को समर्पित होता है, ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="The image depicts Lord Vishnu, a prayer plate, a Kalash, and a scripture, with a river, a temple, and a full moon in the background." class="imgCont" height="800" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/28/full/1779971443-3564.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="Adhikmas Jyeshtha Month Purnima 2026" width="1200" /></p>
	</p>
	हिंदू कैलेंडर के अनुसार, जब कोई महीना दो बार आता है, तो पहले महीने को &#39;अधिकमास&#39; (मलमास या पुरुषोत्तम मास) कहा जाता है। यह संयोग हर तीन साल में एक बार बनता है। इस साल ज्येष्ठ का महीना अधिकमास है। अधिकमास पूरी तरह भगवान विष्णु को समर्पित होता है, इसलिए &#39;अधिकमास की ज्येष्ठ पूर्णिमा&#39; (जिसे पुरुषोत्तम पूर्णिमा भी कहते हैं) का धार्मिक महत्व सामान्य पूर्णिमा से कई गुना अधिक हो जाता है। इस साल (2026) आने वाली अधिकमास ज्येष्ठ पूर्णिमा का संपूर्ण विवरण इस प्रकार है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	शुभ मुहूर्त और तिथि (2026)</h3>
<p>
	पंचांग के अनुसार, इस बार पूर्णिमा तिथि दो दिनों में बंट रही है, जिसके कारण व्रत और स्नान-दान की तारीखें अलग-अलग हैं:</p>
<p>
	<strong>पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ: </strong>30 मई 2026, शनिवार को सुबह 11:57 बजे से</p>
<p>
	पूर्णिमा तिथि की समाप्ति: 31 मई 2026, रविवार को दोपहर 02:14 बजे तक</p>
<p>
	<strong>पूर्णिमा व्रत की तिथि: </strong>30 मई 2026 (शनिवार)- इस दिन चंद्रोदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए व्रत रखना और शाम को चंद्रमा को अर्घ्य देना इस दिन श्रेष्ठ है।</p>
<p>
	<strong>स्नान-दान की पूर्णिमा: </strong>31 मई 2026 (रविवार)- उदयातिथि (सूर्य उदय के समय की तिथि) मिलने के कारण पवित्र नदियों में स्नान और दान-पुण्य करना रविवार को सबसे शुभ रहेगा।</p>
<p>
	<strong>विशेष संयोग (रवि योग व बुधादित्य योग):</strong> इस दौरान रवि योग और बुधादित्य योग का निर्माण हो रहा है, जो पूजा-पाठ के फल को और बढ़ा देता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	अधिकमास ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व</h3>
<p>
	अधिकमास के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) हैं। इसलिए इस पूर्णिमा को &#39;सर्व सिद्धिदायिनी पूर्णिमा&#39; भी कहा जाता है।</p>
<p>
	<strong>महापुण्य की प्राप्ति: </strong>शास्त्रों के अनुसार, अधिकमास की पूर्णिमा पर किए गए व्रत, दान और जप का फल कभी नष्ट नहीं होता। यह जीवन के सभी पापों और कष्टों का नाश करता है।</p>
<p>
	<strong>लक्ष्मी-नारायण की कृपा: </strong>इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की संयुक्त पूजा करने से घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती और दरिद्रता दूर होती है।</p>
<p>
	<strong>कुंडली के दोषों से मुक्ति: </strong>इस दिन चंद्रमा पूर्ण सोलह कलाओं से युक्त होता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक तनाव दूर होता है और कुंडली में &#39;चंद्र दोष&#39; समाप्त होता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	पूजन विधि (Step-by-Step)</h3>
<p>
	<strong>सुबह का स्नान: </strong>पवित्र नदी (गंगा, यमुना आदि) में स्नान करें। यदि घर पर स्नान कर रहे हैं, तो नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिला लें।</p>
<p>
	<strong>संकल्प लें: </strong>सूर्य देव को जल अर्पित करने के बाद, हाथ में जल और अक्षत लेकर अधिकमास पूर्णिमा व्रत का संकल्प लें।</p>
<p>
	<strong>विष्णु-लक्ष्मी पूजा:</strong> पूजा घर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं। भगवान को पीले फूल, पीला चंदन, धूप और अक्षत अर्पित करें।</p>
<p>
	<strong>सत्यनारायण कथा और भोग: </strong>इस दिन घर में भगवान सत्यनारायण की कथा करना या सुनना परम फलदायी होता है। भगवान को चरणामृत और तुलसी दल (तुलसी का पत्ता) मिला हुआ पंजीरी का भोग लगाएं।</p>
<p>
	मंत्र जाप: पूजा के दौरान "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" या "ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः" मंत्र का जाप करें।</p>
<p>
	<strong>चंद्र देव को अर्घ्य: </strong>शाम को जब चंद्रमा उदय हो (लगभग शाम 07:36 बजे), तब कच्चे दूध, गंगाजल और चीनी मिले जल से चंद्रमा को अर्घ्य दें।</p>
<p>
	<strong>दान का महत्व: </strong>अगले दिन सुबह किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को पीले वस्त्र, अन्न (जैसे चना दाल या चावल), फल या सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा का दान अवश्य करें। मालपुए का दान करना अधिकमास में बेहद शुभ माना जाता है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 28 May 2026 17:58:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 28 May 2026 18:05:39 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Other Festivals]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Nirjala Ekadashi 2026: निर्जला एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/nirjala-ekadashi-date-n-muhurat-2026-126052800032_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/nirjala-ekadashi-date-n-muhurat-2026-126052800032_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/28/thumb/1_1/1779964545-5007.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Nirjala Ekadashi Date 2026: निर्जला एकादशी हिन्दू धर्म के प्रमुख व्रतों में से एक है और इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह ज्येष्ठ माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को आती है। इस दिन व्रत रखने वाले भक्त पूरे दिन निर्जल यानी बिना जल ग्रहण किए व्रत करते ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="A beautiful photo of Sri Lakshmi and Narayana seated on Sheshnag on Nirjala Ekadashi, along with a water-filled Kalash" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/28/full/1779964545-5007.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Nirjala Ekadashi Muhurat: </strong>हिन्दू पंचांग कैलेंडर के अनुसार साल 2026 में निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून 2026, गुरुवार को ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी पर रखा जाएगा। इसे सभी एकादशियों में सबसे कठिन एवं पुण्यदायी माना जाता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/other-festivals/june-mah-ke-vrat-tyohar-2026-list-126052600029_1.html" target="_blank">जून माह 2026 के प्रमुख व्रत एवं त्योहारों लिस्ट</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	चूंकि एकादशी तिथि का निर्धारण उदया तिथि यानी सूर्योदय के समय की तिथि के आधार पर होता है, इसलिए 25 जून का दिन ही इस कठिन और पवित्र व्रत के लिए शास्त्र सम्मत माना गया है। इस साल गुरुवार का दिन होने से इस व्रत का महत्व भगवान विष्णु के भक्तों के लिए और भी ज्यादा बढ़ गया है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	तिथि और शुभ मुहूर्त की जरूरी जानकारियां नीचे दी गई हैं:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	निर्जला एकादशी का शुभ मुहूर्त और तिथियां:</h3>
<p>
	निर्जला एकादशी तिथि का आरंभ: 24 जून 2026 को शाम 06:12 बजे से</p>
<p>
	एकादशी तिथि का समापन: 25 जून 2026 को रात 08:09 बजे तक</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>पूजा का सबसे उत्तम समय: </strong>सुबह 10:39 बजे से दोपहर 02:09 बजे तक।</p>
<p>
	इस समयावधि में आप श्रीहरि और माता लक्ष्मी की विशेष पूजा कर सकते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>विशेष योग: </strong>इस दिन रवि योग का बेहद शुभ संयोग बन रहा है, जो सुबह 05:25 से शाम 04:29 तक रहेगा।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	व्रत पारण (व्रत खोलने) का समय 2026</h3>
<p>
	निर्जला एकादशी के व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को किया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	पारण की तारीख: 26 जून 2026, शुक्रवार</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>व्रत तोड़ने का शुभ समय: </strong>सुबह 05:25 बजे से सुबह 08:13 बजे के बीच।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>एक जरूरी बात: </strong>धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, निर्जला एकादशी के दिन सूर्योदय से लेकर अगले दिन द्वादशी के सूर्योदय तथा पारण करने तक अन्न और जल का पूरी तरह त्याग किया जाता है। व्रत खोलने के बाद सबसे पहले जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को घड़ा, छाता या अनाज दान करना बेहद शुभ माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-navagraha/june-2026-planetary-transits-and-effects-on-zodiac-sign-126052700048_1.html" target="_blank">जून 2026 के ग्रह गोचर: किस राशि पर पड़ेगा सबसे बड़ा असर?</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 28 May 2026 16:25:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 28 May 2026 16:13:04 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[ekadashi vrat katha]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Bakrid 2026: मुस्लिम लोग बकरीद क्यों मनाते हैं?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/islam-religion/why-muslims-celebrate-bakrid-126052300046_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/islam-religion/why-muslims-celebrate-bakrid-126052300046_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/23/thumb/1_1/1779535658-8416.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Bakrid importance in Islam: मुस्लिम समाज में बकरीद जिसे ईदुल-अज़हा या ईद-उल-जुहा भी कहा जाता है। यह अल्लाह के प्रति अपनी आस्था, समर्पण और उनके हुक्म के आगे खुद को पूरी तरह समर्पित करने की याद में मनाया जाता है। यह त्योहार इस्लामी कैलेंडर के आखिरी ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Picture depicting the Muslim festival of Bakrid or Eid ul Azha" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/23/full/1779535658-8416.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Muslim festival Bakrid: </strong>Eid al-Adha जिसे भारत में आमतौर पर &#39;बकरीद&#39; कहा जाता है, यह मुसलमानों का एक प्रमुख धार्मिक त्योहार है। यह त्योहार त्याग, आज्ञापालन और इंसानियत की मदद की भावना को दर्शाता है। इसका संबंध Prophet Ibrahim की उस कहानी से है, जिसमें उन्होंने ईश्वर (अल्लाह) के आदेश पर अपने बेटे की कुर्बानी देने की तैयारी दिखाई। इस्लामी मान्यता के अनुसार, जब उन्होंने पूरी निष्ठा दिखाई, तो अल्लाह ने उनके बेटे की जगह एक जानवर की कुर्बानी स्वीकार कर ली। इसी घटना की याद में मुसलमान बकरीद मनाते हैं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/islam-religion/eid-ul-azha-2026-date-126052100052_1.html" target="_blank">Eid ul Azha 2026: कब मनाई जाएगी ईद उल-अज़हा, जानें परंपरा और महत्व</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>इस त्योहार को मनाए जाने के पीछे एक बेहद महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और धार्मिक घटना है, जो पैगंबर हजरत इब्राहिम (अलैहिस्सलाम) से जुड़ी हुई है:</strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	बकरीद मनाने का मुख्य कारण: हजरत इब्राहिम की कुर्बानी</h3>
<p>
	इस्लाम धर्म की मान्यता के अनुसार, अल्लाह ने हजरत इब्राहिम की भक्ति और वफादारी की परीक्षा लेने का फैसला किया। अल्लाह ने उन्हें ख्वाब (सपने) में अपनी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी देने का हुक्म दिया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>बेटे की कुर्बानी का फैसला:</strong> हजरत इब्राहिम के लिए दुनिया में सबसे अजीज उनके बेटे हजरत इस्माइल थे। अल्लाह का हुक्म मानकर वह अपने इकलौते और प्यारे बेटे की कुर्बानी देने के लिए तैयार हो गए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अल्लाह की मर्जी और समर्पण: </strong>जब हजरत इब्राहिम अपने बेटे की गर्दन पर छुरी चलाने वाले थे, तो उन्होंने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली थी ताकि पिता का मोह अल्लाह के हुक्म के आड़े न आए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>दुंबे (मेमने) की कुर्बानी: </strong>जैसे ही उन्होंने छुरी चलाई, अल्लाह ने उनकी सच्ची नियत और निष्ठा को कुबूल कर लिया और जिब्रईल (फरिश्ते) के जरिए हजरत इस्माइल की जगह एक दुंबा (भेड़/मेमना) रख दिया। हजरत इस्माइल पूरी तरह सुरक्षित रहे और दुंबे की कुर्बानी हो गई।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	इसी महान आत्मसमर्पण और अल्लाह के प्रति बिना किसी शर्त के प्रेम की याद में हर साल पूरी दुनिया के मुसलमान इस दिन को &#39;कुर्बानी के त्योहार&#39; के रूप में मनाते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	इस त्योहार से जुड़े मुख्य संदेश और परंपराएं</h3>
<p>
	कुर्बानी का असली मतलब: बकरीद में बकरे, भेड़ या ऊंट की कुर्बानी सिर्फ एक प्रतीक है। इसका असली संदेश यह है कि इंसान को अल्लाह की रजा (मर्जी) के लिए अपनी हर प्यारी चीज, अहंकार और बुरी आदतों को कुर्बान करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। जैसा कि कुरान में भी कहा गया है कि अल्लाह तक न तो उस जानवर का मांस पहुंचता है और न ही खून, बल्कि केवल इंसान का तकवा यानी परहेजगारी और साफ नियत ही पहुंचती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मांस के तीन बराबर हिस्से:</strong> कुर्बानी के बाद मांस को तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाता है:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>पहला हिस्सा: </strong>गरीबों और जरूरतमंदों के लिए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>दूसरा हिस्सा: </strong>दोस्तों, रिश्तेदारों और पड़ोसियों के लिए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>तीसरा हिस्सा:</strong> अपने खुद के परिवार के लिए। परिवार और समुदाय के साथ भोजन और मेल-मिलाप होता है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>हज का समापन: </strong>यह त्योहार इस्लामिक कैलेंडर के आखिरी महीने &#39;जुल-हिज्जा&#39; में मनाया जाता है। इसी दौरान मक्का में पवित्र &#39;हज यात्रा&#39; का समापन भी होता है। बकरीद का संदेश हमें त्याग, दया, ईमानदारी और मानवता की सेवा की सीख देता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/5-special-things-about-padmini-ekadashi-of-adhik-maas-know-the-5-rules-of-fasting-126052300014_1.html" target="_blank">Padmini Ekadashi 2026: अधिकमास की पद्मिनी एकादशी की 5 खास बातें, जानिए व्रत रखने के 5 नियम</a></strong></p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 28 May 2026 09:26:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 28 May 2026 09:26:50 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Islam Religion]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[ट्रंप का Abraham Accord आखिर क्या है? पाकिस्तान में क्यों मचा सियासी तूफान]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/religious-article/what-are-the-abraham-accords-126052700066_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/religious-article/what-are-the-abraham-accords-126052700066_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/27/thumb/1_1/1779885458-7302.jpg"/>
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      <description><![CDATA[अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक हालिया बयान के कारण पाकिस्तान के सियासी और सैन्य गलियारों में खलबली मचा हुई है।  ट्रंप ने ईरान से जुड़ी शांति वार्ता को 'अब्राहम एकॉर्ड्स' (Abraham Accords) के विस्तार से जोड़ते हुए पाकिस्तान समेत कई प्रमुख ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Pictured are Donald Trump, Shahbaz Sharif, Pakistan's map, flag and people." class="imgCont" height="800" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/27/full/1779885458-7302.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="What are the Abraham Accords" width="1200" /></p>
	</p>
	अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक हालिया बयान के कारण पाकिस्तान के सियासी और सैन्य गलियारों में खलबली मचा हुई है।  ट्रंप ने ईरान से जुड़ी शांति वार्ता को &#39;अब्राहम एकॉर्ड्स&#39; (Abraham Accords) के विस्तार से जोड़ते हुए पाकिस्तान समेत कई प्रमुख मुस्लिम देशों से इजराइल के साथ राजनयिक संबंध सामान्य करने की अपील की है। इसके चलते पाक कट्टरपंथियों ने शाहबाज शरीफ और आसीफ मुनीर को धमकी दी है। चलिए जानते हैं कि यह अब्राहम अकॉर्ड है।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/international-hindi-news/donald-trump-abraham-accords-pakistan-general-asim-munir-lashkar-warning-civil-war-126052700054_1.html" target="_blank">ट्रंप के जाल में फंसे मुनीर, लश्कर की खुली चेतावनी, पाकिस्तान में भड़क सकता है गृहयुद्ध</a></strong></p>
</p>
<h3>
	1. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का मिशन:</h3>
<p>
	राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म &#39;ट्रुथ सोशल&#39; पर एक विस्तृत पोस्ट में दावा किया कि सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और जॉर्डन जैसे देशों को अब्राहम एकॉर्ड्स का हिस्सा बनना चाहिए। ट्रंप की इस घोषणा के बाद पाकिस्तान के भीतर सक्रिय संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और उसकी राजनीतिक शाखाओं में हड़कंप मच गया है। लश्कर की तरफ से जारी एक बेहद आक्रामक और भड़काऊ बयान में जनरल आसिम मुनीर को सीधे तौर पर चेतावनी दी गई है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. अब्राहम अकॉर्ड (Abraham Accords): एक नजर में</h3>
<p>
	<strong>क्या है: </strong>सितंबर 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता से इज़राइल और अरब देशों के बीच हुआ एक ऐतिहासिक राजनयिक और शांति समझौता।</p>
<p>
	<strong>शामिल देश:</strong> शुरुआत इज़राइल, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन से हुई; बाद में सूडान और मोरक्को भी शामिल हुए।</p>
<p>
	<strong>मुख्य उद्देश्य: </strong>दशकों पुराने तनाव को खत्म कर मध्य-पूर्व में शांति स्थापित करना और व्यापार, पर्यटन, सुरक्षा व सीधी हवाई सेवाएं शुरू करना।</p>
<p>
	<strong>नाम का कारण: </strong>इसका नाम पैगंबर इब्राहिम (अब्राहम) के नाम पर रखा गया है, जो यहूदी, ईसाई और इस्लाम- तीनों धर्मों में साझा और पूजनीय पूर्वज हैं।</p>
<p>
	महत्व: इसने कई अरब देशों द्वारा इज़राइल को मान्यता न देने के दशकों पुराने गतिरोध को तोड़कर मध्य-पूर्व की भू-राजनीति को बदल दिया।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. मिडल ईस्ट में शांति के लिए &#39;अब्राहमी प्रोजेक्ट&#39;: विवाद और हकीकत</h3>
<p>
	<strong>इतिहास और पृष्ठभूमि: </strong>अरब जगत में सबसे पहले यहूदी, फिर ईसाई और अंत में इस्लाम धर्म का उदय हुआ। इन तीनों ही धर्मों को &#39;इब्राहीमी धर्म&#39; (Abrahamic Religions) कहा जाता है, क्योंकि ये तीनों पैगंबर हज़रत इब्राहिम (अब्राहम) को अपना संदेशवाहक और एक ही ईश्वर को मानते हैं। इसके बावजूद, तीर्थों और मान्यताओं को लेकर इनके बीच सदियों से जंग जारी है। इस जंग को रोकने के लिए ही &#39;अब्राहमी प्रोजेक्ट&#39; लांच किया गया। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अब्राहम समझौता (2020): </strong>इस टकराव को खत्म करने और आपसी संबंध सुधारने के लिए वर्ष 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता से इसराइल और यूएई के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौता हुआ, जिसे &#39;द अब्राहम एकॉर्ड&#39; कहा गया। इसके तहत इसराइल ने फिलिस्तीनी क्षेत्रों को अपने हिस्से में मिलाने की योजना को निलंबित कर दिया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>एक नया &#39;धार्मिक प्रोजेक्ट&#39;:</strong> इस समझौते के तहत तीनों धर्मों की समानताओं के आधार पर &#39;अब्राहमी धर्म&#39; नाम से एक नए वैचारिक प्रोजेक्ट की चर्चा शुरू हुई। विशेषज्ञों के अनुसार, यह औपचारिक रूप से कोई नया धर्म नहीं है, बल्कि तीनों धर्मों के मतभेद मिटाकर शांति स्थापित करने का एक राजनीतिक-धार्मिक जरिया है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मिस्र में तीखा विरोध: </strong>इस विचार का अरब देशों, विशेषकर मिस्र और पाकिस्तान में भारी विरोध हो रहा है। अल-अजहर के सर्वोच्च इमाम अहमद अल तैय्यब और कॉप्टिक पादरियों का मानना है कि सभी धर्मों को मिलाकर एक करना असंभव है। पाकिस्तीन कट्टरपंत्री और विरोधियों का आरोप है कि यह &#39;अब्राहमी धर्म&#39; राजनीतिक फायदे, धोखे और इस्लामी पहचान को कमजोर करने का एक प्रयास है। इससे इजराइल को ही फायदा होगा।</p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 27 May 2026 17:58:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 27 May 2026 18:17:30 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Religious Article]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Eid-ul-Azha 2026: ईद उल अजहा का इतिहास और मुख्य संदेश]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/islam-religion/history-and-main-message-of-eid-al-adha-126052700038_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/islam-religion/history-and-main-message-of-eid-al-adha-126052700038_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/23/thumb/1_1/1779535658-8416.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Importance of Eid-ul-Azha: ईद उल-अज़हा का मूल अर्थ है 'जानवर की कुर्बानी देना'। इसका धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व गहरा है। मुसलमान इस दिन जानवरों जैसे बकरी, भेड़, ऊंट की कुर्बानी करते हैं, और इसका मांस गरीबों और जरूरतमंदों में बांटते हैं। यह परंपरा ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="Photo giving information related to Eid al-Adha 2026" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/23/full/1779535658-8416.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
</p>
<p>
	<strong>Eid-ul-Azha 2026:</strong> ईद उल अजहा (जिसे बकरीद भी कहा जाता है) इस्लाम का एक प्रमुख त्योहार है। इसका इतिहास पैगंबर इब्राहीम (हज़रत इब्राहीम/अब्राहम) की कुर्बानी और अल्लाह के प्रति उनकी आज्ञाकारिता से जुड़ा है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/islam-religion/eid-ul-azha-2026-date-126052100052_1.html" target="_blank">Eid ul Azha 2026: कब मनाई जाएगी ईद उल-अज़हा, जानें परंपरा और महत्व</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	इतिहास और धार्मिक महत्व</h3>
<p>
	इस्लामी मान्यता के अनुसार, अल्लाह ने हज़रत इब्राहीम की परीक्षा लेने के लिए उन्हें सपना दिखाया कि वे अपने प्रिय पुत्र इस्माईल की कुर्बानी दें। इब्राहीम ने इसे अल्लाह का आदेश माना और अपने बेटे से इस बारे में बात की। इस्माइल ने भी अल्लाह की इच्छा के आगे सिर झुका दिया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	जब इब्राहीम अपने बेटे की कुर्बानी देने लगे, तब अल्लाह ने उनकी निष्ठा और ईमानदारी देखकर इस्माइल की जगह एक दुंबा (मेंढ़ा) भेज दिया। इस घटना को अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण और विश्वास का प्रतीक माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>इसी याद में मुसलमान हर वर्ष ईद उल अजहा मनाते हैं और जानवर की कुर्बानी देते हैं। कुर्बानी का मांस आमतौर पर तीन हिस्सों में बांटा जाता है:</strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	1. परिवार के लिए</p>
<p>
	2. रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए</p>
<p>
	3. गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	यह त्योहार कब मनाया जाता है?</h3>
<p>
	ईद उल अजहा इस्लामी कैलेंडर के आखिरी महीने ज़िलहिज्जा की 10वीं तारीख को मनाई जाती है। यह हज के समापन के समय आता है, इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	मुख्य संदेश</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	* अल्लाह के प्रति समर्पण</p>
<p>
	* त्याग और बलिदान</p>
<p>
	* गरीबों की मदद और सामाजिक समानता</p>
<p>
	* परिवार और समुदाय के साथ मिलकर खुशियां बांटना</p>
<p>
	 </p>
<p>
	भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, सऊदी अरब और दुनिया के कई देशों में यह त्योहार बड़े उत्साह और श्रद्धा से मनाया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/islam-religion/story-of-bakrid-eid-ul-adha-126052600041_1.html" target="_blank">bakrid ki kahani: बकरीद की कहानी</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 27 May 2026 15:12:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 27 May 2026 15:06:37 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Islam Religion]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[bakrid ki kahani: बकरीद की कहानी]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/islam-religion/story-of-bakrid-eid-ul-adha-126052600041_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/islam-religion/story-of-bakrid-eid-ul-adha-126052600041_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/26/thumb/1_1/1779793904-2596.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/26/thumb/1_1/1779793904-2596.jpg</image>
      <description><![CDATA[Eid-ul-Adha, Bakrid story: कुर्बानी के स्थान पर पहुंचकर, हजरत इब्राहिम ने अपने बेटे को जमीन पर लिटा दिया। पिता का दिल कहीं बेटे की मासूमियत देखकर डगमगा न जाए और अल्लाह के हुक्म में कोई कमी न रह जाए, इसलिए हजरत इब्राहिम ने अपनी आंखों पर एक पट्टी बांध ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Scene depicting the symbol of sacrifice on Eid al-Adha and the Bakrid event during the Hajj pilgrimage in Mecca" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/26/full/1779793904-2596.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Bakrid story: </strong>इस्लामी कैलेंडर के मुताबिक बकरीद का त्योहार ज़िलहिज्जा महीने की 10वीं तारीख को मनाया जाता है। बकरीद (ईद-उल-अजहा) की यह कहानी आज से लगभग 4,000 साल पुरानी है। यह कहानी अल्लाह के एक महान पैगंबर (दूत) हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम और उनके बेटे हजरत इस्माइल के गहरे विश्वास, आज्ञाकारिता और अटूट निष्ठा पर आधारित है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/islam-religion/why-muslims-celebrate-bakrid-126052300046_1.html" target="_blank">Bakrid 2026: मुस्लिम लोग बकरीद क्यों मनाते हैं?</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	1. अल्लाह की कठिन परीक्षा</p>
<p>
	2. पिता और बेटे का संवाद</p>
<p>
	3. शैतान की नाकाम कोशिश</p>
<p>
	4. आंखों पर पट्टी और छुरी का चलना</p>
<p>
	5. मोजिजा (चमत्कार) और भेड़ की कुर्बानी</p>
<p>
	6. कहानी से क्या सीख मिलती है?</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	आइए इस बेहद भावुक और प्रेरणादायक कहानी को सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. अल्लाह की कठिन परीक्षा</h3>
<p>
	हजरत इब्राहिम बहुत बूढ़े हो चुके थे और उनके पास कोई संतान नहीं थी। उन्होंने अल्लाह से बहुत मिन्नतें कीं, जिसके बाद बुढ़ापे में उनके घर एक बेहद प्यारे बेटे का जन्म हुआ, जिसका नाम उन्होंने इस्माइल रखा। हजरत इब्राहिम अपने बेटे से बेइंतहा मोहब्बत करते थे।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	जब इस्माइल थोड़े बड़े हुए (लगभग 10-13 वर्ष के), तब अल्लाह ने हजरत इब्राहिम के इम्तिहान (परीक्षा) का फैसला किया। हजरत इब्राहिम को लगातार तीन रातों तक ख्वाब (सपने) में दिखाई दिया कि अल्लाह उनसे कह रहे हैं- &#39;इब्राहिम, अपनी सबसे प्यारी चीज मेरे रास्ते में कुर्बान कर दो।&#39;</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. पिता और बेटे का संवाद</h3>
<p>
	हजरत इब्राहिम समझ गए कि अल्लाह उनसे उनके इकलौते और सबसे प्यारे बेटे इस्माइल की कुर्बानी मांग रहे हैं। अल्लाह का हुक्म उनके लिए सर्वोपरि था, लेकिन उन्होंने इस बारे में अपने बेटे से बात करने का फैसला किया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	जब हजरत इब्राहिम ने अपने बेटे से कहा: &#39;बेटा, मैंने ख्वाब में देखा है कि मैं तुम्हारी कुर्बानी दे रहा हूं, इस पर तुम्हारी क्या राय है?&#39;</p>
<p>
	 </p>
<p>
	तो छोटे से इस्माइल ने बिना किसी डर या हिचकिचाहट के जवाब दिया:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	&#39;अब्बू जान! आपको जो हुक्म दिया गया है, आप वही कीजिए। इंशाअल्लाह (अगर अल्लाह ने चाहा) तो आप मुझे सब्र (धैर्य) रखने वालों में से पाएंगे।&#39;</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. शैतान की नाकाम कोशिश</h3>
<p>
	जब पिता और पुत्र दोनों अल्लाह के हुक्म को पूरा करने के लिए &#39;मीना&#39; (मक्का के पास एक मैदान) की तरफ बढ़ रहे थे, तो रास्ते में शैतान ने उन्हें बहकाने की कोशिश की। शैतान ने हजरत इब्राहिम से कहा कि वह एक पिता होकर अपने ही बच्चे की जान कैसे ले सकते हैं। लेकिन हजरत इब्राहिम ने शैतान की बातों पर ध्यान नहीं दिया और उसे भगाने के लिए पत्थर मारकर दूर कर दिया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	(मान्यतानुसार आज भी हज यात्रा के दौरान इसी घटना की याद में &#39;जमरात&#39; पर पत्थरों से शैतान को सांकेतिक रूप से मारा जाता है, जिसे &#39;रमी&#39; कहते हैं।)</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. आंखों पर पट्टी और छुरी का चलना</h3>
<p>
	कुर्बानी के स्थान पर पहुंचकर, हजरत इब्राहिम ने अपने बेटे को जमीन पर लिटा दिया। पिता का दिल कहीं बेटे की मासूमियत देखकर डगमगा न जाए और अल्लाह के हुक्म में कोई कमी न रह जाए, इसलिए हजरत इब्राहिम ने अपनी आंखों पर एक पट्टी बांध ली।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	उन्होंने हाथ में तेज छुरी ली और पूरी ताकत से अपने प्यारे बेटे की गर्दन पर चला दी।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. मोजिजा (चमत्कार) और भेड़ की कुर्बानी</h3>
<p>
	जैसे ही हजरत इब्राहिम ने छुरी चलाई, अल्लाह ने उनकी सच्ची नियत, वफादारी और आत्मसमर्पण को स्वीकार कर लिया। अल्लाह के हुक्म से फरिश्ते (जिब्रईल) ने पलक झपकते ही हजरत इस्माइल को वहां से हटाकर सुरक्षित खड़ा कर दिया और छुरी के नीचे जन्नत से लाया गया एक दुंबा (नर भेड़/मेमना) रख दिया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	जब हजरत इब्राहिम ने अपनी आंखों से पट्टी हटाई, तो उन्होंने देखा कि उनका बेटा इस्माइल मुस्कुराता हुआ पास में खड़ा है और छुरी के नीचे एक भेड़ की कुर्बानी हो चुकी है। तभी आसमान से आवाज आई— &#39;ऐ इब्राहिम, तुमने अपने ख्वाब को सच कर दिखाया। हम नेकी करने वालों को ऐसा ही बदला देते हैं।&#39;</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	6. कहानी से क्या सीख मिलती है?</h3>
<p>
	<strong>यह कहानी सिर्फ एक जानवर की कुर्बानी देने के बारे में नहीं है। यह सिखाती है कि:</strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अहंकार और मोह का त्याग: </strong>इंसान को ईश्वर/अल्लाह की मर्जी के सामने अपने अहंकार, स्वार्थ और अत्यधिक मोह का त्याग करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>साफ नियत:</strong> जानवर की कुर्बानी महज़ एक प्रतीक (Symbol) है। असली कुर्बानी अपनी बुराइयों, गलत आदतों और लालच को छोड़ना है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	यही वजह है कि इस महान ऐतिहासिक घटना की याद में दुनिया भर के मुसलमान हर साल बकरीद (ईद-उल-अजहा) मनाते हैं और बकरे, भेड़ या ऊंट की कुर्बानी देकर उसके मांस को गरीबों और जरूरतमंदों में बांटते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/islam-religion/eid-ul-azha-2026-date-126052100052_1.html" target="_blank">Eid ul Azha 2026: कब मनाई जाएगी ईद उल-अज़हा, जानें परंपरा और महत्व</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 26 May 2026 17:01:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 26 May 2026 17:00:12 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Islam Religion]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Purnima date 2026: अधिकमास की पूर्णिमा का व्रत रखने का क्या है महत्व, जानिए पूजा मुहूर्त और विधि]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/adhik-maas-purnima-2026-126052600030_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/adhik-maas-purnima-2026-126052600030_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/26/thumb/1_1/1779788841-7011.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/26/thumb/1_1/1779788841-7011.jpg</image>
      <description><![CDATA[Adhik Maas Purnima Vrat: अधिकमास पूर्णिमा का व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। अधिकमास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और यह भगवान विष्णु को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत, दान, स्नान और पूजा करने से कई गुना अधिक फल ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p>
		<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
			<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
				<img align="center" alt="Devotees worshipping on the banks of the holy river on the full moon day of Adhik Maas, view of the full moon and the pilgrimage site" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/26/full/1779788841-7011.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
		</p>
		<br />
		<strong>Purushottam Maas Purnima 2026:</strong> हिंदू धर्म में अधिकमास (जिसे पुरुषोत्तम मास या मलयमास भी कहा जाता है) की पूर्णिमा का बहुत बड़ा धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। अधिकमास हर तीन साल में एक बार आता है, इसलिए इस दौरान आने वाली पूर्णिमा का फल आम पूर्णिमा से कई गुना अधिक माना गया है। यह दिन पूरी तरह से भगवान श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित होता है। इस साल 2026 में ज्येष्ठ अधिकमास चल रहा है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/adhik-maas-2026-jyeshtha-month-8-bade-mangal-mahatva-126050600031_1.html" target="_blank">अधिक मास में बना दुर्लभ संयोग: ज्येष्ठ माह में 8 बड़े मंगल, जानें इसका खास महत्व</a></strong></p>
	<p>
		 </p>
	<ul>
		<li>
			अधिकमास पूर्णिमा 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त</li>
		<li>
			अधिकमास की पूर्णिमा का महत्व</li>
		<li>
			पूजा की सरल और संपूर्ण विधि</li>
		<li>
			इस दिन क्या दान करें?</li>
		<li>
			ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा-FAQs</li>
	</ul>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		आइए जानते हैं इसके व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त और सही पूजा विधि:</h3>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		अधिकमास पूर्णिमा 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त</h3>
	<p>
		हिंदू पंचांग के अनुसार, इस बार पूर्णिमा तिथि दो दिनों तक व्याप्त रहेगी। व्रत और स्नान-दान के लिए तिथियां इस प्रकार हैं:</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>पूर्णिमा तिथि का आरंभ: 30 मई 2026, शनिवार को सुबह 11:57 बजे से</strong></p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>पूर्णिमा तिथि की समाप्ति: 31 मई 2026, रविवार को दोपहर 02:14 बजे तक</strong></p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		महत्वपूर्ण नोट: पूर्णिमा व्रत और चंद्र पूजा: 30 मई 2026 (शनिवार) को रखी जाएगी, क्योंकि इस रात को पूर्णिमा का चंद्रमा मौजूद रहेगा</p>
	<p>
		(चंद्रोदय का समय शाम 07:36 बजे है)।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>पूर्णिमा स्नान-दान:</strong> 31 मई 2026 (रविवार) को करना शास्त्र सम्मत और उत्तम माना जाएगा, क्योंकि इस दिन उदयातिथि में पूर्णिमा है।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		अधिकमास की पूर्णिमा का महत्व</h3>
	<p>
		<strong>सर्वसिद्धिदायिनी तिथि: </strong>स्कंदपुराण और पद्मपुराण के अनुसार, अधिकमास की पूर्णिमा को &#39;सर्वसिद्धिदायिनी&#39; माना गया है। इस दिन किए गए जप, तप और दान का पुण्य कभी खत्म नहीं होता।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>श्रीहरि और महालक्ष्मी की कृपा: </strong>अधिकमास के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु/ पुरुषोत्तम हैं। इस दिन उनकी पूजा करने से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और धन-धान्य की कमी नहीं होती।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>मानसिक शांति और चंद्र दोष से मुक्ति: </strong>पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं से पूर्ण होता है। इस दिन चंद्र देव की पूजा और उन्हें अर्घ्य देने से कुंडली का चंद्र दोष दूर होता है और मानसिक तनाव से राहत मिलती है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/when-will-adhikmas-end-126052100023_1.html" target="_blank">पुरुषोत्तम मास 2026: कब समाप्त होगा अधिकमास?</a></strong></p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		पूजा की सरल और संपूर्ण विधि</h3>
	<p>
		अधिकमास पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु के &#39;सत्यनारायण&#39; रूप की पूजा का विशेष विधान है। आप इस विधि से पूजा कर सकते हैं:</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>सुबह का स्नान:</strong> सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घर के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें। यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>व्रत का संकल्प: </strong>स्वच्छ या पीले रंग के वस्त्र धारण कर सूर्य देव को जल अर्पित करें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>भगवान विष्णु-लक्ष्मी की स्थापना:</strong> घर के मंदिर या एक चौकी पर पीला/लाल कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>पूजन सामग्री:</strong> भगवान को पीले फूल, पीले फल, चंदन, अक्षत और धूप-दीप अर्पित करें। भगवान विष्णु को तुलसी दल (तुलसी के पत्ते) बेहद प्रिय हैं, इसलिए भोग में इसे जरूर शामिल करें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>पाठ और कथा: </strong>इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा सुनें या पढ़ें। साथ ही &#39;विष्णु सहस्रनाम&#39; या &#39;ॐ नमो भगवते वासुदेवाय&#39; मंत्र का जप करें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>शाम की पूजा (चंद्र अर्घ्य): </strong>शाम के समय चंद्रमा निकलने पर कच्चे दूध में गंगाजल और मिश्री मिलाकर चंद्रदेव को अर्घ्य दें। इससे मन शांत और एकाग्र होता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		इस दिन क्या दान करें?</h3>
	<p>
		ज्येष्ठ का महीना होने के कारण गर्मी बहुत होती है, इसलिए अधिकमास की पूर्णिमा पर जल से भरी मटकी (घड़ा), सत्तू, आम, खरबूजा, पंखा, वस्त्र या अन्न का दान करना महापुण्यदायी माना जाता है। किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान जरूर दें।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा-FAQs</h3>
	<p>
		<strong>प्रश्न: ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा कब मनाई जाएगी?</strong></p>
	<p>
		उत्तर: ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 31 मई 2026, रविवार को मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ 30 मई को सुबह 11:57 बजे से होगा और समापन 31 मई को दोपहर 2:14 बजे पर होगा।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>प्रश्न: अधिक पूर्णिमा को पुरुषोत्तम पूर्णिमा क्यों कहा जाता है?</strong></p>
	<p>
		उत्तर: जब पूर्णिमा पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) में आती है, तब उसे पुरुषोत्तम पूर्णिमा कहा जाता है। यह संयोग लगभग तीन वर्ष में एक बार बनता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>प्रश्न: अधिक पूर्णिमा पर किस भगवान की पूजा की जाती है?</strong></p>
	<p>
		उत्तर: इस दिन मुख्य रूप से भगवान श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>प्रश्न: क्या अधिक पूर्णिमा पर व्रत रखना चाहिए?</strong></p>
	<p>
		उत्तर: हां, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक पूर्णिमा का व्रत रखने से मानसिक शांति, सुख-सौभाग्य और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/other-festivals/adhik-maas-purnima-2026-date-and-importance-126052300008_1.html" target="_blank">Adhik Maas Purnima 2026: अधिकमास की पूर्णिमा कब है, क्या है इसका महत्व?</a></strong></p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 26 May 2026 16:03:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 26 May 2026 15:24:24 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Other Festivals]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[अधिकमास की पद्मिनी एकादशी, जानें महत्व, कथा और संक्षिप्त पूजा विधि]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/padmini-ekadashi-importance-katha-n-puja-vidhi-126052600007_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/padmini-ekadashi-importance-katha-n-puja-vidhi-126052600007_1.html</guid>
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      <description><![CDATA[Padmini Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में अधिकमास (मलमास या पुरुषोत्तम मास) का विशेष महत्व है, जो हर तीन साल में एक बार आता है। इस पूरे महीने को भगवान विष्णु की आराधना के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। अधिकमास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पद्मिनी एकादशी या ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Padmini Ekadashi caption with description of various incarnations of Lord Vishnu in the image" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/26/full/1779773632-8429.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Padmini Ekadashi Importance: </strong>पद्मिनी एकादशी, हिन्दू धर्म में एक अत्यंत पवित्र और शुभ दिन माना जाता है। यह एकादशी विशेष रूप से अधिकमास (Adhika Maas) में आती है, जो कि तीन साल में एक बार आता है। अधिकमास को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह समय पुण्य कमाने और भगवान की भक्ति में लीन होने का अनुकूल अवसर होता है। इस बार पद्मिनी एकादशी 27 मई 2026, दिन बुधवार को मनाई जा रही है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ipl-news/kuldeep-yadav-misses-hattrick-but-adjudged-man-of-the-match-126052500051_1.html" target="_blank">कैच नहीं छूटता तो कुलदीप ले लेते हैट्रिक, बने मैन ऑफ द मैच (Video)</a></strong></p>
<h3>
	3 वर्ष बाद आने वाले इस पावन व्रत का महत्व, पौराणिक कथा और पूजन की विधि नीचे दी गई है:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	पद्मिनी एकादशी का महत्व</h3>
<p>
	पद्मिनी एकादशी का व्रत करने से मनुष्य को जीवन के सभी सुखों की प्राप्ति होती है और अंत में मोक्ष मिलता है। मान्यता है कि जो फल कठिन तपस्या, यज्ञ और दान से भी नहीं मिलता, वह मात्र अधिकमास की पद्मिनी एकादशी का व्रत रखने से प्राप्त हो जाता है। मान्यतानुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से जाने-अनजाने में हुए सभी पाप कट जाते हैं। साथ ही अधिकमास में किए गए धार्मिक कार्यों का फल अनंत गुना होकर मिलता है। धार्मिक ग्रंथों में संतान प्राप्ति और सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत अचूक माना गया है।</p>
<h3>
	 </h3>
<h3>
	पद्मिनी एकादशी की पौराणिक कथा</h3>
<p>
	पद्मिनी एकादशी की कथा त्रेतायुग के प्रतापी राजा कीर्तवीर्य और उनकी पत्नी पद्मिनी से जुड़ी है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	संतानहीन राजा की चिंता</h3>
<p>
	त्रेतायुग में हैहय वंश में कृतवीर्य नाम के राजा राज करते थे। उनकी कई रानियां थीं, लेकिन किसी से भी उन्हें संतान का सुख प्राप्त नहीं हुआ। संतान न होने के कारण राजा और उनकी रानियां सदैव चिंतित और दुखी रहते थे। सारा राजपाठ और वैभव भी उन्हें आनंद नहीं दे पा रहा था।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	कठिन तपस्या का मार्ग</h3>
<p>
	संतान की कामना के लिए राजा कृतवीर्य ने अपना राजपाट मंत्रियों को सौंप दिया और अपनी परम प्रिय रानी पद्मिनी के साथ गंधमादन पर्वत पर तपस्या करने चले गए। राजा ने हजारों वर्षों तक कठिन तप किया, उनका शरीर क्षीण हो गया, लेकिन फिर भी उन्हें संतान की प्राप्ति नहीं हुई।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	देवी अनुसूया का मार्गदर्शन</h3>
<p>
	रानी पद्मिनी ने तब सती अनुसूया जी से इसका उपाय पूछा। माता अनुसूया ने कहा, &#39;हे देवी! हर तीन वर्ष में एक बार आने वाला मलमास (अधिकमास) अत्यंत पवित्र है। इसमें आने वाले शुक्ल पक्ष की एकादशी का नाम पद्मिनी है। यदि तुम इस एकादशी का विधि-विधान से व्रत करोगी, तो भगवान पुरुषोत्तम तुम्हारी इच्छा अवश्य पूरी करेंगे।&#39;</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	व्रत का प्रभाव और पराक्रमी पुत्र का जन्म</h3>
<p>
	रानी पद्मिनी ने माता अनुसूया के कहे अनुसार अधिकमास की एकादशी का निराहार रहकर पूरी श्रद्धा से व्रत किया और रात्रि जागरण किया। रानी के इस कठिन व्रत से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट हुए और उन्होंने वरदान मांगने को कहा।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	रानी ने कहा, &#39;प्रभु! मेरे पति को संतान प्राप्ति का वरदान दीजिए।&#39; तब भगवान विष्णु ने राजा से वरदान मांगने को कहा। राजा कृतवीर्य ने वर मांगा, &#39;हे नाथ! मुझे एक ऐसा पुत्र प्राप्त हो जो सर्वगुण संपन्न हो, तीनों लोकों में आदरणीय हो और जिसे आपके अतिरिक्त कोई और परास्त न कर सके।&#39;</p>
<p>
	 </p>
<p>
	कथा का सुखद अंत: भगवान विष्णु ने &#39;तथास्तु&#39; कहा और अंतर्ध्यान हो गए। समय आने पर रानी पद्मिनी के गर्भ से एक अत्यंत पराक्रमी पुत्र ने जन्म लिया, जो आगे चलकर कार्तवीर्य अर्जुन (सहस्रार्जुन) के नाम से प्रसिद्ध हुआ। वह इतना शक्तिशाली था कि उसने लंकापति रावण को भी बंदी बना लिया था।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/adhikmaas-padmini-ekadashi-2026-vrat-mahatva-katha-126052000018_1.html" target="_blank">3 साल बाद आई अधिकमास की पद्मिनी एकादशी, जानें व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त और पौराणिक कथा</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	व्रत की संक्षिप्त पूजा विधि</h3>
<p>
	<strong>सुबह का संकल्प:</strong> एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>पूजा स्थापना:</strong> चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>धूप-दीप और भोग: </strong>भगवान को पीले फूल, पीले फल, तुलसी दल, अक्षत और चंदन अर्पित करें। घी का दीपक जलाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>कथा और आरती: </strong>पद्मिनी एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें और अंत में विष्णु जी की आरती करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>जागरण: </strong>इस व्रत में रात के समय जागरण करने का विशेष महत्व है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>पारणा: </strong>द्वादशी तिथि के दिन शुभ मुहूर्त में किसी ब्राह्मण को भोजन या दान देकर व्रत का पारणा (व्रत खोलना) करें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	अधिकमास 2026 और पद्मिनी एकादशी– FAQs</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. अधिकमास का धार्मिक महत्व क्या है?</h3>
<p>
	उत्तर: यह मास व्रत, दान और पूजा का सर्वोत्तम समय है। इस मास में किए गए धार्मिक कार्यों का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. अधिकमास में दान का महत्व क्या है?</h3>
<p>
	उत्तर: इस मास में गरीबों और ब्राह्मणों को दान करने से पुण्य का फल बढ़ जाता है और व्यक्ति के जीवन में समृद्धि आती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/5-special-things-about-padmini-ekadashi-of-adhik-maas-know-the-5-rules-of-fasting-126052300014_1.html" target="_blank">Padmini Ekadashi 2026: अधिकमास की पद्मिनी एकादशी की 5 खास बातें, जानिए व्रत रखने के 5 नियम</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 26 May 2026 12:59:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 26 May 2026 12:56:15 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[ekadashi vrat katha]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Eid ul Azha 2026: कब मनाई जाएगी ईद उल-अज़हा, जानें परंपरा और महत्व]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/islam-religion/eid-ul-azha-2026-date-126052100052_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/islam-religion/eid-ul-azha-2026-date-126052100052_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/21/thumb/1_1/1779363120-1087.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/21/thumb/1_1/1779363120-1087.jpg</image>
      <description><![CDATA[Importance of Qurbani: ईद उल-अज़हा, जिसे आमतौर पर बकरीद या कुर्बानी ईद के नाम से जाना जाता है, इस्लाम धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह त्योहार हर साल जूलियन या इस्लामी कैलेंडर के अनुसार ज़ुल-हिज्जा के 10वें दिन मनाया जाता है। ईद ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Gives information and pictures related to the festival of Bakrid on Eid ul-Adha" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/21/full/1779363120-1087.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Baqrid 2026 Celebration Tips: </strong>बकरीद, जिसे ईद-उल-अजहा या ईद-ए-कुर्बान भी कहा जाता है, इस्लाम के सबसे पवित्र त्योहारों में से एक है। वर्ष 2026 में यह 27 मई 2026 बुधवार या गुरुवार, 28 मई 2026 को मनाए जाने की संभावना है। यह त्योहार मुख्य रूप से &#39;कुर्बानी&#39; (बलिदान) की भावना को समर्पित है। आइए यहां जानते हैं इसकी महान परंपरा और महत्व</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. कुर्बानी की ऐतिहासिक परंपरा</h3>
<p>
	कुर्बानी की परंपरा का सीधा संबंध हजरत इब्राहिम (अ.स.) से है, जिन्हें यहूदी, ईसाई और मुस्लिम तीनों धर्मों में एक महान पैगंबर माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>ईश्वरीय परीक्षा</strong>: इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, अल्लाह ने हजरत इब्राहिम के सपने में आकर उनकी सबसे प्रिय चीज की कुर्बानी मांगी। इब्राहिम साहब के लिए उनके इकलौते बेटे हजरत इस्माइल सबसे प्रिय थे।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अटूट विश्वास:</strong> अल्लाह के प्रति अपनी वफादारी साबित करने के लिए वह अपने बेटे की कुर्बानी देने को तैयार हो गए। जब उन्होंने अपने बेटे की गर्दन पर छुरी चलाई, तो अल्लाह ने उनके जज्बे को स्वीकार किया और वहां एक &#39;दुंबा&#39; (भेड़) भेज दिया। बेटे की जगह उस जानवर की कुर्बानी हुई।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सुन्नत-ए-इब्राहिम: </strong>इसी ऐतिहासिक घटना की याद में हर साल पूरी दुनिया के मुसलमान जानवर की कुर्बानी देते हैं, जिसे &#39;सुन्नत-ए-इब्राहिम&#39; कहा जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. कुर्बानी का वास्तविक महत्व </h3>
<p>
	कुर्बानी का अर्थ केवल जानवर को ज़ब़ह करना नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे आध्यात्मिक और नैतिक संदेश हैं:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>समर्पण: </strong>यह संदेश देता है कि इंसान को ईश्वर की मर्जी के आगे अपनी इच्छाओं और मोह का त्याग करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अहंकार का त्याग: </strong>जानवर की कुर्बानी प्रतीकात्मक है। इसका असली उद्देश्य मनुष्य के भीतर छिपे &#39;पशुत्व&#39; यानी क्रोध, लालच, घृणा और अहंकार की बलि देना है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सामाजिक समरसता: </strong>यह त्योहार समाज के हर तबके को साथ लेकर चलने की सीख देता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. गोश्त (मांस) के बंटवारे का नियम</h3>
<p>
	बकरीद की सबसे सुंदर बात इसका वितरण नियम है, जो यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी भूखा न रहे। कुर्बानी के मांस को तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाता है:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>पहला हिस्सा (गरीब और जरूरतमंद): </strong>समाज के उन लोगों के लिए जिनके पास भोजन का अभाव है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>दूसरा हिस्सा (रिश्तेदार और दोस्त): </strong>सामाजिक संबंधों और भाईचारे को मजबूत करने के लिए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>तीसरा हिस्सा (स्वयं का परिवार): </strong>अपने परिवार की खुशियों के लिए।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. हज और बकरीद का संबंध</h3>
<p>
	बकरीद का त्योहार &#39;जिलहिज्जा&#39; के महीने में मनाया जाता है। इसी दौरान दुनिया भर के मुसलमान मक्का (सऊदी अरब) में हज के लिए एकत्रित होते हैं। हज की रस्मों का एक अनिवार्य हिस्सा कुर्बानी भी है, जो हज पूरा होने की खुशी में दी जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. मुख्य नियम और शिष्टाचार</h3>
<p>
	<strong>नमाज:</strong> बकरीद के दिन सुबह ईदगाह या मस्जिद में विशेष नमाज (दो रकात) अदा की जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>पवित्रता:</strong> कुर्बानी के लिए वही जानवर चुना जाता है जो स्वस्थ हो और उसे कोई चोट न लगी हो।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>साफ-सफाई: </strong>वर्तमान समय में धर्मगुरुओं द्वारा यह विशेष सलाह दी जाती है कि कुर्बानी सार्वजनिक स्थलों पर न करें और साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें ताकि पर्यावरण और अन्य लोगों को असुविधा न हो।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सार:</strong> बकरीद हमें सिखाती है कि खुशियां वही हैं जो दूसरों के साथ बांटकर मनाई जाएं। यह त्योहार &#39;स्व&#39; से ऊपर उठकर &#39;सर्व&#39; के बारे में सोचने की प्रेरणा देता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।</p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 26 May 2026 08:50:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 28 May 2026 09:28:01 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Islam Religion]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[ज्येष्ठ मास में 8 बड़े मंगल का अद्भुत संयोग: इस तरह करेंगे हनुमानजी की उपासना तो मिलेंगे अनेक शुभ फल]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/a-unique-combination-of-eight-major-tuesdays-in-the-month-of-jyeshtha-worship-lord-hanuman-in-this-way-126052500014_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/a-unique-combination-of-eight-major-tuesdays-in-the-month-of-jyeshtha-worship-lord-hanuman-in-this-way-126052500014_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/01/thumb/1_1/1777617769-808.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/01/thumb/1_1/1777617769-808.jpg</image>
      <description><![CDATA[Jyeshtha Mangal 2026: हिंदू पंचांग में मंगल का दिन विशेष महत्व रखता है। विशेषकर जब यह दिन बुढ़वा मंगल या बड़े महा-मंगल के रूप में आता है, तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। साल 2026 में बुढ़वा या बड़े मंगल के दिन सभी भक्तों और धार्मिक साधकों के लिए विशेष ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="The picture shows the worship of Lord Hanuman on the occasion of Bade Mangal" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/01/full/1777617769-808.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1376px; height: 768px;" title="" /></p>
</p>
<p>
	<strong>Bada Mangalwar 2026: </strong>ज्येष्ठ माह में हनुमानजी और मंगलदेवजी की पूजा का खासा महत्व रहता है। इन मंगलवार को बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल कहते हैं। बुढ़वा मंगल के दिन केवल धार्मिक दृष्टि से ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यह जीवन में ऊर्जा, साहस, आत्मविश्वास और मानसिक शक्ति को बढ़ाने वाले दिन भी है। इन दिनों बजरंगबली की भक्ति करना अत्यंत फलदायक माना गया है। 5 मई से शुरू हुए ज्‍येष्‍ठ मास में 8 बड़ा मंगल पड़ेंगे। यह महीना 23 जून को खत्‍म होगा। बड़ा मंगल के दिन विधि-विधान से हनुमान जी पूजा-अर्चना करनी चाहिए। ऐसा करने से जीवन के सारे संकटों का समाधान तुरंत ही हो जाता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/bada-mangal-2026-dates-126050100016_1.html" target="_blank">Bada Mangal Dates: ज्येष्ठ माह में कब-कब रहेगा बड़ा मंगल, जानें संपूर्ण तिथियां</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	आइए यहां जानते हैं प्रत्येक बड़े मंगल की विस्तृत महिमा...</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. प्रथम बड़ा मंगल (5 मई 2026)</h3>
<p>
	यह ज्येष्ठ मास का पहला मंगलवार 5 मई को मनाया गया। इसी दिन से मंदिरों में विशेष सजावट और भंडारों की शुरुआत होती है। मान्यता है कि इसी दिन हनुमान जी ने भीम के अहंकार को तोड़ने के लिए वृद्ध वानर का रूप लिया था। इस दिन हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. द्वितीय बड़ा मंगल (12 मई 2026)</h3>
<p>
	12 मई 2026 को मनाया गया दूसरा बड़ा मंगल धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इस दिन एकादशी का भी प्रभाव रहास अत: यह दिन दान-पुण्य के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया। मान्यतानुसार इस दिन मंदिरों में चोला चढ़ाने और प्याऊ यानी ठंडे पानी की सेवा लगाने से घर की कलह दूर होती है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. तृतीय बड़ा मंगल (19 मई 2026)</h3>
<p>
	तृतीय बड़ा मंगल 19 मई को पड़ा था, तीसरे मंगल तक गर्मी अपने चरम पर होती है। इस दिन सत्तू, गुड़ और ठंडे शरबत के वितरण का विशेष महत्व बतलाया गया है। यदि आपकी कुंडली में मंगल दोष है या विवाह में देरी हो रही है, तो इस दिन हनुमान जी को लाल फूल और सिंदूर अर्पित करना बहुत लाभकारी हेोता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. चतुर्थ बड़ा मंगल (26 मई 2026)</h3>
<p>
	26 मई 2026 को ज्येष्ठ मास का चौथा बड़ा मंगल होगा। इस दिन मंदिरों में भारी भीड़ उमड़ती है। इस दिन हनुमान जी को बनारसी पान और बेसन के लड्डू का भोग लगाना चाहिए। माना जाता है कि चतुर्थ बड़े मंगल पर की गई पूजा से पूरे महीने की भक्ति का फल मिल जाता है और आने वाले संकट टल जाते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. पांचवां बड़ा मंगल (2 जून 2026)</h3>
<p>
	2 जून 2026 को अधि. ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया तिथि पर पांचवां बड़ा मंगल पड़ेगा, जो कि ज्येष्ठ के अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) में पड़ने वाला प्रथम मंगल होगा। अधिक मास में हनुमान जी की पूजा का फल अनंत गुना बढ़ जाता है। इस दिन भगवान विष्णु और हनुमान जी की संयुक्त उपासना करें। अधिक मास होने के कारण &#39;पीले पुष्प&#39; और &#39;तुलसी दल&#39; अर्पित करना विशेष शुभ रहेगा।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	6. छठा बड़ा मंगल (9 जून 2026)</h3>
<p>
	9 जून 2026 को हिन्दू तिथिनुसार अधि. ज्येष्ठ कृष्ण नवमी पर छठा बड़ा मंगल मनाया जाएगा। नवमी तिथि शक्ति की उपासना की तिथि है। यह अधिक मास के मध्य का समय है, जिसे आत्म-शुद्धि के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। इस दिन &#39;हनुमान बाहुक&#39; का पाठ करना शारीरिक कष्टों और रोगों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है। गरीबों को मौसमी फल (जैसे आम या तरबूज) का दान करें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	7. सातवां बड़ा मंगल (16 जून 2026)</h3>
<p>
	शुद्ध ज्येष्ठ शुक्ल एकम-द्वितीया तिथि पर 16 जून 2026 को सातवां बड़ा मंगल पड़ेगा। यहां से &#39;शुद्ध&#39; ज्येष्ठ मास का शुक्ल पक्ष शुरू हो रहा है। यह दिन नई ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक है क्योंकि अधिक मास समाप्त होकर शुद्ध मास शुरू हो चुका होगा। इस अवसर पर नए कार्यों की सिद्धि के लिए हनुमान जी के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाएं। मंदिर के शिखर पर लाल ध्वजा (झंडा) चढ़ाना इस दिन अत्यंत मंगलकारी होता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	8. आठवां बड़ा मंगल (23 जून 2026)</h3>
<p>
	हिन्दू केलेंडर के तिथिनुसार शुद्ध ज्येष्ठ शुक्ल नवमी पर आठवां बड़ा मंगल पड़ेगा, जो कि 23 जून 2026 को मनाया जाएगा। यह इस श्रृंखला का अंतिम बड़ा मंगल होगा। बता दें कि शुक्ल पक्ष की नवमी को हनुमान जी के &#39;विजय स्वरूप&#39; की पूजा की जाती है। अत: बड़ा मंगल के समापन के अवसर पर विशाल भंडारे का आयोजन या निर्धनों को भोजन कराना श्रेष्ठ है। इस दिन सुंदरकांड का पूर्ण पाठ करें और हनुमान जी को मीठा पान (बीड़ा) अर्पित करें ताकि आपके जीवन के सभी कार्य &#39;मीठास&#39; के साथ संपन्न हों।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	इन दिनों के लिए विशेष सावधानी और उपाय:</h3>
<p>
	<strong>दान- </strong>भीषण गर्मी के कारण इन सभी मंगलवारों को &#39;जल सेवा&#39; (प्याऊ) सबसे बड़ा पुण्य है।</p>
<p>
	<strong>मंत्र- </strong>ॐ हं हनुमते नमः का जाप कम से कम 108 बार करें।</p>
<p>
	<strong>वर्जित- </strong>इन दिनों नाखून काटना, बाल कटवाना या घर में कलह करना पूर्णतः वर्जित है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>नोट: </strong>वर्ष 2026 में ज्येष्ठ मास में पुरुषोत्तम या अधिकमास होने के कारण भक्तों को हनुमान जी की भक्ति के लिए अतिरिक्त समय मिल रहा है। अधिक मास के मंगल विशेष रूप से आध्यात्मिक उन्नति के लिए जाने जाते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/do-these-10-special-things-on-bada-mangal-and-you-will-receive-the-blessings-of-lord-hanuman-126050400009_1.html" target="_blank">Bada Mangal 2026: बड़ा मंगल के दिनों में करें ये 10 विशेष कार्य, मिलेगा रामदूत हनुमान जी का आशीर्वाद</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 25 May 2026 11:45:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 25 May 2026 11:42:07 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Jay Hanuman]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[आल्हा जयंती कैसे और कब मनाई जाती है?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/religious-article/alha-and-udal-jayanti-2026-126052200033_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/22/thumb/1_1/1779443284-8084.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Legendary warriors Alha-Udal: आल्हा जयंती परंपरागत भारतीय लोक और धर्म संस्कृति में एक महत्वपूर्ण उत्सव है, खासकर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में मनाया जाता है। इन्हें भक्ति, वीरता और न्यायप्रियता के प्रतीक के रूप में देखा ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Picture depicting the tales of bravery of Aalha, the great brave warrior of Bundelkhand, on his birth anniversary" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/22/full/1779443284-8084.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Alha Jayanti celebration:</strong> बुंदेलखंड के महान और अदम्य साहसी योद्धा वीर आल्हा की जयंती हर साल 25 मई को मनाई जाती है। आल्हा और उनके छोटे भाई ऊदल (उदयसिंह), महोबा के राजा परमाल (जिन्हें इतिहास में परमर्दी देव चंदेल के नाम से जाना जाता है) के महान सेनापति थे, जिन्होंने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए 52 युद्ध लड़े थे और वे किसी भी युद्ध में पराजित नहीं हुए।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/nautapa-start-date-and-end-date-2026-126052200004_1.html" target="_blank">Navtapa 2026 dates: कब से कब तक रहेगा नौतपा?</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	आइए जानते हैं कि आल्हा जयंती कैसे और क्यों मनाई जाती है:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	आल्हा जयंती कैसे मनाई जाती है?</h3>
<p>
	आल्हा जयंती मुख्य रूप से बुंदेलखंड क्षेत्र (उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्से) में बेहद उत्साह और गर्व के साथ मनाई जाती है। इसे मनाने के पारंपरिक तरीके निम्नलिखित हैं:</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. &#39;आल्हा खंड&#39; (आल्हा गायन) का आयोजन</h3>
<p>
	इस दिन बुंदेलखंड के गांवों, चौपालों और शहरों में विशेष रूप से "आल्हा गायन" के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	महोबा के राजकवि जगनिक, जिन्हें &#39;परमाल रासो&#39; के नाम से भी जाना जाता है, द्वारा रचित &#39;आल्हा खंड&#39; (वीर रस से भरपूर महाकाव्य) को ढोलक और मंजीरों की थाप पर ऊंचे स्वर में गाया जाता है। बुंदेली भाषा में गाए जाने वाले ये गीत बहुत लोकप्रिय हैं। इसे सुनने के लिए भारी भीड़ उमड़ती है, क्योंकि इसके शब्दों और धुनों में आज भी युवाओं के रोंगटे खड़े कर देने वाला वीर रस होता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. मैहर माता मंदिर (सतना, मरणोपरांत मान्यता) में विशेष पूजा</h3>
<p>
	आल्हा को मां शारदा (सरस्वती) का परम भक्त माना जाता है। मान्यता है कि मां शारदा के आशीर्वाद से ही उन्हें अमरत्व का वरदान मिला था। इस दिन मध्य प्रदेश के महोबा और मैहर (शारदा भवानी मंदिर) में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। लोक मान्यता है कि आज भी हर सुबह मंदिर के कपाट खुलने से पहले वीर आल्हा अदृश्य रूप से आकर मां शारदा की सबसे पहली पूजा और श्रृंगार करके जाते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. शौर्य यात्राएं और प्रतिमा पूजन</h3>
<p>
	बुंदेलखंड के कई शहरों में वीर आल्हा और ऊदल की मूर्तियों पर माल्यार्पण किया जाता है। राजपूत और स्थानीय समाज के लोग इस दिन भव्य शौर्य यात्राएं निकालते हैं और उनके पराक्रम को याद करते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	आल्हा जयंती का महत्व</h3>
<p>
	<strong>अमरता की लोक मान्यता: </strong>ऐसी लोक कथाएं हैं कि आल्हा ने अपने जीवन के अंतिम समय में युद्ध छोड़कर संन्यास ले लिया था और वे आज भी अमर हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अंतिम युद्ध: </strong>आल्हा-ऊदल ने अपना आखिरी और सबसे प्रसिद्ध युद्ध दिल्ली के शासक पृथ्वीराज चौहान के साथ लड़ा था, जिसमें उनके भाई ऊदल वीरगति को प्राप्त हुए थे, लेकिन आल्हा ने अद्भुत वीरता दिखाई थी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सांस्कृतिक धरोहर: </strong>यह जयंती बुंदेलखंड की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने का माध्यम है। इसके जरिए आने वाली पीढ़ी को देश और माटी के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीरों की कहानियों से परिचित कराया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	आल्हा जयंती हर वर्ष उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। यह त्योहार भाईचारे, वीरता और ऐतिहासिक गौरव का प्रतीक है। यह पर्व प्रसिद्ध लोक नायक आल्हा और ऊदल की वीरता, पराक्रम और युद्ध कौशल को समर्पित है। आल्हा जयंती केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह वीरता, परिवार, और देशभक्ति की भावना को भी जागृत करता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-nakshatra-sign/sun-transit-in-rohini-nakshatra-2026-dos-and-donts-126052200011_1.html" target="_blank">Nautapa 2026: रोहिणी नक्षत्र में सूर्य गोचर 2026: नौतपा के 9 दिनों में क्या करें और क्या न करें?</a></strong></p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 25 May 2026 10:40:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 25 May 2026 11:32:21 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Religious Article]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Ganga Dussehra 2026: स्वर्ग से कैसे धरती पर आईं पतित पावनी मां गंगा? भगीरथ के इस कठोर तप की कहानी झकझोर देगी!]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/ganga-dussehra/ganga-dussehra-katha-2026-126052200042_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/ganga-dussehra/ganga-dussehra-katha-2026-126052200042_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/22/thumb/1_1/1779445495-3497.jpg"/>
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      <description><![CDATA[ganga dussehra katha: गंगा के पृथ्वी पर अवतरण के पर्व को गंगा दशहरा के रूप में मनाया जाता है। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को हस्त नक्षत्र में सर्वश्रेष्ठ नदी 'गंगा' स्वर्ग से अवतरित हुई थीं। इस वर्ष 25 मई 2026 को गंगा दशहरा मनाया जा रहा है। अत: इस पावन दिन ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="The picture shows the amazing story of the arrival of the Mokshadayini Mother Ganga on earth and the photo of the worship  scene" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/22/full/1779445495-3497.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Ganga Dussehra Story 2026: </strong>मां गंगा सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि हम हिंदुस्तानियों के लिए देवलोक का साक्षात महाप्रसाद हैं। पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण तक, यह पावन नदी पूरे भारत को राष्ट्रीय एकता के एक पवित्र धागे में पिरोती है। हमारे देश में सदियों से मान्यता है कि जीवन की आखिरी सांसों के वक्त अगर मुंह में गंगाजल की कुछ बूंदें चली जाएं, तो मोक्ष का रास्ता खुल जाता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ganga-dussehra/ganga-dussehra-2026-puja-shubh-muhurat-date-and-significance-126050900011_1.html" target="_blank">गंगा दशहरा 2026 कब है? जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और स्नान का सही समय</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	साल 2026 में 25 मई को गंगा दशहरा का महापर्व मनाया जाएगा। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी के दिन हस्त नक्षत्र में मां गंगा का स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। यह दिन सिर्फ शरीर को साफ करने का नहीं, बल्कि मन की शुद्धि का है। इस पावन दिन गंगा के पानी में खड़े होकर अपनी पुरानी गलतियों की माफी मांगनी चाहिए और भविष्य में नेक राह पर चलने का संकल्प लेना चाहिए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	आइए इस पावन मौके पर जानते हैं कि आखिर मां गंगा स्वर्ग की ऊंचाइयों को छोड़कर इस मृत्युलोक (धरती) पर क्यों और कैसे आईं। मोक्षदायिनी मां गंगा के धरती पर आने की वो अद्भुत कहानी, जो हर संताप मिटा देती है</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	जब इंद्र की एक चाल ने बदल दिया इतिहास</h3>
<p>
	यह कहानी शुरू होती है प्राचीन काल के अयोध्या से, जहां राजा सगर राज करते थे। उन्होंने सातों समुद्रों को जीतकर अपने साम्राज्य का लोहा मनवाया था। राजा सगर की दो रानियां थीं- केशिनी और सुमति। केशिनी का एक पुत्र था असमंजस, जबकि रानी सुमति के पूरे 60 हजार पुत्र थे।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	एक बार राजा सगर ने अपनी शक्ति और प्रतिष्ठा को सिद्ध करने के लिए &#39;अश्वमेध यज्ञ&#39; का आयोजन किया। यज्ञ का घोड़ा छोड़ दिया गया। लेकिन देवताओं के राजा इंद्र घबरा गए कि कहीं सगर का यज्ञ सफल न हो जाए। इंद्र ने छल किया, यज्ञ का घोड़ा चुराया और उसे चुपके से महर्षि कपिल के आश्रम में ले जाकर बांध दिया, जो उस वक्त गहरी तपस्या में लीन थे।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ganga-dussehra/ganga-dussehra-2026-durlabh-yog-sanyog-snana-puja-shubh-muhurat-126051400049_1.html" target="_blank">गंगा दशहरा पर बन रहा है इस बार दुर्लभ योग संयोग, इस मुहूर्त में करें स्नान और पूजा</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	कपिल मुनि का क्रोध और 60 हजार राजकुमारों का अंत</h3>
<p>
	घोड़ा गायब होने पर राजा सगर के साठ हजार पुत्रों ने पूरी धरती छान मारी। ढूंढते-ढूंढते वे महर्षि कपिल के आश्रम पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि मुनि आंखें बंद किए बैठे हैं और पास ही उनका यज्ञ का घोड़ा घास चर रहा है। राजकुमारों ने महर्षि को ही चोर समझ लिया और &#39;चोर-चोर&#39; चिल्लाने लगे।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	राजकुमारों के इस शोर से महर्षि कपिल की गहरी समाधि टूट गई। जैसे ही क्रोध में भरकर मुनि ने अपनी आंखें खोलीं, उनके नेत्रों से निकली तपोअग्नि ने राजा सगर के सभी 60 हजार पुत्रों को पल भर में जलाकर राख (भस्म) कर दिया।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	मोक्ष की खोज: पीढ़ियों का संघर्ष</h3>
<p>
	जब काफी समय तक राजकुमार नहीं लौटे, तो राजा सगर के पौत्र अंशुमान उनकी तलाश में निकले। मुनि के आश्रम पहुंचकर जब उन्होंने राख का ढेर देखा, तो उन्हें पक्षीराज गरुड़ जी ने सारा सच बताया। गरुड़ जी ने एक रास्ता भी सुझाया- &#39;अगर इन साठ हजार पूर्वजों की आत्मा की शांति और मुक्ति चाहते हो, तो स्वर्ग से गंगा जी को धरती पर लाना होगा, क्योंकि उनके पवित्र जल के स्पर्श से ही इन्हें मोक्ष मिल सकता है।&#39;</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अंशुमान घोड़ा लेकर लौटे और यज्ञ पूरा हुआ। इसके बाद अंशुमान और उनके पुत्र दिलीप ने जिंदगी भर तपस्या की, लेकिन वे गंगा जी को धरती पर लाने में सफल नहीं हो पाए।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	भगीरथ का वो हठ, जिससे पिघल गए ब्रह्मा और शिव</h3>
<p>
	राजा सगर के वंश में कई राजा आए, सभी ने अपने पूर्वजों की भस्म के उस पहाड़ को गंगाजल से पवित्र करने की कोशिश की, पर नाकाम रहे। आखिरकार, महाराज दिलीप के पुत्र भागीरथ ने ठान लिया कि वे अपने पूर्वजों को तर्पण देकर ही रहेंगे। उन्होंने गोकर्ण तीर्थ में जाकर ऐसी कठोर और असाधारण तपस्या की कि कई वर्ष बीत जाने पर ब्रह्मा जी प्रसन्न हो गए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	ब्रह्मा जी ने जब वरदान मांगने को कहा, तो भगीरथ ने बिना कुछ सोचे &#39;मां गंगा&#39; को धरती पर भेजने की मांग कर दी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	ब्रह्मा जी मुस्कुराए और बोले, &#39;राजन! मैं गंगा को भेज तो दूं, लेकिन जब वे स्वर्ग से नीचे गिरेंगी, तो उनके प्रचंड वेग और गति को संभालने की शक्ति इस पृथ्वी में नहीं है। ब्रह्मांड में केवल भगवान शिव ही हैं जो गंगा के इस वेग को रोक सकते हैं। इसलिए तुम्हें महादेव को मनाना होगा।&#39;</p>
<p>
	 </p>
<p>
	भगीरथ ने हार नहीं मानी। उन्होंने शिव जी की आराधना की। भोलेनाथ प्रसन्न हुए और उन्होंने स्वर्ग से उतरती हुई गंगा के घमंड और वेग को चूर करने के लिए उन्हें अपनी विशाल जटाओं में समेट लिया। इसके बाद शिव की जटाओं से शांत होकर मां गंगा धरती पर प्रवाहित हुईं। राजा भगीरथ के इसी अथक प्रयास (भगीरथ प्रयास) के कारण गंगा जी का एक पवित्र नाम &#39;भागीरथी&#39; भी पड़ा।<br />
	<br />
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ganga-dussehra/ganga-dussehra-par-durlabh-yog-sanyog-5-upay-126051900044_1.html" target="_blank">गंगा दशहरा पर बन रहे हैं दुर्लभ योग संयोग, इस दिन करें ये 5 उपाय</a></strong></p>
	<p>
		 </p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 25 May 2026 09:13:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 25 May 2026 09:31:05 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Ganga Dussehra]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Navtapa 2026 dates: कब से कब तक रहेगा नौतपा?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/nautapa-start-date-and-end-date-2026-126052200004_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/nautapa-start-date-and-end-date-2026-126052200004_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/22/thumb/1_1/1779424032-0311.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/22/thumb/1_1/1779424032-0311.jpg</image>
      <description><![CDATA[Nautapa kab se shuru hai 2026: नौतपा का सरल शब्दों में अर्थ है- '9 दिनों तक तपना'। यह उत्तर भारत और मध्य भारत में सनातन संस्कृति, ज्योतिष और मौसम विज्ञान (पारंपरिक तौर पर) के अनुसार साल के वे 9 दिन होते हैं, जब भीषण और सबसे प्रचंड गर्मी पड़ती है।]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p>
		<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
			<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
				<img align="center" alt="The picture shows the intense heat of the day and information related to Nautapa" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/22/full/1779424032-0311.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
		</p>
	</p>
	<p>
		<strong>What is Nautapa in India: </strong>साल 2026 में नौतपा 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र और पंचांग के अनुसार, जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब से नौतपा की शुरुआत होती है। इस दौरान अगले 9 दिनों तक सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर पड़ती हैं, जिससे भीषण गर्मी और लू यानी Heat Wave का प्रकोप रहता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/what-is-nautapa-learn-about-its-causes-and-symptoms-126050800004_1.html" target="_blank">Nautapa 2026: नौतपा क्या है? जानें इसके कारण और लक्षण</a></strong></p>
	<p>
		 </p>
	<ul>
		<li>
			नौतपा क्या होता है?</li>
		<li>
			नौतपा से जुड़ी कुछ खास बातें</li>
		<li>
			कब होता है नौतपा?</li>
		<li>
			नौतपा का गलना</li>
		<li>
			नौतपा में क्या करें?</li>
	</ul>
	<h3>
		 </h3>
	<h3>
		नौतपा क्या होता है?</h3>
	<p>
		भारतीय ज्योतिष शास्त्र, पंचांग और लोक मान्यताओं के अनुसार, ज्येष्ठ मास में आने वाले नौ दिनों के उस विशेष कालखंड को &#39;नौतपा&#39; या &#39;नवतपा&#39; कहा जाता है, जिसमें पृथ्वी पर सबसे भीषण और प्रचंड गर्मी पड़ती है। &#39;नौतपा&#39; शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है- &#39;नौ&#39; यानी नौ दिन और &#39;तपा&#39; यानी तपना। </p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		नौतपा से जुड़ी कुछ खास बातें</h3>
	<p>
		तारीख: 25 मई 2026 से 2 जून 2026 तक।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		इस संबंध में माना जाता है कि यदि नौतपा के इन 9 दिनों में अच्छी और प्रचंड गर्मी पड़ती है, तो उस साल मानसून बहुत अच्छा रहता है और भरपूर बारिश होती है।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		कब होता है नौतपा?</h3>
	<p>
		नौतपा आमतौर पर हर साल मई के आखिरी हफ्ते में शुरू होता है और जून के शुरुआती दिनों तक चलता है। जैसे इस साल 2026 में यह 25 मई से 2 जून तक जारी रहेगा।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		नौतपा का गलना</h3>
	<p>
		इस संबंध में एक दिलचस्प बात यह भी हैं कि यदि इन 9 दिनों के बीच में बारिश या आंधी आ जाए और मौसम ठंडा हो जाए, तो इसे &#39;नौतपा का गलना&#39; कहा जाता है। पुराने बुजुर्गों के अनुसार, नौतपा गलने से मानसून थोड़ा कमजोर पड़ जाता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		नौतपा में क्या करें?</h3>
	<p>
		इस दौरान भीषण गर्मी से बचने के लिए पर्याप्त पानी पीते रहें, राहगीरों के लिए प्याऊ लगवाएं और पशु-पक्षियों के लिए छत या आंगन में पानी की व्यवस्था जरूर करें। साथ ही विशेष रूप से जल, मिट्टी के घड़े, सत्तू, और मौसमी फलों का दान करते हैं।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/rohini-lagna-aur-nautapa-mein-kya-hai-antar-kya-hai-iska-vigyan-126051600009_1.html" target="_blank">रोहिणी लगना और नौतपा लगने में क्या है अंतर, क्या है इसका विज्ञान</a></strong></p>
</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 25 May 2026 09:04:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 25 May 2026 09:13:35 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[astrology articles]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Padmini Ekadashi 2026: अधिकमास की पद्मिनी एकादशी की 5 खास बातें, जानिए व्रत रखने के 5 नियम]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/5-special-things-about-padmini-ekadashi-of-adhik-maas-know-the-5-rules-of-fasting-126052300014_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/5-special-things-about-padmini-ekadashi-of-adhik-maas-know-the-5-rules-of-fasting-126052300014_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/23/thumb/1_1/1779518337-6093.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/23/thumb/1_1/1779518337-6093.jpg</image>
      <description><![CDATA[Padmini Ekadashi 2026 Rules: अधिकमास की पद्मिनी एकादशी को बहुत ही पुण्यकारी माना जाता है। इस दिन किए गए व्रत और पूजा का फल कई गुना माना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है। भक्तजन विष्णु जी को अर्घ्य, दीप, पुष्प और फल चढ़ाते हैं। ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="The image depicts a shore adorned with lotus flowers, Lord Vishnu seated on the bed of Sheshnag, and the universe, with the caption Padmini Ekadashi" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/23/full/1779518337-6093.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Purushottam Maas Padmini Ekadashi Vrat: </strong>ज्येष्ठ अधिकमास या पुरुषोत्तम मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को &#39;पद्मिनी एकादशी&#39; कहा जाता है। चूंकि अधिकमास हर तीन साल में एक बार आता है, इसलिए इस एकादशी का महत्व बाकी सभी एकादशियों से कहीं अधिक माना गया है। यह एकादशी ज्येष्ठ मास या पुरुषोत्तम मास में आती है, जो धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ होता है। यह समय धार्मिक अनुष्ठानों का माना गया है, अत: इस दिन की गई पूजा और दान का फल सभी प्रकार के पापों से मुक्ति दिलाता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/other-festivals/adhik-maas-purnima-2026-date-and-importance-126052300008_1.html" target="_blank">Adhik Maas Purnima 2026: अधिकमास की पूर्णिमा कब है, क्या है इसका महत्व?</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	वर्ष 2026 में यह बेहद शुभ व्रत 27 मई, बुधवार को रखा जाएगा।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	आइए जानते हैं पद्मिनी एकादशी की 5 खास बातें और इस व्रत को रखने के 5 कड़े नियम:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	पद्मिनी एकादशी की 5 खास बातें</h3>
<p>
	1. तीन साल में एक बार आने वाला दुर्लभ महाव्रत: यह एकादशी हर साल नहीं आती। यह केवल अधिकमास (मलमास) में ही आती है, जो तीन साल के अंतराल पर पड़ता है। इस वजह से इस व्रत को करने का अवसर बेहद भाग्य से मिलता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>2. स्वयं श्रीहरि ने बताया इसका महत्व</strong>: पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इस व्रत की महिमा बताते हुए कहा था कि जो पुण्य सभी यज्ञों, तपस्याओं और तीर्थ यात्राओं से नहीं मिलता, वह अकेले पद्मिनी एकादशी का व्रत रखने से मिल जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>3. मनोकामना पूर्ति और राजयोग की प्राप्ति: </strong>इस व्रत को करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। प्राचीन काल में कार्तवीर्य अर्जुन (सहस्रार्जुन) के माता-पिता ने संतान प्राप्ति के लिए यह व्रत किया था, जिसके प्रभाव से उन्हें अत्यंत शक्तिशाली पुत्र की प्राप्ति हुई थी।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/other-festivals/adhik-maas-2026-dos-and-donts-126051500046_1.html" target="_blank">Adhika Maas 2026: 17 मई से पुरुषोत्तम मास, ज्येष्ठ अधिकमास में पुण्य लाभ कैसे पाएं और क्या टालें?</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>4. बैकुंठ लोक की प्राप्ति: </strong>धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पद्मिनी एकादशी का व्रत करने वाले साधक के जीवन के सभी पाप धुल जाते हैं और मृत्यु के बाद उसे सीधे विष्णु लोक (बैकुंठ) में स्थान मिलता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>5. महालक्ष्मी की विशेष कृपा: </strong>अधिकमास के स्वामी भगवान विष्णु हैं। इस दिन विष्णु जी के साथ माता लक्ष्मी का विशेष पूजन करने से घर की दरिद्रता हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है और आर्थिक संकट दूर होते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	पद्मिनी एकादशी व्रत के 5 जरूरी नियम</h3>
<p>
	पद्मिनी एकादशी का व्रत अन्य एकादशियों की तुलना में थोड़ा कठिन होता है और इसके नियमों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>1. दशमी तिथि से ही संयम (शुरुआत): </strong>व्रत के नियम दशमी तिथि यानी एकादशी के एक दिन पहले की रात से ही शुरू हो जाते हैं। दशमी की रात को कांसे के बर्तन में भोजन नहीं करना चाहिए और मांस, मदिरा, मसूर की दाल, प्याज-लहसुन जैसे तामसिक भोजन से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>2. निर्जला या फलाहार का नियम: </strong>यह व्रत अत्यंत पवित्र है। सामर्थ्य के अनुसार इसे निर्जला अर्थात् बिना पानी के या फलाहार यानी केवल फल और पानी रखकर किया जाता है। व्रत के दिन अन्न जैसे- चावल, गेहूं आदि का सेवन पूरी तरह वर्जित है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>3. रात्रि जागरण और कीर्तन:</strong> पद्मिनी एकादशी की रात को सोना नहीं चाहिए। इस रात भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर रात्रि जागरण करना चाहिए और विष्णु सहस्रनाम का पाठ या भजन-कीर्तन करना चाहिए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>4. अखंड शांत और सात्विक व्यवहार: </strong>व्रत के दिन किसी की निंदा या चुगली न करें, झूठ न बोलें और क्रोध करने से बचें। ब्रह्मचर्य का पूर्ण पालन करें और मन को पूरी तरह भगवान के चरणों में लगाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>5. द्वादशी को पारण का सही तरीका: </strong>व्रत का पारण यानी व्रत खोलने का कार्य अगले दिन द्वादशी तिथि को शुभ मुहूर्त में ही करें। पारण करने से पहले ब्राह्मणों या किसी जरूरतमंद को भोजन कराएं, दान-दक्षिणा दें और उसके बाद ही स्वयं तुलसी दल और जल ग्रहण करके व्रत खोलें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>विशेष मंत्र: </strong>इस दिन &#39;ॐ नमो भगवते वासुदेवाय&#39; मंत्र का मानसिक जाप करते रहने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	अधिकमास 2026 और पद्मिनी एकादशी– FAQs</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>1. अधिकमास 2026 कब है?</strong></p>
<p>
	उत्तर: 2026 में अधिकमास ज्येष्ठ माह में आता है। इसकी तिथियाँ पंचांग के अनुसार अलग-अलग राज्यों में थोड़ी भिन्न हो सकती हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>2. पद्मिनी एकादशी 2026 की तिथि क्या है?</strong></p>
<p>
	उत्तर: यह एकादशी अधिकमास के दौरान आती है। सही तिथि पंचांग देखकर ही निश्चित होती है। इस बार यह 27 मई, बुधवार को मनाई जा रही है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>3. इस दिन कौन-कौन से व्रत किए जाते हैं?</strong></p>
<p>
	उत्तर: मुख्य रूप से पद्मिनी एकादशी व्रत, निर्जल व्रत, फलाहारी व्रत और भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/adhikmaas-padmini-ekadashi-2026-vrat-mahatva-katha-126052000018_1.html" target="_blank">3 साल बाद आई अधिकमास की पद्मिनी एकादशी, जानें व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त और पौराणिक कथा</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Sat, 23 May 2026 12:40:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 23 May 2026 12:17:39 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[ekadashi vrat katha]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Adhik Maas Purnima 2026: अधिकमास की पूर्णिमा कब है, क्या है इसका महत्व?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/adhik-maas-purnima-2026-date-and-importance-126052300008_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/adhik-maas-purnima-2026-date-and-importance-126052300008_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/23/thumb/1_1/1779513895-9007.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/23/thumb/1_1/1779513895-9007.jpg</image>
      <description><![CDATA[Purushottam Maas Purnima Date: ज्योतिष और हिन्दू पंचांग में अधिकमास को बहुत ही विशेष महत्व दिया गया है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह महीना लगभग हर तीन साल में एक बार आता है और इसे खास तौर पर धार्मिक क्रियाओं और पुण्य कर्मों के लिए अत्यंत ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p>
		<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
			<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
				<img align="center" alt="The image shows a pilgrimage site, the full moon, devotees performing aarti on the river bank, a water-filled pot placed near Shrihari Narayan, offerings, burning lamps, flowers, garlands and puja materials, with the caption Adhik Maas Purnima 2026" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/23/full/1779513895-9007.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
		</p>
	</p>
	<p>
		<strong>Purushottam Maas significance: </strong>वर्ष 2026 में ज्येष्ठ अधिकमास (मलमास) लगने के कारण इस महीने की पूर्णिमा का महत्व कहीं अधिक बढ़ गया है। अधिकमास की पूर्णिमा को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में अधिकमास की पूर्णिमा तिथि 31 मई 2026, रविवार को पड़ रही है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/purushottam-maas-me-shrihari-vishnu-ki-puja-kaise-karen-126052100057_1.html" target="_blank">Purushottam Maas: अधिकमास में ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा, मिलेगा अक्षय पुण्य</a></strong></p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		पूर्णिमा का दिन, यानी पूर्णिमा तिथि, इस महीने में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। क्योंकि अधिकमास की पूर्णिमा में किए गए कर्म और पूजा का फल कई गुना माना जाता है। भक्तजन इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और अन्य देवताओं की आराधना करते हैं। विशेष रूप से, ज्येष्ठ माह का यह समय धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान की गई पूजा और दान का महत्व बहुत अधिक होता है। इसलिए, यदि आप आध्यात्मिक लाभ और धार्मिक पुण्य की दृष्टि से अपने जीवन को समृद्ध बनाना चाहते हैं, तो अधिकमास की पूर्णिमा और पुरुषोत्तम मास को अवश्य याद रखें।</p>
	<p>
		<br />
		<ul>
			<li>
				अधिकमास की पूर्णिमा कब है? जानें तारीख और मुहूर्त</li>
			<li>
				अधिकमास पूर्णिमा का धार्मिक महत्व</li>
			<li>
				अधिकमास की पूर्णिमा – FAQs</li>
		</ul>
	</p>
	<h3>
		आइए जानते हैं इसकी सही तारीख, मुहूर्त और धार्मिक महत्व:</h3>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<h3>
			अधिकमास की पूर्णिमा कब है? जानें तारीख और मुहूर्त</h3>
		<p>
			 </p>
		<p>
			अधिक पूर्णिमा व्रत-उपवास का दिन, शनिवार, 30 मई, 2026 को</p>
		<p>
			ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा उपवास के दिन चन्द्रोदय का समय - 06:40 पी एम पर।</p>
		<p>
			 </p>
		<h3>
			अधिक पूर्णिमा रविवार, 31 मई, 2026 को</h3>
		<p>
			ज्येष्ठ अधिकमास पूर्णिमा तिथि का प्रारम्भ- 30 मई, 2026 को 11:57 ए एम बजे</p>
		<p>
			पूर्णिमा तिथि समाप्त- 31 मई, 2026 को 02:14 पी एम बजे</p>
		<p>
			उदयातिथि के अनुसार व्रत, स्नान और दान 31 मई को ही किया जाएगा।</p>
		<p>
			ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा के दिन चन्द्रोदय- 07:36 पी एम<br />
			 </p>
	</p>
	<h3>
		अधिकमास पूर्णिमा का धार्मिक महत्व</h3>
	<p>
		हिंदू धर्म में सामान्य पूर्णिमा का भी विशेष महत्व होता है, लेकिन जब पूर्णिमा अधिकमास या पुरुषोत्तम मास में आती है, तो इसका फल कई हजार गुना बढ़ जाता है:</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>भगवान विष्णु की असीम कृपा: </strong>अधिकमास के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु हैं। इसलिए इस पूर्णिमा पर श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>&#39;मल&#39; से &#39;पावन&#39; होने का दिन: </strong>मलमास को अशुद्ध मास माना जाता है, लेकिन पूर्णिमा की तिथि इस पूरे महीने के दोषों को दूर कर देती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से मनुष्य के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>अक्षय पुण्य और लक्ष्मी योग: </strong>इस दिन माता लक्ष्मी की साधना करने से &#39;अचल लक्ष्मी&#39; यानी स्थिर धन की प्राप्ति होती है। रविवार का संयोग होने के कारण इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से मान-सम्मान और आरोग्य की प्राप्ति भी होगी।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>पुण्य की वृद्धि: </strong>इस दिन किए गए धार्मिक कार्य (दान, पूजा, जप, उपवास) का फल सामान्य पूर्णिमा की तुलना में कई गुना माना जाता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>दान-पुण्य का महत्व:</strong> विशेष रूप से गरीबों और ब्राह्मणों को दान देने का शुभ समय माना जाता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>कृषि और ऋतु से जुड़ा:</strong> इस मास को अक्सर वर्षा और खेती के अनुकूल समय से जोड़ा जाता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>पूजा और उपवास:</strong> इस दिन किसी विशेष देवता की पूजा या विशेष रूप से विष्णु और लक्ष्मी करने से मोक्ष और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		अधिकमास व्रत: कुछ लोग इस पूर्णिमा पर व्रत और कथा सुनते हैं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/when-will-adhikmas-end-126052100023_1.html" target="_blank">पुरुषोत्तम मास 2026: कब समाप्त होगा अधिकमास?</a></strong></p>
</p>
<br />
<h3>
	अधिकमास की पूर्णिमा – FAQs</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>1. अधिकमास की पूर्णिमा कब आती है?</strong></p>
<p>
	उत्तर: अधिकमास की पूर्णिमा हर तीन साल में एक बार आती है, जब चंद्र कैलेंडर के अनुसार साल में अतिरिक्त महीना जोड़ना पड़ता है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>2. पुरुषोत्तम मास और अधिकमास में क्या अंतर है?</strong></p>
<p>
	उत्तर: पुरुषोत्तम मास और अधिकमास दोनों ही वही महीना हैं, लेकिन धार्मिक दृष्टि से इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। इसे विशेष रूप से भगवान विष्णु की पूजा और दान के लिए शुभ माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>3. अधिकमास की पूर्णिमा का महत्व क्या है?</strong></p>
<p>
	उत्तर: अधिकमास की पूर्णिमा का महत्व बहुत अधिक है। इस दिन किए गए व्रत, पूजा, और दान का फल कई गुना माना जाता है। इसे आध्यात्मिक शुद्धि और पुण्य कमाने का उत्तम अवसर कहा गया है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>4. ज्येष्ठ मास और अधिकमास की पूर्णिमा में क्या विशेष है?</strong></p>
<p>
	उत्तर: ज्येष्ठ मास की यह पूर्णिमा धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण होती है। ज्येष्ठ मास में सूर्य का प्रभाव अधिक होता है, इसलिए इस दिन किए गए दान और पूजा का फल अत्यधिक माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Sat, 23 May 2026 11:07:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 23 May 2026 11:24:00 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Other Festivals]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Purushottam Maas: अधिकमास में ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा, मिलेगा अक्षय पुण्य]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/purushottam-maas-me-shrihari-vishnu-ki-puja-kaise-karen-126052100057_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/purushottam-maas-me-shrihari-vishnu-ki-puja-kaise-karen-126052100057_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/21/thumb/1_1/1779364856-1166.jpg"/>
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      <description><![CDATA[पुरुषोत्तम मास चल रहा है जिसे अधिकमास भी कहते हैं। इस माह में श्रीहरि विष्णुजी के पुरुषोत्तम स्वरूप की पूजा विधिवत, खासकर षोडशोपचार पूजन करना बहुत ही पुण्यदायक माना जाता है। चलिए जानते हैं कि षोडशोपचार पूजा कैसे करते हैं और क्या है इस पूजा की ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="how to do pooja of lord vishnu" class="imgCont" height="655" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/21/full/1779364856-1166.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="how to do pooja of lord vishnu" width="1200" /></p>
	</p>
	पुरुषोत्तम मास चल रहा है जिसे अधिकमास भी कहते हैं। इस माह में श्रीहरि विष्णुजी के पुरुषोत्तम स्वरूप की पूजा विधिवत, खासकर षोडशोपचार पूजन करना बहुत ही पुण्यदायक माना जाता है। चलिए जानते हैं कि षोडशोपचार पूजा कैसे करते हैं और क्या है इस पूजा की सामग्री। </p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/aarti-chalisa/purushottam-maas-ki-aarti-126052100017_1.html" target="_blank">अधिकमास: पुरुषोत्तम मास की आरती</a></strong></p>
</p>
<h3>
	1.पूजा के मुख्‍यत: 5 प्रकार है- </h3>
<ul>
	<li>
		अभिगमन, उपादान, योग, स्वाध्याय और इज्या। </li>
	<li>
		इसमें उपादान पूजा के 3 प्रकार होते है।</li>
	<li>
		पंचोपचार, दशोपचार और सोलह उपचार।</li>
	<li>
		सलोहर उपचार को ही षोडशोपचार कहते हैं।</li>
</ul>
<p>
	<strong>1. पांच उपचार : </strong>गंध, पुष्प, धूप, दीप और नेवैद्य। </p>
<p>
	<strong>2. दस उपचार : </strong>पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र निवेदन, गंध, पुष्प, धूप, दीप और नेवैद्य।</p>
<p>
	<strong>3. सोलह उपचार :</strong> पाद्य, अर्घ्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, आभूषण, गंध, पुष्प, धूप, दीप, नेवैद्य, आचमन, ताम्बुल, स्तवपाठ, तर्पण और नमस्कार। पूजन के अंत में सांगता सिद्धि के लिए दक्षिणा भी चढ़ाना चाहिए। षोडशोपचार यानी विधिवत 16 क्रियाओं से पूजा संपन्न करना। </p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/adhikmaas-guru-pradosh-vrat-2026-mahatva-puja-vidhi-katha-126052000039_1.html" target="_blank">3 वर्ष बाद आया अधिकमास का गुरु प्रदोष, जानिए महत्व और कथा</a></strong></p>
</p>
<h3>
	2.षोडशोपचार पूजन क्या है:</h3>
<p>
	सोलह प्रकार की चीजों को मिलाकर तरीकों से पूजाकर करना षोडशोपचार पूजन है। इसमें- 1.ध्यान-प्रार्थना, 2.आसन, 3.पाद्य, 4.अर्ध्य, 5.आचमन, 6.स्नान, 7.वस्त्र, 8.यज्ञोपवीत, 9.गंधाक्षत, 10.पुष्प, 11.धूप, 12.दीप, 13.नैवेद्य, 14.ताम्बूल, दक्षिणा, जल आरती, 15.मंत्र पुष्पांजलि, 16.प्रदक्षिणा-नमस्कार एवं स्तुति।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. विष्णु पूजा की मुख्य सामग्री:</h3>
<p>
	<strong>मुख्य देव और वेदी के लिए:-</strong></p>
<p>
	<strong>भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर:</strong> (यदि मां लक्ष्मी के साथ संयुक्त तस्वीर हो तो अति उत्तम)।</p>
<p>
	<strong>चौकी या पटरा:</strong> जिस पर भगवान को विराजमान किया जा सके।</p>
<p>
	पीला कपड़ा: चौकी पर बिछाने के लिए (विष्णु जी को पीला रंग अत्यंत प्रिय है)।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अभिषेक और स्नान सामग्री:-</strong></p>
<p>
	<strong>तांबे या पीतल का पात्र: </strong>(मूर्ति स्नान के लिए)।</p>
<p>
	गंगाजल और शुद्ध जल</p>
<p>
	<strong>पंचामृत:</strong> (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण)।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/adhikmaas-2026-mein-33-devtaon-ki-pooja-se-milta-hai-shubh-phal-126051600030_1.html" target="_blank">अधिकमास 2026: इन 33 देवताओं की पूजा से मिलता है शुभ फल, पूरे साल बनी रहती है सुख-समृद्धि</a></strong></p>
</p>
<p>
	<strong>पूजन और श्रृंगार सामग्री:-</strong></p>
<ul>
	<li>
		पीला चंदन या गोपी चंदन</li>
	<li>
		अक्षत: (ध्यान रहे, विष्णु जी की पूजा में अक्षत यानी चावल साबुत होने चाहिए, टूटे हुए नहीं। कई लोग विष्णु पूजा में अक्षत की जगह तिल का प्रयोग करते हैं, जो ज्यादा शुभ माना जाता है)।</li>
	<li>
		रोली या कुमकुम</li>
	<li>
		हल्दी या अष्टगंध</li>
	<li>
		जनेऊ: (भगवान को अर्पित करने के लिए सूती सूत)।</li>
	<li>
		मौली (कलावा): रक्षासूत्र के रूप में।</li>
	<li>
		पीले फूल और माला: (गेंदे या पीले गुलाब के फूल)।</li>
</ul>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>धूप, दीप और सुगंध:-</strong></p>
<ol>
	<li>
		गाय का शुद्ध घी</li>
	<li>
		दीपक: (मिट्टी, पीतल या तांबे का)।</li>
	<li>
		रुई की बत्ती</li>
	<li>
		धूपबत्ती और अगरबत्ती</li>
	<li>
		कपूर: (आरती के लिए)।</li>
	<li>
		माचिस</li>
</ol>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>नैवेद्य (भोग) और प्रसाद:-</strong></p>
<p>
	<strong>तुलसी पत्र (तुलसी के पत्ते): </strong>(इसके बिना पूजा अधूरी है। ध्यान रखें, एकादशी, रविवार या सूर्यास्त के बाद तुलसी न तोड़ें, इसे पहले से तोड़कर रख लें)।</p>
<p>
	<strong>पीली मिठाइयां:</strong> (बेसन के लड्डू, पेड़े, या केसरिया हलवा/खीर)।</p>
<p>
	<strong>ऋतु फल:</strong> (विशेषकर केला, क्योंकि केले के वृक्ष में विष्णु जी का वास माना जाता है)।</p>
<p>
	<strong>पंचमेवा: </strong>(काजू, बादाम, किशमिश, मखाना, छुआरा)।</p>
<p>
	<strong>नारियल: </strong>(पानी वाला जटा युक्त नारियल)।</p>
<p>
	<strong>पान</strong> के पत्ते और सुपारी</p>
<p>
	<strong>लौंग</strong> और छोटी इलायची</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. षोडशोपचार पूजा संक्षिप्त विधि: </h3>
<ul>
	<li>
		ध्यान, आवाह्‍न, आचमन, पाद्य, नैवेद्य, पुष्पांजलि आदि सभी के मंत्र याद होना चाहिए या इसकी एक पुस्तक ले आएं फिर पूजा प्रारंभ करें।</li>
	<li>
		प्रात:काल स्नान-ध्यान से निवृत हो माता का स्मरण करते हुए व्रत एवं पूजा का संपल्प लें।</li>
	<li>
		घर पर पूजा कर रहे हैं तो एक पाट पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर घट एवं कलश की स्थापना करें।</li>
	<li>
		इसके बाद एक बड़ी सी थाली में शालिग्राम या विष्णुमूर्ति को स्थापित करके उस थाल को पाट पर स्थापित करें।</li>
	<li>
		अब धूप दीप को प्रज्वलित करें। इसके बाद कलश की पूजा करें।</li>
	<li>
		कलश पूजा के बाद शालिग्राम या विष्णुमूर्ति को जल से स्नान कराएं। </li>
	<li>
		फिर पंचामृत से स्नान कराएं। पंचामृत के बाद पुन: जलाभिषेक करें।</li>
	<li>
		फिर शालिग्राम या विष्णुमूर्ति के मस्तक पर चंदन या हल्दी कंकू लगाएं और फिर उन्हें हार और फूल चढ़ाकर माला पहनाएं।</li>
	<li>
		पूजन में अनामिका अंगुली (छोटी उंगली के पास वाली यानी रिंग फिंगर) से इत्र, गंध, चंदन आदि लगाना चाहिए।</li>
	<li>
		इसके बाद 16 प्रकार की संपूर्ण सामग्री एक एक करके अर्पित करें। सभी को अर्पित करते हुए मंत्र बोलते जाएं।</li>
	<li>
		पूजा करने के बाद प्रसाद या नैवेद्य (भोग) चढ़ाएं और प्रसाद अर्पित करें।</li>
	<li>
		ध्यान रखें कि नमक, मिर्च और तेल का प्रयोग नैवेद्य में नहीं किया जाता है।</li>
	<li>
		नैवेद्य अर्पित करने के बाद अंत में शिवजी की आरती करें।</li>
	<li>
		आरती के बाद सभी को प्रसाद वितरित करें।</li>
</ul>
<p>
	 </p>
<h3>
	5.पूजा के नियम:-</h3>
<ul>
	<li>
		माता के पूजन में शुद्धता व सात्विकता का विशेष महत्व है।</li>
	<li>
		पूजा के समय हमारा मुंह ईशान, पूर्व या उत्तर में होना चाहिए। </li>
	<li>
		घर के ईशान कोण में ही पूजा करें। </li>
	<li>
		पूजा का उचित मुहूर्त देखें या दोपहर 12 से शाम 4, रात्रि 12 से प्रात: 3 बजे के बीच का समय छोड़कर पूजा करें। </li>
	<li>
		पूजन के समय पंचदेव की स्थापना जरूर करें। सूर्यदेव, श्रीगणेश, दुर्गा, शिव और विष्णु को पंचदेव कहा गया है।</li>
	<li>
		पूजा के समय सभी एकत्रित होकर पूजा करें। पूजा के दौरान किसी भी प्रकार शोर न करें।</li>
</ul>
<p>
	भगवान विष्णु की पूजा में कभी भी भैरव जी की पूजा की चीजें (जैसे राई या बहुत तीखी चीजें) और तुलसी की सूखी पत्तियां अर्पित न करें (केवल ताजी या सूखी पत्तियां जो पहले से चढ़ी न हों, साफ करके चढ़ाई जा सकती हैं)। इसके अलावा, विष्णु जी को कभी भी अगस्त्य के फूल नहीं चढ़ाए जाते।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 21 May 2026 17:25:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 21 May 2026 17:32:33 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Hindu Religion]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[पुरुषोत्तम मास 2026: कब समाप्त होगा अधिकमास?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/when-will-adhikmas-end-126052100023_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/when-will-adhikmas-end-126052100023_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/21/thumb/1_1/1779349373-5867.jpg"/>
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      <description><![CDATA[साल 2026 में ज्येष्ठ अधिकमास (जिसे पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहा जाता है) का बेहद शुभ योग बन रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, जब एक ही चंद्र मास दो बार आता है, तो पहले वाले को 'अधिकमास' और दूसरे को 'शुद्ध' या 'निज' मास कहा जाता है। यह महीना भौतिक ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Lord vishnu: When will Adhikmas end" class="imgCont" height="800" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/21/full/1779349373-5867.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="purushottam maas kab khatma hoga" width="1200" /></p>
	</p>
	साल 2026 में ज्येष्ठ अधिकमास (जिसे पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहा जाता है) का बेहद शुभ योग बन रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, जब एक ही चंद्र मास दो बार आता है, तो पहले वाले को &#39;अधिकमास&#39; और दूसरे को &#39;शुद्ध&#39; या &#39;निज&#39; मास कहा जाता है। यह महीना भौतिक सुखों के विस्तार के लिए नहीं, बल्कि मानसिक शांति और ईश्वर की भक्ति के लिए समर्पित है। आइए जानते हैं इसकी तिथियां और जरूरी नियम।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/adhikmaas-guru-pradosh-vrat-2026-mahatva-puja-vidhi-katha-126052000039_1.html" target="_blank">3 वर्ष बाद आया अधिकमास का गुरु प्रदोष, जानिए महत्व और कथा</a></strong></p>
</p>
<h3>
	ज्येष्ठ अधिकमास</h3>
<p>
	17 मई 2026 (रविवार) से प्रारंभ।</p>
<p>
	15 जून 2026 (सोमवार) को समाप्त।</p>
<h3>
	निज ज्येष्ठ मास (शुद्ध)</h3>
<p>
	16 जून 2026 (मंगलवार) से प्रारंभ।</p>
<p>
	13 जुलाई 2026 (सोमवार) को समाप्त।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/purushottam-mas-2026-important-vrat-tithiyan-126051800042_1.html" target="_blank">पुरुषोत्तम मास 2026: इन खास तिथियों पर रखें व्रत, करें इन देवी-देवताओं की पूजा; मिलेगा अक्षय पुण्य और सुख-समृद्धि</a></strong></p>
</p>
<h3>
	इस माह में क्या करें? (Dos)</h3>
<p>
	चूंकि यह महीना भगवान विष्णु (श्री पुरुषोत्तम) को समर्पित है, इसलिए इस दौरान किए गए आध्यात्मिक कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है:</p>
<p>
	<strong>भगवान विष्णु की उपासना: </strong>नियमित रूप से ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। विष्णु सहस्रनाम या पुरुष सूक्त का पाठ करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है।</p>
<p>
	<strong>महादान का महत्व: </strong>इस महीने में अनाज, जल, वस्त्र और दीपदान का विशेष महत्व है।</p>
<p>
	<strong>प्राचीन परंपरा: </strong>इस माह में कांसे के पात्र (बर्तन) में मालपुए रखकर दान करने की विशेष परंपरा है।</p>
<p>
	<strong>धार्मिक ग्रंथों का श्रवण: </strong>श्रीमद्भागवत कथा या भगवद्गीता का पाठ करें अथवा इसे सुनें।</p>
<p>
	<strong>पवित्र स्नान: </strong>संभव हो तो पवित्र नदियों में स्नान करें, अन्यथा घर पर ही नहाने के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।</p>
<p>
	<strong>व्रत और साधना: </strong>आत्मिक शुद्धि के लिए इस दौरान मौन व्रत रखने या पूरी तरह सात्विक जीवन जीने का संकल्प लें।<br />
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/adhikmas-2026-mahatva-puja-vidhi-mantra-aur-6-khas-batein-126051200019_1.html" target="_blank">अधिकमास 2026: क्यों माना जाता है सबसे पवित्र महीना? जानें पूजा विधि, मंत्र और 6 खास बातें</a></strong></p>
</p>
<h3>
	क्या न करें? (Don&#39;ts)</h3>
<p>
	अधिकमास को &#39;मलमास&#39; भी कहा जाता है, इसलिए इस काल में सांसारिक मांगलिक (शुभ) कार्य पूरी तरह वर्जित माने गए हैं:</p>
<p>
	<strong>मांगलिक कार्य: </strong>विवाह, सगाई (तय करना), मुंडन, जनेऊ संस्कार और गृह प्रवेश जैसे शुभ कार्य भूलकर भी न करें।</p>
<p>
	<strong>नया बिजनेस या करियर:</strong> नया व्यापार शुरू करना या नई नौकरी ज्वाइन करने जैसे कदम इस समय टाल देने चाहिए।</p>
<p>
	<strong>बड़ी खरीदारी: </strong>नया घर बनाना शुरू करना, या नया प्लॉट/गाड़ी खरीदने से बचना चाहिए।</p>
<p>
	तामसिक भोजन का त्याग: भोजन में लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा (शराब) का सेवन पूरी तरह वर्जित है।</p>
<p>
	<strong>आचरण पर नियंत्रण: </strong>किसी का अपमान न करें, झूठ न बोलें और वाद-विवाद से बचें; क्योंकि इस दौरान किए गए बुरे कर्मों का नकारात्मक फल भी गहरा होता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	विशेष :</h3>
<p>
	यदि आप मीन राशि या उन 3 राशियों में से हैं जिन्हें ज्योतिषविदों द्वारा इस वर्ष सावधान रहने की सलाह दी गई है, तो यह महीना आपके लिए अपनी मानसिक ऊर्जा को शांत करने और उसे सकारात्मक दिशा में मोड़ने का सबसे बेहतरीन अवसर है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 21 May 2026 13:10:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 21 May 2026 13:15:15 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Hindu Religion]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Guru Pushya Yoga benefits: गुरु-पुष्य योग में खरीदी करने के 5 बड़े फायदे]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/guru-pushya-yoga-purchasing-benefits-126052100005_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/guru-pushya-yoga-purchasing-benefits-126052100005_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/21/thumb/1_1/1779337846-1599.jpg"/>
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      <description><![CDATA[guru pushya yog ke labh: गुरु-पुष्य योग हिंदू ज्योतिष में एक बहुत ही शुभ योग माना जाता है। जब कोई व्यक्ति गुरु (बृहस्पति) और पुष्य नक्षत्र में समयानुसार किसी शुभ कार्य के लिए निवेश या खरीदारी करता है, तो उसे विशेष लाभ मिलने की संभावना मानी जाती है। ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="The photo gives information about obtaining prestigious auspicious results from buying gold in the market during Guru-Pushya Yoga" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/21/full/1779337846-1599.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>guru pushya yoga what to do: </strong>भारतीय ज्योतिष शास्त्र में गुरु-पुष्य योग को सभी योगों में सबसे कल्याणकारी और मंगलकारी माना गया है। जब गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग बनता है, तो यह महायोग निर्मित होता है। इस विशेष दिन पर की गई खरीदारी न केवल शुभ होती है, बल्कि लंबे समय तक लाभ भी देती है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/guru-pushya-yoga-auspicious-day-2026-126052000027_1.html" target="_blank">Guru Pushya Yoga: गुरु-पुष्य योग क्यों है इतना प्रभावशाली? जानें विशेष संयोग, क्या करें और क्या न करें</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	गुरु-पुष्य योग में खरीदारी करने के 5 बड़े फायदे निम्नलिखित हैं:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. चिरस्थायी समृद्धि</h3>
<p>
	पुष्य नक्षत्र का स्वभाव &#39;स्थायित्व&#39; प्रदान करना है। इस योग में खरीदी गई कोई भी वस्तु- विशेषकर सोना, चांदी, भूमि, या मकान आपके पास लंबे समय तक टिकती है और उसमें निरंतर वृद्धि होती है। माना जाता है कि इस दिन घर लाई गई संपत्ति कभी नष्ट नहीं होती। गुरु-पुष्य योग चिरस्थायी समृद्धि यानी लंबे समय तक टिकने वाला लाभ माना गया है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. मां लक्ष्मी और गुरु बृहस्पति की संयुक्त कृपा</h3>
<p>
	गुरुवार के देवता बृहस्पति देव, जो भाग्य और वैभव के कारक हैं और पुष्य नक्षत्र के अधिपति शनि देव, जो स्थायित्व के प्रतीक माने जाते हैं। इसके साथ ही, पुष्य नक्षत्र को धन की देवी मां लक्ष्मी का अत्यंत प्रिय नक्षत्र माना गया है। इसलिए, इस दिन खरीदारी करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है और मां लक्ष्मी का स्थायी वास होता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. बिना मुहूर्त के भी हर खरीदारी शुभ</h3>
<p>
	पुष्य नक्षत्र को &#39;नक्षत्रों का राजा&#39; कहा जाता है। इस योग को इतना स्वतः-सिद्ध और पवित्र माना गया है कि इस दिन खरीदारी करने के लिए आपको किसी विशेष चौघड़िए या अन्य पंचांग मुहूर्त को देखने की आवश्यकता नहीं होती। इस पूरे दिन किया गया हर कार्य और खरीदारी शुभ फल ही देती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. अक्षय फल की प्राप्ति</h3>
<p>
	&#39;अक्षय&#39; का अर्थ है जिसका कभी क्षय या नाश न हो। इस महायोग में आप जो भी कीमती वस्तु, वाहन, या इलेक्ट्रॉनिक सामान खरीदते हैं, वह आपके लिए भाग्यशाली साबित होती है। उस वस्तु का उपयोग आपके जीवन में सुख और सकारात्मकता लेकर आता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. निवेश में भारी मुनाफा</h3>
<p>
	यदि आप शेयर मार्केट, म्यूचुअल फंड, गोल्ड बॉन्ड या किसी नई बिजनेस प्रॉपर्टी में निवेश करने की सोच रहे हैं, तो यह समय सर्वोत्तम है। गुरु-पुष्य योग में किए गए निवेश में जोखिम की संभावना न्यूनतम हो जाती है और भविष्य में इसके मल्टीफोल्ड अर्थात् कई गुना बढ़ने के योग बनते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>विशेष टिप: </strong>यदि आप इस दिन कोई बड़ी या कीमती वस्तु नहीं खरीद पा रहे हैं, तो मात्र थोड़ा सा केसर, धार्मिक पुस्तकें, या पीतल का कोई छोटा बर्तन खरीदना भी उतना ही शुभ और समृद्धि दायक माना जाता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/guru-pushya-yoga-may-2026-126051500052_1.html" target="_blank">Guru Pushya Yoga 2026: 21 मई 2026 को बनेगा गुरु-पुष्य योग का शुभ संयोग, जानें क्यों हैं खास</a></strong><br />
	<br />
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।</p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 21 May 2026 10:01:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 21 May 2026 10:05:59 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[astrology articles]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[3 वर्ष बाद आया अधिकमास का गुरु प्रदोष, जानिए महत्व और कथा]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/adhikmaas-guru-pradosh-vrat-2026-mahatva-puja-vidhi-katha-126052000039_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/adhikmaas-guru-pradosh-vrat-2026-mahatva-puja-vidhi-katha-126052000039_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/20/thumb/1_1/1779269091-348.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/20/thumb/1_1/1779269091-348.jpg</image>
      <description><![CDATA[ज्येष्ठ माह के अधिकमास में 2 प्रदोष रहेंगे। कुल 4 प्रदौष रहेंगे। अधिकमास के अंतर्गत आने वाले प्रदोष का खासा महत्व माना गया है। पहला प्रदोष 28  मई 2026 गुरुवार के दिन रहेगा। गुरुवार के दिन होने के कारण इसे गुरु प्रदोष माना जाएगा। प्रत्येक वार के ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="lord shiv The picture depicts Lord Shiva, Goddess Parvati, a temple with a Shivalinga in the background and the Sun." class="imgCont" height="800" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/20/full/1779269091-348.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="guru pradosh in Adhik Maas" width="1200" /></p>
	</p>
	हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे उत्तम दिन माना गया है। लेकिन जब यह व्रत अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) में आता है और उस दिन गुरुवार होता है, तो इसका महत्व कई हजार गुना बढ़ जाता है। अधिकमास के गुरु प्रदोष व्रत के महात्म्य को हम कुछ मुख्य बिंदुओं के जरिए आसानी से समझ सकते हैं।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/adhikmaas-padmini-ekadashi-2026-vrat-mahatva-katha-126052000018_1.html" target="_blank">3 साल बाद आई अधिकमास की पद्मिनी एकादशी, जानें व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त और पौराणिक कथा</a></strong></p>
</p>
<h3>
	1. &#39;हरि-हर&#39; की दोहरी कृपा</h3>
<p>
	सामान्य प्रदोष: केवल भगवान शिव (हर) को समर्पित होता है।</p>
<p>
	अधिकमास का गुरु प्रदोष: अधिकमास के स्वामी भगवान विष्णु (हरि) हैं, गुरुवार के कारक देवगुरु बृहस्पति हैं, और प्रदोष तिथि के देवता भगवान शिव हैं। इसलिए इस दिन व्रत और पूजा करने से महादेव, श्रीहरि विष्णु और गुरु बृहस्पति तीनों का आशीर्वाद एक साथ मिलता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. कुंडली में &#39;बृहस्पति दोष&#39; से मुक्ति</h3>
<p>
	ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में गुरु ग्रह (बृहस्पति) कमजोर स्थिति में है, विवाह में अड़चनें आ रही हैं या शिक्षा में रुकावट है, उनके लिए यह दिन वरदान जैसा है। इस दिन शिवलिंग पर केसर मिश्रित दूध चढ़ाने और चने की दाल का दान करने से गुरु दोष शांत होता है और भाग्य का साथ मिलने लगता है।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/adhikmas-mein-2-pradosh-vrat-chandra-aur-shanidosh-se-mukti-126051900041_1.html" target="_blank">अधिकमास में 3 साल बाद बन रहे 2 प्रदोष व्रत, चंद्र और शनिदोष से मुक्ति पाने का दुर्लभ मौका</a></strong></p>
</p>
<h3>
	3. शत्रुओं और विरोधियों पर विजय</h3>
<p>
	पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवराज इंद्र ने वृत्तासुर राक्षस पर विजय प्राप्त करने के लिए गुरुदेव बृहस्पति के कहने पर ही &#39;गुरु प्रदोष व्रत&#39; किया था। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने या शाम के समय शिव चालीसा का पाठ करने से शत्रुओं और गुप्त विरोधियों का नाश होता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. दाम्पत्य जीवन और संतान सुख</h3>
<p>
	गुरु प्रदोष का व्रत वैवाहिक जीवन के कष्टों को दूर करने के लिए अचूक माना गया है। यदि पति-पत्नी के बीच अनबन चल रही हो, तो इस दिन शाम को (प्रदोष काल में) शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा करने से रिश्ते मधुर होते हैं। साथ ही, योग्य संतान की प्राप्ति और संतान की उन्नति के लिए भी यह व्रत बेहद फलदायी है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. अनंत गुना फल (अधिकमास का प्रभाव)</h3>
<p>
	शास्त्रों में कहा गया है कि अधिकमास (मलमास) में किया गया कोई भी जप, तप, दान या व्रत सामान्य दिनों की तुलना में करोड़ों गुना अधिक फल प्रदान करता है। इसलिए इस दिन किया गया लोटा भर जल का अर्पण भी अक्षय पुण्य लेकर आता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	गुरु प्रदोष व्रत का विशेष महत्व</h3>
<p>
	<strong>शुभ फल: </strong>हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, गुरु प्रदोष का व्रत रखने से जातक को दोहरे शुभ फल प्राप्त होते हैं।</p>
<p>
	<strong>शत्रु विजय: </strong>यह व्रत शत्रुओं के विनाश और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए जाना जाता है।</p>
<p>
	सौभाग्य और समृद्धि: भगवान शिव की कृपा से आर्थिक तंगी दूर होती है और बृहस्पति देव की कृपा से यश, कीर्ति और उच्च पद की प्राप्ति होती है।</p>
<p>
	<strong>पूर्वजों का आशीर्वाद: </strong>इस दिन व्रत करने से पितरों का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।</p>
<p>
	<strong>पुण्य फल: </strong>ऐसी मान्यता है कि एक प्रदोष व्रत रखने का पुण्य दो गायों के दान के बराबर होता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	इस दिन क्या विशेष करें?</h3>
<p>
	<strong>प्रदोष काल में पूजा: </strong>सूर्यास्त के समय (शाम के वक्त) भगवान शिव का रुद्राभिषेक या जलाभिषेक जरूर करें, क्योंकि मान्यता है कि इस समय महादेव कैलाश पर अत्यंत प्रसन्न मुद्रा में होते हैं।</p>
<p>
	<strong>दीपदान: </strong>शाम को घर के मंदिर, मुख्य द्वार या तुलसी/बेलपत्र के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं। अधिकमास में दीपदान का विशेष महत्व है।</p>
<p>
	क्या आप इस व्रत की विशेष पूजा-विधि या इस दिन किए जाने वाले किसी खास उपाय के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं?</p>
<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="shivling puja" class="imgCont" height="675" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2025-11/17/full/1763354246-9496.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="" width="1200" /></p>
</p>
<h3>
	गुरु प्रदोष व्रत की कथा:</h3>
<p>
	गुरु प्रदोष व्रत की कथा के अनुसार एक बार इंद्र और वृत्तासुर की सेना में घनघोर युद्ध हुआ। देवताओं ने दैत्य-सेना को पराजित कर नष्ट-भ्रष्ट कर डाला। यह देख वृत्तासुर अत्यंत क्रोधित हो स्वयं युद्ध को उद्यत हुआ। आसुरी माया से उसने विकराल रूप धारण कर लिया। सभी देवता भयभीत हो गुरुदेव बृहस्पति की शरण में पहूंचे। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	बृहस्पति महाराज बोले- पहले मैं तुम्हें वृत्तासुर का वास्तविक परिचय दे दूं। वृत्तासुर बड़ा तपस्वी और कर्मनिष्ठ है। उसने गंधमादन पर्वत पर घोर तपस्या कर शिवजी को प्रसन्न किया। पूर्व समय में वह चित्ररथ नाम का राजा था। एक बार वह अपने विमान से कैलाश पर्वत चला गया। वहां शिवजी के वाम अंग में माता पार्वती को विराजमान देख वह उपहासपूर्वक बोला- &#39;हे प्रभो! मोह-माया में फंसे होने के कारण हम स्त्रियों के वशीभूत रहते हैं किंतु देवलोक में ऐसा दृष्टिगोचर नहीं हुआ कि स्त्री आलिंगनबद्ध हो सभा में बैठे।&#39;</p>
<p>
	 </p>
<p>
	चित्ररथ के यह वचन सुन सर्वव्यापी शिवशंकर हंसकर बोले- &#39;हे राजन! मेरा व्यावहारिक दृष्टिकोण पृथक है। मैंने मृत्युदाता-कालकूट महाविष का पान किया है, फिर भी तुम साधारणजन की भांति मेरा उपहास उड़ाते हो!&#39;</p>
<p>
	 </p>
<p>
	माता पार्वती क्रोधित हो चित्ररथ से संबोधित हुईं- &#39;अरे दुष्ट! तूने सर्वव्यापी महेश्‍वर के साथ ही मेरा भी उपहास उड़ाया है अतएव मैं तुझे वह शिक्षा दूंगी कि फिर तू ऐसे संतों के उपहास का दुस्साहस नहीं करेगा- अब तू दैत्य स्वरूप धारण कर विमान से नीचे गिर, मैं तुझे शाप देती हूं।&#39;</p>
<p>
	 </p>
<p>
	जगदम्बा भवानी के अभिशाप से चित्ररथ राक्षस योनि को प्राप्त हुआ और त्वष्टा नामक ऋषि के श्रेष्ठ तप से उत्पन्न हो वृत्तासुर बना। गुरुदेव बृहस्पति आगे बोले- &#39;वृत्तासुर बाल्यकाल से ही शिवभक्त रहा है अत हे इंद्र! तुम बृहस्पति प्रदोष व्रत कर शंकर भगवान को प्रसन्न करो।&#39; देवराज ने गुरुदेव की आज्ञा का पालन कर बृहस्पति प्रदोष व्रत किया। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	गुरु प्रदोष व्रत के प्रताप से इंद्र ने शीघ्र ही वृत्तासुर पर विजय प्राप्त कर ली और देवलोक में शांति  छा गई। अत: प्रदोष व्रत हर शिव भक्त को अवश्य करना चाहिए। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 20 May 2026 14:39:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 20 May 2026 15:08:22 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Hindu Religion]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Guru Pushya Yoga: गुरु-पुष्य योग क्यों है इतना प्रभावशाली? जानें विशेष संयोग, क्या करें और क्या न करें]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/guru-pushya-yoga-auspicious-day-2026-126052000027_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/guru-pushya-yoga-auspicious-day-2026-126052000027_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/15/thumb/1_1/1778844557-5488.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/15/thumb/1_1/1778844557-5488.jpg</image>
      <description><![CDATA[guru pushya yog shubh din: ज्योतिष शास्त्र में गुरु-पुष्य योग को शुभ संयोग कहा गया है। इस दिन की गई पूजा, दान, व्रत और अन्य धार्मिक कार्य विशेष शुभ फल प्रदान करते हैं। गुरु-पुष्य योग साल में कुछ ही बार बनता है, इसलिए इसे अत्यंत दुर्लभ और शुभ माना ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="Pictured are images of Pushya Yoga shopping, Jupiter, planets, stars and worship materials on the auspicious occasion of Guru-Pushya on May 21, 2026" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/15/full/1778844557-5488.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
</p>
<p>
	<strong>Guru Pushya Yoga: </strong>वैदिक ज्योतिष में &#39;गुरु पुष्य योग&#39; या गुरु पुष्य नक्षत्र को अत्यंत दुर्लभ, शक्तिशाली और स्थायी समृद्धि देने वाला शुभ संयोग माना जाता है। ज्योतिषीय प्रभाव में यह योग तब बनता है जब गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र का संयोग का निर्माण होता है। मान्यतानुसार इस अत्यंत शुभ मुहूर्त में नवीन संपत्ति की खरीदना, निवेश करना तथा नया व्यापार शुरू करना बहुत फलदायी माना जाता है। इस अवसर पर आध्यात्मिक कार्य करना भी शुभ फल प्रदान करता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/other-festivals/adhik-maas-2026-dos-and-donts-126051500046_1.html" target="_blank">Adhika Maas 2026: 17 मई से पुरुषोत्तम मास, ज्येष्ठ अधिकमास में पुण्य लाभ कैसे पाएं और क्या टालें?</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	हिंदू धर्म में पुष्य नक्षत्र को &#39;नक्षत्रों का राजा&#39; माना जाता है, और जब यह गुरुवार के दिन पड़ता है, तो इसे &#39;गुरु-पुष्य योग&#39; कहते हैं। इस बार 21 मई 2026, गुरुवार का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत शुभ और दुर्लभ संयोग वाला होने जा रहा है, क्योंकि  इस दिन &#39;गुरु-पुष्य योग&#39; का महासंयोग बन रहा है।</p>
<h3>
	आइए यहां जानते हैं इस दिन के बारे में खास जानकारी...<br />
	 </h3>
<h3>
	<span style="font-size: 16px;">1.</span><span style="font-size: 16px;"> </span>गुरु-पुष्य योग: 21 मई 2026 के विशेष संयोग</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	गुरु पुष्य नक्षत्र का प्रारंभ- 21 मई 2026 को 04:12 ए एम से</p>
<p>
	पुष्य नक्षत्र का अंत:  22 मई 2026 को 02:49 ए एम पर।</p>
<p>
	तिथि: हिंदू कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी।</p>
<p>
	इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, रवि योग भी बन रहा है।</p>
<p>
	विशेषता: इस दिन चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में होंगे, जो पुष्य नक्षत्र के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अमृत सिद्धि योग: </strong>कई बार इस दिन गुरु-पुष्य के साथ अमृत सिद्धि योग भी बनता है, जो इसे किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए &#39;अबूझ मुहूर्त&#39; अर्थात् बिना पंचांग देखे किया जाने वाला कार्य बना देता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	<span style="font-size: 16px;">2.</span><span style="font-size: 16px;"> </span>क्यों है प्रभावशाली गुरु-पुष्य योग?</h3>
<p>
	शास्त्रों के अनुसार, पुष्य नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता बृहस्पति (गुरु) हैं और इसके स्वामी शनि देव हैं। चूंकि पुष्य नक्षत्र खुद में शुभ है और गुरुवार भी भगवान विष्णु व गुरु बृहस्पति का दिन है, इसलिए इन दोनों का मिलन एक &#39;अक्षय&#39; फल देने वाला योग बनाता है। यदि आप कोई बड़ी खरीदारी टाल रहे थे या घर-गाड़ी लेने का मन बना रहे थे, तो 21 मई 2026 का दिन कैलेंडर में मार्क कर लें। यह दिन आपकी आर्थिक उन्नति के द्वार खोल सकता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ganga-dussehra/ganga-dussehra-par-durlabh-yog-sanyog-5-upay-126051900044_1.html" target="_blank">गंगा दशहरा पर बन रहे हैं दुर्लभ योग संयोग, इस दिन करें ये 5 उपाय</a></strong><br />
	 </p>
<h3>
	3. इस दिन क्या करें?</h3>
<p>
	<strong>धर्म कार्य:</strong> इस दिन गुरु मंत्र का जाप, दीक्षा लेना या तीर्थ यात्रा पर जाना आत्मिक शांति प्रदान करता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>नई दुकान की शुरुआत: </strong>व्यापारी वर्ग इस दिन नए बही खाते या नई दुकान की शुरुआत करना पसंद करते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सोने की खरीदारी: </strong>गुरु-पुष्य योग में सोना खरीदना सबसे शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन खरीदा गया सोना पीढ़ी दर पीढ़ी बना रहता है और समृद्धि लाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>निवेश: </strong>प्रॉपर्टी, शेयर बाजार या नए व्यापार में निवेश के लिए यह दिन सर्वश्रेष्ठ है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. गुरु-पुष्य योग में क्या न करें?</h3>
<p>
	माना जाता है कि पुष्य नक्षत्र को ब्रह्मा जी का श्राप मिला था, इसलिए इस अत्यंत शुभ योग में भी &#39;विवाह&#39; यानी मैरेज की रस्में नहीं की जाती हैं। खरीदारी और निवेश के लिए यह उत्तम योग है, लेकिन विवाह संस्कार के लिए अन्य मुहूर्तों को प्राथमिकता दी जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. लाभ:</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>उत्तर-पूर्व दिशा: </strong>उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में इस दिन शाम को घी का दीपक जलाना सौभाग्य वर्धक माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>श्रीयंत्र स्थापना: </strong>अपने घर या ऑफिस में &#39;श्री यंत्र&#39; स्थापित करने के लिए यह सबसे सिद्ध मुहूर्त है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>पीली चीजों का दान: </strong>चने की दाल, गुड़, पीले वस्त्र या हल्दी का दान करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>विष्णु-लक्ष्मी पूजन:</strong> इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करने से दरिद्रता दूर होती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/adhikmaas-padmini-ekadashi-2026-vrat-mahatva-katha-126052000018_1.html" target="_blank">3 साल बाद आई अधिकमास की पद्मिनी एकादशी, जानें व्रत का महत्व, शुभ मुहूर्त और पौराणिक कथा</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 20 May 2026 13:23:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 20 May 2026 13:23:47 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[astrology articles]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Varada Chaturthi 2026: अधिकमास की वरद गणेश चतुर्थी आज, जानें महत्व, पूजा विधि और विशेष मंत्र]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/varad-vinayak-chaturthi-2026-126052000010_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2025-12/23/thumb/1_1/1766466698-3446.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Adhik Maas Chaturthi 2026: मई 2026 में विनायक चतुर्थी का व्रत 20 मई, बुधवार को रखा जा रहा है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को यह व्रत पड़ता है, जिसे वरद गणेश चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। भगवान गणेश को समर्पित ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="Photograph of the worship of Lord Ganesha on the auspicious occasion of Vinayaka Chaturthi. The images depict worship materials, flowers, leaves, a vase, offerings of modaks, and burning lamps" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2025-12/23/full/1766466698-3446.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
</p>
<p>
	<strong>Lord Ganesha Puja May 20, 2026:</strong> वरद विनायक चतुर्थी 20 मई 2026, बुधवार को मनाई जा रही है। यह चतुर्थी विशेष रूप से भगवान गणेश की पूजा के लिए प्रसिद्ध है और इसे अधिकमास चतुर्थी के रूप में भी जाना जाता है। अधिकमास के कारण यह चतुर्थी साल में किसी अन्य सामान्य चतुर्थी की तुलना में और भी पवित्र मानी जाती है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/adhikmas-mein-2-pradosh-vrat-chandra-aur-shanidosh-se-mukti-126051900041_1.html" target="_blank">अधिकमास में 3 साल बाद बन रहे 2 प्रदोष व्रत, चंद्र और शनिदोष से मुक्ति पाने का दुर्लभ मौका</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	वरद विनायक चतुर्थी पर भक्तगण भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। इस दिन की पूजा में विशेष रूप से सिद्धि, समृद्धि और बाधाओं से मुक्ति की प्रार्थना की जाती है। गणेश जी को विघ्नहर्ता माना जाता है, इसलिए इस दिन उनकी विधिपूर्वक पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।<br />
	<br />
	अधिकमास चतुर्थी का महत्व धार्मिक ग्रंथों में भी वर्णित है। कहा जाता है कि इस दिन किए गए कोई भी धार्मिक कार्य या व्रत दोगुना फल देते हैं। भक्तजन गणेश मंत्र, आरती और भजन के माध्यम से भगवान गणेश को याद करते हैं और उनकी कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। इस चतुर्थी के अवसर पर भारत के विभिन्न मंदिरों में विशेष पूजा और आयोजन किए जाते हैं। लोग अपने घरों में गणेश प्रतिमा की स्थापना कर इसे विधिपूर्वक सजाते हैं और पूरे दिन ध्यान और भक्ति में लीन रहते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	यहां विनायक चतुर्थी से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई हैं:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	वरदा चतुर्थी तिथि और शुभ मुहूर्त (मई 2026)</h3>
<p>
	ज्येष्ठ, शुक्ल चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 19 मई 2026, 02:18 पी एम से</p>
<p>
	चतुर्थी तिथि समाप्त: 20 मई 2026, 11:06 ए एम पर। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>वरद चतुर्थी मध्याह्न मुहूर्त -</strong> 10:56 ए एम से 11:06 ए एम</p>
<p>
	<strong>चतुर्थी: 00 घण्टे 10 मिनट्स</strong></p>
<p>
	बता दें कि विनायक चतुर्थी की पूजा दोपहर के समय की जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>वर्जित चन्द्रदर्शन का समय -</strong> 08:43 ए एम से 11:08 पी एम</p>
<p>
	<strong>अवधि - 14 घण्टे 25 मिनट्स</strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	विनायक चतुर्थी का महत्व</h3>
<p>
	जैसा कि नाम से स्पष्ट है, &#39;विनायक&#39; का अर्थ है विशिष्ट नायक यानी विघ्नहर्ता और बाधाओं को हरने वाला। इस दिन व्रत रखने से जीवन की सभी अड़चनें दूर होती हैं। भगवान गणेश बुद्धि और विवेक के देवता हैं। विद्यार्थियों और व्यापारियों के लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा से पूजा करने से रुके हुए कार्य संपन्न होते हैं और घर में सुख-शांति आती है। यह व्रत बुद्धि और समृद्धि के साथ-साथ जीवन में सफलता का मार्ग भी दिखाता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ganga-dussehra/ganga-dussehra-par-durlabh-yog-sanyog-5-upay-126051900044_1.html" target="_blank">गंगा दशहरा पर बन रहे हैं दुर्लभ योग संयोग, इस दिन करें ये 5 उपाय</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	सरल पूजा विधि</h3>
<p>
	विनायक चतुर्थी पर दोपहर की पूजा का विधान है। आप इस विधि का पालन कर सकते हैं:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>स्नान और संकल्प:</strong> सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ लाल या पीले रंग के वस्त्र धारण करें। व्रत का संकल्प लें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>स्थापना:</strong> पूजा स्थान पर गणेश जी की मूर्ति को गंगाजल से पवित्र करें। उन्हें लाल चंदन का तिलक लगाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अर्पण:</strong> भगवान गणेश को 21 दूर्वा घास की गांठें चढ़ाएं। उन्हें लाल फूल, अक्षत और सिंदूर अर्पित करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>भोग: </strong>गणेश जी के प्रिय मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>कथा और आरती: </strong>विनायक चतुर्थी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें और अंत में कपूर से आरती करें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	विशेष मंत्र</h3>
<p>
	पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करना अत्यंत लाभकारी होता है:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मुख्य मंत्र:</strong> ॐ गं गणपतये नमः।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>कार्य सिद्धि के लिए: </strong>वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>दूर्वा अर्पण मंत्र: </strong>&#39;इदं दूर्वादलं ऊं गं गणपतये नमः&#39;</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>विशेष सावधानी: </strong>विनायक चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन वर्जित माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चंद्रमा को देखने से कलंक या झूठे आरोप लगने का डर रहता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ganga-dussehra/ganga-dussehra-par-durlabh-yog-sanyog-5-upay-126051900044_1.html" target="_blank">गंगा दशहरा पर बन रहे हैं दुर्लभ योग संयोग, इस दिन करें ये 5 उपाय</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 20 May 2026 10:55:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 20 May 2026 10:50:14 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Other Festivals]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[लौट आई बहार भोजशाला में, मंदिर था, मंदिर रहेगा]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/religious-places/bhojshala-temple-of-mother-saraswati-126051900026_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/religious-places/bhojshala-temple-of-mother-saraswati-126051900026_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/15/thumb/1_1/1778849593-9675.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Bhojshala Vagdevi Temple: मध्यप्रदेश का धार जिला न केवल मांडवगढ़, राजा भोज, बाघ गुफ़ा के लिए ही नहीं जानता जाता, बल्कि भोजशाला स्थित वाग्देवी मंदिर के लिए भी देशभर में अलग पहचान रखता है। भोजशाला सरस्वती मंदिर मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित है। ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="धार के हिन्दू धर्मस्थल देवी सरस्वती मंदिर, भोजशाला में कैसे बनी मस्जिद इससे संबंधित जानकारी देता फोटो" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/15/full/1778849593-9675.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 800px;" title="dhar bhojshala" /></p>
</p>
<p>
	मध्यप्रदेश का धार जिला न केवल मांडवगढ़, राजा भोज, बाघ गुफ़ा के लिए ही नहीं जानता जाता, बल्कि भोजशाला स्थित वाग्देवी मंदिर के लिए भी देशभर में अलग पहचान रखता है। भोजशाला सरस्वती मंदिर मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित है। भोजशाला ऐसा धर्मस्थल है, जिसे आक्रांताओं ने नष्ट कर अथवा उसी के हिस्सों का प्रयोग कर उसे मस्ज़िद में बदल दिया।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/sanatan-dharma-history/bhojshala-ka-itihas-raja-bhoj-se-lekar-vivad-tak-poori-timeline-126051600024_1.html" target="_blank">भोजशाला का इतिहास: राजा भोज से लेकर विवाद तक, जानिए पूरी टाइमलाइन</a></strong><br />
	<br />
	भोजशाला भी उनमें से एक है, जहां वर्तमान समय में बसंत पंचमी का उत्सव भी मनाया जाता है और शुक्रवार की नमाज़ भी पढ़ी जाती है और यह सब हुआ इस्लामिक कट्टरपंथी अलाउद्दीन खिलजी के द्वारा मंदिर को नष्ट किए जाने के बाद। किन्तु शुक्रवार को उच्च न्यायालय ने भोजशाला मामले की सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाया कि यह मंदिर था, मंदिर है और मंदिर रहेगा।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	इतिहास में भोजशाला का उल्लेख गहरा है। भारत की शासन प्रणाली के प्रांजल अध्याय के रूप में पहचाने जाने वाले परमार राजवंश के शासक राजा भोज ने धार में एक महाविद्यालय की स्थापना की थी, जिसे बाद में भोजशाला के रूप में जाना जाने लगा।<br />
	<br />
	कहा जाता है कि राजा भोज मां शारदे के महान उपासक थे और यही कारण भी था कि उनकी रुचि शिक्षा एवं साहित्य में बहुत ज़्यादा थी। राजा भोज ने ही सन् 1034 में भोजशाला के रूप में एक भव्य पाठशाला का निर्माण किया और यहाँ माता सरस्वती की एक प्रतिमा स्थापित की। इसे तब सरस्वती सदन कहा था। भोजशाला को माता सरस्वती का प्राकट्य स्थान भी माना जाता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/national-hindi-news/8-key-points-from-the-indore-high-court-s-decision-on-bhojshala-126051500066_1.html" target="_blank">भोजशाला कमाल मौला मस्जिद नहीं माता वाग्देवी मंदिर, हाईकोर्ट के फैसले की 8 बड़ी बातें</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	इतिहास में दर्ज भोजशाला मंदिर से प्राप्त कई शिलालेख 11वीं से 13वीं शताब्दी के हैं। इन शिलालेखों में संस्कृत में व्याकरण के विषय में वर्णन किया गया है। इसके अलावा कुछ शिलालेखों में राजा भोज के बाद शासन संभालने वाले राजाओं की स्तुति की गई है। कुछ ऐसे भी शिलालेख हैं जिनमें शास्त्रीय संस्कृत में नाटकीय रचनाएं उत्कीर्णित हैं। माता सरस्वती के इस मंदिर को कवि मदन ने अपनी रचनाओं में वर्णित किया था। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	यहां प्राप्त हुई माता सरस्वती की मूल प्रतिमा वर्तमान में लंदन के संग्रहालय में है। एक समय में मां सरस्वती का मंदिर होने के साथ भोजशाला भारत के सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में से एक था। इसके आलावा यह स्थान विश्व का प्रथम संस्कृत अध्ययन केंद्र भी था। इस विश्वविद्यालय में देश-विदेश के हज़ारों विद्वान आध्यात्म, राजनीति, आयुर्वेद, व्याकरण, ज्योतिष, कला, नाट्य, संगीत, योग, दर्शन आदि विषयों का ज्ञान प्राप्त करने के लिए आते थे। इसके अतिरिक्त इस शिक्षा केंद्र में वायुयान, जलयान तथा कई अन्य स्वचालित (ऑटोमैटिक) यंत्रों के विषय में भी अध्ययन किया जाता था।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	ऐतिहासिक तथ्यों के मुताबिक सन् 1305 में मुस्लिम आक्रांता अलाउद्दीन खिलजी ने भोजशाला पर आक्रमण किया था और उसे नष्ट कर दिया था। बाद में सन् 1401 में दिलावर खां ने भोजशाला के एक भाग में मस्ज़िद का निर्माण करा दिया। अंततः सन् 1514 में महमूद शाह खिलजी ने भोजशाला के शेष बचे हिस्से पर मस्ज़िद का निर्माण करा दिया। समय के साथ यहां विवाद बढ़ता गया और अंग्रेज़ी हुक़ूमत के दौरान भोजशाला को संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया गया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	एक रिपोर्ट के अनुसार सन् 1305 में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय भोजशाला के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भी खिलजी की इस्लामिक सेना का विरोध किया था। खिलजी द्वारा लगभग 1,200 छात्र-शिक्षकों को बंदी बनाकर उनसे इस्लाम क़ुबूल करने के लिए कहा गया लेकिन इन सभी ने इस्लाम स्वीकार करने से मना कर दिया। इसके बाद इन विद्वानों की हत्या कर दी गई थी और उनके शव को भोजशाला के ही विशाल हवन कुंड में फेंक दिया गया था। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	16वीं शताब्दी में दिलावर खां गौरी ने मां सरस्वती के मंदिर में बने देवस्थलों को खंडित कर, कमाल मौलाना का अवैध मक़बरा बना दिया। कहा जाता है कि भोजशाला में कमाल मौलाना की मज़ार है जबकि इतिहास यह भी कहता है कि कमाल मौलाना की मृत्यु अहमदाबाद में हुई थी, जहां उनकी मज़ार स्थित है। फिर भी भोजशाला में मज़ार होने का दावा तथ्यहीन नज़र आता है। इस तरह एक और हिन्दू मंदिर कट्टरपंथ की भेंट चढ़ गया।<br />
	<br />
	भोजशाला को लेकर सन् 1952 में महाराजा भोज स्मृति बसंतोत्सव समिति ने मुक्ति के प्रयास प्रारंभ किए थे। सन् 1961 में पुरातत्ववेत्ता व इतिहासकार पद्म श्री डॉ. वाकणकर ने मां वाग्देवी की प्रतिमा का लंदन संग्रहालय में होना प्रमाणित किया। सन् 1970 के बाद मंदिर परिसर में नमाज़ भी प्रारंभ हो गई।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	सन् 1992 बसंत पंचमी को साध्वी ऋतुम्भरा जी द्वारा सरस्वती मंदिर भोजशाला में हनुमान चालीसा का आह्वान किया गया, तब अगले मंगलवार से सत्याग्रह प्रारंभ हुआ। सन् 2000 में ’घर-घर देवालय’ स्थापना के द्वारा धर्म जागरण का कार्य भी शुरू हुआ। इसके साथ सन् 2003 में लाखों श्रद्धालुओं ने माँ वाग्देवी का पूजन भोजशाला में किया। 6 फ़रवरी 2003 बसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन था, उस दिन भोजशाला मुक्ति के लिए एक लाख से अधिक धर्मरक्षकों का संगम एवं संकल्प ही हुआ। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	 </p>
<p>
	18-19 फ़रवरी 2003 को भोजशाला आंदोलन में तीन कार्यकर्ताओं का बलिदान हुआ और 1400 कार्यकर्ताओं पर प्रतिबंधात्मक कार्यवाही हुई। 08 अप्रैल 2003 को 650 वर्ष बाद हिन्दूओं को दर्शन एवं पूजन का अधिकार प्राप्त हुआ। सन् 2006 की बंसत पंचमी, शुक्रवार को पहली बार दिन भर गर्भगृह में हवन पूजन किया गया। संगठित हिन्दू समाज के पराक्रम के कारण सन् 2013 में भोजशाला परिसर के बाहर नमाज़ हुई।<br />
	<br />
	2016 में सूर्योदय के साथ ही गर्भ गृह में सरस्वती माता के तेल चित्र की पूजा-स्थापना के साथ यज्ञ प्रारंभ हुआ। संघर्ष, संगठन और पराक्रम के बल पर वर्ष में 52 दिन पूजन का अधिकार प्राप्त हुआ है। 750 वर्ष से चले रहे संघर्ष की पूर्णाहुति लंदन में रखी वाग्देवी सरस्वती की प्रतिमा की सरस्वती मंदिर भोजशाला में पुनर्स्थापना के साथ होगी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	बसंत पंचमी के दिन समस्त हिन्दू समाजजन यहां माता सरस्वती की उपासना करने के लिए आते हैं, लेकिन यह पूजा-पाठ भी कानून के दायरे में रहकर और भीषण सुरक्षा-व्यवस्था के बीच संपन्न होती है। सन् 2013 में बसंत पंचमी, शुक्रवार के दिन ही थी, जिसके कारण भोजशाला में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति निर्मित हो गई थी और पुलिस को यहां कार्रवाई करनी पड़ी थी।<br />
	<br />
	उसी दौरान हिन्दूवादी संघर्षक, भोजशाला मुक्ति मोर्चा के संयोजक नवलकिशोर शर्मा पुलिसिया बर्बरता के शिकार हुए थे। इसके अतिरिक्त सैंकड़ो संघर्षों की गवाह रही भोजशाला में आज तक माँ वाग्देवी की मूल प्रतिमा स्थापित नहीं हो पाई है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	शुक्रवार 15 मई 2026 को एएसआई सर्वे की रिपोर्ट इत्यादि के बाद उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद में में बड़ा फैसला सुनाते हुए परिसर को हिंदू मंदिर माना है। इस मामले पर अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि इंदौर उच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 7 अप्रैल, 2003 के एएसआई के आदेश को आंशिक रूप से रद्द कर दिया है। इसके अलावा, न्यायालय ने हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार प्रदान किया है और भोजशाला परिसर को राजा भोज की संपत्ति के रूप में मान्यता दी है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	लंदन के एक संग्रहालय में रखी हमारी मूर्ति को वापस लाने की मांग के संबंध में, न्यायालय ने सरकार को इस अनुरोध पर विचार करने का निर्देश दिया है; न्यायालय ने यह भी कहा है कि मुस्लिम पक्ष भी सरकार के समक्ष अपने विचार रखने के लिए स्वतंत्र है। इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने सरकार से मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक भूमि आवंटित करने पर विचार करने को कहा है। न्यायालय ने हमें पूजा-अर्चना करने का अधिकार प्रदान किया है और सरकार को स्थल के प्रबंधन की निगरानी करने का निर्देश दिया है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	एएसआई का पिछला आदेश, जिसमें नमाज अदा करने का अधिकार दिया गया था, पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है; अब से वहां केवल हिंदू पूजा-अर्चना ही होगी। इस शुभ दिन के बाद भोजशाला को सदा-सदा के लिए मंदिर घोषित करके न्यायालय ने कोटिशः हिन्दूजनों के आस्था के अध्याय को सर्वदा के लिए अमर कर दिया। भोजशाला में वाग्देवी की प्रतिमा की वापसी भी निश्चित होगी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	[लेखक डॉ. अर्पण जैन &#39;अविचल&#39; मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं]<br />
	<br />
	(इस लेख में व्यक्त विचार/विश्लेषण लेखक के निजी हैं। &#39;वेबदुनिया&#39; इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।)<strong>ALSO READ: </strong><strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/national-hindi-news/architect-padma-shri-chandrakrant-sompura-is-ready-to-design-a-grand-temple-in-bhojshala-on-the-lines-of-ram-temple-126051600033_1.html" target="_blank">राम मंदिर के तर्ज पर भोजशाला में बनेगा भव्य मंदिर?, राम मंदिर के शिल्पकार चंद्रक्रांत सोमपुरा डिजाइन करने को तैयार</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 19 May 2026 15:08:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 19 May 2026 15:07:14 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Religious Places]]></category>
      <authorname>डॉ. अर्पण जैन 'अविचल'</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[पुरुषोत्तम मास 2026: इन खास तिथियों पर रखें व्रत, करें इन देवी-देवताओं की पूजा; मिलेगा अक्षय पुण्य और सुख-समृद्धि]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/purushottam-mas-2026-important-vrat-tithiyan-126051800042_1.html</link>
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      <description><![CDATA[साल 2026 में पुरुषोत्तम मास (अधिक ज्येष्ठ मास) की शुरुआत 17 मई 2026 से हो चुकी है और यह 15 जून 2026 तक चलेगा। इस पूरे महीने में सांसारिक मांगलिक कार्य (जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश) वर्जित होते हैं, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टिकोण से यह समय व्रत, दान, ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="The image features Lord Vishnu, Shiva, Lakshmi, and Lord Ganesha; the caption reads: 'Fasts and Festivals of Purushottam Month'." class="imgCont" height="720" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/18/full/1779101945-8585.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="Fasts and Festivals of Adhik Maas 2026" width="1200" /></p>
	</p>
	साल 2026 में पुरुषोत्तम मास (अधिक ज्येष्ठ मास) की शुरुआत 17 मई 2026 से हो चुकी है और यह 15 जून 2026 तक चलेगा। इस पूरे महीने में सांसारिक मांगलिक कार्य (जैसे विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश) वर्जित होते हैं, लेकिन आध्यात्मिक दृष्टिकोण से यह समय व्रत, दान, पुण्य और स्नान के साथ ही पूजा पाठ का भी रहता है। पुरुषोत्तम मास के दौरान कुछ विशेष तिथियां ऐसी आती हैं, जिनमें व्रत रखने और विशिष्ट देवताओं की पूजा करने से अक्षय पुण्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं इन महत्वपूर्ण तिथियों और पूजनीय देवताओं के बारे में।</p>
<p>
	 </p>
<ul>
	<li>
		<strong>20 मई: </strong>वरद चतुर्थी </li>
	<li>
		<strong>23 मई:</strong> अधिकमास दुर्गाष्टमी</li>
	<li>
		<strong>25 मई: </strong>गंगा दशहरा</li>
	<li>
		<strong>27 मई:</strong> पद्मिनी एकादशी</li>
	<li>
		<strong>28 मई:</strong> गुरु प्रदोष</li>
	<li>
		<strong>31 मई: </strong>अधिकमास पूर्णिमा</li>
	<li>
		<strong>03 जून:</strong> विभुवन संकष्टी चतुर्थी</li>
	<li>
		<strong>11 जून:</strong> परमा एकादशी</li>
	<li>
		<strong>12 जून:</strong> शुक्र प्रदोष</li>
	<li>
		<strong>14 जून:</strong> अधिकमास अमावस्या</li>
	<li>
		<strong>15 जून:</strong> मिथुन संक्रांति</li>
</ul>
<h3>
	1. पुरुषोत्तम मास की दो महत्वपूर्ण एकादशियां (सर्वश्रेष्ठ व्रत)</h3>
<p>
	इस मास में पड़ने वाली एकादशियां सबसे अधिक फलदायी मानी जाती हैं। सामान्य वर्ष में 24 एकादशियां होती हैं, लेकिन अधिक मास के कारण इस साल कुल 26 एकादशियां होंगी।</p>
<p>
	<strong>पद्मिनी एकादशी (शुक्ल पक्ष): </strong>इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु के &#39;किरिटी रूप&#39; (मुकुटधारी विष्णु) की पूजा की जाती है। यह व्रत कीर्ति, संतान सुख और मोक्ष देने वाला माना गया है।</p>
<p>
	<strong>परमा एकादशी (कृष्ण पक्ष): </strong>इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु के &#39;कमलापति&#39; रूप की पूजा की जाती है। यह व्रत घोर दरिद्रता और संकटों का नाश करने वाला माना गया है।</p>
<p>
	<strong>देवता: </strong>साक्षात भगवान विष्णु (श्रीहरि) और माता लक्ष्मी।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/other-festivals/purushottam-maas-dos-and-donts-2026-126050500017_1.html" target="_blank">Purushottam Maas 2026: पुरुषोत्तम मास में क्या करें और क्या नहीं?</a></strong></p>
</p>
<h3>
	2. अधिक मास की प्रदोष व्रत और शिवरात्रि (शिव-शक्ति पूजा)</h3>
<p>
	भले ही यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित है, लेकिन हरि (विष्णु) और हर (शिव) एक ही हैं।</p>
<p>
	<strong>प्रदोष व्रत (त्रयोदशी तिथि) और मासिक शिवरात्रि (चतुर्दशी तिथि): </strong>पुरुषोत्तम मास में आने वाले प्रदोष व्रत और शिवरात्रि के दिन व्रत रखने से कुंडली के सभी ग्रह दोष (विशेषकर शनि और राहु-केतु के दोष) शांत होते हैं।</p>
<p>
	<strong>देवता: </strong>भगवान शिव और माता पार्वती। इस दिन शिवलिंग पर पंचामृत और जल अर्पित करने से मानसिक शांति मिलती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. अधिक मास की अमावस्या और पूर्णिमा (15 जून 2026 - समापन)</h3>
<p>
	<strong>महत्व:</strong> अधिक मास की पूर्णिमा (जिस दिन इस मास का समापन होगा) और अमावस्या के दिन व्रत, पवित्र नदियों में स्नान और दान का विशेष विधान है। इस दिन व्रत रखने से पूरे महीने की पूजा का फल मिल जाता है।</p>
<p>
	<strong>देवता और पूजा: </strong>इस दिन भगवान सत्यनारायण की कथा सुनी जाती है। साथ ही, पितरों (पूर्वजों) के निमित्त तर्पण और दान किया जाता है ताकि उनका आशीर्वाद परिवार पर बना रहे।</p>
<p>
	<p>
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</p>
<h3>
	पुरुषोत्तम मास में मुख्य रूप से किन देवताओं की पूजा करें?</h3>
<p>
	<strong>भगवान पुरुषोत्तम (श्रीकृष्ण/विष्णु): </strong>चूंकि भगवान विष्णु ने स्वयं इस महीने को अपना नाम &#39;पुरुषोत्तम&#39; दिया है, इसलिए वे इस मास के मुख्य अधिष्ठाता देव हैं। पूरे महीने "ओम नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जप करें।</p>
<p>
	श्रीमद्भागवत महापुराण और श्री रामचरितमानस की पूजा: इस मास में साक्षात धार्मिक ग्रंथों को भगवान का रूप मानकर उनकी पूजा की जाती है और उनका पाठ किया जाता है।</p>
<p>
	<strong>सूर्य देव की पूजा: </strong>अधिक मास सूर्य और चंद्रमा के चक्र को संतुलित करने के लिए आता है। इसलिए प्रतिदिन सुबह सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल (अर्घ्य) देना और आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना आरोग्य (अच्छे स्वास्थ्य) की प्राप्ति कराता है।</p>
<p>
	<strong>हनुमान जी की पूजा: </strong>इस महीने में हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करने से सभी प्रकार के भय और संकट दूर होते हैं।</p>
<p>
	<strong>व्रत का नियम:</strong> यदि आप पूरे महीने का व्रत नहीं रख सकते, तो केवल दोनों एकादशी, प्रदोष और पूर्णिमा के दिन जल या फलाहार ग्रहण करके व्रत रख सकते हैं। इस दौरान सात्विक भोजन (बिना लहसुन-प्याज का) ही ग्रहण करें।</p>
<p>
	<p>
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</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 18 May 2026 16:15:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 18 May 2026 16:30:48 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Hindu Religion]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[पुरुषोत्तम मास 2026: इस पवित्र महीने में करें ये 5 काम, धन-दौलत और सुख-समृद्धि की होगी वर्षा]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/purushottam-mas-2026-mein-ye-5-kaam-karne-se-milta-hai-apar-dhan-sukh-samriddhi-126051800032_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/purushottam-mas-2026-mein-ye-5-kaam-karne-se-milta-hai-apar-dhan-sukh-samriddhi-126051800032_1.html</guid>
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      <description><![CDATA[पुरुषोत्तम मास यानी अधिक मास में शास्त्रों के अनुसार, इस पवित्र महीने में किए गए धार्मिक कार्यों का फल कभी नष्ट नहीं होता। यदि इस मास में भक्ति के साथ-साथ कुछ विशेष ज्योतिषीय और शास्त्रों में बताए गए उपाय करेंगे तो धन की प्राप्ति होगी। तुलसी और पीपल ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="The image features Lord Vishnu, an oil lamp, a cow, a Tulsi plant, a Puja Thali, a book, a Kalash, and a gold coin, with the caption reading: '5 Remedies for Purushottam Maas 2026'." class="imgCont" height="800" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/18/full/1779097500-2937.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="purushottam maas ke 5 upay" width="1200" /></p>
	</p>
	पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का सबसे उत्तम समय माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस पवित्र महीने में किए गए धार्मिक कार्यों का फल कभी नष्ट नहीं होता। यदि इस मास में भक्ति के साथ-साथ कुछ विशेष ज्योतिषीय और शास्त्रों में बताए गए उपाय किए जाएं, तो माँ लक्ष्मी और भगवान विष्णु अत्यंत प्रसन्न होते हैं, जिससे जीवन में आर्थिक तंगी दूर होती है और अपार धन की प्राप्ति होती है। यदि आप पुरुषोत्तम मास में समृद्ध होना चाहते हैं, तो ये 5 कार्य विशेष रूप से करें।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/purushottam-mas-2026-mein-kaunse-tirth-ki-yatra-se-milta-hai-punya-phal-126051800025_1.html" target="_blank">पुरुषोत्तम मास 2026: इस पवित्र महीने में इन तीर्थों की यात्रा से मिलेगा कई जन्मों का पुण्यफल</a></strong></p>
</p>
<h3>
	1. तुलसी जी के सामने घी का दीपक और परिक्रमा</h3>
<p>
	<strong>तुलसी: </strong>तुलसी जी को भगवान विष्णु की सबसे प्रिय माना गया है। पुरुषोत्तम मास में हर शाम तुलसी के पौधे के सामने गाय के घी का दीपक जलाएं।</p>
<p>
	<strong>विशेष लाभ के लिए: </strong>दीपक जलाने के बाद तुलसी जी की ओम नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करते हुए 11 या 21 बार परिक्रमा करें। ऐसा करने से घर की दरिद्रता दूर होती है और मां लक्ष्मी का स्थायी वास होता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. पीपल के वृक्ष में जल और दीपदान</h3>
<p>
	<strong>पीपल: </strong>पीपल के पेड़ में त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का वास माना जाता है, और भगवान कृष्ण ने गीता में स्वयं को वृक्षों में पीपल कहा है।</p>
<p>
	<strong>कैसे करें: </strong>पुरुषोत्तम मास में प्रतिदिन सुबह पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित जल अर्पित करें और शाम के समय सरसों के तेल या घी का दीपक जलाएं। इससे पितृ दोष शांत होता है और धन आगमन के नए रास्ते खुलते हैं।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/purushottam-maas-2026-do-durlabh-ekadashi-vrat-mahatva-126051600014_1.html" target="_blank">3 वर्ष बाद आई हैं पुरुषोत्तम मास की ये 2 दुर्लभ एकादशियां, व्रत रखना न भूलें</a></strong></p>
</p>
<h3>
	3. शंख और पीले अनाज का उपाय (महालक्ष्मी योग)</h3>
<p>
	<strong>पीला रंग:</strong> भगवान विष्णु को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। इस महीने के किसी भी गुरुवार या एकादशी के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी के मंदिर में पीले रंग के वस्त्र, पीले फल, चने की दाल या केसर अर्पित करें।</p>
<p>
	<strong>अचूक उपाय: </strong>यदि घर की तिजोरी में दक्षिणवर्ती शंख की स्थापना कर उसमें गुलाब जल भरकर नियमित रूप से पूजन किया जाए, तो कर्ज से मुक्ति मिलती है और रुका हुआ धन वापस आता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. मालपुए का भोग और दान (अक्षय पुण्य)</h3>
<p>
	<strong>मालपुए: </strong>पुरुषोत्तम मास में मालपुए का दान करने का बहुत बड़ा धार्मिक महत्व है। इस महीने में भगवान पुरुषोत्तम को 33 मालपुओं का भोग लगाने और फिर उन्हें कांसे के पात्र में रखकर किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान करने का विधान है। ऐसा करने से जातक को अक्षय धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/purushottam-maas-2026-mantra-path-aur-chalisa-ke-labh-126051600036_1.html" target="_blank">पुरुषोत्तम मास 2026: कौन से मंत्र, पाठ और चालीसा दिलाते हैं अपार पुण्य और सुख-समृद्धि?</a></strong></p>
</p>
<h3>
	5. पवित्र नदियों या देवालयों में दीपदान</h3>
<p>
	<strong>दीपदान: </strong>इस पूरे महीने शाम के समय किसी पवित्र नदी के तट पर, मंदिर में, या घर के मुख्य द्वार पर दीपदान (दीपक जलाना) करने से भाग्य चमक उठता है। यदि आर्थिक स्थिति खराब चल रही हो, तो पुरुषोत्तम मास में नियमित रूप से शाम को घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में गाय के घी का दीया जलाएं, जिसमें थोड़ी सी हल्दी या केसर पड़ी हो।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/religious-stories/mythological-significance-and-legend-of-purushottam-maas-126042700050_1.html" target="_blank">पुरुषोत्तम मास का पौराणिक महत्व और कथा</a></strong></p>
</p>
<p>
	<strong>एक छोटा सा मंत्र: </strong>इस पूरे महीने उठते-बैठते मन ही मन "ओम भूरिदा भूरि देहिनो, मा दभ्रं भूर्या भर। भूरि घेदिन्द्र दित्ससि। ओम भूरिदा त्यसि श्रुतः पुरूजा शूर वृत्रहन्। आ नो भजस्व राधसि।" (धन प्राप्ति का विष्णु मंत्र) या साधारण "ओम नमो भगवते वासुदेवाय" का जप अवश्य करते रहें।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 18 May 2026 15:02:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 18 May 2026 15:16:23 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Hindu Religion]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[पुरुषोत्तम मास 2026: इस पवित्र महीने में इन तीर्थों की यात्रा से मिलेगा कई जन्मों का पुण्यफल]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/purushottam-mas-2026-mein-kaunse-tirth-ki-yatra-se-milta-hai-punya-phal-126051800025_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/purushottam-mas-2026-mein-kaunse-tirth-ki-yatra-se-milta-hai-punya-phal-126051800025_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/18/thumb/1_1/1779094689-3966.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/18/thumb/1_1/1779094689-3966.jpg</image>
      <description><![CDATA[हिंदू धर्म में पुरुषोत्तम को माह, दान, स्नान, अध्यात्म, भक्ति और पुण्य कमाने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। भगवान विष्णु (श्रीहरि) इस मास के स्वामी हैं, इसलिए इस दौरान की गई धार्मिक यात्राओं और तीर्थ स्थानों के दर्शन का फल सामान्य दिनों से कई गुना ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="In the image featuring a river and a temple, the caption reads: 'Where to travel during Purushottam Maas?'" class="imgCont" height="800" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/18/full/1779094689-3966.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="purushottam tirth kshetra maas" width="1200" /></p>
	</p>
	हिंदू धर्म में पुरुषोत्तम मास को अधिक मास या मलमास भी कहते हैं। यह माह, दान, स्नान, अध्यात्म, भक्ति और पुण्य कमाने के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। भगवान विष्णु (श्रीहरि) इस मास के स्वामी हैं, इसलिए इस दौरान की गई धार्मिक यात्राओं और तीर्थ स्थानों के दर्शन का फल सामान्य दिनों से कई गुना अधिक मिलता है। पुरुषोत्तम मास में यदि आप तीर्थ यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो निम्नलिखित स्थानों की यात्रा सबसे पवित्र और पुण्यदायी मानी जाती है।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/purushottam-maas-2026-mantra-path-aur-chalisa-ke-labh-126051600036_1.html" target="_blank">पुरुषोत्तम मास 2026: कौन से मंत्र, पाठ और चालीसा दिलाते हैं अपार पुण्य और सुख-समृद्धि?</a></strong></p>
</p>
<h3>
	1. ब्रज मंडल और गोवर्धन (उत्तर प्रदेश)- सर्वोत्तम स्थान</h3>
<p>
	पुरुषोत्तम मास में ब्रज क्षेत्र (मथुरा, वृंदावन, गोवर्धन) की यात्रा को सबसे ऊंचा स्थान दिया गया है। मान्यता है कि इस पूरे महीने में भगवान श्रीकृष्ण (जो साक्षात पुरुषोत्तम हैं) अपने पूरे परिकर और सभी देवी-देवताओं के साथ ब्रज में ही निवास करते हैं।</p>
<p>
	<strong>क्या करें: </strong>इस महीने में गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा (21 किलोमीटर) करने का विशेष महत्व है। इसके अलावा 84 कोस की ब्रज यात्रा भी अत्यंत फलदायी मानी जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. पुरुषोत्तम पुरी या जगन्नाथ पुरी (ओडिशा)</h3>
<p>
	चार धामों में से एक जगन्नाथ पुरी को साक्षात &#39;पुरुषोत्तम क्षेत्र&#39; कहा जाता है। चूंकि इस मास के अधिपति भगवान पुरुषोत्तम (विष्णु) हैं, इसलिए जगन्नाथ जी के दर्शन करना इस समय सर्वोत्तम माना जाता है।</p>
<p>
	<strong>क्या करें: </strong>महाप्रभु जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र जी के दर्शन करें और पवित्र महोदधि (पुरी का समुद्र) में स्नान करें।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/purushottam-maas-2026-do-durlabh-ekadashi-vrat-mahatva-126051600014_1.html" target="_blank">3 वर्ष बाद आई हैं पुरुषोत्तम मास की ये 2 दुर्लभ एकादशियां, व्रत रखना न भूलें</a></strong></p>
</p>
<h3>
	3. तीर्थराज प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)</h3>
<p>
	प्रयागराज को सभी तीर्थों का राजा कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि अधिक मास के दौरान देश के सभी पवित्र तीर्थ अदृश्य रूप से प्रयागराज में आकर निवास करते हैं।</p>
<p>
	<strong>क्या करें: </strong>त्रिवेणी संगम (गंगा, यमुना और सरस्वती) पर स्नान, दान और घाट पर बैठकर विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. मोक्षनगरी काशी (वाराणसी, उत्तर प्रदेश)</h3>
<p>
	यूं तो काशी भगवान शिव की नगरी है, लेकिन मलमास या पुरुषोत्तम मास में यहां के &#39;मणिकर्णिका घाट&#39; और &#39;विष्णु चरणपादुका&#39; के दर्शन का विशेष महत्व है। काशी में इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान करने से जीवन के सभी पाप धुल जाते हैं।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/religious-stories/mythological-significance-and-legend-of-purushottam-maas-126042700050_1.html" target="_blank">पुरुषोत्तम मास का पौराणिक महत्व और कथा</a></strong></p>
</p>
<h3>
	5. हरिहर क्षेत्र और सोनपुर (बिहार)</h3>
<p>
	बिहार का हरिहर क्षेत्र (गंडक और गंगा का संगम) पुरुषोत्तम मास के लिए बेहद पवित्र माना जाता है। &#39;हरि&#39; यानी विष्णु और &#39;हर&#39; यानी शिव; इन दोनों की संयुक्त ऊर्जा इस स्थान पर मौजूद है। यहां मलमास के दौरान स्नान और दीपदान करने की सदियों पुरानी परंपरा है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	यात्रा न कर पाएं, तो घर पर कैसे पाएं तीर्थ का पुण्य?</h3>
<p>
	यदि किसी कारणवश आप लंबी यात्रा पर नहीं जा सकते, तो शास्त्रों में घर पर ही तीर्थ का पुण्य पाने के उपाय बताए गए हैं:</p>
<p>
	<strong>पवित्र नदियों का स्मरण: </strong>अपने घर में स्नान के जल में थोड़ा सा गंगाजल मिलाएं और स्नान करते समय &#39;गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती...&#39; मंत्र का जप करें। इससे घर पर ही पवित्र नदियों में स्नान का पुण्य मिलता है।</p>
<p>
	<strong>अपने शहर के विष्णु मंदिर जाएं:</strong> पुरुषोत्तम मास में अपने निवास स्थान के पास स्थित किसी भी लक्ष्मी-नारायण, श्री कृष्ण या राम मंदिर में जाकर दर्शन करें, दीपदान करें और गीता का पाठ करें।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/religious-article/significance-of-purushottam-maas-126050600007_1.html" target="_blank">Purushottam Maas: पुरुषोत्तम मास की महिमा (पुरुषोत्तम मास महात्म्य), जानें मुख्य 6 बिंदु</a></strong></p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 18 May 2026 14:21:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 18 May 2026 14:29:39 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Hindu Religion]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[पुरुषोत्तम मास 2026: कौन से मंत्र, पाठ और चालीसा दिलाते हैं अपार पुण्य और सुख-समृद्धि?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/purushottam-maas-2026-mantra-path-aur-chalisa-ke-labh-126051600036_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/purushottam-maas-2026-mantra-path-aur-chalisa-ke-labh-126051600036_1.html</guid>
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      <description><![CDATA[पुरुषोत्तम मास (अधिकमास) साक्षात भगवान विष्णु का महीना माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस महीने में की गई भक्ति का फल सामान्य महीनों की तुलना में अनंत गुना अधिक मिलता है। यदि आप इस पावन महीने में अपनी राशि, समय या रुचि के अनुसार नीचे दिए गए पाठ, ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="lord vishnu purushottam maas" class="imgCont" height="800" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/16/full/1778934408-0228.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="lord vishnu purushottam maas" width="1200" /></p>
	</p>
	पुरुषोत्तम मास (अधिकमास) साक्षात भगवान विष्णु का महीना माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस महीने में की गई भक्ति का फल सामान्य महीनों की तुलना में अनंत गुना अधिक मिलता है। यदि आप इस पावन महीने में अपनी राशि, समय या रुचि के अनुसार नीचे दिए गए पाठ, मंत्र या चालीसा में से किसी एक का भी नियमित पालन करते हैं, तो आपको अपार मानसिक शांति, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होगी। यहां पुरुषोत्तम मास के लिए सबसे प्रभावशाली पाठ, मंत्र और चालीसा की सूची दी गई है:-</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/other-festivals/adhik-maas-2023-puja-path-123072200070_1.html" target="_blank">अधिकमास में कौन से पाठ, मंत्र और चालीसा देते हैं लाभ</a></strong></p>
</p>
<h3>
	1. महालाभ देने वाले मुख्य &#39;पाठ&#39; (Holy Texts)</h3>
<p>
	यदि आपके पास समय है, तो इस महीने में नीचे दिए गए ग्रंथों या अध्यायों का पाठ अवश्य करना चाहिए:</p>
<p>
	<strong>श्रीमद्भगवद्गीता का पुरुषोत्तम योग (15वां अध्याय): </strong>इस पूरे महीने में गीता के 15वें अध्याय (जिसे पुरुषोत्तम योग कहा जाता है) का पाठ करना सबसे उत्तम माना गया है। यह जीवन के सभी संकटों को काटता है।</p>
<p>
	<strong>विष्णुसहस्रनाम स्तोत्र</strong>: भगवान विष्णु के 1000 नामों का यह पाठ घर की नकारात्मक ऊर्जा और दरिद्रता को जड़ से मिटा देता है।</p>
<p>
	<strong>श्रीमद्भागवत महापुराण या श्री रामचरितमानस:</strong> इस महीने में भागवत कथा सुनना या रामचरितमानस का नियमित पाठ करना सीधे बैकुंठ धाम की प्राप्ति कराता है।</p>
<p>
	<strong>गजेंद्र मोक्ष पाठ: </strong>यदि आप कर्ज के जाल में फंसे हैं या किसी बड़े कानूनी/स्वास्थ्य संकट से जूझ रहे हैं, तो रोज सुबह गजेंद्र मोक्ष का पाठ करें।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/other-festivals/adhik-maas-2026-dos-and-donts-126051500046_1.html" target="_blank">Adhika Maas 2026: 17 मई से पुरुषोत्तम मास, ज्येष्ठ अधिकमास में पुण्य लाभ कैसे पाएं और क्या टालें?</a></strong></p>
</p>
<h3>
	2. चमत्कारी और सरल &#39;मंत्र&#39; (Powerful Mantras)</h3>
<p>
	इस महीने में तुलसी की माला या करमाला (उंगलियों) से इन मंत्रों का जाप करें। कम से कम 1 माला (108 बार) रोज जपें:</p>
<p>
	<strong>पुरुषोत्तम मास का मूल मंत्र:-</strong> गोवर्धनधरं वन्दे गोपालं गोपरूपिणम्। गोकुलोत्सवमीशानं गोविन्दं गोपिकाप्रियम्॥</p>
<p>
	<strong>महामंत्र (इच्छा पूर्ति के लिए): </strong>ॐ नमो भगवते वासुदेवाय</p>
<p>
	<strong>हरे कृष्ण महामंत्र (कलयुग के पापों से मुक्ति के लिए):</strong> हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥</p>
<p>
	<strong>विष्णु गायत्री मंत्र (बुद्धि और ऐश्वर्य के लिए):</strong> ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. फलदायी &#39;चालीसा&#39; (Devotional Hymns)</h3>
<p>
	जो लोग बहुत लंबे पाठ या कठिन मंत्रों का उच्चारण नहीं कर सकते, उनके लिए चालीसा का पाठ सबसे सरल और सर्वोत्तम माध्यम है:</p>
<p>
	<strong>श्री विष्णु चालीसा:</strong> इसका नियमित पाठ करने से जीवन में सुख, समृद्धि और वैभव आता है।</p>
<p>
	<strong>श्री कृष्ण चालीसा: </strong>संतान सुख, मानसिक शांति और भक्ति की प्राप्ति के लिए इसका पाठ करें।</p>
<p>
	<strong>श्री राम चालीसा: </strong>पारिवारिक कलह को दूर करने और जीवन में मर्यादा व अनुशासन लाने के लिए यह बेहद प्रभावी है।</p>
<p>
	<strong>श्री महालक्ष्मी चालीसा: </strong>चूंकि लक्ष्मी जी भगवान विष्णु की अर्धांगिनी हैं, इसलिए पुरुषोत्तम मास में विष्णु जी के साथ लक्ष्मी चालीसा पढ़ने से आर्थिक तंगी हमेशा के लिए दूर हो जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	पुरुषोत्तम मास का स्वर्णिम नियम (जरूर ध्यान रखें)</h3>
<p>
	इस महीने में केवल पाठ या मंत्र पढ़ना ही काफी नहीं है। इसके साथ दीपदान (तुलसी जी के पास या मंदिर में दीया जलाना), पीली वस्तुओं का दान (चना दाल, पीले कपड़े, केले या आम) और सात्विक जीवन (क्रोध, झूठ और तामसिक भोजन का त्याग) अपनाने से इन पाठ और मंत्रों का असर हजार गुना तेज हो जाता है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Sat, 16 May 2026 17:50:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 16 May 2026 17:57:01 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Hindu Religion]]></category>
      <authorname>अनिरुद्ध जोशी</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[अधिकमास 2026: इन 33 देवताओं की पूजा से मिलता है शुभ फल, पूरे साल बनी रहती है सुख-समृद्धि]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/adhikmaas-2026-mein-33-devtaon-ki-pooja-se-milta-hai-shubh-phal-126051600030_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/adhikmaas-2026-mein-33-devtaon-ki-pooja-se-milta-hai-shubh-phal-126051600030_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/16/thumb/1_1/1778925889-8652.jpg"/>
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      <description><![CDATA[क्या आप जानते हैं कि हमारी काल-गणना (Calendar) सिर्फ तारीखें नहीं बदलती, बल्कि हर तीन साल में हमें आध्यात्मिक रूप से रिचार्ज होने का एक जादुई मौका देती है? जी हाँ, इसे ही हम 'अधिकमास' या 'पुरुषोत्तम मास' कहते हैं। इस साल यह अनूठा और पवित्र कालखंड 17 ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="" class="imgCont" height="851" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/16/full/1778925889-8652.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="Which Deities are Worshipped during Purushottam Mas" width="1200" /></p>
	</p>
	क्या आप जानते हैं कि हमारी काल-गणना (Calendar) सिर्फ तारीखें नहीं बदलती, बल्कि हर तीन साल में हमें आध्यात्मिक रूप से रिचार्ज होने का एक जादुई मौका देती है? जी हाँ, इसे ही हम &#39;अधिकमास&#39; या &#39;पुरुषोत्तम मास&#39; कहते हैं। इस साल यह अनूठा और पवित्र कालखंड 17 मई से 15 जून 2026 तक रहने वाला है। आइए जानते हैं इस महीने के पीछे का अनोखा विज्ञान, इसकी दिलचस्प कहानी और उन 33 दिव्य शक्तियों के बारे में, जो आपके पूरे साल को खुशियों से भर सकती हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	क्यों आता है यह अतिरिक्त महीना? (समय का संतुलन)</h3>
<p>
	यह कोई अंधविश्वास नहीं, बल्कि शुद्ध खगोल विज्ञान है। दरअसल, सूर्य और चंद्रमा की चाल में हर साल 11 दिनों का अंतर आ जाता है। अगर इस अंतर को ऐसे ही छोड़ दिया जाए, तो हमारे मौसम और त्योहारों का संतुलन पूरी तरह बिगड़ जाएगा। इसी गैप को भरने के लिए प्रकृति हर तीसरे साल में एक अतिरिक्त महीना जोड़ देती है, जिसे हम अधिकमास कहते हैं। इस तरह 12 महीनों का साल, इस बार 13 महीनों का महावर्ष बन जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	जब &#39;मलमास&#39; बना &#39;पुरुषोत्तम मास&#39;</h3>
<p>
	एक बेहद दिलचस्प पौराणिक कथा है कि शुरुआत में इस अतिरिक्त महीने का कोई स्वामी (भगवान) नहीं था, इसलिए इसे लोग &#39;मलमास&#39; कहकर इसकी उपेक्षा करते थे। तब इस महीने ने भगवान विष्णु की शरण ली। श्रीहरि ने दया भाव दिखाते हुए न केवल इसे अपना सबसे प्रिय नाम &#39;पुरुषोत्तम&#39; दिया, बल्कि इसके अधिपति देवता भी बन गए। यही वजह है कि इस पूरे महीने में भगवान विष्णु के &#39;नृसिंह अवतार&#39;, श्री राम कथा और श्रीमद्भगवद्गीता के पाठ का माहौल चारों तरफ गूंजने लगता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	श्रीहरि के वे 33 रूप, जो चमकाएंगे आपकी किस्मत</h3>
<p>
	धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस विशेष महीने के हर दिन भगवान विष्णु के 33 अलग-अलग स्वरूपों की आराधना की जाती है। माना जाता है कि इन नामों के सुमिरन मात्र से जीवन के सारे संकट दूर हो जाते हैं। ये दिव्य नाम हैं:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	विष्णु, जिष्णु, महाविष्णु, हरि, कृष्ण, अधोक्षज, केशव, माधव, राम, अच्युत, पुरुषोत्तम, गोविंद, वामन, श्रीश, श्रीकांत, नारायण, मधुरिपु, अनिरुद्ध, त्रिविक्रम, वासुदेव, जगतयोनि, अनंत, विश्वाक्षिभूणम्, शेषशायी, संकर्षण, प्रद्युम्न, दैत्यारि, विश्वतोमुख, जनार्दन, धरावास, दामोदर, अघार्दन और श्रीपति।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	स्वयं भगवान नृसिंह का वरदान: "कोई गरीब नहीं रहेगा"</h3>
<p>
	शास्त्रों में साफ़ लिखा है कि स्वयं भगवान नृसिंह ने इस महीने को वरदान देते हुए कहा था— "अब से मैं इस मास का स्वामी हूँ और इसके नाम से सारा संसार पवित्र होगा। इस महीने में जो भी भक्ति, जप, तप और दान के जरिए मुझे प्रसन्न करेगा, दरिद्रता कभी उसके दरवाजे पर दस्तक नहीं देगी। उसकी हर मनोकामना पूरी होगी।"</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>चलते-चलते...</strong></p>
<p>
	अधिकमास का यह समय किसी उत्सव से कम नहीं है। यह भागदौड़ भरी जिंदगी से थोड़ा ठहरकर, खुद को भीतर से शुद्ध करने और पुण्य कमाने का &#39;बोनस टाइम&#39; है। तो इस बार 17 मई से शुरू हो रहे इस पावन महीने में जप, तप और दान का हाथ थामिए, और अपने पूरे साल को सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर कर लीजिए!</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Sat, 16 May 2026 15:32:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 16 May 2026 15:35:07 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Hindu Religion]]></category>
      <authorname>अनिरुद्ध जोशी</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[पुरुषोत्तम मास का पौराणिक महत्व और कथा]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/religious-stories/mythological-significance-and-legend-of-purushottam-maas-126042700050_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/27/thumb/1_1/1777287998-8136.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/27/thumb/1_1/1777287998-8136.jpg</image>
      <description><![CDATA[Purushottam Maas Mahatmya aur katha: साल 2026 में ज्येष्ठ माह में पुरुषोत्तम मास का योग बन रहा है। इसे अधिकमास भी कहते हैं। 17 मई 2026 प्रारंभ होकर यह 15 जून 2026 को समाप्त होगा। इसके तुरंत बाद निज ज्येष्ठ मास (शुद्ध ज्येष्ठ) शुरू होगा, जो 13 जुलाई ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Purushottam Maas Mahatmya aur katha" class="imgCont" height="655" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/27/full/1777287998-8136.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="Purushottam Maas Mahatmya aur katha" width="1200" /></p>
	</p>
	Purushottam Maas Mahatmya aur katha: साल 2026 में ज्येष्ठ माह में पुरुषोत्तम मास का योग बन रहा है। इसे अधिकमास भी कहते हैं। 17 मई 2026 प्रारंभ होकर यह 15 जून 2026 को समाप्त होगा। इसके तुरंत बाद निज ज्येष्ठ मास (शुद्ध ज्येष्ठ) शुरू होगा, जो 13 जुलाई 2026 तक चलेगा। चलिए जानते हैं पुरुषोत्तम मास का महत्व और पौराणिक कथा। </p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/other-festivals/adhik-maas-mein-kya-kare-kya-nahi-126042100032_1.html" target="_blank">कब से प्रारंभ होगा ज्येष्ठ अधिकमास, इस माह में क्या करें और क्या नहीं?</a></strong></p>
</p>
<h3>
	पुरुषोत्तम मास का महत्व:</h3>
<p>
	सूर्य के धनु या मीन राशि में गोचर के दौरान जो समय रहता है उसे मलमास या खरमास कहते हैं लेकिन हर 3 साल में चंद्रमास के बढ़े हुए दिनों को सौरमास में समाहित करने के लिए एक अतिरिक्त मास या महीना जोड़ा जाता है जिसे अधिकमास कहते हैं। इसे पहले मलमास और बाद में पुरुषोत्तम मास कहा जाने लगा।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	इस मास में किए गए दान, पुण्य, स्नान आदि सभी धार्मिक आयोजन पुण्य फलदायी होने के साथ ही ये आपको दूसरे माहों की अपेक्षा करोड़ गुना अधिक फल देने वाले माने गए हैं। पुरुषोत्तम मास में सभी नियम अपने सामर्थ्य अनुसार करना चाहिए। जितना हो सके उतना संयम यानी ब्रह्मचर्य का पालन, फलों का भक्षण, शुद्धता, पवित्रता, ईश्वर आराधना, एकासना, देवदर्शन, तीर्थयात्रा आदि अवश्य करना चाहिए। </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	इस माह में अधिक मास के 33 देवताओं की पूजा का महत्व है- </h3>
<p>
	विष्णु, जिष्णु, महाविष्णु, हरि, कृष्ण, भधोक्षज, केशव, माधव, राम, अच्युत, पुरुषोत्तम, गोविंद, वामन, श्रीश, श्रीकांत, नारायण, मधुरिपु, अनिरुद्ध, त्रीविक्रम, वासुदेव, यगत्योनि, अनन्त, विश्वाक्षिभूणम्, शेषशायिन, संकर्षण, प्रद्युम्न, दैत्यारि, विश्वतोमुख, जनार्दन, धरावास, दामोदर, मघार्दन एवं श्रीपति जी की पूजा से बड़ा लाभ होता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	धर्म ग्रंथों के अनुसार श्री नृःसिंह भगवान ने इस मास को अपना नाम देकर कहा है कि अब मैं इस मास का स्वामी हो गया हूं और इसके नाम से सारा जगत पवित्र होगा। इस महीने में जो भी मुझे प्रसन्न करेगा, वह कभी गरीब नहीं होगा और उसकी हर मनोकामना पूरी होगी। इसलिए इस मास के दौरान जप, तप, दान से अनंत पुण्यों की प्राप्ति होती है।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/there-will-be-adhik-maas-in-the-new-year-2026-know-what-happens-125121800045_1.html" target="_blank">Adhik Maas: नववर्ष 2026 में होगा &#39;अधिकमास&#39;, जानिए क्या होता है?</a></strong></p>
</p>
<h3>
	पुरुषोत्तम मास की पौराणिक कथा:</h3>
<p>
	कहते हैं कि दैत्याराज हिरण्यकश्यप ने अमर होने के लिए तप किया ब्रह्माजी प्रकट होकर वरदान मांगने का कहते हैं तो वह कहता है कि आपके बनाए किसी भी प्राणी से मेरी मृत्यु ना हो, न मनुष्य से और न पशु से। न दैत्य से और न देवताओं से। न भीतर मरूं, न बाहर मरूं। न दिन में न रात में। न आपके बनाए 12 माह में। न अस्त्र से मरूं और न शस्त्र से। न पृथ्‍वी पर न आकाश में। युद्ध में कोई भी मेरा सामना न करे सके। आपके बनाए हुए समस्त प्राणियों का मैं एकक्षत्र सम्राट हूं। तब ब्रह्माजी ने कहा- तथास्थु।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	फिर जब हिरण्यकश्यप के अत्याचार बढ़ गए और उसने कहा कि विष्णु का कोई भक्त धरती पर नहीं रहना चाहिए तब श्री‍हरि की माया से उसका पुत्र प्रहलाद ही भक्त हुआ और उसकी जान बचाने के लिए प्रभु ने सबसे पहले 12 माह को 13 माह में बदलकर अधिक मास बनाया। इसके बाद उन्होंने नृसिंह अवतार लेकर शाम के समय देहरी पर अपने नाखुनों से उसका वध कर दिया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	इसके बाद चूंकि हर चंद्रमास के हर मास के लिए एक देवता निर्धारित हैं परंतु इस अतिरिक्त मास का अधिपति बनने के लिए कोई भी देवता तैयार ना हुआ। ऐसे में ऋषि-मुनियों ने भगवान विष्णु से आग्रह किया कि वे ही इस मास का भार अपने उपर लें और इसे भी पवित्र बनाएं तब भगवान विष्णु ने इस आग्रह को स्वीकार कर लिया और इस तरह यह मलमास के साथ पुरुषोत्तम मास भी बन गया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	ऐसी भी मान्यता है कि स्वामीविहीन होने के कारण अधिकमास को &#39;मलमास&#39; कहने से उसकी बड़ी निंदा होने लगी। इस बात से दु:खी होकर मलमास श्रीहरि विष्णु के पास गया और उनको अपनी व्यथा-कथा सुनाई। तब श्रीहरि विष्णु उसे लेकर गोलोक पहुचें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	गोलोक में भगवान श्रीकृष्ण ने मलमास की व्यथा जानकर उसे वरदान दिया- अब से मैं तुम्हारा स्वामी हूं। इससे मेरे सभी दिव्य गुण तुम में समाविष्ट हो जाएंगे। मैं पुरुषोत्तम के नाम से विख्यात हूं और मैं तुम्हें अपना यही नाम दे रहा हूं। आज से तुम मलमास के बजाय पुरुषोत्तम मास के नाम से जाने जाओगे। इसीलिए प्रति तीसरे वर्ष में तुम्हारे आगमन पर जो व्यक्ति श्रद्धा-भक्ति के साथ कुछ अच्छे कार्य करेगा, उसे कई गुना पुण्य मिलेगा।</p>
<p>
	इस प्रकार भगवान ने अनुपयोगी हो चुके अधिकमास को धर्म और कर्म के लिए उपयोगी बना दिया। अत: इस दुर्लभ पुरुषोत्तम मास में स्नान, पूजन, अनुष्ठान एवं दान करने वाले को कई पुण्य फल की प्राति होगी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Sat, 16 May 2026 07:33:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 16 May 2026 09:12:41 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[religious stories]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Guru Pushya Yoga 2026: 21 मई 2026 को बनेगा गुरु-पुष्य योग का शुभ संयोग, जानें क्यों हैं खास]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/guru-pushya-yoga-may-2026-126051500052_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/guru-pushya-yoga-may-2026-126051500052_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/15/thumb/1_1/1778844557-5488.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Guru Pushya Yoga benefits: वैदिक ज्योतिष में कहा गया है कि गुरु-पुष्य योग के दिन की गई पूजा, दान, व्रत और अन्य धार्मिक कार्य विशेष फल प्रदान करते हैं। गुरु-पुष्य योग साल में कुछ ही बार बनता है, इसलिए इसे अत्यंत दुर्लभ और शुभ माना जाता है।]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="The auspicious conjunction of Guru-Pushya Yoga is forming on May 21, 2026. The picture shows Devguru Jupiter, planets and stars, shopping and worship materials to be done during Pushya Yoga" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/15/full/1778844557-5488.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>Guru Pushya Yoga significance: </strong>21 मई 2026 का दिन ज्योतिषीय दृष्टि से अत्यंत दुर्लभ और शुभ होने जा रहा है। इस दिन &#39;गुरु-पुष्य योग&#39; का महासंयोग बन रहा है। हिंदू धर्म में पुष्य नक्षत्र को &#39;नक्षत्रों का राजा&#39; माना जाता है, और जब यह गुरुवार के दिन पड़ता है, तो इसे &#39;गुरु-पुष्य योग&#39; कहते हैं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/other-festivals/adhik-maas-2026-dos-and-donts-126051500046_1.html" target="_blank">Adhika Maas 2026: 17 मई से पुरुषोत्तम मास, ज्येष्ठ अधिकमास में पुण्य लाभ कैसे पाएं और क्या टालें?</a></strong></p>
<h3>
	 </h3>
<h3>
	यहां जानिए क्यों यह दिन इतना खास है और इसमें क्या करना शुभ रहेगा:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. गुरु-पुष्य योग क्यों है इतना प्रभावशाली?</h3>
<p>
	शास्त्रों के अनुसार, पुष्य नक्षत्र के अधिष्ठाता देवता बृहस्पति (गुरु) हैं और इसके स्वामी शनि देव हैं। चूंकि पुष्य नक्षत्र खुद में शुभ है और गुरुवार भी भगवान विष्णु व गुरु बृहस्पति का दिन है, इसलिए इन दोनों का मिलन एक &#39;अक्षय&#39; फल देने वाला योग बनाता है। यदि आप कोई बड़ी खरीदारी टाल रहे थे या घर-गाड़ी लेने का मन बना रहे थे, तो 21 मई 2026 का दिन कैलेंडर में मार्क कर लें। यह दिन आपकी आर्थिक उन्नति के द्वार खोल सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. 21 मई 2026 का विशेष संयोग</h3>
<p>
	<strong>गुरु-पुष्य योग: 21 मई 2026</strong></p>
<p>
	<strong>गुरु पुष्य नक्षत्र का प्रारंभ- 21 मई 2026 को 04:12 ए एम से</strong></p>
<p>
	<strong>पुष्य नक्षत्र का अंत: 22 मई 2026 को 02:49 ए एम पर।</strong><br />
	 </p>
<p>
	<strong>तिथि:</strong> हिंदू कैलेंडर के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी।</p>
<p>
	इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग, रवि योग भी बन रहा है।</p>
<p>
	<strong>विशेषता:</strong> इस दिन चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में होंगे, जो पुष्य नक्षत्र के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अमृत सिद्धि योग: कई बार इस दिन गुरु-पुष्य के साथ अमृत सिद्धि योग भी बनता है, जो इसे किसी भी नए कार्य की शुरुआत के लिए &#39;अबूझ मुहूर्त&#39; अर्थात् बिना पंचांग देखे किया जाने वाला कार्य बना देता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. इस दिन क्या करना होता है शुभ?</h3>
<p>
	<strong>स्वर्ण (Gold) की खरीदारी: </strong>गुरु-पुष्य योग में सोना खरीदना सबसे शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन खरीदा गया सोना पीढ़ी दर पीढ़ी बना रहता है और समृद्धि लाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>निवेश (Investment):</strong> प्रॉपर्टी, शेयर बाजार या नए व्यापार में निवेश के लिए यह दिन सर्वश्रेष्ठ है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>धार्मिक कार्य: </strong>इस दिन गुरु मंत्र का जाप, दीक्षा लेना या तीर्थ यात्रा पर जाना आत्मिक शांति प्रदान करता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>बहीखाता की शुरुआत: </strong>व्यापारी वर्ग इस दिन नए खाते या नई दुकान की शुरुआत करना पसंद करते हैं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/religious-article/significance-of-purushottam-maas-126050600007_1.html" target="_blank">Purushottam Maas: पुरुषोत्तम मास की महिमा (पुरुषोत्तम मास महात्म्य), जानें मुख्य 6 बिंदु</a></strong></p>
<h3>
	 </h3>
<h3>
	4. इन कार्यों से मिलेगा महालाभ</h3>
<p>
	<strong>विष्णु लक्ष्मी पूजन: </strong>इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करने से दरिद्रता दूर होती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>श्री यंत्र की स्थापना: </strong>अपने घर या ऑफिस में &#39;श्री यंत्र&#39; स्थापित करने के लिए यह सबसे सिद्ध मुहूर्त है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>पीली वस्तुओं का दान:</strong> चने की दाल, गुड़, पीले वस्त्र या हल्दी का दान करने से कुंडली में गुरु ग्रह मजबूत होता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. क्या न करें?</h3>
<p>
	माना जाता है कि पुष्य नक्षत्र को ब्रह्मा जी का श्राप मिला था, इसलिए इस अत्यंत शुभ योग में भी &#39;विवाह&#39; (Marriage) की रस्में नहीं की जाती हैं। खरीदारी और निवेश के लिए यह उत्तम है, लेकिन विवाह संस्कार के लिए अन्य मुहूर्तों को प्राथमिकता दी जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>टिप:</strong> इस दिन शाम को उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में घी का दीपक जलाना सौभाग्य वर्धक माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vat-savitri-vrat/vat-savitri-vrat-a-great-fast-for-married-women-learn-10-things-126051500005_1.html" target="_blank">वट सावित्री व्रत: सुहागिनों के लिए महाव्रत, जानें पूजा से जुड़ी 10 अनसुनी और जरूरी बातें vat savitri vrat 2026</a></strong></p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 15 May 2026 17:09:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 15 May 2026 17:09:27 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[astrology articles]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Adhika Maas 2026: 17 मई से पुरुषोत्तम मास, ज्येष्ठ अधिकमास में पुण्य लाभ कैसे पाएं और क्या टालें?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/adhik-maas-2026-dos-and-donts-126051500046_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/15/thumb/1_1/1778842047-4424.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/15/thumb/1_1/1778842047-4424.jpg</image>
      <description><![CDATA[Purushottam Maas 2026: वर्ष 2026 में हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिकमास, जिसे पुरुषोत्तम मास या मलमास भी कहा जाता है का अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है। इस वर्ष ज्येष्ठ मास की अधिकता रहेगी यानी इस वर्ष दो ज्येष्ठ मास होंगे। वर्ष 2026 में पुरुषोत्तम ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="The picture shows the photo of Sri Lakshmi Narayan, the protector of the universe, along with information about Adhik Maas 2026 starting from May 17" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/15/full/1778842047-4424.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Adhik Maas Festival 2026:</strong> ज्येष्ठ मास का अधिकमास हिन्दू पंचांग के अनुसार एक अतिरिक्त महीना होता है जो सूर्य और चंद्रमा के गमन के अंतर से बनता है। इसे &#39;पुरुषोत्तम मास&#39; भी कहा जाता है। इसे धार्मिक रूप से बहुत शुभ माना जाता है, विशेषकर पाप निवारण और पुण्य कमाने के लिए। वर्ष 2026 में यह माह कब से होगा आरंभ आइए यहां जानते हैं इस समयावधि में क्या करें और क्या नहीं...<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/religious-article/significance-of-purushottam-maas-126050600007_1.html" target="_blank">Purushottam Maas: पुरुषोत्तम मास की महिमा (पुरुषोत्तम मास महात्म्य), जानें मुख्य 6 बिंदु</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	इस माह की तिथियां और नियम इस प्रकार हैं:</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>ज्येष्ठ अधिकमास 2026 की तिथियां</strong></p>
<p>
	<strong>प्रारंभ: 17 मई 2026, रविवार</strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>समाप्त: 15 जून 2026, सोमवार</strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	अधिकमास होने के कारण इस वर्ष ज्येष्ठ का महीना लगभग 60 दिनों का होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस माह के स्वामी स्वयं भगवान विष्णु/ पुरुषोत्तम हैं, इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	कैसे पाएं पुण्य लाभ, क्या-क्या करें?</h3>
<p>
	अधिकमास आध्यात्मिक उन्नति और पुण्य संचय का समय है। इस दौरान ये कार्य करना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>विष्णु उपासना:</strong> भगवान विष्णु और उनके अवतारों, विशेषकर श्रीकृष्ण की पूजा करें। &#39;ॐ नमो भगवते वासुदेवाय&#39; मंत्र का निरंतर जाप करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>श्रीमद्भागवत कथा</strong>: इस माह में भागवत कथा का श्रवण या पाठ करना मोक्ष प्रदायक माना गया है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>दान-पुण्य: </strong>अन्न, जल, वस्त्र और दीपदान का विशेष महत्व है। ज्येष्ठ की भीषण गर्मी को देखते हुए मिट्टी का घड़ा/ मटका, सत्तू, छाता और पंखे का दान करना महापुण्य देता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>तीर्थ स्नान: </strong>यदि संभव हो तो पवित्र नदियों में स्नान करें। घर पर ही नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी फलदायी है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>ब्रह्मचर्य और सात्विकता:</strong> इस पूरे माह में सात्विक भोजन ग्रहण करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/saal-me-2-bar-kyon-aata-hai-kharmas-malamasa-adhikmas-purushottam-mas-126031100035_1.html" target="_blank">साल में 2 बार क्यों आता है खरमास? जानिए मलमास, अधिकमास और पुरुषोत्तम मास का रहस्य</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	क्या टालें/ क्या-क्या न करें?</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	अधिकमास को &#39;मलमास&#39; भी कहा जाता है, जिसमें भौतिक और मांगलिक कार्यों की मनाही होती है:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मांगलिक कार्य वर्जित: </strong>इस दौरान विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत/ जनेऊ, गृह प्रवेश और कर्णवेध जैसे संस्कार नहीं किए जाते।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>नए निवेश और व्यापार: </strong>नई दुकान खोलना, नया व्यवसाय शुरू करना या बड़ी अचल संपत्ति (मकान, प्लॉट) खरीदना टालना चाहिए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>तामसिक भोजन का त्याग: </strong>मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज जैसे तामसिक पदार्थों का सेवन भूलकर भी न करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	विवाद से बचें: किसी का अपमान न करें, झूठ न बोलें और घर में क्लेश न होने दें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>विशेष टिप: </strong>इस महीने में कांसे के बर्तन में मालपुआ रखकर दान करना भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इससे दरिद्रता दूर होती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/religious-stories/mythological-significance-and-legend-of-purushottam-maas-126042700050_1.html" target="_blank">पुरुषोत्तम मास का पौराणिक महत्व और कथा</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 15 May 2026 16:40:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 15 May 2026 16:56:36 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Other Festivals]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Vat Savitri Vrat Katha: वट सावित्री व्रत पर पढ़ें ये महत्वपूर्ण पौराणिक कथा]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/vat-savitri-vrat/vat-savitri-katha-in-hindi-126051500019_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/vat-savitri-vrat/vat-savitri-katha-in-hindi-126051500019_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/15/thumb/1_1/1778834865-0853.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/15/thumb/1_1/1778834865-0853.jpg</image>
      <description><![CDATA[वट सावित्री व्रत जिसे सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुखद वैवाहिक जीवन और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं। सावित्री और सत्यवान की कथा इस व्रत का आधार है, इस कथा को पढ़े बगैर यह व्रत पूर्ण नहीं माना जाता है। यहां पर पढ़ें पौराणिक और ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p>
		<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
			<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
				<img align="center" alt="Vat Savitri Vrat Katha:In the picture, Satyavan is lying beneath a banyan tree; his wife is seated at his head with her hands folded in prayer, and Lord Yamraj is standing nearby." class="imgCont" height="675" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/15/full/1778834865-0853.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="Vat Savitri Vrat Katha" width="1200" /></p>
		</p>
		वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण और पवित्र व्रतों में से एक है, जिसे सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुखद वैवाहिक जीवन और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए रखती हैं। सावित्री और सत्यवान की कथा इस व्रत का आधार है, इस कथा को पढ़े बगैर यह व्रत पूर्ण नहीं माना जाता है। यहां पर पढ़ें पौराणिक और प्रमाणिक कथा।</p>
	<p>
		<p>
			<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vat-savitri-vrat/at-savitri-vrat-arth-puja-vidhi-aarti-chalisa-katha-126051500015_1.html" target="_blank">Vat Savitri Vrat: वट सावित्री व्रत का अर्थ, पूजा विधि, आरती, चालीसा और कथा</a></strong></p>
	</p>
	<h3>
		वट सावित्री व्रत की कथा हिंदी में:</h3>
	<p>
		मद्र देश के राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री ने द्युमत्सेन के पुत्र सत्यवान को अपने पति के रूप में चुना। नारद मुनि ने पहले ही सावित्री को चेतावनी दी थी कि सत्यवान अल्पायु हैं और विवाह के ठीक एक साल बाद उनकी मृत्यु हो जाएगी। इसके बावजूद सावित्री ने सत्यवान से विवाह किया और वन में सास-ससुर के साथ रहने लगीं।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		सावित्री को सत्यवान की मृत्यु का दिन पता था, इसलिए उन्होंने तीन दिन पहले ही व्रत (उपवास) शुरू कर दिया था। उस दिन जब सत्यवान वन में लकड़ी काटते समय अचेत होकर गिर पड़े, तो सावित्री ने उन्हें बरगद के पेड़ के नीचे लेटा दिया। उसी समय भैंसे पर सवार होकर यमराज सत्यवान के प्राण लेने आए। सावित्री ने उन्हें पहचाना और सावित्री ने कहा कि आप मेरे सत्यवान के प्राण न लें। यम ने इसे अनदेखा कर उसके पति के प्राण लेकर वे आकाश मार्ग से जाने लगे। सावित्री भी यमराज के पीछे-पीछे चल पड़ीं।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		यमराज यह देखकर आश्चर्य करने लगे की यह स्त्री मेरे पीछे कैसे और किस शक्ति के बल पर आ रही है। यमराज ने सावित्री से कहा कि तुम्हें इस मार्ग पर नहीं आना चाहिए यह अनुचित है। तुम्हें वापस चले जाना चाहिए। यम ने मना किया, मगर वह वापस नहीं लौटी। लेकिन सावित्री अपने निष्ठा और पतिव्रता पर अडिग रही। यमराज ने सावित्री की निष्ठा और बुद्धिमानी से प्रसन्न होकर कहा कि अपने पति के जीवनदान के बदले कोई भी 3 वरदान मांग लो।</p>
	<p>
		<p style="text-align: center;">
			<iframe allow="accelerometer; autoplay; clipboard-write; encrypted-media; gyroscope; picture-in-picture; web-share" allowfullscreen="" frameborder="0" height="315" referrerpolicy="strict-origin-when-cross-origin" src="https://www.youtube.com/embed/yTos38QnwqE?si=7Foa_DxXoixrVjme" title="YouTube video player" width="560"></iframe></p>
		<p>
			<strong>1. सावित्री ने पहले वरदान में सास-ससुर की आंखों की रोशनी और खोया हुआ राज्य मांगा।</strong></p>
		<p>
			<strong>2. दूसरे वरदान में अपने पिता के लिए संतान सुख मांगा।</strong></p>
		<p>
			<strong>3. तीसरे वरदान में अपने लिए 100 पुत्रों की मां बनने का वरदान मांगा।</strong></p>
		<p>
			 </p>
		<p>
			वरदान देते समय यमराज को यह एहसास हुआ कि सत्यवान के बिना सावित्री 100 पुत्रों की मां नहीं बन सकती। सावित्री की चतुराई और पतिव्रता धर्म से प्रसन्न होकर यमराज ने सत्यवान के प्राण लौटा दिए।</p>
		<p>
			 </p>
		<p>
			मान्यता है कि जिस वट (बरगद) के पेड़ के नीचे सावित्री ने अपने पति के प्राण वापस पाए थे, वह वट वृक्ष त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) का निवास स्थान माना जाता है, इसलिए इस दिन वट वृक्ष की पूजा की जाती है।<br />
			<p>
				<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vat-savitri-vrat/vat-savitri-vrat-a-great-fast-for-married-women-learn-10-things-126051500005_1.html" target="_blank">वट सावित्री व्रत: सुहागिनों के लिए महाव्रत, जानें पूजा से जुड़ी 10 अनसुनी और जरूरी बातें vat savitri vrat 2026</a></strong></p>
		</p>
	</p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 15 May 2026 12:32:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 15 May 2026 16:34:52 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Vat Savitri Vrat]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[वट सावित्री व्रत: सुहागिनों के लिए महाव्रत, जानें पूजा से जुड़ी 10 अनसुनी और जरूरी बातें vat savitri vrat 2026]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/vat-savitri-vrat/vat-savitri-vrat-a-great-fast-for-married-women-learn-10-things-126051500005_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/vat-savitri-vrat/vat-savitri-vrat-a-great-fast-for-married-women-learn-10-things-126051500005_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/15/thumb/1_1/1778826346-7492.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/15/thumb/1_1/1778826346-7492.jpg</image>
      <description><![CDATA[vat savitri vrat: वट सावित्री व्रत के संबंध में धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो महिला पूरी श्रद्धा से यह व्रत करती है, उसके पति पर आने वाले हर संकट दूर हो जाते हैं और अकाल मृत्यु का भय टल जाता है। इस व्रत का नाम माता सावित्री के नाम पर पड़ा, क्योंकि ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Women worshipping the banyan tree on the occasion of Vat Savitri fast, pictured holding a puja plate and wrapping a cotton thread around the banyan tree" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/15/full/1778826346-7492.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>vat savitri vrat ki 10 baaten: </strong>ज्येष्ठ का महीना हिंदू धर्म में व्रतों और त्योहारों का संगम लेकर आता है। इन्हीं में से एक सबसे खास पर्व है &#39;वट सावित्री व्रत&#39;। यह व्रत केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि पत्नी के अपने पति के प्रति अटूट विश्वास और प्रेम का प्रतीक है। वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या और पूर्णिमा को रखा जाता है और ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शनि जयंती मनाई जाती है। वर्ष 2026 में वट सावित्री अमावस्या 16 मई, दिन शनिवार को मनाई जाएगी।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/other-festivals/jyeshtha-amavasya-muhurat-and-worship-method-2026-126051300015_1.html" target="_blank">Jyeshtha Amavasya Vrat 2026: ज्येष्ठ अमावस्या व्रत और पूजा विधि</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	अगर आप भी इस साल यह व्रत रखने जा रही हैं, तो पूजन की थाली सजाने से पहले इन 10 खास बातों को जरूर जान लें:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. त्रिदेवों का दिव्य आशीर्वाद</h3>
<p>
	बरगद (वट) के पेड़ को पूजने के पीछे गहरा राज है। पुराणों के अनुसार, इसके मूल (जड़) में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास होता है। इसकी पूजा यानी त्रिदेवों का एक साथ पूजन!</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. एक व्रत, दो अलग तिथियां</h3>
<p>
	क्या आप जानती हैं कि वट सावित्री साल में दो बार मनाया जाता है? उत्तर भारत में इसे ज्येष्ठ अमावस्या को मनाया जाता है, जबकि दक्षिण भारत, महाराष्ट्र और गुजरात में इसे ज्येष्ठ पूर्णिमा (वट पूर्णिमा) के दिन मनाया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. क्षेत्र के अनुसार बदलता उत्साह</h3>
<p>
	जहां उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पंजाब और हरियाणा में अमावस्या वाली वट सावित्री की धूम रहती है, वहीं गुजरात और महाराष्ट्र की महिलाएं पूर्णिमा वाले व्रत को बड़ी श्रद्धा से रखती हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. अकाल मृत्यु को मात देने वाला व्रत</h3>
<p>
	धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो महिला पूरी श्रद्धा से यह व्रत करती है, उसके पति पर आने वाले हर संकट दूर हो जाते हैं और अकाल मृत्यु का भय टल जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. कैलेंडर का &#39;छोटा&#39; सा फेर</h3>
<p>
	भारत में दो मुख्य कैलेंडर चलते हैं- &#39;अमानता&#39; और &#39;पूर्णिमानता&#39;। दोनों में तिथियां वही रहती हैं, बस मनाने का तरीका और समय अलग-अलग क्षेत्रों के हिसाब से बदल जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	6. मन्नत का कच्चा धागा</h3>
<p>
	महिलाएं बरगद के चारों ओर कच्चा सूत या रक्षासूत्र लपेटकर परिक्रमा करती हैं। माना जाता है कि वट वृक्ष में हर मन्नत को पूरा करने की असीम शक्ति होती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	7. सावित्री-सत्यवान: प्रेम की अमर कहानी</h3>
<p>
	इस व्रत का नाम माता सावित्री के नाम पर पड़ा, जिन्होंने यमराज के द्वार से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस खींच लाए थे। इस कथा को सुनने मात्र से महिलाओं को &#39;अखंड सौभाग्य&#39; का आशीर्वाद मिलता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	8. सुख-शांति और लक्ष्मी का वास</h3>
<p>
	सिर्फ लंबी उम्र ही नहीं, बरगद की पूजा से घर में आर्थिक संपन्नता और मानसिक शांति भी आती है। यह पेड़ सकारात्मक ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	9. कौन रख सकता है यह व्रत?</h3>
<p>
	यह इस व्रत की सबसे बड़ी खूबसूरती है। वट सावित्री का व्रत केवल विवाहित महिलाएं ही नहीं, बल्कि शास्त्रानुसार कुमारी, विधवा, संतान की कामना रखने वाली स्त्रियां भी अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए रख सकती हैं।</p>
<h3>
	 </h3>
<h3>
	10. भक्ति का सरल मार्ग</h3>
<p>
	चाहे अमावस्या हो या पूर्णिमा, दोनों ही व्रतों की कथा और उद्देश्य एक समान हैं- अपने परिवार और जीवनसाथी की खुशहाली सुनिश्चित करना।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>खास बात: </strong>वट सावित्री के दिन प्रकृति (पेड़) की पूजा हमें यह संदेश देती है कि हमारा जीवन प्रकृति से जुड़ा है, इसलिए इसका संरक्षण भी हमारा धर्म है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/other-festivals/jyeshtha-amavasya-date-2026-126051300011_1.html" target="_blank">Jyeshtha Amavasya 2026: ज्येष्ठ माह की अमावस्या का क्या है महत्व, जानिए पौराणिक कथा</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 15 May 2026 12:30:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 15 May 2026 12:00:28 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Vat Savitri Vrat]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Banyan tree worship: वट सावित्री व्रत: बरगद के पेड़ में छिपा है अखंड सौभाग्य का रहस्य, जानें धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/vat-savitri-vrat/the-banyan-tree-holds-the-secret-of-eternal-good-fortune-learn-its-religious-and-scientific-significance-126051400008_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/vat-savitri-vrat/the-banyan-tree-holds-the-secret-of-eternal-good-fortune-learn-its-religious-and-scientific-significance-126051400008_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/12/thumb/1_1/1778582522-1139.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/12/thumb/1_1/1778582522-1139.jpg</image>
      <description><![CDATA[Vat Savitri Vrat 2026: भारतीय संस्कृति में वट यानी बरगद को केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि 'अक्षय वट' कहा गया है- एक ऐसा वृक्ष जो कभी नष्ट नहीं होता। वट सावित्री व्रत के पावन अवसर पर सुहागिन महिलाएं बरगद की पूजा कर अपने पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="इमेज में अखंड सौभाग्य और लंबी उम्र का वरदान देने वाला वट वृक्ष तथा बरगद के पेड़ की पूजन करती सुहागिनें" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/12/full/1778582522-1139.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
</p>
<p>
	<strong>Vat Savitri puja:</strong> बरगद का पेड़, जिसे वट वृक्ष भी कहा जाता है, भारतीय संस्कृति और धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है। यह केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि शक्ति, लंबी आयु और स्थायित्व का प्रतीक है। भारतीय धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि बरगद का पेड़ जीवन और समृद्धि का प्रतीक है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	वट सावित्री व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाओं द्वारा किया जाता है। यह व्रत मुख्य रूप से पति की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के लिए रखा जाता है। ज्येष्ठ महीने की अमावस्या तथा ज्येष्ठ पूर्णिमा को यह व्रत मनाया जाता है और इसे वट व्रत या वट सावित्री व्रत भी कहा जाता है। लेकिन क्या आप जानती हैं कि इस पूजा के पीछे का असली दर्शन क्या है?<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vat-savitri-vrat/vat-savitri-vrat-is-the-meaning-of-relationships-changing-126051200036_1.html" target="_blank">Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत: आस्था, तर्क और आधुनिकता का संगम, क्या बदल रहे हैं रिश्तों के मायने?</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	त्रिदेवों की ऊर्जा का केंद्र है वट वृक्ष</h3>
<p>
	शास्त्रों में वट वृक्ष को साक्षात ईश्वरीय रूप माना गया है। स्कंद पुराण और पद्म पुराण के अनुसार:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>जड़ में ब्रह्मा:</strong> सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी इसकी जड़ों में विराजते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मध्य में विष्णु:</strong> तने में जगत के पालनहार भगवान विष्णु का वास है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अग्रभाग में शिव:</strong> शाखाओं में संहारक और कल्याणकारी महादेव वास करते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	यही कारण है कि जब महिलाएं इस वृक्ष की पूजा करती हैं, तो वे एक साथ त्रिदेवों की दिव्य ऊर्जा का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	अमरता और ज्ञान का प्रतीक</h3>
<p>
	वट वृक्ष अपनी विशालता और लंबी आयु के लिए जाना जाता है, इसीलिए इसे अमरत्व का प्रतीक माना गया है। दार्शनिक नजरिए से देखें तो यह ज्ञान और निर्माण का सूचक है। आपको बता दें कि भगवान बुद्ध को भी इसी वृक्ष की छाया में आत्मज्ञान प्राप्त हुआ था। पर्यावरण के लिहाज से भी यह एक &#39;लाइफ सपोर्ट सिस्टम&#39; की तरह काम करता है, जो हवा को शुद्ध कर अनगिनत पक्षियों और जीवों को आश्रय देता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	सिर्फ आस्था ही नहीं, आयुर्वेद का खजाना भी</h3>
<p>
	बरगद का पेड़ औषधीय गुणों की खान है। आयुर्वेद में इसके हर हिस्से (छाल, पत्ते और फल) का विशेष महत्व बताया गया है:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	यह शरीर की कांति (ग्लो) बढ़ाता है और पित्त-कफ जैसे विकारों को दूर करता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	इसकी शीतल प्रकृति बुखार, मूर्च्छा और उल्टी जैसी समस्याओं में राहत देती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	पर्यावरण को शुद्ध रखने में इसकी भूमिका सबसे अहम है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	वट सावित्री व्रत की खास परंपराएं</h3>
<p>
	<strong>परिक्रमा का महत्व:</strong> पूजा के दौरान सूत लपेटते हुए 108 बार परिक्रमा करना अटूट प्रेम और धैर्य का प्रतीक है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>क्षेत्रीय विविधता:</strong> ज्येष्ठ अमावस्या को उत्तर भारत में और ज्येष्ठ पूर्णिमा को महाराष्ट्र व गुजरात में &#39;वट पूर्णिमा&#39; के रूप में धूमधाम से मनाया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>दान का फल:</strong> इस दिन बांस के पंखे और चने-गुड़ का दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है और घर के क्लेश शांत होते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>निष्कर्ष:</strong> वट सावित्री व्रत केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति सम्मान व्यक्त करने और परिवार की खुशहाली के लिए संकल्प लेने का दिन है। सावित्री और सत्यवान की कथा हमें सिखाती है कि दृढ़ इच्छाशक्ति से किसी भी संकट को टाला जा सकता है।<br />
	<br />
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vat-savitri-vrat/10-important-things-every-woman-should-know-about-vat-savitri-vrat-126051400005_1.html" target="_blank">Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत के बारे में 10 महत्वपूर्ण बातें, हर महिला को जानना हैं जरूरी</a></strong></p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 14 May 2026 11:45:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 14 May 2026 11:57:08 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Vat Savitri Vrat]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत के बारे में 10 महत्वपूर्ण बातें, हर महिला को जानना हैं जरूरी]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/vat-savitri-vrat/10-important-things-every-woman-should-know-about-vat-savitri-vrat-126051400005_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/vat-savitri-vrat/10-important-things-every-woman-should-know-about-vat-savitri-vrat-126051400005_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/14/thumb/1_1/1778733172-3227.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/14/thumb/1_1/1778733172-3227.jpg</image>
      <description><![CDATA[Vat Savitri Vrat: वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ माह की अमावस्या को मनाया जाता है, जो सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत श्रद्धा और आस्था का पर्व है। इस दिन बरगद के पेड़ की पूजा का विधान है। माना जाता है कि इसकी जड़ों में ब्रह्मा, तने में विष्णु और शाखाओं में ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="वट सावित्री व्रत पर महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा करते हुए, चित्र में वट वृक्ष, कलश, सूत लपेटते हुए स्त्री, सत्यवान और सावित्री तथा प्रार्थना करती महिला" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/14/full/1778733172-3227.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Vat Savitri Vrat Puja: </strong>ज्येष्ठ माह की अमावस्या को मनाया जाने वाला वट सावित्री व्रत मुख्य रूप से पति की लंबी उम्र और स्वास्थ्य के लिए किया जाता है। इसे पतिव्रता महिलाओं का प्रमुख व्रत माना जाता है। इस व्रत में वट वृक्ष (बरगद का पेड़) की पूजा की जाती है। माना जाता है कि वट वृक्ष में शक्ति और सुख-शांति का प्रतीक है। महिलाएं दिनभर उपवास रखती हैं, यह व्रत भक्ति, संयम और परिवार के प्रति समर्पण का प्रतीक है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vat-savitri-vrat/vat-savitri-vrat-is-the-meaning-of-relationships-changing-126051200036_1.html" target="_blank">Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत: आस्था, तर्क और आधुनिकता का संगम, क्या बदल रहे हैं रिश्तों के मायने?</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	यदि आप यह व्रत रख रही हैं, तो ये 10 बातें आपके लिए जानना बहुत जरूरी हैं:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. व्रत का मुख्य उद्देश्य</h3>
<p>
	यह व्रत पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य के लिए रखा जाता है। पौराणिक मान्यता है कि इसी दिन माता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प से यमराज को पराजित कर पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. वट (बरगद) वृक्ष का महत्व</h3>
<p>
	शास्त्रों के अनुसार वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्मा, तने में विष्णु और शाखाओं में शिव का वास होता है। साथ ही इसकी लटकती हुई जड़ें माता सावित्री का रूप मानी जाती हैं। इसलिए इस वृक्ष की पूजा से त्रिदेवों का आशीर्वाद मिलता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. बांस के पंखे का रहस्य</h3>
<p>
	पूजा सामग्री में बांस का पंखा अनिवार्य है। कथा के अनुसार, जब सत्यवान के प्राण वापस आए, तो सावित्री ने सबसे पहले उन्हें पंखे से हवा की थी। पूजा में बांस के पंखे से सावित्री और सत्यवान को हवा करने की परंपरा है। आज भी महिलाएं पूजा के दौरान वट वृक्ष और अपने पति को पंखे से हवा कर उनकी थकान दूर करने और शीतलता प्रदान करने की कामना करती हैं। बाद में यह पंखा दान भी किया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. कच्चे सूत की परिक्रमा</h3>
<p>
	वट वृक्ष के चारों ओर कच्चा सूत लपेटते हुए 7, 12 या 108 बार परिक्रमा की जाती है। यह सूत पति-पत्नी के अटूट रिश्ते का प्रतीक है। धागा लपेटते समय अपनी मनोकामना मन ही मन दोहराई जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. भीगे चने का प्रसाद</h3>
<p>
	इस व्रत में भीगे हुए चने का बहुत महत्व है। पूजा के बाद 12 भीगे चने हाथ में लेकर कथा सुनी जाती है। कई क्षेत्रों में महिलाएं 12 भीगे चने और वट वृक्ष की कोपल (नर्म कली) को निगलकर व्रत का पारण करती हैं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vat-savitri-vrat/vat-savitri-vrat-kab-hai-2026-126050100010_1.html" target="_blank">वट सावित्री व्रत 2026: कब रखें व्रत? जानें 5 अनसुनी और रहस्यमयी बातें</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	6. सोलह श्रृंगार है शुभ</h3>
<p>
	चूंकि यह सौभाग्य का पर्व है, इसलिए इस दिन महिलाओं को पूर्ण सोलह श्रृंगार करना चाहिए। विशेषकर सिंदूर, बिंदी और मेहंदी लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन पीले या लाल रंग के नए वस्त्र पहनना उत्तम होता है। </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	7. अखंड सुहाग की प्रार्थना</h3>
<p>
	इस दिन महिलाएं समूह में एकत्रित होकर पूजा करती हैं, जिससे आपसी प्रेम और सद्भाव बढ़ता है। पूजा के बाद महिलाएं वट वृक्ष से अपने अखंड सौभाग्य की प्रार्थना करती हैं। इस दिन माता सावित्री को चढ़ाया गया सिंदूर अपनी मांग में लगाना "अखंड सौभाग्य" का प्रतीक माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	8. दान-पुण्य का फल</h3>
<p>
	इस दिन दान का विशेष महत्व है। पूजा के बाद सामर्थ्य अनुसार ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को फल, अनाज, वस्त्र और विशेषकर बांस का पंखा दान करना चाहिए। ज्येष्ठ की गर्मी में जल सेवा/ प्याऊ लगवाना भी श्रेष्ठ पुण्य है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	9. व्रत कथा सुनना अनिवार्य</h3>
<p>
	बिना कथा सुने यह व्रत अधूरा माना जाता है। सावित्री की बुद्धिमानी और यमराज के साथ उनके संवाद की कथा हमें यह सिखाती है कि सच्ची निष्ठा और प्रेम से कठिन से कठिन बाधा को भी दूर किया जा सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	10. पारण और आशीर्वाद</h3>
<p>
	पूजा संपन्न होने के बाद घर के बुजुर्गों (सास, ससुर या बड़ों) के पैर छूकर आशीर्वाद लेना चाहिए। इससे घर में सुख-शांति बनी रहती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>एक छोटी सी सलाह: </strong>वट सावित्री की पूजा सामूहिक रूप से करना अधिक फलदायी और उत्साहजनक माना जाता है। क्योंकि यह व्रत सामाजिक एकजुटता का भी प्रतीक है। इससे आपसी भाईचारा और प्रेम भी बढ़ता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>विशेष टिप: </strong>यदि आपके आसपास बरगद का पेड़ न हो, तो आप घर के गमले में बरगद की एक टहनी लगाकर या मानसिक रूप से ध्यान करके भी पूजा संपन्न कर सकती हैं। श्रद्धा सबसे ऊपर है!<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vat-savitri-vrat/vat-savitri-vrat-is-the-meaning-of-relationships-changing-126051200036_1.html" target="_blank">Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत: आस्था, तर्क और आधुनिकता का संगम, क्या बदल रहे हैं रिश्तों के मायने?</a></strong><br />
	<br />
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 14 May 2026 10:10:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 14 May 2026 10:07:51 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Vat Savitri Vrat]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Lord Shantinath jayanti: जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ की जयंती]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/jain-religion/lord-shantinath-jayanti-2026-126051200009_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/jain-religion/lord-shantinath-jayanti-2026-126051200009_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/12/thumb/1_1/1778566797-0726.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Bhagwan Shantinath Jayanti: जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर, भगवान शांतिनाथ की जयंती यानी जन्म कल्याणक जैन समाज के लिए अत्यंत पवित्र और मंगलकारी दिन है। उनके जीवन का संदेश शांति, अहिंसा और करुणा पर आधारित है। जैन मंदिरों में इस दिन विशेष पूजा, भजन, ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="फोटो में शांतचित्त मुद्रा में शांति और अहिंसा के प्रतीक जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर शांतिनाथ भगवान" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/12/full/1778566797-0726.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>16th Jain Tirthankar Lord Shantinath:</strong> जैन शास्त्रों के अनुसार, उन्होंने अपने जीवन में अत्यंत धैर्य, आत्म-नियंत्रण और अहिंसा का पालन किया। भगवान शांतिनाथ के उपदेश मुख्यतः सत्य, अहिंसा, क्षमा और मोक्ष पर आधारित हैं। जैन धर्म में भगवान शांतिनाथ का महत्व इसलिए भी है क्योंकि वे आध्यात्मिक शांति और मानसिक स्थिरता के प्रतीक हैं। उनके अनुयायी उन्हें श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजते हैं और उनके जीवन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में संयम और शांति लाने का प्रयास करते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<ul>
	<li>
		तिथि और समय</li>
	<li>
		भगवान शांतिनाथ का संक्षिप्त परिचय</li>
	<li>
		जयंती का महत्व और परंपरा</li>
	<li>
		एक महान संदेश</li>
	<li>
		भगवान शांतिनाथ का अर्घ्य</li>
	<li>
		मंत्र</li>
</ul>
<p>
	 </p>
<h3>
	यहां उनके जन्म और जयंती से जुड़ी मुख्य जानकारी दी गई है:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	तिथि और समय</h3>
<p>
	<p>
		भगवान शांतिनाथ का जन्म ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हुआ था, अत: इस तिथि को आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है। भगवान शांतिनाथ ने वैराग्य के बाद ज्येष्ठ कृष्णा चतुर्दशी को दीक्षा ग्रहण की, पौष शुक्ला दशमी को केवलज्ञान की प्राप्ति हुई और ज्येष्ठ कृष्णा चौदस को श्री सम्मेद शिखर जी से मोक्ष प्राप्त किया था।</p>
</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	भगवान शांतिनाथ का संक्षिप्त परिचय</h3>
<p>
	तीर्थंकर क्रम: 16वें तीर्थंकर</p>
<p>
	जन्म स्थान: हस्तिनापुर (उत्तर प्रदेश)</p>
<p>
	माता-पिता: माता ऐरा देवी और पिता राजा विश्वसेन</p>
<p>
	चिह्न: हिरण</p>
<p>
	वर्ण (रंग): सुवर्ण (स्वर्ण के समान आभा)</p>
<p>
	शांतिनाथ के शरीर की स्वर्ण के समान आभा दिखाई देती थी। उनके शरीर पर सूर्य, चन्द्र, ध्वजा, शंख, चक्र और तोरण के शुभ मंगल चिह्न अंकित थे। जन्म से ही उनकी जिह्वा पर मां सरस्वती देवी विराजमान थीं।</p>
<p>
	विशेष उपलब्धि<span style="white-space:pre"> </span>: वे &#39;चक्रवर्ती&#39; सम्राट और &#39;कामदेव&#39; भी थे।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	जयंती का महत्व और परंपरा</h3>
<p>
	भगवान शांतिनाथ को &#39;शांति के पुंज&#39; के रूप में पूजा जाता है। उनकी जयंती पर श्रद्धालु निम्नलिखित अनुष्ठान करते हैं:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>शांति विधान: </strong>विश्व में सुख-शांति की कामना के लिए विशेष &#39;शांति मंडल विधान&#39; का आयोजन किया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अभिषेक और पूजन: </strong>मंदिरों में भगवान की प्रतिमा का पंचामृत अभिषेक किया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>शांतिधारा: </strong>विशेष मंत्रोच्चार के साथ शांतिधारा की जाती है, जिसे बाधाओं और व्याधियों को दूर करने वाला माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>दान-पुण्य</strong>: इस दिन जीव दया (पशु-पक्षियों की सेवा) और निर्धनों की सहायता को विशेष महत्व दिया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	एक महान संदेश</h3>
<p>
	भगवान शांतिनाथ ने धैर्य, संयम और अहिंसा का संदेश दिया। उनका जीवन जैन धर्म के अनुयायियों के लिए आध्यात्मिक अनुशासन और संयम का आदर्श है। भगवान शांतिनाथ का जीवन हमें सिखाता है कि भौतिक साम्राज्य का त्याग कर आत्मिक शांति प्राप्त करना ही जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है। उनके नाम का स्मरण मात्र ही मन को स्थिरता और शांति प्रदान करने वाला माना गया है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	भगवान शांतिनाथ का अर्घ्य </h3>
<p>
	 </p>
<p>
	बसु द्रव्य संवारी तुम ढिग सारी, आनन्द कारी छग प्यारी।</p>
<p>
	तुम हो भवतारी, करुणा धारी, यातैं थारी शरणारी।</p>
<p>
	श्री शान्ति जिनेश, नुतनाक्रेशं वृष चक्रेशं, चक्रेशं।</p>
<p>
	हनि अरि चक्रेशं, हे गुनधेशं, दया मृतेशं, मक्रेशं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	मंत्र-</h3>
<p>
	- ॐ ह्रीं श्रीं शांतिनाथ जिनेन्द्राय नमः</p>
<p>
	- ॐ ह्रीं श्रीं अर्हं श्री शांतिनाथ जिनेन्द्राय नमः</p>
<p>
	 </p>
<p>
	शांतिनाथ जयंती हर साल बड़ी श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा, भजन, प्रवचन और दान-पुण्य का आयोजन होता है। जैन अनुयायी इस दिन उपवास, ध्यान और धर्मचर्चा के माध्यम से भगवान शांतिनाथ के आदर्शों को अपनाने का प्रयास करते हैं।<br />
	<br />
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 14 May 2026 09:24:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 14 May 2026 09:26:42 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Jain Religion]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[अपरा एकादशी को क्यों कहते हैं अचला एकादशी, जानिए दोनों का अर्थ और फायदा]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/apara-ekadashi-meaning-and-benefits-126051300040_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/apara-ekadashi-meaning-and-benefits-126051300040_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2025-11/14/thumb/1_1/1763099951-0155.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Hindu Ekadashi fasting importance: ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को अपरा एकादशी कहा जाता है, लेकिन शास्त्रों में इसका एक और प्रचलित नाम अचला एकादशी भी है। यह एकादशी अपने नाम के अनुरूप ही अनंत फल देने वाली मानी गई है। इन व्रतों में धर्म का पालन ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p>
		<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
			<img align="center" alt="चित्र में शेषनाग पर विराजित हाथ में शंख, कमल लिए हुए भगवान श्रीविष्णु की आराधना में व्यस्त माता लक्ष्मी" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2025-11/14/full/1763099951-0155.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
	<p>
		<strong>Spiritual benefits of Ekadashi: </strong>हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का अत्यंत महत्व है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे करने से पाप नष्ट होते हैं, जीवन में सुख-समृद्धि आती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से, अपरा एकादशी और अचला एकादशी अपने अलग-अलग आध्यात्मिक महत्व और फायदों के लिए प्रसिद्ध हैं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/achala-ekadashi-muhurat-n-puja-vidhi-2026-126051100010_1.html" target="_blank">Achala Ekadashi 2026: अचला एकादशी व्रत का समय, पूजा और पारण विधि</a></strong></p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		अपरा एकादशी का अर्थ है &#39;अपराजित&#39; या &#39;अविनाशी&#39;, और इसे करने से आत्मा को पवित्रता मिलती है और जीवन में स्थायी खुशहाली आती है। वहीं, अचला एकादशी का अर्थ है &#39;अचल&#39; यानी अडिग या स्थिर, और यह व्रत जीवन में स्थिरता, आत्म-नियंत्रण और सफलता प्रदान करता है।<br />
		<br />
		यह व्रत धार्मिक शुद्धि, मानसिक शांति और आध्यात्मिक लाभके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यदि आप अपने जीवन में धन, स्वास्थ्य, मन की शांति और भगवान विष्णु की कृपा पाना चाहते हैं, तो इन दोनों एकादशी व्रतों का पालन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		क्यों कहते हैं इसे &#39;अपरा&#39; और &#39;अचला&#39;?</h3>
	<p>
		इन दोनों नामों के पीछे गहरा अर्थ छिपा है:</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		1. अपरा एकादशी (Apra Ekadashi)</h3>
	<p>
		अर्थ: &#39;अपरा&#39; का अर्थ होता है अपार या असीमित।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		कारण: माना जाता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को अपार पुण्य और असीमित धन-धान्य की प्राप्ति होती है। यह व्रत व्यक्ति के उन पापों को भी नष्ट कर देता है, जैसे ब्रह्म-हत्या या परनिंदा आदि, जो सामान्यतः अक्षम्य माने जाते हैं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/achala-ekadashi-effective-remedies-126051200005_1.html" target="_blank">Apara Ekadashi Remedy: मिलेगी अपार दौलत और खोया हुआ सम्मान! बस अपरा एकादशी के दिन कर लें ये 4 अचूक उपाय</a></strong></p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		2. अचला एकादशी (Achala Ekadashi)</h3>
	<p>
		अर्थ: &#39;अचला&#39; का अर्थ होता है स्थिर या जिसे हिलाया न जा सके।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		कारण: इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से मिलने वाला पुण्य &#39;अचल&#39; हो जाता है, यानी वह कभी नष्ट नहीं होता। साथ ही, यह व्रत व्यक्ति के जीवन में स्थिरता (Stability) लाता है- चाहे वह आर्थिक हो, मानसिक हो या पारिवारिक।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		अपरा/अचला एकादशी व्रत के फायदे</h3>
	<p>
		इस व्रत का महत्व पद्म पुराण में विस्तार से बताया गया है। इसके मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>पापों से मुक्ति: </strong>अनजाने में किए गए बड़े से बड़े पापों- जैसे झूठी गवाही देना, शास्त्र की निंदा करना, या गलत तरीके से धन कमाना के प्रभाव से मुक्ति मिलती है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>प्रेत योनि से छुटकारा: </strong>मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करता है, उसे मृत्यु के पश्चात प्रेत योनि में नहीं जाना पड़ता।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>यश और सौभाग्य: </strong>इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को समाज में मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>अश्वमेध यज्ञ के समान फल: </strong>शास्त्रों के अनुसार, अपरा एकादशी का व्रत रखने से वही फल मिलता है जो कार्तिक स्नान या गंगा तट पर पितृ तर्पण करने से प्राप्त होता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>आर्थिक स्थिरता:</strong> &#39;अचला&#39; नाम होने के कारण यह माता लक्ष्मी को भी प्रिय है, जिससे घर में धन की स्थिरता बनी रहती है।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		पूजा के विशेष नियम</h3>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>देवता-</strong> भगवान विष्णु के &#39;त्रिविक्रम&#39; स्वरूप की पूजा की जाती है।</p>
	<p>
		<strong>भोग</strong>- भगवान को तुलसी दल, फल और पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं।</p>
	<p>
		<strong>दान- </strong>इस दिन जल, छाता या खरबूजे का दान करना अत्यंत शुभ है।</p>
	<p>
		<strong>वर्जित-</strong> एकादशी के दिन चावल खाना और तामसिक भोजन का सेवन पूरी तरह वर्जित है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>रोचक तथ्य: </strong>अपरा एकादशी का फल वही है जो कुरुक्षेत्र में सूर्य ग्रहण के समय दान करने से मिलता है, यानी यह कम मेहनत में अधिक फल देने वाली एकादशी है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>नोट: </strong>दोनों नाम से प्रचलित यह एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित हैं और दोनों के लाभ धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/apara-ekadashi-2026-kab-hai-tithi-mahatva-vrat-fayde-126050400035_1.html" target="_blank">अपरा एकादशी 2026: कब है तिथि और क्या है इसका धार्मिक महत्व? जानिए सब कुछ</a></strong></p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 13 May 2026 15:46:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 13 May 2026 16:18:46 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[ekadashi vrat katha]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Guru Pradosh Vrat 2026: गुरु प्रदोष का व्रत रखने का महत्व और विधि]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/guru-pradosh-vrat-importance-n-pooja-vidhi-126051300008_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2025-11/19/thumb/1_1/1763551023-9614.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Guru Pradosh Vrat Importance: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा पाने के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। जब यह व्रत गुरुवार के दिन पड़ता है, तो इसे गुरु प्रदोष कहा जाता है। यह व्रत न केवल महादेव को प्रसन्न करने के लिए है, बल्कि इसके प्रभाव से ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p>
		<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
			<img align="center" alt="चित्र में प्रदोष व्रत पर जलते हुए दीये के साथ प्रदोष काल में भगवान शिव के पूजन का फोटो" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2025-11/19/full/1763551023-9614.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
	<p>
		<strong>How to observe Pradosh Vrat: </strong>गुरु प्रदोष व्रत भगवान शिव और बृहस्पति (गुरु देव) की संयुक्त पूजा के लिए विशेष माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में धन, सुख, संतान, वैभव, बुद्धि और वैभव की वृद्धि होती है। इस दिन विशेष रूप से शिवलिंग का पूजन, गुरु मंत्र का जप, और सात्विक भोजन का सेवन या निर्जल उपवास करने की परंपरा है। इस व्रत के दौरान व्यक्ति अपने मन, वचन और कर्मों को शुद्ध करता है, जिससे उसके जीवन में मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक प्रगति होती है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vat-savitri-vrat/vat-savitri-vrat-is-the-meaning-of-relationships-changing-126051200036_1.html" target="_blank">Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत: आस्था, तर्क और आधुनिकता का संगम, क्या बदल रहे हैं रिश्तों के मायने?</a></strong></p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		यहां गुरु प्रदोष व्रत का महत्व और संपूर्ण विधि दी गई है:</h3>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		गुरु प्रदोष व्रत का महत्व</h3>
	<p>
		गुरु प्रदोष का मुख्य संबंध शत्रु नाश, विजय और सुख-सौभाग्य से है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>शत्रुओं पर विजय:</strong> पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>बृहस्पति ग्रह की मजबूती:</strong> जिनका गुरु कमजोर हो, उन्हें यह व्रत अवश्य करना चाहिए। इससे मान-सम्मान और विद्या में वृद्धि होती है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>संतान सुख: </strong>धार्मिक दृष्टिकोण से यह व्रत संतान प्राप्ति और उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए भी फलदायी माना गया है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>मोक्ष की प्राप्ति:</strong> प्रदोष काल में शिव जी की पूजा करने से जाने-अनजाने में किए गए सभी पापों का नाश होता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		व्रत और पूजा की विधि</h3>
	<p>
		प्रदोष व्रत में &#39;प्रदोष काल&#39; (सूर्यास्त के समय) की पूजा का सबसे अधिक महत्व होता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		1. प्रातः काल की तैयारी</h3>
	<p>
		सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र तथा संभव हो तो पीले वस्त्र धारण करें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें: &#39;हे महादेव, आज मैं आपके निमित्त गुरु प्रदोष व्रत रख रहा/रही हूँ, इसे स्वीकार करें।&#39;</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		पूरे दिन निराहार रहें या केवल फलाहार करें।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		2. प्रदोष काल पूजा (मुख्य समय)</h3>
	<p>
		<p>
			<strong>तिथि: 14 मई 2026, गुरुवार</strong></p>
		<p>
			ज्येष्ठ, कृष्ण त्रयोदशी पर प्रदोष काल (पूजा समय): 07:04 पीएम से 09:09 पीएम सूर्यास्त के बाद का यह समय पूजा के लिए सर्वोत्तम है। </p>
		<p>
			अवधि- 02 घण्टे 05 मिनट्स</p>
		<p>
			सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद का समय प्रदोष काल कहलाता है।</p>
		<p>
			 </p>
	</p>
	<p>
		<strong>शुद्धिकरण: </strong>शाम को पुनः स्नान करें और मंदिर की सफाई करें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>अभिषेक: </strong>शिवलिंग का गंगाजल, गाय के दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>श्रृंगार: </strong>शिव जी को चंदन, बेलपत्र, धतूरा, मदार के फूल और अक्षत यानी बिना टूटे चावल अर्पित करें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>भोग: </strong>गुरु प्रदोष होने के कारण भगवान शिव को पीले रंग की मिठाई या बेसन के लड्डू का भोग लगाना शुभ होता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>कथा व मंत्र:</strong> गुरु प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें। साथ ही महामृत्युंजय मंत्र या &#39;ॐ नमः शिवाय&#39; का जाप करें।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		3. आरती और पारण</h3>
	<p>
		अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करें। अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पारण अर्थात् व्रत खोलें।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		गुरु प्रदोष के लिए विशेष उपाय</h3>
	<p>
		<strong>पीले फूल:</strong> शिव जी को पीले कनेर के फूल चढ़ाने से धन-धान्य की वृद्धि होती है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>दान: </strong>इस दिन चने की दाल या गुड़ का दान करना बहुत फलदायी माना जाता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>दीपदान: </strong>शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे और मुख्य द्वार पर दीपक जलाने से घर में नकारात्मक ऊर्जा प्रवेश नहीं करती।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>महत्वपूर्ण टिप: </strong>प्रदोष व्रत में कभी भी पूजा के दौरान तुलसी दल या केतकी के फूल का प्रयोग न करें, क्योंकि शिव पूजा में इनका निषेध है।<br />
		<br />
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/shani-jayanti-2026-mesh-kumbh-meen-rashi-sadesati-se-mukti-ke-5-achook-upay-126051200046_1.html" target="_blank">शनि जयंती पर मेष, कुंभ और मीन राशियां करें साढ़ेसाती से मुक्ति के 5 अचूक उपाय</a></strong></p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 13 May 2026 10:30:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 13 May 2026 10:53:00 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[astrology articles]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Achala Ekadashi 2026: अचला एकादशी व्रत का समय, पूजा और पारण विधि]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/achala-ekadashi-muhurat-n-puja-vidhi-2026-126051100010_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/achala-ekadashi-muhurat-n-puja-vidhi-2026-126051100010_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/11/thumb/1_1/1778476851-2304.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Achala Ekadashi Vrat Date: अचला एकादशी, जिसे अपरा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। यह व्रत अपार पुण्य देने वाला और समस्त पापों का नाश करने वाला माना जाता है। इस दिन निराहार या फलाहारी उपवास करने ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p>
		<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
			<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
				<img align="center" alt="अचला/अपरा एकादशी के अवसर पर भगवान विष्णु के पूजन की विशेष फोटो" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/11/full/1778476851-2304.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
		</p>
	</p>
	<p>
		<strong>Achala Ekadashi 2026:</strong> हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत अत्यंत पवित्र माना गया है। इसे करने से न केवल अर्थ, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है बल्कि व्यक्ति के कर्मों का शुद्धिकरण भी होता है। अचला एकादशी का व्रत करने से मन, वचन और कर्म तीनों शुद्ध होते हैं और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए यहां जानते हैं अचला एकादशी 2026 का व्रत, पूजा विधि, पारण समय और महत्व। जानिए कैसे करें भगवान विष्णु की भक्ति और पाएं पुण्य।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/apara-ekadashi-2026-kab-hai-tithi-mahatva-vrat-fayde-126050400035_1.html" target="_blank">अपरा एकादशी 2026: कब है तिथि और क्या है इसका धार्मिक महत्व? जानिए सब कुछ</a></strong></p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		वर्ष 2026 में अचला (अपरा) एकादशी की महत्वपूर्ण तिथियां और समय निम्नलिखित हैं:</h3>
	<h3>
		 </h3>
	<h3>
		अचला एकादशी 2026: शुभ मुहूर्त</h3>
	<p>
		 </p>
	<p>
		ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी तिथि प्रारंभ: 12 मई 2026 को दोपहर 02:52 बजे से।</p>
	<p>
		एकादशी तिथि का समापन: 13 मई 2026 को दोपहर 01:29 बजे तक।</p>
	<p>
		उदयातिथि के अनुसार व्रत 13 मई 2026 (बुधवार) को रखा जायेगा।</p>
	<p>
		शुभ मुहूर्त: सुबह 05:32 से 08:55 तक और 10:36 से 12:14 तक। शाम को 05:22 से 07:04 तक।</p>
	<p>
		व्रत पारण का समय: 14 मई 2026 को सुबह 05:31 बजे से 08:14 बजे के बीच।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		पूजा विधि</h3>
	<p>
		अचला एकादशी पर भगवान विष्णु के &#39;त्रिविक्रम&#39; स्वरूप की पूजा की जाती है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>संकल्प: </strong>सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>वेदी स्थापना: </strong>पूजा स्थान पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>अभिषेक व पूजन: </strong>भगवान को गंगाजल से स्नान कराएं। उन्हें पीले पुष्प, फल, और तुलसी दल अर्पित करें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		बता दें कि भगवान विष्णु की पूजा बिना तुलसी के अधूरी मानी जाती है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>धूप-दीप:</strong> घी का दीपक जलाएं और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या &#39;ॐ नमो भगवते वासुदेवाय&#39; मंत्र का जाप करें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>कथा: </strong>अचला एकादशी की व्रत कथा सुनें या पढ़ें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>आरती:</strong> अंत में कपूर से आरती करें और अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		पारण विधि/ व्रत खोलने के नियम</h3>
	<p>
		एकादशी व्रत का पूर्ण फल तभी मिलता है जब उसका पारण सही समय और विधि से किया जाए।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>हरिवासर का त्याग:</strong> द्वादशी तिथि के शुरुआती चौथाई भाग (हरिवासर) में व्रत नहीं खोलना चाहिए। 13 मई को सुबह हरिवासर समाप्त होने के बाद ही भोजन करें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>सात्विक भोजन: </strong>पारण के दिन सात्विक भोजन बिना प्याज-लहसुन का ग्रहण करना चाहिए। </p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>ब्राह्मण भोज/दान: </strong>पारण से पहले किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराएं या दान-दक्षिणा दें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>तुलसी जल: </strong>सबसे पहले भगवान का चरणामृत या तुलसी पत्र डालकर जल ग्रहण कर व्रत खोलें।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		3 विशेष सावधानियां</h3>
	<p>
		* भले ही आप व्रत नहीं रख रहे हों तब भी इस दिन चावल खाना वर्जित है। तथा धार्मिक शास्त्रों के अनुसार पूजन के दिन श्रीहरि को अक्षत चढ़ाने की मनाही है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		* क्रोध, लोभ और परनिंदा से बचें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		* पूरी रात जागरण कर कीर्तन करना अत्यंत फलदायी होता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-zodiac-signs/weekly-horoscope-11-to17-may-2026-126050900035_1.html" target="_blank">Weekly Horoscope: साप्ताहिक राशिफल (11-17 मई 2026): जानें स्वास्थ्य, करियर और प्रेम जीवन की जानकारी</a></strong></p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 13 May 2026 09:18:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 13 May 2026 09:22:36 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[ekadashi vrat katha]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Vat Savitri Vrat 2026: वट सावित्री व्रत: आस्था, तर्क और आधुनिकता का संगम, क्या बदल रहे हैं रिश्तों के मायने?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/vat-savitri-vrat/vat-savitri-vrat-is-the-meaning-of-relationships-changing-126051200036_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/vat-savitri-vrat/vat-savitri-vrat-is-the-meaning-of-relationships-changing-126051200036_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/12/thumb/1_1/1778582522-1139.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Vat Savitri Vrat:  वट सावित्री व्रत की नींव सावित्री और सत्यवान की कथा पर टिकी है। सावित्री कोई अबला नारी नहीं थी; वह एक ऐसी 'वॉरियर' थी जिसने अपनी बुद्धिमत्ता और तर्कशक्ति से यमराज को भी निरुत्तर कर दिया। आज जब हम इस व्रत को देखते हैं, तो यह केवल ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="वट सावित्री व्रत 2026। चित्र में बरगद की छांव तले पूजन करती हुई सुहागिन महिलाएं" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/12/full/1778582522-1139.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Vat Savitri rituals</strong>: भारतीय संस्कृति उत्सवों का एक ऐसा कोलाज है, जहां परंपराएं सिर्फ रस्में नहीं, बल्कि भावनाओं का निवेश हैं। इन्हीं में से एक है वट सावित्री व्रत। ज्येष्ठ की तपती दोपहरी में जब सुहागिनें सोलह श्रृंगार कर बरगद के वृक्ष के चारों ओर कच्चा सूत लपेटती हैं, तो वह सिर्फ एक धागा नहीं होता, बल्कि जन्म-जन्मांतर के साथ का एक अटूट विश्वास होता है। लेकिन क्या 21वीं सदी के &#39;इक्वल पार्टनरशिप&#39; वाले दौर में यह व्रत अपनी पुरानी परिभाषा के साथ फिट बैठता है? <strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/adhikmas-2026-mahatva-puja-vidhi-mantra-aur-6-khas-batein-126051200019_1.html" target="_blank">अधिकमास 2026: क्यों माना जाता है सबसे पवित्र महीना? जानें पूजा विधि, मंत्र और 6 खास बातें</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<ul>
	<li>
		पौराणिक साहस और आज की नारी</li>
	<li>
		<strong>क्या पुरुष इस समर्पण के &#39;लायक&#39; है? – एक तीखा लेकिन जरूरी विमर्श</strong></li>
	<li>
		क्यों आज भी खास है यह परंपरा?</li>
	<li>
		निष्कर्ष: बदलती रस्में, ठहरता प्रेम</li>
</ul>
<p>
	 </p>
<h3>
	आइए, इस पर एक गहरी नज़र डालते हैं।</h3>
<h3>
	पौराणिक साहस और आज की नारी</h3>
<p>
	इस व्रत की नींव सावित्री और सत्यवान की कथा पर टिकी है। सावित्री कोई अबला नारी नहीं थी; वह एक ऐसी &#39;वॉरियर&#39; थी जिसने अपनी बुद्धिमत्ता और तर्कशक्ति से यमराज (काल) को भी निरुत्तर कर दिया। आज जब हम इस व्रत को देखते हैं, तो यह केवल पति की लंबी आयु की कामना नहीं, बल्कि एक स्त्री के संकल्प और उसकी बौद्धिक विजय का उत्सव भी है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	क्या पुरुष इस समर्पण के &#39;लायक&#39; है? – एक तीखा लेकिन जरूरी विमर्श</h3>
<p>
	आज के दौर में एक बड़ा सवाल जो चर्चाओं के केंद्र में है— &#39;क्या पुरुष इस लायक है कि उसके लिए निर्जला रहकर तप किया जाए?&#39;</p>
<p>
	 </p>
<p>
	यह सवाल किसी के विरोध में नहीं, बल्कि &#39;सम्मान&#39; की मांग है। &#39;लायक&#39; होने का मतलब आज सिर्फ पैसा कमाना नहीं है। आधुनिक संदर्भ में पुरुष तब &#39;लायक&#39; बनता है जब:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	- वह अपनी पत्नी के सपनों को अपनी पहचान जितनी ही अहमियत दे।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	- वह घरेलू जिम्मेदारियों और बच्चों की परवरिश में &#39;मदद&#39; न करे, बल्कि &#39;साझेदारी&#39; निभाए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	- वह अपनी पत्नी के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील हो।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	यदि रिश्ता बराबरी का है, तो त्याग का बोझ भी एकतरफा क्यों? आज कई जागरूक जोड़े इस परंपरा को &#39;म्युचुअल सेलिब्रेशन&#39; (पारस्परिक उत्सव) बना रहे हैं, जहां पति भी अपनी पत्नी के स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए संकल्प लेते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	क्यों आज भी खास है यह परंपरा?</h3>
<p>
	तमाम तर्कों के बावजूद, वट सावित्री व्रत आज भी अपनी चमक खोया नहीं है, इसके कुछ ठोस कारण हैं:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सांस्कृतिक जड़ें:</strong> कंक्रीट के जंगलों (शहरों) में रहने वाली पीढ़ी के लिए ये पर्व अपनी विरासत से जुड़ने का एक बहाना हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सामुदायिक शक्ति: </strong>जब महिलाएं एक साथ मिलकर पूजा करती हैं, तो वह &#39;सोशल बॉन्डिंग&#39; और एक-दूसरे को भावनात्मक सहारा देने का एक सशक्त माध्यम बनता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मनोवैज्ञानिक संबल: </strong>विश्वास में बड़ी शक्ति होती है। अपने साथी के मंगल की कामना करना मन को एक विशेष शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	निष्कर्ष: बदलती रस्में, ठहरता प्रेम</h3>
<p>
	वट सावित्री व्रत का भविष्य इसके &#39;समावेशी&#39; (Inclusive) होने में है। यह व्रत किसी एक पक्ष के दूसरे पर प्रभुत्व का प्रतीक न बनकर, आपसी प्रेम और कृतज्ञता का पर्व होना चाहिए। यदि पति अपनी पत्नी का सम्मान करता है और पत्नी अपनी श्रद्धा से यह व्रत रखती है, तो बरगद की वे परिक्रमाएं वैवाहिक जीवन को और अधिक मजबूती प्रदान करती हैं। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	अंततः, रिश्ते की उम्र कच्चे सूत के धागों से ज्यादा, आपसी समझ और सम्मान की गहराई से लंबी होती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vat-savitri-vrat/vat-savitri-vrat-kab-hai-2026-126050100010_1.html" target="_blank">वट सावित्री व्रत 2026: कब रखें व्रत? जानें 5 अनसुनी और रहस्यमयी बातें</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 12 May 2026 16:22:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 13 May 2026 12:48:23 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Vat Savitri Vrat]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[अधिकमास 2026: क्यों माना जाता है सबसे पवित्र महीना? जानें पूजा विधि, मंत्र और 6 खास बातें]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/adhikmas-2026-mahatva-puja-vidhi-mantra-aur-6-khas-batein-126051200019_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/adhikmas-2026-mahatva-puja-vidhi-mantra-aur-6-khas-batein-126051200019_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/12/thumb/1_1/1778575791-046.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/12/thumb/1_1/1778575791-046.jpg</image>
      <description><![CDATA[प्रत्येक तीसरे साल अधिकमास का संयोग बनता है। इस मास को पुरुषोत्तम माह भी कहते हैं। साल 2026 में ज्येष्ठ अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) का योग बन रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, जब एक ही चंद्र मास दो बार आता है, तो पहले वाले को 'अधिकमास' और दूसरे को ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="A woman sits with folded hands before Lord Vishnu, accompanied by a puja thali, a scripture, and a kalash, with a temple visible in the background; the caption reads 'Adhikmas 2026'." class="imgCont" height="1024" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/12/full/1778575791-046.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="Adhikmas  Purushottam Mahatva" width="1536" /></p>
	</p>
	प्रत्येक तीसरे साल अधिकमास का संयोग बनता है। इस मास को पुरुषोत्तम माह भी कहते हैं। साल 2026 में ज्येष्ठ अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) का योग बन रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, जब एक ही चंद्र मास दो बार आता है, तो पहले वाले को &#39;अधिकमास&#39; और दूसरे को &#39;शुद्ध&#39; या &#39;निज&#39; मास कहा जाता है। यहां ज्येष्ठ अधिकमास 2026 की तिथियां और इस दौरान पालन किए जाने वाले नियम दिए गए हैं। 17 मई 2026 (रविवार) से 15 जून 2026 (सोमवार) तक अधिकमास रहेगा। चलिए जानते हैं इस माह की 6 खास बातें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. अधिकमास का महत्व और परिचय</h3>
<p>
	<strong>पुण्य फल: </strong>अधिकमास को अत्यंत फलदायी माना गया है। अथर्ववेद में इसे &#39;इंद्र का घर&#39; (भगवान का घर) कहा गया है।</p>
<p>
	<strong>नाम की महिमा:</strong> भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम &#39;पुरुषोत्तम&#39; दिया है। उन्होंने कहा है कि इस मास के स्वामी वे स्वयं हैं और इससे सारा जगत पवित्र होगा।</p>
<p>
	<strong>फल की प्राप्ति: </strong>इस माह में किए गए धार्मिक कार्यों का फल अन्य महीनों की तुलना में 10 गुना अधिक मिलता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. अधिपति देवता और उपासना</h3>
<p>
	<strong>स्वामी:</strong> इस मास के अधिपति देवता भगवान विष्णु हैं। इसकी कथा नृसिंह अवतार और श्रीकृष्ण से जुड़ी है।</p>
<p>
	<strong>33 देवताओं की पूजा: </strong>इस माह में विष्णु, कृष्ण, नारायण, अच्युत सहित कुल 33 देवताओं की पूजा का विधान है, जो विशेष लाभ प्रदान करती है।</p>
<p>
	<strong>पूजन पद्धति: </strong>भगवान का षोडशोपचार पूजन (16 सामग्रियों से पूजा) करने से दुःख-दरिद्रता का नाश होता है और अंत में वैकुंठ की प्राप्ति होती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. प्रमुख मंत्र और पाठ (क्या पढ़ें?)</h3>
<p>
	<strong>मंत्र जप: </strong>&#39;ॐ नमो भगवते वासुदेवाय&#39; महामंत्र का निरंतर जप करना चाहिए।</p>
<p>
	<strong>ग्रंथ पाठ: </strong>श्रीमद्भागवत महापुराण, गीता का 14वां अध्याय (पुरुषोत्तम अध्याय), विष्णु सहस्रनाम और पुरुषोत्तम माहात्म्य का पाठ करना अत्यंत श्रेयस्कर है।</p>
<p>
	<strong>पुराण श्रवण: </strong>श्री विष्णु पुराण, भविष्योत्तर पुराण और श्रीमद् देवीभागवत का श्रवण व मनन विशेष फलदायी होता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. नियम, दान और परहेज (क्या करें/क्या न करें?)</h3>
<p>
	<strong>शुभ कर्म: </strong>घर के मंदिर में शालिग्राम के समक्ष अखंड घी का दीपक जलाएं। दीपदान, ध्वजादान और गौ माता को घास खिलाना इस माह के मुख्य पुण्य कर्म हैं।</p>
<p>
	<strong>वर्जित कार्य: </strong>इस माह में विवाह, नामकरण, कर्णछेदन (कान छिदवाना), श्राद्ध और देव-प्रतिष्ठा जैसे मांगलिक कार्य वर्जित हैं।</p>
<p>
	<strong>आहार नियम:</strong> व्रत करने वालों को एक समय भोजन करना चाहिए। मांस, शहद, नशीले पदार्थ, प्याज, लहसुन, बासी अन्न, राई और मसूर जैसी वस्तुओं का त्याग करना चाहिए।</p>
<p>
	<strong>खाद्य पदार्थ: </strong>गेहूं, चावल, मूंग, दूध, दही, घी, आम, केला, सेंधा नमक और इमली जैसे सात्विक पदार्थों का सेवन किया जा सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. ज्योतिषीय योग और खरीदारी</h3>
<p>
	<strong>शुभ योग: </strong>अधिकमास के दौरान सर्वार्थसिद्धि, द्विपुष्कर और अमृतसिद्धि जैसे शुभ योग बन रहे हैं।</p>
<p>
	<strong>खरीदारी: </strong>हालांकि मांगलिक कार्य वर्जित हैं, लेकिन शुभ मुहूर्त देखकर भूमि, भवन, मकान के अनुबंध किए जा सकते हैं और आभूषण या अन्य संपत्ति की खरीदारी की जा सकती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	6. स्वास्थ्य और आध्यात्मिक उन्नति</h3>
<p>
	<strong>कुंडली दोष निवारण: </strong>आध्यात्मिक प्रयासों और दान-पुण्य से कुंडली के विभिन्न दोषों का निराकरण होता है।</p>
<p>
	<strong>योग और ध्यान: </strong>ध्यान और योग के माध्यम से साधक उच्च स्तर की सफलता प्राप्त कर सकता है। इस दौरान किए गए योगासनों का फल दोगुना मिलता है।</p>
<p>
	<strong>स्वच्छता और ऊर्जा: </strong>सेहत की दृष्टि से यह मास शरीर को शुद्ध करने का समय है। उपवास और अनुशासन से व्यक्ति नई ऊर्जा से भर जाता है और आंतरिक निर्मलता प्राप्त करता है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 12 May 2026 14:08:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 12 May 2026 14:20:16 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Hindu Religion]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Apara ekadashi katha: अपरा एकादशी व्रत की पौराणिक कथा]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/apara-achala-ekadashi-vrat-ki-pauranik-katha-126051200015_1.html</link>
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      <description><![CDATA[ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को 'अपरा' या 'अचला' एकादशी के नाम से जाना जाता है। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, यह एकादशी 'अपार' धन और असीमित पुण्य प्रदान करने वाली मानी गई है। प्रतिवर्ष ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन अपरा ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="The image depicts a woman worshipping Lord Vishnu, with a temple in the background; on the other side, a woman is seen offering alms to a Sadhu, and the caption reads: 'The Mythological Legend of Apara Ekadashi'." class="imgCont" height="800" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/12/full/1778570996-9711.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="apara achala ekadashi vrat ki pauranik katha" width="1200" /></p>
	</p>
	ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को &#39;अपरा&#39; या &#39;अचला&#39; एकादशी के नाम से जाना जाता है। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है, यह एकादशी &#39;अपार&#39; धन और असीमित पुण्य प्रदान करने वाली मानी गई है। प्रतिवर्ष ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन अपरा एकादशी का व्रत रखा जाता है। इस एकादशी को अचला एकादशी भी कहते हैं। चलिए पढ़ते हैं ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी की प्रामाणिक व्रत कथा। </p>
<p>
	 </p>
<h3 style="text-align: center;">
	<span style="color:#8b4513;">Apara achala ekadashi vrat ki pauranik katha: अपरा एकादशी व्रत की पौराणिक कथा</span></h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. श्री कृष्ण और युधिष्ठिर का संवाद</h3>
<p>
	धर्मराज युधिष्ठिर के जिज्ञासावश पूछने पर भगवान श्री कृष्ण ने इस व्रत की महिमा का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि यह व्रत भगवान त्रिविक्रम को समर्पित है। यह व्रत पापरूपी अंधकार को नष्ट करने के लिए सूर्य के समान और पापरूपी वृक्ष को काटने के लिए कुल्हाड़ी के समान शक्तिशाली है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. किन पापों से मिलती है मुक्ति?</h3>
<p>
	अपरा एकादशी का व्रत केवल सामान्य भूलों को ही नहीं, बल्कि भीषण पापों के प्रभाव को भी कम करने की शक्ति रखता है:</p>
<p>
	<strong>गंभीर अपराध: </strong>ब्रह्म हत्या, परस्त्री गमन, और झूठी गवाही देने जैसे पाप।</p>
<p>
	<strong>धार्मिक अपराध: </strong>गुरु की निंदा करना, झूठे शास्त्रों की रचना करना या गलत ज्योतिष/वैद्य बनकर लोगों को ठगना।</p>
<p>
	<strong>कर्तव्य से विमुख होना: </strong>युद्ध क्षेत्र से भागे हुए क्षत्रिय को भी इस व्रत के प्रभाव से स्वर्ग की प्राप्ति हो सकती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. दुर्लभ फलों के समान पुण्य</h3>
<p>
	भगवान कृष्ण के अनुसार, अपरा एकादशी का फल उन दुर्लभ अवसरों के समान है जिन्हें प्राप्त करने के लिए मनुष्य वर्षों प्रतीक्षा करता है:</p>
<ul>
	<li>
		कार्तिक पूर्णिमा पर पुष्कर स्नान या गंगा तट पर पितरों का पिंडदान।</li>
	<li>
		सूर्य ग्रहण के समय कुरुक्षेत्र में स्नान।</li>
	<li>
		कुंभ के दौरान केदारनाथ या बद्रीनाथ के दर्शन।</li>
	<li>
		स्वर्ण दान या गौ दान से मिलने वाला पुण्य।</li>
</ul>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. पौराणिक कथा: राजा महीध्वज और प्रेत योनि से मुक्ति</h3>
<p>
	प्राचीन काल में महीध्वज नाम के एक अत्यंत धर्मात्मा राजा थे। उनका छोटा भाई वज्रध्वज स्वभाव से क्रूर और अधर्मी था। द्वेषवश एक रात वज्रध्वज ने अपने बड़े भाई की हत्या कर दी और उनके शरीर को एक जंगली पीपल के पेड़ के नीचे गाड़ दिया। अकाल मृत्यु के कारण राजा महीध्वज की आत्मा &#39;प्रेत&#39; बनकर उसी पीपल के पेड़ पर निवास करने लगी और वहां से गुजरने वालों को परेशान करने लगी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>ऋषि धौम्य का आगमन और उद्धार</strong></p>
<p>
	एक दिन धौम्य ऋषि उस रास्ते से निकले। उन्होंने अपने तपोबल से उस प्रेत के कष्ट और उसके अतीत को जान लिया। ऋषि को राजा की स्थिति पर दया आ गई। उन्होंने:</p>
<ul>
	<li>
		प्रेत को पीपल के पेड़ से नीचे उतारा।</li>
	<li>
		उसे परलोक विद्या का ज्ञान दिया।</li>
	<li>
		स्वयं राजा की मुक्ति के लिए अपरा एकादशी का व्रत किया।</li>
	<li>
		व्रत से प्राप्त होने वाला सारा पुण्य उस प्रेत को दान कर दिया।</li>
</ul>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>परिणाम: </strong>एकादशी के पुण्य प्रभाव से राजा महीध्वज प्रेत योनि के कष्टों से मुक्त हो गए। उन्होंने दिव्य शरीर धारण किया और ऋषि को प्रणाम कर पुष्पक विमान में बैठकर स्वर्ग लोक को प्रस्थान किया।</p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 12 May 2026 12:51:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 12 May 2026 13:00:07 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[ekadashi vrat katha]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Telugu Hanuman Jayanthi: 41 दिनों की कठिन दीक्षा और नारंगी चोला, दक्षिण भारत में कैसे मनाया जाता है बजरंगबली का जन्मोत्सव?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/how-is-bajrangbalis-birth-anniversary-celebrated-in-south-india-126051200006_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/how-is-bajrangbalis-birth-anniversary-celebrated-in-south-india-126051200006_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/01/thumb/1_1/1777619935-8608.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Hanuman Jayanthi 2026: धार्मिक मान्यता के अनुसार आंध्र प्रदेश, तेलंगाना या तेलुगु में हनुमान जन्म उत्सव चैत्र माह की पूर्णिमा से ज्येष्ठ माह की दशमी तक चलता है और दशमी तिथि को हनुमान जयंती मनाते हैं। यह भी कहते हैं कि यहां हनुमान जयंती उस दिन के ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="भगवान हनुमान की उपासना करते उनके भक्त के साथ पूजा का दृश्य" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/01/full/1777619935-8608.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1376px; height: 768px;" title="" /></p>
</p>
<p>
	<strong>Telangana Andhra Pradesh Hanuman Jayanti: </strong>भारत विविधताओं का देश है, और हमारी आस्था के रंग भी उतने ही निराले हैं। जहां उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा के दिन हनुमान जन्मोत्सव की धूम रहती है, वहीं दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भक्ति का यह सफर पूरे 41 दिनों तक चलता है। इसे &#39;तेलुगु हनुमान जयंती&#39; के रूप में जाना जाता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-zodiac-signs/dusra-bada-mangal-2026-126051100053_1.html" target="_blank">2nd Bada Mangal 2026: दूसरा बड़ा मंगल 2026: राशिनुसार पूजा करने से मिलेगी समस्त कष्टों से मुक्ति</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	आइए जानते हैं कि आखिर क्यों और कैसे मनाई जाती है यह लंबी और कठिन हनुमान दीक्षा।</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	क्यों अलग है तेलुगु हनुमान जयंती?</h3>
<p>
	ज्यादातर जगहों पर चैत्र पूर्णिमा को बजरंगबली का जन्मदिन मनाया जाता है, लेकिन तेलुगु परंपरा के अनुसार, असली उत्सव चैत्र पूर्णिमा से शुरू होकर ज्येष्ठ मास की दशमी तिथि तक चलता है। इसके पीछे दो प्रमुख मान्यताएं हैं:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मिलन का उत्सव: </strong>कहा जाता है कि दक्षिण के इन क्षेत्रों में यह दिन हनुमान जी के जन्म का नहीं, बल्कि उस खास दिन का प्रतीक है जब रामभक्त हनुमान की मुलाकात पहली बार भगवान श्री राम से हुई थी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>दीक्षा का समापन: </strong>भक्त चैत्र पूर्णिमा से 41 दिनों की &#39;हनुमान दीक्षा&#39; शुरू करते हैं, जिसका समापन ज्येष्ठ दशमी को बड़े उत्सव के साथ होता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	41 दिनों की कठिन &#39;हनुमान दीक्षा&#39; के नियम</h3>
<p>
	तेलुगु राज्यों में हनुमान जी की उपासना किसी कठिन तपस्या से कम नहीं है। भक्त इन नियमों का कड़ाई से पालन करते हैं:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>नारंगी पहचान: </strong>श्रद्धालु विशेष &#39;हनुमान दीक्षा माला&#39; धारण करते हैं और केसरिया या नारंगी रंग की धोती पहनते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>नंगे पैर यात्रा: </strong>पूरे 41 दिनों तक भक्त बिना चप्पल-जूतों के नंगे पैर चलते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<strong>कठोर संयम: </strong>इस अवधि में मांस, मदिरा और धूम्रपान का पूरी तरह त्याग किया जाता है। सात्विक जीवन जीते हुए भक्त जमीन पर ही सोते हैं।<br />
<br />
<p>
	<strong>नित्य पूजा: </strong>प्रतिदिन हनुमान चालीसा का पाठ करना और राम नाम का जप करना अनिवार्य होता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	कैसे होती है पूजा?</h3>
<p>
	हनुमान जयंती के दिन मंदिरों में ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पहले) पूजा का सिलसिला शुरू हो जाता हैं। भक्त बजरंगबली की मूर्ति पर सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करते हैं। उन्हें गेंदे और गुलाब के फूलों से सजाया जाता है। भोग में लड्डू, हलवा और केले के साथ विशेष भीगी दाल चढ़ाई जाती है। बंदरों को भोजन कराना इस दिन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	भारत के अन्य राज्यों में स्थिति</h3>
<p>
	<strong>कर्नाटक: </strong>यहां मार्गशीर्ष त्रयोदशी को &#39;हनुमान व्रतम&#39; मनाया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>तमिलनाडु: </strong>यहां मार्गशीर्ष अमावस्या (दिसंबर-जनवरी) को हनुमथ जयंती मनाई जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	संक्षेप में कहा जाए तो हनुमान पूजा के रूप अलग हो सकते हैं, तिथियां अलग हो सकती हैं, लेकिन हनुमान जी के प्रति अटूट विश्वास हर जगह एक समान है। दक्षिण भारत की यह 41 दिनों की परंपरा हमें सिखाती है कि भक्ति केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक अनुशासित तरीका है।</p>
<p>
	<br />
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/hanuman-jayanti-puja-and-remedies-126051100046_1.html" target="_blank">2026 Telugu Hanuman Jayanti: हनुमान जयंती पर इस तरह करें पूजा, मिलेगा संकटों से मुक्ति का आशीर्वाद</a></strong></p>
	<p>
		 </p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 12 May 2026 10:40:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 12 May 2026 10:48:12 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Jay Hanuman]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[2026 Telugu Hanuman Jayanti: हनुमान जयंती पर इस तरह करें पूजा, मिलेगा संकटों से मुक्ति का आशीर्वाद]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/hanuman-jayanti-puja-and-remedies-126051100046_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/hanuman-jayanti-puja-and-remedies-126051100046_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/27/thumb/1_1/1777285038-8233.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/27/thumb/1_1/1777285038-8233.jpg</image>
      <description><![CDATA[Hanuman Jayanti: हनुमान जयंती का पर्व दक्षिण भारत में खास तौर पर तेलुगु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में 'ज्येष्ठ दशमी' को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में इस बार तेलुगु में हनुमान जयंती 12 मई 2025, दिन मंगलवार को मनाई जा रही है।]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="On the occasion of Hanuman Jayanti, his devotees engaged in worship in Hanuman temple" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/27/full/1777285038-8233.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
</p>
<p>
	<strong>Hanuman jayanti puja method:</strong> उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा को हनुमान जयंती मनाई जाती है, लेकिन दक्षिण भारत, विशेषकर आंध्र प्रदेश, तेलंगाना या तेलुगु में ज्येष्ठ महीने की दशमी तिथि को हनुमान जन्म उत्सव मनाया जाता है। वर्ष 2026 में तेलुगु हनुमान जयंती 12 मई, दिन मंगलवार को मनाई जा रही है। इस विशेष अवसर पर संकटों से मुक्ति पाने के लिए यहां दक्षिण भारतीय परंपरा के अनुसार दी गई पूजा विधि और उपाय अपनाएं: </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	तेलुगु हनुमान जयंती 2026: शुभ मुहूर्त</h3>
<p>
	तारीख: 12 मई 2026, मंगलवार</p>
<p>
	तिथि: ज्येष्ठ मास, कृष्ण पक्ष, दशमी</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	पूजा विधि</h3>
<p>
	तेलुगु राज्यों में हनुमान जी को &#39;कार्यसिद्धि आंजनेय स्वामी&#39; के रूप में पूजा जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>संकल्प और शुद्धि: </strong>सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। यदि आपने 41 दिनों की &#39;हनुमान दीक्षा&#39; ली है, तो विधि-विधान से माला विसर्जन की तैयारी करें। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	- पूजा स्थल को साफ करें और हनुमान जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>तुलसी अर्चन:</strong> हनुमान जी को तुलसी के पत्तों की माला अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। दक्षिण भारत में इसे &#39;तुलसी दल पूजा&#39; कहते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>वड़ा माला (Vada Mala): </strong>संकटों से मुक्ति के लिए भगवान हनुमान को उड़द की दाल के वड़ों की माला अर्पित करें। यह राहु-केतु के दोषों और बाधाओं को दूर करने के लिए अचूक माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सिंदूर लेपन: </strong>भगवान की मूर्ति पर विशेष रूप से सिंदूर या नारंगी चोला चढ़ाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>नैवेद्य (भोग): </strong>भगवान को &#39;चलिविडी&#39; (चावल का आटा और गुड़), &#39;वडापप्पू&#39; (भीगी हुई मूंग दाल) और &#39;पान के पत्ते&#39; अर्पित करें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	संकटों से मुक्ति के लिए विशेष उपाय</h3>
<p>
	यदि आप गंभीर समस्याओं या मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं, तो आज ये कार्य अवश्य करें:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>* हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ: </strong>परिवार के साथ मिलकर 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>* सिंदूर का तिलक: </strong>हनुमान जी के चरणों का सिंदूर अपने माथे पर लगाएं। यह &#39;बुरी नजर&#39; और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>* तुलसी पत्र का सेवन: </strong>भगवान को अर्पित की गई तुलसी का एक पत्ता प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>* दीपक: </strong>शाम के समय तिल के तेल का दीपक जलाएं और &#39;ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय&#39; मंत्र का जाप करें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	पूजा का फल</h3>
<p>
	तेलुगु पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ दशमी के दिन हनुमान पूजा करने से:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	* आर्थिक तंगी और कर्ज से मुक्ति मिलती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	* शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	* कोर्ट-कचहरी और कानूनी मामलों में सफलता प्राप्त होती है।<br />
	<br />
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/hanuman-ji-ke-manpasand-bhog-pasand-ki-list-126040100061_1.html" target="_blank">Hanuman Jayanti 2026: हनुमानजी को बेहद प्रिय हैं ये 7 भोग, पूजा में जरूर लगाएं</a></strong></p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 11 May 2026 16:22:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 11 May 2026 16:18:33 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Jay Hanuman]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Apra Ekadashi Katha: अपरा एकादशी व्रत कथा: पुण्य की शक्ति और प्रेत योनि से मुक्ति की गाथा]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/apra-achala-ekadashi-ki-kahani-2026-126051100015_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/apra-achala-ekadashi-ki-kahani-2026-126051100015_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/11/thumb/1_1/1778479494-1573.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Achala Ekadashi Vrat Story: अचला एकादशी, जिसे ‘व्रत’ या ‘उपवास’ करके भगवान विष्णु की पूजा की जाती है, पापों से मुक्ति और मोक्ष प्राप्ति का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इसे विशेष रूप से धन, सुख और शांति की प्राप्ति के लिए माना जाता है। यह एकादशी शुक्ल पक्ष ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="इमेज में अपरा एकादशी पर शेषनाग पर विराजित श्री लक्ष्मी-नारायण के साथ यज्ञ-पूजन, पुष्प की सजावट और जलते हुए दीपक के फोटो" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/11/full/1778479494-1573.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Achala Ekadashi Katha 2026: </strong>अचला एकादशी हिन्दू धर्म का एक प्रमुख व्रत है, जिसे विष्णु भक्त विशेष श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाते हैं। यह व्रत शुद्धि, पापमोचन और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग बताता है। अचला एकादशी मुख्यतः कृष्ण पक्ष की एकादशी को आती है और इसे अचला नाम इसलिए दिया गया क्योंकि इसका पालन करने से व्यक्ति जीवन में अचल सुख और स्थायी समृद्धि प्राप्त करता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/achala-ekadashi-muhurat-n-puja-vidhi-2026-126051100010_1.html" target="_blank">Achala Ekadashi 2026: अचला एकादशी व्रत का समय, पूजा और पारण विधि</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	अचला एकादशी के दिन उपवास और भक्ति के माध्यम से आध्यात्मिक शक्ति बढ़ती है। यह व्रत खासतौर पर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो धन, स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली के लिए भगवान विष्णु की पूजा करना चाहते हैं। </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	अपरा/अचला एकादशी की कथा: </h3>
<p>
	 </p>
<p>
	प्राचीन भारत की एक विस्मृत कथा है- धर्मात्मा राजा महीध्वज की। महीध्वज जितने न्यायप्रिय और दयालु थे, उनका छोटा भाई वज्रध्वज उतना ही कुटिल और ईर्ष्यालु था। सत्ता और द्वेष की आग में जलते हुए वज्रध्वज ने एक रात अंधेरे का फायदा उठाया और अपने सगे भाई की हत्या कर दी। साक्ष्य मिटाने के लिए उसने राजा के शरीर को एक घने जंगल में पीपल के पेड़ के नीचे दफना दिया।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	प्रेत का साया और ऋषि का आगमन</h3>
<p>
	अकाल मृत्यु और अधर्म के कारण राजा महीध्वज की आत्मा भटकने लगी और वह उसी पीपल पर प्रेत बनकर रहने लगे। उस मार्ग से गुजरने वाले हर व्यक्ति को राजा की अतृप्त आत्मा कष्ट देने लगी। फिर एक दिन वहां आगमन हुआ परम तेजस्वी धौम्य ऋषि का।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	ऋषि ने अपनी योगशक्ति और तपोबल से तुरंत भांप लिया कि यह कोई साधारण उत्पात नहीं, बल्कि एक न्यायप्रिय राजा की विवशता है। ऋषि ने उस प्रेत को पेड़ से नीचे उतारा और उसे उसके पूर्व जन्म का बोध कराया।</p>
<h3>
	 </h3>
<h3>
	करुणा का चमत्कार: अपरा एकादशी का पुण्य</h3>
<p>
	ऋषि धौम्य का हृदय राजा की दशा देख पसीज गया। उन्होंने राजा को इस कष्टकारी योनि से मुक्त कराने का संकल्प लिया। ऋषि ने स्वयं कठिन नियमों के साथ &#39;अपरा एकादशी&#39; का व्रत किया और संध्या के समय अपने व्रत का संपूर्ण पुण्य उस प्रेत रूपी राजा को दान कर दिया।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	मुक्ति का मार्ग</h3>
<p>
	एकादशी का पुण्य मिलते ही चमत्कार हुआ! राजा महीध्वज की प्रेत योनि तत्काल समाप्त हो गई। वह एक दिव्य शरीर धारण कर दैवीय प्रकाश से चमक उठे। ऋषि के चरणों में कृतज्ञता प्रकट करते हुए, राजा पुष्पक विमान पर सवार होकर स्वर्ग लोक की ओर प्रस्थान कर गए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	संक्षेप में कहा जाए तो यह कथा सिखाती है कि अपरा एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि वह दिव्य ऊर्जा है जो मनुष्य के घोर पापों को काटकर उसे पद, प्रतिष्ठा और मोक्ष की ओर ले जाती है। जो भक्त इस दिन श्रद्धा से भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा करते हैं, उनके जीवन में सुखों का अंबार लग जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/apara-ekadashi-2026-kab-hai-tithi-mahatva-vrat-fayde-126050400035_1.html" target="_blank">अपरा एकादशी 2026: कब है तिथि और क्या है इसका धार्मिक महत्व? जानिए सब कुछ</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 11 May 2026 13:01:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 11 May 2026 12:59:33 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[ekadashi vrat katha]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Bada Mangal 2026: बड़ा मंगल के दिनों में करें ये 10 विशेष कार्य, मिलेगा रामदूत हनुमान जी का आशीर्वाद]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/do-these-10-special-things-on-bada-mangal-and-you-will-receive-the-blessings-of-lord-hanuman-126050400009_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/do-these-10-special-things-on-bada-mangal-and-you-will-receive-the-blessings-of-lord-hanuman-126050400009_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/04/thumb/1_1/1777869320-7671.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/04/thumb/1_1/1777869320-7671.jpg</image>
      <description><![CDATA[Jyeshtha Mangal 2026: इस बार हनुमान पूजा के बड़े मंगल के दिन 5 मई 2026 से शुरू हो रहे हैं, जो कि 23 जून तक जारी रहेंगे। इस बार ज्येष्ठ मास में कुल 8 मंगल पड़ेंगे। विशेषकर यदि आप इस समय में हनुमान जी की भक्ति और मंत्रों का जाप करते हैं और इस दिन ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="तस्वीर में बुढ़वा मंगल या बड़ा मंगल के विशेष अवसर पर हनुमान मंदिर में उनका आशीर्वाद पाने हेतु सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ करते बजरंगबली के भक्त" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/04/full/1777869320-7671.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1376px; height: 768px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Tuesday Special Rituals: </strong>जेठ या ज्येष्ठ के महीने में आने वाले मंगलवार को &#39;बड़ा मंगल&#39; या &#39;बुढवा मंगल&#39; कहा जाता है। वर्ष 2026 में ज्येष्ठ के महीने में पुरुषोत्तम/अधिमास का दुर्लभ संयोग बना होने के कारण इस साल 4 की बजाय 8 बड़े मंगल पड़ेंगे, जो 5 मई से शुरू होकर 23 जून 2026 तक चलेंगे। यह दिन भगवान हनुमान जी की कृपा पाने के लिए सबसे शुभ माने जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन बजरंगबली की मुलाकात भगवान श्री राम से हुई थी।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/bada-mangal-2026-dates-126050100016_1.html" target="_blank">Bada Mangal Dates: ज्येष्ठ माह में कब-कब रहेगा बड़ा मंगल, जानें संपूर्ण तिथियां</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	हनुमान जी का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए इस कालावधि में आप ये 10 विशेष कार्य कर सकते हैं:</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ</h3>
<p>
	बड़ा मंगल के दिन सामूहिक या व्यक्तिगत रूप से सुंदरकांड का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है। यदि समय कम हो, तो कम से कम 7 बार हनुमान चालीसा का पाठ अवश्य करें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. चोला अर्पण करें</h3>
<p>
	हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए उन्हें सिंदूर और चमेली के तेल का चोला चढ़ाएं। ध्यान रहे कि सिंदूर नारंगी रंग वाला हो। इससे जीवन के सभी संकट दूर होते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. मीठे पूड़े और शरबत का वितरण</h3>
<p>
	उत्तर प्रदेश, विशेषकर लखनऊ में बड़ा मंगल पर भंडारा करने की विशेष परंपरा है। इस दिन राहगीरों को ठंडा पानी, शरबत और मीठे पूड़े खिलाने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इन दिनों में जगह-जगह भंडारे आयोजित किए जाते हैं। यदि आप यह नहीं कर सकते, तो कम से कम 7 असहाय लोगों को भोजन जरूर कराएं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. पीपल के पत्ते की माला</h3>
<p>
	11 पीपल के पत्ते लें, उन्हें साफ पानी से धोएं और उन पर चंदन से &#39;श्री राम&#39; लिखें। इन पत्तों की माला बनाकर हनुमान जी को अर्पित करने से आर्थिक तंगी दूर होती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. बूंदी के लड्डू का भोग</h3>
<p>
	हनुमान जी को बूंदी के लड्डू या बेसन के लड्डू बहुत प्रिय हैं। बड़ा मंगल पर इसका भोग लगाएं और फिर इसे प्रसाद के रूप में गरीबों में बांट दें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	6. चमेली के तेल का दीपक</h3>
<p>
	शाम के समय हनुमान मंदिर में जाकर चमेली के तेल का दीपक जलाएं। दीपक में लाल रंग की बत्ती या कलावा का प्रयोग करना और भी शुभ माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	7. राम नाम का जप</h3>
<p>
	हनुमान जी राम जी के परम भक्त हैं। उन्हें खुश करने का सबसे आसान तरीका है &#39;राम-राम&#39; नाम का निरंतर जप करना। जहां राम का नाम लिया जाता है, हनुमान जी वहां स्वयं विराजमान रहते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	8. बजरंग बाण का पाठ</h3>
<p>
	यदि आप किसी विशेष शत्रु बाधा या कानूनी उलझन से परेशान हैं, तो बड़ा मंगल के दिन बजरंग बाण का पाठ करना आपके लिए रक्षा कवच का काम करेगा।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	9. दान-पुण्य के कार्य</h3>
<p>
	इस दिन सामर्थ्य अनुसार अनाज, लाल कपड़े, या गुड़ का दान करें। प्यासे पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करना भी इस तपती गर्मी के मौसम में हनुमान जी की सेवा के समान है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	10. ब्रह्मचर्य और सात्विकता का पालन</h3>
<p>
	बड़ा मंगल के दिन पूर्ण रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करें। तामसिक भोजन जैसे- प्याज, लहसुन, मांस-मदिरा से दूर रहें और अपने विचारों को शुद्ध रखें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>विशेष टिप:</strong> हनुमान जी की पूजा करते समय मन में किसी के प्रति द्वेष न रखें। उनकी भक्ति का मूल आधार &#39;सेवा और समर्पण&#39; है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	जय श्री राम! जय बजरंगबली!</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/bada-mangal-ki-kathayen-126050100013_1.html" target="_blank">Bada Mangal 2026: ज्येष्ठ का पहला बड़ा मंगल 5 मई को: बजरंगबली ने क्यों लिया था वृद्ध वानर का रूप? पढ़ें रोंगटे खड़े कर देने वाली ये पौराणिक कथाएं</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 11 May 2026 10:15:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 12 May 2026 16:57:59 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Jay Hanuman]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Saint Taran Taran: मंडलाचार्य तारण तरण स्वामी का गौरवशाली इतिहास]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/jain-religion/saint-taran-taran-gurpurvi-2026-126050800011_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/jain-religion/saint-taran-taran-gurpurvi-2026-126050800011_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/08/thumb/1_1/1778220034-5498.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/08/thumb/1_1/1778220034-5498.jpg</image>
      <description><![CDATA[Taran Taran Ji Festival: संत तारण तरण गुरुपर्वी के दिन ज्येष्ठ वदी छठ पर सुबह के समय गुरु की महिमा के भजनों के साथ प्रभातफेरियां निकाली जाती हैं। जैन समाज में गुरुपर्वी मनाने का ढंग बहुत ही सात्विक और भक्तिमय होता है। यहां गुरुपर्वी से जुड़ी प्रमुख ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p>
		<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
			<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
				<img align="center" alt="चित्र में बेतवा नदी के बीचों-बीच लहरों के एक टापू पर समाए महान जैन संत तारण तरण के पदचिह्न" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/08/full/1778220034-5498.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
		</p>
	</p>
	<p>
		<strong>Gurpurvi 2026 Date:</strong> संत तारण तरण स्वामी की जयंती को उनके अनुयायी &#39;गुरुपर्वी&#39; या &#39;तारण जयंती&#39; के रूप में बड़े ही हर्षोल्लास और आध्यात्मिक भक्ति के साथ मनाते हैं। यह केवल एक तिथि नहीं, बल्कि तारण पंथ के अनुयायियों के लिए आत्म-चिंतन और गुरु के बताए &#39;मोक्ष मार्ग&#39; पर चलने के संकल्प का दिन है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		बुंदेलखंड की माटी में जन्मे एक ऐसे महापुरुष, जिन्होंने न केवल अध्यात्म की गहराई को छुआ, बल्कि &#39;तारण पंथ&#39; के माध्यम से हजारों आत्माओं को मोक्ष का मार्ग दिखाया। यहां हम बात कर रहे हैं मंडलाचार्य संत तारण तरण स्वामी की, जानें तारण पंथ के प्रणेता संत तारण तरण स्वामी के बारे में...</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		पुष्पावती से शुरू हुआ एक आध्यात्मिक सफर</h3>
	<p>
		वि.सं. 1505 का जेठ वदी छठ वह पावन दिन था, जब पुष्पावती (बिलहरी) में गढाशाह जी और माता वीरश्री देवी के आंगन में एक दिव्य ज्योति का अवतरण हुआ। बचपन से ही वैराग्य की ओर झुकाव रखने वाले तारण स्वामी ने मात्र 11 वर्ष की अल्पायु में सम्यक दर्शन प्राप्त कर लिया था।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		21 वर्ष: ब्रह्मचर्य व्रत धारण किया।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		30 वर्ष: सप्तम प्रतिमा के साथ साधना को और गहरा किया।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		60 वर्ष: जैनेश्वरी दीक्षा लेकर पूर्ण वीतरागी दिगंबर संत बन गए।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		क्या है &#39;तारण पंथ&#39;?</h3>
	<p>
		तारण स्वामी ने महावीर की वीतराग परंपरा को आगे बढ़ाते हुए &#39;तारण पंथ&#39; की स्थापना की। इसका सीधा अर्थ है—&#39;वह पंथ जो संसार सागर से पार उतार दे&#39;। 151 मंडलों के आचार्य होने के कारण उन्हें श्रद्धा से &#39;मंडलाचार्य&#39; पुकारा जाता है। आज पूरे भारत में इस पंथ के 4 मुख्य तीर्थ और 115 से अधिक भव्य चैत्यालय उनकी शिक्षाओं का प्रसार कर रहे हैं।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		ज्ञान का अनमोल खजाना: 14 ग्रंथ</h3>
	<p>
		उन्होंने अपनी साधना के अनुभव को 14 महान ग्रंथों में पिरोया, जिन्हें विचार, आचार, सार, ममल और केवल मत जैसे पांच मुख्य भागों में बांटा गया है। इन ग्रंथों का मूल सार जैन धर्म के तीन स्तंभ हैं: सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चारित्र।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		बेतवा का वह जादुई टापू: मल्हारगढ़ की निसई जी</h3>
	<p>
		वि.सं. 1572 में, 66 वर्ष की आयु में, अशोकनगर के मल्हारगढ़ में बेतवा नदी के तट पर उन्होंने सल्लेखनापूर्वक समाधि धारण की। आज यह स्थान किसी चमत्कार से कम नहीं है:</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>नदी के बीच टापू</strong>: गुरुदेव का समाधि स्थल बेतवा नदी के बीचों-बीच एक टापू पर स्थित है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>आस्था की नाव:</strong> हजारों श्रद्धालु आज भी नावों में सवार होकर लहरों को पार करते हैं और गुरु चरणों (पादुकाओं) की वंदना करने पहुंचते हैं।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>निसई जी महोत्सव: </strong>10 एकड़ में फैला यह परिसर और यहां लगने वाला मेला, श्रद्धालुओं के लिए आस्था और शांति का केंद्र है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>निष्कर्ष: </strong>संत तारण तरण स्वामी का जीवन हमें सिखाता है कि आडंबरों से दूर रहकर आत्म-कल्याण के मार्ग पर कैसे बढ़ा जाता है। </p>
	<p style="text-align: center;">
		 </p>
	<p style="text-align: center;">
		<strong>&#39;मल्हारगढ़ की पावन धरा, बेतवा का किनारा। तारण तरण गुरु हमारे, मोक्ष मार्ग का सहारा।&#39;</strong><br />
		<br />
		<p style="text-align: left;">
			ज्ञात हो कि संत तारण तरण गुरुपर्वी ज्येष्ठ (जेठ) वदी छठ को पर्व का मुख्य आयोजन म.प्र. के निसई जी (मल्हारगढ़), पुष्पावती (बिलहरी), सेमरखेड़ी और देश भर के सभी तारण चैत्यालयों में होता है।</p>
		<p>
			 </p>
	</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।</p>
	<p>
		 </p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 08 May 2026 11:35:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 08 May 2026 11:35:48 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Jain Religion]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[अधिक मास में बना दुर्लभ संयोग: ज्येष्ठ माह में 8 बड़े मंगल, जानें इसका खास महत्व]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/adhik-maas-2026-jyeshtha-month-8-bade-mangal-mahatva-126050600031_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/adhik-maas-2026-jyeshtha-month-8-bade-mangal-mahatva-126050600031_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/06/thumb/1_1/1778058080-5025.jpg"/>
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      <description><![CDATA[ज्येष्ठ मास के मंगलवार 'बड़ा मंगल' के रूप में पूजे जाते हैं, जो हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्ति का महापर्व है। सामान्यतः एक माह में 4 या 5 बड़े मंगल आते हैं, परंतु वर्ष 2026 में अधिक मास के कारण पूरे 8 बड़े मंगल का अत्यंत दुर्लभ संयोग बन रहा है। यह ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="With an image of Lord Hanuman and a scene of worship, the caption reads: '8 Bade Mangal'." class="imgCont" height="800" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/06/full/1778058080-5025.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="jyeshtha month 8-bade mangal" width="1200" /></p>
	</p>
	ज्येष्ठ मास के मंगलवार &#39;बड़ा मंगल&#39; के रूप में पूजे जाते हैं, जो हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्ति का महापर्व है। सामान्यतः एक माह में 4 या 5 बड़े मंगल आते हैं, परंतु वर्ष 2026 में अधिक मास के कारण पूरे 8 बड़े मंगल का अत्यंत दुर्लभ संयोग बन रहा है। यह पावन अवधि 02 मई से 29 जून तक रहेगी।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	महत्व एवं लाभ:</h3>
<p>
	<strong>संकट मुक्ति: </strong>विधि-विधान से व्रत और पूजन करने से जीवन के समस्त रोग, कष्ट और बाधाएं दूर होती हैं।</p>
<p>
	<strong>ग्रह दोष निवारण: </strong>इन दिनों बजरंगबली की आराधना से शनि और मंगल दोष सहित अन्य ग्रह बाधाओं से राहत मिलती है।</p>
<p>
	<strong>मानसिक शक्ति: </strong>हनुमान जी का स्मरण साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है, जिससे भय और तनाव का नाश होता है।</p>
<p>
	<strong>पूजा के विशेष सूत्र: </strong></p>
<p>
	हनुमान चालीसा, सुंदरकांड का पाठ और "ॐ हनुमते नमः" मंत्र का जप इस दुर्लभ संयोग में अनंत गुना फल प्रदान करने वाला माना गया है।</p>
<p>
	<table align="center" border="1" cellpadding="1" cellspacing="1" style="width: 100%">
		<tbody>
			<tr>
				<td style="background-color: rgb(255, 255, 204); border-color: rgb(102, 153, 0);">
					<strong>बड़ा मंगल</strong></td>
				<td style="background-color: rgb(255, 255, 204); border-color: rgb(102, 153, 0);">
					<strong>तिथि</strong></td>
				<td style="background-color: rgb(255, 255, 204); border-color: rgb(102, 153, 0);">
					<strong>दिन</strong></td>
			</tr>
			<tr>
				<td style="background-color: rgb(255, 255, 204); border-color: rgb(102, 153, 0);">
					पहला बड़ा मंगल</td>
				<td style="background-color: rgb(255, 255, 204); border-color: rgb(102, 153, 0);">
					05 मई, 2026</td>
				<td style="background-color: rgb(255, 255, 204); border-color: rgb(102, 153, 0);">
					मंगलवार</td>
			</tr>
			<tr>
				<td style="background-color: rgb(255, 255, 204); border-color: rgb(102, 153, 0);">
					दूसरा बड़ा मंगल</td>
				<td style="background-color: rgb(255, 255, 204); border-color: rgb(102, 153, 0);">
					12 मई, 2026</td>
				<td style="background-color: rgb(255, 255, 204); border-color: rgb(102, 153, 0);">
					मंगलवार</td>
			</tr>
			<tr>
				<td style="background-color: rgb(255, 255, 204); border-color: rgb(102, 153, 0);">
					<span style="color: rgb(48, 48, 48); font-family: "Open Sans", arial, helvetica, sans-serif; font-size: 17px;">तीसरा बड़ा मंगल</span></td>
				<td style="background-color: rgb(255, 255, 204); border-color: rgb(102, 153, 0);">
					19 मई, 2026</td>
				<td style="background-color: rgb(255, 255, 204); border-color: rgb(102, 153, 0);">
					मंगलवार</td>
			</tr>
			<tr>
				<td style="background-color: rgb(255, 255, 204); border-color: rgb(102, 153, 0);">
					<span style="color: rgb(48, 48, 48); font-family: "Open Sans", arial, helvetica, sans-serif; font-size: 17px;">चौथा बड़ा मंगल</span></td>
				<td style="background-color: rgb(255, 255, 204); border-color: rgb(102, 153, 0);">
					26 मई, 2026</td>
				<td style="background-color: rgb(255, 255, 204); border-color: rgb(102, 153, 0);">
					मंगलवार</td>
			</tr>
			<tr>
				<td style="background-color: rgb(255, 255, 204); border-color: rgb(102, 153, 0);">
					<span style="color: rgb(48, 48, 48); font-family: "Open Sans", arial, helvetica, sans-serif; font-size: 17px;">पांचवां बड़ा मंगल</span></td>
				<td style="background-color: rgb(255, 255, 204); border-color: rgb(102, 153, 0);">
					02 जून, 2026</td>
				<td style="background-color: rgb(255, 255, 204); border-color: rgb(102, 153, 0);">
					मंगलवार</td>
			</tr>
			<tr>
				<td style="background-color: rgb(255, 255, 204); border-color: rgb(102, 153, 0);">
					<span style="color: rgb(48, 48, 48); font-family: "Open Sans", arial, helvetica, sans-serif; font-size: 17px;">छठा बड़ा मंगल</span></td>
				<td style="background-color: rgb(255, 255, 204); border-color: rgb(102, 153, 0);">
					09 जून, 2026</td>
				<td style="background-color: rgb(255, 255, 204); border-color: rgb(102, 153, 0);">
					मंगलवार</td>
			</tr>
			<tr>
				<td style="background-color: rgb(255, 255, 204); border-color: rgb(102, 153, 0);">
					<span style="color: rgb(48, 48, 48); font-family: "Open Sans", arial, helvetica, sans-serif; font-size: 17px;">सातवां बड़ा मंगल</span></td>
				<td style="background-color: rgb(255, 255, 204); border-color: rgb(102, 153, 0);">
					16 जून, 2026</td>
				<td style="background-color: rgb(255, 255, 204); border-color: rgb(102, 153, 0);">
					मंगलवार</td>
			</tr>
			<tr>
				<td style="background-color: rgb(255, 255, 204); border-color: rgb(102, 153, 0);">
					<span style="color: rgb(48, 48, 48); font-family: "Open Sans", arial, helvetica, sans-serif; font-size: 17px;">आठवां बड़ा मंगल</span></td>
				<td style="background-color: rgb(255, 255, 204); border-color: rgb(102, 153, 0);">
					23 जून, 2026</td>
				<td style="background-color: rgb(255, 255, 204); border-color: rgb(102, 153, 0);">
					मंगलवार</td>
			</tr>
		</tbody>
	</table>
</p>
<h3>
	ज्येष्ठ माह के बड़े मंगल में करें ये सरल उपाय: </h3>
<ul>
	<li>
		हनुमान जी को चोला चढ़ाएं।</li>
	<li>
		हनुमान चालीसा का पाठ करें।</li>
	<li>
		“ॐ हनुमते नमः” मंत्र का जप करें।</li>
	<li>
		मीठा भोग अर्पित करें।</li>
	<li>
		जरूरतमंदों को दान करें।</li>
	<li>
		बंदरों को भोजन कराएं।</li>
	<li>
		शाम को दीपक जलाएं।</li>
</ul>]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 06 May 2026 14:24:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 13 May 2026 18:31:46 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Jay Hanuman]]></category>
      <authorname>अनिरुद्ध जोशी</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Purushottam Maas: पुरुषोत्तम मास की महिमा (पुरुषोत्तम मास महात्म्य), जानें मुख्य 6 बिंदु]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/religious-article/significance-of-purushottam-maas-126050600007_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/religious-article/significance-of-purushottam-maas-126050600007_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/06/thumb/1_1/1778045073-3867.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Purushottam Maas 2026: पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) को हिंदू धर्म शास्त्रों में सभी मासों में सर्वश्रेष्ठ और सर्वाधिक फलदायी बताया गया है। पद्म पुराण और स्कंद पुराण जैसे ग्रंथों में इसकी महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है। पुरुषोत्तम मास विशेष रूप से ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="चित्र में क्षीरसागर में अनंत शेषनाग की शय्या पर विराजमान भगवान श्रीहरि विष्णु के साथ उनके मंदिर, सूर्यदेव और पुरुषोत्तम मास 2026 के महत्व को दर्शाता फोटो" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/06/full/1778045073-3867.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
	<br />
	<strong>Purushottam Maas Spiritual Significance: </strong>पुरुषोत्तम मास हिन्दू पंचांग में एक अत्यंत शुभ और विशेष मास माना जाता है। इसे अधिक मास या Adhik Maas के समान ही महत्त्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस दौरान किए जाने वाले व्रत, पूजा और दान का फल सामान्य मासों की तुलना में कई गुना अधिक होता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस मास में भगवान विष्णु की भक्ति और पूजा से व्यक्ति के पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आती है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/saal-me-2-bar-kyon-aata-hai-kharmas-malamasa-adhikmas-purushottam-mas-126031100035_1.html" target="_blank">साल में 2 बार क्यों आता है खरमास? जानिए मलमास, अधिकमास और पुरुषोत्तम मास का रहस्य</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	वर्ष 2026 में 17 मई से 15 जून तक पुरुषोत्तम/ अधिकमास होने के कारण इस वर्ष ज्येष्ठ का महीना लगभग साठ (60) दिनों का होगा। इस मास का मुख्य उद्देश्य आत्मा और परमात्मा के बीच संबंध को मजबूत करना है। इस दौरान किए जाने वाले अनुष्ठान, व्रत और दान का महत्व बहुत अधिक है। पुरुषोत्तम मास में भगवान विष्णु की विशेष आराधना, दान-पुण्य, और सत्य और धर्म के मार्ग पर चलना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	यहां पुरुषोत्तम मास के महात्म्य/ महिमा के संबंध में मुख्य 7 बिंदु दिए गए हैं:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. इसका नाम &#39;पुरुषोत्तम&#39; कैसे पड़ा?</h3>
<p>
	प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, भारतीय काल गणना में सूर्य और चंद्र मास के बीच सामंजस्य बिठाने के लिए हर तीसरे वर्ष एक अतिरिक्त महीना जुड़ता है। पहले इसे &#39;मलमास&#39; (मैल वाला मास) कहकर त्याज्य माना जाता था क्योंकि इसमें कोई देवता अधिपति नहीं थे।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	तब भगवान विष्णु ने इस मास को अपना स्वयं का नाम &#39;पुरुषोत्तम&#39; दिया और कहा—</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>&#39;जो फल अन्य महीनों में कठिन तपस्या से मिलता है, वह इस मास में केवल भक्ति और दान से प्राप्त होगा। इस मास का स्वामी मैं स्वयं हूं।&#39;</strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. आध्यात्मिक एवं धार्मिक महत्व</h3>
<p>
	इस मास की महिमा अपरंपार है क्योंकि यह पूरी तरह &#39;अध्यात्म&#39; को समर्पित है:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>पुण्य की अनंतता:</strong> मान्यता है कि इस मास में किया गया एक छोटा सा शुभ कार्य (जैसे जप या दीपदान) सामान्य समय की तुलना में हजार गुना अधिक फल देता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>पापों का शमन: </strong>इस माह में पवित्र नदियों में स्नान और श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मोक्ष की प्राप्ति: </strong>जो साधक इस मास में पूर्ण सात्विकता और भक्ति के साथ व्रत रखते हैं, उन्हें मरणोपरांत वैकुंठ धाम (विष्णु लोक) की प्राप्ति होती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. &#39;33&#39; के अंक का विशेष महत्व</h3>
<p>
	पुरुषोत्तम मास में &#39;33&#39; की संख्या को अत्यंत पवित्र माना गया है। महात्म्य के अनुसार:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	इस मास में 33 मालपुआ का दान करने का विधान है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	ये 33 मालपुए 33 देवताओं (12 आदित्य, 8 वसु, 11 रुद्र, 1 प्रजापति और 1 वषट्कार) के प्रतीक माने जाते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	दान के समय <strong>&#39;ॐ नमो भगवते वासुदेवाय&#39; </strong>मंत्र का उच्चारण करने से दरिद्रता का नाश होता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/religious-stories/mythological-significance-and-legend-of-purushottam-maas-126042700050_1.html" target="_blank">पुरुषोत्तम मास का पौराणिक महत्व और कथा</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टि</h3>
<p>
	केवल धार्मिक ही नहीं, इस मास का व्यावहारिक महत्व भी है:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>आत्म-मंथन का समय: </strong>चूंकि इस महीने में विवाह या गृह-प्रवेश जैसे सांसारिक उत्सव नहीं होते, इसलिए यह समय व्यक्ति को अपनी अंतरात्मा की ओर मुड़ने, ध्यान लगाने और मानसिक शांति प्राप्त करने का अवसर देता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>स्वास्थ्य लाभ:</strong> इस दौरान व्रत और सात्विक आहार लेने से शरीर का शुद्धिकरण (Detoxification) होता है, जो बदलते मौसम के अनुकूल शरीर को तैयार करता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. मुख्य कथा का सार</h3>
<p>
	पुरुषोत्तम मास के महात्म्य में राजा दृढ़धन्वा और अग्निदेव की कथाएं आती हैं, जहां यह बताया गया है कि कैसे एक अहंकारी व्यक्ति भी इस मास के नियमों का पालन कर परम पद को प्राप्त कर सकता है। यह मास सिखाता है कि ईश्वर की शरण में आने पर &#39;मैल&#39; (मलमास) भी &#39;अमृत&#39; (पुरुषोत्तम) बन जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	6. पुरुषोत्तम मास का मूल संदेश</h3>
<p>
	<strong>&#39;न जातु कामान्न भयान्न लोभात्, धर्मं त्यजेज्जीवितस्यापि हेतोः।&#39;</strong></p>
<p>
	(अर्थात: काम, भय या लोभ के कारण कभी धर्म का त्याग नहीं करना चाहिए।) यह मास हमें अपने कर्तव्यों और ईश्वर के प्रति समर्पण की याद दिलाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/other-festivals/purushottam-maas-dos-and-donts-2026-126050500017_1.html" target="_blank">Purushottam Maas 2026: पुरुषोत्तम मास में क्या करें और क्या नहीं?</a></strong></p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 06 May 2026 11:04:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 06 May 2026 10:58:48 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Religious Article]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Jyeshtha Month Bada Mangal 2026: ज्येष्ठ में 8 बड़े मंगल: क्यों बन रहा है यह महीना खास]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/8-bade-mangals-in-jyeshtha-why-is-this-month-becoming-special-126050600006_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/8-bade-mangals-in-jyeshtha-why-is-this-month-becoming-special-126050600006_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/01/thumb/1_1/1777617769-808.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Bada Mangal Auspicious Day: ज्येष्ठ माह और अधिक मास का मिलन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत दुर्लभ और फलदायी माना जाता है। इस बार ज्येष्ठ माह में 8 बड़े मंगल (बुढ़वा मंगल) का आना एक ऐसा अद्भुत संयोग है जो दशकों में एक बार बनता है। यहां इस विशेष संयोग का ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p>
		<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
			<img align="center" alt="ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले 8 बड़े मंगल के अद्‍भुत संयोग पर बजरंगबली की आराधना करते हुए उनके भक्त। चित्र में पूजन की थाली, हनुमान मंदिर में पूजन तथा भंडारे का आयोजन का फोटो" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/01/full/1777617769-808.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1376px; height: 768px;" title="" /></p>
	</p>
	<p>
		<strong>adhik maas 2026: </strong>इस ज्येष्ठ मास 2026 में एक अद्भुत अधिक मास का संयोग बन रहा है, जो सभी धर्मप्रेमियों के लिए बेहद खास है। इस मास में कुल 8 बड़े मंगल होंगे, हमारे जीवन, स्वास्थ्य, व्यवसाय और संबंधों पर भी गहरा प्रभाव डालते हैं। अधिक मास या Adhik Maas को हिन्दू पंचांग में विशेष महत्व दिया गया है। इसे धार्मिक अनुष्ठानों, व्रतों और पूजा-पाठ के लिए शुभ माना जाता है। यही कारण है कि इस मास में किए जाने वाले कर्म और दान का फल कई गुना अधिक होता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/religious-article/jyeshtha-month-dos-and-donts-2026-126050200005_1.html" target="_blank">Jyeshtha Month 2026: ज्येष्ठ माह में क्या करें और क्या नहीं?</a></strong></p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		1. ज्येष्ठ माह और &#39;बड़े मंगल&#39; का संबंध</h3>
	<p>
		हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास के सभी मंगलवार को &#39;बड़ा मंगल&#39; या &#39;बुढ़वा मंगल&#39; कहा जाता है। मान्यता है कि इसी माह में हनुमान जी की मुलाकात प्रभु श्री राम से हुई थी। साथ ही, भीम का गर्व चूर करने के लिए हनुमान जी ने इसी महीने में वृद्ध वानर का रूप धारण किया था, इसलिए इसे &#39;बुढ़वा मंगल&#39; भी कहते हैं।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		2. अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) का प्रभाव</h3>
	<p>
		जब ज्येष्ठ माह में अधिक मास जुड़ जाता है, तो महीनों की अवधि बढ़ जाती है। इसी कारण इस बार मंगलवारों की संख्या सामान्य से बढ़कर 8 हो गई है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>महत्व और जानें 8 बड़े मंगल का फल: किसे क्या मिलेगा: </strong>अधिक मास के स्वामी भगवान विष्णु हैं और ज्येष्ठ के मंगल के आराध्य हनुमान जी (शिव अवतार) हैं। इस संयोग में पूजा करने से हरि (विष्णु) और हर (महादेव/हनुमान) दोनों की कृपा एक साथ प्राप्त होती है। </p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>भक्तों के लिए:<span style="white-space:pre"> </span></strong>हनुमान जी की विशेष साधना से &#39;अष्ट सिद्धि और नौ निधि&#39; की प्राप्ति की राह आसान होती है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>ग्रह दोष</strong>: कुंडली में मंगल दोष और शनि की ढैया/साढ़ेसाती के प्रभाव को कम करने के लिए यह सर्वोत्तम समय है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>संकट मुक्ति: </strong>8 मंगल का अर्थ है- निरंतर 8 सप्ताह तक संकटमोचन की आराधना, जो पुराने रोगों और ऋण (कर्ज) से मुक्ति दिलाती है।</p>
	<p>
		<br />
		<h3>
			8 बड़े मंगल की तिथियां 2026: </h3>
		<p>
			 </p>
		<p>
			1. 5 मई 2026 पहला बड़ा मंगल</p>
		<p>
			2. 12 मई 2026 दूसरा बड़ा मंगल</p>
		<p>
			3. 19 मई 2026 तीसरा बड़ा मंगल</p>
		<p>
			4. 26 मई 2026 चौथा बड़ा मंगल</p>
		<p>
			5. 2 जून 2026 पांचवां</p>
		<p>
			6. 9 जून 2026 छठा</p>
		<p>
			7. 16 जून 2026 सातवां</p>
		<p>
			8. 23 जून 2026 आठवां समापन।<br />
			 </p>
	</p>
	<h3>
		इस अद्भुत संयोग में क्या करें?</h3>
	<p>
		<strong>सुंदरकांड का पाठ: </strong>इन आठों मंगलवार को सुंदरकांड या हनुमान चालीसा का पाठ करना विशेष फलदायी है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>चोला अर्पण: </strong>हनुमान जी को सिंदूर और चमेली के तेल का चोला चढ़ाएं।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>भंडारा और दान:</strong> बड़े मंगल पर गुड़, चना और ठंडे पानी का दान करना सबसे पुण्यकारी माना जाता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>पीपल पूजन: </strong>अधिक मास होने के कारण पीपल के पेड़ के नीचे दीप दान करें, जिससे पितृ दोष और मानसिक अशांति दूर होती है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>विशेष नोट: </strong>यह समय &#39;संकल्प&#39; लेने के लिए सर्वश्रेष्ठ है। यदि आप किसी विशेष कार्य की सिद्धि चाहते हैं, तो इन 8 मंगलवारों का व्रत या विशेष अनुष्ठान आपके जीवन के बड़े अवरोधों को हटा सकता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/bada-mangal-2026-dates-126050100016_1.html" target="_blank">Bada Mangal Dates: ज्येष्ठ माह में कब-कब रहेगा बड़ा मंगल, जानें संपूर्ण तिथियां</a></strong></p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 06 May 2026 10:05:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 06 May 2026 16:01:40 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Hindu Religion]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Purushottam Maas 2026: पुरुषोत्तम मास में क्या करें और क्या नहीं?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/purushottam-maas-dos-and-donts-2026-126050500017_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2025-12/18/thumb/1_1/1766053493-2118.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Purushottam month 2026: भारतीय संस्कृति और हिंदू धर्म में पुरुषोत्तम मास जिसे अधिक मास या मलमास भी कहा जाता है, को आध्यात्मिक शुद्धि और पुण्य संचय के लिए सर्वोत्तम माना गया है। यह महीना भगवान विष्णु (पुरुषोत्तम) को समर्पित है। यहां इस मास के दौरान ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="तस्वीर में धार्मिक स्थल, धर्मध्वजा, नदी स्नान, नौकाएं, श्रीहरि पुरुषोत्तम की पालकी यात्रा के साथ उनके भक्तों का वर्णन करता चित्र" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2025-12/18/full/1766053493-2118.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
</p>
<p>
	<strong>Purushottam Adhik Maas 2026:</strong> पुरुषोत्तम मास, जिसे अधिक मास या मलमास भी कहा जाता है, हिन्दू पंचांग में एक अत्यंत पवित्र और विशेष मास होता है। यह मास लगभग हर 2–3 साल में एक बार आता है और इसे भगवान विष्णु का विशेष मास माना जाता है। इस मास की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस दौरान किए गए पूजा, व्रत और दान के फल हजारों मासों के बराबर माने जाते हैं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/religious-stories/mythological-significance-and-legend-of-purushottam-maas-126042700050_1.html" target="_blank">पुरुषोत्तम मास का पौराणिक महत्व और कथा</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	पुरुषोत्तम मास की उत्पत्ति पंचांग में सूर्य और चंद्रमा की गति के अंतर के कारण होती है। जब सौर वर्ष और चंद्र वर्ष के दिन मेल नहीं खाते, तो यह अतिरिक्त मास आता है, जिसे अधिक मास/ मलमास कहा जाता है। हिन्दू धर्म में इसे बहुत शुभ माना जाता है। इसे भगवान विष्णु यानी पुरुषोत्तम की आराधना और आत्मशुद्धि का अवसर कहा गया है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	आइए जानते हैं पुरुषोत्तम मास में क्या करें, क्या न करें...</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	क्या करें</h3>
<p>
	• इस महीने में किए गए धार्मिक कार्यों का फल अन्य महीनों की तुलना में कई गुना अधिक मिलता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>• भगवान विष्णु की उपासना:</strong> प्रतिदिन &#39;ॐ नमो भगवते वासुदेवाय&#39; मंत्र का जाप करें। विष्णु सहस्रनाम या पुरुष सूक्त का पाठ करना अत्यंत लाभकारी है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>• दान-पुण्य: </strong>इस माह में दान का विशेष महत्व है। विशेषकर मालपुआ, घी, अनाज, गुड़, वस्त्र और तांबे के बर्तनों का दान शुभ माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>• दीपदान:</strong> शाम के समय तुलसी के पास, मंदिर में या पवित्र नदियों के किनारे दीपदान करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>• पवित्र स्नान: </strong>संभव हो तो सूर्योदय से पूर्व किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि घर पर हैं, तो नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>• श्रीमद्भगवद्गीता कथा का श्रवण: </strong>इस मास में श्रीमद्भगवद्गीता अथवा भागवत पुराण या रामायण का पाठ करने या सुनने से मानसिक शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>• सात्विक आहार: </strong>भोजन में सात्विकता बनाए रखें और सादा भोजन ग्रहण करें।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/saal-me-2-bar-kyon-aata-hai-kharmas-malamasa-adhikmas-purushottam-mas-126031100035_1.html" target="_blank">साल में 2 बार क्यों आता है खरमास? जानिए मलमास, अधिकमास और पुरुषोत्तम मास का रहस्य</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	क्या न करें</h3>
<p>
	<p>
		पुरुषोत्तम मास को &#39;मलमास&#39; भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि इसमें सांसारिक मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>• मांगलिक कार्य:</strong> इस दौरान विवाह, मुंडन, यज्ञोपवीत (जनेऊ), नामकरण और नए घर का गृह प्रवेश जैसे बड़े संस्कार नहीं किए जाते।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>• नई संपदा की शुरुआत: </strong>नया व्यवसाय शुरू करना, नया घर या वाहन खरीदना और भूमि पूजन जैसे कार्यों से बचना चाहिए।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>• तामसिक भोजन का त्याग: </strong>मांस, मदिरा, प्याज, लहसुन और नशीले पदार्थों का सेवन पूरी तरह वर्जित है। इसके अलावा शहद, राई और उड़द की दाल का सेवन भी कम करने की सलाह दी जाती है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>• क्रोध और विवाद:</strong> मानसिक शुद्धि के लिए इस महीने में किसी की निंदा करना, झूठ बोलना या क्रोध करना वर्जित माना गया है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>• विलासिता का त्याग: </strong>अत्यधिक विलासितापूर्ण जीवनशैली और शारीरिक सुखों के पीछे भागने के बजाय सादगी अपनानी चाहिए।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>विशेष बात:</strong> पुरुषोत्तम मास &#39;अध्यात्म&#39; का महीना है। इसे सांसारिक कार्यों से ब्रेक लेकर ईश्वर से जुड़ने का एक अवसर माना जाना चाहिए।</p>
</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	पुरुषोत्तम मास-FAQs</h3>
<p>
	<strong>1. पुरुषोत्तम मास क्या है?</strong></p>
<p>
	पुरुषोत्तम मास, जिसे अधिक मास या मलमास भी कहते हैं, हिन्दू पंचांग में आने वाला एक पवित्र मास है। यह मास तब आता है जब सौर और चंद्र कैलेंडर में तिथियों का मेल नहीं बैठता, इसलिए एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। इसे भगवान विष्णु / पुरुषोत्तम का मास माना जाता है और इस मास में की गई पूजा, दान और व्रत का फल हजारों मासों के बराबर होता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>2. पुरुषोत्तम मास कब आता है?</strong></p>
<p>
	पुरुषोत्तम मास हर 2–3 साल में एक बार आता है। वर्ष 2026 में ज्येष्ठ अधिकमास का प्रारंभ: 17 मई 2026 (रविवार) से होगा और समापन 15 जून 2026 (सोमवार) को होगा।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>3. पुरुषोत्तम मास और अधिमास / मलमास में क्या अंतर है?</strong></p>
<p>
	• अधिमास / मलमास: यह सामान्य नाम है जब कोई अतिरिक्त महीना चंद्र मास के अनुसार आता है। </p>
<p>
	• पुरुषोत्तम मास: विशेष रूप से यह अधिमास भगवान विष्णु की पूजा और व्रत के लिए पवित्र माना जाता है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	संक्षेप में कहा जाए तो पुरुषोत्तम मास आध्यात्मिक उन्नति का समय है। पूजा, व्रत, दान, कथा और सत्कर्म करना चाहिए, जबकि बुरे कर्म, झूठ, मांसाहार और नकारात्मक गतिविधियों से बचना चाहिए।<br />
	<br />
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/religious-stories/mythological-significance-and-legend-of-purushottam-maas-126042700050_1.html" target="_blank">पुरुषोत्तम मास का पौराणिक महत्व और कथा</a></strong></p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 05 May 2026 12:10:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 05 May 2026 12:04:42 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Other Festivals]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Budhwa Mangal 2026: 8 बड़े मंगल का अद्भुत संयोग! आज पहला 'बुढ़वा मंगल': भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/today-first-jyeshtha-mangal-dont-these-5-mistakes-126050500013_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/today-first-jyeshtha-mangal-dont-these-5-mistakes-126050500013_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/05/thumb/1_1/1777954970-817.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Bada Maha Mangal: ज्येष्ठ का 'महा-मंगल' उत्सव यानी बजरंगबली की भक्ति का सबसे बड़ा महीना 5 मई 2026 से शुरू हो गया है, जिसे हम बड़ा मंगल या बुढ़वा मंगल के नाम से जानते हैं। बहुत से लोग इसे विशेष अवसर मानकर अपने घर या मंदिर में मंगल पूजा करते हैं।]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="बड़ा मंगल के अवसर पर श्री बजरंगबली का पूजन करते उनके भक्त। चित्र में मंदिर, ध्वज, पताका, जलते दीये, पुष्‍प-माला और नैवेद्य का खास फोटो" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/05/full/1777954970-817.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1209px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>Jyeshtha Mangal 2026: </strong>भारतीय पंचांग और ज्योतिष शास्त्र में मंगल का ग्रह अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। मंगल केवल युद्ध और शक्ति का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह साहस, ऊर्जा, आत्मविश्वास और कार्यक्षमता का भी प्रतिनिधित्व करता है। ज्येष्ठ माह में पड़ने वाला मंगल विशेष रूप से ज्येष्ठ मंगल या बड़ा मंगल कहा जाता है। यह दिन समाज और व्यक्तिगत जीवन में नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने, शत्रुओं पर विजय पाने और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए बहुत ही शुभ माना जाता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/bada-mangal-puja-shubh-muhurat-2026-126050400021_1.html" target="_blank">Bada Mangal 2026: क्या आप जानते हैं ज्येष्ठ मंगल को &#39;बड़ा मंगल&#39; क्यों कहते हैं? जानें सटीक पूजा विधि और शुभ मुहूर्त</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	वर्ष 2026 में 2 मई से आस्था और शक्ति का संगम &#39;ज्येष्ठ मास&#39; दस्तक दे चुका है। इस बार का ज्येष्ठ महीना भक्तों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि 5 मई से शुरू होकर 23 जून तक चलने वाले इस भक्ति के उत्सव में कुल 8 &#39;बड़े मंगल&#39; (बुढ़वा मंगल) का दुर्लभ संयोग बन रहा है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	माना जाता है कि यही वह पावन महीना था जब त्रेतायुग में रामभक्त हनुमान की मुलाकात अपने प्रभु श्री राम से हुई थी। शायद इसीलिए, इन दिनों की गई पूजा सीधे बजरंगबली के हृदय तक पहुंचती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	सावधान! इन 5 बातों का रखें खास ख्याल:</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>हनुमान जी की कृपा चाहिए, तो अपनी दिनचर्या में ये बदलाव जरूर करें:</strong><strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/bada-mangal-2026-dates-126050100016_1.html" target="_blank">Bada Mangal Dates: ज्येष्ठ माह में कब-कब रहेगा बड़ा मंगल, जानें संपूर्ण तिथियां</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>तामसिक चीजों का त्याग: </strong>लहसुन, प्याज, नॉनवेज और शराब से दूरी बना लें। सात्विक रहें, सकारात्मक रहें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>लेन-देन से बचें: </strong>ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, बड़े मंगल के दिन न कर्ज दें और न ही लें। यह आर्थिक तंगी का कारण बन सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>रंगों का चुनाव: </strong>आज के दिन सफेद और काले रंग के कपड़ों को अलमारी में रहने दें। लाल या पीले वस्त्र धारण करना शुभता का प्रतीक है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>यात्रा का विचार:</strong> आज उत्तर दिशा में &#39;दिशाशूल&#39; है। अगर निकलना जरूरी हो, तो गुड़ खाकर ही घर से बाहर कदम रखें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>व्यवहार में संयम: </strong>क्रोध और अपशब्दों पर लगाम लगाएं। ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए मन को &#39;राम-नाम&#39; में लगाएं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	जय बजरंगबली!</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/bada-mangal-ki-kathayen-126050100013_1.html" target="_blank">Bada Mangal 2026: क्यों लिया था बजरंगबली ने वृद्ध वानर का रूप? पढ़ें रोंगटे खड़े करने वाली 3 पौराणिक कथाएं</a></strong></p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 05 May 2026 10:07:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 05 May 2026 10:14:58 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Jay Hanuman]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Jyeshtha Month 2026: ज्येष्ठ माह में क्या करें और क्या नहीं?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/religious-article/jyeshtha-month-dos-and-donts-2026-126050200005_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/religious-article/jyeshtha-month-dos-and-donts-2026-126050200005_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/02/thumb/1_1/1777696322-7449.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/02/thumb/1_1/1777696322-7449.jpg</image>
      <description><![CDATA[Jyeshtha mass dos and donts: ज्येष्ठ मास हिन्दू पंचांग का एक बहुत ही विशेष महीना माना जाता है। यह आमतौर पर मई-जून में आता है और इस महीने में कुछ शुभ और अशुभ कार्यों की जानकारी रखना बेहद लाभकारी होता है। नीचे ज्येष्ठ मास में क्या करें और क्या नहीं ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="तस्वीर में ज्येष्ठ मास में करने योग्य विशेष कार्यों जैसे प्याऊ लगाना, पशु-पक्षियों के लिए सकोरे रखना, पौधों को पानी देना आदि से संबंधित जानकारी देता चित्र" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/02/full/1777696322-7449.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Jyeshtha Maah 2026:</strong> ज्येष्ठ मास हिंदू कैलेंडर का तीसरा महीना है, जिसमें सूर्य अपनी पूरी तपिश पर होता है। इस महीने में प्रकृति और स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर कुछ विशेष नियम बनाए गए हैं। ज्येष्ठ मास का महत्व धार्मिक, आध्यात्मिक और मौसमीय दृष्टि से बहुत अधिक है। ज्येष्ठ मास को भगवान विष्णु और विशेष रूप से पितृ देवताओं की पूजा का समय भी माना जाता है। &#39;ज्येष्ठ&#39; का अर्थ बड़ा भी होता है, इसलिए यह महीना अनुशासन और संयम का संदेश देता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/hindu-jyeshtha-month-2026-festivals-126043000040_1.html" target="_blank">Jyeshtha month festivals 2026: ज्येष्ठ माह के व्रत एवं त्योहार की लिस्ट</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	यहां ज्येष्ठ माह के लिए महत्वपूर्ण &#39;क्या करें&#39; और &#39;क्या नहीं&#39; से संबंधित खास जानकारी प्रस्तुत की गई है:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	क्या करें (Dos)</h3>
<p>
	<strong>1. जल/पानी का दान: </strong>इस महीने में प्याऊ लगवाना, पशु-पक्षियों के लिए परिंडे या सकोरे रखना और प्यासे को पानी पिलाना सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>2. पेड़-पौधों की सेवा: </strong>भीषण गर्मी के कारण पौधों को जल देना और नए पौधे लगाना, विशेषकर छायादार वृक्ष का रोपण करना बहुत शुभ होता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>3. खाने-पीने ठंडी चीजों का दान: </strong>इस माह में सत्तू, तिल, चंदन, गुड़, तरबूज और खरबूजे आदि वस्तुओं का दान करना चाहिए। ज्येष्ठ पूर्णिमा और निर्जला एकादशी पर दान का विशेष महत्व है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>4. हनुमान जी की पूजा: </strong>ज्येष्ठ के मंगलवार को &#39;बड़ा मंगल&#39; (बुढ़वा मंगल) कहा जाता है। इस दिन हनुमान जी की आराधना और भंडारा करना कष्टों से मुक्ति दिलाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>5. दोपहर में विश्राम: </strong>आयुर्वेद के अनुसार, इस महीने की गर्मी से बचने के लिए दोपहर में थोड़ा विश्राम करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/bada-mangal-ki-kathayen-126050100013_1.html" target="_blank">Bada Mangal 2026: ज्येष्ठ का पहला बड़ा मंगल 5 मई को: बजरंगबली ने क्यों लिया था वृद्ध वानर का रूप? पढ़ें रोंगटे खड़े कर देने वाली ये पौराणिक कथाएं</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	क्या नहीं (Don&#39;ts)</h3>
<p>
	<strong>1. दोपहर में यात्रा से बचें: </strong>बहुत जरूरी न हो तो दोपहर की चिलचिलाती धूप में बाहर निकलने या यात्रा करने से बचें, इससे Heatstroke/लू लगने का डर रहता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>2. भारी और गरिष्ठ भोजन:</strong> ज्यादा तेल-मसाले, गर्म तासीर वाली चीजें और भारी भोजन न करें। यह पाचन तंत्र को खराब कर सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>3. पानी की बर्बादी:</strong> इस महीने जल की कमी रहती है, इसलिए पानी को व्यर्थ बहाना दोषपूर्ण माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>4. दिन में सोना (अपवाद): </strong>शास्त्रों के अनुसार ज्येष्ठ में केवल अल्प विश्राम की अनुमति है, इस माह बहुत अधिक देर तक दिन में नहीं सोना चाहिए, इससे आलस्य बढ़ता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>5. बड़े भाई से विवाद: </strong>&#39;ज्येष्ठ&#39; का अर्थ ज्येष्ठ पुत्र या बड़ा भाई भी होता है। इस माह में अपने बड़े भाई या पिता तुल्य व्यक्तियों का अपमान नहीं करना चाहिए।</p>
<p>
	<br />
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/bada-mangal-2026-dates-126050100016_1.html" target="_blank">Bada Mangal Dates: ज्येष्ठ माह में कब-कब रहेगा बड़ा मंगल, जानें संपूर्ण तिथियां</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 05 May 2026 09:58:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 05 May 2026 16:52:05 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Religious Article]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Bada Mangal 2026: क्यों लिया था बजरंगबली ने वृद्ध वानर का रूप? पढ़ें रोंगटे खड़े करने वाली 3 पौराणिक कथाएं]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/bada-mangal-ki-kathayen-126050100013_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/bada-mangal-ki-kathayen-126050100013_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/01/thumb/1_1/1777617769-808.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Bada Mangal Ki Kahaniya: हिन्दू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ महीने की शुरुआत हो चुकी है और इस बार पहला बड़ा मंगल 2026, दिन मंगलवार, 5 मई को मनाया गया। यह दिन विशेष रूप से श्री हनुमान जी के पूजन के लिए समर्पित माना जाता है। भगवान हनुमान को संकट मोचन और ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p>
		<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
			<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
				<img align="center" alt="बड़ा मंगल संबंधी बजरंगबली के पूजन का फोटो। इमेज में हनुमान मंदिर में पूजन के पश्चात भोग से संबंधि‍त प्रसादी की थाली से सजा फोटो। साथ ही भंडारे का फोटो, जिसमें लोग प्रसादी ले रहे हैं...." class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/01/full/1777617769-808.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1376px; height: 768px;" title="" /></p>
		</p>
	</p>
	<p>
		<strong>Bada Mangal Ki Kathayen: </strong>हिन्दू पंचांग की गणना के अनुसार, ज्येष्ठ का महीना तपन और ऊर्जा का प्रतीक है। इसी महीने में आने वाले मंगलवार को &#39;बड़ा मंगल&#39; या &#39;बुढ़वा मंगल&#39; के रूप में मनाया जाता है। साल 2026 में आस्था का यह महापर्व 5 मई से शुरू हो गया है, जो कि 23 जून 2026 तक जारी रहेगा। यह दिन न केवल पवनपुत्र हनुमान की भक्ति का है, बल्कि यह अधर्म पर धर्म और अहंकार पर विनम्रता की विजय का भी संदेश देता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/hindu-jyeshtha-month-2026-festivals-126043000040_1.html" target="_blank">Jyeshtha month festivals 2026: ज्येष्ठ माह के व्रत एवं त्योहार की लिस्ट</a></strong></p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		1. प्रभु श्री राम और हनुमान जी का मिलन</p>
	<p>
		2. जब भीम का अहंकार हुआ चूर-चूर (महाभारत काल)</p>
	<p>
		3. रावण की लंका और हनुमान का विराट रूप (रामायण काल)</p>
	<p>
		4. बड़ा मंगल पर कैसे करें पूजन?</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		क्यों खास है बड़ा मंगल? जानें इसके पीछे का गौरवशाली इतिहास</h3>
	<p>
		बड़ा मंगल मनाने की परंपरा सदियों पुरानी है, जिसके तार रामायण और महाभारत, दोनों ही युगों से गहराई से जुड़े हैं। आइए जानते हैं वे तीन मुख्य कारण, जो इस दिन को &#39;महा-मंगलवार&#39; बनाते हैं:</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		1. प्रभु श्री राम और हनुमान जी का मिलन</h3>
	<p>
		पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब भगवान श्री राम अपने भाई लक्ष्मण के साथ माता सीता की खोज में वन-वन भटक रहे थे, तब उनकी भेंट पहली बार हनुमान जी से हुई थी। उस समय हनुमान जी ने एक ब्राह्मण (पुरोहित) का रूप धारण किया था। जिस दिन यह ऐतिहासिक मिलन हुआ, वह ज्येष्ठ मास का मंगलवार ही था। यही कारण है कि इस दिन हनुमान जी के साथ-साथ प्रभु श्री राम की उपासना का विशेष फल मिलता है।</p>
	<h3>
		 </h3>
	<h3>
		2. जब भीम का अहंकार हुआ चूर-चूर (महाभारत काल)</h3>
	<p>
		महाभारत काल की एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, गदाधारी भीम को अपनी अपार शक्ति पर बहुत घमंड हो गया था। उनके इस अहंकार को नष्ट करने के लिए हनुमान जी ने एक वृद्ध और कमजोर वानर का रूप धारण किया और रास्ते में अपनी पूंछ फैलाकर लेट गए। भीम ने जब पूंछ हटाने की कोशिश की, तो वे अपनी पूरी शक्ति लगाने के बाद भी उसे टस-से-मस नहीं कर पाए। अपनी हार स्वीकार कर जब भीम ने क्षमा मांगी, तब बजरंगबली ने उन्हें दर्शन दिए। चूंकि हनुमान जी ने वृद्ध रूप धरा था, इसलिए इसे &#39;बुढ़वा मंगल&#39; कहा जाने लगा।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/a-60-day-month-5-zodiac-signs-will-strike-it-rich-126042300049_1.html" target="_blank">ज्येष्ठ माह 60 दिनों का: इस दौरान 5 राशियों की किस्मत के तारे रहेंगे बुलंदी पर</a></strong></p>
	<h3>
		 </h3>
	<h3>
		3. रावण की लंका और हनुमान का विराट रूप (रामायण काल)</h3>
	<p>
		एक अन्य प्रसंग के अनुसार, जब हनुमान जी माता सीता का संदेश लेकर लंका पहुंचे, तो अभिमानी रावण ने उन्हें &#39;तुच्छ बंदर&#39; कहकर अपमानित किया। रावण के इसी मद को चूर करने के लिए बजरंगबली ने एक वृद्ध वानर से सीधे विराट रूप धारण कर लिया और अपनी पूंछ से सोने की लंका को भस्म कर दिया। यह पराक्रम भी ज्येष्ठ मास के मंगलवार को ही घटित हुआ था।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		4. बड़ा मंगल पर कैसे करें पूजन?</h3>
	<p>
		इस पावन अवसर पर भक्त सुबह जल्दी स्नान कर हनुमान जी को चोला चढ़ाते हैं। विशेष रूप से बेसन के लड्डू, बूंदी और चमेली के तेल का दीपक अर्पित किया जाता है। जगह-जगह भंडारों का आयोजन होता है और प्यासे राहगीरों को जल पिलाना इस दिन का सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		संक्षेप में कहा जाए तो बड़ा मंगल हमें सिखाता है कि शक्ति चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, वह विनम्रता और भक्ति के बिना अधूरी है। यदि आप भी जीवन के संकटों से मुक्ति चाहते हैं, तो 5 मई को पहले बड़े मंगल पर बजरंगबली की शरण में जाना न भूलें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>जय श्री राम! जय बजरंगबली!</strong></p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/other-festivals/may-2026-festival-lists-126042800007_1.html" target="_blank">May 2026 Vrat Tyohar: मई माह 2026 के व्रत एवं त्योहारों की लिस्ट</a></strong></p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 05 May 2026 09:26:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 05 May 2026 09:36:40 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Jay Hanuman]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Ekadant Chaturthi Special: भगवान गणेश ने एक दांत तोड़कर पूरी की थी महाभारत, आज के दौर के लीडर्स के लिए इसमें छिपा है बड़ा सबक]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/religious-stories/ekadant-chaturthi-katha-126050400044_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/religious-stories/ekadant-chaturthi-katha-126050400044_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-01/06/thumb/1_1/1767679855-1196.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-01/06/thumb/1_1/1767679855-1196.jpg</image>
      <description><![CDATA[Sankashti Chaturthi Ganesh Vrat Katha: भगवान श्रीगणेश ने व्यास जी के सामने शर्त रखी: 'मैं लिखना शुरू करूँगा, लेकिन मेरी कलम एक पल के लिए भी रुकनी नहीं चाहिए। यदि आप रुके, तो मैं लिखना छोड़ दूंगा।' महर्षि व्यास बड़े ज्ञानी थे, उन्होंने पलटकर अपनी ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="फूलों की माला, जलते दीपों के साथ संकष्टी चतुर्थी पर श्री गणेश के पूजन का चित्र" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-01/06/full/1767679855-1196.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
</p>
<p>
	<strong>Sankashti Chaturthi Story:</strong> महाभारत- महज एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला का सबसे बड़ा भंडार है। 1 लाख से अधिक श्लोक और धर्म-कर्म का गहरा ज्ञान समेटे इस महाकाव्य को लिखने की प्रेरणा ब्रह्मा जी ने महर्षि वेदव्यास को दी थी। लेकिन चुनौती यह थी कि इसे लिखेगा कौन? महर्षि व्यास को एक ऐसे लेखक की तलाश थी जिसकी बुद्धि की गति उनकी सोच के बराबर हो। अंततः, बुद्धि के देवता श्री गणेश ने यह जिम्मेदारी उठाई, पर एक ऐसी शर्त के साथ जिसने इस लेखन को और भी रोमांचक बना दिया।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/other-festivals/sankashti-chaturthi-muhurat-5th-may-2026-126050400037_1.html" target="_blank">Ekdant Sankashti Chaturthi 2026: एकदंत संकष्टी चतुर्थी के शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, और मह‍त्व</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	गणेश जी की शर्त और महर्षि का &#39;मास्टरस्ट्रोक&#39;</h3>
<p>
	भगवान श्रीगणेश ने व्यास जी के सामने शर्त रखी: &#39;मैं लिखना शुरू करूंगा, लेकिन मेरी कलम एक पल के लिए भी रुकनी नहीं चाहिए। यदि आप रुके, तो मैं लिखना छोड़ दूंगा।&#39; महर्षि व्यास बड़े ज्ञानी थे, उन्होंने पलटकर अपनी शर्त रख दी: &#39;हे देव, आप जो भी लिखेंगे, उसे पहले पूरी तरह समझेंगे, उसके बाद ही लिपिबद्ध करेंगे।&#39; <br />
	 </p>
<p>
	यही वह पल था जिसने महर्षि को सोचने का समय दिया। जब भी व्यास जी को विश्राम चाहिए होता, वे एक बहुत ही कठिन श्लोक बोल देते। गणेश जी उसे समझने में थोड़ा समय लेते और उतनी देर में व्यास जी अगले कई श्लोकों की रचना कर लेते।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	कैसे टूटने से बना इतिहास: &#39;गजमुख&#39; से &#39;एकदंत&#39; का सफर</h3>
<p>
	लेखन कार्य इतनी तीव्रता से चल रहा था कि कलम और गति का तालमेल बिठाना कठिन हो गया। इसी जल्दबाजी के बीच अचानक गणेश जी की लेखनी (कलम) टूट गई। समय की कमी थी और शर्त के मुताबिक रुकना वर्जित था। बिना एक पल की देरी किए, गणेश जी ने अपना एक दांत तोड़ दिया और उसे ही स्याही में डुबोकर कलम की तरह इस्तेमाल करने लगे।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अपनी शर्त को पूरा करने और ज्ञान को सुरक्षित रखने के लिए किया गया यह त्याग ही उन्हें &#39;एकदंत&#39; के रूप में अमर कर गया। उन्होंने साबित किया कि ज्ञान का संरक्षण किसी भी शारीरिक क्षति से कहीं ज्यादा कीमती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	आधुनिक युग के लिए &#39;गणेश मैनेजमेंट&#39; के 5 सबक</h3>
<p>
	आज के कॉर्पोरेट जगत और छात्रों के लिए भगवान गणेश का यह लेखन कार्य किसी मैनेजमेंट क्लास से कम नहीं है:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>समझ (Deep Understanding): </strong>बिना समझे किया गया काम कभी प्रभावी नहीं होता। गणेश जी ने शर्त के बावजूद हर शब्द को समझकर लिखा।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>डेडलाइन का सम्मान: </strong>शर्त के अनुसार काम को समय पर पूरा करना (Continuous Flow) उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>संसाधनों का सही इस्तेमाल (Innovation): </strong>जब कलम टूटी, तो उन्होंने रोने या रुकने के बजाय अपने ही दांत का उपयोग किया। यह &#39;आउट ऑफ द बॉक्स थिंकिंग&#39; का बेहतरीन उदाहरण है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>धैर्यवान श्रोता (Active Listening): </strong>एक अच्छा लीडर वही है जो पहले विषय को गंभीरता से सुने और आत्मसात करे।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>त्याग की भावना: </strong>बड़े लक्ष्य (महाभारत जैसा ग्रंथ) की प्राप्ति के लिए छोटे व्यक्तिगत नुकसान (दांत टूटना) को हंसते-हंसते स्वीकार करना चाहिए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>निष्कर्ष:</strong> &#39;एकदंत&#39; स्वरूप हमें सिखाता है कि पूर्णता केवल शारीरिक सुंदरता में नहीं, बल्कि आपकी बुद्धि, एकाग्रता और कार्य के प्रति आपके अटूट समर्पण में छिपी है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	एकदंत दयावंत की जय!</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/2-jyeshtha-maas-2026-durlabh-yog-rashi-anusar-upay-bada-labh-126050400027_1.html" target="_blank">2026 में 2 ज्येष्ठ मास का दुर्लभ योग: राशि अनुसार करें ये अचूक उपाय, मिलेगा बड़ा लाभ</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 04 May 2026 16:54:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 04 May 2026 16:53:59 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[religious stories]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Ekdant Sankashti Chaturthi 2026: एकदंत संकष्टी चतुर्थी के शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, और मह‍त्व]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/sankashti-chaturthi-muhurat-5th-may-2026-126050400037_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/sankashti-chaturthi-muhurat-5th-may-2026-126050400037_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/04/thumb/1_1/1777888887-6809.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/04/thumb/1_1/1777888887-6809.jpg</image>
      <description><![CDATA[Jyeshtha Krishna Chaturthi Muhurat : संकष्टी चतुर्थी हर महीने का वह पावन दिन है जब भगवान गणेश की विशेष आराधना की जाती है। यह दिन विशेष रूप से एकदंत संकष्टी चतुर्थी कहलाता है क्योंकि भगवान गणेश को एकदंत यानी एक दांत वाले के रूप में पूजा जाता है। ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="चित्र में एकदंत संकष्टी चतुर्थी मैसेज के साथ भगवान श्री गणेश के पूजन का फोटो" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/04/full/1777888887-6809.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Ekadanta Sankashti Chaturthi 2026: </strong>ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को &#39;एकदंत संकष्टी चतुर्थी&#39; कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश के &#39;एकदंत&#39; स्वरूप की पूजा करने से मानसिक शांति और कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। चूंकि यह चतुर्थी व्रत 5 मई 2026 को है, तो इस व्रत से जुड़े महत्वपूर्ण विवरण निम्नलिखित हैं:<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/2-jyeshtha-maas-2026-durlabh-yog-rashi-anusar-upay-bada-labh-126050400027_1.html" target="_blank">2026 में 2 ज्येष्ठ मास का दुर्लभ योग: राशि अनुसार करें ये अचूक उपाय, मिलेगा बड़ा लाभ</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. एकदंत संकष्टी का समय और शुभ मुहूर्त 2026</h3>
<p>
	हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्थी की तिथि और समय इस प्रकार है:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 5 मई 2026, 05:24 ए एम से</p>
<p>
	चतुर्थी तिथि समाप्त: 6 मई 2026, रात 07: 51 ए एम पर। </p>
<p>
	अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:51 बजे से 12:45 बजे तक।</p>
<p>
	एकदंत संकष्टी चतुर्थी व्रत मंगलवार, 5 मई, 2026 को। </p>
<p>
	संकष्टी के दिन चंद्रोदय का समय: रात 10:35 पी एम पर।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. पूजन विधि: कैसे करें प्रसन्न?</h3>
<p>
	<strong>प्रात:काल स्नान:</strong> ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्थी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>व्रत संकल्प: </strong>हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>स्थापना: </strong>चौकी पर पीला कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा रखें। उन्हें जल, अक्षत, सिंदूर, और दूर्वा (21 गाठें) अर्पित करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>प्रिय भोग:</strong> गणेश जी को मोदक या बेसन के लड्डू का भोग लगाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>शाम की मुख्य पूजा:</strong> संकष्टी चतुर्थी पर शाम की पूजा का विशेष महत्व है। गणेश जी की आरती करें और एकदंत संकष्टी कथा सुनें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अर्घ्य दान: </strong>रात में चंद्रमा निकलने पर जल, दूध और चंदन मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके बिना व्रत पूरा नहीं माना जाता।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	जाप के लिए आज के विशेष मंत्र: <strong>&#39;एकदन्ताय विद्महे, वक्रतुण्डाय धीमहि, तन्नो दन्ती प्रचोदयात्।&#39;</strong></p>
<p>
	2. मंत्र- <strong>&#39;ॐ गणेशाय नमः&#39;</strong> का जाप करें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. एकदंत संकष्टी चतुर्थी का महत्व</h3>
<p>
	भगवान गणेश का एकदंत स्वरूप बुद्धि और शक्ति के संतुलन को दर्शाता है। एक दांत (बुद्धि) और टूटा हुआ दांत (त्याग) का प्रतीक है। जैसा कि नाम &#39;संकष्टी&#39; है, यह कष्टों को हरने वाली चतुर्थी है। ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को करने से संतान पर आने वाले कष्ट दूर होते हैं। ज्येष्ठ की गर्मी के दौरान आने वाला यह व्रत मन को शीतलता और धैर्य प्रदान करता है तथा समस्त बाधाओं का नाश करके मानसिक शांति देता है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>टिप</strong>: यदि आप ज्येष्ठ मास की एकदंत संकष्टी चतुर्थी का व्रत रख रहे हैं, तो चंद्रमा को अर्घ्य देते समय अपनी मनोकामना मन में अवश्य दोहराएं!</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/bada-mangal-puja-shubh-muhurat-2026-126050400021_1.html" target="_blank">Bada Mangal 2026: क्या आप जानते हैं ज्येष्ठ मंगल को &#39;बड़ा मंगल&#39; क्यों कहते हैं? जानें सटीक पूजा विधि और शुभ मुहूर्त</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 04 May 2026 16:15:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 04 May 2026 16:16:32 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Other Festivals]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Bada Mangal Dates: ज्येष्ठ माह में कब-कब रहेगा बड़ा मंगल, जानें संपूर्ण तिथियां]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/bada-mangal-2026-dates-126050100016_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/bada-mangal-2026-dates-126050100016_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/01/thumb/1_1/1777619935-8608.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Bada Mangal 2026: बुढ़वा मंगल का समय हनुमान जी के दर्शन, जीवन में सुख-समृद्धि और शक्ति और ऊर्जा के संचय के लिए उत्तम दिन माने गए हैं। वर्ष 2026 में पहला बड़ा मंगल 5 मई को पड़ रहा है। वहीं आखिरी यानी आठवां बड़ा मंगल का व्रत 23 जून को किया जाएगा।]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="गले में फूलों की माला पहने हनुमान जी का फोटो। इमेज में मंदिर में स्थित हनुमान जी के पूजन संबंधी नैवेद्य से सजी थाली, जलते दीये और प्रार्थना करते आदमी का फोटो" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/01/full/1777619935-8608.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1376px; height: 768px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Bada Mangal puja dates 2026: </strong>साल 2026 में ज्येष्ठ मास का प्रारंभ बहुत ही शुभ संयोगों के साथ हो रहा है। इस साल मई-जून 2026 के ज्येष्ठ के महीने में कुल 8 बड़े मंगल यानी बुढ़वा मंगल पड़ रहे हैं।<br />
	<br />
	इस बार ज्येष्ठ महीने में अधिकमास के दुर्लभ संयोग के कारण 4 की बजाय 8 बड़े मंगल पड़ रहे हैं, जो 5 मई से शुरू होकर 23 जून 2026 तक चलेंगे। उत्तर भारत, विशेषकर लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में इन मंगलों का उत्साह दीपावली जैसा होता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ramayana/suvarnamatsya-ravan-ki-putri-hanuman-par-mohit-katha-126042700055_1.html" target="_blank">सुवर्णमत्स्या: रावण की पुत्री का हनुमानजी पर मोहित हो जाना</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	यहां वर्ष 2026 में पड़ने वाले सभी बड़े मंगलों की सटीक तिथियां और उनकी जानकारी विस्तार से दी गई है:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	बड़ा मंगल 2026 कैलेंडर: तिथियां और नक्षत्र</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	हिन्दू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ माह की शुरुआत 2 मई 2026, दिन शनिवार से होकर, यह मास 29 जून, दिन सोमवार तक चलने वाला है। इस बीच आने वाले मंगलवार इस प्रकार हैं:</p>
<h3>
	 </h3>
<h3>
	बड़ा मंगल तिथि हिंदू तिथि (पक्ष)<span style="white-space:pre"> </span></h3>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>पहला बड़ा मंगल: 5 मई 2026- ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्थी</strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>दूसरा बड़ा मंगल: 12 मई 2026- ज्येष्ठ कृष्ण दशमी</strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>तीसरा बड़ा मंगल: 19 मई 2026- ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया</strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>चौथा बड़ा मंगल: 26 मई 2026- ज्येष्ठ शुक्ल दशमी</strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>पांचवां बड़ा मंगल: 2 जून 2026 अधि. ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया</strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>छठा बड़ा मंगल: 9 जून 2026 अधि. ज्येष्ठ कृष्ण नवमी</strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सातवां बड़ा मंगल: 16 जून 2026 शुद्ध ज्येष्ठ शुक्ल एकम-द्वितीया</strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>आठवां बड़ा मंगल: 23 जून 2026 शुद्ध ज्येष्ठ शुक्ल नवमी।</strong></p>
<p>
	<br />
	इस खास अवसर पर हनुमान जी की पूजा, हनुमान चालीसा का पाठ, संकटमोचन स्तोत्र का जाप और लाल फूल व सिंदूर अर्पण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। लोगों का विश्वास है कि बड़े मंगल पर की गई भक्ति से जीवन में शक्ति, साहस और सफलता बढ़ती है।<br />
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/jay-hanuman/bada-mangal-ki-kathayen-126050100013_1.html" target="_blank">Bada Mangal 2026: ज्येष्ठ का पहला बड़ा मंगल 5 मई को: बजरंगबली ने क्यों लिया था वृद्ध वानर का रूप? पढ़ें रोंगटे खड़े कर देने वाली ये पौराणिक कथाएं</a></strong></p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 04 May 2026 09:19:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 04 May 2026 17:17:27 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Jay Hanuman]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[लोककल्याण से टीआरपी तक: पत्रकारिता का देवर्षि नारद मुनि से विचलन]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/lokkalyan-se-trp-tak-patrakarita-ka-dev-rishi-narad-se-vichalan-126050200020_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/lokkalyan-se-trp-tak-patrakarita-ka-dev-rishi-narad-se-vichalan-126050200020_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/02/thumb/1_1/1777706691-9589.jpg"/>
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      <description><![CDATA[प्रतिवर्ष वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की दूज पर नारद जयंती मनाई जाती है। नारद मुनि को 'देवर्षि' की उपाधि प्राप्त है। नारद मुनि को त्रिलोक संचारक कहा जाता है, यानी वे स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल- तीनों लोकों में स्वतंत्र रूप से विचरण कर सकते हैं। वे देवताओं, ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="narad muni" class="imgCont" height="800" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/02/full/1777706691-9589.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="narad muni jayanti" width="1200" /></p>
	</p>
	<strong>- अमित राव पवार (युवा लेखक-साहित्यकार)</strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	प्रतिवर्ष वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की दूज पर नारद जयंती मनाई जाती है। नारद मुनि को &#39;देवर्षि&#39; की उपाधि प्राप्त है। नारद मुनि को त्रिलोक संचारक कहा जाता है, यानी वे स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल- तीनों लोकों में स्वतंत्र रूप से विचरण कर सकते हैं। वे देवताओं, असुरों और मानवों के बीच संवाद का माध्यम बने रहते हैं। चलिए समझते हैं वर्तमान संदर्भ में सूचनातंत्र को।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. सूचना क्रांति और आधुनिक पत्रकारिता</h3>
<p>
	आज के दौर में सूचना का विस्फोट हुआ है। स्मार्टफोन की एक स्क्रीन पर उभरती खबर जनमत तैयार करने, सरकारों पर दबाव बनाने और समाज की दिशा तय करने की शक्ति रखती है। पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, जिसका मूल कार्य जनता को जागरूक करना और सत्ता को जवाबदेह बनाना है।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/indian-religion-sant-mahatma/narad-jayanti-2026-5-shocking-and-unknown-facts-about-devarshi-narad-126050100040_1.html" target="_blank">नारद जयंती 2026: ब्रह्मांड के पहले &#39;इंफॉर्मेशन ऑफिसर&#39; देवर्षि नारद की 5 अनसुनी गाथाएं</a></strong></p>
</p>
<h3>
	2. देवऋषि नारद- ब्रह्मांड के प्रथम पत्रकार</h3>
<p>
	भारतीय परंपरा में संचार की अवधारणा सदियों पुरानी है। पुराणों में वर्णित देवऋषि नारद का चरित्र सूचना के उत्तरदायित्व का प्रमाण है:</p>
<p>
	<strong>लोककल्याण का उद्देश्य: </strong>उनका हर संवाद किसी न किसी रूप में जनहित से जुड़ा होता था।</p>
<p>
	<strong>संतुलन की भूमिका: </strong>वे देव, दानव और मनुष्यों के बीच संतुलन स्थापित करने वाले एक सजग संप्रेषक थे।</p>
<p>
	<strong>संवाद बनाम सूचना: </strong>वे केवल संदेशवाहक नहीं थे, बल्कि तथ्यों का विश्लेषण कर समाधान और संतुलन की दिशा तय करते थे।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. वर्तमान परिदृश्य: आदर्शों से भटकाव</h3>
<p>
	आधुनिक पत्रकारिता में अब सूचना से अधिक "प्रभाव" पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। वर्तमान में कुछ प्रमुख विसंगतियाँ उभर कर आई हैं:</p>
<p>
	<strong>TRP की अंधी दौड़: </strong>डिजिटल क्लिक्स और टीआरपी की प्रतिस्पर्धा ने पत्रकारिता के मूल स्वरूप को बदल दिया है।</p>
<p>
	<strong>तथ्यों की अनदेखी: </strong>"ब्रेकिंग न्यूज़" की जल्दबाजी में अक्सर तथ्यों की पुष्टि नहीं की जाती, जिससे समाज में भ्रम फैलता है।</p>
<p>
	<strong>स्तंभों का असंतुलन:</strong> पत्रकारिता के तीन स्तंभ-सूचना, शिक्षा और मनोरंजन के बीच संतुलन बिगड़ गया है। मनोरंजन के नाम पर सनसनी और सूचना के नाम पर पक्षपात परोसा जा रहा है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. प्रमुख चुनौतियां: तकनीक बनाम जिम्मेदारी</h3>
<p>
	सोशल मीडिया के दौर में हर व्यक्ति सूचना का स्रोत बन गया है, जिससे नई चुनौतियां पैदा हुई हैं:</p>
<p>
	<strong>फेक न्यूज़ और प्रोपेगेंडा: </strong>गलत सूचनाएं और प्रायोजित पत्रकारिता (Paid News) साख को नुकसान पहुँचा रही हैं।</p>
<p>
	<strong>नैतिक संकट</strong>: संसाधनों की प्रचुरता के बावजूद नैतिक मूल्यों से समझौता किया जा रहा है।</p>
<p>
	<strong>शोर में दबी आवाज़:</strong> निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकारों की संख्या कम होती जा रही है और उनकी आवाज़ अक्सर शोर में दब जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. ऐतिहासिक विरासत: जनसेवा का संकल्प</h3>
<p>
	भारत में पत्रकारिता की जड़ें जनसेवा में थीं। "उदंत मार्तंड" जैसे प्रारंभिक समाचार पत्रों ने सीमित संसाधनों में भी सत्य और समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता साबित की थी। इतिहास गवाह है कि पत्रकारिता का जन्म समाज को स्वर देने के लिए हुआ था।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	6. निष्कर्ष और भविष्य की राह: नैतिक पुनर्जागरण की आवश्यकता</h3>
<p>
	आज पत्रकारिता एक चौराहे पर खड़ी है। भविष्य की सार्थकता के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर लौटना अनिवार्य है:</p>
<p>
	<strong>सत्य और निष्पक्षता:</strong> सत्ता से सवाल पूछना और बिना भय के सच सामने लाना।</p>
<p>
	<strong>नारद जी का आदर्श: </strong>सूचना का अर्थ केवल खबर देना नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देना होना चाहिए।</p>
<p>
	<strong>चुनाव का समय: </strong>पत्रकारिता को तय करना होगा कि उसे केवल प्रभावशाली बनना है या विश्वसनीय और सम्मानजनक।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अंतिम संदेश: </strong>यदि आधुनिक पत्रकारिता देवऋषि नारद के &#39;निर्भीकता&#39; और &#39;लोककल्याण&#39; के आदर्शों को अपनाती है, तभी वह अपनी साख बचा पाएगी और समाज को सकारात्मक दिशा दे सकेगी।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Sat, 02 May 2026 12:38:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 02 May 2026 12:56:02 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Hindu Religion]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[पुरुषोत्तम मास की पौराणिक कथा]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/religious-stories/purushottam-maas-ki-pauranik-katha-in-hindi-126050200017_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/religious-stories/purushottam-maas-ki-pauranik-katha-in-hindi-126050200017_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/02/thumb/1_1/1777704486-2287.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/02/thumb/1_1/1777704486-2287.jpg</image>
      <description><![CDATA[purushottam maas ki katha: हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक तीसरे वर्ष सूर्य और चंद्रमा के बीच समय के अंतर को पाटने के लिए एक अतिरिक्त माह का जन्म होता है, जिसे 'अधिकमास', 'मलमास' या 'पुरुषोत्तम मास' कहा जाता है। इस माह के अस्तित्व और इसकी महिमा के ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="The image depicts a deity offering prayers before Lord Vishnu, alongside an open scripture. The caption reads: The Mythological Legend of Purushottam Maas." class="imgCont" height="800" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/02/full/1777704486-2287.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="purushottam maas 2026" width="1200" /></p>
	</p>
	purushottam maas ki katha: हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक तीसरे वर्ष सूर्य और चंद्रमा के बीच समय के अंतर को पाटने के लिए एक अतिरिक्त माह का जन्म होता है, जिसे &#39;अधिकमास&#39;, &#39;मलमास&#39; या &#39;पुरुषोत्तम मास&#39; कहा जाता है। इस माह के अस्तित्व और इसकी महिमा के पीछे दो अत्यंत रोचक कथाएं प्रचलित हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. हिरण्यकश्यप का वरदान और 13वां महीना</h3>
<p>
	दैत्यराज हिरण्यकश्यप ने अमर होने की इच्छा से ब्रह्मा जी की घोर तपस्या की। ब्रह्मा जी के प्रकट होने पर उसने एक ऐसा वरदान मांगा जो उसे लगभग अमर बना दे। उसने कहा:</p>
<p>
	"हे विधाता! आपकी बनाई किसी भी सृष्टि से मेरी मृत्यु न हो- न मनुष्य से, न पशु से, न देव से और न दैत्य से। मेरी मृत्यु न घर के भीतर हो, न बाहर; न दिन में हो, न रात में। मैं न अस्त्र से मरूँ, न शस्त्र से; न पृथ्वी पर, न आकाश में। और सबसे महत्वपूर्ण, वर्ष के आपके बनाए उन 12 महीनों में मेरी मृत्यु न हो।"</p>
<p>
	 </p>
<p>
	ब्रह्मा जी ने &#39;तथास्तु&#39; कह दिया। वरदान पाकर हिरण्यकश्यप निरंकुश हो गया और भक्तों पर अत्याचार करने लगा। जब पाप का घड़ा भर गया, तब भगवान विष्णु ने उसकी काट निकाली:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>13वां महीना:</strong> भगवान ने अपनी माया से 12 महीनों के बीच एक अतिरिक्त माह (अधिकमास) बनाया, ताकि हिरण्यकश्यप का वरदान भी बना रहे और उसका अंत भी हो सके।</p>
<p>
	<strong>नृसिंह अवतार: </strong>भगवान ने खंभे से आधा नर और आधा सिंह (नृसिंह) के रूप में अवतार लिया।</p>
<p>
	<strong>वध: </strong>गोधूलि बेला (न दिन, न रात) में, देहरी पर बैठकर (न भीतर, न बाहर), अपनी जंघा पर रखकर (न भूमि, न आकाश), अपने नाखूनों से (न अस्त्र, न शस्त्र) उस दैत्य का वध कर दिया।</p>
<h3>
	2. मलमास की व्यथा और श्रीकृष्ण का वरदान</h3>
<p>
	दूसरी कथा के अनुसार, जब इस अतिरिक्त मास का निर्माण हुआ, तो इसे &#39;मलमास&#39; कहा गया। चूंकि यह चंद्र वर्ष और सौर वर्ष के बीच का &#39;मल&#39; (अशुद्ध हिस्सा) माना जाता था, इसलिए कोई भी देवता इसका स्वामी बनने को तैयार नहीं हुआ।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>निंदा और दुख</strong>: स्वामीविहीन होने के कारण मलमास की सर्वत्र निंदा होने लगी। दुखी होकर मलमास भगवान विष्णु के पास गया और अपनी व्यथा सुनाई। दयानिधान विष्णु उसे लेकर गोलोक गए।</p>
<p>
	<strong>भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद: </strong>गोलोक में भगवान श्रीकृष्ण ने मलमास की पीड़ा समझी। उन्होंने घोषणा की:</p>
<p>
	"आज से मैं तुम्हारा स्वामी हूँ। मेरे सभी दिव्य गुण तुममें समाहित होंगे। संसार में मैं &#39;पुरुषोत्तम&#39; के नाम से विख्यात हूँ, इसलिए आज से तुम भी &#39;पुरुषोत्तम मास&#39; के नाम से जाने जाओगे।"</p>
<p>
	भगवान ने वरदान दिया कि जो भी इस माह में श्रद्धापूर्वक स्नान, दान, पूजन और अनुष्ठान करेगा, उसे सामान्य समय से कई गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होगा।</p>
<h3>
	पुरुषोत्तम मास का आध्यात्मिक महत्व</h3>
<p>
	भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से एक उपेक्षित और &#39;मल&#39; माना जाने वाला महीना वर्ष का सबसे पवित्र महीना बन गया।</p>
<p>
	<strong>दान और पुण्य:</strong> इस माह में 33 देवताओं के निमित्त दान देने का विधान है।</p>
<p>
	<strong>धार्मिक कार्य:</strong> विवाह जैसे मांगलिक कार्य वर्जित होने के बावजूद, यह समय जप, तप और आत्म-शुद्धि के लिए सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।</p>
<p>
	<strong>निष्कर्ष: </strong>पुरुषोत्तम मास हमें सिखाता है कि ईश्वर की शरण में जाने पर तुच्छ से तुच्छ वस्तु भी अनमोल और पावन हो जाती है।</p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Sat, 02 May 2026 12:03:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 02 May 2026 12:22:03 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[religious stories]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[नारद जयंती 2026: ब्रह्मांड के पहले 'इंफॉर्मेशन ऑफिसर' देवर्षि नारद की 5 अनसुनी गाथाएं]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/indian-religion-sant-mahatma/narad-jayanti-2026-5-shocking-and-unknown-facts-about-devarshi-narad-126050100040_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/indian-religion-sant-mahatma/narad-jayanti-2026-5-shocking-and-unknown-facts-about-devarshi-narad-126050100040_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/01/thumb/1_1/1777631637-3198.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/01/thumb/1_1/1777631637-3198.jpg</image>
      <description><![CDATA[अक्सर हम नारद मुनि को फिल्मों में 'नारायण-नारायण' कहते हुए इधर की बात उधर करने वाले एक मजाकिया पात्र के रूप में देखते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वे ब्रह्मांड के पहले पत्रकार, महान संगीतज्ञ और भगवान विष्णु के सबसे चतुर रणनीतिकार थे? ज्येष्ठ ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="narad-jayanti-2026-5-shocking-and-unknown-facts-about-devarshi-narad" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/01/full/1777631637-3198.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 769px;" title="The image features Sage Narada, with the caption reading 'Narada Jayanti': 'Discover 5 Shocking and Untold Facts About Devarshi Narada.'" /></p>
	</p>
	अक्सर हम नारद मुनि को फिल्मों में &#39;नारायण-नारायण&#39; कहते हुए इधर की बात उधर करने वाले एक मजाकिया पात्र के रूप में देखते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वे ब्रह्मांड के पहले पत्रकार, महान संगीतज्ञ और भगवान विष्णु के सबसे चतुर रणनीतिकार थे? ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की द्वितीया को मनाई जाने वाली नारद जयंती पर आइए जानते हैं देवर्षि से जुड़ी वे बातें, जो शायद ही आपने पहले कभी सुनी हों।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. ब्रह्मा के &#39;मन&#39; से जन्म और &#39;देवर्षि&#39; का रुतबा</h3>
<p>
	नारद जी कोई साधारण ऋषि नहीं, बल्कि ब्रह्मा जी के &#39;मानस पुत्र&#39; हैं। उन्हें &#39;देवर्षि&#39; की उपाधि प्राप्त है—एक ऐसा पद जो केवल उन्हें मिलता है जिनमें दिव्य ज्ञान और कठोर तप का संगम हो। वे केवल संदेशवाहक नहीं, बल्कि नारद भक्ति सूत्र जैसे महान ग्रंथ के रचयिता भी हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. क्यों नहीं रुक पाते एक जगह? (शाप या वरदान?)</h3>
<p>
	नारद मुनि हमेशा घूमते क्यों रहते हैं? इसके पीछे एक रोचक कहानी है। राजा प्रजापति दक्ष ने नारद जी को शाप दिया था कि वे दो मिनट से ज्यादा एक जगह नहीं ठहर पाएंगे। लेकिन नारद जी ने इस शाप को लोक-कल्याण का माध्यम बना लिया और तीनों लोकों में सूचनाओं का आदान-प्रदान करने लगे।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. जब नारद को बनना पड़ा &#39;स्त्री&#39;</h3>
<p>
	हैरान रह गए? पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विष्णु की माया समझने के प्रयास में नारद जी ने एक सरोवर में स्नान किया और स्त्री रूप धारण कर लिया। वे 12 वर्षों तक राजा तालजंघ की रानी बनकर रहे। बाद में श्री हरि की कृपा से पुनः उसी सरोवर में स्नान कर वे अपने असली स्वरूप में लौटे।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. बंदर जैसा चेहरा और भगवान विष्णु को शाप!</h3>
<p>
	यह किस्सा सबसे मशहूर है। नारद जी माता लक्ष्मी से विवाह करना चाहते थे। उन्होंने भगवान विष्णु से &#39;हरि&#39; जैसा रूप मांगा। &#39;हरि&#39; का एक अर्थ विष्णु होता है और दूसरा बंदर। भगवान ने उन्हें बंदर का चेहरा दे दिया। स्वयंवर में मजाक बनने के बाद क्रोधित नारद ने विष्णु जी को शाप दिया कि उन्हें भी पृथ्वी पर &#39;स्त्री वियोग&#39; सहना होगा (यही कारण था कि राम अवतार में उन्हें माता सीता से अलग होना पड़ा)।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. गंधर्व से &#39;दासी पुत्र&#39; और फिर &#39;देवर्षि&#39; तक का सफर</h3>
<p>
	नारद जी का सफर संघर्षों भरा रहा। पहले कल्प में वे उपबर्हण नाम के गंधर्व थे। ब्रह्मा जी के शाप से वे एक दासी के पुत्र के रूप में जन्मे। मात्र 5 वर्ष की आयु में संतों की सेवा कर उन्हें वह ज्ञान मिला, जिसने उन्हें अंततः ब्रह्मा जी के मानस पुत्र और &#39;देवर्षि&#39; के रूप में पुनर्जन्म दिलाया।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	नारद मुनि से जुड़ी कुछ &#39;क्विक&#39; बातें:</h3>
<p>
	<strong>नारद संहिता: </strong>ज्योतिष का एक अद्भुत ग्रंथ।</p>
<p>
	<strong>लीला पात्र: </strong>वे &#39;चुगली&#39; नहीं करते, बल्कि भगवान की लीला को पूरा करने के लिए परिस्थितियों का निर्माण करते हैं।</p>
<p>
	<strong>त्रिलोक संचारक: </strong>उनके पास स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल में बेरोक-टोक घूमने का &#39;वीजा&#39; है।</p>
<p>
	<strong>निष्कर्ष: </strong>देवर्षि नारद भक्ति और बुद्धि का वो मेल हैं, जो हमें सिखाते हैं कि संवाद (Communication) ही दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 01 May 2026 16:00:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 13 May 2026 18:34:21 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Sant Mahatma]]></category>
      <authorname>अनिरुद्ध जोशी</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Jyeshtha month festivals 2026: ज्येष्ठ माह के व्रत एवं त्योहार की लिस्ट]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/hindu-jyeshtha-month-2026-festivals-126043000040_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/hindu-jyeshtha-month-2026-festivals-126043000040_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/30/thumb/1_1/1777546103-6809.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/30/thumb/1_1/1777546103-6809.jpg</image>
      <description><![CDATA[Jyeshtha festivals n puja dates 2026: ज्येष्ठ मास हिन्दू पंचांग का तीसरा महीना है, जो आम तौर पर मई-जून के बीच आता है। इसे वर्ष का पहला ग्रीष्म मास या गर्मियों का महीना भी माना जाता है। इस महीने का धार्मिक, पौराणिक और सामाजिक महत्व बहुत है। इस माह ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt=" ज्येष्ठ मास के धार्मिक व्रत और त्योहार तथा पूजन संबंधी स्त्रियों, जलते दीप तथा वृक्ष पूजन का फोटो" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/30/full/1777546103-6809.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Jyeshtha 2026 festivals dates:</strong> ज्येष्ठ माह 2026 का समय धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस बार ज्येष्ठ माह की शुरुआत 2 मई से हो रही है, जो 29 जून तक चलने वाला है। यह महीना साल के पहले गर्म महीनों में से एक है और कई पौराणिक कथाओं और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है। इस माह में व्रत, त्योहार और पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/other-festivals/may-2026-festival-lists-126042800007_1.html" target="_blank">May 2026 Vrat Tyohar: मई माह 2026 के व्रत एवं त्योहारों की लिस्ट</a></strong><br />
	<br />
	भारतीय संस्कृति में इसे जेठ का महीना भी कहा जाता है। ज्येष्ठ माह के दौरान मनाए जाने वाले व्रत और त्योहार जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, समृद्धि और खुशहाली लाते हैं। हर व्रत और त्योहार का अपना महत्व है- कुछ स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए, तो कुछ धन, शिक्षा और परिवार की खुशहाली के लिए।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	इस लेख में यहां मई-जून में पड़ने वाले ज्येष्ठ माह 2026 के प्रमुख व्रत और त्योहारों की पूरी लिस्ट आपकी सुविधा के लिए दी जा रही हैं...</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	मई ज्येष्ठ मास: व्रत एवं त्योहार 2026</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	2 मई: ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा/एकम तिथि के साथ इस पवित्र मास ज्येष्ठ का शुभारंभ।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	3 मई: देवर्षि नारद प्राकट्योत्सव और अचारपुरा मेला का आयोजन।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	5 मई: भगवान गणेश को समर्पित संकष्टी चतुर्थी व्रत, जिसमें चंद्रोदय रात्रि 10:07 बजे होगा।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	8 मई: जैन संत तारण तरण गुरुपर्व का आध्यात्मिक उत्सव।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	10 मई: सुबह 07:53 से पंचक काल का प्रारंभ।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	13 मई: समस्त पापों का नाश करने वाली अचला/ अपरा एकादशी का पावन व्रत।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	14 मई: सुहागिनों के वट सावित्री व्रत का आरंभ और भगवान शिव का प्रदोष व्रत।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	15 मई: सूर्य का वृष राशि में प्रवेश/ सूर्यवृष संक्रांति, केवट जयंती, जैन तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ जन्म-मोक्ष दिवस।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	16 मई: न्याय के देवता शनि देव की जयंती, वट सावित्री अमावस्या पूजन और स्नान-दान-श्राद्ध की अमावस्या।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	17 मई: धार्मिक महत्व वाले &#39;पुरुषोत्तम मास&#39; या अधिमास का शुभारंभ।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	18 मई: चंद्र दर्शन का शुभ मुहूर्त और जैन समुदाय का रोहिणी व्रत।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	20 मई: भगवान गणेश की कृपा प्राप्ति हेतु विनायकी चतुर्थी का व्रत।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	21 मई: गुरु-पुष्य नक्षत्र का शुभ संयोग आज से। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	22 मई: शुक्र-पुष्य नक्षत्र का प्रभाव।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	25 मई: बुंदेलखंड के वीर योद्धा आल्हा की जयंती और भीषण गर्मी के &#39;नवतपा&#39; का प्रारंभ।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	26 मई: मां गंगा के धरती पर अवतरण का पर्व &#39;गंगा दशहरा&#39; और श्री रामेश्वर प्रतिष्ठा दिवस।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	27 मई: अधिमास की पुरुषोत्तमी एकादशी का विशेष व्रत।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	28 मई: त्याग और बलिदान का पर्व ईद-उल-अजहा/ बकरीद, प्रदोष व्रत। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	30 मई: पूर्णिमा का व्रत, जो आध्यात्मिक शुद्धि और दान-पुण्य के लिए फलदायी है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	31 मई: अधिमास स्नान-दान पूर्णिमा।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<span style="color:#4b0082;"><strong>************************</strong></span></p>
<h3>
	 </h3>
<h3>
	जून 2026 ज्येष्ठ मास के व्रत-त्योहारों की सूची</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	2 जून: नवतपा की अवधि समाप्त।  </p>
<p>
	 </p>
<p>
	3 जून: गणेश चतुर्थी व्रत, भगवान गणेश की पूजा का दिन, विघ्न नाशक व्रत।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	4 जून: इस्लामी पर्व गदीर-ए-खुम, हजरत अली के महत्व की स्मृति।</p>
<p>
	   </p>
<p>
	5 जून: विश्व पर्यावरण दिवस।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	11 जून विष्णु जी को समर्पित एकादशी पुरुषोत्तमी एकादशी।</p>
<p>
	   </p>
<p>
	12 जून प्रदोष व्रत भगवान शिव की पूजा, रोग और पाप निवारण का दिन।</p>
<p>
	     </p>
<p>
	13 जून शिव चतुर्दशी- अमंगल हरणे वाले भगवान शिव की विशेष पूजा का समय।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	14 जून पितरों के लिए श्राद्ध की अमावस्या, रोहिणी व्रत</p>
<p>
	 </p>
<p>
	15 जून सूर्य मिथुन संक्रांति (सूर्य का मिथुन राशि में प्रवेश), सोमवती अमावस्या का व्रत।  </p>
<p>
	 </p>
<p>
	16 जून सौर आषाढ़ प्रारंभ, चंद्रदर्शन, शुद्ध ज्येष्ठ मास प्रारंभ।   </p>
<p>
	 </p>
<p>
	17 जून महिलाओं का रंभा तीज व्रत, हिजरी कैलेंडर का मोहर्रम पर्व, छत्रसाल जयंती। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	21 जून अंतरराष्ट्रीय योग दिवस और पिता का सम्मान का दिन फादर्स डे।    </p>
<p>
	   </p>
<p>
	22 जून मां धूमावती प्रकटोत्सव पर्व का दिन।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	23 जून भगवान शिव (महेश) की पूजा का पर्व महेश नवमी/ महेश जयंती।     </p>
<p>
	 </p>
<p>
	24 जून मां गायत्री प्रकटोत्सव, गायत्री माता की पूजा का विशेष समय।     </p>
<p>
	 </p>
<p>
	25 जून भीमसेनी, निर्जला एकादशी व्रत, अशुरा की स्मृति में यौम-ए-अशुरा पर्व।  </p>
<p>
	 </p>
<p>
	26 जून मोहर्रम (ताजिया), मोहर्रम का पर्व।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	27 जून शनि प्रदोष, वट सावित्री व्रतारंभ (वट सावित्री व्रत की शुरुआत), बड़ा महादेव पूजन, शनि और शिव की पूजा का दिन।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	29 जून वट सावित्री व्रत का पूर्णिमा दिवस (वट सावित्री पूर्णिमा), संत कबीर जयंती।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>विशेष नोट:</strong> इस वर्ष ज्येष्ठ मास में पुरुषोत्तम मास (अधिमास) का संयोग होने के कारण इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-zodiac-signs/monthly-horoscope-may-2026-126043000013_1.html" target="_blank">May Monthly Horoscope 2026: मई राशिफल: ग्रहों की चाल में बड़ा बदलाव, इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत और बढ़ेगा बैंक बैलेंस!</a></strong></p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 01 May 2026 11:44:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 01 May 2026 16:44:40 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[astrology articles]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Vaishakh purnima remedies: वैशाख पूर्णिमा के 5 खास उपाय, सभी संकटों से मुक्ति पाएं]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/buddha-jayanti-special/5-remedies-for-vaishakh-purnima-126050100007_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/buddha-jayanti-special/5-remedies-for-vaishakh-purnima-126050100007_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/01/thumb/1_1/1777613739-2228.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/01/thumb/1_1/1777613739-2228.jpg</image>
      <description><![CDATA[How to get rid of life problems: वैशाख पूर्णिमा या बुद्ध पूर्णिमा का दिन आध्यात्मिक रूप से बहुत शक्तिशाली माना जाता है। इस दिन किए गए उपाय न केवल दुर्भाग्य को दूर करते हैं, बल्कि जीवन में स्थिरता और शांति लाते हैं। यह उपाय सभी संकटों से मुक्ति ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p>
		<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
			<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
				<img align="center" alt="तस्वीर में वैशाख पूर्णिमा के अवसर पर गंगा किनारे घाटों पर दीपदान करते साधु-संत और चंद्र देव का फोटो" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/01/full/1777613739-2228.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
		</p>
	</p>
	<p>
		<strong>vaishaakh poornima ke 5 upaay: </strong>वैशाख पूर्णिमा हिन्दू पंचांग में अत्यंत शुभ दिन माना जाता है। यह दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्व रखता है, बल्कि मानसिक, आर्थिक और आध्यात्मिक रूप से भी लाभकारी होता है। संकटों और समस्याओं से मुक्ति पाने के लिए कई बार हमें केवल प्रयास ही नहीं, बल्कि सही समय पर सही उपाय करना भी आवश्यक होता है। वैशाख पूर्णिमा के दिन किए गए उपाय और पूजा जीवन में सकारात्मक बदलाव लाते हैं, नकारात्मक ऊर्जा दूर करते हैं और किस्मत को भी सुधारते हैं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/the-deity-of-the-month-of-vaishakh-126040700010_1.html" target="_blank">वैशाख महीना किन देवताओं की पूजा के लिए है सबसे शुभ? जानें इसका धार्मिक महत्व</a></strong></p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		इस विशेष दिन पर की जाने वाली पूजा, दान, मंत्र जाप और साधारण उपाय जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य लाने में मदद करते हैं। यदि आप भी अपने जीवन के कठिन समय को आसान बनाना चाहते हैं और संकटों से मुक्ति पाना चाहते हैं, तो यह जानकारी और खास उपाय आपके लिए ही है...</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		1. &#39;धर्म घट&#39;/ मिट्टी के घड़े का दान</p>
	<p>
		2. पीपल के वृक्ष पर &#39;दूध-मिश्रित जल&#39; अर्पण</p>
	<p>
		3. चंद्र दोष निवारण हेतु अर्घ्य</p>
	<p>
		4. काले तिल और शहद का प्रयोग</p>
	<p>
		5. दीपदान और सत्यनारायण कथा</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		यहां संकटों से मुक्ति पाने के लिए 5 विशेष और प्रभावी उपाय दिए गए हैं:</h3>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		1. &#39;धर्म घट&#39;/ मिट्टी के घड़े का दान</h3>
	<p>
		वैशाख मास में जल दान को सबसे बड़ा पुण्य माना गया है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>उपाय: </strong>एक नया मिट्टी का घड़ा लें, उसे स्वच्छ जल से भरें और उसमें थोड़ा सा गुड़ या चीनी डालें। इसे किसी ब्राह्मण, जरूरतमंद व्यक्ति या मंदिर में दान करें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>लाभ:</strong> यह उपाय अकाल मृत्यु के भय को दूर करता है और पितरों के आशीर्वाद से जीवन के बड़े संकट टल जाते हैं।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		2. पीपल के वृक्ष पर &#39;दूध-मिश्रित जल&#39; अर्पण</h3>
	<p>
		पीपल के पेड़ में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का वास माना जाता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>विधि: </strong>पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान के बाद पीपल की जड़ में कच्चा दूध मिला हुआ जल चढ़ाएं और 5 तरह की मिठाइयां अर्पित करें। इसके बाद &#39;ॐ नमो भगवते वासुदेवाय&#39; मंत्र का जाप करते हुए 7 परिक्रमा करें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>लाभ: </strong>इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और आर्थिक बाधाएं दूर होती हैं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/buddha-jayanti-special/buddha-purnima-vrat-5-upay-sukh-shanti-ke-liye-126043000039_1.html" target="_blank">बुद्ध पूर्णिमा पर करें ये 5 काम, व्रत का मिलेगा दोगुना फल, जीवन में आएगी सुख-शांति</a></strong></p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		3. चंद्र दोष निवारण हेतु अर्घ्य</h3>
	<p>
		यदि आप मानसिक तनाव या बार-बार आने वाली बाधाओं से परेशान हैं, तो यह उपाय अचूक है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>उपाय: </strong>रात को जब चंद्रमा पूर्ण रूप से उदित हो जाए, तब एक चांदी या स्टील के लोटे (तांबे को छोड़कर किसी भी पात्र) में जल, कच्चा दूध, सफेद चंदन और अक्षत मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>लाभ:</strong> इससे कुंडली का चंद्र दोष शांत होता है और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		4. काले तिल और शहद का प्रयोग</h3>
	<p>
		पुराणों के अनुसार, वैशाख पूर्णिमा पर भगवान विष्णु को तिल अर्पित करना विशेष फलदायी है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>विधि:</strong> जल में काले तिल डालकर स्नान करें और भगवान विष्णु की पूजा करते समय उन्हें शहद और तिल का भोग लगाएं।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>लाभ: </strong>यह उपाय स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और अज्ञात शत्रुओं से रक्षा करता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		5. दीपदान और सत्यनारायण कथा</h3>
	<p>
		<strong>विधि: </strong>वैशाख पूर्णिमा के दिन शाम के समय घर के मंदिर, तुलसी के क्यारे और मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं। यदि संभव हो तो पास के किसी जलाशय या नदी में दीप प्रवाहित करें। साथ ही भगवान सत्यनारायण की कथा सुनें या स्वयं पढ़ें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>लाभ: </strong>दीपदान करने से जीवन का अंधकार और कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>वैशाख पूर्णिमा का खास मंत्र: </strong>इस दिन पूरे समय <strong>"ॐ विष्णवे नमः" या "ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नमः"</strong> का मानसिक जाप करते रहें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		इन उपायों से व्यक्ति को विशेष लाभ मिलता है, आर्थिक तंगी दूर होती है तथा सभी संकटों से मुक्ति मिलती है। </p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/other-festivals/vaishakh-purnima-upay-2026-126042500034_1.html" target="_blank">Vaishakh Purnima 2026: वैशाख पूर्णिमा पर करें ये 5 उपाय, सभी देवताओं का मिलेगा आशीर्वाद</a></strong></p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 01 May 2026 11:11:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 01 May 2026 16:03:05 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[buddha jayanti]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[May 2026 Vrat Tyohar: मई माह 2026 के व्रत एवं त्योहारों की लिस्ट]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/may-2026-festival-lists-126042800007_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/may-2026-festival-lists-126042800007_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-01/05/thumb/1_1/1767608547-2345.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Hindu religious festivals May 2026: मई 2026 का यह धार्मिक कैलेंडर आपको न केवल त्योहारों की सही तिथियों की जानकारी देगा, बल्कि यह भी बताएगा कि कौन सा व्रत किस दिन पड़ रहा है। अगर आप अपने जीवन में आध्यात्मिक अनुशासन बनाए रखना चाहते हैं या अपने परिवार ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p>
		<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
			<img align="center" alt="मई 2026 के त्योहारों के अंतर्गत मंदिर के रखे गए नारियलयुक्त कलश, जलते दीप और अगरबत्ती से संबंधित सुंदर चित्र" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-01/05/full/1767608547-2345.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
	<p>
		<strong>May 2026 Hindu festivals:</strong> भारत एक ऐसा देश है जहां हर महीने धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों से भरा होता है। मई माह भी इस दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इस महीने में न केवल व्रत और उपवास आते हैं, बल्कि कई धार्मिक पर्व और त्योहार भी मनाए जाते हैं, जो समाज में सामूहिक उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करते हैं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ramayana/suvarnamatsya-ravan-ki-putri-hanuman-par-mohit-katha-126042700055_1.html" target="_blank">सुवर्णमत्स्या: रावण की पुत्री का हनुमानजी पर मोहित हो जाना</a></strong><br />
		<br />
		मई 2026 में हिंदू पंचांग के अनुसार कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार पड़ रहे हैं। इनमें वट सावित्री, गंगा दशहरा, सावित्री व्रत, सोमवती अमावस्या और अन्य धार्मिक अवसर शामिल हैं। ये दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि स्वास्थ्य, समृद्धि, और सुख-शांति के लिए भी विशेष रूप से मान्य हैं। आइए यहां जानते हैं मई माह 2026 के व्रत-त्योहार की संपूर्ण जानकारी...</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		मई 2026 में भारत में पड़ने वाले प्रमुख व्रत और त्योहारों की सूची इस प्रकार है। </h3>
	<p>
		 </p>
	<p>
		1 मई 2026: गोरखनाथ प्रकटोत्सव, महर्षि भृगु जयंती, बुद्ध पूर्णिमा, वैशाख पूर्णिमा</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		3 मई 2026: नारद प्रकटोत्सव।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		5 मई 2026: संकष्टी चतुर्थी </p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		13 मई 2026: अचला/ अपरा एकादशी व्रत</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		14 मई 2026: वट सावित्री व्रतारंभ, प्रदोष व्रत</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		15 मई 2026: सूर्य वृष संक्रांति, केवट जयंती</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		16 मई 2026: शनि जयंती, वट पूजन, वट सावित्री अमावस्या</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		17 मई 2026: पुरुषोत्तम मास शुरू, अधिमास प्रारंभ,  </p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		20 मई 2026: विनायकी चतुर्थी</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		25 मई 2026: आल्हा जयंती, नवतपा प्रारंभ</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		26 मई 2026: श्री गंगा दशहरा पर्व</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		27 मई 2026: पुरुषोत्तमी एकादशी</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		28 मई 2026: ईद-उल-अजहा, बकरीद, प्रदोष व्रत</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		31 मई 2026: अधिमास, ज्येष्ठ पूर्णिमा आदि व्रत और त्योहार पड़ेंगे।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/religious-stories/mythological-significance-and-legend-of-purushottam-maas-126042700050_1.html" target="_blank">पुरुषोत्तम मास का पौराणिक महत्व और कथा</a></strong></p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 01 May 2026 10:55:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 01 May 2026 16:50:48 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Other Festivals]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[चंडिका पाठ: जानिए सही विधि, नियम, सावधानियां और इसके चमत्कारी लाभ]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/hindu-religion/chandika-path-vidhi-niyam-labh-savdhani-hindi-126043000055_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/30/thumb/1_1/1777551653-4089.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Chandika Path:चण्डिका पाठ, जिसे मुख्य रूप से 'दुर्गा सप्तशती' या 'देवी माहात्म्य' के नाम से जाना जाता है, सनातन धर्म के सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली स्तोत्रों में से एक है। यह मार्कण्डेय पुराण का एक हिस्सा है, जिसमें 700 श्लोक हैं, इसीलिए इसे ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="chandika paath devi durga" class="imgCont" height="800" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/30/full/1777551653-4089.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="chandika paath devi durga" width="1200" /></p>
	</p>
	Chandika Path:चण्डिका पाठ, जिसे मुख्य रूप से &#39;दुर्गा सप्तशती&#39; या &#39;देवी माहात्म्य&#39; के नाम से जाना जाता है, सनातन धर्म के सबसे शक्तिशाली और प्रभावशाली स्तोत्रों में से एक है। यह मार्कण्डेय पुराण का एक हिस्सा है, जिसमें 700 श्लोक हैं, इसीलिए इसे &#39;सप्तशती&#39; कहा जाता है। माँ चण्डिका की कृपा पाने और जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए इस पाठ का विशेष महत्व है। आइए इसके विभिन्न पहलुओं को विस्तार से समझते हैं।  </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. पाठ की संरचना: तीन चरित्र</h3>
<p>
	चण्डिका पाठ तीन मुख्य भागों में विभाजित है, जिन्हें &#39;चरित्र&#39; कहा जाता है। ये तीनों मानव जीवन के अलग-अलग पहलुओं को शुद्ध करते हैं:</p>
<p>
	<strong>प्रथम चरित्र (महाकाली): </strong>यह तामसी वृत्तियों और आलस्य का नाश करता है (मधु-कैटभ वध)।</p>
<p>
	<strong>मध्यम चरित्र (महालक्ष्मी): </strong>यह राजसी गुणों को संतुलित करता है और ऐश्वर्य प्रदान करता है (महिषासुर वध)।</p>
<p>
	<strong>उत्तम चरित्र (महासरस्वती):</strong> यह सात्विक गुणों को बढ़ाता है और अज्ञान के अंधकार को मिटाता है (शुम्भ-निशुम्भ वध)।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. पाठ करने की विधि (शास्त्रीय नियम)</h3>
<p>
	चण्डिका पाठ को पूर्ण फलदायी बनाने के लिए इसे एक विशेष क्रम में किया जाता है:</p>
<p>
	<strong>कवच: </strong>शरीर की रक्षा के लिए।</p>
<p>
	<strong>अर्गला स्तोत्र: </strong>रूप, जय और यश की प्राप्ति के लिए।</p>
<p>
	<strong>कीलक: </strong>पाठ के प्रभाव को जागृत करने (उत्कीलन) के लिए।</p>
<p>
	<strong>नर्वाण मंत्र जप:</strong> &#39;ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे&#39; मंत्र का जप।</p>
<p>
	<strong>मूल पाठ:</strong> 13 अध्यायों का श्रद्धापूर्वक पाठ।</p>
<p>
	<strong>सिद्ध कुंजिका स्तोत्र: </strong>अंत में इस स्तोत्र का पाठ करने से पूरे सप्तशती पाठ का फल प्राप्त होता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. चण्डिका पाठ के लाभ</h3>
<p>
	<strong>भय और शत्रुओं का नाश: </strong>जैसा कि श्लोक कहता है, "भयार्तानां भयानाशा", यह पाठ मन के डर को मिटाकर आत्मविश्वास भरता है।</p>
<p>
	<strong>ग्रह बाधा निवारण: </strong>ज्योतिष के अनुसार, यदि राहु-केतु या शनि की दशा कष्टकारी हो, तो चण्डिका पाठ कवच की तरह काम करता है।</p>
<p>
	<strong>नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति:</strong> घर में क्लेश या नकारात्मकता होने पर इस पाठ का गुंजन वातावरण को शुद्ध कर देता है।</p>
<p>
	<strong>मनोकामना पूर्ति: </strong>विशेष संकल्प के साथ किया गया &#39;सम्पुट पाठ&#39; कठिन से कठिन कार्य को सिद्ध करने की शक्ति रखता है।</p>
<h3>
	4. सावधानी और नियम</h3>
<p>
	चण्डिका पाठ एक जाग्रत साधना है, इसलिए इसमें कुछ बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है:</p>
<p>
	<strong>शुद्ध उच्चारण:</strong> श्लोकों का उच्चारण स्पष्ट होना चाहिए। यदि संस्कृत कठिन लगे, तो हिंदी अनुवाद पढ़ा जा सकता है।</p>
<p>
	<strong>आसन: </strong>कुशा या ऊन के आसन पर बैठकर ही पाठ करें।</p>
<p>
	<strong>अखंड दीपक: </strong>पाठ के दौरान एक घी का दीपक जलते रहना चाहिए।</p>
<p>
	<strong>ब्रह्मचर्य और सात्विकता: </strong>पाठ की अवधि के दौरान खान-पान और व्यवहार सात्विक रखें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का विशेष महत्व</h3>
<p>
	यदि आपके पास समय का अभाव है और आप पूर्ण सप्तशती का पाठ नहीं कर सकते, तो भगवान शिव द्वारा बताया गया &#39;सिद्ध कुंजिका स्तोत्र&#39; का पाठ करना भी पर्याप्त माना जाता है। इसे सप्तशती का सार कहा गया है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>विशेष टिप: </strong>चण्डिका पाठ के दौरान माँ को लाल पुष्प (खासकर गुड़हल) और हलवे का भोग लगाना अत्यंत शुभ माना जाता है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 17:46:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 13 May 2026 18:34:37 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Hindu Religion]]></category>
      <authorname>अनिरुद्ध जोशी</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[बुद्ध का प्रभाव सिर्फ भारत तक नहीं! जानिए दुनिया और अन्य धर्मों पर 5 खास असर]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/buddha-jayanti-special/bhagwan-buddha-ka-vishva-par-prabhav-5-khas-batein-126043000046_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/buddha-jayanti-special/bhagwan-buddha-ka-vishva-par-prabhav-5-khas-batein-126043000046_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/30/thumb/1_1/1777547668-0735.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/30/thumb/1_1/1777547668-0735.jpg</image>
      <description><![CDATA[Lord Buddha Purnima 2026: भगवान बुद्ध का दर्शन किसी एक क्षेत्र या काल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने पूरी मानवता के सोचने के ढंग को बदल दिया। बुद्ध पहले ऐसे वैश्विक नागरिक थे जिन्होंने 'तर्क' और 'करुणा' को धर्म का आधार बनाया। यहां बुद्ध के प्रभाव की ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="The Influence of the Buddha" class="imgCont" height="1024" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/30/full/1777547668-0735.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="The Influence of the Buddha" width="1536" /></p>
	</p>
	Lord Buddha Purnima 2026: भगवान बुद्ध का दर्शन किसी एक क्षेत्र या काल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने पूरी मानवता के सोचने के ढंग को बदल दिया। बुद्ध पहले ऐसे वैश्विक नागरिक थे जिन्होंने &#39;तर्क&#39; और &#39;करुणा&#39; को धर्म का आधार बनाया। यहां बुद्ध के प्रभाव की 5 सबसे महत्वपूर्ण बातें दी गई हैं, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. एशिया का सांस्कृतिक एकीकरण (The Light of Asia)</h3>
<p>
	बुद्ध के विचारों ने भारत की सीमाओं को लांघकर पूरे एशिया को एक सूत्र में पिरोया। आज जापान, चीन, वियतनाम, कोरिया, श्रीलंका, थाईलैंड और भूटान जैसे देशों की संस्कृति, कला और वास्तुकला की नींव में बौद्ध धर्म है।</p>
<p>
	<strong>प्रभाव: </strong>&#39;सिल्क रोड&#39; के माध्यम से बौद्ध धर्म ने केवल भारतीय दर्शन और धर्म ही नहीं, बल्कि भारतीय योग, आयुर्वेद, गणित और कला को भी दुनिया भर में फैलाया।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/buddha-jayanti-special/buddha-purnima-vrat-5-upay-sukh-shanti-ke-liye-126043000039_1.html" target="_blank">बुद्ध पूर्णिमा पर करें ये 5 काम, व्रत का मिलेगा दोगुना फल, जीवन में आएगी सुख-शांति</a></strong></p>
</p>
<h3>
	2. विश्व शांति और अहिंसा का आधार</h3>
<p>
	आधुनिक युग में महात्मा गांधी से लेकर मार्टिन लूथर किंग जूनियर और दलाई लामा तक, सभी की अहिंसा की नीति बुद्ध के &#39;पंचशील:&#39; के विचार से प्रेरित है।</p>
<p>
	अशोक का हृदय परिवर्तन: सम्राट अशोक का बुद्ध की शिक्षाओं के कारण युद्ध त्याग देना विश्व इतिहास की सबसे बड़ी घटना मानी जाती है, जिसने &#39;विजय&#39; की परिभाषा ही बदल दी।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. अन्य धर्मों पर गहरा प्रभाव</h3>
<p>
	बुद्ध के दर्शन ने दुनिया के अन्य प्रमुख धर्मों को भी गहराई से प्रभावित किया:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>हिंदू धर्म:</strong> बुद्ध को हिंदू धर्म में विष्णु का नौवां अवतार माना गया। आदि शंकराचार्य के &#39;अद्वैत वेदांत&#39; पर बुद्ध के शून्यवाद का इतना प्रभाव था कि उन्हें कभी-कभी &#39;प्रच्छन्न बुद्ध&#39; (छिपे हुए बुद्ध) भी कहा गया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>ईसाई और इस्लाम: </strong>कई विद्वानों का मानना है कि मध्य पूर्व के &#39;सूफीवाद&#39; और प्रारंभिक ईसाई वैराग्य (Monasticism) पर बौद्ध भिक्षुओं की जीवनशैली और उनके ध्यान के तरीकों का असर रहा है। ईसाई धर्म के चर्च, और बिशप परंपरा और संवरचना बौद्ध संघ, रिवाज और स्तूप से ही प्रभावित रही है। इस पर कई शोध हुए हैं। ईसाई धर्म के करुणा और प्रेम, पाप से मुक्ति, त्याग और सरलता, त्रि सिद्दांत (पिता, पुत्र जगत), माला, मोमबत्ती और 10 आज्ञा आदि का सिद्धांत सभी बौद्ध धर्म से प्रेरित हैं।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/buddha-jayanti-special/buddha-purnima-rahasya-janm-gyan-mahaparinirvana-ek-hi-din-126043000036_1.html" target="_blank">बुद्ध पूर्णिमा का रहस्य: जन्म, ज्ञान और महापरिनिर्वाण एक ही दिन, संयोग या चमत्कार?</a></strong></p>
</p>
<h3>
	4. विज्ञान और मनोविज्ञान का मेल</h3>
<p>
	बुद्ध को &#39;पहला मनोवैज्ञानिक&#39; भी कहा जाता है। उन्होंने किसी अनदेखी शक्ति के बजाय &#39;कार्य-कारण संबंध&#39; (Cause and Effect) पर जोर दिया।</p>
<p>
	<strong>आधुनिक विज्ञान: </strong>आज का विज्ञान और &#39;क्वांटम फिजिक्स&#39; बुद्ध के &#39;अनित्यवाद&#39; (सब कुछ परिवर्तनशील है) के सिद्धांत के बहुत करीब नजर आते हैं। अल्बर्ट आइंस्टीन ने भी कहा था कि यदि भविष्य का कोई धर्म विज्ञान के साथ चल सकता है, तो वह बौद्ध धर्म होगा।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/buddha-jayanti-special/inspirational-buddha-purnima-quotes-126042900048_1.html" target="_blank">Buddha Purnima wishes: बुद्ध पूर्णिमा पर अपनों को भेजें ये 10 सबसे अलग खुशियों भरे शुभकामना संदेश</a></strong></p>
</p>
<h3>
	5. सामाजिक समानता और लोकतंत्र</h3>
<p>
	बुद्ध ने 2500 साल पहले जाति व्यवस्था और ऊंच-नीच को नकार कर &#39;समतामूलक समाज&#39; की नींव रखी थी।</p>
<p>
	लोकतांत्रिक मूल्य: बौद्ध संघों के संचालन की प्रक्रिया पूरी तरह लोकतांत्रिक थी (जैसे मतदान और चर्चा), जिसका प्रभाव आधुनिक देशों के संविधानों पर भी पड़ा। भारत के राष्ट्रध्वज में &#39;धम्मचक्र&#39; और राजकीय प्रतीक &#39;अशोक स्तंभ&#39; बुद्ध के उन्हीं लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण मूल्यों के प्रतीक हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>निष्कर्ष: </strong>बुद्ध ने दुनिया को सिखाया कि शांति बाहर नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर है। आज के तनावपूर्ण युग में उनकी &#39;विपश्यना&#39; और &#39;माइंडफुलनेस&#39; (सचेतनता) की तकनीकें पूरी दुनिया के लिए मानसिक स्वास्थ्य का सबसे बड़ा सहारा बनी हुई हैं।</p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 16:40:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 30 Apr 2026 16:45:54 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[buddha jayanti]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[बुद्ध पूर्णिमा पर करें ये 5 काम, व्रत का मिलेगा दोगुना फल, जीवन में आएगी सुख-शांति]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/buddha-jayanti-special/buddha-purnima-vrat-5-upay-sukh-shanti-ke-liye-126043000039_1.html</link>
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      <description><![CDATA[बुद्ध पूर्णिमा का दिन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर छिपे 'बुद्धत्व' को जगाने का अवसर है। इस दिन व्रत रखना मन की शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। यदि आप भी इस पावन तिथि पर उपवास रख रहे हैं, तो इन 5 कार्यों को करने से आपके जीवन में गहरा ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="The image features Gautama Buddha, a meditating woman, a religious book, a praying woman, and the caption 'Buddha Purnima'." class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/30/full/1777543939-9795.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 800px;" title="What to Do on Buddha Purnima" /></p>
	</p>
	बुद्ध पूर्णिमा का दिन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर छिपे &#39;बुद्धत्व&#39; को जगाने का अवसर है। इस दिन व्रत रखना मन की शुद्धि का प्रतीक माना जाता है। यदि आप भी इस पावन तिथि पर उपवास रख रहे हैं, तो इन 5 कार्यों को करने से आपके जीवन में गहरा आध्यात्मिक परिवर्तन और शांति आ सकती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. दीपदान और प्रकाश का उत्सव</h3>
<p>
	बुद्ध पूर्णिमा की शाम को अपने घर, मंदिर या किसी बोधि वृक्ष (पीपल) के नीचे दीपक प्रज्वलित करें।</p>
<p>
	<strong>महत्व:</strong> बुद्ध ने कहा था कि ज्ञान का प्रकाश ही अज्ञान के अंधेरे को मिटा सकता है। दीपदान न केवल घर की नकारात्मकता को दूर करता है, बल्कि यह आपके जीवन में स्पष्टता और नई ऊर्जा का संचार करता है।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/buddha-jayanti-special/buddha-purnima-rahasya-janm-gyan-mahaparinirvana-ek-hi-din-126043000036_1.html" target="_blank">बुद्ध पूर्णिमा का रहस्य: जन्म, ज्ञान और महापरिनिर्वाण एक ही दिन, संयोग या चमत्कार?</a></strong></p>
</p>
<h3>
	2. पंचशील का पालन और वाणी का संयम</h3>
<p>
	व्रत के दौरान केवल अन्न का त्याग ही काफी नहीं है, बल्कि बुद्ध के बताए पंचशील (अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और नशा मुक्ति) का पालन करें।</p>
<p>
	<strong>कार्य: </strong>इस दिन विशेष रूप से मौन धारण करें या बहुत कम और मीठा बोलें। कठोर शब्दों के त्याग से मन को जो शांति मिलती है, वह किसी भी भौतिक सुख से बड़ी है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. दान और सेवा (महान करुणा)</h3>
<p>
	बुद्ध का पूरा दर्शन &#39;करुणा&#39; पर टिका है। व्रत के दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों की सहायता करें।</p>
<p>
	<strong>क्या करें: </strong>भूखों को भोजन कराएं, पशु-पक्षियों के लिए पानी का प्रबंध करें या किसी बीमार की सेवा करें। निस्वार्थ भाव से किया गया दान मानसिक बोझ को कम करता है और आंतरिक संतोष प्रदान करता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. ध्यान (Meditation) और आत्म-मंथन</h3>
<p>
	बुद्ध पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं में होता है। इस ऊर्जा का लाभ उठाने के लिए कम से कम 30 मिनट ध्यान अवश्य करें।</p>
<p>
	<strong>विधि: </strong>बुद्ध की &#39;आनापानसती&#39; (सांसों पर ध्यान) विधि का अभ्यास करें। अपने भीतर उठने वाले विचारों को केवल देखें, उनसे जुड़ें नहीं। यह अभ्यास आपको तनाव से मुक्त कर मानसिक शांति की पराकाष्ठा तक ले जा सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. पवित्र ग्रंथों का पाठ और सत्संग</h3>
<p>
	इस दिन बुद्ध के उपदेशों, जैसे &#39;धम्मपद&#39; का पाठ करना या उनके जीवन की प्रेरक कथाओं को पढ़ना अत्यंत लाभकारी होता है।</p>
<p>
	<strong>लाभ: </strong>जब आप बुद्ध के वचनों को पढ़ते हैं, तो आपके विचार शुद्ध होते हैं। "अप्प दीपो भव" (अपना दीपक स्वयं बनो) के मंत्र को जीवन में उतारने का संकल्प लें। यह आपको आत्मनिर्भर और साहसी बनाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>विशेष टिप: </strong>बुद्ध पूर्णिमा के दिन घर में सफेद वस्त्र पहनना और सफेद फूलों (जैसे कमल या मोगरा) का प्रयोग करना मन को शीतलता प्रदान करता है, क्योंकि सफेद रंग शांति और शुद्धता का प्रतीक है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 15:35:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 30 Apr 2026 15:44:05 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[buddha jayanti]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[बुद्ध पूर्णिमा का रहस्य: जन्म, ज्ञान और महापरिनिर्वाण एक ही दिन, संयोग या चमत्कार?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/buddha-jayanti-special/buddha-purnima-rahasya-janm-gyan-mahaparinirvana-ek-hi-din-126043000036_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/30/thumb/1_1/1777542155-0095.jpg"/>
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      <description><![CDATA[बुद्ध पूर्णिमा, जिसे 'वैशाख पूर्णिमा' भी कहा जाता है, आध्यात्मिक जगत की सबसे विस्मयकारी घटनाओं में से एक है। भगवान बुद्ध के जीवन की तीन सबसे महत्वपूर्ण घटनाएं- जन्म, ज्ञान की प्राप्ति और महापरिनिर्वाण—एक ही तिथि यानी वैशाख पूर्णिमा के दिन घटित हुईं। ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Buddha's Birth, Enlightenment, and Death" class="imgCont" height="1024" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/30/full/1777542155-0095.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="Buddha's Birth, Enlightenment, and Death" width="1536" /></p>
	</p>
	बुद्ध पूर्णिमा, जिसे &#39;वैशाख पूर्णिमा&#39; भी कहा जाता है, आध्यात्मिक जगत की सबसे विस्मयकारी घटनाओं में से एक है। भगवान बुद्ध के जीवन की तीन सबसे महत्वपूर्ण घटनाएं- जन्म, ज्ञान की प्राप्ति और महापरिनिर्वाण—एक ही तिथि यानी वैशाख पूर्णिमा के दिन घटित हुईं। तर्कवादी इसे &#39;महज संयोग&#39; कह सकते हैं, लेकिन बौद्ध दर्शन और आध्यात्मिक मान्यताओं में इसे &#39;ब्रह्मांडीय तालमेल&#39; (Cosmic Alignment) माना जाता है। आइए इस अनूठे त्रिकोण को विस्तार से समझते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	वैशाख माह की पूर्णिमा पर घटी 3 घटनाएं:</h3>
<p>
	<strong>1. जन्म: </strong>लुंबिनी के वनों में साल के वृक्ष के पास। ईसा पूर्व 563 (563 BCE)।</p>
<p>
	<strong>2. संबोधि (ज्ञान प्राप्ति): </strong>गया (बिहार) में पीपल के वृक्ष के नीचे। 35 वर्ष की आयु में। 528 ईसा पूर्व (528 BCE)।</p>
<p>
	<strong>3. महापरिनिर्वाण (देहत्याग): </strong>कुशीनगर (उत्तर प्रदेश) में साल के वृक्ष के पास। 80 वर्ष की आयु में। 483 ईसा पूर्व (483 BCE)।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. लुंबिनी में जन्म: एक राजकुमार का आगमन</h3>
<p>
	ईसा पूर्व 563 में, वैशाख पूर्णिमा के दिन ही कपिलवस्तु के राजा शुद्धोधन के घर सिद्धार्थ (बुद्ध) का जन्म हुआ। पौराणिक कथाओं के अनुसार, उनकी माता महामाया ने पूर्णिमा की रात एक अद्भुत स्वप्न देखा था और लुंबिनी के वनों में खिले हुए साल के वृक्षों के नीचे सिद्धार्थ ने अपनी पहली सांस ली। पूर्णिमा की पूर्णता उनके जीवन के प्रथम क्षण से ही जुड़ी रही।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. बोधगया में संबोधि: अंधकार से प्रकाश की ओर</h3>
<p>
	6 वर्षों की कठोर तपस्या के बाद, सिद्धार्थ जब 35 वर्ष के हुए, तब पुनः वैशाख पूर्णिमा की ही रात थी। निरंजना नदी के तट पर, एक पीपल वृक्ष के नीचे ध्यानस्थ सिद्धार्थ ने सत्य को जाना और वे &#39;बुद्ध&#39; (जागृत) कहलाए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	यह गहरा प्रतीक है कि जिस रात चंद्रमा अपनी पूर्ण आभा में था, उसी रात एक मानवीय चेतना ने भी अपनी पूर्णता को प्राप्त किया। अज्ञान का अंधकार मिटा और बोध का उदय हुआ।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. कुशीनगर में महापरिनिर्वाण: यात्रा की पूर्णता</h3>
<p>
	80 वर्ष की आयु में, कुशीनगर के उपवन में बुद्ध ने अपने पार्थिव शरीर का त्याग किया। यह भी वैशाख पूर्णिमा का ही दिन था। बुद्ध ने अपने शिष्यों से कहा था- "अप्प दीपो भव" (अपना दीपक स्वयं बनो)। उनके जाने का दिन भी वही था जिस दिन उन्होंने जन्म लिया था, जो यह दर्शाता है कि बुद्ध का जीवन चक्र पूर्णतः संतुलित और ब्रह्मांडीय नियमों के अनुरूप था।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	महज संयोग या आध्यात्मिक संकेत?</h3>
<p>
	अध्यात्म के नजरिए से इसके पीछे गहरे तर्क दिए जाते हैं:</p>
<p>
	<strong>पूर्णता का प्रतीक: </strong>पूर्णिमा &#39;पूर्णता&#39; और &#39;समग्रता&#39; का प्रतीक है। बुद्ध का पूरा जीवन मध्य मार्ग और पूर्ण संतुलन का संदेश देता है, जिसे पूर्णिमा का चंद्रमा बखूबी दर्शाता है।</p>
<p>
	<strong>प्रकृति का नियम: </strong>बौद्ध परंपरा मानती है कि बुद्ध जैसे महान व्यक्तित्व (तथागत) प्रकृति के साथ इतने गहरे सामंजस्य में होते हैं कि उनके जीवन की महत्वपूर्ण घटनाएं प्राकृतिक चक्रों (जैसे पूर्णिमा) के साथ स्वतः तालमेल बिठा लेती हैं।</p>
<p>
	<strong>धम्म का चक्र: </strong>जन्म, ज्ञान और मृत्यु का एक ही तिथि पर होना यह संदेश देता है कि संसार में सब कुछ अनित्य है और एक निश्चित नियम के तहत बंधा हुआ है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण</h3>
<p>
	कुछ इतिहासकार इसे बाद के समय में दी गई एक &#39;प्रतीकात्मक तिथि&#39; भी मानते हैं। प्राचीन काल में तिथियों को याद रखने के लिए पूर्णिमा और अमावस्या जैसे प्रमुख पड़ावों का सहारा लिया जाता था। संभव है कि बुद्ध की महानता को देखते हुए वैशाख पूर्णिमा को उनके संपूर्ण जीवन के उत्सव के रूप में चुन लिया गया हो।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>निष्कर्ष: </strong>चाहे इसे खगोलीय संयोग मानें या ईश्वरीय योजना, बुद्ध पूर्णिमा का यह &#39;त्रय-संयोग&#39; दुनिया भर के करोड़ों लोगों के लिए श्रद्धा और आत्म-मंथन का केंद्र है। यह हमें याद दिलाता है कि जीवन की शुरुआत और अंत के बीच सबसे महत्वपूर्ण &#39;ज्ञान&#39; (Enlightenment) है।</p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 15:05:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 30 Apr 2026 15:12:56 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[buddha jayanti]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[कैलाश मानसरोवर यात्रा के रजिस्ट्रेशन प्रारंभ, जानिए कैसे करें ऑनलाइन अप्लाई]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/religious-places/kailash-mansarovar-yatra-2026-registration-start-how-to-apply-online-126043000016_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/religious-places/kailash-mansarovar-yatra-2026-registration-start-how-to-apply-online-126043000016_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/30/thumb/1_1/1777530246-6796.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/30/thumb/1_1/1777530246-6796.jpg</image>
      <description><![CDATA[kailash mansarovar yatra 2026: कैलाश मानसरोवर की यात्रा केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आध्यात्मिक अनुभव है। वर्ष 2026 के लिए इस पावन यात्रा के पंजीकरण की प्रक्रिया की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। यदि आप भी महादेव के निवास ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="kailash mansarovar yatra 2026" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/30/full/1777530246-6796.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 800px;" title="kailash mansarovar yatra 2026:" /></p>
	</p>
	kailash mansarovar yatra 2026: कैलाश मानसरोवर की यात्रा केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि जीवन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आध्यात्मिक अनुभव है। वर्ष 2026 के लिए इस पावन यात्रा के पंजीकरण की प्रक्रिया की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। यदि आप भी महादेव के निवास स्थान के दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो आवेदन की पूरी प्रक्रिया और महत्वपूर्ण जानकारी यहाँ विस्तार से दी गई है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	पंजीकरण और यात्रा की मुख्य बातें:</h3>
<p>
	<strong>आधिकारिक वेबसाइट: </strong>kmy.gov.in पर जाकर &#39;Apply for Yatra&#39; या &#39;Registration&#39; पर क्लिक करें।</p>
<p>
	<strong>दस्तावेज़: </strong>आपके पास 1 सितंबर 2026 तक कम से कम 6 महीने की वैधता वाला एक साधारण भारतीय पासपोर्ट होना अनिवार्य है।</p>
<p>
	<strong>आवेदन प्रक्रिया: </strong>ऑनलाइन फॉर्म भरें, फोटो (300 KB तक, JPG) और पासपोर्ट (500 KB तक, PDF) की स्कैन की गई प्रति अपलोड करें।</p>
<p>
	<strong>रूट (Route): </strong>दो मार्ग उपलब्ध हैं- लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड) और नाथू ला दर्रा (सिक्किम)।</p>
<p>
	<strong>चयन प्रक्रिया: </strong>MEA द्वारा ड्रॉ (Lottery) के माध्यम से तीर्थयात्रियों का चयन होता है।</p>
<p>
	<strong>हेल्पलाइन: </strong>अधिक जानकारी के लिए 011-230813 पर संपर्क किया जा सकता है।</p>
<p>
	<strong>लागत: </strong>सरकारी यात्रा में अनुमानित 1.74 लाख या उससे अधिक का खर्च आ सकता है। </p>
<p>
	<strong>महत्वपूर्ण: </strong>आवेदन करते समय सही जानकारी भरें, क्योंकि गलत जानकारी देने पर आपको यात्रा से रोका जा सकता है। </p>
<p>
	<strong>नोट: </strong>इस वर्ष यात्रा 10 दलों में होगी और जून के पहले-दूसरे हफ्ते में शुरू होने की संभावना है। इसके लिए रजिस्ट्रेशन 30 अप्रैल 2026 से प्रारंभ हो गए हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. पंजीकरण प्रक्रिया: कैसे करें आवेदन?</h3>
<p>
	<strong>कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए दो मुख्य मार्ग हैं:- </strong>1.भारत सरकार (विदेश मंत्रालय) के माध्यम से और 2.निजी टूर ऑपरेटर्स (नेपाल मार्ग) के माध्यम से।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सरकारी मार्ग (विदेश मंत्रालय- MEA)</strong></p>
<p>
	भारत सरकार द्वारा आयोजित यात्रा आधिकारिक और सुव्यवस्थित होती है। इसके लिए आपको विदेश मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन करना होता है।</p>
<p>
	<strong>वेबसाइट:</strong> kmy.gov.in पर जाएं।</p>
<p>
	ऑनलाइन फॉर्म भरें: अपनी व्यक्तिगत जानकारी, पासपोर्ट विवरण और पसंदीदा रूट (लिपुलेख दर्रा या नाथू ला दर्रा) का चयन करें।</p>
<p>
	<strong>चयन प्रक्रिया: </strong>आवेदकों का चयन एक कम्प्यूटरीकृत ड्रा (Lottery) के माध्यम से किया जाता है।</p>
<p>
	<strong>मेडिकल टेस्ट: </strong>चयनित यात्रियों को दिल्ली में कड़े मेडिकल परीक्षणों (DHLI और ITBP द्वारा) से गुजरना पड़ता है। फिटनेस टेस्ट पास करने के बाद ही यात्रा की अनुमति मिलती है।</p>
<p>
	<strong>यात्रा कंफर्म: </strong>यात्रा की पुष्टि के लिए 5,000 रुपए की अप्रतिदेय राशि जमा करनी होती है। निजी टूर ऑपरेटरों के माध्यम से भी आप रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	निजी ऑपरेटर्स (नेपाल/काठमांडू मार्ग)</h3>
<ul>
	<li>
		कई निजी एजेंसियां नेपाल के रास्ते (हेलीकॉप्टर या सड़क मार्ग) यात्रा आयोजित करती हैं।</li>
	<li>
		यह मार्ग उन लोगों के लिए बेहतर है जो लॉटरी सिस्टम में शामिल नहीं होना चाहते।</li>
	<li>
		इसके लिए आपको अधिकृत ट्रैवल एजेंसी की वेबसाइट पर जाकर सीधे बुकिंग करनी होती है।</li>
	<li>
		इसमें वीजा और परमिट की जिम्मेदारी अक्सर एजेंसी की होती है।</li>
</ul>
<h3>
	कैलाश मानसरोवर जाने के 2 मार्ग है- </h3>
<p>
	पहला उत्तराखंड के लिपुलेख से है। यहां से धारचूला जाते हैं और वहां से पैदल यात्रा प्रारंभ होती है। यह कठिन ट्रेकिंग वाला मार्ग है। दूसरा रास्ता नाथुला दर्रा है जिसके लिए सिक्किम के गंगकोट जाते हैं और वहां से यह यात्रा प्रारंभ होती है। वाहन से यात्रा संभव, बुजुर्गों के लिए उपयुक्त। आप जिस भी रास्ते से जाना चाहते हैं रजिस्ट्रेशन करते वक्त उसमें यह मेंशन करना होगा।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. पात्रता और जरूरी शर्तें</h3>
<p>
	यात्रा की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए कुछ कड़े नियम निर्धारित किए गए हैं:</p>
<p>
	<strong>नागरिकता: </strong>केवल भारतीय नागरिक (सरकारी मार्ग के लिए)।</p>
<p>
	<strong>आयु सीमा: </strong>आवेदक की आयु 18 से 70 वर्ष के बीच होनी चाहिए।</p>
<p>
	<strong>स्वास्थ्य: </strong>आवेदक शारीरिक रूप से स्वस्थ होना चाहिए। उच्च रक्तचाप, मधुमेह, अस्थमा या हृदय रोग जैसी गंभीर स्थिति होने पर अनुमति नहीं मिलती।</p>
<p>
	<strong>BMI (Body Mass Index):</strong> सरकारी नियमों के अनुसार, आपका BMI 27 या उससे कम होना अनिवार्य है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. आवश्यक दस्तावेज (Checklist)</h3>
<p>
	आवेदन करते समय निम्नलिखित दस्तावेज अपने पास तैयार रखें:</p>
<p>
	<strong>पासपोर्ट:</strong> साधारण भारतीय पासपोर्ट जिसकी वैधता यात्रा की तारीख से कम से कम 6 महीने बाद तक हो।</p>
<p>
	<strong>फोटो: </strong>हाल ही में खींची गई पासपोर्ट साइज रंगीन फोटो (सफेद बैकग्राउंड)।</p>
<p>
	<strong>आईडी प्रूफ:</strong> आधार कार्ड या वोटर आईडी कार्ड की स्कैन कॉपी।</p>
<p>
	<strong>मेडिकल डिक्लेरेशन: </strong>अपनी फिटनेस के संबंध में स्व-घोषणा पत्र।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. यात्रा में एक दल में रहेंगे 60 यात्री:</h3>
<p>
	विदेश मंत्रालय अभी 1 वर्ष में 18 जत्थों में 1,000 से अधिक तीर्थयात्रियों को कैलाश मानसरोवर ले जाता है और यह यात्रा 22 दिनों की होती है। एक जत्थे में 60 यात्री रहते हैं। सभी यात्रियों का हेल्थ चेकअप होने के बाद यात्रियों की 3 दिन की दिल्ली में ट्रेनिंग भी होती है। शारीरिक रूप से सक्षम लोगों को ही यात्रा की अनुमति मिलती है। दिल्ली में ITO स्थित ITBP अस्पताल में मेडिकल चेकअप होता है। इस बार यात्रा 10 दलों में होगी। </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. यात्रा का शेड्यूल ये रहेगा:</h3>
<ul>
	<li>
		यह यात्रा दिल्ली से प्रारंभ होकर पिथौरागढ़ के लिपुलेख पास मार्ग से संचालित की जाएगी। प्रत्येक जत्थे की 22 दिनों की यात्रा रहेगी।</li>
	<li>
		प्रत्येक दल दिल्ली से प्रस्थान कर टनकपुर, धारचूला में एक-एक रात, गुंजी व नाभीढांग में दो रात रुकने के बाद (तकलाकोट) चीन में प्रवेश करेगा।</li>
	<li>
		कैलाश दर्शन के बाद वापसी में चीन से प्रस्थान कर बूंदी, चौकोड़ी, अल्मोड़ा में एक-एक रात रुकने के बाद दिल्ली पहुंचेगा।</li>
</ul>
<p>
	 </p>
<h3>
	6. सावधानी और सुझाव</h3>
<p>
	कैलाश मानसरोवर की यात्रा 15,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर होती है। आवेदन करने से पहले से ही पैदल चलने, योग और प्राणायाम का अभ्यास शुरू कर दें ताकि आपका शरीर कम ऑक्सीजन वाले वातावरण के लिए तैयार हो सके।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 11:47:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 30 Apr 2026 11:56:58 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Religious Places]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Kachhap Avatar: कूर्म जयंती 2026: जब श्रीहरि की पीठ पर टिका मंदराचल पर्वत, जानें समुद्र मंथन की ये अनोखी कथा]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/kurma-avatar-katha-2026-126043000008_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/kurma-avatar-katha-2026-126043000008_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/30/thumb/1_1/1777526790-7519.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/30/thumb/1_1/1777526790-7519.jpg</image>
      <description><![CDATA[Lord Vishnu Kurma Jayanti 2026: 01 मई को वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि है। इस दिन को बुद्ध पूर्णिमा और कूर्म जयंती के पावन अवसर के रूप में मनाया जाएगा। यह वैशाख मास के स्नान और दान का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार आज के ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p>
		<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
			<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
				<img align="center" alt="Kurma Avatar holding Mandarachal Mountain" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/30/full/1777526790-7519.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
		</p>
	</p>
	<p>
		<strong>Kurma Avatar story:</strong> भगवान विष्णु के द्वितीय अवतार, कूर्म अवतार और समुद्र मंथन की पौराणिक कथा न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह जीवन के गहरे प्रबंधन सूत्रों को भी सिखाती है। जब देवता और असुर अमृत की खोज में एकजुट हुए, तब मंदराचल पर्वत को डूबने से बचाने के लिए श्रीहरि ने कछुए का रूप धरा।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/buddha-jayanti-special/what-do-people-do-on-buddha-purnima-126042800040_1.html" target="_blank">Buddha Purnima 2026: बुद्ध पूर्णिमा पर क्या करते हैं?</a></strong></p>
	<p>
		आज के डिजिटल युग में, लोग न केवल इस कथा के आध्यात्मिक पक्ष को खोज रहे हैं, बल्कि इससे जुड़ी ज्योतिषीय और सांस्कृतिक मान्यताओं को भी जानना चाहते हैं।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		यहां पढ़ें कूर्म जयंती की कथा...</h3>
	<p>
		 </p>
	<p>
		01 मई को पड़ने वाला वैशाख पूर्णिमा का दिन भारतीय संस्कृति में बेहद खास है। यह वही पावन तिथि है जब हम बुद्ध जयंती और महर्षि भृगु जयंती के साथ-साथ &#39;कूर्म जयंती&#39; भी मनाते हैं। &#39;कूर्म&#39; यानी कछुआ- भगवान विष्णु का वह अवतार, जिसने डूबते हुए पर्वत को संभालकर सृष्टि को अमृत का वरदान दिलाया।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		क्रोध, शाप और खोई हुई लक्ष्मी कहानी</h3>
	<p>
		शुरू होती है दुर्वासा ऋषि के भयंकर क्रोध से। जब देवराज इंद्र ने अनजाने में ऋषि का अपमान किया, तो उन्होंने इंद्र को &#39;श्री&#39; (लक्ष्मी और ऐश्वर्य) से हीन होने का शाप दे दिया। स्वर्ग की रौनक चली गई और देवता शक्तिहीन हो गए। </p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		तब संकटमोचन विष्णु जी ने एक युक्ति निकाली- समुद्र मंथन! उन्होंने असुरों को अमृत का लालच देकर देवताओं के साथ मिलकर समुद्र को मथने के लिए राजी किया।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		जब डूबने लगा मंदराचल पर्वत... </h3>
	<p>
		मंथन की तैयारी पूरी थी। मंदराचल पर्वत को &#39;मथानी&#39; बनाया गया और नागराज वासुकि को &#39;नेती&#39; (रस्सी)। लेकिन जैसे ही मंथन शुरू हुआ, एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई। समुद्र के बीचों-बीच पर्वत को सहारा देने वाला कोई ठोस आधार नहीं था और वह धीरे-धीरे पानी में डूबने लगा।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		कच्छप अवतार और 14 रत्नों का जन्म </h3>
	<p>
		देवताओं को संकट में देख भगवान विष्णु ने एक विशालकाय कछुए (कच्छप) का रूप धारण किया। वे समुद्र के तल में जाकर बैठ गए और मंदराचल पर्वत को अपनी कठोर पीठ पर थाम लिया।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		भगवान की पीठ के मजबूत आधार पर पर्वत तेजी से घूमने लगा और फिर शुरू हुआ चमत्कारों का सिलसिला। समुद्र से एक-एक करके 14 रत्न निकले, जिनमें माता लक्ष्मी, ऐरावत हाथी और अंत में अमृत कलश शामिल था।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>खास बात: </strong>इसी कथा के अंत में विष्णु जी ने मोहिनी रूप भी धरा था, ताकि असुरों से अमृत बचाकर देवताओं को अमर बनाया जा सके।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		कूर्म अवतार हमें सिखाता है कि बड़े लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए एक मजबूत &#39;आधार&#39; और धैर्य की आवश्यकता होती है। इस बार कूर्म जयंती पर जब आप कछुए का प्रतीक देखें, तो याद रखिएगा कि यह केवल एक जीव नहीं, बल्कि उस शक्ति का प्रतीक है जिसने पूरी सृष्टि के कल्याण के लिए भार उठाया था।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/buddha-jayanti-special/inspirational-buddha-purnima-quotes-126042900048_1.html" target="_blank">Buddha Purnima wishes: बुद्ध पूर्णिमा पर अपनों को भेजें ये 10 सबसे अलग खुशियों भरे शुभकामना संदेश</a></strong></p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 11:03:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 30 Apr 2026 11:00:45 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Other Festivals]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Narasimha Jayanti Status: नृसिंह जयंती पर सफलता और समृद्धि की कामना हेतु अपनों को भेजें ये 10 आकर्षक संदेश]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/religious-article/narasimha-jayanti-greetings-126042900053_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/religious-article/narasimha-jayanti-greetings-126042900053_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/29/thumb/1_1/1777461605-9685.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Happy Narasimha Jayanti Messages: भगवान नृसिंह जयंती, जिसे नृसिंह चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है, भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार की याद में मनाया जाता है। यह पर्व विशेष रूप से उन भक्तों के लिए महत्वपूर्ण है जो जीवन में संकटों, असुरक्षा और ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="भगवान नृसिंह जयंती पर ढेरों बधाई" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/29/full/1777461605-9685.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Narasimha Jayanti Greetings: </strong>नृसिंह भगवान का अवतार आध्यात्मिक और भौतिक दोनों ही स्तरों पर सुरक्षा और न्याय का प्रतीक है। यह दिन हमें साहस, धैर्य और करुणा की सीख देता है। इस अवसर पर लोग अपने प्रियजनों को नृसिंह जयंती संदेश भेजते हैं और मंदिरों में विशेष पूजा करते हैं। आज डिजिटल युग में लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की मदद से लोग नृसिंह जयंती शुभकामना संदेश शेयर करते हैं, जिससे परिवार और मित्रों के बीच सकारात्मकता और भक्ति का भाव बढ़ता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/narsimha-puja-date-n-shubh-muhurat-2026-126042900005_1.html" target="_blank">Narsimha Jayanti 2026 Date: नृसिंह जयंती पर पूजा के शुभ मुहूर्त, महत्व, परंपरा और पारण समय</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>भगवान नृसिंह जयंती के पावन अवसर पर अपने मित्रों और परिजनों को जोश, शक्ति और विजय के ये 10 विशेष शुभकामना संदेश अवश्य भेजें... </strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	भगवान नृसिंह जयंती की विशेष शुभकामनाएं</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. बुराई पर अच्छाई की जीत</h3>
<p>
	"जैसे भगवान नृसिंह ने भक्त प्रहलाद की रक्षा कर अधर्म का नाश किया, वैसे ही आपके जीवन से सभी बाधाएं दूर हों। नृसिंह जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं!"</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. सफलता का आशीर्वाद</h3>
<p>
	"शक्ति और साहस के प्रतीक भगवान नृसिंह आपको हर क्षेत्र में सफलता प्रदान करें। आपके अटूट विश्वास की जीत हो। शुभ नृसिंह जयंती!"</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. संकल्प की शक्ति</h3>
<p>
	"इस नृसिंह जयंती, प्रभु आपको सत्य के मार्ग पर चलने की शक्ति और विपरीत परिस्थितियों से लड़ने का साहस दें। मंगलमय शुभकामनाएं!"</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. भय से मुक्ति</h3>
<p>
	"स्तंभ फोड़कर प्रकट होने वाले प्रभु, आपके मन के भय और असुरक्षा को समाप्त करें और आपको निर्भय जीवन प्रदान करें। जय श्री नृसिंह!"</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. विपदाओं का अंत</h3>
<p>
	"अधर्म के विनाशक और भक्तों के रक्षक भगवान नृसिंह की कृपा आप पर सदा बनी रहे। आपके जीवन की हर विपदा का अंत हो।"</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	6. समृद्धि और सुरक्षा</h3>
<p>
	"भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार का आशीर्वाद आपके घर में सुख, शांति और अटूट समृद्धि लेकर आए। प्रभु आपकी हर पल रक्षा करें।"</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	7. विजयी भव:</h3>
<p>
	"शत्रुओं पर विजय और कार्यों में सिद्धि हेतु भगवान नृसिंह का ध्यान करें। आपकी मेहनत को प्रभु का आशीर्वाद मिले। जय नृसिंह देव!"</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	8. घर में खुशहाली</h3>
<p>
	"नृसिंह देव की गर्जना आपके जीवन से नकारात्मकता को दूर भगाए और आपके आंगन में खुशियों की गूंज हो। शुभ नृसिंह जयंती!"</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	9. भक्ति का फल</h3>
<p>
	"प्रहलाद जैसी अटूट भक्ति और प्रभु जैसा असीम स्नेह आपके जीवन को धन्य कर दे। सफलता और समृद्धि की ओर आपके कदम बढ़ते रहें। हैप्पी नृसिंह जयंती" </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	10. दिव्य तेज</h3>
<p>
	"नृसिंह भगवान के दिव्य तेज से आपका व्यक्तित्व और भविष्य चमक उठे। आपको और आपके परिवार को भगवान नृसिंह जयंती पर ढेरों बधाई!"</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<span style="color:#800000;"><strong>"उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥"</strong></span></p>
<p>
	भगवान नृसिंह आपकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करें!</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/other-festivals/5-untold-secrets-about-lord-narsimha-126042900022_1.html" target="_blank">Narasimha jayanti 2026: नृसिंह भगवान के बारे में 5 अनसुने रहस्य</a></strong></p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 17:07:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 29 Apr 2026 17:08:04 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Religious Article]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[बुद्ध जयंती 2026: आखिर कहां और कैसे हुआ था गौतम बुद्ध का जन्म? जानें पूरी सच्चाई]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/buddha-jayanti-special/buddha-purnima-gautam-buddha-birth-place-history-hindi-126042900027_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/buddha-jayanti-special/buddha-purnima-gautam-buddha-birth-place-history-hindi-126042900027_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/29/thumb/1_1/1777448926-2802.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/29/thumb/1_1/1777448926-2802.jpg</image>
      <description><![CDATA[गौतम बुद्ध का जन्म बैशाख माह की पूर्णिमा के दिन हुआ था। इस बार बुद्ध जयंती 2026 1 मई 2026 को मनाई जाएगी। यह दिन गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति (निर्वाण) और महापरिनिर्वाण- तीनों के लिए समर्पित है। गौतम बुद्ध के जन्म से जुड़ी कहानी और स्थान दोनों ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Lord buddha jayant and Birth Place" class="imgCont" height="800" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/29/full/1777448926-2802.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="Lord buddha jayant and Birth Place" width="1200" /></p>
	</p>
	गौतम बुद्ध का जन्म बैशाख माह की पूर्णिमा के दिन हुआ था। इस बार बुद्ध जयंती 2026 1 मई 2026 को मनाई जाएगी। यह दिन गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति (निर्वाण) और महापरिनिर्वाण- तीनों के लिए समर्पित है। गौतम बुद्ध के जन्म से जुड़ी कहानी और स्थान दोनों ही ऐतिहासिक और आध्यात्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. जन्म स्थान: लुम्बिनी (Lumbini)</h3>
<p>
	<strong>लुम्बिनी:</strong>गौतम बुद्ध का जन्म आज से लगभग 2600 साल पहले लुम्बिनी नामक वन में हुआ था।</p>
<p>
	<strong>वर्तमान स्थिति: </strong>यह स्थान आज के नेपाल के रूपनदेही जिले में स्थित है, जो भारतीय सीमा (कपिलवस्तु) के बेहद करीब है।</p>
<p>
	<strong>अशोक स्तंभ: </strong>महान सम्राट अशोक ने बुद्ध के जन्म स्थान की पहचान के लिए यहां एक शिलालेख युक्त स्तंभ स्थापित किया था, जो आज भी वहां मौजूद है और यह प्रमाणित करता है कि यही बुद्ध की जन्मस्थली है।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/buddha-jayanti-special/what-do-people-do-on-buddha-purnima-126042800040_1.html" target="_blank">Buddha Purnima 2026: बुद्ध पूर्णिमा पर क्या करते हैं?</a></strong></p>
</p>
<h3>
	2. जन्म की कहानी: एक अलौकिक घटना</h3>
<p>
	<strong>बुद्ध के जन्म की कथा बहुत ही सुंदर है:</strong></p>
<p>
	<strong>माता-पिता: </strong>उनके पिता राजा शुद्धोदन शाक्य गणराज्य (कपिलवस्तु) के शासक थे और माता रानी महामाया थीं।</p>
<p>
	<strong>माया देवी का सपना: </strong>बुद्ध के जन्म से पहले रानी महामाया ने स्वप्न में देखा कि एक सफेद हाथी ने उनके गर्भ में प्रवेश किया है, जिसे एक पवित्र आत्मा के आगमन का संकेत माना गया।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/buddha-jayanti-special/the-theory-of-karma-126042800034_1.html" target="_blank">Buddha Purnima 2026: बुद्ध के कर्म का मनोविज्ञान: कैसे बनता है कर्म से भाग्य?</a></strong></p>
</p>
<h3>
	3. सफर के दौरान जन्म: </h3>
<p>
	गौतम बुद्ध का जन्म ईसा से 563 साल पहले नेपाल के लुम्बिनी वन में हुआ। प्राचीन परंपरा के अनुसार, कपिलवस्तु की रानी महामाया अपने मायके (देवदह) जा रही थीं। रास्ते में लुम्बिनी के सुंदर वनों में विश्राम के दौरान उन्हें प्रसव पीड़ा हुई। रानी ने एक साल के वृक्ष (Sal Tree) की टहनी को पकड़कर भगवान बुद्ध को जन्म दिया। जन्म के तुरंत बाद बुद्ध ने 7 कदम चले और जहां-जहां उनके पैर पड़े, वहां कमल के फूल खिल उठे।  बुद्ध के जन्म के केवल 7 दिन बाद उनकी माता का निधन हो गया था, जिसके बाद उनका पालन-पोषण उनकी मौसी महाप्रजापति गौतमी ने किया। इसी कारण उन्हें &#39;गौतम&#39; कहा जाने लगा। कपिलवस्तु और देवदह के बीच नौतनवा स्टेशन से 8 मील दूर पश्चिम में रुक्मिनदेई नामक स्थान के पास उस काल में लुम्बिनी वन हुआ करता था।</p>
<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="buddha purnima" class="imgCont" height="705" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/28/full/1777368508-5087.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="buddha purnima" width="1200" /></p>
</p>
<h3>
	4. बचपन का नाम और भविष्यवाणी</h3>
<p>
	उनका बचपन का नाम सिद्धार्थ रखा गया। उनके जन्म के बाद ऋषि असित ने भविष्यवाणी की थी कि यह बालक या तो एक चक्रवर्ती सम्राट बनेगा या फिर एक महान सन्यासी जो पूरे संसार को दुख से मुक्ति का मार्ग दिखाएगा।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. लुम्बिनी में आज क्या है खास?</h3>
<p>
	यदि आप बुद्ध जयंती पर लुम्बिनी जाने का विचार कर रहे हैं, तो वहां ये मुख्य आकर्षण हैं:</p>
<p>
	<strong>माया देवी मंदिर: </strong>यह ठीक उसी स्थान पर बना है जहाँ बुद्ध का जन्म हुआ था।</p>
<p>
	<strong>पुष्करिणी पवित्र तालाब: </strong>जहाँ रानी महामाया ने जन्म से पहले स्नान किया था।</p>
<p>
	<strong>विभिन्न देशों के मठ: </strong>लुम्बिनी में थाईलैंड, जापान, श्रीलंका और वियतनाम जैसे देशों ने अपने सुंदर पैगोडा और मंदिर बनाए हैं।</p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 13:14:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 29 Apr 2026 13:20:07 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[buddha jayanti]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[गंगोत्री और यमुनोत्री यात्रा की 10 खास बातें, हर यात्री को जरूर जाननी चाहिए]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/religious-places/gangotri-yamunotri-yatra-guide-hindi-126042900017_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/29/thumb/1_1/1777443469-6962.jpg"/>
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      <description><![CDATA[गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा 'छोटा चारधाम' का अभिन्न हिस्सा है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित इन दोनों धामों की यात्रा न केवल धार्मिक रूप से, बल्कि प्राकृतिक सुंदरता के लिहाज से भी बेमिसाल है। हालांकि दोनों ही जगहों की यात्रा को केदारनाथ ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;clear: both;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="" alt="gangotri and yamunotri yatra" class="imgCont" height="800" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/29/full/1777443469-6962.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 10px; padding: 1px; float: left; z-index: 0;" title="gangotri and yamunotri yatra" width="1200" /></p>
	</p>
	गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा &#39;छोटा चारधाम&#39; का अभिन्न हिस्सा है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित इन दोनों धामों की यात्रा न केवल धार्मिक रूप से, बल्कि प्राकृतिक सुंदरता के लिहाज से भी बेमिसाल है। हालांकि दोनों ही जगहों की यात्रा को केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम से ज्यादा कठिन मानी जाती है। कई यात्री यात्रा का प्रारंभ भी यहीं से करते हैं। यहाँ इन दोनों धामों के बारे में 10 खास जानकारियां दी गई हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. यात्रा का क्रम (The Ritual Order)</h3>
<p>
	हिंदू परंपरा के अनुसार, चारधाम यात्रा हमेशा पश्चिम से पूर्व की ओर की जाती है। इसलिए सबसे पहले यमुनोत्री के दर्शन होते हैं और उसके बाद गंगोत्री की यात्रा की जाती है। इसके बाद केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ धाम की यात्री की जाती है।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/religious-places/10-precautions-for-the-char-dham-yatra-126041800020_1.html" target="_blank">Char dham yatra: चार धाम यात्रा में रखें ये 10 सावधानियां जरूर जानें</a></strong></p>
</p>
<h3>
	2. कपाट खुलने और बंद होने का समय</h3>
<p>
	ये दोनों मंदिर साल में केवल 6 महीने (गर्मियों में) ही खुलते हैं। आमतौर पर इनके कपाट अक्षय तृतीया (अप्रैल/मई) को खुलते हैं और दीपावली के आसपास भाई-दूज के दिन बंद कर दिए जाते हैं। यात्रा का समय मई से जून (गर्मियों में) सही माना गया है। यदि आप शांति से दर्शन करना चाहते हैं और ठंड सहन कर सकते हैं, तो सितंबर के अंत या अक्टूबर की शुरुआत सबसे बेहतरीन समय है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. यमुनोत्री का कठिन ट्रेक</h3>
<p>
	यमनोत्री में यमुनाजी का मंदिर है। ऋषिकेश से 220 किमी का सड़क मार्ग तय करने के बाद फूलचट्टी नामक स्‍थान से यमनोत्री की चढ़ाई प्रारंभ होती है। फूलचट्टी तक श्रद्धालु अपनी इच्‍छानुसार बस या निजी वाहन से पहुंच सकते हैं। इसके बाद यमुनोत्री मंदिर तक पहुँचने के लिए जानकीचट्टी से लगभग 5-6 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई करनी पड़ती है। यात्री पैदल, पालकी या घोड़ों (खच्चर) का सहारा लेते हैं। </p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/religious-places/char-dham-yatra-2026-dates-registration-process-126020600037_1.html" target="_blank">चार धाम यात्रा 2026 रजिस्ट्रेशन जरूरी, यहां देखें स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया</a></strong></p>
</p>
<h3>
	4. सूर्य कुंड और दिव्य शिला (यमुनोत्री)</h3>
<p>
	यमुनोत्री मंदिर के पास &#39;सूर्य कुंड&#39; नामक गर्म पानी का चश्मा (Hot Spring) है। भक्त यहाँ कपड़े की पोटली में चावल या आलू डालकर उबालते हैं, जिसे बाद में प्रसाद के रूप में घर ले जाया जाता है। मंदिर के पास स्थित &#39;दिव्य शिला&#39; की पूजा सबसे पहले की जाती है। यमुना नदी का उद्गम कालिंद नामक पर्वत से हुआ है। कालिंद पर्वत से नदी का उद्गम होने की वजह से ही लोग इसे कालिंदी भी कहते हैं। </p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/religious-places/history-of-amarnath-cave-yatra-126042900014_1.html" target="_blank">Amarnath yatra 2026: कैसे और कब प्रारंभ हुई अमरनाथ यात्रा?</a></strong></p>
</p>
<h3>
	5. भागीरथी का उद्गम: गौमुख (गंगोत्री)</h3>
<p>
	गंगोत्री मंदिर गंगा नदी (यहाँ इसे भागीरथी कहा जाता है) के तट पर स्थित है। लेकिन गंगा का वास्तविक स्रोत गौमुख ग्लेशियर है, जो गंगोत्री मंदिर से लगभग 18-19 किलोमीटर की कठिन पैदल दूरी पर स्थित है। यहां गंगा नदी ने धरती को छुआ था। ऋषि भागीरथ के प्रयास से गंगा पहले शिवजी की जटाओं में विराजमान हुई और फिर आगे गंगोत्री से मुख्य धारा बनाकर आगे बढ़ी।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/religious-places/four-dham-yatra-includes-yamunotri-gangotri-kedarnath-and-badrinath-125042200019_1.html" target="_blank">चार धाम यात्रा में यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ में सबसे पहले कहां जाएं, जानिए यात्रा का रूट</a></strong></p>
</p>
<h3>
	6. मंदिर का निर्माण (गंगोत्री)</h3>
<p>
	गंगोत्री के भव्य सफेद संगमरमर के मंदिर का निर्माण 18वीं शताब्दी के अंत में गोरखा कमांडर अमर सिंह थापा ने करवाया था। बाद में जयपुर के राजघराने ने इसका पुनरुद्धार किया।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	7. शीतकालीन निवास (Winter Abodes)</h3>
<p>
	सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण जब कपाट बंद होते हैं, तो माँ यमुना की मूर्ति को खरसाली गांव में और माँ गंगा की मूर्ति को मुखबा गांव में लाया जाता है। सर्दियों में श्रद्धालु यहीं दर्शन करते हैं।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/religious-article/kedarnath-badrinath-yatra-se-pehle-5-important-tips-126041000058_1.html" target="_blank">केदानाथ और बद्रीनाथ मंदिर धाम जाने से पहले कर लें ये जरूरी 5 तैयारियां</a></strong></p>
</p>
<h3>
	8. पंच प्रयाग और प्राकृतिक दृश्य</h3>
<p>
	इन धामों के रास्ते में आप टिहरी बांध और सुंदर पहाड़ियों के साथ-साथ कई संगमों के दर्शन करते हैं। गंगोत्री के रास्ते में पड़ने वाला हर्षिल घाटी अपनी सेब की खेती और प्राकृतिक सुंदरता के लिए &#39;मिनी स्विट्जरलैंड&#39; कहलाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	9. गर्म पानी के कुंड (गंगनानी)</h3>
<p>
	गंगोत्री मार्ग पर &#39;गंगनानी&#39; नामक स्थान है जहाँ ऋषि कुंड स्थित है। यहाँ गर्म पानी का प्राकृतिक कुंड है। मान्यता है कि मंदिर जाने से पहले श्रद्धालु यहाँ स्नान करके अपनी थकान मिटाते हैं और शुद्ध होते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	10. समुद्र तल से ऊँचाई</h3>
<p>
	<strong>यमुनोत्री: </strong>लगभग 3,293 मीटर।</p>
<p>
	<strong>गंगोत्री: </strong>लगभग 3,100 मीटर।<br />
	 </p>
<p>
	<strong>एक विशेष टिप: </strong><br />
	<ul>
		<li>
			यमुनोत्री यात्रा के दौरान बड़कोट, सयानाचट्टी, जानकीचट्टी या हनुमान चट्टी में ठहर सकते हैं।</li>
		<li>
			गंगोत्री यात्रा के दौरान गंगोत्री धाम, हर्षिल, उत्तरकाशी में ठहर सकते हैं।</li>
		<li>
			गेस्ट हाउस, धर्मशाला, आश्रम और प्राइवेट होमस्टे में ठहर सकते हैं।</li>
		<li>
			इतनी ऊँचाई पर होने के कारण यहाँ ऑक्सीजन की थोड़ी कमी महसूस हो सकती है, इसलिए यात्रियों को धीरे-धीरे चढ़ने और खूब पानी पीने की सलाह दी जाती है।</li>
		<li>
			गंगोत्री और यमुनोत्री की यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होता है, जिसे आप उत्तराखंड पर्यटन की वेबसाइट पर ऑनलाइन कर सकते हैं।</li>
		<li>
			यदि आप सरकारी बस, शेयर्ड टैक्सी (Shared Taxi) और साधारण धर्मशालाओं में रुकते हैं तो प्रति व्यक्ति खर्च: 12,000 से 18,000 रुपए तक खर्च आ सकता है।</li>
	</ul>
</p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 11:41:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 29 Apr 2026 12:01:02 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Religious Places]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Guru Amar Das Jayanti: गुरु अमरदास जयंती कैसे मनाएं, जानें जीवन परिचय, महत्व और योगदान]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/sikh-religion/guru-amar-das-ji-guruparv-2026-126042900011_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/29/thumb/1_1/1777440906-3094.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Happy Guru Amar Das Ji Jayanti 2026: गुरु अमरदास जी का जन्म 1479 ईस्वी में अमृतसर जिले के बसरके गिलान गांव में हुआ था। उनकी माता का नाम माता बख्त कौर और पिता का नाम तेज भान भल्ला। उनका बचपन सरल जीवन और धार्मिक प्रवृत्ति में बीता। वे सिख धर्म के ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="गुरु अमरदास जी" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/29/full/1777440906-3094.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Guru Amardas Jayanti 2026: </strong>गुरु अमरदास जयंती सिख धर्म के तीसरे गुरु, गुरु अमरदास जी की जयंती के रूप में मनाई जाती है। गुरु अमरदास जी जन्म तिथिनुसार वैशाख सुदी 14, (8वें जेठ), संवत 1536 तथा कैलेंडर के अनुसार 5 मई 1479 को अमृतसर जिले के बसरके गिलान गांव में हुआ था। यह पर्व उनके जन्मदिवस के अवसर पर मनाया जाता है और विशेष रूप से सिख समुदाय में धार्मिक अनुष्ठानों और सामाजिक कार्यक्रमों के रूप में आयोजित होता है। वर्ष 2026 में उनकी जयंती 30 अप्रैल 2026 को मनाई जा रही है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/sikh-religion/guru-arjun-dev-jayanti-126040800009_1.html" target="_blank">Guru Arjun Dev Ji: गुरु अर्जन देव जी का इतिहास क्या है?</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	गुरु अमरदास जी के बारे में जानकारी</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	* जन्म तिथि: वैशाख सुदी 14 को।</p>
<p>
	* जन्म: 5 मई 1479 (कुछ स्रोत 1479 को और कुछ 1478 को बताते हैं)</p>
<p>
	* माता-पिता: बख्त कौर/ लखमी देवी तथा तेज भान भल्ला।</p>
<p>
	* गुरु पद ग्रहण: 1552</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	* विशेष योगदान:</h3>
<p>
	- लंगर प्रणाली की स्थापना: सभी के लिए समान भोजन, जाति, धर्म और आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	- सिखों में सामाजिक सुधार: महिलाओं के अधिकार और गरीबों की सेवा पर जोर।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	- संगीत और भजन की प्रथा: गुरुद्वारों में भजन और कीर्तन को बढ़ावा दिया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	- सिख ग्रंथों का योगदान: गुरु अमरदास जी ने अपने समय में कई बाणी (शब्द) और नीतियां स्थापित कीं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	गुरु अमरदास जयंती का महत्व</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	1. समानता और सेवा का संदेश: लंगर और समाज सेवा के माध्यम से समानता का प्रचार किया।</p>
<p>
	2. सामाजिक सुधार: उन्होंने गरीब और वंचितों की सेवा पर बल दिया।</p>
<p>
	3. धार्मिक प्रेरणा: भक्ति और सच्चाई का मार्ग दिखाया।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	कैसे मनाई जाती है?</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	* इस दिन गुरुद्वारों में कीर्तन, भजन, प्रवचन और लंगर आयोजित किया जाता है।</p>
<p>
	* श्रद्धालु गुरु अमरदास जी की शिक्षाओं का स्मरण करते हैं और सामाजिक सेवा में भाग लेते हैं।</p>
<p>
	* विशेष रूप से पंजाब और सिख समुदाय के मुख्य शहरों में भव्य कार्यक्रम आयोजित होते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	गुरु अमरदास जी ने समानता, सेवा और भक्ति के सिद्धांतों को बढ़ावा दिया। उन्होंने लंगर प्रणाली की स्थापना की, जिसमें सभी जाति और धर्म के लोग एक साथ भोजन करते थे। सिख धर्म के महान प्रचारक और नानक देव जी के आदर्शों को आगे बढ़ाने वाले तृतीय गुरु, श्री गुरु अमरदास जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/sikh-religion/guru-angad-dev-jayanti-126041500045_1.html" target="_blank">गुरु अंगद देव जयंती, जानें सिख धर्मगुरु के बारे में 10 अनजानी बातें</a></strong></p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 11:20:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 29 Apr 2026 11:09:01 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Sikh Religion]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Amarnath yatra 2026: कैसे और कब प्रारंभ हुई अमरनाथ यात्रा?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/religious-places/history-of-amarnath-cave-yatra-126042900014_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/religious-places/history-of-amarnath-cave-yatra-126042900014_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2025-07/28/thumb/1_1/1753708468-9722.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2025-07/28/thumb/1_1/1753708468-9722.jpg</image>
      <description><![CDATA[प्रतिवर्ष आषाढ़ माह में अमरनाथ यात्रा का आयोजन होता है। दुर्गम क्षेत्र की यह यात्रा कश्मीर के पहलगाम और बालटाल से प्रारंभ होती है। प्राचीनाकल से ही इस यात्रा का आयोजन होता आया है। अमरनाथ यात्रा के प्रारंभ होने की कहानी पौराणिक कथाओं, ऐतिहासिक ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="Amarnath Yatra" class="imgCont" height="675" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2025-07/28/full/1753708468-9722.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="Amarnath Yatra" width="1200" /></p>
	प्रतिवर्ष आषाढ़ माह में अमरनाथ यात्रा का आयोजन होता है। दुर्गम क्षेत्र की यह यात्रा कश्मीर के पहलगाम और बालटाल से प्रारंभ होती है। प्राचीनाकल से ही इस यात्रा का आयोजन होता आया है। अमरनाथ यात्रा के प्रारंभ होने की कहानी पौराणिक कथाओं, ऐतिहासिक दस्तावेजों और लोक मान्यताओं का एक दिलचस्प संगम है। इसके प्रारंभ को हम 3 मुख्य दृष्टिकोणों से समझ सकते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. पौराणिक कथा: अमरकथा का रहस्य</h3>
<p>
	<strong>अमरकथा: </strong>धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमरनाथ गुफा वही स्थान है जहां भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य (अमरकथा) सुनाया था।</p>
<p>
	<strong>शुरुआत: </strong>जब पार्वती जी ने शिवजी से उनके अमर होने का रहस्य पूछा, तो शिवजी उन्हें एक एकांत स्थान पर ले जाना चाहते थे ताकि कोई और उस कथा को न सुन सके।</p>
<p>
	<strong>त्याग की यात्रा: </strong>यात्रा के दौरान उन्होंने पहलगाम में अपने बैल (नंदी) को, चंदनवाड़ी में चंद्रमा को, शेषनाग झील पर सांपों को और महागुणास पर्वत पर अपने पुत्र गणेश को छोड़ दिया।</p>
<p>
	<strong>अमर पक्षी: </strong>कथा सुनाते समय वहां मौजूद दो कबूतरों ने भी वह अमरकथा सुन ली और वे अमर हो गए। आज भी श्रद्धालुओं को वहां कबूतरों का जोड़ा दिखाई देता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. भृगु ऋषि द्वारा खोज (प्राचीन मान्यता)</h3>
<p>
	<strong>कश्यप ऋषि का राज्य कश्मीर: </strong>शास्त्रों के अनुसार, प्राचीन काल में कश्मीर की घाटी जलमग्न थी। कश्यप ऋषि ने जब नदियों के माध्यम से पानी निकाला, तब भृगु ऋषि हिमालय की यात्रा पर निकले। </p>
<p>
	<strong>प्रथम यात्री भृगु ऋषि: </strong>माना जाता है कि जलस्तर कम होने पर सबसे पहले भृगु ऋषि ने ही इस पवित्र गुफा और हिम शिवलिंग के दर्शन किए थे। तब से ही ऋषि-मुनियों और भक्तों के लिए यह एक प्रमुख तीर्थ बन गया।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. ऐतिहासिक साक्ष्य और &#39;बूटा मलिक&#39; की कहानी</h3>
<p>
	ऐतिहासिक उल्लेख: कल्हण की &#39;राजतरंगिणी&#39; (12वीं शताब्दी) में &#39;अमरेश्वर&#39; के नाम से इस तीर्थ का वर्णन मिलता है, जो सिद्ध करता है कि यह यात्रा हजारों साल पुरानी है। मुगल काल में &#39;आइन-ए-अकबरी&#39; में भी इस गुफा का जिक्र मिलता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>बूटा मलिक (15वीं/19वीं शताब्दी): </strong>कहा जाता है कि मध्यकाल में यह रास्ता लुप्त हो गया था। तब &#39;बूटा मलिक&#39; नाम के एक मुस्लिम चरवाहे को एक साधु ने कोयले से भरा बैग दिया। घर पहुँचने पर उसने देखा कि वह सोना बन गया है। जब वह साधु का धन्यवाद करने वापस पहुंचा, तो उसे वहां साधु नहीं बल्कि यह पवित्र गुफा मिली।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	कब शुरू होती है यह यात्रा?</h3>
<p>
	<strong>यात्रा तिथि : </strong>यह यात्रा प्रतिवर्ष हिंदू कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होकर श्रावण पूर्णिमा (रक्षाबंधन) तक चलती है। आमतौर पर यह समय जून के अंत या जुलाई की शुरुआत से लेकर अगस्त तक का होता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>क्या आप जानते हैं? </strong>अमरनाथ का शिवलिंग प्राकृतिक रूप से बर्फ के टपकने (Stalagmite) से बनता है, और आश्चर्य की बात यह है कि चंद्रमा की कलाओं (घटने-बढ़ने) के साथ इस शिवलिंग का आकार भी घटता और बढ़ता है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 11:15:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 29 Apr 2026 11:20:33 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Religious Places]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Narsimha Jayanti 2026 Date: नृसिंह जयंती पर पूजा के शुभ मुहूर्त, महत्व, परंपरा और पारण समय]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/narsimha-puja-date-n-shubh-muhurat-2026-126042900005_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/narsimha-puja-date-n-shubh-muhurat-2026-126042900005_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/29/thumb/1_1/1777436638-7175.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/29/thumb/1_1/1777436638-7175.jpg</image>
      <description><![CDATA[Narsimha Jayanti 2026: वर्ष 2026 में नृसिंह जयंती 30 अप्रैल, गुरुवार को मनाई जाएगी। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, यह पर्व हर साल वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। नृसिंह जयंती 2026 से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी और शुभ मुहूर्त इस ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="भगवान नृसिंह का सुंदर फोटो" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/29/full/1777436638-7175.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Narsimha Puja 2026: </strong>नृसिंह जयंती हिंदू धर्म का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। भगवान नरसिंह का स्वरूप आधा मानव और आधा सिंह है, और यह अवतार भक्त प्रह्लाद की रक्षा और अधर्म का नाश करने के लिए लिया गया था। इस दिन भक्त भगवान नरसिंह की पूजा अर्चना करके अपने जीवन में सुरक्षा, शक्ति, और समृद्धि की कामना करते हैं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/nrisingh-jayanti-remedies-2026-126042800043_1.html" target="_blank">Nrisingh Jayanti 2026: नृसिंह जयंती पर करें 5 विशेष कार्य तो मिलेगी शत्रुओं से मुक्ति</a></strong></p>
<h3>
	 </h3>
<h3>
	नृसिंह जयंती हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को आती है। यहां वर्ष 2026 के शुभ मुहूर्त और पारण समय प्रस्तुत है...</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	नृसिंह जयंती 2026 के शुभ मुहूर्त: Narsimha Jayanti Shubh Muhurat 2026</h3>
<p>
	नृसिंह जयंती तिथि: 30 अप्रैल 2026, गुरुवार</p>
<p>
	 </p>
<p>
	चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 29 अप्रैल 2026 को शाम 07:51 बजे</p>
<p>
	 </p>
<p>
	चतुर्दशी तिथि समाप्त: 30 अप्रैल 2026 को रात 09:12 बजे</p>
<p>
	 </p>
<p>
	मध्याह्न संकल्प का समय: सुबह 10:59 बजे से दोपहर 01:38 बजे तक</p>
<p>
	 </p>
<p>
	सायंकाल पूजा मुहूर्त: शाम 04:17 बजे से शाम 06:56 बजे तक</p>
<p>
	कुल अवधि: लगभग 2 घंटे 39 मिनट</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	नृसिंह जयंती के लिए अगले दिन का व्रत पारण का समय -</h3>
<p>
	1 मई 2026 को सुबह 05:41 बजे के बाद किया जाएगा। </p>
<p>
	नृसिंह जयंती पारण के दिन चतुर्दशी सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	नृसिंह जयंती का पारण:</h3>
<p>
	नृसिंह जयंती व्रत का पारण अगले दिन प्रातःकाल पूजा विधि संपन्न करके किया जाता है। पारण के समय हल्का और सात्विक भोजन किया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	नृसिंह जयंती का महत्व:</h3>
<p>
	<strong>भगवान विष्णु का अवतार:</strong> इस दिन भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा करने और असुर राजा हिरण्यकश्यप का वध करने के लिए आधे नर और आधे सिंह (नृसिंह) का अवतार लिया था।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>बुराई पर अच्छाई की जीत: </strong>यह त्योहार अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>व्रत और पूजा: </strong>श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं। भगवान नृसिंह का प्राकट्य संध्या काल (सूर्यास्त के समय) हुआ था, इसलिए इस समय की गई पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>पूजा विधि:</strong> भगवान नृसिंह की मूर्ति को गंगाजल, पंचामृत और चंदन से स्नान कराया जाता है। उन्हें पीले फूल और तुलसी दल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	नृसिंह जयंती पूजा की परंपरा:</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>1. स्वच्छता और सजावट: </strong>घर और पूजा स्थल को स्वच्छ कर फूल, दीप और रंगोली से सजाया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>2. भगवान का अभिषेक: </strong>दूध, घी, शहद और जल से भगवान नरसिंह का अभिषेक किया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>3. भजन और कीर्तन: </strong>नरसिंह स्तोत्र, महामंत्र और भजन गाकर भगवान की स्तुति की जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>4. व्रत और उपवास: </strong>भक्त व्रत रखते हैं और दिनभर फल, दूध, और हल्का भोजन ग्रहण करते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>5. दान और परोपकार: </strong>गरीबों को भोजन और वस्त्र दान करना भी शुभ माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/nrisingh-jayanti-remedies-2026-126042800043_1.html" target="_blank">Nrisingh Jayanti 2026: नृसिंह जयंती पर करें 5 विशेष कार्य तो मिलेगी शत्रुओं से मुक्ति</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 29 Apr 2026 10:05:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 29 Apr 2026 10:01:07 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[astrology articles]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Narasimha chaturdashi 2026: नृसिंह चतुर्दशी क्या है, वैशाख मास में क्यों मनाई जाती है?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/nrisingh-chaturdashi-vrat-2026-126042800036_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/nrisingh-chaturdashi-vrat-2026-126042800036_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/28/thumb/1_1/1777368489-4246.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/28/thumb/1_1/1777368489-4246.jpg</image>
      <description><![CDATA[Narasimha chaturdashi: नृसिंह चतुर्दशी भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार की पूजा का दिन है। इसे वैशाख कृष्ण चतुर्दशी को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन भगवान ने प्रहलाद की रक्षा के लिए हिरण्यकशिपु का संहार किया था।]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p>
		<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
			<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
				<img align="center" alt="भगवान नृसिंह का सुंदर फोटो" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/28/full/1777368489-4246.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
		</p>
		<br />
		<strong>Vaishakh Month Nrisingh Jayanti:</strong> नृसिंह चतुर्दशी भगवान विष्णु के सबसे उग्र और शक्तिशाली अवतार, भगवान नृसिंह के प्राकट्य का उत्सव है। यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन सूर्यास्त के समय उनकी पूजा करने से शत्रुओं पर विजय और घोर संकटों से मुक्ति मिलती है। वर्ष 2026 में नृसिंह चतुर्दशी या भगवान नृसिंह जयंती 30 अप्रैल, दिन गुरुवार को मनाई जा रही है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/tripushkar-yog-2026-mahatva-kya-kare-is-din-shubh-karya-aur-labh-126042800019_1.html" target="_blank">त्रिपुष्कर योग 2026: इस दिन क्या करें, कैसे मिलेगा कई गुना लाभ?</a></strong></p>
	<p>
		 </p>
	<ul>
		<li>
			नृसिंह चतुर्दशी क्या है?</li>
		<li>
			वैशाख मास में ही क्यों मनाई जाती है?</li>
		<li>
			इस दिन के मुख्य नियम और परंपराएं</li>
		<li>
			धार्मिक मान्यता (प्राकट्य का समय)</li>
		<li>
			वैशाख की ऊर्जा और तप</li>
		<li>
			धर्म की स्थापना का संदेश</li>
	</ul>
	<h3>
		यहां इसके महत्व और वैशाख मास से इसके संबंध की विस्तृत जानकारी दी गई है:</h3>
	<p>
		 </p>
</p>
<h3>
	नृसिंह चतुर्दशी क्या है?</h3>
<p>
	पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा करने और अधर्मी राजा हिरण्यकश्यप का वध करने के लिए नृसिंह अवतार (आधा सिंह और आधा मनुष्य) धारण किया था। यह भगवान विष्णु के चौथे अवतार, भगवान नृसिंह का प्राकट्य उत्सव या नृसिंह जयंती का दिन है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>स्वरूप: </strong>भगवान का मुख और पंजे सिंह के समान थे, जबकि धड़ मनुष्य का था।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>उद्देश्य: </strong>हिरण्यकश्यप को ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त था कि उसे न कोई मनुष्य मार सके न पशु, न दिन में न रात में, और न घर के भीतर न बाहर। इसलिए भगवान ने खंभे को चीरकर गोधूलि बेला (शाम) में, चौखट पर बैठकर अपने नाखूनों से उसका वध किया।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	वैशाख मास में ही क्यों मनाई जाती है?</h3>
<p>
	हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास को अत्यंत पवित्र और &#39;माधवन मास&#39; या भगवान विष्णु का महीना माना गया है। इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं:</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. धार्मिक मान्यता (प्राकट्य का समय):</h3>
<p>
	शास्त्रों के अनुसार, सत्ययुग में वैशाख शुक्ल चतुर्दशी के दिन ही भगवान ने यह अवतार लिया था। हिंदू धर्म में जिस तिथि को भगवान का प्राकट्य होता है, वह तिथि और मास सदैव के लिए उनके उत्सव के लिए निर्धारित हो जाते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. वैशाख की ऊर्जा और तप:</h3>
<p>
	वैशाख मास भीषण गर्मी और तप का प्रतीक है। भगवान नृसिंह का स्वभाव अत्यंत क्रोधी और &#39;अग्नि&#39; के समान तेजस्वी माना गया है। वैशाख की ऊर्जा उनके इस प्रखर तेज को दर्शाती है। यही कारण है कि इस दिन भगवान को शीतल करने के लिए चंदन का लेप लगाया जाता है और ठंडी चीजों का भोग लगाया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. धर्म की स्थापना का संदेश:</h3>
<p>
	वैशाख मास भक्ति और दान का महीना है। भक्त प्रह्लाद की &#39;अटूट भक्ति&#39; और हिरण्यकश्यप के &#39;अहंकार&#39; के अंत की यह कथा हमें सिखाती है कि जब पाप चरम पर होता है, तो ईश्वर स्वयं प्रकट होते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	इस दिन के मुख्य नियम और परंपराएं</h3>
<p>
	<strong>व्रत:</strong> श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं। इसे &#39;नृसिंह जयंती&#39; भी कहा जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>पूजा का समय: </strong>चूंकि भगवान शाम के समय प्रकट हुए थे, इसलिए इनकी मुख्य पूजा गोधूलि बेला (सूर्यास्त के समय) में की जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अभिषेक</strong>: दक्षिण भारतीय मंदिरों और वैष्णव संप्रदायों में इस दिन भगवान नृसिंह का पंचामृत अभिषेक विशेष रूप से किया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>महत्व: </strong>मान्यता है कि नृसिंह चतुर्दशी का व्रत करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और जीवन के हर प्रकार के संकट व भय का नाश होता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/buddha-jayanti-special/the-theory-of-karma-126042800034_1.html" target="_blank">Buddha Purnima 2026: बुद्ध के कर्म का मनोविज्ञान: कैसे बनता है कर्म से भाग्य?</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 15:15:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 29 Apr 2026 17:11:23 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Other Festivals]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Buddha Purnima 2026: बुद्ध पूर्णिमा पर क्या करते हैं?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/buddha-jayanti-special/what-do-people-do-on-buddha-purnima-126042800040_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/buddha-jayanti-special/what-do-people-do-on-buddha-purnima-126042800040_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/28/thumb/1_1/1777369565-0092.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/28/thumb/1_1/1777369565-0092.jpg</image>
      <description><![CDATA[बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए बुद्ध पूर्णिमा सबसे बड़ा त्योहार का दिन होता है। इस दिन अनेक प्रकार के समारोह आयोजित किए गए हैं। अलग-अलग देशों में वहां के रीति-रिवाजों और संस्कृति के अनुसार समारोह आयोजित होते हैं। बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर किए ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="buddha purnima" class="imgCont" height="782" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/28/full/1777369565-0092.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="buddha purnima" width="1200" /></p>
		<p style="float: left; clear: both; font-style:italic; padding: 10px 10px 10px 0px; width:1200px;">
			buddha purnima</p>
	</p>
	बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए बुद्ध पूर्णिमा सबसे बड़ा त्योहार का दिन होता है। इस दिन अनेक प्रकार के समारोह आयोजित किए गए हैं। अलग-अलग देशों में वहां के रीति-रिवाजों और संस्कृति के अनुसार समारोह आयोजित होते हैं। बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर किए जाने वाले कार्यों और परंपराओं को जानिए।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. धार्मिक एवं आध्यात्मिक अनुष्ठान</h3>
<p>
	<strong>प्रार्थना और तीर्थ: </strong>दुनियाभर के बौद्ध अनुयायी बोधगया में एकत्रित होते हैं और विशेष प्रार्थनाएँ आयोजित करते हैं।</p>
<p>
	<strong>अस्थि दर्शन: </strong>दिल्ली संग्रहालय इस दिन भगवान बुद्ध की पवित्र अस्थियों को दर्शन हेतु बाहर निकालता है, ताकि श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अर्पित कर सकें।</p>
<p>
	<strong>धर्मग्रंथों का पाठ: </strong>इस दिन बौद्ध धर्मग्रंथों का निरंतर पाठ किया जाता है, जिससे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा बनी रहे।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. बोधिवृक्ष एवं मंदिर पूजा विधान</h3>
<p>
	<strong>बोधिवृक्ष की पूजा: </strong>उस वृक्ष की पूजा की जाती है जिसके नीचे बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। इसकी शाखाओं को हार और रंगीन पताकाओं से सजाया जाता है।</p>
<p>
	<strong>जलाभिषेक: </strong>बोधिवृक्ष की जड़ों में दूध और सुगंधित पानी डाला जाता है और उसके आसपास दीपक प्रज्वलित किए जाते हैं।</p>
<p>
	<strong>अर्चना: </strong>मंदिरों और घरों में भगवान बुद्ध की मूर्ति पर फल-फूल चढ़ाए जाते हैं और अगरबत्ती जलाकर धूप-दीप किया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. सजावट और उत्सव की शैली</h3>
<p>
	<strong>दीपोत्सव:</strong> बौद्ध घरों में दीपक जलाए जाते हैं और फूलों से विशेष सजावट की जाती है।</p>
<p>
	<strong>वेसाक उत्सव: </strong>श्रीलंका में इस दिन को &#39;वेसाक&#39; (वैशाख का अपभ्रंश) के रूप में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. दान, पुण्य एवं जीव दया</h3>
<p>
	<strong>मांसाहार का त्याग:</strong> बुद्ध पशु हिंसा के सख्त खिलाफ थे, इसलिए इस दिन मांसाहार का पूर्ण परहेज किया जाता है।</p>
<p>
	<strong>जीवों की मुक्ति:</strong> इस दिन पक्षियों को पिंजरों से मुक्त कर खुले आसमान में छोड़ा जाता है, जो स्वतंत्रता और करुणा का प्रतीक है।</p>
<p>
	<strong>परोपकार: </strong>गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन व वस्त्र दान किए जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन किए गए अच्छे कार्यों से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 15:13:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 28 Apr 2026 15:16:33 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[buddha jayanti]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Buddha Purnima 2026: बुद्ध के कर्म का मनोविज्ञान: कैसे बनता है कर्म से भाग्य?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/buddha-jayanti-special/the-theory-of-karma-126042800034_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/buddha-jayanti-special/the-theory-of-karma-126042800034_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/28/thumb/1_1/1777368508-5087.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/28/thumb/1_1/1777368508-5087.jpg</image>
      <description><![CDATA[भगवान बुद्ध का एक शाश्वत सत्य है- "इंसान अपने भाग्य का निर्माता स्वयं है।" हम अक्सर किस्मत को दोष देते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि हम अपने ही कर्मों की विरासत ढो रहे हैं। हमारे कर्म ही हमारे जन्म का कारण हैं, वही हमारा बंधन हैं और अंततः वही हमारी ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="buddha purnima" class="imgCont" height="705" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/28/full/1777368508-5087.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="buddha purnima" width="1200" /></p>
	</p>
	भगवान बुद्ध का एक शाश्वत सत्य है- "इंसान अपने भाग्य का निर्माता स्वयं है।" हम अक्सर किस्मत को दोष देते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि हम अपने ही कर्मों की विरासत ढो रहे हैं। हमारे कर्म ही हमारे जन्म का कारण हैं, वही हमारा बंधन हैं और अंततः वही हमारी एकमात्र शरणस्थली भी हैं। इसी से भाग्य और दुर्भाग्य निर्मित होता है। सरल शब्दों में कहें तो, जीवन एक गूंज (Echo) की तरह है; आप जो ब्रह्मांड को देंगे, वही तीन गुना होकर आपके पास वापस आएगा।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	कर्म के तीन द्वार: मन, वचन और शरीर</h3>
<p>
	हम कर्म को केवल हाथ-पैर चलाने तक सीमित समझते हैं, लेकिन इसके उद्गम के तीन गहरे स्तर हैं:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>1. कायिक (Physical): </strong>जो शरीर से किया जाए, जैसे किसी की मदद करना या किसी को चोट पहुँचाना। यह सबसे प्रत्यक्ष होता है।</p>
<p>
	<strong>2. वाचिक (Vocal):</strong> जो शब्दों के माध्यम से हो। गाली देना या मीठा बोलना। समाज इसे भी गंभीरता से लेता है।</p>
<p>
	<strong>3. मानसिक (Mental): </strong>किसी के बारे में बुरा सोचना। अक्सर हम इसे &#39;मामूली&#39; समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यहीं हम सबसे बड़ी चूक करते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	सत्य यह है कि &#39;मन&#39; ही असली इंजन है। शरीर और शब्द तो बस उसके डिब्बे हैं। जो विचार मन में अंकुरित नहीं होता, वह क्रिया का रूप ले ही नहीं सकता। इसलिए कर्म की शुद्धता का पैमाना &#39;नीयत&#39; है, &#39;क्रिया&#39; नहीं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	नीयत का फर्क: डॉक्टर बनाम हत्यारा</h3>
<ul>
	<li>
		इसे एक बेहतरीन उदाहरण से समझते हैं। एक सर्जन और एक अपराधी, दोनों ही इंसान के शरीर पर चाकू चलाते हैं। दोनों ही मामलों में व्यक्ति को दर्द होता है और रक्त बहता है। लेकिन डॉक्टर को सम्मान मिलता है और अपराधी को जेल। क्यों?</li>
	<li>
		क्योंकि डॉक्टर की नीयत &#39;रक्षा&#39; की थी और अपराधी की &#39;हत्या&#39; की। कर्म एक ही था, पर मानसिक प्रेरणा ने उसका परिणाम बदल दिया। ठीक वैसे ही, जैसे पिता का डांटना प्रेम है और शत्रु का अपशब्द बोलना विवाद।</li>
</ul>
<p>
	 </p>
<h3>
	राग, द्वेष और संस्कारों की लकीरें</h3>
<ul>
	<li>
		हमारे कर्म मन में &#39;संस्कारों&#39; की लकीरें खींचते हैं। ये लकीरें तीन तरह की हो सकती हैं:</li>
	<li>
		पानी पर लकीर: जो तुरंत मिट जाए (क्षणभंगुर विचार)।</li>
	<li>
		रेत पर लकीर: जो कुछ समय तक रहे।</li>
	<li>
		पत्थर पर लकीर: जो गहरा प्रभाव छोड़े और स्वभाव बन जाए।</li>
	<li>
		जब हमारी इच्छा पूरी होती है, तो &#39;राग&#39; (attachment) पैदा होता है, और जब इच्छा टूटती है, तो &#39;द्वेष&#39; (hatred)। यही राग-द्वेष बार-बार जमा होकर हमारी &#39;तृष्णा&#39; यानी प्यास बन जाते हैं, जो हमें कर्मों के चक्रव्यूह में फँसाए रखते हैं।</li>
</ul>
<p>
	 </p>
<h3>
	गीता का विज्ञान: कर्म, विकर्म और अकर्म</h3>
<p>
	श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, हमारे दैनिक कार्यों को गहराई के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>1. कर्म: </strong>वे कार्य जो हम आदतन या यंत्रवत (Mechanically) करते हैं। जैसे—सांस लेना, खाना खाना या किसी को औपचारिक &#39;नमस्ते&#39; कह देना। इसमें भावना का अभाव होता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>2. विकर्म: </strong>जब कर्म के साथ &#39;भाव&#39; जुड़ जाए। यदि आप किसी को नमस्ते करते समय हृदय में उसके प्रति प्रेम और मंगल-कामना रखते हैं, तो वह &#39;विकर्म&#39; बन जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>उदाहरण:</strong> एक नर्स जो केवल ड्यूटी समझकर इंजेक्शन लगाती है, वह &#39;कर्म&#39; कर रही है। लेकिन वही नर्स जब ममता और सेवा भाव से रोगी की देखभाल करती है, तो वह &#39;विकर्म&#39; है। यह विलक्षण प्रभाव पैदा करता है और आत्मा को तृप्ति देता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>3. अकर्म: </strong>वह अवस्था जहाँ कर्म करते हुए भी कर्तापन का अहंकार न हो (निष्काम कर्म)।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अगर आप अपने जीवन में शांति चाहते हैं, तो अपने मन को निर्मल रखें। क्योंकि बुरे विचार के पीछे दुख वैसे ही चलता है जैसे बैल के पीछे गाड़ी का पहिया, और शुद्ध विचार के पीछे सुख वैसे ही चलता है जैसे आपकी अपनी परछाई।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 14:44:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 28 Apr 2026 14:58:36 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[buddha jayanti]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Parshuram Dwadashi: परशुराम द्वादशी क्यों मनाते हैं, जानिए इसका महत्व]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/why-celebrate-parshuram-dwadashi-126042700047_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/why-celebrate-parshuram-dwadashi-126042700047_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/15/thumb/1_1/1776253056-3272.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Parshuram dwadashi significance: परशुराम द्वादशी हिंदू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि है, जो विशेष रूप से भगवान विष्णु के छठे अवतार, भगवान परशुराम को समर्पित है। यह वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाई जाती है यानी अक्षय तृतीया के ठीक ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="परशुराम द्वादशी" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/15/full/1776253056-3272.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
</p>
<p>
	<strong>Lord Parshuram: </strong>परशुराम द्वादशी हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे विशेष रूप से भगवान परशुराम की उपासना के लिए मनाया जाता है। यह दिन धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, भगवान परशुराम विष्णु जी के छठे अवतार हैं, जिन्हें धर्म की रक्षा और अधर्म का नाश करने के लिए पृथ्वी पर भेजा गया था। परशुराम द्वादशी का पर्व वैशाख मास की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है और इसे विशेष श्रद्धा के साथ धार्मिक रीति-रिवाजों और पूजा-पाठ के माध्यम से मनाया जाता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/atichari-brihaspati-garmi-50-degree-temperature-alert-126042700044_1.html" target="_blank">Atichari brihaspati:क्या अतिचारी बृहस्पति बढ़ाएगा गर्मी? 50 डिग्री तक जा सकता है पारा?</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	आइए जानते हैं कि यह दिन क्यों मनाया जाता है और इसका आध्यात्मिक महत्व क्या है:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	क्यों मनाई जाती है परशुराम द्वादशी?</h3>
<p>
	पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान परशुराम का जन्म अक्षय तृतीया को हुआ था, लेकिन परशुराम द्वादशी मुख्य रूप से उनके द्वारा किए गए धर्म की स्थापना और उनके तपस्वी रूप के सम्मान में मनाई जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	इस दिन को मनाने के पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अधर्म का नाश:</strong> परशुराम जी ने पृथ्वी पर अहंकारी और अत्याचारी क्षत्रिय राजाओं का अंत कर धर्म की पुनर्स्थापना की थी। यह दिन उनकी उस शक्ति और न्याय का उत्सव है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	पितृ और गुरु भक्ति: परशुराम जी अपनी पितृ-भक्ति के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने पिता महर्षि जमदग्नि की आज्ञा का पालन किया और कठोर तप से शिव जी को प्रसन्न किया। उनकी तपस्या की पूर्णता और उनके दिव्य स्वरूप की आराधना हेतु यह द्वादशी मनाई जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	परशुराम द्वादशी का महत्व</h3>
<p>
	हिंदू शास्त्रों में परशुराम द्वादशी का फल अत्यंत कल्याणकारी बताया गया है। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान परशुराम की पूजा करने से जाने-अनजाने में हुए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। यह दि समस्त पापों से मुक्ति से देकर मन की शुद्धि करता है।<br />
	<br />
	परशुराम जी &#39;शस्त्र और शास्त्र&#39; दोनों के ज्ञाता हैं। उनकी पूजा करने से भक्तों में आत्मविश्वास बढ़ता है, भय का नाश होता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने की शक्ति मिलती है। इस तरह यह साहस और निर्भयता की प्राप्ति का दिन है।<br />
	<br />
	धार्मिक मान्यता है कि जो दंपत्ति संतान सुख से वंचित हैं, उनके लिए इस दिन व्रत रखना विशेष फलदायी होता है। यह व्रत संतान और परिवार की रक्षा करके सुख-शांति और आरोग्य लाता है। चूंकि यह वैशाख मास में आती है, जो कि दान-पुण्य का महीना है, इस दिन किए गए दान, स्नान और तर्पण का फल कभी समाप्त नहीं होता यानी &#39;अक्षय&#39; रहता है। यह दिन अक्षय पुण्य की प्राप्ति देता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	परशुराम द्वादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर पवित्र नदी या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें। भगवान विष्णु या परशुराम जी की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं। उन्हें पीले पुष्प, चंदन और तुलसी दल अर्पित करें। इस दिन ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को अन्न, जल का घड़ा या कलश या सत्तू का दान करना श्रेष्ठ माना जाता है। भगवान परशुराम &#39;चिरंजीवी&#39; हैं (अमर हैं), इसलिए उनकी पूजा हमें दीर्घायु और स्थिर बुद्धि का वरदान देती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/religious-stories/mythological-significance-and-legend-of-purushottam-maas-126042700050_1.html" target="_blank">पुरुषोत्तम मास का पौराणिक महत्व और कथा</a></strong></p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 16:55:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 27 Apr 2026 16:54:02 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Other Festivals]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Bhaum Pradosh Vrat: भौम प्रदोष की कथा और महत्व]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/bhaum-pradosh-story-n-importance-126042700045_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/other-festivals/bhaum-pradosh-story-n-importance-126042700045_1.html</guid>
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      <description><![CDATA[Bhaum Pradosh Vrat Story: भौम प्रदोष व्रत का आध्यात्मिक और व्यावहारिक महत्व बहुत गहरा है। यह दिन भगवान शिव की सौम्यता और मंगल देव की शक्ति का अद्भुत संगम है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित एक विशेष व्रत है, जो मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष दिवस पर किया ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="भौम प्रदोष व्रत कथा" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/27/full/1777285038-8233.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Bhaum Pradosh Vrat 2026 Story and Importance: </strong>जब कैलेंडर के पन्नों पर त्रयोदशी तिथि और मंगलवार का मिलन होता है, तो बनता है भौम प्रदोष का शुभ संयोग। यह दिन केवल उपवास का नहीं, बल्कि अटूट विश्वास की परीक्षा और महादेव के साथ-साथ संकटमोचन हनुमान की असीम कृपा पाने का अवसर है। आइए जानते हैं वह पौराणिक कथा, जो सिखाती है कि यदि भक्ति सच्ची हो, तो नियति भी अपना निर्णय बदल देती है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-zodiac-signs/shani-guru-rahu-ketu-rajyog-5-rashi-lucky-zodiac-signs-126042700034_1.html" target="_blank">शनि, बृहस्पति, राहु और केतु के कारण 5 राशियों के लिए रहेगा राजयोग</a></strong></p>
<p>
	<br />
	<p>
		<strong>भौम प्रदोष से जुड़ी सबसे प्रचलित कथा एक वृद्ध महिला और उसके पुत्र मंगलिया की है। </strong></p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		भक्ति की अग्नि-परीक्षा</h3>
	<p>
		प्राचीन समय की बात है, एक नगर में एक बूढ़ी मां रहती थी। उनका संसार उनके पुत्र और बजरंगबली की भक्ति के इर्द-गिर्द सिमटा था। हर मंगलवार वह नियम से व्रत रखतीं। उनकी इसी निष्ठा को देख एक दिन स्वयं हनुमान जी ने उनकी परीक्षा लेने की ठानी।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		हनुमान जी ने एक साधारण साधु का रूप धरा और वृद्धा के द्वार पर जाकर अलख जगाई— &#39;है कोई हनुमान भक्त, जो इस साधु की इच्छा पूरी करे?&#39;</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		साधु की कठिन शर्त</h3>
	<p>
		वृद्धा ने श्रद्धापूर्वक प्रणाम किया और सेवा का अवसर मांगा। वेशधारी हनुमान जी ने कहा, &#39;मैं भूखा हूं और भोजन करना चाहता हूं, लेकिन मेरी शर्त है कि मुझे शुद्ध भूमि पर ही भोजन बनाना है, इसलिए तुम जमीन लीप दो।&#39;</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		वृद्धा असमंजस में पड़ गई, क्योंकि मंगलवार के दिन मिट्टी खोदना या लीपना उनके व्रत के नियमों के विरुद्ध था। उन्होंने विनय की, &#39;महाराज, लीपने के अलावा आप कोई भी आज्ञा दें, मैं शिरोधार्य करूंगी।&#39;</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		साधु ने उन्हें वचनबद्ध किया और एक ऐसी मांग रख दी जिसे सुनकर किसी भी मां की रूह कांप जाए। साधु ने कहा— &#39;अपने पुत्र को बुलाओ, मैं उसकी पीठ पर आग जलाकर भोजन बनाऊंगा।&#39;</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		चमत्कार की पराकाष्ठा</h3>
	<p>
		वचन की पक्की वृद्धा ने भारी मन से अपने कलेजे के टुकड़े को साधु के हवाले कर दिया। साधु ने बच्चे को उल्टा लिटाया और उसकी पीठ पर चूल्हा जलाया। मां का हृदय फट रहा था, वह यह दृश्य देख न सकी और घर के भीतर जाकर छिप गई।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		जब भोजन तैयार हुआ, तो साधु ने आवाज दी, &#39;माई, अपने बेटे को बुलाओ, उसे भी प्रसाद खिलाना है।&#39; वृद्धा फूट-फूट कर रोने लगी और बोली, &#39;महाराज, अब उसे पुकार कर मेरे जख्मों को और न कुरेदें।&#39;</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		लेकिन साधु के बार-बार आग्रह पर जैसे ही मां ने कांपते स्वर में अपने बेटे &#39;मंगलिया&#39; को पुकारा, बच्चा खेलता हुआ बाहर आ गया। अपने पुत्र को जीवित देख मां के पैरों तले जमीन खिसक गई। तभी साधु ने अपना असली रूप दिखाया— साक्षात पवनपुत्र हनुमान!</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		सीख: हनुमान जी ने वृद्धा को गले लगाया और आशीर्वाद दिया कि जो भी भौम प्रदोष पर इस कथा को सुनेगा या व्रत रखेगा, उसके जीवन के सारे संकट और &#39;ऋण&#39; (कर्ज) सदा के लिए समाप्त हो जाएंगे।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		भौम प्रदोष व्रत का महत्व</h3>
	<p>
		इस व्रत को &#39;ऋण विमोचन प्रदोष&#39; भी कहा जाता है, क्योंकि यह जीवन के हर प्रकार के ऋण/ कर्ज से मुक्ति दिलाने वाला माना जाता है। जिन जातकों की कुंडली में मंगल दोष होता है या मंगल नीच का होता है, उनके लिए यह व्रत रामबाण है। यह व्रत ग्रहों के दोषों का निवारण करके विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करता है। यह शिव और मंगल दोनों की ऊर्जा को संतुलित करता है, जिससे व्यक्ति के स्वभाव में उग्रता कम होती है और धैर्य बढ़ता है। </p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		मान्यता है कि भौम प्रदोष के दिन &#39;ऋणमोचक मंगल स्तोत्र&#39; का पाठ करने से पुराने से पुराना कर्ज उतरने के रास्ते खुल जाते हैं। मंगल को ऊर्जा का कारक माना गया है। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति के भीतर छिपे हुए डर का नाश होता है और वह कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार होता है। शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष काल में शिव जी कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं। इस समय की गई पूजा से न केवल शारीरिक व्याधियां दूर होती हैं, बल्कि अंततः मोक्ष की प्राप्ति भी होती है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>निष्कर्ष: </strong>यह कथा हमें सिखाती है कि संकट के समय भी जिसका धर्म और विश्वास डगमगाता नहीं, ईश्वर स्वयं उसके रक्षक बनकर खड़े होते हैं।<br />
		 </p>
</p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/bhauṃ-pradosh-vrat-remedies-2026-126042700024_1.html" target="_blank">Bhauṃ Pradosh 2026; भौम प्रदोष का व्रत रखने से 3 कार्यों में मिलती है सफलता</a></strong></p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 16:12:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 27 Apr 2026 17:04:46 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Other Festivals]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Bhaum Pradosh 2026; भौम प्रदोष का व्रत रखने से 3 कार्यों में मिलती है सफलता]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/bhaum-pradosh-vrat-remedies-2026-126042700024_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/bhaum-pradosh-vrat-remedies-2026-126042700024_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2025-07/17/thumb/1_1/1752747230-7963.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Bhaum Pradosh Vrat benefits: भौम प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक विशेष व्रत है, जो विशेष रूप से मंगलवार को पड़ने वाले प्रदोष दिवस पर किया जाता है। इसे करने से जीवन में सफलता, सुख-समृद्धि और पारिवारिक शांति प्राप्त होती है। इस व्रत का महत्व विशेष ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="भौम प्रदोष व्रत का फोटो" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2025-07/17/full/1752747230-7963.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
</p>
<p>
	<strong>Bhaum Pradosh Vrat 2026</strong>: हिंदू धर्म में भौम प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। जब त्रयोदशी तिथि मंगलवार के दिन पड़ती है, तो उसे &#39;भौम प्रदोष&#39; कहा जाता है। यह दिन भगवान शिव और हनुमान जी (मंगल के कारक) दोनों की कृपा पाने का दुर्लभ संयोग होता है। भौम प्रदोष व्रत करने से मंगल और शनि दोष शांत होते हैं। इससे व्यक्ति के व्यापार में लाभ, नौकरी में समान्य उन्नति, और कार्यस्थल पर सम्मान और प्रतिष्ठा बढ़ती है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-zodiac-signs/meen-rashi-mein-grahon-ka-jamavda-5-rashiyon-ki-kismat-126042700012_1.html" target="_blank">मीन राशि में 5 ग्रहों की बड़ी हलचल: इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, क्या आपकी राशि है शामिल?</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	शास्त्रों और मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से मुख्य रूप से निम्नलिखित 3 कार्यों में अभूतपूर्व सफलता मिलती है:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. कर्ज मुक्ति और आर्थिक स्थिरता</h3>
<p>
	भौम प्रदोष का सबसे बड़ा लाभ ऋण (कर्ज) से छुटकारा पाना है। मंगल ग्रह को ऋणहर्ता भी माना जाता है। यदि आप लंबे समय से कर्ज के बोझ तले दबे हैं या व्यापार में आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं, तो यह व्रत आपके मार्ग खोलता है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	विशेष: इस दिन <strong>&#39;ऋणमोचक मंगल स्तोत्र&#39; </strong>का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. भूमि, भवन और संपत्ति के मामले</h3>
<p>
	मंगल देव को &#39;भूमिपुत्र&#39; कहा जाता है। जमीन-जायदाद से जुड़े कार्यों में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए यह व्रत अचूक है। यदि आपका मकान नहीं बन पा रहा है, जमीन की खरीद-बिक्री में दिक्कत आ रही है या कोई कानूनी संपत्ति विवाद चल रहा है, तो शिव जी की कृपा से इन कार्यों में विजय प्राप्त होती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. आरोग्य और साहस में वृद्धि </h3>
<p>
	मंगल साहस, ऊर्जा और रक्त का कारक है। भौम प्रदोष व्रत रखने से शारीरिक और मानसिक शक्ति में वृद्धि होती है। जो लोग पुरानी, विशेषकर रक्त संबंधी बीमारियों से जूझ रहे हैं या जिनमें आत्मविश्वास की कमी है, उन्हें इस व्रत से आरोग्य और रोगों से लड़ने की शक्ति मिलती है। यह शत्रुओं पर विजय पाने के लिए भी उत्तम माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	पूजा के लिए विशेष मंत्र</h3>
<p>
	इस दिन पूजा के समय इन मंत्रों का जाप करना आपके कार्यों को और गति प्रदान कर सकता है:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	- भगवान शिव के लिए: <strong>ॐ नमः शिवाय</strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	- मंगल देव के लिए: <strong>ॐ अं अंगारकाय नमः</strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>नोट:</strong> प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा &#39;प्रदोष काल&#39; (सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद का समय) में करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/mangal-mesh-gochar-2026-impact-on-world-126042700022_1.html" target="_blank">मंगल गोचर अलर्ट: 2 साल बाद मेष राशि में एंट्री से बदल सकती है दुनिया की दिशा</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 12:40:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 27 Apr 2026 17:03:20 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[astrology articles]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[आज है मोहिनी एकादशी: इसे क्यों करना शुभ माना जाता है?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/today-is-mohini-ekadashi-why-is-it-considered-auspicious-126042700016_1.html</link>
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      <description><![CDATA[Mohini Ekadashi Vrat: भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार में समुद्र मंथन के समय अमृत वितरण किया और देवताओं को अमृत देकर असुरों को पराजित किया। इसलिए इस दिन व्रत करने से  पापों का नाश और पुण्य की प्राप्ति होती है। इसलिए इस व्रत को करना इन 5 कारणों से ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="मोहिनी एकादशी व्रत 2026" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/27/full/1777268422-0112.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Mohini Ekadashi Importance: </strong>मोहिनी एकादशी हिन्दू धर्म का एक पवित्र व्रत है, जिसे भगवान विष्णु के मोहिनी रूप की पूजा और भक्ति के लिए मनाया जाता है। यह दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आध्यात्मिक लाभ और जीवन में समृद्धि लाने वाला भी माना जाता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/mohini-ekadashi-vrat-rakhne-ke-fayde-126042500046_1.html" target="_blank">मोहिनी एकादशी का व्रत रखने के 10 चमत्कारी फायदे</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	आज मोहिनी एकादशी का पावन दिन है। दरअसल, आज का दिन इतना शुभ और महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है, इसके पीछे कुछ बहुत ही ठोस और दिलचस्प कारण हैं। आज हम जानेंगे कि मोहिनी एकादशी क्यों खास है और इसे करना क्यों शुभ माना जाता है। </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक</h3>
<p>
	आज के दिन ही भगवान विष्णु ने अपनी माया से अमृत कलश को असुरों के चंगुल से बचाया था। इसे करने से भक्त को यह संदेश और शक्ति मिलती है कि अंततः जीत धर्म और सत्य की ही होती है।</p>
<h3>
	 </h3>
<h3>
	2. मानसिक क्लेश और &#39;मोह&#39; से मुक्ति</h3>
<p>
	हम अक्सर पुरानी बातों, रिश्तों या नुकसान के &#39;मोह&#39; में फंसकर दुखी रहते हैं। मोहिनी एकादशी का व्रत मानसिक क्लेश को साफ करने तथा मोह से मुक्ति के लिए जाना जाता है। आध्यात्मिक मान्यता है कि आज के दिन व्रत रखने से मन की चंचलता शांत होती है और व्यक्ति को मोह-माया के दुखों से मुक्ति मिलती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. कठिन से कठिन पापों का नाश</h3>
<p>
	शास्त्रों में वर्णन है कि जाने-अनजाने में हुए ऐसे पाप, जिनका बोझ मन पर रहता है, इस व्रत को करने से धुल जाते हैं। त्रेता युग में भगवान श्री राम ने भी सीता माता के वियोग के समय दुखों से मुक्ति पाने के लिए महर्षि वशिष्ठ के कहने पर यह व्रत किया था।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. सुख-समृद्धि और आरोग्य</h3>
<p>
	धार्मिक दृष्टि से एकादशी का व्रत शरीर को डिटॉक्स यानी शुद्ध करने का सबसे अच्छा तरीका है। इसे करने से न केवल पुण्य मिलता है, बल्कि स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति आज श्रद्धा से पूजन करता है, उसके घर में दरिद्रता नहीं आती और सुख-शांति का वास होता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/mohini-ekadashi-vrat-katha-2026-126042500008_1.html" target="_blank">Mohini Ekadashi Katha 2026: मोहिनी एकादशी के रहस्य, जानें पौराणिक व्रत कथा और लाभ</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. वैकुंठ धाम की प्राप्ति</h3>
<p>
	हिंदू धर्म में एकादशी को &#39;मोक्षदायिनी&#39; कहा गया है। आज के दिन किया गया दान और उपवास व्यक्ति के लिए स्वर्ग के द्वार खोलता है और उसे जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	आज क्या करें? </h3>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>दान: </strong>आज के दिन तरबूज, ठंडा पानी या सत्तू का दान करना बहुत शुभ है क्योंकि यह गर्मी का महीना (वैशाख) होता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>तुलसी पूजन: </strong>शाम को तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जरूर जलाएं (लेकिन याद रखें, एकादशी पर तुलसी के पत्ते न तोड़ें और न ही उसमें जल दें)।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मंत्र: </strong>आज पूरा दिन मन ही मन<strong> &#39;ॐ नमो भगवते वासुदेवाय&#39; </strong>का जाप करते रहें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	मोहिनी एकादशी सिर्फ एक व्रत नहीं है, बल्कि यह धार्मिक, आध्यात्मिक और मानसिक उन्नति का अवसर है। इसे श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ekadashi-vrat-katha/mohini-ekadashi-vrat-2026-126042000034_1.html" target="_blank">Mohini Ekadashi: मोहिनी एकादशी 2026: व्रत नियम, पूजा मुहूर्त, विधि और खास बातें</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 11:20:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 27 Apr 2026 11:23:42 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[ekadashi vrat katha]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
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