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    <title><![CDATA[लाइफ स्‍टाइल]]></title>
    <link>https://hindi.webdunia.com/lifestyle</link>
    <description><![CDATA[पढ़ें हिंदी में lifestyle news, fashion & health tips, recipes, romance और Bollywood trends। Explore blogs on healthy living, food, yoga & literature.]]></description>
    <copyright>Copyright webdunia.com</copyright>
    <lastBuildDate>Tue, 09 Jun 2026 22:31:05 +0530</lastBuildDate>
    <language>en-us</language>
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      <title>लाइफ स्‍टाइल</title>
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    <item>
      <title><![CDATA[Chhatrapati Shivaji Maharaj: 6 जून: श्रीमंत छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक दिवस पर विशेष]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/important-days-and-dates/june-6-the-coronation-day-of-chhatrapati-shivaji-maharaj-126060500036_1.html</link>
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      <description><![CDATA[Shri Shivaji Maharaj coronation ceremony day: 6 जून 1674 का दिन भारतीय इतिहास की ऐसी ही एक अमर तिथि है, जब रायगढ़ की पवित्र धरती पर श्रीमंत छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ। यह घटना किसी राजा के सिंहासनारोहण का मात्र राजकीय आयोजन नहीं थी, ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt=" Picture of Chhatrapati Shivaji Maharaj, a man of unparalleled talent in world history" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/05/full/1780652860-2527.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	-<strong> युवा साहित्यकार अमित राव पवार, देवास (म.प्र.)</strong><br />
	<br />
	इतिहास में कुछ तिथियां केवल कैलेंडर के पन्नों पर अंकित दिन नहीं होतीं, वे राष्ट्र की चेतना में सदैव जीवित रहने वाली प्रेरणाएं बन जाती हैं। ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी, 6 जून 1674 का दिन भारतीय इतिहास की ऐसी ही एक अमर तिथि है, जब रायगढ़ की पवित्र धरती पर श्रीमंत छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ। यह घटना किसी राजा के सिंहासनारोहण का मात्र राजकीय आयोजन नहीं थी, बल्कि भारतीय स्वाभिमान, सांस्कृतिक अस्मिता और स्वाधीन शासन की उद्घोषणा थी। उस दिन एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि स्वराज्य के विचार का राज्याभिषेक हुआ था।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/birth-anniversary-of-personalities/shivaji-jayanti-2026-126021600047_1.html" target="_blank">जयंती विशेष: छत्रपति शिवाजी: धर्म, संस्कृति और राजनीति के अद्वितीय साम्राज्य निर्माता Chhatrapati Shivaji Maharaj</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	सत्रहवीं शताब्दी का भारत राजनीतिक अस्थिरता, विदेशी प्रभुत्व और सामाजिक निराशा के दौर से गुजर रहा था। सत्ता का केंद्र जनता से दूर था और शासन का उद्देश्य लोककल्याण के बजाय साम्राज्य विस्तार बन चुका था। ऐसे समय में एक युवा ने यह स्वप्न देखने का साहस किया कि इस भूमि का शासन इसी भूमि के लोगों के हाथों में होना चाहिए। यह स्वप्न था-&#39;हिन्दवी स्वराज्य&#39; का और उस स्वप्न के महान शिल्पकार थे श्रीमंत छत्रपति शिवाजी महाराज। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	शिवाजी महाराज ने अपने जीवन की यात्रा किसी विशाल साम्राज्य के उत्तराधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि संघर्षशील राष्ट्रनायक के रूप में प्रारंभ की थी। सीमित संसाधन, विपरीत परिस्थितियां और शक्तिशाली शत्रुओं के बीच उन्होंने जिस धैर्य, साहस और दूरदर्शिता का परिचय दिया, वह विश्व इतिहास में अद्वितीय है। उनके लिए सत्ता व्यक्तिगत वैभव का साधन नहीं, बल्कि जनकल्याण और राष्ट्ररक्षा का माध्यम थी। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	यही कारण है कि उनके प्रत्येक अभियान के पीछे विस्तारवाद नहीं, बल्कि स्वतंत्रता और सुरक्षा का उद्देश्य दिखाई देता है। लगभग तीन दशकों तक चले संघर्ष, संगठन और राष्ट्रनिर्माण के पश्चात जब स्वराज्य एक सुदृढ़ शक्ति के रूप में स्थापित हो गया, तब राज्याभिषेक की आवश्यकता अनुभव की गई। यह केवल धार्मिक या परंपरागत प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि एक राजनीतिक घोषणा थी कि यह राज्य किसी साम्राज्य की जागीर नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र और सार्वभौम सत्ता है। रायगढ़ का दुर्ग उस ऐतिहासिक क्षण का साक्षी बना, जब भारतीय आत्मविश्वास ने पुनः अपना मस्तक ऊंचा किया। राज्याभिषेक समारोह की भव्यता जितनी आकर्षक थी, उससे कहीं अधिक उसका वैचारिक महत्व था।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	&#39;सदियों बाद किसी भारतीय शासक ने पूर्ण वैदिक परंपरा के अनुसार स्वयं को स्वतंत्र सम्राट घोषित किया था। &#39;यह घटना उस मानसिक गुलामी के विरुद्ध भी थी, जिसने समाज को यह विश्वास दिला दिया था कि विदेशी शासन ही उसकी नियति है। श्री शिवाजी महाराज ने अपने राज्याभिषेक के माध्यम से यह संदेश दिया कि स्वराज्य केवल राजनीतिक व्यवस्था नहीं, बल्कि आत्मसम्मान की अवस्था है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	रायगढ़ में आयोजित यह समारोह भारतीय संस्कृति की जीवंतता और सामाजिक सहभागिता का अनुपम उदाहरण था। देश के विभिन्न क्षेत्रों से विद्वान, संत, धर्माचार्य, योद्धा और आम जनता के साथ जनप्रतिनिधि इसमें सम्मिलित हुए। यह आयोजन किसी एक क्षेत्र या समुदाय का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र की आकांक्षाओं का उत्सव बन गया। राज्याभिषेक के उपरांत दान, दक्षिणा और लोकहित के कार्यों पर जो बल दिया गया, वह शिवाजी महाराज की जनोन्मुखी शासन दृष्टि को स्पष्ट करता है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	आज जब हम श्रीमंत छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक दिवस को स्मरण करते हैं, तो हमें केवल उसके ऐतिहासिक वैभव को नहीं देखना चाहिए, बल्कि उसके मूल संदेश को समझना चाहिए। श्री शिवाजी महाराज का जीवन बताता है कि राष्ट्र का निर्माण केवल तलवार की शक्ति से नहीं, बल्कि चरित्र, संगठन, न्याय और जनविश्वास से होता है। उन्होंने अपने शासन में धर्म को आस्था का विषय बनाया, शासन का उपकरण नहीं। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	उन्होंने महिलाओं के सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी, किसानों को संरक्षण दिया, प्रशासन को जवाबदेह बनाया और सुरक्षा को राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी माना। वर्तमान समय में जब नेतृत्व के मूल्य, प्रशासनिक नैतिकता और राष्ट्रीय दायित्व पर निरंतर चर्चा होती है, तब शिवाजी महाराज का व्यक्तित्व एक आदर्श उदाहरण बनकर सामने आता है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	यह राज्याभिषेक हमें याद दिलाता है कि सत्ता का वास्तविक अर्थ सेवा है, अधिकार का वास्तविक उद्देश्य संरक्षण है और नेतृत्व का वास्तविक स्वरूप त्याग एवं उत्तरदायित्व है।&#39;यह भी विचारणीय है कि राज्याभिषेक केवल अतीत की गौरव गाथा बनकर न रह जाए।&#39; यदि हम वास्तव में इस दिवस का सम्मान करना चाहते हैं, तो हमें शिवाजी महाराज के आदर्शों को अपने जीवन और समाज में उतारना होगा। स्वराज्य का अर्थ केवल राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, आत्मसम्मान और आत्मअनुशासन भी है। जिस राष्ट्र के नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति सजग होते हैं, वही राष्ट्र सशक्त और समृद्ध बनता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	श्री छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम अध्याय है, जिसने पराधीनता के अंधकार में आत्मविश्वास का दीप प्रज्वलित किया। यह घटना हमें स्मरण कराती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, यदि नेतृत्व में दूरदृष्टि, समाज में एकता और लक्ष्य के प्रति अटूट निष्ठा हो, तो इतिहास की दिशा बदली जा सकती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	आज, राज्याभिषेक दिवस पर हम केवल एक महान राजा को स्मरण नहीं करते, बल्कि उस विचार को नमन करते हैं जिसने भारत को स्वराज्य का मंत्र दिया। रायगढ़ की वह ऐतिहासिक गूंज आज भी हमें पुकारती है कि राष्ट्र निर्माण का कार्य कभी समाप्त नहीं होता। प्रत्येक पीढ़ी को अपने समय में स्वराज्य के मूल्यों की रक्षा करनी होती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	वास्तव में, 6 जून 1674 का राज्याभिषेक केवल शिवाजी महाराज के मस्तक पर मुकुट धारण करने का क्षण नहीं था, वह भारत के स्वाभिमान, आत्मविश्वास और राष्ट्रीय चेतना के पुनर्जागरण का महोत्सव था। यही कारण है कि &#39;तीन शताब्दियों से अधिक समय बीत जाने के बाद भी यह दिवस भारतीय जनमानस में प्रेरणा, गौरव और राष्ट्रभक्ति का अमिट प्रतीक बना हुआ है।&#39;<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/indian-history-and-culture/how-many-wife-of-shivaji-maharaj-126021800061_1.html" target="_blank">छत्रपति शिवाजी महाराज की कितनी पत्नियां थीं?</a></strong></p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 15:25:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 05 Jun 2026 17:47:19 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Important Days and Dates]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[World Environment Day 2026: विश्व पर्यावरण दिवस का इतिहास और थीम, जानें कौन कर रहा है मेजबानी?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/environment-day-special/history-and-theme-of-world-environment-day-who-is-hosting-it-126060500009_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/29/thumb/1_1/1780049663-904.jpg"/>
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      <description><![CDATA[World Environment Day 2026: विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को पूरी दुनिया में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने और इसके संरक्षण के संकल्प के साथ मनाया जाता है। जिसका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना और धरती को सुरक्षित रखने ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="World Environment Day message in the picture along with scenes related to conservation of nature and human life" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/29/full/1780049663-904.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
</p>
<p>
	<strong>World Environment Day: </strong>विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को मनाया जाने वाला एक ऐसा वैश्विक महाअभियान है, जो हमें याद दिलाता है कि यह धरती हमारा इकलौता घर है और इसकी हिफाजत करना हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। आज के समय में जब ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण और तेजी से कटते जंगल हमारे अस्तित्व के लिए खतरा बन चुके हैं। आइये आज विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर हम आपके लिए यहां प्रस्तुत कर रहे हैं विश्व पर्यावरण दिवस का इतिहास और 2026 की खास थीम के बारे में...<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vastu-fengshui/plantation-rules-in-vastu-126060500003_1.html" target="_blank">घर में गार्डनिंग का शौक हैं तो जान लीजिए पौधों से जुड़े ये गोल्डन वास्तु रूल्स</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	विश्व पर्यावरण दिवस का इतिहास: World Environment Day History</h3>
<p>
	विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत आज से करीब 54 साल पहले हुई थी। इसकी कहानी कुछ इस तरह है:</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. स्टॉकहोम सम्मेलन (1972)</h3>
<p>
	पर्यावरण प्रदूषण और धरती को हो रहे नुकसान को लेकर संयुक्त राष्ट्र (UN) ने 5 जून से 16 जून 1972 तक स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में एक बड़ा वैश्विक तथा विश्व भर के देशों का पहला पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया। जिसमें 119 देशों ने भाग लिया और पहली बार एक ही पृथ्वी का सिद्धांत मान्य किया।<br />
	<br />
	इसे &#39;स्टॉकहोम कॉन्फ्रेंस ऑन ह्यूमन एनवायरमेंट&#39; कहा जाता है। इसी सम्मेलन के दौरान संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रस्ताव पारित कर हर साल 5 जून को &#39;विश्व पर्यावरण दिवस&#39; के रूप में मनाने की घोषणा की। साथ ही, पर्यावरण की देखरेख के लिए UNEP (संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम) का गठन भी किया गया।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. पहला पर्यावरण दिवस (1973)</h3>
<p>
	घोषणा के अगले ही साल यानी 5 जून 1973 को पहली बार आधिकारिक तौर पर विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया। उस समय इसकी पहली थीम &#39;केवल एक पृथ्वी&#39; (Only One Earth) रखी गई थी। </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. वैश्विक अभियान और मेजबानी (1987 से)</h3>
<p>
	शुरुआत में यह दिन सामान्य रूप से मनाया जाता था, लेकिन साल 1987 से संयुक्त राष्ट्र ने एक नया नियम बनाया। इसके तहत हर साल इस दिन को मनाने के लिए एक अलग देश को मेजबान (Host) चुना जाता है और एक खास थीम तय की जाती है, ताकि पूरी दुनिया का ध्यान पर्यावरण से जुड़ी किसी एक गंभीर समस्या पर केंद्रित किया जा सके।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 19 नवंबर 1986 से लागू हुआ। उसके जल, वायु, भूमि- इन तीनों से संबंधित कारक तथा मानव, पौधों, सूक्ष्म जीव, अन्य जीवित पदार्थ आदि पर्यावरण के अंतर्गत आते हैं। आज इस अभियान से दुनिया के 143 से ज्यादा देश जुड़ चुके हैं, जहां सरकारी स्तर से लेकर स्कूलों और मोहल्लों तक पेड़ लगाने, प्लास्टिक हटाने और पर्यावरण को बचाने की कसमें खाई जाती हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	आपको बता दें कि पर्यावरण-सुरक्षा की दिशा में भारत के प्रारंभिक कदम के तौर पर तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने &#39;पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति एवं उसका विश्व के भविष्य पर प्रभाव&#39; विषय पर व्याख्यान दिया था। और तभी से हम प्रतिवर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मना रहे हैं।</p>
<h3>
	 </h3>
<h3>
	विश्व पर्यावरण दिवस 2026 की थीम: World Environment Day Theme 2026</h3>
<p>
	वर्ष 2026 के लिए विश्व पर्यावरण दिवस की आधिकारिक थीम निम्न तय की गई है:</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	&#39;प्रकृति से प्रेरित। जलवायु के लिए। हमारे भविष्य के लिए।&#39; (Inspired by Nature. For Climate. For Our Future)</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अभियान का संदेश (Campaign Message): </strong>इस वर्ष का मुख्य नारा #NowFor Climate (अब जलवायु के लिए) है, जो जलवायु परिवर्तन के खिलाफ तुरंत कदम उठाने की मांग करता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मेजबान देश (Host Country): </strong>2026 की वैश्विक गतिविधियों और मुख्य समारोह की मेजबानी अज़रबैजान (Azerbaijan) देश कर रहा है, और इसका आयोजन वहां की राजधानी बाकू (Baku) में किया गया है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मुख्य उद्देश्य: </strong>इस थीम का फोकस इस बात पर है कि हम जलवायु संकट (Climate Change) से निपटने के लिए प्रकृति से सीखें। जंगलों को बचाना, अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) को अपनाना और इकोसिस्टम को दोबारा जिंदा करना ही हमारे सुरक्षित भविष्य की कुंजी है। </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	<strong>"धरती हमारी नहीं, हम धरती के हैं। पर्यावरण की रक्षा ही भविष्य की सुरक्षा है।"</strong></h3>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/environment-day-special/status-on-happy-world-environment-day-126060500006_1.html" target="_blank">World Environment Day Wishes: विश्व पर्यावरण दिवस पर हरियाली का संदेश: शुभकामनाएं, विचार और प्रेरक पंक्तियां</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 12:02:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 05 Jun 2026 11:59:51 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[environment special]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[World Environment Day Wishes: विश्व पर्यावरण दिवस पर हरियाली का संदेश: शुभकामनाएं, विचार और प्रेरक पंक्तियां]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/environment-day-special/status-on-happy-world-environment-day-126060500006_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/environment-day-special/status-on-happy-world-environment-day-126060500006_1.html</guid>
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      <description><![CDATA[World Environment Day Inspiring Quotes: पेड़ केवल प्रकृति की सुंदरता बढ़ाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि पृथ्वी पर जीवन के आधार भी हैं। एक पेड़ हजारों जीवों को आश्रय देता है, वातावरण को शुद्ध बनाता है और मानव जीवन को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p>
		<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
			<img align="center" alt="Picture giving the message of protecting the earth, environment and life on World Environment Day, the image shows greenery, animals and increasing pollution in the environment due to increasing industrialization" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/02/full/1780394289-5206.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
	<p>
		<strong>World Environment Day 2026:</strong> हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है, जो हमारे अस्तित्व को बचाने, प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने और भावी पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित, हरी-भरी पृथ्वी छोड़ने का संकल्प लेने का दिन है। प्रकृति संरक्षण की शुरुआत हमारे अपने घर और आंगन से भी शुरू की जा सकती है। जब एक परिवार मिलकर एक नन्हा पौधा लगाता है, तो वह केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि आने वाले कल के लिए जीवन और खुशहाली बोता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vastu-fengshui/plantation-rules-in-vastu-126060500003_1.html" target="_blank">घर में गार्डनिंग का शौक हैं तो जान लीजिए पौधों से जुड़े ये गोल्डन वास्तु रूल्स</a></strong></p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		इस खास मौके पर अपने प्रियजनों को प्रेरित करने के लिए यहां कुछ बेहतरीन शुभकामनाएं, विचार और प्रेरक पंक्तियां दी गई हैं:</h3>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		विश्व पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं</h3>
	<p>
		 </p>
	<p>
		1. धरती का आवरण है हरियाली, </p>
	<p>
		इसके बिना जीवन की हर शाम है खाली। </p>
	<p>
		आइए इस पर्यावरण दिवस पर कम से कम </p>
	<p>
		एक पौधा लगाने का संकल्प लें। </p>
	<p>
		<strong>विश्व पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!</strong></p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		2. पेड़-पौधे हैं जीवन का आधार, </p>
	<p>
		मत करो इनका अनादर। </p>
	<p>
		आओ प्रकृति को सजाएं, </p>
	<p>
		<strong>मिलकर पेड़ लगाएं। </strong></p>
	<p>
		<strong>Happy World Environment Day!</strong></p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		3. स्वच्छ हवा, शुद्ध जल और </p>
	<p>
		हरी-भरी धरती ही असली संपत्ति है। </p>
	<p>
		आइए अपनी इस संपत्ति को सहेजने का वादा करें। </p>
	<p>
		<strong>पर्यावरण दिवस की शुभकामनाएं!</strong></p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		4. जब घर के आंगन में पेड़ मुस्कुराएगा, </p>
	<p>
		तब हर चेहरा खिलखिलाएगा। </p>
	<p>
		अपने घर से शुरुआत करें, </p>
	<p>
		प्रकृति को सुंदर बनाएं।</p>
	<p>
		<strong>पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!</strong></p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		5. “हरे-भरे पर्यावरण में ही </p>
	<p>
		जीवन की खुशियां छुपी हैं। </p>
	<p>
		इस दिन हर पेड़ की सुरक्षा का संकल्प लें।”</p>
	<p>
		<strong>विश्व पर्यावरण दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं!</strong></p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		पर्यावरण संरक्षण पर अनमोल विचार</h3>
	<p>
		* "प्रकृति के पास हर इंसान की ज़रूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं, लेकिन किसी एक इंसान के लालच को पूरा करने के लिए नहीं।"</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		* "पेड़ लगाना केवल पर्यावरण की मदद करना नहीं है, बल्कि अपनी आने वाली पीढ़ियों को सांसें उपहार में देना है।"</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		* "प्रकृति हमारी माता है। यदि हम उसकी रक्षा करेंगे, तो वह हमारा पोषण करेगी। यदि हम उसे नष्ट करेंगे, तो हम खुद के विनाश का रास्ता चुनेंगे।"<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/environment-day-special/intimacy-with-nature-the-first-step-to-environmental-conservation-126060400035_1.html" target="_blank">प्रकृति के साथ आत्मीयता: पर्यावरण संरक्षण का पहला कदम</a></strong></p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		प्रेरक पंक्तियां और स्लोगन</h3>
	<p>
		<strong>हरियाली का संदेश</strong></p>
	<p>
		1. "तभी आएगी जीवन में खुशहाली, जब हम सब मिलकर फैलाएंगे हरियाली।"</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		2. "पेड़ लगाओ, देश बचाओ; पेड़ लगाओ, जीवन सजाओ।"</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		3. “जहां हरियाली, वहां खुशहाली। अपने पर्यावरण को संवारें, अपने भविष्य को संवारें।”</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		4. एक छोटा सा संकल्प</h3>
	<p>
		"कागज को बचाएं, पानी को सहेजें,</p>
	<p>
		प्लास्टिक को छोड़कर, थैले को भेजें।</p>
	<p>
		चलो आज इस धरा को स्वर्ग बनाते हैं,</p>
	<p>
		मिलकर एक नया पौधा लगाते हैं।"</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		घर से कैसे करें शुरुआत? </h3>
	<p>
		पर्यावरण को बचाने के लिए किसी बड़े जंगल में जाने की जरूरत नहीं है:</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>* एक पौधा, एक याद: </strong>अपने बच्चों के साथ मिलकर घर के बगीचे में एक पौधा लगाएं और उसे एक सुंदर नाम दें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>* गीले और सूखे कचरे का प्रबंधन: </strong>घर के कोने में एक कंपोस्ट बिन रखें, जिससे रसोई के कचरे से प्राकृतिक खाद बन सके।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>* पक्षियों के लिए दाना-पानी: </strong>आंगन के पेड़ों पर पक्षियों के लिए पानी का बर्तन और दाना लटकाएं।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		आइए, आज से ही इस मुहिम का हिस्सा बनें। हैप्पी वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे!</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/environment-day-special/environment-day-last-river-dries-what-will-humans-do-126060400044_1.html" target="_blank">पर्यावरण दिवस: जब आखिरी नदी सूखेगी, तब इंसान क्या करेगा?</a></strong></p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 05 Jun 2026 11:08:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 05 Jun 2026 11:09:11 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[environment special]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Environment and Health: पर्यावरण और सेहत का क्या है कनेक्शन, जानें दोनों क्यों हैं एक-दूजे के लिए जरूरी]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/environment-day-special/what-is-the-connection-between-the-environment-and-health-126060400033_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/04/thumb/1_1/1780570503-2261.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/04/thumb/1_1/1780570503-2261.jpg</image>
      <description><![CDATA[Health and Nature Connection: आज के दौर में स्वस्थ जीवन और स्वच्छ पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक बन चुके हैं। जिस हवा में हम सांस लेते हैं, जिस पानी को पीते हैं और जिस वातावरण में रहते हैं, उसका सीधा प्रभाव हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="The picture gives information related to environment and health, the caption gives the message of healthy environment and safe life." class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/04/full/1780570503-2261.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>swasthya aur prakriti sambandh: </strong>पर्यावरण और हमारी सेहत के बीच का रिश्ता शरीर और सांस जैसा है। जैसे बिना सांस के शरीर का कोई अस्तित्व नहीं है, ठीक वैसे ही एक स्वस्थ पर्यावरण के बिना मानव जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। हम जो हवा सांस में लेते हैं, जो पानी पीते हैं और जो भोजन खाते हैं—वह सब हमें पर्यावरण से ही मिलता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/environment-day-special/world-environment-day-message-to-save-the-earth-126053000043_1.html" target="_blank">विश्व पर्यावरण दिवस 2026: &#39;कमिटमेंट नहीं, अब एक्शन का समय&#39;, यही है धरती बचाने का सबसे बड़ा संदेश</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	हाल के वर्षों में जिस तरह ग्लोबल वार्मिंग, प्रदूषण और बीमारियां बढ़ी हैं, उसने यह साफ कर दिया है कि &#39;अगर प्रकृति बीमार होगी, तो इंसान कभी स्वस्थ नहीं रह सकता।&#39;</p>
<p>
	 </p>
<p>
	1. पर्यावरण और सेहत का सीधा कनेक्शन</p>
<p>
	2. मानसिक सेहत पर पर्यावरण का असर</p>
<p>
	3. दोनों क्यों हैं &#39;एक-दूजे के लिए जरूरी&#39;?</p>
<p>
	4. एक स्वस्थ भविष्य के लिए हम क्या कर सकते हैं?</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>आइए विस्तार से समझते हैं कि इन दोनों का आपस में क्या कनेक्शन है और ये एक-दूसरे के लिए क्यों जरूरी हैं।</strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. पर्यावरण और सेहत का सीधा कनेक्शन</h3>
<p>
	हमारा शरीर पंचतत्वों यानी पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश से बना है, और ये सभी तत्व पर्यावरण का हिस्सा हैं। जब पर्यावरण में असंतुलन होता है, तो उसका सीधा असर हमारे शरीर पर पड़ता है:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>हवा और सांसों का रिश्ता: </strong>स्वच्छ हवा हमारे फेफड़ों और दिल को मजबूत रखती है। इसके विपरीत, वायु प्रदूषण (Air Pollution) के कारण आज अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों का कैंसर और दिल के दौरे (Heart Attacks) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>जल और पाचन तंत्र: </strong>साफ पानी जीवन का आधार है। लेकिन जब नदियां और भूमिगत जल प्रदूषित होते हैं, तो हैजा, टाइफाइड, पीलिया (Jaundice) और पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियां हमें घेर लेती हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मिट्टी और हमारा पोषण: </strong>हम जो अनाज, फल और सब्जियां खाते हैं, वे मिट्टी से उगती हैं। रासायनिक खादों और कीटनाशकों (Pesticides) के अत्यधिक इस्तेमाल से मिट्टी की गुणवत्ता खराब हो रही है, जिससे हमारे भोजन में पोषक तत्व कम हो रहे हैं और कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>बदलती जलवायु और नए वायरस: </strong>जंगलों की कटाई और बढ़ते तापमान (Climate Change) के कारण कई ऐसे वायरस और बैक्टीरिया इंसानों के संपर्क में आ रहे हैं, जो पहले सिर्फ जंगलों तक सीमित थे। कोरोना, मंकीपॉक्स या नए तरह के फ्लू इसके बड़े उदाहरण हैं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/environment-day-special/essay-on-world-environment-day-2026-126052900042_1.html" target="_blank">World Environment Day Essay: विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष निबंध</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. मानसिक सेहत पर पर्यावरण का असर</h3>
<p>
	पर्यावरण का संबंध सिर्फ हमारी शारीरिक सेहत से नहीं, बल्कि मानसिक सुकून से भी है:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>तनाव में कमी:</strong> कंक्रीट के जंगलों यानी शहरी चकाचौंध के बीच रहने वाले लोगों की तुलना में जो लोग पार्क, बाग-बगीचों या प्रकृति के करीब समय बिताते हैं, उनमें तनाव और डिप्रेशन का स्तर बहुत कम होता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>ध्वनि प्रदूषण और चिड़चिड़ापन: </strong>वाहनों और कारखानों का शोर हमारे मानसिक संतुलन को बिगाड़ता है। इससे अनिद्रा, उच्च रक्तचाप और चिड़चिड़ापन बढ़ता है। प्रकृति की शांति हमारे दिमाग को &#39;रीबूट&#39; करने का काम करती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. दोनों क्यों हैं &#39;एक-दूजे के लिए जरूरी&#39;?</h3>
<p>
	यह एक &#39;इकोसिस्टम&#39; यानी पारिस्थितिकी तंत्र है, जहां दोनों का अस्तित्व एक-दूसरे पर निर्भर करता है:</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	इंसानों के लिए पर्यावरण क्यों जरूरी है?</h3>
<p>
	प्रकृति हमें मुफ्त में ऑक्सीजन, शुद्ध पानी, भोजन और जड़ी-बूटियां/ दवाइयां देती है। यदि पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, तो अस्पताल जाने की जरूरत आधी हो जाएगी। एक स्वच्छ वातावरण हमारी औसत उम्र को बढ़ाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	पर्यावरण के लिए इंसान क्यों जरूरी है?</h3>
<p>
	प्रकृति ने धरती पर इंसानों को सबसे बुद्धिमान जीव बनाया है। आज पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान इंसानों ने ही पहुंचाया है, इसलिए इसे बचाने की जिम्मेदारी भी हमारी ही है। अगर इंसान पेड़ लगाएगा, नदियों को साफ रखेगा और प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद करेगा, तो पर्यावरण दोबारा खुद को हरा-भरा कर लेगा।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. एक स्वस्थ भविष्य के लिए हम क्या कर सकते हैं?</h3>
<p>
	&#39;प्रकृति के पास हमारी जरूरतों को पूरा करने के लिए सब कुछ है, लेकिन हमारे लालच को पूरा करने के लिए कुछ भी नहीं।&#39; - महात्मा गांधी</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अगर हम खुद को और अपनी आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ देखना चाहते हैं, तो हमें आज से ही अपनी आदतें बदलनी होंगी:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएं:</strong> अपने जन्मदिन या विशेष अवसरों पर कम से कम एक पौधा जरूर लगाएं और उसकी देखभाल करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>प्लास्टिक को कहें &#39;ना&#39;: </strong>सिंगल-यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करें और जूट या कपड़े के थैलों को अपनाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>पानी और बिजली बचाएं:</strong> जरूरत न होने पर लाइट-पंखे बंद करें और पानी की एक-एक बूंद की कीमत समझें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सस्टेनेबल लाइफस्टाइल अपनाएं: </strong>कम दूरी के लिए पैदल चलें या साइकिल का इस्तेमाल करें। इससे पर्यावरण भी बचेगा और आपकी सेहत भी अच्छी रहेगी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	संक्षेप में कहा जाए तो पर्यावरण की रक्षा करना कोई सामाजिक कार्य नहीं, बल्कि खुद को जीवित रखने और स्वस्थ रखने की बुनियादी जरूरत है। जब तक धरती हरी-भरी रहेगी, तब तक हमारी सांसें सुरक्षित रहेंगी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/environment-day-special/on-world-environment-day-take-a-true-pledge-to-make-the-earth-green-126060200031_1.html" target="_blank">विश्व पर्यावरण दिवस पर लें धरती को हरा-भरा बनाने का सच्चा संकल्प</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 16:38:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 04 Jun 2026 16:37:20 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[environment special]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[पेड़-पौधों का ज्योतिष कनेक्शन: 100 यज्ञों के बराबर पुण्य देता है सिर्फ एक पौधा! जानें किस्मत चमकाने वाली 11 जादुई बातें]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/vastu-fengshui/the-astrological-connection-of-plants-and-trees-126060400004_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/vastu-fengshui/the-astrological-connection-of-plants-and-trees-126060400004_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/04/thumb/1_1/1780548099-9928.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/04/thumb/1_1/1780548099-9928.jpg</image>
      <description><![CDATA[Astrology Tree Connection: सनातन धर्म में पेड़-पौधों को केवल प्रकृति का हिस्सा नहीं, बल्कि दिव्य ऊर्जा का स्रोत माना गया है। वेद, पुराण और ज्योतिष शास्त्र में कई ऐसे वृक्षों और पौधों का उल्लेख मिलता है जिन्हें देवताओं का निवास स्थान माना गया है। ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p>
		<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
			<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
				<img align="center" alt="Pictures related to tree plantation under astrology and environment" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/04/full/1780548099-9928.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
		</p>
	</p>
	<p>
		<strong>Environmental Protection and Spirituality: </strong>सनातन धर्म और हमारी संस्कृति में वृक्षों को सिर्फ प्रकृति का हिस्सा नहीं, बल्कि देवताओं का रूप माना गया है। शास्त्रों में लिखा है कि जो पुण्य बड़े-बड़े यज्ञ करवाने, आलीशान मंदिर बनवाने या देव-आराधना से भी नहीं मिलता, वह पुण्य महज एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने से आसानी से मिल जाता है। एक पौधा न जाने कितने जीवों को जीवनदान देता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vastu-fengshui/a-plant-planted-in-the-right-direction-can-change-your-luck-126060200034_1.html" target="_blank">Vastu Tips for Plantation: सही दिशा में लगाया गया पौधा बदल सकता है आपकी किस्मत</a></strong></p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, पौधों का सीधा संबंध हमारे ग्रहों और किस्मत से होता है। आइए जानते हैं पौधारोपण से जुड़े वो 13 चमत्कारी नियम, जो आपकी जिंदगी बदल सकते हैं:</strong><br />
		 </p>
	<h3>
		1. पौधारोपण के 5 &#39;सुपर&#39; नक्षत्र</h3>
	<p>
		नया पौधा लगाने के लिए उत्तरा, स्वाति, हस्त, रोहिणी और मूल नक्षत्र को सबसे भाग्यशाली माना जाता है। इन नक्षत्रों में रोपे गए पौधे कभी सूखते नहीं हैं और बहुत तेजी से फलते-फूलते हैं।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		2. दिशाओं का रखें खास ख्याल</h3>
	<p>
		घर के नैऋत्य (South-West) या आग्नेय कोण (South-East) में कभी भी गार्डन या बगीचा न बनाएं। यदि बगीचा बनाना ही है, तो घर के बाएं हिस्से (बाईं ओर) को चुनें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>वास्तु दोष दूर करने का सीक्रेट: </strong>घर के पूर्व में बड़े पेड़ों का होना अच्छा नहीं माना जाता। अगर ऐसा है, तो उनके साइड इफेक्ट्स को कम करने के लिए घर की उत्तर दिशा में आंवला, अमलतास, हरसिंगार या तुलसी का पौधा लगा दें, वास्तु दोष तुरंत बैलेंस हो जाएगा।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		3. फल न देने वाले पेड़ों का इलाज</h3>
	<p>
		अगर आपके बगीचे में किसी पेड़ पर फल आने बंद हो गए हैं या बहुत कम आते हैं, तो एक अचूक उपाय अपनाएं। उस पेड़ की जड़ में कुलथी, उड़द, मूंग, तिल और जौ मिला हुआ पानी डालना शुरू करें। पेड़ फिर से फलों से लद जाएगा।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		4. इन पेड़ों से बढ़ती है घर में अशांति</h3>
	<p>
		वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की बाउंड्री में पलाश, कंचन, अर्जुन, करंज और लसोड़ा/बहुवार के पेड़ हमेशा कलह और असंतोष पैदा करते हैं। वहीं बेर का पेड़ घर में नए दुश्मन खड़े करता है, इसलिए इसे घर की सीमा से बाहर ही लगाएं।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		5. घर में लाएं &#39;अमन-चैन&#39;</h3>
	<p>
		जिस घर की बाउंड्री के अंदर निर्गुंडी का पौधा होता है, वहां कभी लड़ाई-झगड़े नहीं होते और हमेशा शांति रहती है। इसके अलावा घर की सीमा में अंगूर, कटहल (पनस), पाकड़ और महुआ के पौधे लगाना बेहद शुभ माना जाता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		6. जमीन-जायदाद के विवादों से मुक्ति</h3>
	<p>
		यदि आप प्रॉपर्टी, जमीन या मकान से जुड़ी दिक्कतों का सामना कर रहे हैं, तो आंवले का पौधा लगाएं। इस पौधे को आप कहीं भी लगाएं, इसे लगाने वाले की जमीन संबंधी सारी परेशानियां धीरे-धीरे खत्म हो जाती हैं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vastu-fengshui/vastu-tips-kaise-pahne-kapde-kaise-ho-jute-aur-baal-126052100045_1.html" target="_blank">Vastu Lifestyle Tips: वास्तु के अनुसार कपड़े, जूते और हेयरकट चुनें, बदल सकती है किस्मत</a></strong></p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		7. कमजोर चंद्रमा का रामबाण इलाज</h3>
	<p>
		यदि आपकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर है, मानसिक तनाव रहता है या माता का स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता, तो आपको गूलर का पौधा लगाना चाहिए। यह चंद्रमा की हर पीड़ा को हर लेता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		8. चार दिशाओं के &#39;रक्षक&#39; वृक्ष</h3>
	<p>
		वास्तु के अनुसार, घर के चारों तरफ पेड़ों का सही कॉम्बिनेशन इस प्रकार होना चाहिए:</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>शुभ:</strong> पूर्व में बरगद, पश्चिम में पीपल, उत्तर में पाकड़ और दक्षिण में गूलर का पेड़ होना भाग्य चमकाता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>अशुभ (भूलकर भी न करें):</strong> इसके बिल्कुल विपरीत, यानी पूर्व में पीपल, दक्षिण में पाकड़, पश्चिम में बरगद और उत्तर में गूलर का पेड़ होना भयंकर वास्तु दोष और कंगाली लाता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		9. साक्षात लक्ष्मी का वास</h3>
	<p>
		जिस घर के आंगन या परिसर में बिल्वपत्र (बेल) का एक भी पेड़ लगा होता है, उस घर पर भगवान शिव के साथ-साथ साक्षात माता लक्ष्मी की कृपा बरसती है। वहां कभी धन की कमी नहीं होती।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		10. कैक्टस यानी दुश्मनों को दावत</h3>
	<p>
		घर के अंदर या आसपास कभी भी रेगिस्तानी या कटीले पौधे, जैसे कैक्टस न लगाएं। ये पौधे घर में निगेटिव एनर्जी फैलाते हैं, जिससे शत्रु बाधा, मानसिक अशांति और धन की हानि होती है।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		11. पापों का नाश और उत्तम संतान की प्राप्ति</h3>
	<p>
		पापों से मुक्ति: जो व्यक्ति खुले मैदान या सार्वजनिक स्थान पर दो बरगद (बड़) के पेड़ लगाता है, उसके कई जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>संतान सुख: </strong>उत्तम, आज्ञाकारी और सुख देने वाली संतान की कामना के लिए पलाश का वृक्ष लगाएं, लेकिन ध्यान रहे कि यह पेड़ घर की सीमा से बाहर होना चाहिए।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>प्रायश्चित का नियम: </strong>अगर किसी भी मजबूरी के कारण आपको कोई हरा-भरा पेड़ काटना पड़ रहा है, तो उस पाप से मुक्ति पाने के लिए तुरंत 10 नए पौधे लगाने और उनके पालन-पोषण का संकल्प लें।</p>
</p>
<br />
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vastu-fengshui/vastu-tips-3-asan-upay-se-ghar-ka-vastu-dosh-door-karen-126052100039_1.html" target="_blank">Vastu Tips: घर से वास्तु दोष मिटाने के 3 आसान उपाय, सुख-समृद्धि से भर जाएगा जीवन</a></strong></p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 10:16:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 04 Jun 2026 10:15:43 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Vastu Fengshui]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[World Environment Day Essay: विश्व पर्यावरण दिवस पर निबंध]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/environment-day-special/essay-on-world-environment-day-2026-126052900042_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/environment-day-special/essay-on-world-environment-day-2026-126052900042_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/29/thumb/1_1/1780049663-904.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/29/thumb/1_1/1780049663-904.jpg</image>
      <description><![CDATA[World Environment Day 2026: विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक दिवस नहीं है, बल्कि यह पृथ्वी को बचाने का एक वैश्विक अभियान है। इस दिन दुनिया भर में लोग पर्यावरण संरक्षण के लिए शपथ लेते हैं और प्रकृति को सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="A scene giving the message of saving nature on World Environment Day" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/29/full/1780049663-904.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>World Environment Day Essay in Hindi: </strong>आज के आधुनिक युग में मानव जीवन तेजी से विकास की ओर बढ़ रहा है। विज्ञान और तकनीक ने हमारे जीवन को आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ-साथ पर्यावरण को भारी नुकसान भी पहुंचाया है। बढ़ता प्रदूषण, पेड़ों की कटाई, जल संकट, ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याएं पूरी दुनिया के लिए खतरा बन चुकी हैं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/indore/jimmy-and-janak-mcgilligan-foundation-for-sustainable-development-organizes-environmental-dialogue-week-126052800038_1.html" target="_blank">जिम्मी और जनक मगिलिगन फाउंडेशन फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट द्वारा &#39;पर्यावरण संवाद सप्ताह&#39; का आयोजन</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<ul>
	<li>
		प्रस्तावना</li>
	<li>
		विश्व पर्यावरण दिवस का महत्व</li>
	<li>
		पर्यावरण प्रदूषण के कारण</li>
	<li>
		पर्यावरण संरक्षण के उपाय</li>
	<li>
		विद्यार्थियों की भूमिका</li>
	<li>
		उपसंहार </li>
</ul>
<h3>
	यहां विश्व पर्यावरण दिवस पर एक विस्तृत विशेष निबंध प्रस्तुत है:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	प्रस्तावना</h3>
<p>
	पर्यावरण मानव जीवन का आधार है। स्वच्छ वायु, जल, भूमि, वन और जीव-जंतु मिलकर हमारे पर्यावरण का निर्माण करते हैं। यदि पर्यावरण संतुलित और सुरक्षित रहेगा, तभी पृथ्वी पर जीवन संभव होगा। वर्तमान समय में बढ़ता प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन चुके हैं। इन समस्याओं के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रत्येक वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	विश्व पर्यावरण दिवस का महत्व</h3>
<p>
	विश्व पर्यावरण दिवस की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 1972 में की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना और प्रकृति के महत्व को समझाना है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि पृथ्वी केवल मनुष्यों की नहीं, बल्कि सभी जीवों की साझी धरोहर है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	आज पृथ्वी अनेक पर्यावरणीय संकटों का सामना कर रही है। बढ़ती जनसंख्या और औद्योगिकीकरण के कारण वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण तथा भूमि प्रदूषण तेजी से बढ़ रहे हैं। जंगलों की कटाई से जैव विविधता समाप्त हो रही है और ग्लोबल वार्मिंग का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसी स्थिति में विश्व पर्यावरण दिवस का महत्व और भी बढ़ जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	पर्यावरण प्रदूषण के कारण</h3>
<p>
	पर्यावरण प्रदूषण के कई प्रमुख कारण हैं- जैसे...</p>
<p>
	 </p>
<p>
	1. पेड़ों की अंधाधुंध कटाई</p>
<p>
	2. कारखानों और वाहनों से निकलने वाला धुआं</p>
<p>
	3. प्लास्टिक का अत्यधिक उपयोग</p>
<p>
	4. जल स्रोतों में कचरा और रसायन डालना</p>
<p>
	5. प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन</p>
<p>
	 </p>
<p>
	इन कारणों से पृथ्वी का तापमान बढ़ रहा है, मौसम में असंतुलन पैदा हो रहा है तथा अनेक बीमारियाँ फैल रही हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	पर्यावरण संरक्षण के उपाय</h3>
<p>
	पर्यावरण को बचाने के लिए हमें सामूहिक प्रयास करने होंगे। कुछ महत्वपूर्ण उपाय निम्नलिखित हैं- </p>
<p>
	 </p>
<p>
	* अधिक से अधिक पेड़ लगाना</p>
<p>
	* प्लास्टिक का उपयोग कम करना</p>
<p>
	* जल और बिजली की बचत करना</p>
<p>
	* कचरे का पुनर्चक्रण करना</p>
<p>
	* सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाना</p>
<p>
	* लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाना</p>
<p>
	 </p>
<p>
	यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव करे, तो पर्यावरण संरक्षण में बड़ा योगदान दिया जा सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	विद्यार्थियों की भूमिका</h3>
<p>
	विद्यार्थी समाज का भविष्य होते हैं। वे पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। विद्यालयों में वृक्षारोपण अभियान, स्वच्छता अभियान और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए। विद्यार्थियों को पानी बचाने, बिजली की बचत करने और स्वच्छता बनाए रखने की आदत डालनी चाहिए।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	उपसंहार</h3>
<p>
	विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि प्रकृति को बचाने का संकल्प है। हमें यह समझना होगा कि यदि पर्यावरण सुरक्षित रहेगा, तभी मानव जीवन सुरक्षित रहेगा। पृथ्वी को हरा-भरा और स्वच्छ बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। हमें आज से ही पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और सुंदर धरती मिल सके।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/indore/a-healthy-environment-is-our-collective-responsibility-dr-janak-palata-126042900025_1.html" target="_blank">स्वस्थ पर्यावरण हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी : पद्मश्री डॉ. जनक पलटा मगिलिगन</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p style="text-align: center;">
	<strong>&#39;पेड़ लगाओ, पर्यावरण बचाओ — यही मानवता का सच्चा धर्म है।&#39;</strong><br />
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 09:09:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 04 Jun 2026 17:10:14 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[environment special]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Birsa Munda: आदिवासी स्वाभिमान और स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बिरसा मुंडा]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/death-anniversary/birsa-munda-death-anniversary-2026-126060300039_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/death-anniversary/birsa-munda-death-anniversary-2026-126060300039_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/03/thumb/1_1/1780483641-7609.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/03/thumb/1_1/1780483641-7609.jpg</image>
      <description><![CDATA[Birsa Munda Balidan Diwas: 15 नवंबर 1875 को वर्तमान झारखंड के उलिहातू गांव में जन्मे बिरसा मुंडा बचपन से ही असाधारण प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता के धनी थे। उस समय आदिवासी समाज अंग्रेजी शासन, जमींदारों और महाजनों के शोषण से परेशान था। बिरसा ने अपने समाज ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Portrait of Birsa Munda, a brave warrior of the Indian freedom struggle and a rich historical personality" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/03/full/1780483641-7609.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Birsa Munda Biography: </strong>स्वतंत्रता संग्राम के महानायक बिरसा मुंडा का बलिदान दिवस 9 जून को मनाया जाता है। भारतीय इतिहास में ‘धरती आबा’ (धरती पिता) के नाम से पूजे जाने वाले बिरसा मुंडा मात्र एक क्रांतिकारी नहीं थे, बल्कि वे आदिवासी चेतना, स्वाभिमान और जल-जंगल-जमीन की रक्षा के सबसे बड़े प्रतीक थे। 19वीं सदी के अंत में जब ब्रिटिश हुकूमत और जमींदार मिलकर आदिवासियों का शोषण कर रहे थे, तब बिरसा मुंडा ने एक ऐसी अलख जगाई जिसने अंग्रेजी साम्राज्य की नींव हिलाकर रख दी।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. प्रारंभिक जीवन और चेतना का उदय</h3>
<p>
	बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को वर्तमान झारखंड के खूंटी जिले के उलीहातु गांव में हुआ था। भारत सरकार द्वारा उनके जन्मदिन 15 नवंबर को हर साल &#39;जनजातीय गौरव दिवस&#39; के रूप में मनाया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>बचपन और शिक्षा: </strong>उनका बचपन चाईबासा के जंगलों और खेतों में बीता। पढ़ाई के लिए उन्होंने कुछ समय ईसाई मिशनरी स्कूल में दाखिला लिया, जहां उनका नाम &#39;बिरसा डेविड&#39; रखा गया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>शोषण के खिलाफ आवाज: </strong>स्कूल के दिनों में ही उन्होंने महसूस किया कि मिशनरी और ब्रिटिश व्यवस्था आदिवासियों की संस्कृति, भाषा और उनके पारंपरिक अधिकारों को नष्ट कर रही है। इसके बाद उन्होंने मिशनरी स्कूल छोड़ दिया और अपनी संस्कृति की रक्षा का संकल्प लिया।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. &#39;बिरसा संप्रदाय&#39; और सामाजिक सुधार</h3>
<p>
	क्रांति से पहले बिरसा मुंडा ने समाज को अंदर से मजबूत करने का काम किया। उन्होंने देखा कि अंधविश्वास और नशे के कारण आदिवासी समाज कमजोर हो रहा है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>एकेश्वरवाद की सीख: </strong>उन्होंने आदिवासियों को केवल एक ईश्वर (सिंगबोंगा) की पूजा करने की सलाह दी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सामाजिक बुराइयों का अंत:</strong> उन्होंने शराबबंदी, पशु बलि के विरोध और स्वच्छता पर जोर दिया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	उनके इन विचारों से प्रभावित होकर हजारों लोग उनके अनुयायी बन गए और लोग उन्हें प्यार से &#39;धरती आबा&#39; कहने लगे।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. &#39;उलगुलान&#39; (महान विद्रोह) की शुरुआत</h3>
<p>
	&#39;उलगुलान&#39; मुंडारी भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है &#39;महान उथल-पुथल&#39; या &#39;विद्रोह&#39;। यह आंदोलन ब्रिटिश सरकार की &#39;दिक्षु&#39; (बाहरी शोषक, जमींदार और सूदखोर) नीति के खिलाफ था, जो आदिवासियों की ज़मीनें छीन रहे थे।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>नारा: </strong>बिरसा मुंडा ने सिंहभूम और रांची के जंगलों में आदिवासियों को एकजुट किया और नारा दिया- &#39;अबुआ राज एते जाना, महारानी राज टुंडू जाना (अर्थात: अब हमारा राज शुरू हो गया है और महारानी का राज खत्म हो गया है)।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>गुरिल्ला युद्ध:</strong> मुंडा तीर-कमान और पारंपरिक हथियारों से लैस होकर ब्रिटिश चौकियों, थानों और जमींदारों पर हमला करते थे। डोम्बारी पहाड़ी का युद्ध इस आंदोलन का एक ऐतिहासिक केंद्र बना।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. महानायक का बलिदान</h3>
<p>
	ब्रिटिश सेना आधुनिक हथियारों से लैस थी, फिर भी बिरसा मुंडा की रणनीतियों के सामने उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। आखिरकार, अंग्रेजों ने चाल चली और बिरसा मुंडा पर इनाम रख दिया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>गिरफ्तारी: </strong>मार्च 1900 में, चक्रधरपुर के जामकोपाई जंगल से सोते समय उन्हें धोखे से गिरफ्तार कर लिया गया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>शहादत:</strong> मात्र 24 वर्ष की आयु में, 9 जून 1900 को रांची जेल में रहस्यमय परिस्थितियों में (अंग्रेजों के अनुसार हैजे के कारण) उन्होंने अंतिम सांस ली। लेकिन इतिहासकारों और उनके अनुयायियों का मानना है कि उन्हें अंग्रेजों द्वारा जेल में धीमा जहर दिया गया था। उनकी शहादत के बाद अंग्रेजों को आदिवासियों की जमीन की रक्षा के लिए छोटा नागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT Act, 1908) कानून बनाना पड़ा, जिसने बाहरी लोगों को आदिवासी जमीन खरीदने से रोका।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	&#39;धरती आबा बिरसा मुंडा का जीवन हमें सिखाता है कि जब बात अपनी संस्कृति, अस्मिता और अधिकारों की हो, तो संसाधनों की कमी कभी भी आपके हौसलों को डिगा नहीं सकती।&#39;</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 16:46:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 03 Jun 2026 16:49:23 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Death anniversary]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[World Bicycle Day 2026: 3 जून विश्व साइकिल दिवस: साइकिल चलाएं, स्वस्थ रहें, पर्यावरण बचाएं]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/important-days-and-dates/happy-world-bicycle-day-2026-126060300033_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/important-days-and-dates/happy-world-bicycle-day-2026-126060300033_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/03/thumb/1_1/1780479590-7078.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/03/thumb/1_1/1780479590-7078.jpg</image>
      <description><![CDATA[World Bicycle Day: हर साल 3 जून को विश्व साइकिल दिवस मनाया जाता है। यह दिन साइकिल के महत्व, इसके स्वास्थ्य लाभ, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ परिवहन के लिए इसके उपयोग को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। आइए, साइकिल को अपनाएं और एक स्वस्थ, हरित और बेहतर ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="The scene in the picture gives the message of protecting the environment and nature on World Bicycle Day" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/03/full/1780479590-7078.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Bicycle Day: </strong>दुनिया भर में हर साल 3 जून को &#39;विश्व साइकिल दिवस&#39; मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने 12 अप्रैल 2018 को इसे आधिकारिक रूप से मान्यता दी थी। साइकिल एक साधन ही नहीं, बल्कि बेहतर स्वास्थ्य, स्वच्छ पर्यावरण और खुशहाल जीवन की ओर एक कदम है। UN द्वारा शुरू किए गए इस दिन का मुख्य उद्देश्य परिवहन के एक सरल, किफायती, भरोसेमंद और पर्यावरण के अनुकूल साधन के रूप में साइकिल के महत्व को पहचानना है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	हर वर्ष 3 जून को मनाया जाने वाला विश्व साइकिल दिवस का उद्देश्य लोगों को साइकिल के महत्व, उसके स्वास्थ्य लाभों और पर्यावरण संरक्षण में उसकी भूमिका के प्रति जागरूक करना है। साइकिल केवल एक साधारण परिवहन साधन नहीं है, बल्कि यह स्वस्थ जीवनशैली, स्वच्छ वातावरण और टिकाऊ विकास का प्रतीक भी है। आज के समय में बढ़ता प्रदूषण, ट्रैफिक जाम और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां दुनिया के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। ऐसे में साइकिल एक सरल, किफायती और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प के रूप में उभरती है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	1. सेहत का सफर: साइकिल चलाएं, स्वस्थ रहें</p>
<p>
	2. धरती की पुकार: पर्यावरण बचाएं</p>
<p>
	3. जेब पर राहत: आर्थिक रूप से भी है बेस्ट</p>
<p>
	4. इस &#39;विश्व साइकिल दिवस&#39; पर लें एक छोटा सा संकल्प<br />
	 </p>
<h3>
	आइए जानते हैं कि साइकिल चलाना हमारे जीवन और पर्यावरण के लिए क्यों ज़रूरी है...</h3>
<br />
<h3>
	1. सेहत का सफर: साइकिल चलाएं, स्वस्थ रहें</h3>
<p>
	रोजाना सिर्फ 20 से 30 मिनट साइकिल चलाना जिम में घंटों पसीना बहाने जितना फायदेमंद हो सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>दिल की सेहत: </strong>साइकिल चलाने से दिल की धड़कनें बेहतर होती हैं, जिससे रक्त संचार सुधरता है और दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>वजन नियंत्रण और फिटनेस: </strong>यह एक बेहतरीन कार्डियो एक्सरसाइज है जो तेजी से कैलोरी बर्न करने और मांसपेशियों, खासकर पैरों और कोर को मजबूत बनाने में मदद करती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मानसिक तनाव से राहत: </strong>खुली हवा में साइकिल चलाने से शरीर में &#39;एंडोर्फिन&#39; यानी हैप्पी हार्मोन्स का स्तर बढ़ता है, जो तनाव, चिंता और डिप्रेशन को कम करता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>इम्यूनिटी बूस्टर: </strong>नियमित रूप से पैडल मारने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. धरती की पुकार: पर्यावरण बचाएं</h3>
<p>
	बढ़ते प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में साइकिल एक मसीहा की तरह है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>शून्य उत्सर्जन: </strong>साइकिल से किसी भी प्रकार का धुआं या हानिकारक गैसें- जैसे कार्बन डाइऑक्साइड नहीं निकलतीं। यह वायु प्रदूषण को कम करने का सबसे सीधा तरीका है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>ध्वनि प्रदूषण से मुक्ति:</strong> कारों और बाइकों के विपरीत, साइकिल पूरी तरह शांत होती है, जिससे शहरों में ध्वनि प्रदूषण कम होता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>ऊर्जा की बचत: </strong>साइकिल पूरी तरह से आपकी शारीरिक ऊर्जा से चलती है, जिससे पेट्रोल-डीजल जैसे सीमित प्राकृतिक संसाधनों की बचत होती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. जेब पर राहत: आर्थिक रूप से भी है बेस्ट</h3>
<p>
	साइकिल सिर्फ सेहत और पर्यावरण ही नहीं, बल्कि आपके बैंक बैलेंस का भी ख्याल रखती है:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>नो फ्यूल कॉस्ट: </strong>पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच साइकिल चलाने का खर्च बिल्कुल शून्य है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>कम रखरखाव: </strong>कारों या मोटरसाइकिलों की तुलना में साइकिल की सर्विसिंग और मरम्मत का खर्च बेहद मामूली होता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>पार्किंग के झंझट से मुक्ति: </strong>शहरों में महंगी और सीमित पार्किंग की समस्या से साइकिल सवार हमेशा बचे रहते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. इस &#39;विश्व साइकिल दिवस&#39; पर लें एक छोटा सा संकल्प</h3>
<p>
	शुरुआत बहुत बड़ी करने की जरूरत नहीं है। पर्यावरण और खुद की सेहत के लिए हम सब एक छोटा कदम उठा सकते हैं:</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	&#39;अगर आपकी दुकान, ऑफिस या सब्जी मंडी आपके घर के 2-3 किलोमीटर के दायरे में है, तो बाइक या कार की चाबी उठाने के बजाय साइकिल का पैडल मारें।&#39;</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>आज का संदेश: </strong>विश्व साइकिल दिवस हमें यह संदेश देता है कि यदि हम अपने दैनिक जीवन में छोटी-छोटी दूरी के लिए साइकिल का उपयोग करें, तो न केवल हमारा स्वास्थ्य बेहतर होगा बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और हरित पृथ्वी का निर्माण भी संभव होगा। </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	हैप्पी वर्ल्ड बाइसिकल डे! आज ही अपनी साइकिल की धूल झाड़िए और एक स्वस्थ भविष्य की ओर कदम बढ़ाइए।</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/important-days-and-dates/international-child-protection-day-2026-126060100021_1.html" target="_blank">1st June, Child protection day 2026: 1 जून, अंतरराष्ट्रीय बाल सुरक्षा दिवस आज, जानें महत्व, अधिकार और आवश्यक कदम</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 15:15:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 03 Jun 2026 15:54:10 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Important Days and Dates]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[लता मंगेशकर और सुमन कल्याणपुर : एक अज्ञात स्‍टेशन, देरी से आने वाली एक रेल की प्रतीक्षा और दिल ने फिर याद किया]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/my-blog/singing-story-of-lata-mangeshkar-and-suman-kalyanpur-126060200035_1.html</link>
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      <description><![CDATA[यह तो क़ुदरत की ग़लती थी, उसने लता और सुमन को एक ही कालखंड में जन्म दिया और सुमन की आवाज़ का उजाला लता की आवाज़ के आलोक में कुछ मंद- सा रह गया. जैसे माइकल जैक्‍सन की मूनवॉक रोशनी में जॉर्ज माइकल की रूहानी आवाज कहीं खो गई थी. बावजूद इसके मेरे आसपास ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
	<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
		<img align="center" alt="Lata and Suman Kalyanpur" class="imgCont" height="675" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/02/full/1780395823-6833.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="Lata and Suman Kalyanpur" width="1200" /></p>
</p>
<br />
अंग्रेजी में एक कहन है; people who show you new music are important. मैं अक्सर अपने मित्रों और परिचितों को नए गीत भेजता रहता हूं, कभी रेयर तो कभी कोई अनरिलीज़्ड  गाना. इस गुमान के साथ कि मैं संगीत में कितना कुछ जानता- समझता हूं. लेकिन एक रात ऐसी भी थी कि मैं लता मंगेशकर और सुमन कल्याणपुर के कंठ में भेद नहीं कर पाया! मैं एक ऐसी समानता का शिकार हो गया जिसमें कोई भेद नहीं था— हालांकि वे दो कंठ थे, दो आवाजें और दो अलग जिंदगियां.<br />
<br />
आँखें और पैर थके हुए हैं. देह टूटी हुई. उनींदी शक्ल और बेलौस, बेपरवाह प्रतीक्षा में प्‍लेटफॉर्म पर यहां से वहां भटक रहा हूं. जूतों में पैर सुन्न हैं और बर्फ की तरह ठंडे. दिमाग़ बिल्कुल शिथिल. ज़ेहन शून्य है. कोई विकल्प नहीं है. अब रेलगाड़ी आएगी तो बैठ जाएंगे— नहीं आई तो सुबह जो होगा वही होगा.<br />
<br />
मैं वेटिंग हॉल में चला आता हूं. एक खाली कुर्सी देखकर पसर जाता हूं. आसपास लोग ऊंघ रहे हैं, झपकियों से गर्दनें लुढ़क गई हैं. बच्चों ने अपनी देहों को कुछ दूसरी बड़ी देहों के हवाले कर दिया है. हर कोई नींद में गुम हैं. जैसे नींद का देवता अभी- अभी नशा बांट के गया हो.<br />
<br />
सामने टीवी है, अभी- अभी श्वेत श्याम (दो आंखे बारह हाथ) ख़त्म हुई है. अगली फिल्म (दिल ने फिर याद किया- 1966) शुरू हुई है. वही इंडियन रोमांटिक ड्रामा. एक गलतफहमी और याददाश्त चले जाने वाला एक एंगल. कहानी बढ़ती गई और मेरी पूरी थकी हुई देह सिर्फ एक ही ख़्याल पर सिमट आई है. मेरा ज़हन और फिल्म की कहानी दोनों रफ़त में आकर साथ- साथ बहने लगे हैं. फ़िल्म क्लाइमेक्स के करीब है और टाइटल सॉन्ग &#39;दिल ने फिर याद किया बर्क सी लहराई है&#39; किसी धीमे झोंके की तरह शुरू होता है. नदी के पानी की लय में अपनी लय को मिलाता हुआ. नाव के साथ बहता हुआ गीत. पूरी फिल्म को दरकिनार करता हुआ मैं एक बार फिर से लता मंगेशकर की आवाज़ में गिरफ्त हो जाता हूं. एक बार फिर मुझे यह गुमान जकड़ लेता है कि मैं लता जी का बहुत भावुक प्रशंसक हूं. मुझे लगता है कि अगर मैं कभी लता से मिलता तो मिलते ही वो मुझे पहचान लेती. मुझे लगता है, जिस तरह मैं लता को सुनता हूं, शायद ही कोई ओर सुनता होगा. जिस तरह से मैं लता मंगेशकर से प्रेम करता हूं— कोई नहीं करता है.<br />
<br />
यही सोचते हुए इस गाने को मैं अपनी प्ले लिस्ट में दर्ज़ कर लेता हूं. यह गीत पहले भी सुन चुका था, किंतु अनजान शहर, नींद में डूबे हुए प्लेटफॉर्म, रात के दृश्य, रेल न आने की उकताहट और एक अनिश्चित प्रतीक्षा के बीच जिस तरह से यह गीत आधी रात को ऊंघते हुए लोगों के बीच बज रहा था, वो फिर कभी नहीं होगा. उस वक्त को कभी दोहराया नहीं जा सकेगा. ज़िंदगी हर क्षण नई है, किंतु हमारी आँखें सदियों पुरानी हैं. देह नई है किंतु याददाश्त प्राचीन है. मैं कांप उठा हूं लता की आवाज़ पर. मेरी स्मृति में लता मंगेशकर है, जबकि यह आवाज़ सुमन कल्याणपुर की है. मैं अपनी याददाश्त का शिकार हो चुका था और पूरी रात लता के ग़लत रूमानियत ख्याल में गुजार दी.<br />
<br />
इस फिल्म और गीत के साथ स्मृति में मुझे एक पूरी चिड़चिड़ी रात मिली थी, रेलवे स्टेशन का एक दृश्य मिला. हज़ारों उनींदी आँखें, थकी मांदी देह, खीझ से भरी एक प्रतीक्षा, तमाम चिल्ल- पों और बगैर किसी विकल्प के रेल का इंतजार करने का एक माद्दा— और एक कुछ भी सह लेने की बेशर्मी मिली थी.<br />
<br />
जिस आदमी की रेल नहीं चूकती या जो 10-15 घंटे देरी से आने वाली रेल का प्लेटफॉर्म पर इंतजार नहीं करता, वो आदमी हक़ीकत में किसी काम का नहीं. हर आदमी को अपनी जिंदगी में कोई न कोई चीज़ चूक  जानी चाहिए. हर आदमी को किसी न किसी अज्ञात शे की प्रतीक्षा करनी चाहिए.<br />
<br />
बहरहाल, मेरे लिए यह भी काफ़ी नहीं था. मैं हर चीज़ को हद तक बर्दाश्त करना चाहता हूं. ज़्यादा से ज़्यादा जानी- अनजानी शे को सहना और समझना चाहता हूं. इसलिए मैं अपनी पसंद की हर चीज़, हर बात, हर घटना को अतिरेक में बरतता हूं. ज़्यादातर संगीत में.<br />
<br />
मैं सितार के एक टुकड़े पर ख़ुद की जान ले लेता हूं. गले के एक घुमाव पर सारी रात गुजार देता हूं. कंठ के रेशे पर महीनों ज़िंदा रहता हूं.<br />
<br />
यही वजह है कि संगीत ने मेरी जिंदगी का ज़्यादातर हिस्सा और वक्त बर्बाद कर दिया है. बर्बाद किए वक्त को मैं कहीं वाज़िब इस्तेमाल कर सकता था. इस बर्बादी से मुझे निजी और ज़हनीतौर पर जो मिला है वो दुनिया के किसी काम का नहीं. एक नितांत  अकेली ज़िंदगी कितनी भी गहरी और समृद्ध हो, वो शेष जमात के किसी काम नहीं आती.<br />
<br />
सो, फ़िल्म खत्म होती है, साल 2022 की कोई शाम है. शाम को साढ़े 7 बजे आने वाली रेल सुबह 4 बजे आती है. मैं बर्थ पर लेटते ही स्पॉटीफाई पर &#39;दिल ने फिर याद किया बर्क सी लहराई है&#39; गीत लगा लेता हूं. इसके बाद कई दिनों तक यह गीत लूप में बजता रहता है. पहले मोहम्मद रफ़ी शुरू करते हैं, अंत में मुकेश की आवाज है— और बीच में स्‍त्री कंठ का हिस्सा, जिसे मैं अब तक लता मंगेशकर समझता रहा.<br />
<br />
1 जून 2026 की सुबह सुमन कल्याणपुर के निधन पर मुझे पहली दफ़ा पता चलता है कि यह लता मंगेशकर नहीं, सुमन कल्याणपुर की आवाज़ थी. मैं सोच रहा हूं मुझे सुमन की आवाज़ ने धोखा दिया या ख़ुद मैंने अपने आप को?<br />
<br />
लता और सुमन का कंठ एक नहीं हो सकता. वो है भी नहीं. यह समानता थी—  और समानता में ही भिन्नता है. समान का अर्थ ही है कि (एक) नहीं वहां (दो) है. तभी वहां समानता आई.<br />
<br />
यह तो क़ुदरत की ग़लती थी, उसने लता और सुमन को एक ही कालखंड में जन्म दिया और सुमन की आवाज़ का उजाला लता की आवाज़ के आलोक में कुछ मंद- सा रह गया. जैसे माइकल जैक्‍सन की मूनवॉक रोशनी में जॉर्ज माइकल की रूहानी आवाज कहीं खो गई थी. बावजूद इसके मेरे आसपास बहुत से मौसिकीपसंद हैं जो सुमन कल्‍याणपुर को लता के इक्‍वल मानते हैं और अगर में सुमन को कमतर कहता हूं मेरे साथ गाली गलौच कर बैठते हैं. मैं सिर्फ यह कहता हूं कि दोनों की अपनी-अपनी जगहें थी.<br />
<br />
मैं कभी नहीं चाहता हूं कि मेरा मन लता के कंठ को दुनिया की किसी दूसरी आवाज़ से तुलना करे. हर कंठ का रेशा अलग है. हर कंठ की पीड़ा और चीख अलग है. हर कंठ का दुख और दुख की वजह भिन्न है. आवाज़ें अपने अतीत की स्मृतियों से उपजती हैं. मेरी आवाज़ मेरे बचपन की कहानी है. आपकी आवाज़ आपके किसी अतीत की कहानी या हिस्सा है. हम आवाज़ों की समीक्षाएं नहीं कर सकते. आवाज़ ज़िंदगी है. जीवन का स्वर है. हर जीवन भिन्न है तो जीवन से उपजी ध्वनि भी भिन्न है. लता जी और सुमन जी की ज़िंदगी दो अलग- अलग सिरे, दो अलग स्मृतियां हैं. जिया अलग तो जीने का परिणाम भी अलग हैं.<br />
<br />
यह मेरी अनभिज्ञता थीं कि मैं सुनम कल्याणपुर को लता समझता रहा. मेरी सिंचित याददाश्त ने मुझे धोखा दिया— और मैं अपनी प्राचीन स्मृति के हाथों मारा गया. अब मैं कभी नहीं कहूंगा— कि मैं आवाजों के बारे में सबकुछ जानता हूं.<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 13:21:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 03 Jun 2026 13:41:21 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[My Blog]]></category>
      <authorname>नवीन रांगियाल</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[क्या विनाशकारी सिद्ध होगा इस बार एल नीन्यो?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/international-hindi-news/super-el-nino-2026-global-climate-impact-forecast-126060300020_1.html</link>
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      <description><![CDATA[El Nino 2026: मीडिया की सुर्खियों में इन दिनों डरावनी जलवायु प्रघटना "सुपर एल नीन्यो" या "मेगा एल नीन्यो" (El-Niño) की बड़ी चर्चा है। शोधकर्ताओं के लिए भी एक बात पक्की है— यह कि यह जलवायु प्रघटना जुलाई तक प्रशांत महासागर में बनने की पूरी संभावना है। ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="El Nino pattern 2026" class="imgCont" height="675" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/03/full/1780472409-4347.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="" width="1200" /></p>
	</p>
	<br />
	El Nino 2026: मीडिया की सुर्खियों में इन दिनों डरावनी जलवायु प्रघटना "सुपर एल नीन्यो" या "मेगा एल नीन्यो" (El-Niño) की बड़ी चर्चा है। शोधकर्ताओं के लिए भी एक बात पक्की है— यह कि यह जलवायु प्रघटना जुलाई तक प्रशांत महासागर में बनने की पूरी संभावना है। प्रश्न यह है कि वह वास्तव में कितनी विनाशकारी सिद्ध होगी?</p>
<p>
	 </p>
<p>
	कई संकेत बताते हैं कि जुलाई तक उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर क्षेत्र में, एल नीन्यो प्रघटना विकसित हो जाएगी। उसका पूर्वानुमान लगाने की अपनी क्षमता को बेहतर बनाने के लिए, जलवायु वैज्ञानिक हर बार भूमध्य रेखा के पास प्रशांत महासागर के एक विशिष्ट आयताकार क्षेत्र की निगरानी करते हैं। यदि इस क्षेत्र में समुद्र की सतह के नीचे बड़ी मात्रा में गर्म पानी जमा हो जाता है, तो इसे एक प्रबल संकेत माना जाता है कि एल नीन्यो आने ही वाला है।</p>
<h3>
	अगला एल नीन्यो कब आएगा? </h3>
<p>
	अमेरिकी जलवायु एजेंसी NOAA (नैश्नल ओशियानिक ऐन्ड एटमॉस्फ़िरिक एडमिनिस्ट्रेशन) का कहना है, "जून और जुलाई 2026 के बीच एल नीन्यो के बनने योग्य परिस्थितियाँ विकसित होने की संभावना 82 प्रतिशत है— और सर्दियों के मौसम के लिए, यह संभावना बढ़कर 96 प्रतिशत तक पहुँच जाती है।" जर्मनी के कार्ल्सरूहे इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (KIT) में मौसम विज्ञान के प्रोफेसर अंद्रेयास फिंक का कहना हैः "सभी कंप्यूटर मॉडल एक स्वर में, इस प्रघटना के विकसित होने की ओर ही संकेत करते हैं।" इस प्रकार— जैसा कि वैज्ञानिक पूर्वानुमानों में हमेशा कुछ अनिश्चितताएँ भी बनी रहती हैं— एल नीन्यो का शीघ्र ही आगमन, बहुत ही संभावित माना जा रहा है।</p>
<h3>
	एल नीन्यो क्या है?</h3>
<p>
	एल नीन्यो को पृथ्वी पर सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक जलवायु प्रघटना माना जाता है। उसे स्पेनी भाषा का यह नाम लैटिन (दक्षिण) अमेरिकी देश पेरू के मछुआरों ने दिया है। 19वीं सदी के आरंभ में ही, उन्होंने देखा कि कुछ खास वर्षों में, उनके तटवर्ती समुद्र का पानी असामान्य रूप से बहुत ज़्यादा गर्म हो जाता था, जिससे मछलियों का पकड़ा जाना वहाँ कम हो जाता था।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	क्योंकि यह प्रघटना पेरू में दिसंबर महीने वाले क्रिसमस पर्व के आस-पास होती थी, इसलिए मछुआरों ने इस का नाम "एल नीन्यो" रखा— जो स्पेनिश भाषा में "लड़का" या "बालक ईसा" के लिए इस्तेमाल होता है। प्रघटना के दूसरे चरण को— जब समुद्री पानी अपेक्षाकृत ठंडा होता है— "ला नीन्या" (La Niña) अर्थात "लड़की" या "कन्या" कहा जाता है। ये दोनों चरण बारी-बारी से आते हैं, ठीक वैसे ही, जैसे कोई पेंडुलम दायें-बायें झूलता है।</p>
<h3>
	एल नीन्यो कितनी बार होता है?</h3>
<p>
	एल नीन्यो लगभग हर दो से सात साल में लौटता है, और "सामान्य" स्थितियों को पूरी तरह से बदल देता है। भूमध्य रेखा के पास की तथाकथित व्यापारिक हवाएँ (trade winds) आमतौर पर सागर की सतह पर के गर्म पानी को पश्चिम की ओर धकेलते हुए, दक्षिण अमेरिका महाद्वीप से दूर ले जाती हैं। यह दिशा पृथ्वी के घूर्णन और तथाकथित "कोरिओलिस" बल से जुड़ी है। यह गर्म समुद्री पानी दक्षिण-पूर्व एशिया, ओशिनिया और ऑस्ट्रेलिया में बरसात का मौसम लाता है। इसके विपरीत, दक्षिण अमेरिका के तट के पास, समुद्र की गहराई से ऊपर उठ कर ठंडा पानी सतह पर आ जाता है; परिणामस्वरूप वहाँ स्थिति ठंडी और सूखी रहती है।</p>
<h3>
	एल नीन्यो के दौरान क्या होता है?</h3>
<p>
	एल नीन्यो के दौरान, व्यापारिक हवाएँ जब कमज़ोर पड़ जाती हैं या पूरी तरह से थम जाती हैं, तब यह जल-चक्र असंतुलित हो जाता है। जमा हुआ समुद्री गर्म पानी तेज़ी से दक्षिण अमेरिका के तट की ओर वापस बहने लगता है। इसके परिणामस्वरूप मूसलाधार वर्षा हो सकती है और बाढ़ आ सकती है। तब मछलियाँ भी ठंडे पानी की ओर चली जाती हैं। हालाँकि, प्रशांत महासागर के दूसरी तरफ़, गर्मी, सूखे और जंगलों में आग लगने का ख़तरा बढ़ जाता है। बहुत ही शक्तिशाली होने पर एल नीन्यो के प्रभाव भारत या दक्षिण अफ्रीका तक भी पहुँच सकते हैं।</p>
<h3>
	प्रबल एल नीन्यो प्रघटनाएँ</h3>
<p>
	एल नीन्यो प्रघटना की तीव्रता प्रशांत महासागर के मुख्य क्षेत्र में पानी के तापमान पर निर्भर करती है। "सामान्य" एल नीन्यो के दौरान, ये तापमान औसत से लगभग एक डिग्री सेल्सियस अधिक होते हैं। विशेष रूप से बहुत प्रबल प्रघटनाओं के दौरान— जैसा कि 1982, 1997 और 2015 में हुई प्रघटनाओं के समय हुआ— ये तापमान दो डिग्री सेल्सियस या उससे भी अधिक तक पहुँच सकते हैं। पूर्वी जर्मनी में लाइपजिक विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञान संस्थान के कार्स्टन हाउस्टाइन का इस संबंध में कहना है कि ठीक इस समय पढ़े गए तापमान "1997 में बने रिकॉर्ड के लगभग बराबर पहुँच गए हैं।"</p>
<h3>
	सुपर या मेगा एल नीन्यो</h3>
<p>
	एल नीन्यो आम तौर पर क्रिसमस के आस-पास अपने चरम पर पहुँचता है। इस समय, वैज्ञानिकों के ज़्यादातर मॉडल प्रशांत महासागर के पानी का तापमान औसत से दो डिग्री अधिक के निशान के आस-पास घूम रहा दिखाते हैं। परिणामस्वरूप, कहा जा सकता है कि 2015 के बाद अब हम संभवतः पुनः एक और "सुपर एल नीन्यो" का कटु अनुभव पाने के कगार पर हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	जर्मनी के कार्ल्सरूहे इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (KIT) में मौसम विज्ञान के प्रोफेसर अंद्रेयास फिंक का, जर्मन टेलीविज़न ARD को दिये एक इंटरव्यू में "सुपर" या "मेगा एल नीन्यो" जैसे शब्दों के बारे में कहना है, कि ऐसे शब्दों के बदले "वैज्ञानिकों के तौर पर, हम एक "मज़बूत" या "बहुत मज़बूत" अल नीन्यो की बात करना अधिक पसंद करते हैं।" ये वे श्रेणियाँ हैं जिनमें अमेरिकी जलवायु एजेंसी, NOAA भी अपने पूर्वानुमान तैयार करती है। 2026/27 का एल नीन्यो आखिरकार कितना प्रबल सिद्ध होगा, यह अभी भी अनिश्चित है। उसके "दुर्बल होने से लेकर बहुत प्रबल होने तक— सभी संभावनाएँ अभी भी बनी हुई हैं।" तब भी, एक काफ़ी ज़ोरदार प्रघटना होने के संकेत बढ़ रहे हैं— इसकी संभावना लगभग 60 प्रतिशत बताई जा रही है।</p>
<h3>
	कौन से देश अधिक प्रभावित होते हैं?</h3>
<p>
	एल नीन्यो का असर उष्णकटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र और उसके आस-पास सबसे ज़्यादा दिखाई देता है। जर्मनी के मौसम विज्ञानी अंद्रेयास फिंक का  कहना है कि दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट पर बसे इक्वाडोर और पेरू जैसे देशों को अभी से अपनी तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। हालाँकि, ऐसी तैयारियों में हमेशा काफी पैसा खर्च होता है— ख़ासकर तब और अधिक, जब यह पक्का न हो कि अंततः क्या होने वाला है। यह ठीक-ठीक बता पाना, कि कौन सी भयानक घटनाएँ सचमुच घटित होंगी और कौन सी नहीं, बहुत ही मुश्किल काम है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	एल नीन्यो के मामले में, समुद्र के साथ-साथ वायुमंडल की, यानी हवा की भी एक निर्णायक भूमिका होती है; वायुमंडल का व्यवहार पानी से भी कहीं ज़्यादा जटिल होता है। जर्मन जलवायु वैज्ञानिक होस्टाइन इस बात पर ज़ोर देते हैं कि "जहाँ एक तरफ समुद्र में होने वाले बदलावों का अनुमान अब काफी हद तक सटीकता के साथ लगाया जा सकता है, वहीं वायुमंडल के बारे में भरोसेमंद पूर्वानुमान लगाना अभी भी जल्दबाज़ी होगी।" </p>
<h3>
	2026 के एल नीन्यो का असर कैसा होगा?</h3>
<p>
	ऐसे पूर्वानुमान— जिन में यह भी शामिल हो कि इस बार एल नीन्यो वास्तव में कितना प्रबल होगा— गर्मियों के दौरान ज़्यादा सटीक होते जाते हैं। इतना तय है कि एल नीन्यो, वैश्विक औसत तापमान को और भी बढ़ा देगा, क्योंकि प्रशांत महासागर की वातावरण से गर्मी सोखने की क्षमता हो कम जाती है— जिससे औसत तापमान 0.1 से 0.2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	मानवीय गतिविधियों से पृथ्वी पहले ही काफी गर्म हो चुकी है। इसका मतलब यह है कि वर्ष 2026 या 2027, वैश्विक तापमान रिकॉर्ड दर्ज करना शुरू होने के बाद से अब तक के सबसे गर्म वर्ष बन सकते हैं। 0.1 से 0.2 डिग्री ही सही, हर अतिरिक्त डिग्री-दशांस की वृद्धि गर्मी बढ़ने में— और तद्नुसार ऐसी अतिरिक्त ऊर्जा में बदलता जाता है, जो वैश्विक जलवायु प्रणाली के भीतर जमा होती जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	गर्मी के रूप में निरंतर बढ़ती इस ऊर्जा का प्रभाव, लौट कर और भी ज़्यादा गंभीर किस्म की चरम मौसमी घटनाओं के रूप में हमारे ही सामने आता है। इन घटनाओं के जन्मदाता जलवायु परिवर्तन को रोकने, और प्राकृतिक आपदाओं को घटाने के लिए ज़रूरी है कि हम अपनी रहन-सहन और कार्यकलापों में कटौती करें। वर्ना, धरती पर हमारा बेरोक-टोक अविराम चौमुखी विकास, समय के साथ हमारे लिए ही आत्मघाती बनता जाएगा। </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 12:59:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 03 Jun 2026 13:10:41 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[International News]]></category>
      <authorname>राम यादव</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Miracle Plants: ये 9 चमत्कारी पौधे जो बदल देंगे आपकी जिंदगी: सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य का प्राकृतिक खजाना]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/vastu-fengshui/miraculous-plants-benefits-126060300005_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/03/thumb/1_1/1780463626-5336.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Lucky Plants for Home: प्रकृति ने हमें अनगिनत ऐसे पौधे दिए हैं जो केवल वातावरण को हरा-भरा और सुंदर बनाने का काम नहीं करते, बल्कि हमारे जीवन पर सकारात्मक प्रभाव भी डालते हैं। प्राचीन भारतीय परंपराओं, आयुर्वेद और वास्तु शास्त्र में कई ऐसे पौधों का ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Description of the miraculous plants of pomegranate, hibiscus, amla, basil and baheda in the picture" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/03/full/1780463626-5336.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Miraculous Plants in Hindi: </strong>चमत्कारी पौधों की शक्ति को प्राचीन काल से माना जाता रहा है। प्रकृति ने हमें कई ऐसे पौधे दिए हैं जिनमें केवल सुंदरता ही नहीं, बल्कि अद्भुत औषधीय और मानसिक लाभ भी छिपे हैं। ये चमत्कारी पौधे न सिर्फ घर की शान बढ़ाते हैं, बल्कि हमारी सेहत, मानसिक शांति और भाग्य में भी सकारात्मक बदलाव लाते हैं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vastu-fengshui/a-plant-planted-in-the-right-direction-can-change-your-luck-126060200034_1.html" target="_blank">Vastu Tips for Plantation: सही दिशा में लगाया गया पौधा बदल सकता है आपकी किस्मत</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	आयुर्वेद और फेंगशुई जैसी परंपराओं में पौधों को घर और कार्यस्थल में लगाने के लाभ विस्तार से बताए गए हैं। सही पौधा आपके जीवन में ऊर्जा का संचार कर सकता है और नकारात्मक प्रभावों को कम कर सकता है। यदि आप अपने जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य को आमंत्रित करना चाहते हैं, तो सही पौधों का चयन करना बेहद महत्वपूर्ण है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	अगर आप जीवन की खास समस्याओं से जूझ रहे हैं, तो इन पौधों को अपने घर में जगह दें:</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>1. कर्ज से मुक्ति के लिए: </strong>घर में अनार का पौधा लगाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>2. पैसों की तंगी दूर करने के लिए:</strong> नीले फूलों वाली कृष्णकांता की बेल लगाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>3. पीढ़ी दर पीढ़ी लक्ष्मी वास के लिए: </strong>घर के परिसर में बेलपत्र (बिल्व पत्र) का पेड़ लगाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>4. ग्रह दोष शांति के लिए: </strong>राहु दोष के लिए चंदन और शनि की बाधा दूर करने के लिए शमी का पौधा लगाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>5. घर के क्लेश (लड़ाई-झगड़े) मिटाने के लिए: </strong>निर्गुंडी का पौधा लगाने से घर में शांति आती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>6. तरक्की और पॉजिटिव एनर्जी के लिए:</strong> किसी विशेषज्ञ की सलाह लेकर बांस (Bamboo) का पेड़ लगाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>7. बीमारियों को दूर भगाने के लिए: </strong>तुलसी, आंवला और बहेड़ा का त्रिकोण घर में बीमारी नहीं आने देता।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>8. करियर और कानूनी सफलता: </strong>गुड़हल का पौधा लगाने से कोर्ट-कचहरी और कानून से जुड़े काम पूरे होते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>9. मान-सम्मान और तेज बुद्धि: </strong>नारियल का पेड़ मान-प्रतिष्ठा बढ़ाता है और अशोक का वृक्ष बच्चों की बुद्धि तेज करता है।<br />
	<br />
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vastu-fengshui/vastu-tips-kaise-pahne-kapde-kaise-ho-jute-aur-baal-126052100045_1.html" target="_blank">Vastu Lifestyle Tips: वास्तु के अनुसार कपड़े, जूते और हेयरकट चुनें, बदल सकती है किस्मत</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 11:45:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 03 Jun 2026 12:30:43 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Vastu Fengshui]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Vastu Tips for Plantation: सही दिशा में लगाया गया पौधा बदल सकता है आपकी किस्मत]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/vastu-fengshui/a-plant-planted-in-the-right-direction-can-change-your-luck-126060200034_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/vastu-fengshui/a-plant-planted-in-the-right-direction-can-change-your-luck-126060200034_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/03/thumb/1_1/1780469900-4928.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Vastu Shastra for Trees : घर की सुंदरता बढ़ाने वाले पेड़-पौधे केवल हरियाली और ताजगी ही नहीं देते, बल्कि वास्तु शास्त्र के अनुसार वे घर की सकारात्मक और नकारात्मक ऊर्जा को भी प्रभावित करते हैं। इसीलिए पौधारोपण से पहले यह जानना जरूरी है कि कौन सा पौधा ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p>
		<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
			<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
				<img align="center" alt="Picture giving information about tree plantation according to Vastu Shastra" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/03/full/1780469900-4928.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
		</p>
	</p>
	<p>
		<strong>Vastu Tips for Plants: </strong>घर की सुंदरता बढ़ाने वाले पेड़-पौधे सिर्फ हरियाली ही नहीं देते, बल्कि वास्तु शास्त्र के अनुसार वे आपके जीवन पर भी सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। माना जाता है कि यदि सही दिशा में उचित वृक्ष और पौधे लगाए जाएं तो घर में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य का वास होता है, जबकि गलत दिशा में लगाए गए पेड़ आर्थिक, मानसिक और पारिवारिक समस्याओं का कारण बन सकते हैं। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि किस दिशा में कौन सा पौधा शुभ माना गया है और किन वृक्षों को घर के आसपास लगाने से बचना चाहिए।  </p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		आइए जानते हैं पौधारोपण से जुड़े महत्वपूर्ण वास्तु नियम, जो आपके घर की सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।</h3>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		1. पौधारोपण का शुभ समय</h3>
	<p>
		 </p>
	<p>
		वास्तु और ज्योतिष के अनुसार उत्तरा, स्वाति, हस्त, रोहिणी और मूल नक्षत्र पौधारोपण के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं। यदि आपको अपना जन्म नक्षत्र ज्ञात है तो उसी के अनुसार पौधा लगाना अधिक लाभकारी माना जाता है। इसके अलावा शुक्ल पक्ष में पौधारोपण करना श्रेष्ठ रहता है। शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेकर कृष्ण पक्ष की सप्तमी तक का समय वृक्षारोपण के लिए अनुकूल माना गया है।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		2. मुख्य द्वार के सामने न लगाएं बड़े पेड़</h3>
	<p>
		 </p>
	<p>
		घर के मुख्य प्रवेश द्वार के ठीक सामने कोई भी पौधा या वृक्ष नहीं लगाना चाहिए। बड़े वृक्षों को मुख्य द्वार की ऊंचाई से कम से कम तीन गुना दूरी पर लगाना बेहतर माना गया है। साथ ही सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे के बीच वृक्ष की छाया घर पर नहीं पड़नी चाहिए। घर के उत्तर और पूर्व भाग में हमेशा छोटे और कम ऊंचाई वाले पौधे लगाने की सलाह दी जाती है।</p>
	<h3>
		 </h3>
	<h3>
		3. पौधों के रोपण और स्थानांतरण का नियम</h3>
	<p>
		 </p>
	<p>
		विशेषज्ञों के अनुसार किसी पौधे को सीधे जमीन में लगाने के बजाय पहले गमले में विकसित करना बेहतर होता है। इससे उसकी जड़ें मजबूत बनती हैं और विकास भी अच्छा होता है। यदि किसी कारणवश किसी वृक्ष को हटाना आवश्यक हो, तो माघ या भाद्रपद माह को उपयुक्त माना गया है। साथ ही एक वृक्ष हटाने पर नया पौधा लगाने का संकल्प अवश्य लेना चाहिए।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		4. ग्रहों से जुड़ा है वृक्षों का संबंध</h3>
	<p>
		 </p>
	<p>
		वास्तु मान्यताओं के अनुसार विभिन्न प्रकार के वृक्षों पर अलग-अलग ग्रहों का प्रभाव माना गया है। मजबूत और ऊंचे वृक्ष सूर्य से जुड़े होते हैं, जबकि दुग्धयुक्त वृक्षों पर चंद्रमा का प्रभाव माना जाता है। बेल और लताओं पर शुक्र और चंद्र का प्रभाव रहता है। झाड़ियों पर राहु-केतु तथा सूखे और कमजोर वृक्षों पर शनि का प्रभाव माना गया है। फलदार वृक्ष बृहस्पति और बिना फल वाले वृक्ष बुध से संबंधित माने जाते हैं।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		5. दिशाओं और ग्रहों का संबंध</h3>
	<p>
		 </p>
	<p>
		वास्तु के अनुसार पूर्व दिशा सूर्य, उत्तर दिशा बृहस्पति, दक्षिण दिशा मंगल और पश्चिम दिशा शनि से संबंधित मानी जाती है। इसी आधार पर वृक्षों और पौधों के चयन की सलाह दी जाती है।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		6. पूर्व दिशा में कौन से पौधे लगाएं?</h3>
	<p>
		 </p>
	<p>
		पूर्व दिशा को सूर्य की दिशा माना जाता है। इस दिशा में तुलसी, गुलाब, चमेली, बेला, चंपा और दुर्वा जैसे पौधे लगाना शुभ माना गया है। मान्यता है कि इससे धन, सुख और संतान से जुड़े शुभ फल प्राप्त होते हैं। वहीं पीपल और बड़े फलदार वृक्षों को इस दिशा में लगाने से बचने की सलाह दी जाती है।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		7. पश्चिम दिशा के लिए वास्तु नियम</h3>
	<p>
		 </p>
	<p>
		पश्चिम दिशा में पीपल का वृक्ष शुभ माना गया है, जबकि कांटेदार पौधे शत्रुता और तनाव बढ़ाने वाले माने जाते हैं। इस दिशा में नारियल और अशोक जैसे ऊंचे वृक्ष लगाना लाभकारी बताया गया है।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		8. उत्तर दिशा में कौन से पौधे शुभ हैं?</h3>
	<p>
		 </p>
	<p>
		उत्तर दिशा में तुलसी, केला, कैथ और पाकड़ जैसे पौधे शुभ फल देने वाले माने गए हैं। माना जाता है कि ये घर में सुख, शांति और समृद्धि लाते हैं। हालांकि इस दिशा में नींबू और गूलर के वृक्ष लगाने से बचने की सलाह दी जाती है।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		9. ईशान कोण का महत्व</h3>
	<p>
		 </p>
	<p>
		ईशान कोण को सबसे पवित्र दिशा माना जाता है। यहां तुलसी, आंवला, औषधीय पौधे, बेल और हल्के फूलों वाले पौधे लगाना शुभ माना गया है। यह दिशा आध्यात्मिक ऊर्जा और सकारात्मकता को बढ़ाने वाली मानी जाती है।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		10. दक्षिण दिशा में कौन से वृक्ष लगाएं?</h3>
	<p>
		 </p>
	<p>
		दक्षिण दिशा में नीम, अशोक, नारियल, खैर और गुलाब के पौधे शुभ माने गए हैं। वास्तु मान्यता के अनुसार दक्षिण दिशा में नीम का वृक्ष लगाने से रोग और संकटों से राहत मिलती है। वहीं कांटेदार पौधों और दुग्धयुक्त वृक्षों से बचने की सलाह दी जाती है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		वास्तु शास्त्र की मान्यता के अनुसार सही दिशा में लगाए गए वृक्ष सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और उन्नति का मार्ग प्रशस्त करते हैं, जबकि गलत स्थान पर लगे पेड़-पौधे जीवन में आर्थिक, मानसिक और पारिवारिक परेशानियों का कारण बन सकते हैं। </p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।</p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 03 Jun 2026 10:30:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 03 Jun 2026 12:31:22 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Vastu Fengshui]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[पिंडली के दर्द से छुटकारा पाने के 5 कारगर तरीके जानें]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/health-care/how-to-get-rid-of-calf-pain-learn-5-useful-things-126060200046_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/29/thumb/1_1/1780051529-0118.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Calf Pain Relief Tips: पिंडलियों में दर्द (Calf Pain) एक बहुत ही आम समस्या है। यह दर्द मांसपेशियों में खिंचाव, थकान, शरीर में पानी की कमी या पोषक तत्वों की कमी के कारण हो सकता है। कभी-कभी दिनभर की भागदौड़ या गलत फुटवियर भी इसका कारण बनते हैं।]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt=" Photo showing ways to relieve calf pain" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/29/full/1780051529-0118.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
</p>
<p>
	<strong>Calf Pain: </strong>पिंडलियों में दर्द एक बहुत ही आम समस्या है। यह दर्द मांसपेशियों में खिंचाव, थकान, शरीर में पानी की कमी या पोषक तत्वों की कमी के कारण हो सकता है। कभी-कभी दिनभर की भागदौड़ या गलत फुटवियर भी इसका कारण बनते हैं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/thick-blood-126033100005_1.html" target="_blank">health care tips: खून गाढ़ा होने के प्रमुख लक्षण, रोग, कारण और उपचार</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अगर आप भी पिंडलियों के दर्द से परेशान हैं, तो राहत पाने के लिए ये 5 बेहद काम की बातें नोट कर लें:</strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. &#39;R.I.C.E.&#39; फॉर्मूला अपनाएं</h3>
<p>
	मांसपेशियों के दर्द और खिंचाव से तुरंत राहत पाने के लिए मेडिकल साइंस में यह फॉर्मूला सबसे बेस्ट माना जाता है:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>R - Rest (आराम): </strong>दर्द होने पर पैरों को आराम दें और भारी वजन उठाने या ज्यादा चलने से बचें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>I - Ice (बर्फ की सिकाई):</strong> पिंडलियों पर 15-20 मिनट के लिए बर्फ को कपड़े में लपेटकर सेकें। यह सूजन और दर्द को तुरंत कम करता है। (ध्यान रखें, अगर दर्द पुरानी जकड़न के कारण है तो गर्म सिकाई करें, लेकिन अचानक उठे दर्द या मोच पर हमेशा बर्फ लगाएं)।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>C - Compression (पट्टिका):</strong> पैर पर थोड़ा सा दबाव बनाने के लिए क्रेप बैंडेज (किन्शियोलॉजी टेप) बांधें, इससे मांसपेशियों को सपोर्ट मिलता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>E - Elevate (पैर ऊपर रखें):</strong> बैठते या लेटते समय पैरों के नीचे 1-2 तकिए रख लें, ताकि पैर दिल के स्तर से थोड़े ऊपर रहें। इससे ब्लड सर्कुलेशन सुधरता है और दर्द कम होता है।</p>
<h3>
	 </h3>
<h3>
	2. सरसों या तिल के तेल की मालिश</h3>
<p>
	हल्के गुनगुने तेल से मालिश करने से पिंडलियों की जकड़ी हुई नसें खुलती हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>तरीका:</strong> सरसों के तेल में 2-3 कली लहसुन की पका लें। जब तेल गुनगुना रह जाए, तो इससे पिंडलियों की नीचे से ऊपर की ओर (एड़ी से घुटने की तरफ) हल्के हाथों से मालिश करें। मालिश कभी भी बहुत जोर से नीचे की तरफ न करें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. सेंधा नमक (Epsom Salt) के पानी की सिकाई</h3>
<p>
	सेंधा नमक में भारी मात्रा में मैग्नीशियम होता है, जो त्वचा के जरिए एब्जॉर्ब होकर मांसपेशियों को तुरंत रिलैक्स करता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>तरीका: </strong>एक बाल्टी या टब में गुनगुना पानी लें और उसमें 2 चम्मच सेंधा नमक डाल लें। इस पानी में अपने पैरों को 15 से 20 मिनट के लिए डुबोकर रखें। इससे पैरों की सारी थकान और दर्द गायब हो जाएगा।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. स्ट्रेचिंग और हल्का वॉक</h3>
<p>
	दर्द के डर से पैरों को पूरी तरह जाम न करें। हल्की स्ट्रेचिंग मांसपेशियों के लैक्टिक एसिड (जिससे दर्द होता है) को रिलीज करने में मदद करती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	दीवार का सहारा लेकर स्ट्रेचिंग: दीवार से थोड़ी दूरी पर खड़े होकर अपने हाथ दीवार पर टिकाएं। एक पैर आगे और दर्द वाला पैर पीछे रखें। पीछे वाले पैर की एड़ी को जमीन पर दबाते हुए आगे की तरफ झुकें। इससे पिंडली की नसें खिंचेंगी और आराम मिलेगा।</p>
<h3>
	 </h3>
<h3>
	5. डाइट में शामिल करें पोटैशियम और मैग्नीशियम</h3>
<p>
	कई बार शरीर में जरूरी मिनरल्स और पानी की कमी से पिंडलियों में &#39;क्रैम्प्स&#39; (बायत/ऐंठन) आने लगते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>हाइड्रेशन: </strong>दिनभर में कम से कम 8-10 ग्लास पानी पिएं। नारियल पानी या नींबू पानी का सेवन करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>पोषक तत्व: </strong>अपनी डाइट में केला, सेब, पालक, नट्स (बादाम-अखरोट) और दूध-दही शामिल करें। इनमें मौजूद पोटैशियम, मैग्नीशियम और कैल्शियम नसों के दर्द को जड़ से खत्म करते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	कब जाएं डॉक्टर के पास?</h3>
<p>
	अगर आपकी पिंडलियों में दर्द के साथ-साथ तेज सूजन है, पैर छूने पर बहुत गर्म लग रहा है या वह हिस्सा लाल/नीला पड़ गया है, तो यह DVT (डीप वेन थ्रोम्बोसिस) या ब्लड क्लॉट का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में घरेलू उपायों के बजाय तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।<br />
	<br />
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/healthy-food/sprouts-chaat-5-health-benefits-126060100047_1.html" target="_blank">पोहा, समोसा खाकर हो गए हैं बोर तो नाश्ते में खाएं स्प्राउट्स चाट, 5 फायदे: Healthy Breakfast Ideas</a></strong></p>
</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 17:09:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 02 Jun 2026 17:10:27 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[health care]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[विश्व पर्यावरण दिवस पर लें धरती को हरा-भरा बनाने का सच्चा संकल्प]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/environment-day-special/on-world-environment-day-take-a-true-pledge-to-make-the-earth-green-126060200031_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/environment-day-special/on-world-environment-day-take-a-true-pledge-to-make-the-earth-green-126060200031_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/02/thumb/1_1/1780394289-5206.jpg"/>
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      <description><![CDATA[World Environment Day: पर्यावरण हमारे जीवन का आधार है, लेकिन आज मानव गतिविधियों के कारण प्रकृति का संतुलन बिगड़ता जा रहा है। शुद्ध वायु, स्वच्छ जल, पेड़-पौधे, मिट्टी और प्राकृतिक संसाधन सभी पर्यावरण का हिस्सा हैं। इनके बिना जीवन संभव नहीं है। ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Picture depicting the resolution to save the earth and life on World Environment Day" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/02/full/1780394289-5206.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>World Environment Day 2026: </strong>हर साल 5 जून को मनाया जाने वाला &#39;विश्व पर्यावरण दिवस&#39; हमें याद दिलाता है कि यह धरती हमारा इकलौता घर है और इसकी हरियाली को बचाना हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य है। साल 2026 में, जब कंक्रीट के जंगल लगातार बढ़ते जा रहे हैं और मौसम का मिजाज बदल रहा है, तब सिर्फ एक दिन का उत्सव मनाना काफी नहीं है। यदि पर्यावरण संतुलित रहेगा तो पृथ्वी पर जीवन सुरक्षित रहेगा। इस बार हमें अपनी सोच और आदतों को बदलने का एक सच्चा &#39;संकल्प&#39; लेना होगा।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/environment-day-special/world-environment-day-message-to-save-the-earth-126053000043_1.html" target="_blank">विश्व पर्यावरण दिवस 2026: &#39;कमिटमेंट नहीं, अब एक्शन का समय&#39;, यही है धरती बचाने का सबसे बड़ा संदेश</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	आइए जानते हैं कि इस पर्यावरण दिवस पर हम अपनी धरती को फिर से सुंदर और हरा-भरा बनाने के लिए क्या संकल्प ले सकते हैं:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. &#39;एक पौधा, एक संकल्प&#39; (हर खास मौके पर वृक्षारोपण)</h3>
<p>
	हम अक्सर पर्यावरण दिवस पर पौधे तो लगाते हैं, लेकिन बाद में उनकी देखभाल करना भूल जाते हैं। इस साल यह संकल्प लें:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अपने या परिवार के सदस्यों के जन्मदिन, शादी की वर्षगांठ या किसी भी शुभ अवसर पर कम से कम एक पौधा जरूर लगाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	पौधे को सिर्फ लगाएं नहीं, बल्कि अगले 3 वर्षों तक उसकी एक बच्चे की तरह देखभाल करने की जिम्मेदारी भी लें, ताकि वह एक मजबूत पेड़ बन सके।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. &#39;शहरी हरियाली&#39; (बालकनी और छतों को बनाएं हरा-भरा)</h3>
<p>
	अगर आप शहरों में रहते हैं और आपके पास जमीन की कमी है, तो भी आप धरती को हरा-भरा बनाने में योगदान दे सकते हैं:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अपनी बालकनी, खिड़की या छत पर छोटे-छोटे गमले रखें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	हवा को शुद्ध करने वाले (Air-Purifying) पौधे जैसे—तुलसी, मनी प्लांट, स्नेक प्लांट, एलोवेरा और स्पाइडर प्लांट लगाएं। यह आपके घर के अंदर की हवा को साफ रखेंगे।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. &#39;जीरो वेस्ट&#39; और प्लास्टिक मुक्त जीवन का संकल्प</h3>
<p>
	हरियाली तभी बढ़ेगी जब हम धरती को कचरे और प्लास्टिक के बोझ से मुक्त करेंगे:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>कच्चा कचरा, सूखी खाद: </strong>अपने रसोईघर के गीले कचरे (सब्जियों और फलों के छिलकों) को फेंकने के बजाय उससे घर पर ही जैविक खाद तैयार करें। इसी खाद को अपने पौधों में डालें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>प्लास्टिक को ना: </strong>बाजार जाते समय कपड़े का थैला साथ ले जाने का संकल्प लें। प्लास्टिक की थैलियों और सिंगल-यूज प्लास्टिक का पूरी तरह बहिष्कार करें।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/environment-day-special/essay-on-world-environment-day-2026-126052900042_1.html" target="_blank">World Environment Day Essay: विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष निबंध</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. पानी की बचत का संकल्प (जल है तो जीवन है)</h3>
<p>
	बिना पानी के किसी भी हरियाली की कल्पना नहीं की जा सकती। गिरते भूजल स्तर को बचाने के लिए यह संकल्प लें:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	घर में वॉटर प्यूरीफायर (RO) से निकलने वाले बेकार पानी को बाल्टी में इकट्ठा करेंगे और उसका उपयोग पौधों में डालने या पोछा लगाने में करेंगे।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	बारिश के पानी को बचाने (Rainwater Harvesting) के छोटे-छोटे प्रयास अपने घरों में शुरू करेंगे।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. अपनी &#39;कार्बन फुटप्रिंट&#39; को कम करने का संकल्प</h3>
<p>
	प्रदूषण को कम करके ही हम पौधों को एक स्वस्थ वातावरण दे सकते हैं:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	कम दूरी के लिए पैदल चलने या साइकिल का उपयोग करने का संकल्प लें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	सार्वजनिक वाहनों (बस या मेट्रो) या कारपूलिंग का अधिक से अधिक इस्तेमाल करें।</p>
<p>
	 </p>
<h2>
	संकल्प पत्र: आज ही से शुरुआत करें</h2>
<h3>
	&#39;आज इस विश्व पर्यावरण दिवस पर, मैं यह संकल्प लेता/लेती हूं कि मैं प्रकृति के संसाधनों का सम्मान करूंगा/करूंगी। मैं अपनी ज़रूरतों को सीमित रखूंगा/रखूंगी और अपनी धरती मां को फिर से हरा-भरा और स्वस्थ बनाने के लिए हर संभव प्रयास करूंगा/करूंगी।&#39;</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	याद रखें, बदलाव की शुरुआत हमेशा एक छोटे से कदम से होती है। आपका लगाया हुआ एक पौधा और आपकी एक सुधरी हुई आदत आने वाली पीढ़ियों को एक बेहतर और सांस लेने योग्य भविष्य दे सकती है। इस 5 जून को आइए केवल बातें नहीं, बल्कि काम करके दिखाएं!</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/environment-day-special/poem-on-earth-and-environment-if-only-nature-could-speak-126060100061_1.html" target="_blank">पृथ्वी और पर्यावरण पर कविता: काश प्रकृति भी बोल पाती</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 15:35:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 02 Jun 2026 15:31:16 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[environment special]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[jharkhand recipe: झारखंड का पारंपरिक पकवान ओकोपोको, जानिए कैसे बनता है यह व्यंजन]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/indian-food-recipe/okopoko-recipe-126060200009_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/02/thumb/1_1/1780380585-5184.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/02/thumb/1_1/1780380585-5184.jpg</image>
      <description><![CDATA[jharkhand traditional sweet: झारखंड में बनाया जाने वाला पारंपरिक पकवान 'ओकोपोको' आज भी वहां की पुरानी संस्कृति का हिस्सा है। इसका देसी स्वाद सभी को भाता है। यह झारखंड की सिर्फ एक मिठाई न होकर यहां की परंपरा, गांव की महक और घरेलू पकवान के बेहतरीन ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Pictured is Okpoko, a traditional dish from Jharkhand" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/02/full/1780380585-5184.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>jharkhand recipe:</strong>झारखंड की पारंपरिक खानपान ओकोपोको बनाने के लिए आपको बिल्कुल भी ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती है। आपको बता दें कि इसे बनाने के लिये गेहूं का आटा मुख्य रूप से इस्तेमाल किया जाता है, उसके बाद गुड़ और घी की आवश्यकता होती है। साथ ही इसे बेहद कम समय में घर में तैयार कर सकते हैं। </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	कैसे बनाएं ओकोपोको</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सामग्री: गेहूं का आटा, गुड़ और घी।</strong></p>
<h3>
	 </h3>
<h3>
	विधि: </h3>
<p>
	 </p>
<p>
	* सबसे पहले एक बड़े बर्तन या परात में आटा लें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	* अब गुड़ को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ लें या हल्का कूटकर बारीक करके आटे में मिला दें अथवा गुड़ को हल्का गर्म करके पिघलाकर आटे में डालें ताकि वह आसानी से आटे में मिल जाए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	* अब गुड़ की नमी और घी मिलाकर इनकी मदद से पूरा मिश्रण तैयार कर लें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	* फिर उक्त मिश्रण के छोटे-छोटे गोले बनाकर रख लें, आप चाहे तो गोल की जगह लंबा या चपटा आकार भी दे सकते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	* इसके बाद कढ़ाई में घी या तेल, जो भी आप इस्तेमाल करना चाहे, उसे गर्म करके ओकोपोको को धीमी आंच पर सुनहरा भूरा होने तक पका लें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	* अब अच्छी तरह कुरकुरा होने पर एक बर्तन में निकालकर ठंडा कर लें। इसका अंदर का हिस्सा मीठा व नरम तथा बाहरी परत हल्की कुरकुरी होती है। बता दें कि ओकोपोको ठंडा होने के बाद ही ज्यादा स्वादिष्ट लगता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	* देसी स्वाद और झारखंड की पुरानी संस्कृति की याद दिलाता पारंपरिक पकवान ओकोपोको को सभी बड़े चाव से खाते हैं। इसे आप चाय के साथ भी खा सकते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>नोट: </strong>इसमें सबसे जरूरी बात यह होती है कि इसे बनाते समय पानी बिल्कुल नहीं मिलाया जाता है, बल्कि दोनों हाथों से अच्छी तरह आटा और गुड़ को मसलते हुए मिलाकर तैयार किया जाता है। <br />
	<br />
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।</p>
</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 12:01:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 02 Jun 2026 11:45:27 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[indian food]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[जब रास्ते बंद दिखें… समझ लो किस्मत नया दरवाज़ा खोल रही है]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/motivational/when-the-path-seems-closed-understand-that-destiny-is-opening-a-new-door-126060200006_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/motivational/when-the-path-seems-closed-understand-that-destiny-is-opening-a-new-door-126060200006_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2025-12/23/thumb/1_1/1766487694-8402.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2025-12/23/thumb/1_1/1766487694-8402.jpg</image>
      <description><![CDATA[अक्सर हम अपनी असफलताओं को अपनी कमजोरी समझ लेते हैं, जबकि असल में वही असफलताएं हमें सही दिशा दिखाने का काम करती हैं। यदि हर प्रयास तुरंत सफल हो जाए, तो हम कभी यह नहीं जान पाएंगे कि हमारे अंदर और कितना सामर्थ्य छुपा हुआ है। कठिन समय ही हमें अपने भीतर ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="Picture shows a man meditating on how to get rid of a stressful life" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2025-12/23/full/1766487694-8402.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="life tenshion" /></p>
</p>
<p>
	कभी-कभी जीवन में ऐसे क्षण आते हैं जब हमें लगता है कि अब आगे बढ़ने का कोई रास्ता नहीं बचा है। चारों तरफ से निराशा घेर लेती है और मन बार-बार यही कहता है कि शायद अब सब खत्म हो गया। ऐसी स्थिति में इंसान अपनी ही नजरों में कमजोर पड़ने लगता है और उसे अपने प्रयास भी व्यर्थ लगने लगते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	लेकिन यदि हम थोड़ी शांति से सोचें, तो समझ में आता है कि हर बंद रास्ता वास्तव में अंत नहीं होता। जीवन कभी भी हमें बिना कारण रोके नहीं रखता, बल्कि वह हमें यह संकेत देता है कि जिस दिशा में हम जा रहे थे, वहां अब रुकना जरूरी है। यह रुकावट हमें किसी नई दिशा की ओर मोड़ने की प्रक्रिया का हिस्सा होती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अक्सर हम अपनी असफलताओं को अपनी कमजोरी समझ लेते हैं, जबकि असल में वही असफलताएं हमें सही दिशा दिखाने का काम करती हैं। यदि हर प्रयास तुरंत सफल हो जाए, तो हम कभी यह नहीं जान पाएंगे कि हमारे अंदर और कितना सामर्थ्य छुपा हुआ है। कठिन समय ही हमें अपने भीतर झांकने और खुद को समझने का अवसर देता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	जीवन का यह अटल नियम है कि जब तक हम अपने आरामदायक क्षेत्र (Comfort Zone) से बाहर नहीं निकलते, तब तक वास्तविक प्रगति संभव नहीं होती। जैसे ही परिस्थितियां कठिन होती हैं, हमें अपनी सोच बदलनी पड़ती है और यही बदलाव धीरे-धीरे हमें मजबूत बनाता है। इसलिए जब भी आपको लगे कि सब कुछ आपके खिलाफ जा रहा है, तो यह समझिए कि जीवन आपको एक नई दिशा में ढाल रहा है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	इस बात को एक सरल उदाहरण से समझा जा सकता है। एक युवक बार-बार असफल हो रहा था और धीरे-धीरे उसने प्रयास करना भी छोड़ दिया। एक दिन वह बहुत निराश होकर बाहर निकला और रास्ते में उसने एक छोटा सा पौधा देखा जो पत्थर के नीचे से निकलने की कोशिश कर रहा था। उस दृश्य ने उसे यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि यदि एक छोटा सा पौधा इतनी बाधाओं के बीच भी आगे बढ़ सकता है, तो वह खुद क्यों हार मान रहा है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	उसने उसी दिन यह तय किया कि वह परिस्थितियों को दोष देने के बजाय खुद को बदलने की कोशिश करेगा। उसने अपनी गलतियों को समझा, अपने प्रयासों को बेहतर किया और धीरे-धीरे उसकी स्थिति बदलने लगी। कुछ समय बाद वही व्यक्ति सफल हो गया, जिसे कभी लोग असफल समझते थे।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	यह अनुभव हमें यह समझाता है कि जब ऊपर से रास्ते बंद दिखाई देते हैं, तब वास्तव में हमारे लिए कोई नया रास्ता तैयार हो रहा होता है। समस्या यह नहीं होती कि रास्ता नहीं है, बल्कि यह होती है कि हम उसे देखने के लिए तैयार नहीं होते। जैसे ही हमारी सोच बदलती है, हमें वही रास्ता दिखाई देने लगता है जो पहले नजर नहीं आता था।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	जीवन हमें बार-बार परखता है और यह देखता है कि हम कितनी दूर तक चलने के लिए तैयार हैं। हर कठिनाई एक प्रश्न की तरह होती है, जो हमसे पूछती है कि क्या हम वास्तव में अपने लक्ष्य के लिए गंभीर हैं। जो लोग इन प्रश्नों का सामना करते हैं, वही आगे बढ़ते हैं और अपनी पहचान बनाते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	किस्मत भी उसी का साथ देती है, जो खुद को तैयार करता है। वह अचानक कोई चमत्कार नहीं करती, बल्कि धीरे-धीरे हमें उस योग्य बनाती है कि हम आने वाले अवसरों को पहचान सकें। जब हम गिरते हैं, टूटते हैं और फिर उठते हैं, तब हमारे अंदर वह परिपक्वता आती है जो सफलता के लिए आवश्यक होती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	ऐसे समय में सबसे महत्वपूर्ण बात यह होती है कि हम खुद पर विश्वास बनाए रखें। यदि हम खुद ही हार मान लेते हैं, तो कोई भी हमारी मदद नहीं कर सकता। लेकिन यदि हम परिस्थिति कितनी भी कठिन क्यों न हो, अपने प्रयास जारी रखते हैं, तो धीरे-धीरे रास्ते अपने आप खुलने लगते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	इसलिए जब भी जीवन में ऐसा लगे कि अब सब खत्म हो गया है, तो खुद को थोड़ा समय दीजिए और स्थिति को समझने की कोशिश कीजिए। कई बार जो हमें अंत दिखाई देता है, वही वास्तव में एक नई शुरुआत का द्वार होता है। बस हमें धैर्य और विश्वास के साथ आगे बढ़ते रहना होता है। अंत में यही कहना उचित होगा कि जीवन कभी भी हमें रोकने के लिए नहीं, बल्कि आगे बढ़ाने के लिए काम करता है। जब रास्ते बंद दिखते हैं, तो घबराने के बजाय यह समझने की जरूरत होती है कि शायद अब कुछ नया और बेहतर हमारे सामने आने वाला है। यही सोच हमें निराशा से बाहर निकालकर एक नई दिशा की ओर ले जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अंततः जब भी आपको लगे कि अब आगे कोई रास्ता नहीं बचा, तो यह मानकर चलिए कि जीवन आपको किसी नई राह के लिए तैयार कर रहा है। उस समय धैर्य बनाए रखना और खुद पर विश्वास रखना ही सबसे बड़ी ताकत होती है। यही विश्वास एक दिन आपके लिए वह दरवाज़ा खोलता है, जिसकी आपने कभी कल्पना भी नहीं की होती।<br />
	<br />
	<p>
		(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है...)</p>
	<p>
		 </p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 09:45:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 02 Jun 2026 10:40:15 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Motivational]]></category>
      <authorname>सुनील चौरसिया</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[पृथ्वी और पर्यावरण पर कविता: काश प्रकृति भी बोल पाती]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/environment-day-special/poem-on-earth-and-environment-if-only-nature-could-speak-126060100061_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/environment-day-special/poem-on-earth-and-environment-if-only-nature-could-speak-126060100061_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/01/thumb/1_1/1780313926-5587.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/01/thumb/1_1/1780313926-5587.jpg</image>
      <description><![CDATA[Poem on Environment : काश पेड़ चीख पाते तो शायद कुल्हाड़ियों की धार इतनी निर्दयी न होती वे कहते यह धूप केवल तुम्हारी नहीं हमारी पत्तियों की भी है यह आकाश हमारे घोंसलों का भी घर है और यह धरती सिर्फ़ मनुष्यों की जागीर नहीं। काश नदियां भी चुन पातीं ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="A picture that inspires us to save the earth, environment and nature and human life" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/01/full/1780313926-5587.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	काश</p>
<p>
	पेड़ चीख पाते</p>
<p>
	तो शायद</p>
<p>
	कुल्हाड़ियों की धार</p>
<p>
	इतनी निर्दयी न होती</p>
<p>
	वे कहते</p>
<p>
	यह धूप केवल तुम्हारी नहीं</p>
<p>
	हमारी पत्तियों की भी है</p>
<p>
	यह आकाश</p>
<p>
	हमारे घोंसलों का भी घर है</p>
<p>
	और यह धरती</p>
<p>
	सिर्फ़ मनुष्यों की जागीर नहीं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	काश</p>
<p>
	नदियां भी चुन पातीं सरकार</p>
<p>
	तो वे उन हाथों को कभी न चुनतीं</p>
<p>
	जो उनके जल में</p>
<p>
	कारखानों का ज़हर घोलते हैं</p>
<p>
	वे चुनतीं</p>
<p>
	उन आंखों को</p>
<p>
	जो उन्हें मां की तरह देखतीं</p>
<p>
	न कि</p>
<p>
	नालों की तरह उपयोग करतीं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	काश! गाय कह पाती</p>
<p>
	कि भूख</p>
<p>
	धर्म नहीं देखती</p>
<p>
	और स्नेह</p>
<p>
	सड़कों पर बेसहारा नहीं छोड़ा जाता</p>
<p>
	वह पूछती जिसे तुम माता कहते हो</p>
<p>
	उसी को प्लास्टिक खाते हुए</p>
<p>
	कैसे देख लेते हो निस्पंद होकर?</p>
<p>
	 </p>
<p>
	काश</p>
<p>
	बेटियां कह पातीं</p>
<p>
	कि वे कोई वस्तु नहीं</p>
<p>
	जिसे परंपराओं के संदूक में रखकर</p>
<p>
	एक दिन</p>
<p>
	किसी और घर भेज दिया जाए</p>
<p>
	वे कहतीं</p>
<p>
	पिता</p>
<p>
	मुझे विदा मत करो</p>
<p>
	मुझे विश्वास दो</p>
<p>
	कि यह घर</p>
<p>
	मेरे सपनों का भी उतना ही है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	काश</p>
<p>
	जंगल भी वोट डाल सकते</p>
<p>
	तो वे</p>
<p>
	अपने विनाश पर हस्ताक्षर करने वालों को</p>
<p>
	कभी सत्ता तक न पहुंचने देते</p>
<p>
	वे चुनते</p>
<p>
	उन हाथों को</p>
<p>
	जो वृक्षों को</p>
<p>
	लकड़ी नहीं</p>
<p>
	जीवन मानते।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	काश</p>
<p>
	पंछी भी कह पाते</p>
<p>
	कुछ शाखाएं</p>
<p>
	हमारे लिए भी छोड़ दो</p>
<p>
	तुम्हारे महलों की ऊंचाई से अधिक</p>
<p>
	महत्वपूर्ण हैं</p>
<p>
	हमारे छोटे छोटे घोंसले।</p>
<p>
	पर मनुष्य</p>
<p>
	अपनी प्रगति के शोर में</p>
<p>
	इतना बहरा हो चुका है</p>
<p>
	कि उसे</p>
<p>
	अब चिड़ियों की चहचहाहट भी</p>
<p>
	संगीत नहीं</p>
<p>
	व्यवधान लगती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	काश</p>
<p>
	पर्वत भी चुनाव में खड़े होते</p>
<p>
	तो वे बताते</p>
<p>
	कि स्थिर रहना क्या होता है</p>
<p>
	कैसे सहना पड़ता है</p>
<p>
	बारूद का अपमान</p>
<p>
	खनन की यातना</p>
<p>
	और विकास के नाम पर</p>
<p>
	अपनी छाती का चीरना।</p>
<p>
	वे कहते</p>
<p>
	ऊंचा होना</p>
<p>
	अहंकार नहीं होता</p>
<p>
	सहनशीलता होता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	यह पृथ्वी</p>
<p>
	अब भी</p>
<p>
	मनुष्यों से कम घायल नहीं</p>
<p>
	बस उसका मौन</p>
<p>
	हमारी संवेदनहीनता से बड़ा है।</p>
<p>
	हमने</p>
<p>
	हर उस चीज को</p>
<p>
	मताधिकार से वंचित रखा</p>
<p>
	जिससे हमारा जीवन बचा है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	पेड़</p>
<p>
	नदियां</p>
<p>
	पर्वत</p>
<p>
	जंगल</p>
<p>
	पशु</p>
<p>
	पक्षी</p>
<p>
	और बेटियां</p>
<p>
	 </p>
<p>
	सभी</p>
<p>
	हमारे निर्णयों का भार ढोते हैं</p>
<p>
	पर निर्णय लेने का अधिकार</p>
<p>
	सिर्फ़ मनुष्य के पास है।</p>
<p>
	और शायद</p>
<p>
	यही पृथ्वी का सबसे बड़ा अन्याय है।</p>
<p>
	<br />
	(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है...)<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/environment-day-special/best-poem-on-environment-day-126052900053_1.html" target="_blank">पर्यावरण दिवस पर सबसे अच्छी कविता: धरती की पुकार</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 17:13:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 01 Jun 2026 17:12:54 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[environment special]]></category>
      <authorname>सुशील कुमार शर्मा</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[पोहा, समोसा खाकर हो गए हैं बोर तो नाश्ते में खाएं स्प्राउट्स चाट, 5 फायदे: Healthy Breakfast Ideas]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/healthy-food/sprouts-chaat-5-health-benefits-126060100047_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/healthy-food/sprouts-chaat-5-health-benefits-126060100047_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/01/thumb/1_1/1780310441-1397.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/01/thumb/1_1/1780310441-1397.jpg</image>
      <description><![CDATA[Best Healthy Breakfast: सुबह-सुबह वही पोहा और समोसा खाकर बोर हो चुके हैं? टेस्ट तो बढ़िया है, लेकिन रोज़-रोज़ का तला-भुना या हैवी नाश्ता आपको सुस्त बना सकता है। अगर आप अपने ब्रेकफास्ट में कुछ चटपटा, रिफ्रेशिंग और बेहद हेल्दी ढूंढ रहे हैं, तो ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="The message in the picture explains the benefits of eating sprouts chaat, a healthy breakfast" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/01/full/1780310441-1397.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Sprouts Chaat: </strong>सुबह का नाश्ता दिन का सबसे महत्वपूर्ण भोजन माना जाता है। ज्यादातर लोग नाश्ते में पोहा, समोसा, पराठा या अन्य पारंपरिक व्यंजन खाना पसंद करते हैं। हालांकि रोज-रोज एक ही तरह का नाश्ता खाने से न केवल स्वाद में बोरियत आने लगती है, बल्कि कई बार शरीर को आवश्यक पोषक तत्व भी पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते। ऐसे में यदि आप स्वाद और सेहत दोनों का बेहतरीन संतुलन चाहते हैं, तो स्प्राउट्स चाट को अपनी डाइट का हिस्सा बना सकते हैं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/thick-blood-126033100005_1.html" target="_blank">health care tips: खून गाढ़ा होने के प्रमुख लक्षण, रोग, कारण और उपचार</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	स्प्राउट्स चाट अंकुरित दालों, ताजी सब्जियों, नींबू और हल्के मसालों से तैयार की जाती है। यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स का बेहतरीन स्रोत मानी जाती है। हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, नियमित रूप से स्प्राउट्स का सेवन करने से पाचन तंत्र बेहतर रहता है, वजन नियंत्रित करने में मदद मिलती है और शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा मिलती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	यदि आप पोहा और समोसा जैसे पारंपरिक नाश्तों से कुछ अलग ट्राई करना चाहते हैं, तो स्प्राउट्स चाट एक हेल्दी और पौष्टिक विकल्प साबित हो सकती है। आइए जानते हैं स्प्राउट्स चाट खाने के 5 बड़े फायदे और क्यों इसे अपनी मॉर्निंग डाइट में शामिल करना चाहिए।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	अंकुरित मूंग, चना, बारीक कटा प्याज, टमाटर, हरी मिर्च, नींबू का रस और थोड़ा सा चाट मसाला... बस तैयार हो गया आपका सुपरफूड!</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. प्रोटीन का पावरहाउस</h3>
<p>
	तलने-भूनने से खाने के पोषक तत्व कम हो जाते हैं, लेकिन अनाज को अंकुरित (Sprout) करने से उसकी न्यूट्रिशनल वैल्यू कई गुना बढ़ जाती है। स्प्राउट्स चाट प्लांट-बेस्ड प्रोटीन का बेहतरीन सोर्स है। यह आपकी मांसपेशियों (Muscles) को मजबूत रखता है और शरीर को दिनभर के लिए एनर्जी देता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. वेट लॉस में मददगार</h3>
<p>
	अगर आप वजन कम करने की कोशिश कर रहे हैं, तो समोसे को बाय-बाय कहने का समय आ गया है। स्प्राउट्स चाट में कैलोरी की मात्रा बहुत कम और फाइबर भरपूर होता है। इसे खाने के बाद आपका पेट लंबे समय तक भरा रहता है, जिससे आप चटर-पटर खाने से बच जाते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. डाइजेशन (पाचन) रहता है दुरुस्त</h3>
<p>
	भारी या ऑयली नाश्ता करने से अक्सर एसिडिटी या ब्लोटिंग होने लगती है। अंकुरित अनाज में एक्टिव एंजाइम्स होते हैं, जो पाचन क्रिया को आसान बनाते हैं। इसमें मौजूद फाइबर कब्ज (Constipation) की समस्या को दूर करता है और पेट को साफ रखता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. स्किन पर आता है नेचुरल ग्लो</h3>
<p>
	स्प्राउट्स में विटामिन C, विटामिन A और एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। यह आपके शरीर से टॉक्सिन्स यानी हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। नतीजा? अंदर से साफ शरीर और चेहरे पर एक नेचुरल, हेल्दी ग्लो!</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. दिल की सेहत के लिए वरदान</h3>
<p>
	पोहा-समोसा में मौजूद एक्स्ट्रा कार्ब्स और बैड फैट्स के मुकाबले स्प्राउट्स चाट आपके दिल का ख्याल रखती है। यह शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल यानी LDL के स्तर को कम करने और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने में मदद करती है, जिससे हार्ट डिसीज का खतरा कम होता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>Quick Tip: </strong>स्प्राउट्स चाट को और ज्यादा टेस्टी बनाने के लिए आप इसमें थोड़ा सा कद्दूकस किया हुआ गाजर, खीरा या अनार के दाने भी मिला सकते हैं। यह न सिर्फ स्वाद बढ़ाएगा, बल्कि इसे और भी ज्यादा न्यूट्रिशियस बना देगा।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	तो कल सुबह की शुरुआत बोरिंग नाश्ते से नहीं, बल्कि इस क्रंची और हेल्दी स्प्राउट्स चाट से करें!</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/nautapa-health-remedies-2026-126060100011_1.html" target="_blank">Nautapa Health Tips : नौतपा में सेहत का रखें खास ध्यान, अपनाएं ये आसान उपाय</a></strong></p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 16:15:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 01 Jun 2026 16:13:18 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[healthy food]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[ताड़ासन शरीर को फौलादी और सुडौल बनाने वाला योगासन, इसके हैं 5 फायदे]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/yogasana/tadasana-yoga-pose-benefits-126060100043_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/yogasana/tadasana-yoga-pose-benefits-126060100043_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/01/thumb/1_1/1780304258-261.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/01/thumb/1_1/1780304258-261.jpg</image>
      <description><![CDATA[योग की दुनिया में एक ऐसा आसन है जो दिखने में जितना सरल है, शरीर के लिए उतना ही जादुई। हम बात कर रहे हैं ताड़ासन की। इस आसन को करते समय जब आप शरीर को ऊपर की ओर खींचते हैं, तो आपकी आकृति एक ऊंचे और मजबूत ताड़ (Palm) के पेड़ जैसी हो जाती है, इसीलिए इसे ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="tadasana yoga pose" class="imgCont" height="675" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/01/full/1780304258-261.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="tadasana yoga pose" width="1200" /></p>
	</p>
	योग की दुनिया में एक ऐसा आसन है जो दिखने में जितना सरल है, शरीर के लिए उतना ही जादुई। हम बात कर रहे हैं ताड़ासन की। इस आसन को करते समय जब आप शरीर को ऊपर की ओर खींचते हैं, तो आपकी आकृति एक ऊंचे और मजबूत ताड़ (Palm) के पेड़ जैसी हो जाती है, इसीलिए इसे &#39;ताड़ासन&#39; कहा जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	कई लोग इसे &#39;वृक्षासन&#39; समझने की भूल कर बैठते हैं, लेकिन ध्यान रहे, वृक्षासन में हम एक पैर पर संतुलन बनाते हैं जबकि ताड़ासन में दोनों पैरों का इस्तेमाल होता है। आइए जानते हैं इसे करने का एकदम सटीक तरीका और इसके बेमिसाल फायदे।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	कदम-दर-कदम: कैसे करें ताड़ासन (The Perfect Method)</h3>
<p>
	ताड़ासन एक स्टैंडिंग योग है, यानी इसे खड़े होकर किया जाता है। इसे सही तरीके से करने के लिए इन स्टेप्स को फॉलो करें:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>शुरुआती पोजीशन: </strong>जमीन पर सीधे खड़े हो जाएं। अपने दोनों एड़ी और पंजों के बीच थोड़ा सा फासला (समानांतर दूरी) रखें। दोनों हाथों को सीधे अपनी कमर से सटाकर रखें।</p>
<p>
	<strong>हाथों की मूवमेंट: </strong>अब धीरे-धीरे अपनी दोनों बाजुओं को कंधों की सीध में लाएं। इसके बाद हाथों को सिर के ऊपर ले जाएं।</p>
<p>
	<strong>पंजों पर संतुलन: </strong>जैसे ही हाथ ऊपर जाएं, अपनी एड़ियों को जमीन से ऊपर उठाएं और पूरी सावधानी के साथ अपने पैर के पंजों (Toes) पर खड़े हो जाएं।</p>
<p>
	<strong>फिंगर लॉक: </strong>अब दोनों हाथों की उंगलियों को आपस में फंसा लें (फिंगर लॉक बनाएं) और हथेलियों को आसमान की तरफ पलट दें। इस दौरान आपकी गर्दन बिल्कुल सीधी रहनी चाहिए।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	वापस सामान्य स्थिति में कैसे आएं?</h3>
<p>
	हड़बड़ी में नीचे न आएं। सबसे पहले हाथों को वापस कंधों की सीध में लाएं और उसी रफ्तार से अपनी एड़ियों को दोबारा जमीन पर टिका दें। इसके बाद हाथों को नीचे लाकर कमर से सटा लें और रिलैक्स करें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	ताड़ासन के 5 चमत्कारी फायदे (Key Benefits)</h3>
<p>
	<strong>1. बच्चों की हाइट और ग्रोथ में मददगार: </strong>यदि आपके बच्चों की लंबाई कम है, तो यह आसन उनके लिए वरदान है। यह शरीर की मांसपेशियों को स्ट्रेच करके नेचुरल शारीरिक ग्रोथ को बढ़ावा देता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>2. लोअर बॉडी को बनाए फौलादी: </strong>इसे नियमित करने से पैरों की ग्रिप सुधरती है। यह आपके पंजों को मजबूत करता है, एड़ियों का दर्द दूर करता है और पिंडलियों (Calves) को टोन और सख्त बनाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>3. पेट और छाती के रोगों का खात्मा: </strong>जब आप ऊपर की तरफ स्ट्रेच करते हैं, तो पेट और छाती की मांसपेशियों पर गहरा खिंचाव आता है। इससे डाइजेशन सुधरता है, कब्ज जैसी पेट की बीमारियां दूर होती हैं और फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>4. पाइल्स (बवासीर) में राहत: </strong>यह आसन शरीर के निचले हिस्से में ब्लड सर्कुलेशन को दुरुस्त करता है, जिससे पाइल्स से पीड़ित मरीजों को दर्द और तकलीफ में काफी आराम मिलता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>5. आंतरिक ऊर्जा और वीर्यशक्ति में वृद्धि: </strong>पूरे शरीर में खिंचाव पैदा होने के कारण यह आसन शरीर की आंतरिक ऊर्जा को रीचार्ज करता है और वीर्यशक्ति को बढ़ाने में सहायक माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	जरूरी सावधानी: कब न करें यह आसन?</h3>
<p>
	ताड़ासन करते समय दो बातों का विशेष ध्यान रखें। पहला, जब आप हाथों को ऊपर खींच रहे हों, तो पेट को थोड़ा अंदर की तरफ सिंक (खींचकर) करें। दूसरा, जिन लोगों के पैरों, घुटनों या एड़ियों में कोई गंभीर चोट या पुराना दर्द है, उन्हें इस आसन को करने से बचना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 14:21:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 01 Jun 2026 14:28:03 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[yogasana]]></category>
      <authorname>अनिरुद्ध जोशी</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[1st June, Child protection day 2026: 1 जून, अंतरराष्ट्रीय बाल सुरक्षा दिवस आज, जानें महत्व, अधिकार और आवश्यक कदम]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/important-days-and-dates/international-child-protection-day-2026-126060100021_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/important-days-and-dates/international-child-protection-day-2026-126060100021_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/01/thumb/1_1/1780295541-3354.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/01/thumb/1_1/1780295541-3354.jpg</image>
      <description><![CDATA[International Child Protection Day: अंतरराष्ट्रीय बाल सुरक्षा दिवस बच्चों के अधिकारों, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और समग्र विकास के महत्व को रेखांकित करने वाला एक विशेष अवसर है। यह दिवस समाज को यह संदेश देता है कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण, ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Photo giving information about childrens safety, education and rights on World Child Safety Day" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-06/01/full/1780295541-3354.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
	<br />
	<strong>International Day for Protection of Children:</strong> हर साल 1 जून को अंतरराष्ट्रीय बाल सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना और उनके प्रति होने वाले अत्याचारों को रोकना है। और इसी के मद्देनजर बाल सुरक्षा दिवस मनाया जाता है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	बच्चे किसी भी देश का भविष्य होते हैं। उनका स्वस्थ, सुरक्षित और खुशहाल जीवन समाज और राष्ट्र की प्रगति का आधार माना जाता है। प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और प्रेम पाने का अधिकार है। लेकिन आज भी दुनिया के अनेक बच्चे गरीबी, शोषण, बाल मजदूरी, हिंसा और भेदभाव जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। बच्चों के अधिकारों की रक्षा और उनके बेहतर भविष्य के लिए जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हर वर्ष &#39;अंतरराष्ट्रीय बाल सुरक्षा दिवस” मनाया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	यह दिवस हमें याद दिलाता है कि बच्चों की सुरक्षा केवल परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज और सरकार की जिम्मेदारी है। बच्चों को सुरक्षित वातावरण देना, उन्हें अच्छी शिक्षा प्रदान करना और उनके अधिकारों की रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है।
	<ul>
		<li>
			अंतरराष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस का महत्व</li>
		<li>
			बच्चों के सामने प्रमुख समस्याएं</li>
		<li>
			बच्चों के अधिकार</li>
		<li>
			बाल सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम</li>
	</ul>
	<strong>आइए यहां जानते हैं इस दिन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी....</strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	अंतरराष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस का महत्व</h3>
<p>
	अंतरराष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस या इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य बच्चों के अधिकारों की रक्षा, उनके बेहतर स्वास्थ्य/सेहत, शिक्षा और उनको हर प्रकार के शोषण व हिंसा से सुरक्षित रखना है। इस दिन दुनिया भर में विभिन्न कार्यक्रम, जागरूकता अभियान, सेमिनार और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं ताकि लोगों को बच्चों के अधिकारों के बारे में जागरूक किया जा सके।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	बच्चों को उचित पोषण, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और सुरक्षित वातावरण मिलना बहुत जरूरी है। यदि बच्चों का बचपन सुरक्षित और खुशहाल होगा, तभी देश का भविष्य उज्ज्वल बनेगा।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	बच्चों के सामने प्रमुख समस्याएं</h3>
<p>
	1. बाल मजदूरी</p>
<p>
	2. बाल विवाह</p>
<p>
	3. शिक्षा की कमी</p>
<p>
	4. कुपोषण</p>
<p>
	5. बाल शोषण और हिंसा</p>
<p>
	6. गरीबी और बेघरपन</p>
<p>
	7. ऑनलाइन शोषण और साइबर अपराध</p>
<p>
	 </p>
<p>
	इन समस्याओं के कारण लाखों बच्चों का बचपन प्रभावित होता है और उनका भविष्य अंधकारमय बन जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	बच्चों के अधिकार</h3>
<p>
	संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार सम्मेलन के अनुसार प्रत्येक बच्चे को निम्न अधिकार प्राप्त हैं—</p>
<p>
	 </p>
<p>
	शिक्षा का अधिकार</p>
<p>
	स्वास्थ्य का अधिकार</p>
<p>
	सुरक्षा का अधिकार</p>
<p>
	समानता का अधिकार</p>
<p>
	अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता</p>
<p>
	खेल और मनोरंजन का अधिकार</p>
<p>
	इन अधिकारों का पालन करना हर देश और समाज की जिम्मेदारी है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	बाल सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम</h3>
<p>
	बाल मजदूरी को पूरी तरह समाप्त करना चाहिए।</p>
<p>
	सभी बच्चों को निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए।</p>
<p>
	बच्चों के प्रति हिंसा और शोषण के खिलाफ कठोर कानून लागू होने चाहिए।</p>
<p>
	माता-पिता और समाज को बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए।</p>
<p>
	बच्चों को सुरक्षित डिजिटल वातावरण प्रदान करना चाहिए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अंतरराष्ट्रीय बाल रक्षा दिवस हमें यह संदेश देता है कि बच्चों की सुरक्षा और खुशहाली ही समाज की वास्तविक प्रगति है। यदि हम बच्चों को सुरक्षित, शिक्षित और स्वस्थ वातावरण देंगे, तो वे भविष्य में एक बेहतर और मजबूत राष्ट्र का निर्माण करेंगे। इसलिए हमें मिलकर बच्चों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए और उनके सपनों को पूरा करने में सहयोग देना चाहिए।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	<strong>&#39;हर बच्चा सुरक्षित हो, शिक्षित हो और खुशहाल हो&#39; — यही इस दिवस का मुख्य उद्देश्य है।</strong></h3>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।</p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 12:15:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 01 Jun 2026 12:06:24 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Important Days and Dates]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Nautapa Health Tips : नौतपा में सेहत का रखें खास ध्यान, अपनाएं ये आसान उपाय]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/health-care/nautapa-health-remedies-2026-126060100011_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/health-care/nautapa-health-remedies-2026-126060100011_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/22/thumb/1_1/1779439989-0509.jpg"/>
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      <description><![CDATA[nautapa me suraksha ke upay: नौतपा की तेज गर्मी में थोड़ी सी सावधानी आपको लू, डिहाइड्रेशन और थकावट जैसी समस्याओं से बचा सकती है। सही खानपान, पर्याप्त पानी और धूप से बचाव के उपाय अपनाकर आप इस मौसम को आसानी से झेल सकते हैं।]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="" class="imgCont" height="675" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/22/full/1779439989-0509.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="" width="1200" /></p>
</p>
<p>
	<strong>Nautapa 2026, Extreme Heat Safety Tips: </strong>गर्मी का सबसे तीखा दौर यानी नौतपा में बाहरी तापमान तेजी से बढ़ते रहता है। इस दौरान सूरज की तपिश इतनी तेज होती है कि घर के अंदर भी बेचैनी महसूस होने लगती है। ऐसे मौसम में थोड़ी सी लापरवाही आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती है। इसलिए जरूरी है कि खानपान, कपड़ों और दिनचर्या में कुछ खास सावधानियां अपनाई जाएं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/nautapa-and-health-special-precautions-for-children-and-the-elderly-126052200006_1.html" target="_blank">Nautapa health tips: नौतपा और स्वास्थ्य: बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष सावधानियां</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	अगर आप नौतपा के दिनों में खुद को फिट और सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो ये जरूरी हेल्थ टिप्स जरूर अपनाएं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	नौतपा में अपनाएं ये 5 जरूरी सावधानियां</h3>
<h3>
	 </h3>
<h3>
	1. शरीर को रखें हाइड्रेटेड</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	गर्मी में शरीर से पसीने के रूप में पानी तेजी से निकलता है। इसलिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। साथ ही नारियल पानी, छाछ, लस्सी, आम पना, जलजीरा और फलों का रस जैसे पेय पदार्थों का सेवन करें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. हल्का और सुपाच्य भोजन लें</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	तला-भुना और ज्यादा मसालेदार भोजन गर्मी में पाचन बिगाड़ सकता है। ऐसे में हल्का, ताजा और जल्दी पचने वाला भोजन ही खाएं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. धूप में निकलते समय शरीर को ढंककर रखें</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	तेज धूप और गर्म हवाओं से बचने के लिए सिर, कान और चेहरे को कपड़े से ढंकें। आंखों पर सनग्लास जरूर लगाएं और खुले शरीर धूप में निकलने से बचें।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/importance-of-nautapa-know-its-effect-on-environment-and-health-126052100007_1.html" target="_blank">Nautapa 2026: 25 मई से नौतपा: भीषण गर्मी के दिन, जानें महत्व, पर्यावरण और सेहत पर प्रभाव</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. सूती और आरामदायक कपड़े पहनें</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	नरम और सूती कपड़े शरीर को ठंडक देते हैं और पसीना सोखने में मदद करते हैं। इससे शरीर का तापमान संतुलित बना रहता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. प्याज का सेवन जरूर करें</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	नौतपा में लू से बचाव के लिए प्याज बेहद फायदेमंद माना जाता है। रोजाना भोजन में प्याज शामिल करें और बाहर जाते समय जेब में छोटा प्याज रखना भी लाभकारी माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/when-is-a-doctors-advice-necessary-during-nautapa-126052800010_1.html" target="_blank">Nautapa and Health: नौतपा और स्वास्थ्य: डॉक्टर की सलाह कब है जरूरी?</a></strong></p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 01 Jun 2026 09:57:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 01 Jun 2026 10:54:47 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[health care]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[विश्व पर्यावरण दिवस 2026: 'कमिटमेंट नहीं, अब एक्शन का समय', यही है धरती बचाने का सबसे बड़ा संदेश]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/environment-day-special/world-environment-day-message-to-save-the-earth-126053000043_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/environment-day-special/world-environment-day-message-to-save-the-earth-126053000043_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/30/thumb/1_1/1780140992-1946.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Save Environment: विश्व पर्यावरण दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के नागरिकों, सरकारों और संस्थाओं को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि राजनीतिक सीमाओं से परे, हम सभी एक ही ग्रह के निवासी हैं और इसे बचाना हम ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Picture giving the message of one plant, one life on World Environment Day" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/30/full/1780140992-1946.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>World Environment Day: </strong>विश्व पर्यावरण दिवस हर साल 5 जून को पूरी दुनिया में मनाया जाता है। साल 2026 में हम सब एक ऐसे मोड़ पर खड़े हैं, जहां जलवायु परिवर्तन, बढ़ता तापमान और पिघलते ग्लेशियर अब केवल किताबों की बातें नहीं, बल्कि हमारे रोजमर्रा के जीवन की हकीकत बन चुके हैं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/environment-day-special/best-poem-on-environment-day-126052900053_1.html" target="_blank">पर्यावरण दिवस पर सबसे अच्छी कविता: धरती की पुकार</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	इस साल का पर्यावरण दिवस प्रकृति की तरफ से हमारे लिए एक &#39;वेक-अप कॉल&#39; है, जो हमें याद दिलाता है कि हमारे पास रहने के लिए केवल एक ही ग्रह है—Our Only Earth।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	धरती बचाने का सबसे बड़ा संदेश: &#39;कमिटमेंट नहीं, अब एक्शन का समय है&#39;</h3>
<p>
	इस पर्यावरण दिवस पर वैश्विक समुदाय से जो सबसे बड़ा संदेश निकलकर आ रहा है, वह बेहद स्पष्ट है: अब बातें करने का वक्त खत्म हो चुका है, अब जमीन पर काम करने का वक्त है। धरती को बचाने के लिए हमें इन 3 मोर्चों पर तुरंत काम करना होगा:</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. प्रकृति के साथ तालमेल</h3>
<p>
	हम अक्सर सोचते हैं कि पर्यावरण को बचाना सरकारों या बड़ी कंपनियों का काम है, लेकिन सबसे बड़ा बदलाव हमारी छोटी-छोटी आदतों से आता है। सिंगल-यूज़ प्लास्टिक को पूरी तरह ना कहना, पानी की बर्बादी रोकना और बिजली की बचत करना ही धरती के प्रति हमारा पहला कर्तव्य है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. &#39;इको-एंजायटी&#39; से उबरकर पौधे लगाना</h3>
<p>
	आज की युवा पीढ़ी में पर्यावरण के बिगड़ते हालातों को देखकर एक डर (Eco-Anxiety) बैठ गया है। इस डर का एकमात्र इलाज है- एक्शन। सिर्फ सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के बजाय, इस मानसून में कम से कम एक पौधा लगाएं और उसकी तब तक देखभाल करें जब तक वह पेड़ न बन जाए।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. &#39;रिड्यूस, रीयूज, रीसायकल&#39; को जीवन का हिस्सा बनाना</h3>
<p>
	कंज्यूमरिज़्म (ज्यादा से ज्यादा सामान खरीदने की होड़) ने कचरे के पहाड़ खड़े कर दिए हैं। हमें अपनी जरूरतों को सीमित करना होगा और &#39;इस्तेमाल करो और फेंको&#39; की संस्कृति को छोड़ना होगा।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	हम और आप अपने स्तर पर क्या कर सकते हैं? (5 आसान कदम)</h3>
<p>
	<strong>एक पौधा, एक जीवन: </strong>इस 5 जून को अपने घर के आसपास या बालकनी में एक पौधा जरूर लगाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>प्लास्टिक को कहें अलविदा: </strong>बाजार जाते समय हमेशा कपड़े का थैला साथ रखें। प्लास्टिक की पानी की बोतलों का इस्तेमाल बंद करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>डिजिटल क्लीन-अप:</strong> क्या आप जानते हैं कि ईमेल और क्लाउड स्टोरेज में फालतू का डेटा रखने से भी कार्बन एमिशन (डेटा सेंटर्स के जरिए) होता है? इस पर्यावरण दिवस पर अपने फालतू ईमेल्स डिलीट करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>पानी की हर बूंद कीमती है: </strong>ब्रश करते समय या बर्तन धोते समय नल खुला न छोड़ें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>पक्षी और जानवरों के लिए हमदर्दी: </strong>गर्मी के इस मौसम में अपनी छत या बालकनी पर पक्षियों के लिए पानी और दाना जरूर रखें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>एक विचारणीय बात: </strong>प्रकृति इंसानों के बिना करोड़ों साल तक फलती-फूलती रही है और हमारे बिना भी रह सकती है। लेकिन हम प्रकृति के बिना एक पल भी जीवित नहीं रह सकते। इसलिए, पर्यावरण को बचाकर हम धरती पर कोई अहसान नहीं कर रहे, बल्कि अपनी खुद की आने वाली पीढ़ियों का जीवन सुरक्षित कर रहे हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	तो आइए इस 5 जून 2026 को सिर्फ वादे न करें, बल्कि धरती को हरा-भरा बनाने का एक सच्चा प्रयास शुरू करें!</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/environment-day-special/essay-on-world-environment-day-2026-126052900042_1.html" target="_blank">World Environment Day Essay: विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष निबंध</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Sat, 30 May 2026 17:10:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 30 May 2026 17:09:46 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[environment special]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[31 मई 1893 भारत के आत्मगौरव और स्वामी विवेकानंद की ऐतिहासिक यात्रा]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/hindi-literature-articles/31-may-1893-indias-self-respect-and-swami-vivekanandas-historic-journey-126053000029_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2025-09/10/thumb/1_1/1757495094-5634.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Swami Vivekanandas foreign journey: भारत के इतिहास में कुछ तिथियां केवल कैलेंडर का हिस्सा नहीं होतीं, वे राष्ट्र की चेतना में अमिट स्मृति बन जाती हैं। 31 मई 1893 ऐसी ही एक तिथि है, जब भारतभूमि का एक युवा संन्यासी स्वामी विवेकानंद, साधारण गेरुआ ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="Pictured is Swami Vivekananda, a young sanyasi from India, in saffron attire" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2025-09/10/full/1757495094-5634.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
</p>
<p>
	 </p>
<p>
	- अमित राव पवार, देवास (म.प्र.)</p>
<p>
	युवा लेखक-साहित्यकार<br />
	<br />
	भारत के इतिहास में कुछ तिथियां केवल कैलेंडर का हिस्सा नहीं होतीं, वे राष्ट्र की चेतना में अमिट स्मृति बन जाती हैं। 31 मई 1893 ऐसी ही एक तिथि है। यह वह दिन था जब भारतभूमि का एक युवा संन्यासी, साधारण गेरुआ वेशभूषा में, सीमित संसाधनों के साथ, परंतु असीम आत्मविश्वास और अद्भुत आध्यात्मिक शक्ति को अपने भीतर समेटे हुए, भारतभूमि से विश्व मंच की ओर प्रस्थान कर रहा था। वह कोई राजा नहीं था, न किसी साम्राज्य का दूत और न ही किसी राजनीतिक शक्ति का प्रतिनिधि। वह भारत की आत्मा का वाहक था। वह थे &#39;स्वामी विवेकानंद।&#39;</p>
<p>
	 </p>
<p>
	उस समय भारत अंग्रेज़ी दासता की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था। चारों ओर निराशा, हीनभावना और सांस्कृतिक असुरक्षा का वातावरण था। पश्चिमी सभ्यता की चमक के सामने भारतीय समाज अपनी ही परंपराओं पर प्रश्नचिह्न लगाने लगा था। भारत की आध्यात्मिक धरोहर, उसके वेद, उपनिषद, दर्शन और सनातन संस्कृति को पिछड़ेपन का प्रतीक बताने का प्रयास किया जा रहा था। ऐसे कठिन समय में एक युवा संन्यासी ने पूरे आत्मविश्वास के साथ यह घोषणा की कि भारत केवल एक भूखंड नहीं, बल्कि विश्व को दिशा देने वाली आध्यात्मिक चेतना है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अमेरिका के शिकागों नगर में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में भाग लेने का निमंत्रण उनके लिए केवल एक अवसर नहीं था, बल्कि भारत की प्रतिष्ठा का प्रश्न था।&#39;किंतु यह यात्रा किसी भी दृष्टि से सरल नहीं थी।&#39; उनके पास पर्याप्त धन नहीं ओर न ही कोई बड़ा संगठन उनके साथ, यात्रा की व्यवस्थाएं अनिश्चित थीं। समुद्री यात्रा लंबी और कठिन थी। फिर भी उनके भीतर एक अदृश्य शक्ति कार्य कर रही थी, अपने गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंस की प्रेरणा और भारतमाता की पुकार। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	&#39;31 मई 1893&#39; की वह सुबह भारतीय इतिहास की सबसे भावनात्मक सुबहों में से एक कही जा सकती है। जब स्वामी विवेकानंद ने भारत से प्रस्थान किया, तब उनके मन में केवल एक संकल्प था—विश्व को भारत की आत्मा से परिचित कराना। कहा जाता है कि उस समय उनकी आंखों में करुणा भी थी और तेज भी।<br />
	<br />
	वे जानते थे कि वे किसी व्यक्तिगत उपलब्धि के लिए नहीं जा रहे, बल्कि करोड़ों भारतीयों की मौन आकांक्षाओं को अपने साथ लेकर चल रहे हैं। बंदरगाह पर खड़े लोग शायद यह सोच भी नहीं सकते थे कि यह साधारण-सा दिखने वाला संन्यासी आने वाले समय में भारत के गौरव को विश्व के शिखर तक पहुंचा देगा। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	उस क्षण भारत की सांस्कृतिक चेतना समुद्र के रास्ते विश्व की ओर यात्रा कर रही थी। यह केवल शरीर की यात्रा नहीं थी, यह भारतीय आत्मविश्वास की यात्रा थी। यह उस सभ्यता का प्रस्थान था जिसने हजारों वर्षों से विश्व को सहिष्णुता, मानवता और आध्यात्मिकता का संदेश दिया था। स्वामीजी के पास धन की कमी थी, पर विचारों की समृद्धि अपार थी। उनके पास भौतिक साधन सीमित थे, पर आत्मबल असीम था।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	स्वामी विवेकानंद की विदेश यात्रा जाने की योजना में उनके शिष्यों तथा अनेक शुभचिंतकों ने महत्वपूर्ण सहयोग दिया। विशेष रूप से चेन्नई के भक्तों और राजस्थान के खेतड़ी राज्य के राजा अजीत सिंह जी जो कि स्वामी जी के परम भक्त और समर्थक थे, ने आर्थिक सहायता की।<br />
	<br />
	स्वामी विवेकानंद ने मुंबई से अपनी ऐतिहासिक समुद्री यात्रा प्रारंभ की वे जापान, चीन और कनाडा होते हुए अमेरिका पहुंचे किंतु विदेशी भूमि पर रहने और सम्मेलन तक पहुंचने के लिए वह एकत्रित किया गया धन पर्याप्त नहीं था। फिर भी उन्होंने कठिनाइयों को अपने मार्ग की बाधा नहीं बनने दिया। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य वर्ष 1893 में अमेरिका के शिकागों नगर में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में भाग लेना था। वहां वे भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म और वेदांत दर्शन का प्रचार करना चाहते थे। यात्रा के दौरान वे पहले कनाडा के वेंकूवर पहुंचे। इसके बाद उन्होंने रेलमार्ग से यात्रा की और 30 जुलाई 1893 को शिकागों पहुंचे। बाद में विश्व धर्म सम्मेलन में दिए गए उनके प्रेरणादायक भाषण ने संपूर्ण विश्व को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता से परिचित कराया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	उनके जीवन का यही सबसे बड़ा संदेश है कि जब उद्देश्य महान हो, तब अभाव भी व्यक्ति को रोक नहीं सकते। समुद्र के लंबे सफर के दौरान शायद अनेक बार उनके मन में भारत की छवि उभरती होगी, गरीब किसान, संघर्षरत युवा, दीन-हीन जनता और वह प्राचीन संस्कृति, जो अपनी असली पहचान के लिए व्याकुल थी।<br />
	<br />
	वे जानते थे कि यदि विश्व भारत को सम्मान देगा, तो भारत स्वयं भी अपने प्रति सम्मान अनुभव करेगा। इसलिए उनकी यात्रा केवल शिकागो तक पहुंचने की यात्रा नहीं थी, वह भारत को आत्मगौरव लौटाने की यात्रा थी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	शिकागो पहुंचने के बाद भी संघर्ष समाप्त नहीं हुआ। सम्मेलन में भाग लेने के लिए आवश्यक औपचारिकताएं, परिचय-पत्रों का अभाव और आर्थिक संकट उनके सामने दीवार बनकर खड़े थे। कई दिनों तक उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। (उन्हें कई दिनों तक भूखा भी रहना पड़ा) परंतु वे विचलित नहीं हुए। उनके भीतर यह अटूट विश्वास था कि वे सत्य व मानवता के संदेशवाहक हैं, और सत्य का मार्ग अंततः स्वयं बन जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	वास्तव में, 31 मई 1893 को आरंभ हुई वह यात्रा केवल शिकागो तक नहीं अपितु वह करोड़ों भारतीयों के हृदय तक पहुंची। उसने गुलाम भारत में आत्मविश्वास का दीप प्रज्वलित किया, युवाओं को यह विश्वास दिलाया कि भारत की संस्कृति विश्व को दिशा दे सकती है। यही कारण है कि स्वामी विवेकानंद केवल एक धार्मिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के प्रेरणास्रोत बन गए।<br />
	<br />
	आज जब भारत विश्व पटल पर अपनी नई पहचान बना रहा है,  तब 31 मई 1893 की वह यात्रा हमें पुनः स्मरण कराती है कि किसी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी आत्मा में होती है। स्वामी विवेकानंदजी ने जिस भारत का स्वप्न देखा था, वह आत्मविश्वास, संस्कारित, सहिष्णु और मानवता के लिए समर्पित भारत था। इसलिए 31 मई केवल एक ऐतिहासिक तिथि नहीं, बल्कि भारत की आत्मा के विश्व की ओर प्रस्थान का दिवस है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	यह वह क्षण था जब एक युवा संन्यासी ने समुद्र पार करते हुए भारत के गौरव को विश्व के शिखर तक पहुंचाने का संकल्प लिया और उसे पूर्ण भी किया। आज भी जब हम स्वामी विवेकानंदजी को स्मरण करते हैं, तब उनके साथ वह ऐतिहासिक यात्रा भी हमारी स्मृतियों में जीवित हो उठती है, एक ऐसी यात्रा, जिसने भारत को स्वयं अपनी शक्ति का बोध कराया।<br />
	<br />
	(इस लेख में व्यक्त विचार/विश्लेषण लेखक के निजी हैं। &#39;वेबदुनिया&#39; इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।)</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Sat, 30 May 2026 15:01:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 30 May 2026 15:02:21 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Hindi Literature Articles]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[World No Tobacco Day: विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2026: एक कदम तंबाकू से दूर, हजार कदम स्वास्थ्य की ओर]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/disease/vishwa-tambaku-nishedh-divas-2026-126052700053_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/27/thumb/1_1/1779882467-6457.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Tobacco Addiction Awareness day: 'एक कदम तंबाकू से दूर, हजार कदम स्वास्थ्य की ओर।' विश्व तंबाकू निषेध दिवस (World No Tobacco Day) के लिए यह एक बहुत प्रभावशाली और प्रेरणादायक स्लोगन है। इसे पोस्टर, बैनर, रैली, भाषण और सोशल मीडिया कैप्शन में आसानी से ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Images showing awareness about good health on World No Tobacco Day" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/27/full/1779882467-6457.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Harmful Effects of Tobacco: </strong>&#39;एक कदम तंबाकू से दूर, हजार कदम स्वास्थ्य की ओर&#39;- यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक स्वस्थ, समृद्ध और दीर्घायु जीवन जीने का मूलमंत्र है। तंबाकू, बीड़ी, सिगरेट या गुटखा जैसी चीजें इंसान को शुरुआत में एक अस्थायी आनंद या राहत का अहसास कराती हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत एक जानलेवा जाल बन जाती है। जब कोई व्यक्ति तंबाकू छोड़ने का &#39;एक कदम&#39; उठाता है, तो उसका शरीर और जीवन &#39;हजारों कदम&#39; खुशहाली की ओर बढ़ा देते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	आइए जानते हैं कि तंबाकू से दूरी बनाते ही आपके स्वास्थ्य में क्या चमत्कारी बदलाव आते हैं:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	तंबाकू छोड़ते ही शरीर में बदलाव की टाइमलाइन</h3>
<p>
	<strong>जैसे ही आप तंबाकू से दूरी बनाते हैं, आपका शरीर खुद को ठीक (Heal) करना शुरू कर देता है:</strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>20 मिनट में: </strong>ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कनें सामान्य होने लगती हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>12 घंटे में: </strong>खून में कार्बन मोनोऑक्साइड का स्तर घटकर सामान्य हो जाता है और ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>2 से 12 हफ्ते में: </strong>फेफड़ों की कार्यक्षमता सुधरती है और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>1 वर्ष में: </strong>दिल की बीमारी (Heart Attack) का खतरा तंबाकू का सेवन करने वालों की तुलना में आधा हो जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>10 वर्ष में:</strong> फेफड़ों के कैंसर से होने वाली मृत्यु का जोखिम लगभग आधा हो जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	&#39;हजार कदम स्वास्थ्य की ओर&#39; के बड़े फायदे</h3>
<p>
	<strong>कैंसर और गंभीर बीमारियों से मुक्ति: </strong>तंबाकू छोड़ने से मुंह, गले, फेफड़ों और पेट के कैंसर का खतरा लगभग खत्म हो जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मजबूत दिल और फेफड़े:</strong> सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना बंद हो जाता है। स्टेमिना बढ़ता है और आप खुद को ऊर्जावान महसूस करते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मानसिक स्पष्टता और कम तनाव: </strong>यह एक मिथक है कि तंबाकू तनाव कम करता है। वास्तव में, निकोटीन की लत तनाव बढ़ाती है। इसे छोड़ने से नींद बेहतर होती है और मानसिक शांति मिलती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>आर्थिक और पारिवारिक खुशहाली: </strong>तंबाकू पर होने वाला रोज का खर्च बचता है। सबसे बड़ी बात, आपका परिवार एक ऐसी अनहोनी के डर से मुक्त हो जाता है जो तंबाकू के कारण किसी भी वक्त आ सकती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	तंबाकू से दूरी बनाने के 4 आसान उपाय</h3>
<p>
	यदि आप या आपका कोई प्रिय इस लत को छोड़ना चाहता है, तो इन बातों पर अमल करें:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>&#39;क्विट डेट&#39; (Quit Date) तय करें: </strong>कैलेंडर में एक तारीख तय करें कि इस दिन से मुझे तंबाकू को हाथ नहीं लगाना है। 31 मई को &#39;विश्व तंबाकू निषेध दिवस&#39; (World No Tobacco Day) आ रहा है, इस सफर को शुरू करने के लिए इससे बेहतर दिन कोई नहीं हो सकता।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>ट्रिगर्स को पहचानें: </strong>जब भी तंबाकू की तलब (Crave) उठे, तो तुरंत अपना ध्यान भटकाएं। सौंप, इलायची, लौंग या चुइंगम चबाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>खूब पानी पिएं: </strong>पानी पीने से शरीर में जमा निकोटीन और टॉक्सिन्स तेजी से बाहर निकलते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>&#39;नो&#39; कहना सीखें: </strong>जब दोस्त या सहकर्मी आपको तंबाकू ऑफर करें, तो पूरी दृढ़ता से मुस्कुराते हुए मना कर दें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>आज ही संकल्प लें: </strong>मौत के इस धीमे जहर को अपनी जिंदगी से बाहर निकालें। तंबाकू से दूरी बनाने का आपका आज का एक छोटा सा फैसला, आपके कल को सेहतमंद और मुस्कुराता हुआ बना सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/home-remedies/heatwave-protection-tips-126052700006_1.html" target="_blank">10 things about Nautapa: नौतपा से जुड़ी 10 खास बातें</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Sat, 30 May 2026 12:20:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 30 May 2026 16:11:08 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[disease]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Ahilyabai Holkar Jayanti: रानी अहिल्याबाई की 301वीं जयंती, जानें इतिहास, प्रेरणादायी विचार और शुभकामनाएं]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/birth-anniversary-of-personalities/rani-ahilyabai-jayanti-2026-126053000006_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/30/thumb/1_1/1780115951-1259.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Ahilyabai Holkar Quotes: महान वीरांगना और कुशल शासक लोकमाता रानी अहिल्याबाई होलकर का जन्म 31 मई 1725 को हुआ था। आज के समय में भी रानी अहिल्याबाई होलकर का नाम न्याय, सेवा और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक माना जाता है। उनकी जयंती पर विभिन्न सांस्कृतिक ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt=" Portrait of the great warrior, skilled administrator and just ruler Lokmata Rani Ahilyabai Holkar" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/30/full/1780115951-1259.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Ahilyabai Holkar Jayanti Wishes:</strong> रानी अहिल्याबाई जयंती 2026 पूरे भारत में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जाएगी। इस अवसर पर लोग उनके आदर्शों, समाज सुधार कार्यों और भारतीय संस्कृति में उनके योगदान को याद करेंगे। उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर, सोमनाथ मंदिर सहित कई धार्मिक स्थलों का पुनर्निर्माण कराया। उनका जीवन महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। रानी अहिल्याबाई होलकर को उनकी दयालुता, प्रशासनिक क्षमता और जनता के प्रति समर्पण के कारण &#39;लोकमाता&#39; कहा जाता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/inspiring-personality/when-and-where-was-rani-ahilyabai-born-126052900023_1.html" target="_blank">रानी अहिल्याबाई का जन्म कब और कहां हुआा था?</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	पुण्यश्लोक लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर जयंती भारत की उस महान वीरांगना, कुशल प्रशासक और न्यायप्रिय शासिका को नमन करने का दिन है, जिन्होंने अपने जन-कल्याणकारी कार्यों से इतिहास में अमिट छाप छोड़ी। 31 मई 1725 को जन्मीं महारानी अहिल्याबाई होलकर की जयंती हर साल 31 मई को मनाई जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	वर्ष 2026 में उनकी 301वीं जयंती के भव्य राष्ट्रीय आयोजनों के बाद, वर्ष 2026 में भी उनकी विरासत, जल संरक्षण के संदेशों जैसे गोदा-नर्मदा जल यात्रा और नारी सशक्तिकरण के रूप में उनकी जयंती को पूरे देश में बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता रहा है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	आइए जानते हैं उनके गौरवशाली इतिहास, प्रेरणादायी विचारों और इस दिन अपनों को भेजे जाने वाले शुभकामना संदेशों के बारे में...</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	रानी अहिल्याबाई होलकर का गौरवशाली इतिहास</h3>
<p>
	अहिल्याबाई होलकर का जीवन अदम्य साहस, त्याग और कर्तव्यपरायणता की एक अद्भुत मिसाल है:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>प्रारंभिक जीवन और विवाह: </strong>अहिल्याबाई का जन्म महाराष्ट्र के अहमदनगर (अब अहिल्या नगर) के चौंडी गांव में हुआ था। मात्र 10 वर्ष की आयु में उनका विवाह मराठा सूबेदार मल्हारराव होलकर के पुत्र खंडेराव से हुआ।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>चुनौतियों का पहाड़</strong>: वर्ष 1754 में कुंभेर के युद्ध में उनके पति खंडेराव शहीद हो गए। इसके बाद उनके ससुर मल्हारराव होलकर और फिर उनके इकलौते पुत्र मालेराव का भी असमय निधन हो गया। इस भारी व्यक्तिगत संकट के बाद भी उन्होंने खुद को संभाला और इंदौर (मालवा साम्राज्य) की कमान अपने हाथों में ली।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>कुशल और न्यायप्रिय शासन: </strong>उन्होंने 1767 से 1795 तक लगभग 28 वर्षों तक मालवा पर शासन किया। उनके शासनकाल में प्रजा बेहद सुखी और समृद्ध थी। वे स्वयं अदालत लगाकर जनता की समस्याएं सुनती थीं, इसलिए उन्हें &#39;लोकमाता&#39; कहा गया। देवी अहिल्याबाई होलकर ने अपने शासनकाल में न केवल युद्धों का कुशलता से नेतृत्व किया, बल्कि उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कपड़े के व्यापार- जैसे मशहूर महेश्वरी साड़ियों की शुरुआत और हथकरघा उद्योग को बढ़ावा दिया, जिससे हजारों महिलाओं को आत्मनिर्भरता मिली।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/women-history-constituent/personality-of-lokmata-ahilyabai-holkar-126012700043_1.html" target="_blank">लोकमाता अहिल्या: तीन युगों की महानता का संगम</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और जीर्णोद्धार: </strong>देवी अहिल्याबाई ने भारत के आध्यात्मिक ताने-बाने को मजबूत करने में ऐतिहासिक योगदान दिया। उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर (वाराणसी), सोमनाथ मंदिर (गुजरात), और केदारनाथ-बद्रीनाथ सहित देश भर के सैकड़ों मंदिरों, घाटों, कुओं, बावड़ियों और धर्मशालाओं का पुनर्निर्माण और जीर्णोद्धार कराया।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	लोकमाता अहिल्याबाई होलकर के प्रेरणादायी विचार</h3>
<p>
	अहिल्याबाई होलकर के जीवन मूल्य और उनके सिद्धांत आज के समाज और नेतृत्व के लिए सबसे बड़े मार्गदर्शक हैं:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>* &#39;प्रजा का कल्याण ही राजा का एकमात्र धर्म है। यदि प्रजा दुखी है, तो शासक का सिंहासन व्यर्थ है।&#39;</strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>* &#39;ईश्वर ने मुझे जो धन और सत्ता सौंपी है, मैं उसकी मालकिन नहीं बल्कि सिर्फ एक ट्रस्टी (रक्षक) हूं। इसका एक-एक पैसा जनता की भलाई और धर्म के कार्यों में लगना चाहिए।&#39;</strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>* &#39;चुनौतियां और संकट जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन न्याय और सत्य के मार्ग पर अडिग रहने से बड़ी से बड़ी विपत्ति भी रास्ता बदल लेती है।&#39;</strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	अहिल्याबाई होलकर जयंती 2026: शुभकामना संदेश</h3>
<p>
	इस पावन अवसर पर आप इन संदेशों, वॉट्सऐप स्टेटस और कोट्स के जरिए अपने मित्रों और परिवार को शुभकामनाएं दे सकते हैं:</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	शुभकामना संदेश 1</h3>
<p>
	&#39;न्याय, धर्म और अटूट नारी शक्ति की प्रतीक, </p>
<p>
	महान शासिका पुण्यश्लोक लोकमाता </p>
<p>
	देवी अहिल्याबाई होलकर जयंती की </p>
<p>
	आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं!&#39;</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	शुभकामना संदेश 2</h3>
<p>
	&#39;जिन्होंने संकटों के आगे कभी घुटने नहीं टेके, </p>
<p>
	प्रजा को संतान मानकर जिसने वात्सल्य लुटाया। </p>
<p>
	ऐसी न्यायप्रिय मां अहिल्याबाई होलकर </p>
<p>
	की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन!&#39;</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	शुभकामना संदेश 3</h3>
<p>
	&#39;भारत की संस्कृति, मंदिरों के जीर्णोद्धार और </p>
<p>
	जल संरक्षण की दूरदर्शी जननायक, </p>
<p>
	राजमाता अहिल्याबाई होलकर के आदर्श </p>
<p>
	हमारे जीवन को हमेशा प्रेरित करते रहें। </p>
<p>
	होलकर जयंती की मंगलकामनाएं!&#39;</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	शुभकामना संदेश 4</h3>
<p>
	&#39;धर्म की रक्षा, न्याय की मूरत, </p>
<p>
	महारानी अहिल्याबाई जैसी शासक थी अद्भुत।</p>
<p>
	इंदौर की गौरव और देश की शान </p>
<p>
	लोकमाता देवी अहिल्याबाई होलकर को शत्-शत् नमन।&#39;</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/birth-anniversary-of-personalities/rani-ahilyabai-jayanti-2026-126052700044_1.html" target="_blank">Ahilyabai Holkar जयंती: नारी शक्ति, न्याय और सेवा का प्रतीक महारानी अहिल्याबाई होलकर</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Sat, 30 May 2026 11:11:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 30 May 2026 16:10:32 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[birth anniversary of personalities]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Ahilyabai Holkar जयंती: नारी शक्ति, न्याय और सेवा का प्रतीक महारानी अहिल्याबाई होलकर]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/birth-anniversary-of-personalities/rani-ahilyabai-jayanti-2026-126052700044_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/birth-anniversary-of-personalities/rani-ahilyabai-jayanti-2026-126052700044_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/27/thumb/1_1/1779877368-9453.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/27/thumb/1_1/1779877368-9453.jpg</image>
      <description><![CDATA[Ahilyabai Holkar Birth Anniversary: रानी अहिल्याबाई होलकर भारतीय इतिहास की एक महान, न्यायप्रिय और धर्मपरायण शासिका थीं। उनका जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के चौंडी गांव में हुआ था। उन्होंने मालवा राज्य पर शासन करते हुए समाज सेवा, महिला सशक्तिकरण, ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="The picture depicts Ahilyabai Holkar a true example of indomitable courage, public welfare and women power, and the rajvada palace of Indore" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/27/full/1779877368-9453.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Ahilyabai Holkar Biography Hindi: </strong>लोकमाता, न्याय की प्रतिमूर्ति और कुशल प्रशासक महारानी अहिल्याबाई होलकर की जयंती हर साल 31 मई को मनाई जाती है। मालवा साम्राज्य (विशेषकर इंदौर और महेश्वर) की बागडोर संभालने वाली रानी अहिल्याबाई का जीवन अदम्य साहस, संन्यास, जनकल्याण और नारी शक्ति का साक्षात उदाहरण है। इस साल 31 मई 2026 को उनकी 301वीं जयंती मनाई जा रही है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/women-history-constituent/personality-of-lokmata-ahilyabai-holkar-126012700043_1.html" target="_blank">लोकमाता अहिल्या: तीन युगों की महानता का संगम</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	आइए उनके इस पावन दिवस पर उनके जीवन के कुछ ऐसे पहलुओं को याद करें जो आज भी प्रेरणा देते हैं:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	एक साधारण लड़की से &#39;लोकमाता&#39; बनने का सफर</h3>
<p>
	<strong>जन्म</strong>: अहिल्याबाई का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के चौंडी गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>भाग्य का मोड़: </strong>इंदौर के महाराजा मल्हारराव होलकर ने एक बार अहिल्याबाई को बचपन में मंदिर में गरीबों को भोजन कराते और उनकी भक्ति को देखा। वे उनके संस्कारों से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपने बेटे खांडेराव से उनका विवाह करवा दिया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>विपत्तियों का पहाड़: </strong>शादी के कुछ साल बाद ही एक युद्ध में उनके पति खांडेराव शहीद हो गए। इसके कुछ समय बाद उनके ससुर मल्हारराव और फिर उनके इकलौते बेटे मालेराव का भी निधन हो गया।<br />
	 </p>
<h3>
	जब संभाली साम्राज्य की बागडोर</h3>
<p>
	चारों तरफ से दुखों से घिरने और उस जमाने में महिलाओं पर कई पाबंदियां होने के बावजूद, अहिल्याबाई टूटी नहीं। उन्होंने खुद आगे बढ़कर मालवा की कमान संभाली। उन्होंने केवल महल से राज नहीं किया, बल्कि पुरुषों की तरह पोशाक पहनकर, तीर-कमान संभालकर खुद युद्ध के मैदान में उतरकर दुश्मनों और लुटेरों को धूल चटाई।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	सांस्कृतिक पुनरुत्थान और मंदिरों का जीर्णोद्धार</h3>
<p>
	अहिल्याबाई होलकर को भारत के इतिहास में सबसे बड़ी सांस्कृतिक रक्षक माना जाता है। उन्होंने अपने व्यक्तिगत धन का उपयोग करके पूरे भारत में सनातन संस्कृति का पुनरुद्धार किया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>काशी विश्वनाथ मंदिर: </strong>क्रूर शासक औरंगजेब द्वारा तोड़े गए वाराणसी के प्रसिद्ध काशी विश्वनाथ मंदिर का जीर्णोद्धार और पुनर्निर्माण 1780 में रानी अहिल्याबाई ने ही करवाया था।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अन्य ज्योतिर्लिंग और तीर्थ: </strong>उन्होंने सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण कराया, केदारनाथ, बद्रीनाथ, जगन्नाथ पुरी, गया और अयोध्या में घाट, कुएं, धर्मशालाएं और मंदिरों का निर्माण कराया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	आज भारत के लगभग हर प्रमुख तीर्थ स्थल पर आपको अहिल्याबाई होलकर द्वारा बनवाई गई कोई न कोई धर्मशाला या घाट जरूर मिल जाएगा।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	महेश्वरी साड़ियों की शुरुआत</h3>
<p>
	रानी अहिल्याबाई केवल धर्म ही नहीं, बल्कि रोजगार को बढ़ावा देने वाली दूरदर्शी शासक थीं। उन्होंने बुनकरों को संरक्षण देने के लिए गुजरात और अन्य जगहों से कारीगरों को बुलाकर महेश्वर में बसाया। यहीं से विश्व प्रसिद्ध &#39;महेश्वरी साड़ियों&#39; की शुरुआत हुई, जो आज भी भारत का गौरव हैं।</p>
<h3>
	 </h3>
<h3>
	न्याय की मिसाल</h3>
<p>
	अहिल्याबाई के राज में न्याय सबके लिए बराबर था, चाहे वह कोई आम नागरिक हो या उनका अपना परिवार। एक लोककथा के अनुसार, जब उनके इकलौते बेटे से अनजाने में एक गाय के बछड़े की मृत्यु हो गई, तो उन्होंने न्याय की रक्षा के लिए अपने ही बेटे को वही सजा देने का आदेश दे दिया था जो किसी आम अपराधी को मिलती। ऐसे कठोर और निष्पक्ष न्याय के कारण प्रजा उन्हें &#39;देवी&#39; की तरह पूजने लगी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>शत-शत नमन: </strong>31 मई का यह दिन हमें याद दिलाता है कि एक सच्चा शासक वह है जो सत्ता को भोग नहीं, बल्कि प्रजा की सेवा का माध्यम समझे। इंदौर और पूरे भारत के गौरव को बढ़ाने वाली &#39;मशाल&#39; देवी अहिल्याबाई होलकर की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन!<br />
	<br />
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Sat, 30 May 2026 09:29:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 30 May 2026 16:09:52 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[birth anniversary of personalities]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[सनातन परंपरा का यह एक नियम, जिसे अब मान रही है मॉडर्न साइंस; रोज सुबह करने से बीमारियां रहेंगी कोसों दूर]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/ayurveda/modern-science-ushapana-in-ayurveda-126052900056_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/ayurveda/modern-science-ushapana-in-ayurveda-126052900056_1.html</guid>
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      <description><![CDATA[हमारी सनातन संस्कृति में ऋषि-मुनियों ने जितने भी नियम बनाए, उनके पीछे केवल धार्मिक कारण नहीं थे, बल्कि गहरा विज्ञान छिपा था। आज पश्चिमी देश और मॉडर्न मेडिकल साइंस जिन चीज़ों को 'हॉलिस्टिक हीलिंग' या 'वेलनेस हैक्स' कहकर प्रमोट कर रहे हैं, वे हमारे ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="" class="imgCont" height="675" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/29/full/1780055882-2992.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="ushapana Detoxification" width="1200" /></p>
	</p>
	हमारी सनातन संस्कृति में ऋषि-मुनियों ने जितने भी नियम बनाए, उनके पीछे केवल धार्मिक कारण नहीं थे, बल्कि गहरा विज्ञान छिपा था। आज पश्चिमी देश और मॉडर्न मेडिकल साइंस जिन चीज़ों को &#39;हॉलिस्टिक हीलिंग&#39; या &#39;वेलनेस हैक्स&#39; कहकर प्रमोट कर रहे हैं, वे हमारे घरों में सदियों से अपनाई जा रही हैं। ऐसा ही एक बेहद साधारण लेकिन चमत्कारी नियम है- &#39;उषःपान&#39; (रोज सुबह बासी मुंह तांबे के बर्तन में रखा पानी पीना)। आज मॉडर्न साइंस भी मान चुकी है कि अगर कोई इंसान रोज सुबह उठकर इस नियम का पालन करता है, तो आधी से ज्यादा बीमारियां उसके शरीर के पास भी नहीं फटकेंगी। आइए जानते हैं इसके पीछे का वैज्ञानिक सच।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. पेट बनता है &#39;सुपरक्लीन&#39; (Detoxification)</h3>
<p>
	आयुर्वेद कहता है कि हर बीमारी की जड़ हमारा पेट है। रातभर जब तांबे के लोटे में पानी रखा रहता है, तो तांबा पानी में मिलकर उसे &#39;एल्केलाइन&#39; (Alkaline) बना देता है।</p>
<p>
	साइंस क्या कहती है? सुबह बासी मुंह यह पानी पीने से पेट का एसिड लेवल कम होता है और आंतों की सफाई होती है। यह शरीर के सारे टॉक्सिन्स (जहरीले पदार्थों) को फ्लश आउट कर देता है, जिससे कब्ज, गैस और एसिडिटी जैसी समस्याएं जड़ से खत्म हो जाती हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. तांबे का &#39;ऑलिगोडायनेमिक&#39; प्रभाव (Natural Antibiotic)</h3>
<p>
	सनातन परंपरा में तांबे (Copper) के बर्तनों को सबसे शुद्ध माना गया है।</p>
<p>
	साइंस क्या कहती है? मेडिकल रिसर्च के अनुसार, तांबे में &#39;ऑलिगोडायनेमिक&#39; (Oligodynamic) गुण होते हैं। जब पानी को 8 घंटे तक तांबे के बर्तन में रखा जाता है, तो उसमें मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया, वायरस और फंगस अपने आप मर जाते हैं। यह पानी शरीर की इम्यूनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) को बूस्ट करता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. वेट लॉस और चमकदार त्वचा (Anti-Aging & Weight Loss)</h3>
<p>
	अक्सर लोग वजन घटाने के लिए महंगी दवाइयां या सप्लीमेंट्स लेते हैं, जबकि इसका समाधान सुबह के इस एक नियम में है।</p>
<p>
	साइंस क्या कहती है? तांबा शरीर के एक्स्ट्रा फैट को बर्न करने में मेटाबॉलिज्म की मदद करता है। इसके अलावा, कॉपर में बेहतरीन एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो चेहरे की झुर्रियों को रोकते हैं और नई कोशिकाओं (Cells) के निर्माण में मदद करते हैं, जिससे चेहरे पर नेचुरल ग्लो आता है।</p>
<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="modern science ushapana in ayurveda" class="imgCont" height="675" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/29/full/1780055994-4563.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="ushapana in ayurveda" width="1200" /></p>
	</p>
</p>
<h3>
	उषापान करने का सही तरीका (जो आपको पता होना चाहिए):</h3>
<ul>
	<li>
		पानी को रात में ही तांबे के लोटे या जग में ढककर रख दें।</li>
	<li>
		सुबह उठते ही, बिना ब्रश किए (बासी मुंह) बैठकर घूंट-घूंट करके इस पानी को पीएं। (सुबह की लार में एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं, जो पेट के लिए बहुत फायदेमंद हैं)।</li>
	<li>
		पानी को कभी भी गर्म न करें, इसे नॉर्मल रूम टेम्परेचर पर ही पीएं।</li>
</ul>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>बॉटम लाइन:</strong></p>
<p>
	सनातन परंपरा का यह &#39;वॉटर थेरेपी&#39; नियम आज के दौर की सबसे सस्ती और सबसे असरदार दवा है। दवाओं पर पैसे खर्च करने से बेहतर है कि हम अपनी जड़ों की ओर लौटें। आज ही से इसे आजमाएं और खुद बदलाव महसूस करें!</p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 29 May 2026 17:20:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 29 May 2026 17:30:18 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Ayurveda]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[पैरों की पिंडलियों को सुडौल और पतला करने हेतु आजमाएं ये 6 असरदार उपाय]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/health-care/calf-slimming-exercises-at-home-126052900046_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/health-care/calf-slimming-exercises-at-home-126052900046_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/29/thumb/1_1/1780051529-0118.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/29/thumb/1_1/1780051529-0118.jpg</image>
      <description><![CDATA[Slim Calves Tips: अधिकांश लोग अपने पैरों की मोटी पिंडलियों से परेशान रहते हैं, और सोचते हैं कि इसे केवल जीन की वजह से ही बदला नहीं जा सकता। लेकिन सही व्यायाम, डाइट, और जीवनशैली में बदलाव के जरिए पिंडलियों को पतला और शेप में लाना संभव है। जानें घर पर ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Effective exercises and tips to slim down your calves" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/29/full/1780051529-0118.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>How to slim calves: </strong>आजकल फिटनेस और सुंदर शरीर की चाह हर व्यक्ति की प्राथमिकता बन गई है। महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए पैरों की पिंडलियां (Calves) पतली और टोंड होना बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। पतली और आकर्षक पिंडलियां सिर्फ सौंदर्य बढ़ाती हैं बल्कि चलने, दौड़ने और एक्सरसाइज में सहूलियत भी देती हैं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/thick-blood-126033100005_1.html" target="_blank">health care tips: खून गाढ़ा होने के प्रमुख लक्षण, रोग, कारण और उपचार</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	पैरों की पिंडलियां (Calves/Calf) भारी या मोटी होने के दो मुख्य कारण होते हैं- या तो वहां वसा (Fat) जमा है, या फिर मांसपेशियों (Muscles) का आकार बढ़ गया है, जो कि अक्सर हाई हील्स पहनने या गलत पोस्चर के कारण होता है। अत: पिंडलियों को सुडौल और पतला करने के लिए आपको ऐसी एक्सरसाइज और आदतों को अपनाना होगा जो वहां की मांसपेशियों को बड़ा (Bulky) बनाने के बजाय उन्हें लंबा और टोन (Lean & Elongated) करें। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	1. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज (Stretching)</p>
<p>
	2. कार्डियो का सही चुनाव (Right Cardio)</p>
<p>
	3. बॉडीवेट एक्सरसाइज (कम वजन, ज्यादा रैप्स)</p>
<p>
	4. हाई हील्स (High Heels) से दूरी बनाएं</p>
<p>
	5. मसाज और फोम रोलर (Massage n Foam Rolling)</p>
<p>
	6. खान-पान में बदलाव (Diet Tips)</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	यहां आपके लिए नीचे दिए गए उपाय बेहद असरदार हैं:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज (Stretching)</h3>
<p>
	पिंडलियों की मांसपेशियों को लंबा और पतला करने के लिए स्ट्रेचिंग सबसे जरूरी है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>डाउनवर्ड डॉग पोज (अधोमुख श्वानासन):</strong> योग का यह आसन पिंडलियों के लिए वरदान है। इसमें हाथों और पैरों के बल वी (V) शेप बनाना होता है और एड़ियों को जमीन से छूने की कोशिश करनी होती है। इससे पिंडलियों पर गहरा खिंचाव आता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>वॉल स्ट्रेच (Wall Stretch): </strong>दीवार के सामने खड़े हो जाएं। एक पैर आगे और एक पीछे रखें। पीछे वाले पैर की एड़ी को जमीन पर टिकाए रखते हुए आगे की तरफ झुकें। 20-30 सेकंड रुकें और फिर पैर बदलें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. कार्डियो का सही चुनाव (Right Cardio)</h3>
<p>
	हर तरह का कार्डियो पिंडलियों को पतला नहीं करता। आपको भारी रेजिस्टेंस वाले वर्कआउट से बचना चाहिए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>लंबी वॉक या धीमी रनिंग: </strong>समतल जमीन पर (बिना चढ़ाई के) लंबी वॉक या हल्की रनिंग करने से पैर पतले होते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>इनक्लाइन वॉक से बचें: </strong>ट्रेडमिल पर चढ़ाई (Incline) बढ़ाकर चलने या पहाड़ों पर चढ़ने से पिंडलियों की मांसपेशियां और भारी हो जाती हैं। इसलिए सपाट सतह पर ही चलें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>तैराकी (Swimming):</strong> स्विमिंग पूरे शरीर की चर्बी घटाने और पैरों को बिना किसी दबाव के टोन करने का बेहतरीन तरीका है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/disease/ways-to-live-a-healthy-life-126012900034_1.html" target="_blank">Health tips: स्वस्थ जीवन के लिए 10 सरल और असरदार उपाय</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. बॉडीवेट एक्सरसाइज (कम वजन, ज्यादा रैप्स)</h3>
<p>
	यदि आप जिम जाते हैं या घर पर वर्कआउट करते हैं, तो भारी वजन उठाने के बजाय अपने शरीर के वजन का इस्तेमाल करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>काफ रेजेस (Calf Raises): </strong>सीधे खड़े होकर एड़ियों को ऊपर उठाएं (पंजे के बल आएं) और फिर नीचे लाएं। ध्यान रहे, इसमें कोई एक्स्ट्रा वजन (Dumbbells) न लें। इसके 20 से 25 रैप्स के 3 सेट करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>स्क्वाट्स और लंजेस</strong>: ये एक्सरसाइज जांघों के साथ-साथ पिंडलियों को भी सही शेप में लाती हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. हाई हील्स (High Heels) से दूरी बनाएं</h3>
<p>
	जब आप हाई हील्स पहनती हैं, तो आपकी पिंडलियों की मांसपेशियां लगातार सिकुड़ी (Contracted) हुई स्थिति में रहती हैं। लगातार ऐसा होने से वे छोटी और मोटी होने लगती हैं। जितना हो सके फ्लैट फुटवियर पहनें ताकि मांसपेशियों को स्वाभाविक रूप से फैलने का मौका मिले।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. मसाज और फोम रोलर (Massage n Foam Rolling)</h3>
<p>
	कई बार पिंडलियों में भारीपन &#39;फ्लूइड रिटेंशन&#39; (पानी जमा होना) या मांसपेशियों के कड़े होने के कारण होता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	रोजाना रात को नीचे से ऊपर की ओर (एड़ी से घुटने की तरफ) सरसों या नारियल के तेल से मालिश करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	फोम रोलर का इस्तेमाल करके पिंडलियों की टाइटनेस को कम करें, इससे वहां का ब्लड सर्कुलेशन सुधरेगा और पैर पतले दिखेंगे।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	6. खान-पान में बदलाव (Diet Tips)</h3>
<p>
	अगर शरीर में फैट प्रतिशत ज्यादा है, तो वह पिंडलियों पर भी दिखेगा।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>नमक की मात्रा कम करें:</strong> ज्यादा नमक खाने से शरीर में पानी रुकता है (Water Retention), जिससे पैर और पिंडलियां सूजी हुई दिखाई देती हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>पोटैशियम युक्त चीजें खाएं: </strong>केला, पालक और एवोकैडो जैसी चीजें खाएं, ये शरीर से अतिरिक्त नमक और पानी को बाहर निकालने में मदद करती हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>भरपूर पानी पिएं: </strong>सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन जितना ज्यादा पानी पिएंगे, शरीर उतना ही कम पानी होल्ड करेगा।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>एक जरूरी सलाह: </strong>यदि आपकी पिंडलियों में अचानक से बहुत ज्यादा सूजन आ गई है या दर्द रहता है, तो यह केवल फैट नहीं बल्कि किसी मेडिकल स्थिति (जैसे वैरिकोज वेन्स या वॉटर रिटेंशन) का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से सलाह जरूर लें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/benefits-of-eating-cashews-daily-126051900021_1.html" target="_blank">Cashew health effects: प्रतिदिन 5 काजू खाने से क्या होगा सेहत पर असर</a></strong></p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 29 May 2026 16:36:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 29 May 2026 16:24:02 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[health care]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[पर्यावरण दिवस पर सबसे अच्छी कविता: धरती की पुकार]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/environment-day-special/best-poem-on-environment-day-126052900053_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/environment-day-special/best-poem-on-environment-day-126052900053_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/29/thumb/1_1/1780053780-6597.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/29/thumb/1_1/1780053780-6597.jpg</image>
      <description><![CDATA[पेड़ों की छांव कभी मत काटो, धरती मां का दिल मत बांटो। नदियां रोती, पर्वत चुप हैं, मानव क्यों अब इतने क्रूर हैं। हवा में जहर घुलता जाता, हर जंगल सूना हो जाता। पक्षी अपना घर खो बैठे, बादल भी अब कम ही बरसें। आओ मिलकर पेड़ लगाएं, सूखी धरती फिर महकाएं। ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="A photo that inspires us to save the Earth on World Environment Day, June 5th" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/29/full/1780053780-6597.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>विश्व पर्यावरण दिवस पर कविता</strong><br />
	<br />
	पेड़ों की छांव कभी मत काटो,</p>
<p>
	धरती मां का दिल मत बांटो।</p>
<p>
	नदियां रोती, पर्वत चुप हैं,</p>
<p>
	मानव क्यों अब इतने क्रूर हैं।</p>
<p>
	हवा में जहर घुलता जाता,</p>
<p>
	हर जंगल सूना हो जाता।</p>
<p>
	पक्षी अपना घर खो बैठे,</p>
<p>
	बादल भी अब कम ही बरसें।</p>
<p>
	आओ मिलकर पेड़ लगाएं,</p>
<p>
	सूखी धरती फिर महकाएं।</p>
<p>
	जल बचाएं, जीवन बचाएं,</p>
<p>
	हरियाली का दीप जलाएं।</p>
<p>
	प्लास्टिक को दूर भगाएं,</p>
<p>
	नदियों को स्वच्छ बनाएं।</p>
<p>
	प्रकृति हमसे यही कहे,</p>
<p>
	&#39;मुझे बचाओ, तभी रहो सहे।&#39;</p>
<p>
	धरती माँ का मान करें हम,</p>
<p>
	हर जीव का सम्मान करें हम।</p>
<p>
	विश्व पर्यावरण दिवस ये कहता,</p>
<p>
	&#39;प्रकृति से ही जीवन रहता।&#39;</p>
<p>
	आओ मिलकर शपथ उठाएं,</p>
<p>
	हरा-भरा संसार बनाएं।</p>
<p>
	पेड़ लगाना धर्म बने अब,</p>
<p>
	स्वच्छ पर्यावरण कर्म बने अब।</p>
<p>
	जब हर आंगन हरियाली होगी,</p>
<p>
	तभी सच्ची खुशहाली होगी।</p>
<p>
	धरती फिर से मुस्काएगी,</p>
<p>
	जीवन में हरियाली लाएगी।</p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 29 May 2026 15:48:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 29 May 2026 16:58:12 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[environment special]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[सिर्फ एक अंडा! वैज्ञानिकों ने बताया दिमाग तेज करने का 'सीक्रेट फॉर्मूला']]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/international-hindi-news/eggs-consumption-benefits-lowers-alzheimers-dementia-risk-brain-health-126052900026_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/international-hindi-news/eggs-consumption-benefits-lowers-alzheimers-dementia-risk-brain-health-126052900026_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/29/thumb/1_1/1780041655-8377.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Eggs lowers Alzheimers risk: आज के दौर में खराब लाइफस्टाइल और खानपान के कारण भूलने की बीमारी यानी 'अल्ज़ाइमर' (Alzheimers) और डिमेंशिया का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। दुनिया भर के डॉक्टर और वैज्ञानिक इसे 'भविष्य की बड़ी स्वास्थ्य चुनौती' मान रहे हैं।]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Eggs lowers Alzheimers risk" class="imgCont" height="675" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/29/full/1780041655-8377.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="" width="1200" /></p>
	</p>
	<br />
	Eggs lowers Alzheimers risk: आज के दौर में खराब लाइफस्टाइल और खानपान के कारण भूलने की बीमारी यानी &#39;अल्ज़ाइमर&#39; (Alzheimers) और डिमेंशिया का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। दुनिया भर के डॉक्टर और वैज्ञानिक इसे &#39;भविष्य की बड़ी स्वास्थ्य चुनौती&#39; मान रहे हैं। लेकिन हाल ही में हुए वैज्ञानिक शोधों में एक बेहद चौंकाने वाला और राहत देने वाला सच सामने आया है। दिमागी कमजोरी के हजारों मरीजों का इलाज कर चुके मशहूर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. डेल ब्रेडिसन के अनुसार, हमारे किचन में मौजूद एक बेहद साधारण-सी चीज &#39;अंडा&#39; अल्जाइमर से बचाने और दिमाग को बूस्ट करने में सबसे बड़ा मददगार साबित हो सकता है।</p>
<h3>
	हफ्ते में सिर्फ 1 अंडा खाइए</h3>
<p>
	प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल &#39;द जर्नल ऑफ न्यूट्रिशन&#39; में हाल ही में  प्रकाशित एक शोध के अनुसार, जो लोग हफ्ते में एक या उससे अधिक अंडे का सेवन करते हैं, उनमें अंडा न खाने वालों (या महीने में एक बार खाने वालों) की तुलना में अल्जाइमर रोग होने का खतरा 47 प्रतिशत तक कम पाया गया। यही नहीं, नियमित अंडा खाने वाले लोगों ने प्लानिंग, फोकस (एकाग्रता) और सही समय पर सही निर्णय लेने (Decision-making) से जुड़े दिमागी टेस्ट में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया।</p>
<h3>
	आखिर अंडे में ऐसा क्या है?</h3>
<p>
	अल्जाइमर और दिमागी कमजोरी से जूझ रहे मरीजों के मस्तिष्क में आमतौर पर दो जरूरी पोषक तत्वों की भारी कमी देखी जाती है—पहला &#39;कोलीन&#39; (Choline) और दूसरा ओमेगा-3 फैट का एक प्रकार &#39;डीएचए&#39; (DHA)। अंडा दुनिया के उन गिने-चुने सुपरफूड्स में से है जिसमें ये दोनों तत्व एक साथ भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>&#39;कोलीन&#39; का पावरहाउस : </strong>अल्जाइमर के खतरे को कम करने में अकेले &#39;कोलीन&#39; की 39% भूमिका होती है। पुरुषों को रोजाना 550 मिलीग्राम और महिलाओं को 425 मिलीग्राम कोलीन की जरूरत होती है। महज एक उबले अंडे से शरीर को लगभग 150 मिलीग्राम कोलीन मिल जाता है। यह दिमाग की कोशिकाओं (Brain Cells) की बाहरी परत को मजबूत करता है और याददाश्त को बढ़ाने वाले न्यूरोट्रांसमीटर का निर्माण करता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>एंटीऑक्सीडेंट्स की ढाल : </strong>अंडे में ल्यूटिन (Lutein) जैसे एंटीऑक्सीडेंट और ओमेगा-3 फैटी एसिड होते हैं, जो दिमाग की कोशिकाओं को डैमेज होने और सूजन (Inflammation) से बचाते हैं।</p>
<h3>
	&#39;मेटाबॉलिक सिंड्रोम&#39; से भी बचाता है अंडा</h3>
<p>
	डॉ. डेल ब्रेडिसन का कहना है कि अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन, शारीरिक निष्क्रियता और तनाव के कारण होने वाला &#39;मेटाबॉलिक सिंड्रोम&#39; ही आगे चलकर अल्जाइमर का कारण बनता है। बुजुर्गों के लिए अंडा एक बेहतरीन डाइट है क्योंकि यह पोषक तत्वों से भरपूर है, पचाने में आसान है और शरीर में ब्लड शुगर के लेवल को अचानक बढ़ने नहीं देता। हेल्थ एक्सपर्ट्स दिमाग में कोलीन की मात्रा बढ़ाने के लिए अंडों के साथ सब्जियों और पनीर को मिलाकर खाने की सलाह देते हैं।</p>
<p>
	Edited by: Vrijendra Singh Jhala </p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 29 May 2026 13:25:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 29 May 2026 13:31:15 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[International News]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया न्यूज़ टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[रानी अहिल्याबाई का जन्म कब और कहां हुआा था?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/inspiring-personality/when-and-where-was-rani-ahilyabai-born-126052900023_1.html</link>
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      <description><![CDATA[राजमाता अहिल्याबाई होल्कर का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के चौंडी (Chaundi) गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम मानकोजी शिंदे (राव) था, जो अपने गांव के पाटिल (मुखिया) थे। अहिल्याबाई का विवाह मालवा साम्राज्य के सूबेदार मल्हारराव ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Maharani Ahilyabai Holkar" class="imgCont" height="800" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/29/full/1780040974-08.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="ahilyabai" width="1200" /></p>
	</p>
	राजमाता अहिल्याबाई होल्कर का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के चौंडी (Chaundi) गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम मानकोजी शिंदे (राव) था, जो अपने गांव के पाटिल (मुखिया) थे। अहिल्याबाई का विवाह मालवा साम्राज्य के सूबेदार मल्हारराव होल्कर के पुत्र खांडेराव होल्कर से हुआ था, जिसके बाद वे इंदौर (मालवा) की महारानी बनीं।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/indian-history-and-culture/how-did-khanderao-holkar-die-125053000075_1.html" target="_blank">रानी अहिल्याबाई के पति की मौत कैसे हुई थी?</a></strong></p>
</p>
<p>
	वर्ष 1733 में अहिल्याबाई का विवाह खंडेराव से हो गया। उस वक्त अहिल्याबाई की उम्र सिर्फ 8 वर्ष थी। खंडेराव अहिल्याबाई से 2 साल बड़े थे। शादी के बाद अहिल्याबाई महेश्वर आ गई। सन 1745 में उन्हें बेटा हुआ मालेराव होलकर और 1748 में उन्हें बेटी हुई मुक्ताबाई। सन 1754 में अहिल्याबाई के जीवन में अंधेरा छा गया। एक युद्ध के दौरान पति खंडेराव वीरगति को प्राप्त हो गए। इसके बाद उन्हें राजपाट संभालना पड़ा। अहिल्याबाई महान शिव भक्त थीं। उनके जीवन से जुड़े कई रोचक किस्से हैं। <br />
	<br />
	<strong><a href="https://hindi.webdunia.com/immersive/lokmata-ahilyabai-holkar-jeevan-parichay-ahilyabai-holkar-biography.html"><span style="color:#8b4513;">लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर का संपूर्ण इतिहास</span></a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने अपने शासनकाल में भारत के विभिन्न हिस्सों में मंदिरों का निर्माण और पुनर्निर्माण कराया। इनमें प्रमुख है काशी विश्वनाथ मंदिर, वाराणसी, विश्वनाथ मंदिर, गया, ओंकारेश्वर मंदिर, मध्य प्रदेश, सिद्धिविनायक मंदिर, सिद्धटेक, खजराना गणेश मंदिर, इंदौर। इसके अतिरिक्त, उन्होंने हरिद्वार, केदारनाथ, बद्रीनाथ, ऋषिकेश, प्रयाग, द्वारका, रामेश्वरम, सोमनाथ, नासिक, उज्जैन, पंढरपुर, परली वैजनाथ, कुरुक्षेत्र, पशुपतिनाथ (नेपाल), श्रीशैलम, उडुपी, गोकर्ण और काठमांडू जैसे स्थानों पर भी मंदिरों और धार्मिक संरचनाओं का निर्माण या पुनर्निर्माण कराया। </p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/sanatan-dharma-history/when-a-thief-stole-the-golden-swing-of-queen-ahilyabai-holkar-125052700034_1.html" target="_blank">जब एक चोर चोरी कर ले गया रानी अहिल्याबाई होल्कर का सोने का झूला</a></strong></p>
</p>
<p>
	महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने न केवल मंदिरों का निर्माण कराया, बल्कि तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए धर्मशालाएं, घाट, कुएं और अन्य संरचनाएं भी बनवाईं। उनके द्वारा निर्मित प्रमुख संरचनाओं में शामिल हैं। दशाश्वमेध घाट, वाराणसी: यह घाट उन्होंने बनवाया, जो आज गंगा आरती के लिए प्रसिद्ध है। मणिकर्णिका घाट, वाराणसी: यह घाट भी उन्होंने पुनर्निर्मित कराया, जो अंतिम संस्कार के लिए प्रमुख स्थल है। उन्होंने विभिन्न तीर्थस्थलों पर धर्मशालाएं बनवाईं, ताकि यात्रियों को ठहरने की सुविधा मिल सके।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 29 May 2026 13:13:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 30 May 2026 12:42:14 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[inspiring personality]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[नौतपा की 'आग' उगलती गर्मी से कैसे बचें? ये 5 सावधानियां और 10 गोल्डन रूल्स बदल देंगे आपका समर गेम!]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/health-care/how-to-avoid-heat-stroke-126052600005_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/health-care/how-to-avoid-heat-stroke-126052600005_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/26/thumb/1_1/1779769639-1348.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/26/thumb/1_1/1779769639-1348.jpg</image>
      <description><![CDATA[Nautapa Heatwave  Protection Tips: गर्मी का सबसे तीखा दौर यानी नौतपा शुरू होते ही तापमान तेजी से बढ़ने लगता है। इस दौरान सूरज की तपिश इतनी तेज होती है कि घर के अंदर भी बेचैनी महसूस होने लगती है। ऐसे मौसम में थोड़ी सी लापरवाही आपकी सेहत पर भारी पड़ ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Golden rules of Nautapa, photo showing ways to avoid scorching heat, heat wave and strong sunlight" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/26/full/1779769639-1348.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Summer Safety Tips:</strong> हर साल जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में एंट्री मारते हैं, तो शुरू होता है साल का सबसे गर्म हफ्ता- &#39;नौतपा&#39;। इन 9 दिनों में सूरज आसमान से आग उगलने लगता है। तीखी धूप और थपेड़े मारती लू इंसान को घर के अंदर हो या बाहर, दोनों जगह बेचैन कर देती है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/nautapa-and-health-special-precautions-for-children-and-the-elderly-126052200006_1.html" target="_blank">Nautapa health tips: नौतपा और स्वास्थ्य: बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष सावधानियां</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	इस प्रचंड गर्मी में जरा सी लापरवाही आपको अस्पताल पहुंचा सकती है। इसलिए, खुद को कूल और हाइड्रेटेड रखने के लिए आपको कुछ बेहद जरूरी सावधानियां बरतनी होंगी।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	नौतपा की 5 अचूक सावधानियां, जो आपको रखनी हैं याद:</h3>
<p>
	अगर नौतपा के दौरान घर से बाहर निकलना बेहद जरूरी है, तो इन 5 बातों का कड़ाई से पालन करें:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>1. कवर-अप गेम ऑन रखें: </strong>कभी भी खुले शरीर धूप में न जाएं। बाहर निकलने से पहले सिर और कान को कॉटन के कपड़े से ढंकें और आंखों पर अच्छी क्वालिटी का सनग्लास (धूप का चश्मा) जरूर लगाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>2. जेब में रखें &#39;कवच&#39;:</strong> दादी-नानी का यह नुस्खा आज भी सुपरहिट है। रोजाना खाने में प्याज का इस्तेमाल करें और घर से बाहर निकलते समय अपनी जेब में एक छोटासा कच्चा प्याज जरूर रखें, यह लू से बचाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>3. लिक्विड डाइट को बनाएं दोस्त:</strong> इन दिनों सादे पानी के अलावा अपनी डाइट में नारियल पानी, गन्ने का रस, फलों का जूस, जलजीरा, लस्सी, आम पना, दही और जीरा छाछ को भरपूर जगह दें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>4. पानी से नो कॉम्प्रोमाइज: </strong>प्यास न भी लगे, तो भी हर थोड़ी देर में पानी पीते रहें। शरीर से पसीना बहने पर तापमान को बैलेंस करने के लिए पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>5. फैब्रिक का रखें ख्याल: </strong>सिंथेटिक कपड़ों को बाय-बाय कहें। इन 9 दिनों में सिर्फ ढीले, हल्के और मुलायम सूती (कॉटन) कपड़े ही पहनें ताकि पसीना आसानी से सूख सके और स्किन खुलकर सांस ले सके।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/take-care-of-your-health-during-nautapa-learn-10-precautions-126050500033_1.html" target="_blank">Nautapa and health: नौतपा में ऐसे रखें सेहत का ध्यान, जानें 10 सावधानियां</a></strong></p>
<h3>
	 </h3>
<h3>
	नौतपा के गोल्डन टिप्स, जानें 10 सबसे काम की बातें</h3>
<p>
	<strong>1. क्या है नौतपा?</strong></p>
<p>
	जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में गोचर करता है, तो शुरुआती 9 दिनों को नौतपा कहा जाता है। यह पूरे साल का सबसे गर्म समय माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>2. खाली पेट बाहर जाना मना है:</strong></p>
<p>
	नौतपा के दौरान सूरज की किरणें सीधे पृथ्वी पर आती हैं। सुबह कितना भी जल्दी हो, बिना कुछ खाए-पिए घर से कदम बाहर न निकालें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>3. ग्लूकोज से मिलेगी इंस्टेंट एनर्जी:</strong></p>
<p>
	पसीने के रास्ते शरीर के जरूरी मिनरल्स बाहर निकल जाते हैं। इसलिए समय-समय पर ग्लूकोज या ओआरएस (ORS) का घोल पीते रहें और अपनी एनर्जी को फालतू कामों में वेस्ट न करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>4. अच्छे मानसून का संकेत:</strong></p>
<p>
	सनातन मान्यताओं के अनुसार, नौतपा के ये 9 दिन जितनी शिद्दत से तपेंगे, आने वाले मानसून में उतनी ही झमाझम और अच्छी बारिश होने की संभावना बढ़ती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>5. इमरजेंसी में घरेलू उपाय या डॉक्टर:</strong></p>
<p>
	अगर चक्कर आना, उल्टी या तेज सिरदर्द जैसे लू के लक्षण दिखें, तो तुरंत घरेलू उपाय (जैसे आम पना) अपनाएं या बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>6. एसी (AC) से निकलते ही सावधानी:</strong></p>
<p>
	अगर आप ऑफिस या घर में लगातार एसी में बैठते हैं, तो एसी से निकलते ही तुरंत कड़कड़ाती धूप में न जाएं। शरीर के तापमान को धीरे-धीरे नॉर्मल होने दें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>7. मेहंदी का नेचुरल कूलिंग इफेक्ट:</strong></p>
<p>
	जिन लोगों को गर्मी ज्यादा सताती है या तलवों में जलन होती है, वे अपने हाथ-पैर और सिर में प्राकृतिक मेहंदी जरूर लगाएं। यह शरीर की गर्मी को खींचकर आपको अंदर से तरोताजा रखती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>8. पसीने को सोखना है जरूरी:</strong></p>
<p>
	सूती कपड़े पहनने से शरीर का तापमान मेंटेन रहता है और घमौरियों या स्किन एलर्जी का खतरा नहीं रहता।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>9. लाइट और इजी मील:</strong></p>
<p>
	दोपहर और रात के खाने में ऐसा भोजन लें जो जल्दी पच जाए- जैसे खिचड़ी, दलिया, लौकी-तोरई की सब्जी। लिक्विड चीजों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>10. ऑयली फूड से तौबा:</strong></p>
<p>
	इन नौ दिनों में समोसे, कचोरी और हैवी मसालेदार भोजन से बिल्कुल दूर रहें। भारी खाना इस मौसम में आपके डाइजेशन सिस्टम यानी पाचन क्रिया को पूरी तरह बिगाड़ सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/importance-of-nautapa-know-its-effect-on-environment-and-health-126052100007_1.html" target="_blank">Nautapa 2026: 25 मई से नौतपा: भीषण गर्मी के दिन, जानें महत्व, पर्यावरण और सेहत पर प्रभाव</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 29 May 2026 10:02:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 29 May 2026 16:27:48 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[health care]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[यह सुझाव देश के हित में है]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/my-blog/this-suggestion-is-in-the-interest-of-the-country-126052900008_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/20/thumb/1_1/1779245148-8639.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/20/thumb/1_1/1779245148-8639.jpg</image>
      <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पांच दिवसीय विदेश यात्रा पर भारत के अंदर राजनीतिक व गैर राजनीतिक मोर्चे पर हो रही टिप्पणियों के संदर्भ में उनका यह मंतव्य सर्वाधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात से आरंभ कर स्वीडन, ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p>
		<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
			<img align="center" alt="Photo of Prime Minister Narendra Modis foreign trip, Georgia Meloni with Modi in the image" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/20/full/1779245148-8639.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="giorgia meloni selfie with narendra modi" /></p>
	</p>
	<p>
		शरद पवार ने देश की विदेश नीति पर आंतरिक राजनीतिक व्यवहार के संदर्भ में जो कुछ कहा है उस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के बाहर देश की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए काम कर रहे हैं। हमारे राजनीतिक विचार अलग-अलग हो सकते हैं लेकिन जब देश के सम्मान की बात आती है तो राजनीतिक मतभेदों को बीच में नहीं लाना चाहिए। </p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पांच दिवसीय विदेश यात्रा पर भारत के अंदर राजनीतिक व गैर राजनीतिक मोर्चे पर हो रही टिप्पणियों के संदर्भ में उनका यह मंतव्य सर्वाधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात से आरंभ कर स्वीडन, नीदरलैंड, ज्नॉर्वे और इटली की द्विपक्षीय यात्रा की तथा नार्वे की राजधानी ओस्लो में स्कैंडिनेवियाई भारत शिखर सम्मेलन में शामिल हुए। </p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		प्रधानमंत्री के समक्ष अपने राष्ट्रीय हित को साधने का उद्देश्य था और इन यात्राओं पर विशेषज्ञों का मत यही है कि उसमें उन्हें अधिकतम सफलता मिली। किंतु राजनीतिक और गैर राजनीतिक एक्टिविज्म और सोशल मीडिया पर उनके विदेश में रहते हुए ही हमले शुरू हो गए। सारे हमलों‌ व‌ आलोचनाओं के हल्ला बोल में ऐसा एक तथ्य नहीं आया जिसमें बताया गया हो कि अमुक बिंदु पर प्रधानमंत्री ने अपने राष्ट्रीय हित के अनुकूल काम नहीं किया।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		जाहिर है कि विरोध केवल राजनीतिक मतभेदों और असहमतियों के इर्द-गिर्द था। यह चिंताजनक है क्योंकि भारत की भौगोलिक सीमाओं के अंदर की राजनीतिक असहमतियां और मतभेद सीमाओं से बाहर चला जाए तो राष्ट्रीय हित प्रभावित होता है। इसका अर्थ है कि हम देश हित को प्राथमिकता देने की जगह अपने राजनीतिक, व्यक्तिगत हित को प्राथमिकता दे रहे हैं या फिर हमारा वैचारिक दुराग्रह हावी है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		ऐसा नहीं है कि पवार की मोदी से पूरी तरह सहमति है। महाराष्ट्र में आज शरद पवार की राकांपा शक्तिहीन है तो इसी कारण क्योंकि स्वर्गीय अजीत पवार ने विद्रोह कर भाजपा से हाथ मिला लिया। बावजूद हमारी पारंपरिक राजनीति, जिसका प्रतिनिधित्व करने वाले गिने-चुने नेता रह गए हैं, में यही व्यवहार लंबे समय तक रहा है। देश में हमारी असहमति होती है, आरोप - प्रत्यारोप करते हैं लेकिन जब विदेशों की, अंतरराष्ट्रीय मंच की बात आती है तो देश साथ खड़ा होता है। </p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		अंतरराष्ट्रीय मंच पर या विदेश में प्रधानमंत्री किसी राजनीतिक दल का नहीं भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहां केवल राष्ट्रहित सर्वोपरि होना चाहिए। पत्रकारिता में भी अनेक बार प्रधानमंत्री या दूसरे मंत्रियों के विदेश में दिए बयानों से असहमति होती थी लेकिन वरिष्ठ लोग बताते थे कि विदेश नीति पर हमारी आलोचना का स्वर ऐसा नहीं हो सकता। अपवाद हर समय रहे हैं पर पर वह कभी मुख्य धारा नहीं बना। </p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		इसलिए ज्यादातर विदेशी यात्राओं या विदेशी मेहमानों के भारत आगमन पर हुए समझौते आदि पर राजनीतिक दलों व मीडिया की ध्वनि एक समान होती थी। जैसे-जैसे राजनीतिक मतभेद बढ़े, भारत और वैश्विक स्तर पर अलग-अलग राजनीतिक धाराओं, निहित स्वार्थी संगठनों, समूहों के बीच संपर्क संबंध बढ़ा इस स्वाभाविक व्यवहार में अंतर आता गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता शीर्ष पर आने के बाद यह अतिवाद तक चला गया है। इसी का प्रकटीकरण इस समय दिखा है। </p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		एक भारतवासी के नाते इस समय हमारा उद्देश्य क्या होना चाहिए? पश्चिम एशिया संकट यानी ईरान अमेरिका इजरायल टकराव और तनाव ने ईंधन आपूर्ति में उथल-पुथल पैदा कर दिया है। हार्मूज जलडमरूमध्य की खतरनाक नाकेबंदी से निपटना विश्व के लिए मुश्किल हो रहा है।<br />
		<br />
		इसमें पेट्रोल डीजल आदि के लिए आयात पर निर्भर भारत या अन्य देशों के लिए दूरगामी दृष्टि से आपूर्ति की सुनिश्चित व्यवस्था करना, देशों के संबंधों में हो रहे बदलावों के साथ सामंजस्य स्थापित करना या अस्थिरता के काल में उसका आधार बनाते रहना तथा भविष्य में बनने वाले अंतरराष्ट्रीय समीकरणों की दृष्टि से ऐसी स्थिति में होना ताकि देश के रूप में हम कहीं अलग-थलग न पड़ें। </p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		मोटा-मोटी प्रधानमंत्री की यात्रा में यही लक्ष्य समाहित होंगे। इन सबमें यहां विस्तार से जाने की आवश्यकता नहीं। आप चाहे भाजपा के सरकार के विरोधी हों या समर्थक दृष्टि एक ही होनी चाहिए कि प्रधानमंत्री की यात्राओं के दौरान उन देशों के नेताओं के साथ द्विपक्षीय और प्रतिनिधिमंडलों की बातचीत, संयुक्त घोषणाओं तथा संपन्न समझौतों में क्या-क्या हुआ? जब आप गहराई से उन सबको देखेंगे तो आपका विचार अपने आप बदल जाएगा। दुर्भाग्य से हम उन पर सरसरी दृष्टि भी डालना नहीं चाहते। </p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		किसी पत्रकार ने नॉर्वे में दोनों प्रधानमंत्रियों के स्वागत वक्तव्य में निर्धारित प्रोटोकॉल के विपरीत जबरन कैमरे घूमाकर भारत के प्रधानमंत्री से मानवाधिकार एवं प्रेस की स्वतंत्रता पर प्रश्न पूछे और वह हमारे लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण हो गया। नॉर्वे के साथ हमारे समझौते, हमारे यहां पेंशन फंड से 28 अरब डॉलर के निवेश की योजना, ब्लू इकोनामी साझेदारी, हरित साझेदारी आदि पर हमने चर्चा नहीं की।<br />
		<br />
		यही नहीं नॉर्दिक भारत शिखर सम्मेलन में औपचारिक रूप से ट्रस्टेड ग्रीन टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप यानी विश्वसनीय हरित तकनीक एवं अन्वेषण रणनीतिक साझेदारी का दर्जा मिलना और कातिक परिषद में भी पर्यवेक्षक की हैसियत हासिल करना इनके लिए हास्य पर चला गया। </p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		इसी तरह इटली की यात्रा में प्रधानमंत्री ने पार्ले कंपनी के सामान्य मेलोडी ट्रॉफी वहां की प्रधानमंत्री जार्जिया मेलोनी को भेंट करते हुए एक रोचक वीडियो पोस्ट किया। इटली के साथ हमारी ठोस विशेष रणनीतिक साझेदारी कायम हुई, भारत और इटली में निर्माण करो तथा विश्व को आपूर्ति करो का ढांचा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत के स्थान की दृष्टि से महत्वपूर्ण था, अनेक मुद्दों पर हमारे साथ सहमति बनी जिनमें आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष भी है। </p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		इस यात्रा में स्वीडन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया और काम करने वाली पत्रकार और कार्टून छापने वाले अखबार के देश नार्वे ने भी। संयुक्त राष्ट्र संघ की खाद्य और कृषि संगठन ने प्रधानमंत्री को विशेष रूप से सम्मानित किया। इन सब पर चर्चा की जगह हमारे यहां टौफी वीडियो को लेकर ऐसी टिप्पणियां की जा रही है जिनमें कई को देखने सुनने या पढ़ने में शर्म आए। भारत जैसे देश में विमर्श का यह स्तर किसी को भी अंदर से परेशान कर देगा।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		क्या हम ऐसा करते समय विचार भी नहीं करते कि एक देश के रूप में विदेश में हमारी कैसी छवि बनेगी? यहीं पर शरद पवार का यह कथन प्रासंगिक हो जाता है कि जब भी राष्ट्रीय हित के लिए सामूहिक रूप से काम करने का मौका मिले तो सभी को एक साझा उद्देश्य के साथ जुड़ना चाहिए और देश की प्रतिष्ठा मजबूत करने में मदद करनी चाहिए। कोई भी प्रधानमंत्री या विदेश मंत्री देश के बाहर होते हैं तो अपने दृष्टिकोण से वह देश के भविष्य और सम्मान को ही केंद्र में रखते हैं। कई बार इनमें गलतियां भी हुई है। </p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		आज के दौर के अनुसार उनकी आलोचना भी अस्वाभाविक नहीं है किंतु आलोचना तथ्यों के आधार पर होगी। अखिर जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी ट्रॉफी भेंट करने से हमारी राष्ट्रीय प्रतिष्ठा को कैसे नुकसान पहुंचा? इटली प्राचीन सभ्यता संस्कृति वाला यूरोप का महत्वपूर्ण और मजबूत देश है।<br />
		<br />
		वर्तमान तनावपूर्ण अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में दो प्रधानमंत्रियों के बीच इस तरह के सहज संबंध, मुस्कान और ठहाके कूटनीति की दुनिया में बहुत बड़ी उपलब्धि है। एक बार दो नेताओं के बीच सहज सामान्य संवाद निर्मित हो गए तो जटिल से जटिल मुद्दों पर भी सहमति बनती है तथा रास्ता निकल जाता है। दूसरे, इससे हमारे देश के एक सामान्य ब्रांड का भी जबरदस्त विपणन हुआ। इस विषय पर स्थापित अंतरराष्ट्रीय मीडिया की टिप्पणियां देखेंगे तो सकारात्मक भाव पैदा होगा। </p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		कूटनीति में एक सामान्य वस्तु का उपयोग कर माहौल बदल देना, दुनिया को संदेश देना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय संबंधों में परस्पर व्यवहार का रास्ता दिखा देना सामान्य बात नहीं है। अभी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का चीन दौरा हुआ और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी बातचीत के सारे तस्वीर और वीडियो देख लीजिए।<br />
		<br />
		इसके बाद रुस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की चीन यात्रा हुई। दोनों नेताओं के सारे तस्वीर और वीडियो देख लीजिए। पुतिन और शी जिनपिंग के बीच सामान्य संबंध हैं। बावजूद उनके व्यवहार में सहज मुस्कान नहीं दिखेगा। </p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		तनावपूर्ण और अनिश्चितताओं की दुनिया में दो महत्वपूर्ण देश के नेताओं के बीच सरल सहज मुस्कान और संबंध कूटनीति के लिए नया मानक है। कायदे से देश में इसकी प्रशंसा होनी चाहिए। भारत ने अपने लक्ष्य के अनुरूप यात्रा से सारी उपलब्धियां हासिल की जिसकी ओर तत्काल दृष्टि थी।<br />
		<br />
		दूसरे देश भी अपने हित के अनुसार काम कर रहे थे और उन्हें भी प्राप्त हुआ। पर मूल बात यह है कि हम एक राष्ट्र के रुप में कैसे प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं? शरद पवार जैसे वरिष्ठ नेता अब ज्यादा उपलब्ध नहीं है कि सामने आकर रास्ता दिखाएं। ज्यादातर जा चुके हैं। हमें ही अपने हर व्यवहार पर राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देकर स्वयं को बदलना होगा।</p>
</p>
<br />
(इस लेख में व्यक्त विचार/विश्लेषण लेखक के निजी हैं। &#39;वेबदुनिया&#39; इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।)]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 29 May 2026 09:37:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 29 May 2026 10:48:51 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[My Blog]]></category>
      <authorname>अवधेश कुमार</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Nautapa and Health: नौतपा और स्वास्थ्य: डॉक्टर की सलाह कब है जरूरी?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/health-care/when-is-a-doctors-advice-necessary-during-nautapa-126052800010_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/28/thumb/1_1/1779947173-8955.jpg"/>
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      <description><![CDATA[summer health warning signs: नौतपा (Heat Exhaustion / Heat Stress) आमतौर पर गर्मियों में शरीर के तापमान और पानी की कमी के कारण होता है। हल्के मामलों में घर पर आराम और तरल पदार्थ लेने से राहत मिल सकती है, लेकिन कभी-कभी यह स्थिति गंभीर रूप ले सकती है। ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="The picture shows a scene informing a patient about seeking medical advice during Nautapa" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/28/full/1779947173-8955.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>heatstroke symptoms and treatment:</strong> नौतपा की भीषण गर्मी में शरीर एक सीमा तक ही तापमान को नियंत्रित कर पाता है। कई बार हम सामान्य थकान या सिरदर्द समझकर उन संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो वास्तव में मेडिकल इमरजेंसी हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में घरेलू नुस्खों के बजाय तुरंत डॉक्टर की सलाह लेना जीवन रक्षक साबित हो सकता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/how-to-avoid-heat-stroke-126052600005_1.html" target="_blank">नौतपा की &#39;आग&#39; उगलती गर्मी से कैसे बचें? ये 5 सावधानियां और 10 गोल्डन रूल्स बदल देंगे आपका समर गेम!</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	यहां वे मुख्य लक्षण और स्थितियां दी गई हैं जब आपको बिना देरी किए डॉक्टर के पास जाना चाहिए:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. हीट स्ट्रोक (Heat Stroke) के गंभीर संकेत</h3>
<p>
	यह सबसे खतरनाक स्थिति है। यदि किसी व्यक्ति में ये लक्षण दिखें, तो तुरंत एम्बुलेंस बुलाएं:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>तेज बुखार:</strong> शरीर का तापमान 103°F (39.4°C) या उससे अधिक हो जाना।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>पसीना बंद होना:</strong> त्वचा का गर्म और लाल होना, लेकिन पसीना बिल्कुल न आना (यह संकेत है कि शरीर की कूलिंग प्रणाली फेल हो गई है)।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>भ्रम या बेहोशी: </strong>व्यक्ति का लड़खड़ाना, भ्रमित होना (Confusion), चिड़चिड़ापन या बेहोश हो जाना।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>तेज धड़कन: </strong>दिल की धड़कन का असामान्य रूप से तेज और भारी महसूस होना।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. गंभीर डिहाइड्रेशन (Dehydration)</h3>
<p>
	यदि पानी पीने के बाद भी स्थिति न सुधरे और निम्नलिखित लक्षण बने रहें:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>पेशाब की कमी:</strong> 6-8 घंटे से अधिक समय तक पेशाब न आना या पेशाब का रंग बहुत गहरा पीला होना।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मुंह और आंखों का सूखना: </strong>होंठों का फटना और विशेषकर बच्चों में रोते समय आंखों से आंसू न निकलना।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अत्यधिक सुस्ती: </strong>बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस होना कि उठना भी मुश्किल लगे।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/nautapa-and-health-special-precautions-for-children-and-the-elderly-126052200006_1.html" target="_blank">Nautapa health tips: नौतपा और स्वास्थ्य: बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष सावधानियां</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. लगातार उल्टियां और दस्त</h3>
<p>
	गर्मी में &#39;फूड पॉइजनिंग&#39; या लू के कारण बार-बार उल्टियां हो सकती हैं। यदि व्यक्ति कुछ भी खा-पी नहीं पा रहा है और बार-बार उल्टी हो रही है, तो शरीर में नमक और पानी का संतुलन बिगड़ सकता है। इसके लिए अस्पताल में IV Fluids (ड्रिप) की आवश्यकता हो सकती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. मांसपेशियों में ऐंठन (Heat Cramps)</h3>
<p>
	यदि हाथ-पैर या पेट की मांसपेशियों में तेज दर्द और ऐंठन हो रही हो जो आराम करने और तरल पदार्थ लेने के 1 घंटे बाद भी ठीक न हो, तो यह गंभीर इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का संकेत है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. पुराना रोग होने पर</h3>
<p>
	यदि आपको या परिवार में किसी को निम्नलिखित बीमारियां हैं, तो नौतपा में थोड़ी भी अस्वस्थता होने पर डॉक्टर से पूछें:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>हृदय रोग (Heart Disease): </strong>गर्मी दिल पर अधिक दबाव डालती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>किडनी की समस्या: </strong>डिहाइड्रेशन किडनी के लिए घातक हो सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मधुमेह (Diabetes): </strong>शुगर के मरीजों को डिहाइड्रेशन का खतरा अधिक होता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	डॉक्टर के पास जाने से पहले क्या करें? (First Aid)</h3>
<p>
	जब तक आप डॉक्टर तक पहुंचते हैं या मदद आती है, तब तक ये कदम उठाएं:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	मरीज को तुरंत ठंडी या छायादार जगह पर ले जाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	उनके शरीर पर ठंडे पानी की पट्टियां रखें या स्प्रे करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	पंखे या कूलर की हवा सीधे उन पर डालें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	यदि वे सचेत हैं, तो उन्हें धीरे-धीरे पानी या ओआरएस (ORS) पिलाएं। ध्यान रहें कि बेहोश व्यक्ति के मुंह में कुछ न डालें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सावधानी: </strong>नौतपा में अपनी मर्जी से कोई भी &#39;एंटीबायोटिक&#39; या भारी दवा न लें, क्योंकि गर्मी में कुछ दवाएं डिहाइड्रेशन को और बढ़ा सकती हैं। हमेशा डॉक्टर के परामर्श का पालन करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/take-care-of-your-health-during-nautapa-learn-10-precautions-126050500033_1.html" target="_blank">Nautapa and health: नौतपा में ऐसे रखें सेहत का ध्यान, जानें 10 सावधानियां</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 28 May 2026 11:30:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 28 May 2026 11:20:57 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[health care]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[लोकतंत्री कॉकरोच]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/literature-hindi-vyangya/democratic-cockroaches-126052800008_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/literature-hindi-vyangya/democratic-cockroaches-126052800008_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/20/thumb/1_1/1779254880-1925.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/20/thumb/1_1/1779254880-1925.jpg</image>
      <description><![CDATA[तीन दिन के भीतर 'कॉकरोच जनता पार्टी' नाम से एक फेसबुक पेज बन गया और देखते ही देखते उस पर बारह मिलियन लाइक आ गए। यह संख्या केवल सोशल मीडिया की लोकप्रियता नहीं थी; यह उन लाखों युवाओं की सामूहिक खुन्नस थी जो वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं, अस्थायी ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="cockroach janta party" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/20/full/1779254880-1925.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="cockroach janta party" /></p>
</p>
<p>
	<strong>व्यंग्य आलेख: </strong>भारतीय लोकतंत्र सचमुच एक विराट रसोईघर है, जहां समस्याएं पकती कम हैं और उनके रूपक अधिक तले जाते हैं। यहां बेरोजगारी वर्षों तक सरकारी फाइलों में धूल खाती रहती है, प्रतियोगी परीक्षाएं युवाओं की जवानी चबा जाती हैं, नियुक्तियां अदालतों और विभागों के बीच पिंगपोंग खेलती रहती हैं, लेकिन जैसे ही किसी प्रभावशाली व्यक्ति के कथित बयान में बेरोजगारों की तुलना कॉकरोच से कर दी जाती है, पूरा देश अचानक जाग उठता है।<br />
	<br />
	बाद में उस बयान पर स्पष्टीकरण भी आया कि टिप्पणी बेरोजगारों पर नहीं, फर्जी डिग्री धारियों पर की गई थी। परंतु हमारे समय का सबसे बड़ा सत्य यही है कि इस देश में स्पष्टीकरण उतनी तेजी से नहीं फैलते जितनी तेजी से अपमान फैलता है। शब्द एक बार जनता की नसों में उतर जाएं तो फिर तथ्य पीछे छूट जाते हैं और व्यंग्य आगे निकल जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	तीन दिन के भीतर &#39;कॉकरोच जनता पार्टी&#39; नाम से एक फेसबुक पेज बन गया और देखते ही देखते उस पर बारह मिलियन लाइक आ गए। यह संख्या केवल सोशल मीडिया की लोकप्रियता नहीं थी; यह उन लाखों युवाओं की सामूहिक खुन्नस थी जो वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं, अस्थायी नौकरियों और स्थगित परिणामों के बीच अपने भविष्य की हड्डियां चबाते आ रहे हैं। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	मुझे इस विषय पर लिखने के लिए इतने फोन आए कि लगा मानो देश में बेरोजगारी से अधिक रोजगार इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने में पैदा हो गया हो। कुछ लोग अत्यंत उत्साहित थे। एक कॉकरोच क्षमा करिए एक बेरोजगार ने फोन करके कहा, &#39;भाईसाहब, इस पार्टी पर जरूर लिखिए। पहली बार लगा कि युवाओं ने अपने अपमान को भी आंदोलन बना दिया।&#39; दूसरी ओर कुछ सज्जन अत्यंत क्रोधित थे। उन्होंने लगभग आदेशात्मक स्वर में कहा, &#39;आप इसका पर्दाफाश कीजिए। यह देशविरोधी मानसिकता है। कॉकरोच भी कोई नाम हुआ?&#39; मुझे लगा मानो वे नाम से अधिक इस बात से आहत थे कि व्यंग्य ने व्यवस्था की बनावटी गंभीरता पर सीधे चप्पल मार दी है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	घर पहुंचा तो श्रीमती जी ने समाचार पढ़ते ही सबसे पहले अपना पल्लू समेटा और बोलीं, &#39;हे भगवान! कोई दूसरा नाम नहीं मिला इन्हें? मुझे तो कॉकरोच का नाम सुनकर ही डर लगता है।&#39; मैंने कहा, &#39;डरिए मत, ये वही कॉकरोच हैं जो प्रतियोगी परीक्षाओं की अंधेरी रसोई में वर्षों से जीवित हैं।&#39;<br />
	<br />
	वे बोलीं, &#39;तुम मज़ाक मत करो। ये प्राणी बड़े खतरनाक होते हैं, जहां थोड़ी सी गंदगी दिखी नहीं कि पूरी टोली लेकर पहुंच जाते हैं।&#39; मैं कुछ क्षण चुप रहा, फिर मुझे लगा कि शायद यही इस समय का सबसे बड़ा राजनीतिक विश्लेषण है। व्यवस्था की गंदगी जहां बढ़ती है, वहां असंतोष के कॉकरोच स्वतः पैदा हो जाते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	दरअसल &#39;कॉकरोच जनता पार्टी&#39; नाम अपने भीतर इतना तीखा व्यंग्य समेटे हुए है कि उसने बेरोजगारी की पूरी त्रासदी को एक प्रतीक में बदल दिया। पार्टी का चुनाव चिन्ह बताया गया &#39;जूते से बचकर भागता हुआ कॉकरोच।&#39; मुझे यह प्रतीक भारतीय बेरोजगार की जीवटता का राष्ट्रीय चिह्न लगा।<br />
	<br />
	वह हर परीक्षा, हर पेपर लीक, हर रद्द भर्ती, हर आश्वासन और हर भाषण के बाद भी जीवित रहता है। उसकी उम्र निकल जाती है, लेकिन विज्ञापन नहीं निकलते। वह कोचिंग संस्थानों, लाइब्रेरियों, किराए के कमरों और साइबर कैफों में ऐसे बचा रहता है जैसे परमाणु युद्ध के बाद भी कॉकरोच बच जाने की वैज्ञानिक भविष्यवाणी सच हो गई हो।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	पार्टी के एक स्वयंभू संस्थापक अध्यक्ष का वीडियो वायरल हुआ जिसमें वह कह रहा था, &#39;हम कॉकरोच हैं, क्योंकि हमें हर जगह देखकर लोग घृणा तो करते हैं, पर हटाते नहीं।&#39; यह सुनकर मुझे लगा कि देश का युवा अब क्रांति नहीं कर रहा, वह अपनी पीड़ा का स्टैंडअप कॉमेडी संस्करण तैयार कर रहा है। वह रोते-रोते इतना थक चुका है कि अब अपनी ही दुर्दशा पर हँसने लगा है।<br />
	<br />
	शायद यही कारण है कि इस पार्टी का घोषणापत्र भी अत्यंत व्यावहारिक बताया गया। उसमें वादा किया गया कि हर बेरोजगार को प्रतिदिन कम से कम पाँच नए आवेदन भरने का अवसर दिया जाएगा, ताकि उसे यह अनुभूति बनी रहे कि राष्ट्र उसके भविष्य के प्रति गंभीर है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि किसी भी भर्ती प्रक्रिया को सात वर्ष से पहले पूरा न किया जाए, क्योंकि इतनी जल्दी नौकरी मिलने से भारतीय युवाओं का धैर्य और आध्यात्मिक विकास बाधित हो सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	हमारे समय की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यहां अवसरों से अधिक प्रेरणादायक भाषण उपलब्ध हैं। एक टीवी बहस में एक विशेषज्ञ कह रहे थे, आज के युवाओं में धैर्य की कमी है। उसी समय स्क्रीन के नीचे पट्टी चल रही थी &#39;भर्ती परीक्षा परिणाम पांचवीं बार स्थगित।&#39;<br />
	<br />
	मैंने सोचा, यदि धैर्य को ओलंपिक खेलों में शामिल कर लिया जाए तो भारतीय बेरोजगार स्वर्ण पदक लेकर लौटेंगे। वे वर्षों तक फॉर्म भर सकते हैं, फीस जमा कर सकते हैं, परीक्षा रद्द होने पर पुनः आवेदन कर सकते हैं और फिर भी उनसे कहा जाता है &#39;सकारात्मक सोचो।&#39;</p>
<p>
	 </p>
<p>
	सबसे मनोरंजक दृश्य तब दिखाई देता है जब कोई सफल व्यक्ति मंच पर खड़े होकर कहता है &#39;मेहनत करो, सफलता अवश्य मिलेगी।&#39; यह वही वाक्य है जो प्रायः वह व्यक्ति बोलता है जिसकी सफलता में मेहनत के साथ-साथ संपर्क, संसाधन, समय और सौभाग्य भी बराबर साझेदार रहे होते हैं। पर इस देश में असफलता हमेशा व्यक्ति की मानी जाती है और सफलता हमेशा व्यवस्था की उपलब्धि घोषित कर दी जाती है। बेरोजगार युवक यदि प्रश्न पूछे तो उसे अधीर कहा जाता है, और यदि चुप रहे तो उसे डेटा में बदल दिया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	इस पूरे प्रकरण का सबसे दिलचस्प पक्ष वह स्पष्टीकरण था जिसमें कहा गया कि टिप्पणी बेरोजगारों पर नहीं, फर्जी डिग्री धारियों पर की गई थी। मुझे यह सुनकर बड़ा संतोष हुआ। आखिर देश में कुछ तो लोग हैं जिन्हें कॉकरोच मानने योग्य समझा गया। लेकिन समस्या यह है कि इस देश में असली और फर्जी के बीच की रेखा इतनी धुँधली हो चुकी है कि कभी-कभी डिग्री असली होती है और व्यवस्था फर्जी निकल आती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	दरअसल &#39;कॉकरोच जनता पार्टी&#39; कोई राजनीतिक दल नहीं है। यह इस समय के घायल युवा मन का व्यंग्यात्मक घोषणापत्र है। यह उन लाखों डिग्रियों की सामूहिक हंसी है जो अलमारियों में रखी-रखी पीली पड़ रही हैं। यह उस पीढ़ी का आत्मव्यंग्य है जिसे धीरे-धीरे यह समझा दिया गया है कि उसकी प्रतिभा से अधिक मूल्यवान उसका डेटा है, उसकी योग्यता से अधिक उपयोगी उसकी चुप्पी है। यही कारण है कि आज बेरोजगारी केवल आर्थिक संकट नहीं रह गई है; यह सम्मान के क्षरण का संकट भी बन चुकी है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	और शायद इस पूरे प्रसंग का सबसे तीखा व्यंग्य यही है कि देश का युवा अब व्यवस्था से नौकरी नहीं मांगता। वह केवल इतना चाहता है कि उसे कीट-पतंगों की श्रेणी में रखने से पहले कम-से-कम उसकी मार्कशीट एक बार देख ली जाए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है...)</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 28 May 2026 10:35:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 28 May 2026 10:40:36 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[hindi vyangya]]></category>
      <authorname>सुशील कुमार शर्मा</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Veer Savarkar : स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर के बारे में 10 खास बातें]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/birth-anniversary-of-personalities/savarkar-jayanti-2026-126052800006_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/birth-anniversary-of-personalities/savarkar-jayanti-2026-126052800006_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/28/thumb/1_1/1779943811-8799.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Veer Savarkar Brith Anniversary: वीर सावरकर जयंती 28 मई मनाई जाती है। वीर सावरकर केवल क्रांतिकारी नहीं थे, बल्कि विचारक, लेखक और समाज सुधारक भी थे। स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में उनका योगदान प्रेरक और गहरा है। उन्होंने जातिवाद और अस्पृश्यता के ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Portrait of Indian revolutionary Vinayak Damodar Savarkar" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/28/full/1779943811-8799.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Veer Savarkar Biography:</strong> 28 मई का दिन वीर सावरकर के जन्मदिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य उनके साहस, क्रांतिकारी योगदान और विचारधारा को याद करना है। स्वतंत्रता आंदोलन में उनका ऐतिहासिक योगदान माना गया है। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक सशक्त क्रांतिकारी नेटवर्क तैयार किया था। अभिनव भारत संगठन के मद्देनजर उन्होंने युवाओं को संगठित करके ब्रिटिश शासन के खिलाफ क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय किया था।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	वीर सावरकर के बारे में 10 खास बातें:</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>1. पूरा नाम विनायक दामोदर सावरकर था</strong></p>
<p>
	उनका जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के भगूर गांव में हुआ था।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>2. &#39;वीर&#39; की उपाधि उनके साहस के कारण मिली</strong></p>
<p>
	ब्रिटिश शासन के खिलाफ क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका के कारण लोग उन्हें &#39;वीर सावरकर&#39; कहने लगे।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>3. अभिनव भारत संगठन की स्थापना की</strong></p>
<p>
	उन्होंने युवाओं को संगठित कर स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूत करने के लिए &#39;अभिनव भारत&#39; नामक क्रांतिकारी संगठन बनाया था।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>4. लंदन में रहकर क्रांतिकारी गतिविधियां चलाईं</strong></p>
<p>
	वे कानून की पढ़ाई के लिए London गए, जहां उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता के लिए कई क्रांतिकारियों को प्रेरित किया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>5. 1857 के विद्रोह को &#39;भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम&#39; कहा</strong></p>
<p>
	उनकी प्रसिद्ध पुस्तक &#39;द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस 1857 (The Indian War of Independence 1857) ने 1857 की क्रांति को नई दृष्टि से प्रस्तुत किया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>6. काला पानी की सजा मिली</strong></p>
<p>
	ब्रिटिश सरकार ने उन्हें दो आजीवन कारावास की सजा देकर सेल्युलर जेल (Cellular Jail) भेज दिया था।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>7. जेल में भी लेखन जारी रखा</strong></p>
<p>
	उन्होंने जेल की दीवारों पर कविताएं और विचार लिखे, जिन्हें बाद में याद करके बाहर लाया गया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>8. हिंदुत्व विचारधारा के प्रमुख प्रवर्तक थे</strong></p>
<p>
	उनकी पुस्तक हिन्दुत्व: हिन्दू कौन है? (Hindutva: Who Is a Hindu?) भारतीय राजनीति और समाज पर लंबे समय तक प्रभाव डालती रही।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>9. सामाजिक सुधारों का समर्थन किया</strong></p>
<p>
	वे जाति भेद और अस्पृश्यता के विरोधी थे तथा समाज में समानता के पक्षधर थे।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>10. 1966 में निधन हुआ</strong></p>
<p>
	26 फरवरी 1966 को मुंबई में उनका निधन हुआ। आज भी वे भारतीय इतिहास के सबसे चर्चित और प्रभावशाली व्यक्तित्वों में गिने जाते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/birth-anniversary-of-personalities/veer-savarkar-brith-anniversary-2026-126052500062_1.html" target="_blank">Savarkar Jayanti 2026: वीर सावरकर जयंती: काला पानी की यातनाएं झेलने वाले वीर क्रांतिकारी की गाथा</a></strong></p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 28 May 2026 10:04:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 28 May 2026 10:27:33 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[birth anniversary of personalities]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Savarkar Jayanti 2026: वीर सावरकर जयंती: काला पानी की यातनाएं झेलने वाले वीर क्रांतिकारी की गाथा]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/birth-anniversary-of-personalities/veer-savarkar-brith-anniversary-2026-126052500062_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/25/thumb/1_1/1779708929-0318.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Vinayak Damodar Savarkar: वीर सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के भगूर गांव में हुआ था। उनका पूरा नाम विनायक दामोदर सावरकर था। उन्हें अंग्रेजों द्वारा गिरफ्तार कर सेल्युलर जेल भेजा गया, जहां उन्होंने वर्षों तक कठोर यातनाएं ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="The painting depicts the arrest and sentencing of Veer Savarkar and his patriotism and spirit of independence" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/25/full/1779708929-0318.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Veer Savarkar Biography: </strong>वीर सावरकर जयंती हर वर्ष 28 मई को मनाई जाती है। वीर सावरकर केवल क्रांतिकारी ही नहीं, बल्कि समाज सुधारक भी थे। उन्होंने छुआछूत और जातिगत भेदभाव का विरोध किया। वे समाज में समानता और एकता के पक्षधर थे। उन्होंने कई पुस्तकें और कविताएं लिखीं। उनके लेखन में राष्ट्रभक्ति और स्वतंत्रता की भावना स्पष्ट दिखाई देती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	वीर सावरकर जीवन परिचय</h3>
<p>
	वीर सावरकर भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, क्रांतिकारी, लेखक और समाज सुधारक थे। उनका पूरा नाम विनायक दामोदर सावरकर था। वे अपने साहस, राष्ट्रवाद और क्रांतिकारी विचारों के लिए प्रसिद्ध हैं। भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में उनका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	जन्म, प्रारंभिक जीवन और शिक्षा</h3>
<p>
	वीर सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के भगूर गांव में हुआ था। उनके पिता का नाम दामोदर पंत सावरकर और माता का नाम राधाबाई था। बचपन से ही उनमें देशभक्ति और नेतृत्व की भावना थी। उन्होंने पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की। बाद में वे कानून की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गए। वहां उन्होंने भारतीय छात्रों को संगठित किया और आजादी के आंदोलन को नई दिशा दी।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	&#39;द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस 1857&#39; </h3>
<p>
	सावरकर ने भारत की आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने विदेशी शासन के खिलाफ क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लिया और युवाओं में राष्ट्रभक्ति की भावना जगाई। उनकी प्रसिद्ध तथा एक महान ऐतिहासिक पुस्तक &#39;द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस 1857&#39; (The Indian War of Independence) यह पहली बार 1909 में नीदरलैंड में प्रकाशित हुई थी, जिसे ब्रिटिश सरकार ने प्रतिबंधित कर दिया था, क्योंकि इस पुस्तक में 1857 के विद्रोह को केवल &#39;सिपाही विद्रोह&#39; के बजाय भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के रूप में प्रस्तुत किया था। </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	गिरफ्तारी और सजा</h3>
<p>
	अंग्रेज सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर आजीवन कारावास की सजा दी। उन्हें सेल्युलर जेल भेजा गया, जिसे काला पानी कहा जाता था। वहां उन्होंने कई वर्षों तक कठिन यातनाएं झेलीं। वीर सावरकर ने अंग्रेजों के खिलाफ क्रांतिकारी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने &#39;अभिनव भारत” नामक संगठन की स्थापना की। वीर सावरकर सामाजिक सुधारों के भी समर्थक थे और उन्होंने छुआछूत तथा जातिगत भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई। </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	वीर सावरकर जयंती पर संदेश</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	&#39;देशभक्ति ही सच्चा धर्म है।&#39;</p>
<p>
	&#39;स्वतंत्रता कभी मांगी नहीं जाती, उसे हासिल किया जाता है।&#39;</p>
<p>
	&#39;वीर सावरकर का जीवन साहस, त्याग और राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा देता है।&#39;</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	निधन</h3>
<p>
	वीर सावरकर का निधन 26 फरवरी 1966 को मुंबई में हुआ। वे स्वतंत्रता सेनानी, क्रांतिकारी, लेखक, समाज सुधारक और प्रखर राष्ट्रवादी विचारक के रूप में जाने जाते हैं। वीर सावरकर का जीवन आज भी हमें साहस, त्याग और राष्ट्रप्रेम की प्रेरणा देता है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 28 May 2026 09:09:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 28 May 2026 16:34:02 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[birth anniversary of personalities]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Famous works of Nehru: जवाहरलाल नेहरू के 5 ऐसे बड़े कार्य जो नहीं कर सकता था कोई दूसरा पीएम]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/inspiring-personality/nehru-contribution-to-india-126052700016_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/inspiring-personality/nehru-contribution-to-india-126052700016_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/27/thumb/1_1/1779868885-3834.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/27/thumb/1_1/1779868885-3834.jpg</image>
      <description><![CDATA[Jawaharlal Nehru 5 major works: भारत के पहले प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru ने आज़ाद भारत की नींव ऐसे समय रखी, जब देश विभाजन, गरीबी और अस्थिरता से जूझ रहा था। उस दौर में लिए गए उनके कई फैसलों ने आधुनिक भारत की दिशा तय की। आइए जानते हैं नेहरू के 5 ऐसे ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p>
		<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
			<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
				<img align="center" alt="Portrait of Indias first Prime Minister Pandit Jawaharlal Nehru with children" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/27/full/1779868885-3834.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
		</p>
	</p>
	<p>
		<strong>Pandit Nehru Achievements:</strong> पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे। उन्होंने एक ऐसे समय में देश की कमान संभाली थी जब भारत सदियों की गुलामी, विभाजन की त्रासदी, भयंकर गरीबी और सांप्रदायिक दंगों से जूझ रहा था। उस दौर में देश को बिखरने से बचाना और एक आधुनिक राष्ट्र की नींव रखना बेहद चुनौतीपूर्ण था। इतिहासकारों और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नेहरू के कई फैसले और कार्य ऐसे थे जिन्हें उनके कद, दूरदर्शिता और अंतरराष्ट्रीय छवि के बिना कोई दूसरा प्रधानमंत्री शायद ही अमली जामा पहना पाता। </p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		1. विविध रियासतों का सफल विलय और &#39;लोकतांत्रिक&#39; भारत का निर्माण</p>
	<p>
		2. &#39;गुटनिरपेक्ष आंदोलन&#39; (NAM) की शुरुआत</p>
	<p>
		3. आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे &#39;आधुनिक भारत के मंदिरों&#39; की स्थापना</p>
	<p>
		4. &#39;इसरो&#39; (ISRO) और परमाणु कार्यक्रम (DRDO/BARC) की शुरुआत</p>
	<p>
		5. &#39;हिंदू कोड बिल&#39; के जरिए महिलाओं को कानूनी अधिकार दिलाना</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		उनके 5 ऐसे ही बड़े कार्य निम्नलिखित हैं:</h3>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		1. विविध रियासतों का सफल विलय और &#39;लोकतांत्रिक&#39; भारत का निर्माण</h3>
	<p>
		विभाजन के समय भारत के सामने सबसे बड़ी चुनौती 500 से अधिक स्वायत्त रियासतों (Princely States) को एक सूत्र में बांधना था। हालांकि जमीनी स्तर पर रियासतों के एकीकरण का श्रेय सरदार वल्लभभाई पटेल को जाता है, लेकिन इसके पीछे नेहरू की लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष सोच की बड़ी भूमिका थी।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>एकता और लोकतंत्र का समन्वय: </strong>कई नव-स्वतंत्र देशों में राजशाही खत्म होने के बाद सैन्य शासन या तानाशाही आ गई। लेकिन नेहरू ने सुनिश्चित किया कि सभी रियासतें न केवल भारत का हिस्सा बनें, बल्कि वहां के नागरिकों को भी समान लोकतांत्रिक अधिकार मिलें। उन्होंने भारत को एक &#39;हिंदू पाकिस्तान&#39; बनने से रोका और बहुसंस्कृतिवाद को बढ़ावा दिया।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		2. &#39;गुटनिरपेक्ष आंदोलन&#39; (NAM) की शुरुआत</h3>
	<p>
		द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पूरी दुनिया दो महाशक्तियों- अमेरिका (पूंजीवादी ब्लॉक) और सोवियत संघ (साम्यवादी ब्लॉक) के बीच &#39;शीत युद्ध&#39; (Cold War) में बंट चुकी थी। उस समय नए आजाद हुए देशों पर किसी एक पाले में जाने का भारी दबाव था।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>स्वतंत्र विदेश नीति: </strong>नेहरू ने किसी भी महाशक्ति का पिछलग्गू बनने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने मिस्र के नासिर और युगोस्लाविया के टीटो के साथ मिलकर गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement - NAM) की नींव रखी।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>ग्लोबल लीडरशिप: </strong>इसके जरिए उन्होंने भारत को वैश्विक मंच पर एक नैतिक महाशक्ति के रूप में स्थापित किया। इस नीति के कारण भारत को अमेरिका और सोवियत संघ दोनों से मदद मिली, जो उस समय किसी अन्य नेता के अंतरराष्ट्रीय रसूख के बिना असंभव था।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		3. आईआईटी, आईआईएम और एम्स जैसे &#39;आधुनिक भारत के मंदिरों&#39; की स्थापना</h3>
	<p>
		नेहरू का मानना था कि जब तक भारत वैज्ञानिक और तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर नहीं होगा, तब तक उसकी आजादी अधूरी है। उन्होंने भारी उद्योगों, बांधों और शैक्षणिक संस्थानों को &#39;आधुनिक भारत के मंदिर&#39; कहा था।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>संस्थानों की दूरदर्शी नींव: </strong>नेहरू ने देश में IITs (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान), IIMs (भारतीय प्रबंधन संस्थान), AIIMS, और IISER जैसे शीर्ष संस्थानों की स्थापना की।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temper):</strong> उन्होंने देश के बजट का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा और अनुसंधान में लगाया। आज भारत जो दुनिया का आईटी हब बना है और वैश्विक स्तर पर हमारे डॉक्टर्स-इंजीनियर्स का जो डंका बजता है, उसकी बुनियाद नेहरू ने ही रखी थी।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		4. &#39;इसरो&#39; (ISRO) और परमाणु कार्यक्रम (DRDO/BARC) की शुरुआत</h3>
	<p>
		आज भारत अंतरिक्ष और परमाणु तकनीक के मामले में दुनिया के शीर्ष देशों में शुमार है, लेकिन इसकी शुरुआत तब हुई थी जब भारत के पास बुनियादी सुविधाएं भी नहीं थीं।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>अंतरिक्ष और परमाणु विजन: </strong>नेहरू ने महान वैज्ञानिक होमी जहांगीर भाभा के साथ मिलकर परमाणु ऊर्जा आयोग (जो बाद में BARC बना) और विक्रम साराभाई के साथ मिलकर INCOSPAR (जो बाद में ISRO बना) की स्थापना की।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>असंभव को संभव बनाना: </strong>उस दौर में जब देश में भुखमरी की स्थिति थी, तब अंतरिक्ष और परमाणु कार्यक्रम पर पैसा खर्च करने के फैसले की भारी आलोचना हो सकती थी। लेकिन नेहरू के अडिग विश्वास के कारण ये संस्थान राजनीति से दूर रहकर देश को आत्मनिर्भर बनाने में सफल रहे।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		5. &#39;हिंदू कोड बिल&#39; के जरिए महिलाओं को कानूनी अधिकार दिलाना</h3>
	<p>
		आजादी के समय भारतीय समाज अत्यधिक रूढ़िवादी था और महिलाओं के पास पैतृक संपत्ति, तलाक या गोद लेने जैसे बुनियादी कानूनी अधिकार नहीं थे। नेहरू भारत को सामाजिक रूप से भी आधुनिक बनाना चाहते थे।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>भारी विरोध के बावजूद सुधार: </strong>नेहरू ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर के साथ मिलकर &#39;हिंदू कोड बिल&#39; (Hindu Code Bill) को संसद में पेश किया। इस बिल का खुद कांग्रेस के अंदर के वरिष्ठ नेताओं और सनातन रूढ़िवादी संगठनों ने उग्र विरोध किया था।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>महिला सशक्तिकरण की नींव:</strong> नेहरू ने अपनी राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर लगा दी और इस बिल को अलग-अलग हिस्सों में (हिंदू विवाह अधिनियम, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम आदि) पारित कराया। इसके जरिए हिंदू महिलाओं को संपत्ति में अधिकार, एक विवाह का नियम और तलाक का अधिकार मिला। उस दौर में ऐसा क्रांतिकारी सामाजिक सुधार करना किसी भी अन्य प्रधानमंत्री के बस की बात नहीं थी।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/death-anniversary/jawaharlal-nehru-death-anniversary-2026-126052600038_1.html" target="_blank">Pandit Jawaharlal Nehru: पंडित जवाहरलाल नेहरू के बारे में 10 रोचक बातें</a></strong></p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 27 May 2026 13:33:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 27 May 2026 13:33:46 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[inspiring personality]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[10 things about Nautapa: नौतपा से जुड़ी 10 खास बातें]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/home-remedies/heatwave-protection-tips-126052700006_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/home-remedies/heatwave-protection-tips-126052700006_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/22/thumb/1_1/1779424032-0311.jpg"/>
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      <description><![CDATA[How to Avoid Heat Stroke: नौतपा भले ही तेज गर्मी लेकर आता हो, लेकिन भारतीय परंपरा में इसे अच्छी बारिश और समृद्ध खेती का संकेत भी माना गया है। इसलिए यह समय केवल तपिश का नहीं, बल्कि प्रकृति के संतुलन और आने वाले मानसून की तैयारी का भी प्रतीक है। आइए ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="Picture giving information about the days of Nautapa" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/22/full/1779424032-0311.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
</p>
<p>
	<strong>Summer Health Care: </strong>गर्मियों का सबसे तपता दौर यानी नौतपा भारतीय मौसम और लोकमान्यताओं में बेहद खास माना जाता है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में सूर्य की तपिश अपने चरम पर होती है, जिससे धरती खूब गर्म होती है और आगे चलकर मानसून मजबूत बनता है। ग्रामीण जीवन, खेती-किसानी और मौसम विज्ञान- तीनों में नौतपा का विशेष महत्व बताया गया है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/how-to-avoid-heat-stroke-126052600005_1.html" target="_blank">नौतपा की &#39;आग&#39; उगलती गर्मी से कैसे बचें? ये 5 सावधानियां और 10 गोल्डन रूल्स बदल देंगे आपका समर गेम!</a></strong></p>
<h3>
	आइए जानते हैं नौतपा से जुड़ी 10 खास बातें, जो इसे सामान्य गर्मी से अलग बनाती हैं।</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	1. सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते ही नौतपा की शुरुआत मानी जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	2. नौतपा के शुरुआती नौ दिन साल के सबसे गर्म दिनों में गिने जाते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	3. इस दौरान सूरज की किरणें सीधे पृथ्वी पर पड़ती हैं, जिससे गर्मी अधिक बढ़ जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	4. खाली पेट धूप में निकलना नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए कुछ खाकर ही बाहर जाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	5. शरीर में ऊर्जा बनाए रखने के लिए समय-समय पर ग्लूकोज या इलेक्ट्रोलाइट्स लेते रहें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	6. मान्यता है कि नौतपा अच्छी तरह तपे तो मानसून में अच्छी बारिश होती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	7. लू लगने के लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें या घरेलू उपाय अपनाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	8. एसी से सीधे तेज धूप में निकलने से बचें, इससे शरीर पर अचानक असर पड़ सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	9. इन दिनों पेय पदार्थों और पानी की मात्रा सामान्य दिनों से ज्यादा रखें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	10. जिन लोगों को गर्मी अधिक परेशान करती है, वे हाथ-पैरों और सिर पर मेहंदी लगाकर शरीर को ठंडक दे सकते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	नौतपा की तेज गर्मी में थोड़ी सी सावधानी आपको लू, डिहाइड्रेशन और थकावट जैसी समस्याओं से बचा सकती है। सही खानपान, पर्याप्त पानी और धूप से बचाव के उपाय अपनाकर आप इस मौसम में आसानी से सेहत संबंधी परेशानियों से बच सकते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/importance-of-nautapa-know-its-effect-on-environment-and-health-126052100007_1.html" target="_blank">Nautapa 2026: 25 मई से नौतपा: भीषण गर्मी के दिन, जानें महत्व, पर्यावरण और सेहत पर प्रभाव</a></strong></p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 27 May 2026 10:04:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 27 May 2026 10:47:32 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[home remedies]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Pandit Jawaharlal Nehru: पंडित जवाहरलाल नेहरू के बारे में 10 रोचक बातें]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/death-anniversary/jawaharlal-nehru-death-anniversary-2026-126052600038_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/death-anniversary/jawaharlal-nehru-death-anniversary-2026-126052600038_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/26/thumb/1_1/1779791267-5829.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/26/thumb/1_1/1779791267-5829.jpg</image>
      <description><![CDATA[Pandit Nehru Punyatithi 2026: पंडित जवाहरलाल नेहरू केवल एक कुशल राजनीतिज्ञ ही नहीं थे, बल्कि एक बेहतरीन लेखक और बेहद दिलचस्प व्यक्तित्व के धनी भी थे। 15 अगस्त 1947 को भारत की स्वतंत्रता के बाद पंडित नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री बने। उन्होंने लगभग ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Pictured is Indias first Prime Minister, Pandit Jawaharlal Nehru" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/26/full/1779791267-5829.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
	<br />
	<strong>Jawaharlal Nehru First Prime Minister of India: </strong>भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि हर वर्ष 27 मई को मनाई जाती है। उनका निधन 27 मई 1964 को 74 वर्ष की आयु में नई दिल्ली में दिल का दौरा पड़ने से हुआ था। नेहरू जी आधुनिक भारत के निर्माण, लोकतंत्र की मजबूती और शिक्षा के विकास में अहम योगदान देने वाले नेताओं में गिने जाते हैं। वे बच्चों के प्रिय &#39;चाचा नेहरू&#39; के नाम से भी प्रसिद्ध थे। नेहरू जी का जन्म 14 नवंबर 1889 को इलाहाबाद में हुआ था। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के बारे में कई ऐसी बातें हैं जो बहुत कम लोग जानते हैं। </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	आइए जानते हैं पंडित जवाहरलाल नेहरू से जुड़ी 10 बेहद रोचक बातें:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. कश्मीरी पंडित होने के कारण मिला &#39;नेहरू&#39; उपनाम</h3>
<p>
	जवाहरलाल नेहरू का परिवार मूल रूप से कश्मीरी पंडित था। उनके पूर्वज राज कौल 18वीं शताब्दी की शुरुआत में कश्मीर से दिल्ली आए थे। दिल्ली में उनका घर एक मुगलकालीन नहर के किनारे था, जिसके कारण स्थानीय लोग उन्हें &#39;नेहरू&#39; (नहर वाले) कहने लगे। आगे चलकर यही उनका स्थायी उपनाम बन गया।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. घर पर ही हुई शुरुआती पढ़ाई</h3>
<p>
	नेहरू जी के पिता मोतीलाल नेहरू एक बेहद अमीर और प्रसिद्ध वकील थे। उन्होंने जवाहरलाल की शुरुआती शिक्षा के लिए घर पर ही देश-विदेश के सबसे बेहतरीन निजी शिक्षक रखे थे। शुरुआती 15 साल की उम्र तक उन्होंने किसी स्कूल का मुंह नहीं देखा था तथा उनकी पढ़ाई घर पर ही हुई थी। इस उम्र तक उन्होंने किसी स्कूल में दाखिला नहीं लिया था।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. दुनिया के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों से शिक्षा</h3>
<p>
	घर पर शिक्षा प्राप्त करने के बाद, 15 वर्ष की आयु में सन् 1905 में वे आगे की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड चले गए। उन्होंने दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित स्कूलों में से एक हैरो (Harrow School) से स्कूली शिक्षा ली। इसके बाद उन्होंने ट्रिनिटी कॉलेज, कैंब्रिज (Trinity College, Cambridge University) से नेचुरल साइंस में ग्रेजुएशन किया और फिर लंदन के इन्नर टेम्पल से वकालत की पढ़ाई पूरी की।</p>
<p>
	 </p>
4. सिगार से लेकर कपड़ों तक के अनोखे किस्से
<p>
	नेहरू जी अपनी रॉयल लाइफस्टाइल के लिए जाने जाते थे। वे &#39;स्टेट एक्सप्रेस 555&#39;(State Express 555) ब्रांड की सिगार पीते थे। यह सिगार यूनाइटेड किंगडम (लंदन) की एक प्रतिष्ठित और लग्जरी सिगरेट ब्रांड है। एक बार जब नेहरू जी भोपाल गए और उनकी पसंदीदा सिगार खत्म हो गई, तो विशेष रूप से इंदौर से एक विमान के जरिए उनके लिए सिगार मंगवाई गई थी।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. कुल 9 बार गए जेल (3259 दिन)</h3>
<p>
	भारत की आजादी की लड़ाई के दौरान नेहरू जी को कुल 9 बार जेल जाना पड़ा। उन्होंने अपने जीवन के लगभग 9 साल (3,259 दिन) सलाखों के पीछे बिताए थे। उनकी पहली जेल यात्रा 1921-22 में हुई थी और आखिरी बार वे 1945 में रिहा हुए थे। </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	6. जेल की बैरक में लिखी कालजयी किताबें</h3>
<p>
	नेहरू जी एक बेहतरीन लेखक भी थे। उन्होंने जेल में मिले खाली समय का सदुपयोग लिखने में किया। उनकी प्रसिद्ध पुस्तकें जैसे &#39;डिस्कवरी ऑफ इंडिया&#39; (The Discovery of India, भारत की खोज) और &#39;ग्लिम्प्सिज ऑफ वर्ल्ड हिस्ट्री&#39; (Glimpses of World History, विश्व इतिहास की झलकियां) उन्होंने अहमदनगर किले की जेल में रहते हुए बिना किसी संदर्भ किताबों के, केवल अपनी याददाश्त के दम पर लिखी थीं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	7. &#39;चाचा नेहरू&#39; और &#39;बाल दिवस&#39; का कनेक्शन</h3>
<p>
	नेहरू जी को बच्चों से अगाध प्रेम था और वे बच्चों को देश का भविष्य मानते थे। बच्चे भी उन्हें प्यार से &#39;चाचा नेहरू&#39; कहते थे। यही कारण है कि उनके जन्मदिन यानी 14 नवंबर को पूरे देश में &#39;बाल दिवस&#39; (Childrens Day) के रूप में मनाया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	8. कपड़ों का स्टाइल बना ग्लोबल ट्रेंड</h3>
<p>
	नेहरू जी के पहनावे का स्टाइल इतना लोकप्रिय हुआ कि वह पूरी दुनिया में एक फैशन स्टेटमेंट बन गया। उनके द्वारा पहनी जाने वाली बिना कॉलर वाली जैकेट को आज भी &#39;नेहरू जैकेट&#39; कहा जाता है। प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय मैगजीन &#39;वोग&#39; (Vogue) ने भी उनके ड्रेसिंग सेंस को सराहा था। बता दें कि ये दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित और प्रभावशाली फैशन और लाइफस्टाइल मासिक पत्रिका है, जो 1892 में अमेरिका में स्थापित तथा इसे &#39;फैशन की बाइबिल&#39; भी माना जाता है। </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	9. गुलाब के फूल के पीछे का राज</h3>
<p>
	नेहरू जी हमेशा अपनी शेरवानी की जेब पर एक ताजा लाल गुलाब का फूल लगाते थे। इसके पीछे एक बेहद भावुक कारण था। कहा जाता है कि वे अपनी पत्नी कमला नेहरू की याद में यह गुलाब लगाते थे, जिनका साल 1936 में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	10. 11 बार नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित</h3>
<p>
	वैश्विक शांति के लिए काम करने और गुटनिरपेक्ष आंदोलन (Non-Aligned Movement) की नींव रखने वाले नेहरू जी को 11 बार नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकितकिया गया था, हालांकि उन्हें कभी यह पुरस्कार मिल नहीं सका। 15 अगस्त 1947 को भारत की स्वतंत्रता के बाद पंडित नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री बने और उन्होंने लगभग 17 वर्षों तक इस पद की जिम्मेदारी संभाली।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	पंडित जवाहर लाल नेहरू की पुण्यतिथि पर देशभर में उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। <br />
	<br />
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/birth-anniversary-of-personalities/veer-savarkar-brith-anniversary-2026-126052500062_1.html" target="_blank">Savarkar Jayanti 2026: वीर सावरकर जयंती: काला पानी की यातनाएं झेलने वाले वीर क्रांतिकारी की गाथा</a></strong></p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 27 May 2026 09:11:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 27 May 2026 09:35:53 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Death anniversary]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[राजकुमार चंदन का उपन्यास- विश्व शांति की अनुगूंज: समुद्र का न्याय]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/hindi-books-review/prince-chandan-s-novel-the-echo-of-world-peace-the-justice-of-the-ocean-126052600020_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/hindi-books-review/prince-chandan-s-novel-the-echo-of-world-peace-the-justice-of-the-ocean-126052600020_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/26/thumb/1_1/1779782100-233.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/26/thumb/1_1/1779782100-233.jpg</image>
      <description><![CDATA[लेखक राजकुमार चंदन का उपन्यास "समुद्र का न्याय" वर्तमान विश्व परिदृश्य के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यह लेखक की 32वीं प्रकाशित कृति है। हिंदी, अंग्रेजी, फ्रेंच, संस्कृत, मराठी और उर्दू भाषाओं सहित मालवी बोली में प्रकाशित यह अनूठा उपन्यास ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Novel Samudra Ka Nyay" class="imgCont" height="941" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/26/full/1779782100-233.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="Novel Samudra Ka Nyay" width="1672" /></p>
	</p>
	उपन्यास का परिचय</p>
<p>
	लेखक राजकुमार चंदन का उपन्यास "समुद्र का न्याय" वर्तमान विश्व परिदृश्य के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यह लेखक की 32वीं प्रकाशित कृति है। हिंदी, अंग्रेजी, फ्रेंच, संस्कृत, मराठी और उर्दू भाषाओं सहित मालवी बोली में प्रकाशित यह अनूठा उपन्यास ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ के मानवीय सिद्धांतों पर आधारित है, जो भारतीय चेतना के माध्यम से विश्व शांति की अनुगूँज पैदा करता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	लेखक के बारे में</h3>
<p>
	उपन्यास के लेखक श्री चंदन अंतर्राष्ट्रीय बुनियादी विषयों तथा विश्व शांति के विशिष्ट हस्ताक्षर हैं। इससे पूर्व, विश्व शांति पर रूस-यूक्रेन युद्ध के कथानक पर लिखा उनका उपन्यास "आई एम द टाइम" (I am the Time) वर्ष 2025 में नोबेल पुरस्कार चयन समिति के समक्ष भी सम्मिट (प्रस्तुत) हो चुका है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	कथानक और मुख्य रूपक (Plot & Allegory)</h3>
<p>
	इस उपन्यास के कथानक का केंद्र एक विशाल, आधुनिक यात्री जहाज़ (क्रूज) है। लेखक ने इस जहाज़ को पूरी दुनिया के एक रूपक (प्रतीक) के रूप में प्रस्तुत किया है, जिसमें विभिन्न देशों, संस्कृतियों और विचारधाराओं के हजारों यात्री समुद्री यात्रा कर रहे हैं। इसके माध्यम से लेखक ने वैश्विक जगत का एक बड़ा और वास्तविक चित्रण किया है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	कहानी का प्रवाह और मोड़</h3>
<ul>
	<li>
		यात्रा के प्रारंभ में सब कुछ ठीक चलता है, लेकिन धीरे-धीरे मनुष्यों की मूल नकारात्मक वृत्तियाँ उभरने लगती हैं।</li>
	<li>
		छोटी-बड़ी बातों पर मतभेद के कारण बहस शुरू होती है।</li>
	<li>
		यही बहस आगे चलकर विवाद में बदल जाती है।</li>
	<li>
		अंततः यह विवाद हिंसा का रूप धारण कर लेता है, जिसके बाद जहाज़ में उपद्रव और अराजकता का तांडव शुरू हो जाता है।</li>
	<li>
		वर्तमान विश्व की स्थिति की ही तरह, इस जहाज़ में भी कुछ शांतिवादी यात्री परिस्थितियों को शांत करने का प्रयास करते हैं, किन्तु वे सफल नहीं हो पाते।</li>
</ul>
<p>
	 </p>
<h3>
	त्रासदी और मानवीय विडंबना</h3>
<p>
	इस निरंतर उपद्रव और संघर्ष के कारण क्रूज में एक भयंकर विस्फोट हो जाता है। जहाज़ का निचला हिस्सा (हुल) क्रैक होने से उसमें पानी भरने लगता है और वह धीरे-धीरे डूबने की कगार पर पहुँच जाता है। विडंबना यह है कि इस विकट परिस्थिति में भी जहाज़ को बचाने की फिक्र किसी को नहीं होती। बदले की भावना में अंधे होकर यात्री अपने शत्रुओं से आखिरी समय तक लड़ते रहते हैं, और जहाज़... विनाश की ओर बढ़ता जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	प्रेम और सौहार्द का संदेश</h3>
<p>
	इसी अशांत यात्रा के बीच भारत के लेखक &#39;प्रशांत&#39; और ब्रिटेन की पत्रकार युवती &#39;सारा&#39; के बीच का आत्मीय प्रेम दर्शाया गया है। पूर्व और पश्चिम के इन दोनों मुख्य पात्रों का चरित्र विश्व शांति और सद्भावना के नए द्वार खोलता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	शिल्प और लेखन शैली</h3>
<p>
	लेखक ने कथानक में विश्व शांति का जो रूपक चुना है, वह बेहद अनूठा है। यह उपन्यास रोचक होने के साथ-साथ विस्मयकारी परिदृश्यों से भरा हुआ है। किसी फिल्म की भाँति गतिमान यह उपन्यास मनमोहक समुद्री सैर के साथ-साथ जीवन के गूढ़ रहस्यों से परिचय कराता हुआ आगे बढ़ता है। जहाज़ के यात्रियों की वृत्ति और उनकी मनोदशा को इसमें बेहद प्रभावी रूप से अभिव्यक्त किया गया है। घटनाओं का यह सजीव चित्रण पाठकों को भीतर तक झकझोर देता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	निष्कर्ष</h3>
<p>
	यह उपन्यास भारतीय संस्कृति के उस मूल चिंतन को प्रमुखता से रेखांकित करता है, जो मनुष्य को भीतर से शांत होने के लिए प्रेरित करती है। सम्पूर्ण कृति ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना का मूल आधार है। वर्तमान दौर में यह उपन्यास एक अमूल्य धरोहर है। यह संवेदनशील हृदयों में विश्व शांति के स्वरों की एक अद्भुत अनुगूँज पैदा करती है।</p>
<p>
	<strong>पाठकों से अपील: </strong>यदि आप भी दुनिया में शांति के पक्षधर हैं, तो "समुद्र का न्याय" उपन्यास अवश्य पढ़ें।</p>
<p>
	<strong>समीक्षक:</strong> ओम नवगोत्री (प्रकाशक, साधना कुंज, देवास)</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 26 May 2026 13:22:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 26 May 2026 13:25:17 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[book review]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[अमेरिका और ईरान युद्ध दोबारा भड़का तो क्या होगा?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/international-hindi-news/us-iran-mou-ceasefire-hormuz-strait-nuclear-program-tension-126052500071_1.html</link>
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      <description><![CDATA[US Iran MoU: अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल को लागू हुआ युद्धविराम फिलहाल बना हुआ है, लेकिन शाब्दिक नोक-झोंक और पूर्ववत तनावों के बीच उनकी बातचीत में प्रगति के संकेत भी मिल रहे हैं। अमेरिकी न्यूज़ पोर्टल एक्सिओस (Axios) के अनुसार, सबसे नई प्रगति यह ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="" class="imgCont" height="675" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/25/full/1779717477-8473.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="" width="1200" /></p>
	</p>
	<br />
	<strong>अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल को लागू हुआ युद्धविराम फिलहाल बना हुआ है, लेकिन शाब्दिक नोक-झोंक और पूर्ववत तनावों के बीच उनकी बातचीत में प्रगति के संकेत भी मिल रहे हैं।</strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	अमेरिकी न्यूज़ पोर्टल एक्सिओस (Axios) के अनुसार, सबसे नई प्रगति यह है कि एक &#39;समझौता ज्ञापन&#39; (मेमोरैंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग) दोनों देशों के बीच विवाद के सभी प्रमुख मुद्दों को संबोधित करता है। वह कथित तौर पर सभी तरह की शत्रुता को अस्थायी रूप से रोकने तथा होर्मुज़ जलडमरूमध्य और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से संबंधित है। ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाना और अमेरिका द्वारा ज़ब्त ईरानी संपत्तियों को मुक्त करना भी कथित तौर पर चर्चा का विषय है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अमेरिकी के सूत्रों के अनुसार, आशा है कि ईरान युद्धविराम की अवधि के दौरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य से जहाज़ों के गुज़रने में मदद करेगा। कोई टोल (शुल्क) नहीं लिया जाएगा। जहाज़ों का यातायात जल्द ही &#39;युद्ध-पूर्व के स्तर&#39; पर लौट जाएगा। किंतु, यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि यह युद्धविराम कितने समय तक चलेगा। अमेरिकी सूत्रों ने 60 दिनों की अवधि की बात कही है। हालांकि, ईरानी विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने सरकारी टेलीविज़न पर &#39;30 से 60 दिनों की अवधि&#39; का ज़िक्र किया।</p>
<h3>
	ईरान बारूदी सुरंगें हटाने के लिए भी तैयार </h3>
<p>
	अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार, ईरान युद्ध के दौरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बिछाई गई बारूदी सुरंगें हटाने के लिए भी तैयार है। इसके बदले में, अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी अपनी नाकेबंदी हटा सकता है और ईरान को बिना किसी रोक-टोक के तेल निर्यात करने की अनुमति दे सकता है। किंतु, इस बारे में ईरान से आलोचनात्मक प्रतिक्रियाएं भी आई हैं। वहां की समाचार एजेंसी &#39;फ़ार्स&#39; ने लिखा कि ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर गुज़रने वाले जहाज़ों की संख्या को युद्ध-पूर्व स्तर पर वापस लाने पर सहमति जताई तो है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि युद्ध से पहले जैसी &#39;मुक्त आवाजाही&#39; की स्थिति फिर से बहाल हो गई है। इसलिए, ट्रंप के बयान को &#39;अधूरा&#39; माना जा रहा है और कहा जा रहा है कि वह वास्तविकता को नहीं दर्शाता।</p>
<h3>
	ईरान के परमाणु कार्यक्रम का भविष्य</h3>
<p>
	ईरान ने कथित तौर पर वादा किया है कि वह कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं करेगा। किंतु, उसके यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को निलंबित करने के संबंध में बातचीत अभी होनी है। अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम का भंडार भी चर्चा का विषय है; उसे ईरान से संभवतः हटाया जा सकता है। इसके बदले में, अमेरिका ने ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने और उस की संपत्तियों को मुक्त करने की बात कही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने &#39;कुछ प्रगति&#39; की बात करते हुए, बहुत सावधानी भरी आशावादिता का स्वर अपनाया। उन्होंने संकेत दिया कि वे संभवतः कुछ ही दिनों के भीतर कोई सही घोषणा कर पाएंगे।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	दूसरी ओर, अमेरिका में टेक्सास राज्य के रिपब्लिकन सीनेटर टेड क्रूज़ ने X पर लिखाः अगर इसका नतीजा &#39;एक ऐसा ईरानी शासन देखने में आता है— जिसका नेतृत्व अभी भी वे इस्लामी कट्टरपंथी ही कर रहे हैं जो &#39;&#39;अमेरिका का नाश हो&#39;&#39; के नारे लगाते हैं— और जिसे अब अरबों डॉलर मिलते हैं, जो यूरेनियम को समृद्ध करने और परमाणु हथियार बनाने में सक्षम है और जो होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर प्रभावी रूप से नियंत्रण रखता है, तो यह एक विनाशकारी ग़लती होगी।&#39; </p>
<h3>
	ईरानी राष्ट्रपति को अमेरिका पर विश्वास नहीं</h3>
<p>
	ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने यथासंभव कूटनीतिक समाधान के प्रति अपनी तत्परता दिखाई, लेकिन उन्होंने वाशिंगटन के प्रति तेहरान के गहरे अविश्वास पर ज़ोर भी दिया। उन्होने कहा, &#39;हम बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन अमेरिका के साथ पिछली वार्ताओं के अनुभवों ने हमें अत्यधिक सावधानी बरतने पर मज़बूर कर दिया है।&#39;</p>
<p>
	 </p>
<p>
	ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के महीनों बाद भी होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) अभी भी बंद है। &#39;समझौता ज्ञापन&#39; वाला समाचार आने से दो ही दिन पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का कहना था कि ईरान के साथ बातचीत उम्मीद से कहीं ज़्यादा मुश्किल साबित हो रही है। यदि कोई समझौता हो भी जाता है, तब भी होर्मुज़ जलडमरूमध्य को निरापद बनाने के अभियान के समय अतिरिक्त सुरक्षा उपायों की ज़रूरत पड़ेगी।</p>
<h3>
	होर्मुज़ जलडमरूमध्य लिए एक &#39;प्लान B&#39; की वकालत</h3>
<p>
	स्वीडन के हेलसिंगबोर्ग नगर में 22 मई को हुई नाटो (NATO) के विदेश मंत्रियों की बैठक में बोलते हुए, मार्को रूबियो ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए एक &#39;प्लान B&#39; की वकालत की। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ ऐसे किसी भी समझौते का, जिसमें इस जलडमरूमध्य को — जो वैश्विक तेल और गैस बाज़ार के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण जलमार्ग है— फिर से खोलने का प्रावधान हो, हर कोई स्वागत ही करेगा। लेकिन, ईरान यदि इस जलडमरूमध्य को फिर से खोलने से इनकार कर देता है और उस पर अपना नियंत्रण बनाए रखने तथा वहां से गुज़रने के लिए टोल (शुल्क) लगाने पर अड़ा रहता है— तो एक &#39;प्लान B&#39; की ज़रूरत पड़ेगी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो ने बताया कि फ्रांस और ब्रिटेन के नेतृत्व वाला एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन, वर्तमान टकराव खत्म होने के बाद के लिए एक संभावित नौसैनिक मिशन की तैयारी कर रहा है। साथ ही उनका कहना था कि &#39;तब भी हमें एक &#39;प्लान B&#39; की ज़रूरत है, यदि कोई गोलीबारी शुरू कर दे, तो ऐसी स्थिति में आप जलडमरूमध्य को फिर से कैसे खोलेंगे?&#39; उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि यह ज़रूरी तौर पर नाटो (NATO) का एक मिशन होना चाहिए या नहीं, &#39;लेकिन इसमें निश्चित रूप से वे नाटो देश शामिल होंगे जो अपना योगदान देने में सक्षम हैं।&#39;</p>
<p>
	 </p>
<p>
	रूबियो ने स्वीडन वाले अपने वक्तव्य में इस बात पर ज़ोर दिया कि अमेरिका अपने सहयोगियों की मदद पर निर्भर नहीं है। उनके शब्दों में, &#39;संयुक्त राज्य अमेरिका यह कर सकता है, लेकिन कुछ ऐसे देश भी हैं जिन्होंने इस तरह के काम में संभावित रूप से हिस्सा लेने में दिलचस्पी दिखाई — ऐसी नौबत यदि सचमुच आती है।&#39; उन्होंने किसी खास देश का नाम नहीं लिया।<br />
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Nato" class="imgCont" height="500" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/25/full/1779717678-6988.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="" width="895" /></p>
	</p>
</p>
<h3>
	होर्मुज़ जलडमरूमध्य का खुलना विवाद का विषय</h3>
<p>
	अमेरिका और ईरान के बीच इस समय रुकी हुई बातचीत में होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलना उनके बीच विवाद के मुख्य बिंदुओं में से एक है। युद्ध शुरू होने के बाद, ईरान ने धमकियां देकर और तेलवाही टैंकरों तथा मालवाही जहाज़ों पर गोलाबारी करके इस जलडमरूमध्य से होकर जहाज़ों की आवाजाही को काफी हद तक बंद कर दिया है। इसके जवाब में, अमेरिका ने भी अपनी तरफ से ईरानी बंदरगाहों की तरफ जहाजों की आवाजाही रोक रखी है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	इस दोहरी नाकेबंदी के अलवा, होर्मुज़ जलडमरूमध्य से हो कर जहाज़ों का आना-जाना तब तक इसलिए भी ख़तरे से खाली नहीं होगा, जब तक ईरान द्वारा जलडमरूमध्य की तलहटी में बिछाई गई विस्फोटक सुरंगों को ढूंढ-ढूंढ कर नष्ट नहीं कर दिया जाता। अमेरिका के लिए यह एक बहुत ही संवेदनशील मुद्दा बन गया है। दैनिक &#39;द टेलीग्राफ़&#39; के अनुसार, अमेरिकी नौसेना, ईरान द्वारा बिछाई गई समुद्री सुरंगों को हटाने में अभी शायद सक्षम नहीं है— न तो तेज़ी से और न ही अकेले। इस काम में यूरोपीय देशों के सहयोग की भी एक प्रमुख भूमिका हो सकती है।</p>
<h3>
	अनगिनत बारूदी सुरंगें, हटाने में छह महीने लग सकते हैं</h3>
<p>
	&#39;द टेलीग्राफ़&#39; के अनुसार, ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य की तलहटी में &#39;महाम,&#39; &#39;सदाफ़,&#39; &#39;MDM,&#39; और &#39;EM-52&#39; आदि नाम वाली अनगिनत बारूदी सुरंगें फैला रखी हैं। अमेरिकी कांग्रेस (संसद) को बंद दरवाज़े के पीछे दी गई एक ब्रीफ़िंग में, पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय) ने कथित तौर पर कहा कि इन सुरंगों को हटाने के अभियान में छह महीने तक का समय लग सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	&#39;द टेलीग्राफ़&#39; के अनुसार, अमेरिकी नौसेना के पूर्व अधिकारी केविन आयर ने कहा, &#39;लगभग 518 वर्ग किलोमीटर का इलाका साफ़ करना होगा। यह बहुत बड़ा समुद्री विस्तार है।&#39; इससे पता चलता है कि ऐसा कोई अभियान कितना जटिल और जोखिम भरा होगा। जिन नौसैनिक जहज़ों की सहायता से यह काम करना होगा, उनका अभी तक असली युद्ध की परिस्थितियों में परीक्षण तक नहीं हुआ है। एक अंदरूनी सूत्र ने &#39;द टेलीग्राफ&#39; को बताया: &#39;गठबंधन के भीतर क्षमताओं का सबसे बड़ा हिस्सा यूरोपीय देशों के पास है।&#39;</p>
<h3>
	अमेरिका के लिए यूरोपीय समर्थन</h3>
<p>
	अतीत के रूस-अमेरिकी &#39;शीत युद्ध&#39; वाले समय के बाद के दौर में अमेरिका ने मुख्य रूप से विमान वाहक जहाज़ों, पनडुब्बियों और विध्वंसक जहाज़ों पर ध्यान केंद्रित किया, जबकि कई यूरोपीय देशों ने बारूदी सुरंगों का पता लगाने की अपनी विशेष क्षमताओं को बनाए रखा। &#39;द टेलीग्राफ&#39; के अनुसार, जर्मनी बारूदी सुरंगों का पता लगाने वाले अपने जहाज़ &#39;फुल्दा&#39; को पहले ही तैनात कर चुका है। बताया जा रहा है कि ब्रिटेन भी स्वचालित बारूदी सुरंग-खोजी जहाज़ और गोताखोर उपलब्ध करा रहा है, जबकि इटली बारूदी सुरंगें हटाने वाले जहाज़ भेज रहा है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका के दो जहाज— यूएस पायोनियर और यूएस चीफ़— पहले ही फ़ारस की खाड़ी की ओर रवाना हो चुके हैं। हालांकि, वहां पहुंचने के बाद उन्हें काफ़ी मदद की ज़रूरत पड़ सकती है। माना जाता है कि बारूदी सुरंगों संबंधी किसी संभावित सफ़ाई अभियान की स्थिति में अमेरिका अपने यूरोपीय सहयोगी देशों के साथ मिलकर ही कोई कदम उठाएगा।</p>
<h3>
	अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी IEA की चेतावनी</h3>
<p>
	अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ उपयोगी बातचीत की आशा में उस पर नए हमलों को फिलहाल रोक रखा है। यदि फिर से युद्ध भड़का तो कच्चे तेल की कीमतों में विस्फोटक बढ़ोतरी होनी तय है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने कहा है कि ज़रूरत पड़ने पर वह और अधिक तेल-भंडारों से तेल जारी करने के लिए तैयार है, लेकिन दीर्घकालिक नुकसान से बचने के लिए हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को जल्द खोलना भी बेहद ज़रूरी है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	ईरान के भौगोलिक नियंत्रण वाले इस 21 किलोमीटर चौड़े जलमार्ग के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है। IEA ने चेतावनी दी कि यदि हॉर्मुज जलडरूमध्य दोबारा नहीं खुला या ऊर्जा निर्यात के वैकल्पिक रास्ते नहीं बनाए गए, तो दुनिया तेल की आपूर्ति के और भी बड़े संकट में फंस सकती है।</p>
<h3>
	वैश्विक ऊर्जा संकट की सबसे गंभीर चेतावनी</h3>
<p>
	ऐसे में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने वैश्विक ऊर्जा संकट को लेकर अब तक की सबसे गंभीर चेतावनी जारी की है। एजेंसी के प्रमुख फ़ेथ बिरोल ने कहा है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुज़रने वाला यातायात ठप होने से दुनिया के बाजारों से प्रतिदिन करीब 1.4 करोड़ बैरल तेल की आपूर्ति कम हो गई है। वैश्विक तेल भंडार तेजी से घट रहे हैं। मार्च में IEA और उसके 32 सदस्य देशों ने रिकॉर्ड 40 करोड़ बैरल तेल बाज़ार में जारी किया था, लेकिन अब ये भंडार भी लगभग ख़त्म होने की स्थिति में पहुंच गए हैं। फ़ेथ बिरोल ने चेतावनी दी कि हालत यदि सुधरी नहीं, तो जुलाई तक वैश्विक तेल बाज़ार ख़तरे की घंटी वाले &#39;&#39;रेड ज़ोन&#39;&#39; में पहुंच सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	&#39;&#39;रेड ज़ोन&#39;&#39; का अर्थ ऐसी स्थिति है, जब वैश्विक तेल आपूर्ति मांग के दबाव को संभालने में असमर्थ हो जाए। यानी, तेल भंडार इतने कम हो जाएं कि कोई भी अतिरिक्त बाधा आपूर्ति संकट और कीमतों में तेज़ उछाल पैदा कर दे। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें फिलहाल 104 से 105 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी हैं, जबकि ईरान युद्ध शुरू होने से पहले यह क़रीब 72 डॉलर प्रति बैरल थी। बिरोल पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि वर्तमान तेल संकट 1973, 1979 और 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान आए तेल संकटों से भी ज्यादा गंभीर है। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजार से प्रतिदिन 1.4 करोड़ बैरल तेल पहले ही ग़ायब हो चुका है।</p>
<h3>
	दोबारा युद्ध भड़का तो क्या होगा?</h3>
<p>
	मई की शुरुआत में कच्चे तेल की क़ीमतें 114 डॉलर तक पहुंची थीं। यदि युद्ध दोबारा भड़का तो क़ीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं। IEA के अनुसार, 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान 18.27 करोड़ बैरल तेल जारी किया गया था, लेकिन इस बार 40 करोड़ बैरल जारी करने के बावजूद संकट काबू में नहीं आ रहा है। बिरोल ने कहा कि इस भयावः स्थिति का सबसे अधिक असर गरीब देशों पर पड़ेगा, ख़ासकर अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में तो खाद्य संकट तक पैदा हो सकता है! कहने की आवश्यकता नहीं कि तब भारत में भी कुहराम मच जायेगा। किंतु, प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक अंध विरोधी तब भी तेल के अकाल के लिए उन्हें ही दोषी ठहराएंगे। </p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 25 May 2026 19:15:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 25 May 2026 19:31:35 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[International News]]></category>
      <authorname>राम यादव</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[बच्चे की मौत से न टूटे किसी मां-बाप का सपना, यह यूपी सरकार का संकल्प]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/my-blog/up-govt-infant-mortality-rate-reduction-cm-yogi-health-reforms-126052500080_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2016-04/03/thumb/1_1/1459655467-5199.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Infant Mortality Rate UP: इन्फेंट मोर्टलिटी रेट यानी शिशु मृत्यु दर। स्वास्थ्य क्षेत्र का यह शब्द सुनने में भले तकनीकी लगे, लेकिन इसका वास्तविक अर्थ बेहद भावनात्मक और संवेदनशील है। जन्म लेने वाले प्रति हजार बच्चों में कितने नवजात 28 दिन के भीतर दम ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="" class="imgCont" height="330" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2016-04/03/full/1459655467-5199.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="" width="525" /></p>
	<br />
	Infant Mortality Rate UP: इन्फेंट मोर्टलिटी रेट यानी शिशु मृत्यु दर। स्वास्थ्य क्षेत्र का यह शब्द सुनने में भले तकनीकी लगे, लेकिन इसका वास्तविक अर्थ बेहद भावनात्मक और संवेदनशील है। जन्म लेने वाले प्रति हजार बच्चों में कितने नवजात 28 दिन के भीतर दम तोड़ देते हैं, यही इसका पैमाना है। लेकिन सच यह है कि यह सिर्फ आंकड़ा नहीं होता। यह उन मां-बाप के सपनों की असमय मौत भी होती है, जिन्होंने अपने बच्चे के साथ भविष्य के हजारों सपने देखे होते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	यही वजह है कि किसी भी देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को मापने के लिए शिशु मृत्यु दर को सबसे संवेदनशील मानक माना जाता है। चुनौती इसलिए और बड़ी हो जाती है क्योंकि जन्म के पहले साल में मरने वाले बच्चों में करीब 70 प्रतिशत नवजात 28 दिन के भीतर ही दुनिया छोड़ देते हैं। ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में यह स्थिति और अधिक गंभीर होती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	मार्च 2017 में मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने स्वास्थ्य क्षेत्र को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया। केंद्र सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार और तकनीकी हस्तक्षेप के कारण उत्तर प्रदेश में शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर केंद्र और प्रदेश सरकार की साझा प्रतिबद्धता, तकनीकी नवाचार और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के जरिए लगातार प्रयास हो रहे हैं कि शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर तक लाया जा सके। आंकड़े बताते हैं कि सरकार ने इस दिशा में महत्वपूर्ण काम किया है और भविष्य में और बेहतर परिणामों की उम्मीद भी जगाई है।</p>
<h3>
	क्या कहते हैं आंकड़े</h3>
<p>
	भारत अगर विकसित राष्ट्र बनने का सपना देख रहा है तो उसकी पहली शर्त स्वस्थ भारत है। लेकिन जिस देश में हर वर्ष हजारों नवजात जन्म के कुछ दिनों या महीनों के भीतर दम तोड़ देते हों, वहां विकास की गति स्वतः प्रभावित होती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार “सशक्त और समर्थ भारत” की बात करते हैं। यह सपना तभी साकार होगा जब देश के हर नागरिक, विशेषकर माताओं और नवजातों को “गोल्डन टाइम” के भीतर गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सके।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण और सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम  के आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक दशक में भारत ने शिशु मृत्यु दर कम करने में उल्लेखनीय प्रगति की है। उत्तर प्रदेश, जो कभी देश में सर्वाधिक शिशु मृत्यु दर वाले राज्यों में गिना जाता था, अब तेजी से सुधार की दिशा में आगे बढ़ रहा है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	एक समय प्रदेश में प्रति हजार जीवित जन्म पर 60 से अधिक बच्चों की मौत दर्ज होती थी। अब यह आंकड़ा घटकर लगभग 38 के आसपास पहुंच चुका है। राष्ट्रीय औसत अभी करीब 25 है। इतनी बड़ी आबादी वाले राज्य में कुछ अंकों की गिरावट भी हजारों बच्चों की जिंदगी बचाने के बराबर मानी जाती है। हालांकि चुनौतियां अब भी कम नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, कुपोषण, एनीमिया, समय पर इलाज न मिलना और स्वास्थ्य सुविधाओं की सीमित पहुंच अभी भी बड़ी बाधाएं हैं।<br />
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="" class="imgCont" height="800" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/19/full/1776540656-0726.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="" width="1200" /></p>
</p>
<h3>
	केंद्र और प्रदेश की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से बदली तस्वीर</h3>
<p>
	विशेषज्ञ मानते हैं कि उत्तर प्रदेश में सुधार के पीछे केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन बड़ी वजह है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान, जननी सुरक्षा योजना, आयुष्मान भारत, मिशन इंद्रधनुष और पोषण अभियान जैसी योजनाओं ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को नई दिशा दी है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	प्रदेश सरकार ने जिला अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाइयों, न्यूबॉर्न स्टेबलाइजेशन यूनिट और मातृ-शिशु स्वास्थ्य विंग की संख्या बढ़ाई गई। गांव स्तर तक आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं के जरिए गर्भवती महिलाओं और नवजातों की निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया गया।<br />
	 </p>
<p>
	सबसे महत्वपूर्ण पहल “गोल्डन ऑवर” को लेकर हुई। जन्म के बाद शुरुआती एक घंटे और बीमारी की स्थिति में शुरुआती कुछ घंटों को नवजात के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार समय पर ऑक्सीजन, संक्रमण नियंत्रण, टीकाकरण और पोषण उपलब्ध हो जाए तो नवजात मौतों के बड़े हिस्से को रोका जा सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	इसी सोच के तहत प्रदेश में 102 और 108 एम्बुलेंस सेवाओं का तेजी से विस्तार किया गया। कई जिलों में माताओं और नवजातों के लिए विशेष रेफरल ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकसित किए गए ताकि गंभीर स्थिति में मरीज को जल्द बड़े अस्पताल तक पहुंचाया जा सके।</p>
<h3>
	तकनीक और डिजिटल हेल्थ बनेगी नई ताकत</h3>
<p>
	विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में डिजिटल हेल्थ टेक्नोलॉजी शिशु मृत्यु दर कम करने में बड़ी भूमिका निभा सकती है। टेलीमेडिसिन, मोबाइल हेल्थ यूनिट और कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए दूरदराज क्षेत्रों तक विशेषज्ञ सलाह पहुंचाई जा सकती है। यदि हर जिले में अत्याधुनिक मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र विकसित किए जाएं और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को वास्तविक अर्थों में “पहला इलाज केंद्र” बनाया जाए तो शिशु मृत्यु दर में और तेजी से कमी लाई जा सकती है। उत्तर प्रदेश सरकार इस क्षेत्र में बेहतर करने का लगातार प्रयास कर रही है।</p>
<h3>
	शिशु की मौत सिर्फ आंकड़ा नहीं, बेहद भावनात्मक मामला</h3>
<p>
	दरअसल, शिशु मृत्यु दर केवल स्वास्थ्य का आंकड़ा नहीं है। यह किसी भी समाज की संवेदनशीलता और विकास का आईना भी है। जिस देश के बच्चे सुरक्षित होंगे, वही देश आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत होगा।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	उत्तर प्रदेश ने पिछले वर्षों में सकारात्मक प्रगति जरूर की है, लेकिन लक्ष्य अभी दूर है। सरकार का प्रयास है कि हर मां और हर नवजात को “गोल्डन टाइम” में सस्ती, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा मिल सके। क्योंकि सरकार की नजर में हर पैदा होने वाला बच्चा देश का भविष्य है और इस भविष्य का असमय अंत नहीं होना चाहिए। प्रदेश सरकार ने जिस प्रतिबद्धता के साथ शिशु मृत्यु दर कम करने की दिशा में अभियान चलाया, उससे स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यापक सुधार की उम्मीद भी मजबूत हुई है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	देश की करीब 140 करोड़ आबादी में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी लगभग एक-छठा है। यह देश का सबसे युवा राज्य भी माना जाता है। यहां प्रजनन आयु वर्ग की आबादी अधिक होने के कारण जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या भी सबसे ज्यादा है। इसलिए प्रदेश के स्वास्थ्य आंकड़ों में मामूली सुधार या गिरावट का असर सीधे राष्ट्रीय औसत पर पड़ता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	ऐसे में शिशु मृत्यु दर को कम करना उत्तर प्रदेश सरकार के लिए सिर्फ स्वास्थ्य नीति नहीं, बल्कि एक व्यापक सामाजिक संकल्प बन गया है। एक ऐसा संकल्प, जो स्वस्थ भारत के जरिए “सशक्त और समर्थ भारत” के सपने से सीधे जुड़ता है।</p>
<p>
	Edited by: Vrijendra Singh Jhala </p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 25 May 2026 17:39:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 25 May 2026 20:46:00 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[My Blog]]></category>
      <authorname>गिरीश पांडेय</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Story for Kids: बच्चों के लिए कल्पनाशील कहानी: आइसक्रीम वाला पहाड़ और पिघलती खुशियां]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/kids-stories/kids-story-the-ice-cream-mountain-and-melting-happiness-126052500043_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/kids-stories/kids-story-the-ice-cream-mountain-and-melting-happiness-126052500043_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/25/thumb/1_1/1779701624-1465.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/25/thumb/1_1/1779701624-1465.jpg</image>
      <description><![CDATA[Activity Filled Story for Kids: टिल्लू के गांव 'धूपपुर' में इस बार इतनी गर्मी थी कि सूरज दादा हटने का नाम ही नहीं ले रहे थे। सड़कें तवे जैसी गरम थीं और कूलर भी गर्म हवा फेंक रहे थे। टिल्लू रात को छत पर लेटा तारों को देख रहा था और सोच रहा था- 'काश! ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="A lovely story for children to enjoy a cool summer afternoon, with an ice cream mountain as the image caption" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/25/full/1779701624-1465.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Mountain with Ice Cream:</strong> यहां बच्चों के लिए एक बेहद कल्पनाशील और प्यारी कहानी है, जो गर्मी की दोपहर में उन्हें ठंडी ताजगी का एहसास कराएगी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	टिल्लू के गांव &#39;धूपपुर&#39; में इस बार इतनी गर्मी थी कि सूरज दादा हटने का नाम ही नहीं ले रहे थे। सड़कें तवे जैसी गरम थीं और कूलर भी गर्म हवा फेंक रहे थे। टिल्लू रात को छत पर लेटा तारों को देख रहा था और सोच रहा था- &#39;काश! कहीं से ढेर सारी बर्फ मिल जाए।&#39;</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	अचानक हुआ चमत्कार</h3>
<p>
	अगली सुबह जब टिल्लू की आंख खुली, तो उसने अपनी खिड़की के बाहर कुछ अजीब देखा। पूरा गांव सफेद चमक रहा था। टिल्लू भागा-भागा बाहर आया और उसकी आंखें फटी की फटी रह गईं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	गांव के मैदान में एक विशाल &#39;आइसक्रीम का पहाड़&#39; खड़ा था! वह पहाड़ तीन परतों वाला था- सबसे नीचे गुलाबी स्ट्रॉबेरी, बीच में सफेद वैनिला और सबसे ऊपर चॉकलेट की चोटी। उस पर चेरी के बड़े-बड़े पत्थर लगे थे और चॉकलेट सिरप की नदियां बह रही थीं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	गांव में जश्न</h3>
<p>
	पूरे गांव के बच्चे- चुन्नू, मुन्नी, गोलू और पिंकी- अपनी-अपनी कटोरियां और चम्मच लेकर पहाड़ की ओर भागे। टिल्लू ने चिल्लाकर कहा, &#39;रुको दोस्तों! यह पहाड़ जादुई है, चलो इसका आनंद लेते हैं!&#39;</p>
<p>
	 </p>
<p>
	सबने मिलकर खूब आइसक्रीम खाई। किसी ने चॉकलेट वाली चोटी पर चढ़कर &#39;स्लाइड&#39; किया, तो किसी ने स्ट्रॉबेरी वाली घाटी में लुका-छिपी खेली। गर्मी का नामो-निशान मिट गया था।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	पिघलती खुशियां और एक बड़ी मुश्किल</h3>
<p>
	जैसे-जैसे दोपहर हुई, सूरज दादा और तेज चमकने लगे। तभी टिल्लू ने देखा कि पहाड़ के किनारे से चॉकलेट की &#39;बाढ़&#39; आने लगी है। पहाड़ पिघल रहा था!</p>
<p>
	 </p>
<p>
	मुन्नी उदास होकर बोली, &#39;टिल्लू, अगर यह पिघल गया तो हमारी खुशियां भी पानी बन जाएंगी।&#39;</p>
<p>
	 </p>
<p>
	टिल्लू ने हार नहीं मानी। उसने अपनी &#39;बाल सेना&#39; को इकट्ठा किया और एक प्लान बनाया। उसने कहा, &#39;इसे पिघलने से तो हम नहीं रोक सकते, लेकिन हम इसे बर्बाद होने से बचा सकते हैं!&#39;</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	टिल्लू का मास्टर प्लान</h3>
<p>
	गांव के हर घर से बड़े-बड़े मटके, बाल्टियां और डिब्बे मंगवाए गए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	बच्चों ने मिलकर पिघलती हुई आइसक्रीम को डिब्बों में भरना शुरू किया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	जो आइसक्रीम ज्यादा पिघल गई थी, उसे पास के सूखे तालाब की ओर मोड़ दिया गया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	देखते ही देखते, पूरा तालाब &#39;आइसक्रीम शेक&#39; की झील बन गया! टिल्लू ने गांव के उन बुजुर्गों और बीमार लोगों के घर तक आइसक्रीम पहुंचाई जो धूप में बाहर नहीं आ सकते थे।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	एक मीठी याद</h3>
<p>
	शाम होते-होते पहाड़ छोटा हो गया, लेकिन गांव का हर बच्चा और हर जानवर खुश था। गर्मी अब डरावनी नहीं लग रही थी क्योंकि सबके पास &#39;आइसक्रीम का स्टॉक&#39; था।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	सूरज ढलते समय ऐसा लगा जैसे वह भी मुस्कुरा रहा हो। टिल्लू समझ गया कि खुशियां चाहें कितनी भी जल्दी क्यों न पिघल रही हों, अगर उन्हें दूसरों के साथ बांट लिया जाए, तो उनका स्वाद हमेशा के लिए यादगार बन जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	इस कहानी से बच्चों को क्या सीख मिलेगी?</h3>
<p>
	<strong>शेयरिंग (बांटना): </strong>अकेले मजे लेने के बजाय सबके साथ खुशियां बांटना ज्यादा बेहतर होता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मुसीबत में समझदारी:</strong> जब चीजें खराब हो रही हों (पहाड़ पिघल रहा हो), तो रोने के बजाय समाधान ढूंढना चाहिए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>एकता:</strong> साथ मिलकर काम करने से बड़ी से बड़ी मुश्किल आसान हो जाती है।<br />
	<br />
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/kids-stories/nalanda-ki-suno-kahani-126042000045_1.html" target="_blank">बाल एकांकी: नालंदा की सुनो कहानी</a></strong></p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 25 May 2026 15:20:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 25 May 2026 15:09:34 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[kids stories]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[बढ़ते तापमान की चुनौती और बचाव के मार्ग]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/my-blog/the-challenge-of-rising-temperatures-and-ways-to-protect-yourself-126043000033_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/my-blog/the-challenge-of-rising-temperatures-and-ways-to-protect-yourself-126043000033_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2025-11/10/thumb/1_1/1762765324-439.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2025-11/10/thumb/1_1/1762765324-439.jpg</image>
      <description><![CDATA[भारत में तापमान वृद्धि की दर चिंताजनक है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) और जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (आईपीसीसी) की रिपोर्टों के अनुसार, भारत का औसत वार्षिक तापमान 1901 के बाद से लगभग 0.7 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। हालांकि यह संख्या ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="Climate change" class="imgCont" height="675" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2025-11/10/full/1762765324-439.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="Climate change" width="1200" /></p>
</p>
<p>
	भारत, वर्तमान में तपती धरती, सुलगते आसमान के चलते भीषण जलवायु संकट के मुहाने पर खड़ा है। सूरज के तीखे तेवर और लू के थपेड़ों ने न केवल जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है, बल्कि मानवों से लेकर बेजुबान पशु-पक्षियों तक के कंठ में शुष्कता भरते हुए, अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।<br />
	<br />
	हाल के वर्षों में उत्तर भारत से लेकर दक्षिण तक और पूर्व से लेकर पश्चिम तक, पारा लगातार 45 से 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच रहा है। यह बढ़ता तापमान केवल एक मौसमी बदलाव नहीं, बल्कि प्रकृति द्वारा इंसानों को दी जा रही एक गंभीर चेतावनी है। यदि हम वैज्ञानिक आंकड़ों पर गौर करें, तो भारत में गर्मी का यह प्रकोप ऐतिहासिक रिकॉर्ड तोड़ रहा है, जो हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का रेड अलर्ट है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/home-remedies/loo-lagne-par-gharelu-upchar-126043000031_1.html" target="_blank">गर्मी में यदि लू लग जाए तो करें ये घरेलू उपचार</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	भारत में बढ़ते तापमान के सांख्यिकीय साक्ष्य और कारण</h3>
<p>
	भारत में तापमान वृद्धि की दर चिंताजनक है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) और जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (आईपीसीसी) की रिपोर्टों के अनुसार, भारत का औसत वार्षिक तापमान 1901 के बाद से लगभग 0.7 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है।<br />
	<br />
	हालांकि यह संख्या छोटी लग सकती है, लेकिन इसके प्रभाव भयावह होकर विनाशकारी बन रहे हैं। पिछले एक दशक में भारत ने अपने इतिहास के सबसे गर्म वर्षों का अनुभव किया है। गर्मी के इस विकराल रूप के पीछे कई वैज्ञानिक और मानवीय कारण उत्तरदायी हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	भूमंडलीय तापन (ग्लोबल वार्मिंग) और जलवायु परिवर्तन के कारण वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों का जमाव बढ़ा है। अल-नीनो जैसे समुद्री प्रभाव भारत में मानसून को अनियमित करते हैं और ग्रीष्मकाल की अवधि को लंबा खींच देते हैं। इसके साथ ही, अनियंत्रित शहरीकरण ने कंक्रीट के जंगलों को जन्म दिया है।<br />
	<br />
	शहरों में कंक्रीट और डामर की अधिकता के कारण अर्बन हीट आइलैंड का प्रभाव देखा जा रहा है, जिससे मिट्टी कम पानी सोख रही है। जहां शहरों का तापमान आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। वनों की अंधाधुंध कटाई और बढ़ते कार्बन उत्सर्जन ने जैसे आग में घी डालने का काम किया है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	भीषण गर्मी और लू के बहुआयामी दुष्प्रभाव साफ झलक रहे है। तेज गर्मी का प्रभाव केवल शारीरिक पसीने तक सीमित नहीं है, इसके आर्थिक और पारिस्थितिक परिणाम अत्यंत घातक हैं। स्वास्थ्य के मोर्चे पर, हीट स्ट्रोक (लू), गंभीर डिहाइड्रेशन और शरीर के अंगों की विफलता जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। एक अनुमान के अनुसार, बढ़ते तापमान के कारण भारत की श्रम क्षमता में भारी गिरावट आ रही है, क्योंकि दोपहर के समय बाहरी काम करना असंभव होता जा रहा है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	कृषि क्षेत्र में, अत्यधिक गर्मी गेहूं और अन्य रबी फसलों को पकने से पहले ही सुखा देती है, जिससे खाद्य सुरक्षा पर संकट मंडराने लगा है। इसके अलावा, बेजुबान प्राणियों का संकट और भी अधिक है। सड़कों पर घूमने वाले पशु और आसमान में उड़ने वाले पक्षियों के लिए पानी के प्राकृतिक स्रोत सूख रहे हैं, जिससे जैव विविधता को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है। भू-जल स्तर का लगातार नीचे गिरना इस संकट को एक जल-युद्ध की ओर धकेल रहा है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	ऐसे में हमें बचाव के पारंपरिक मार्ग मिट्टी और प्रकृति का संरक्षण करने की आवश्यकता है। गर्मी से लड़ने के लिए हमारे पूर्वजों ने जो मार्ग अपनाए थे, वे आज भी सबसे अधिक प्रासंगिक और वैज्ञानिक हैं।<br />
	<br />
	पीने के पानी की कपड़े की छागल और मिट्टी के मटकों का उपयोग इसका बेहतरीन उदाहरण है। फ्रिज के पानी के विपरीत, मटके व छागल का पानी वाष्पीकरण की प्रक्रिया के माध्यम से प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है, जो शरीर के इलेक्ट्रोलाइट संतुलन को बनाए रखता है और गले के संक्रमण से भी बचाता है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	इसी प्रकार, भारतीय संस्कृति में प्याऊ लगाना और जल सेवा को परम धर्म माना गया है। सार्वजनिक स्थानों पर ठंडे जल की व्यवस्था करना न केवल एक सामाजिक उत्तरदायित्व है, बल्कि इस भीषण गर्मी में राहगीरों के लिए जीवनदान से कम नहीं है।<br />
	<br />
	वहीं हमें अपनी छतों और बालकनियों में पक्षियों के लिए मिट्टी के सकोरों में पानी रखने की परंपरा को अधिक से अधिक अपनाना होगा। ग्रामीण भारत में आज भी खस के पर्दों और छप्पर का उपयोग घरों को ठंडा रखने के लिए किया जाता है, जो आधुनिक एयर कंडीशनिंग का एक सस्ता और पर्यावरण अनुकूल विकल्प है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	सामूहिक और प्राचीन प्रयासों के साथ आधुनिक उपाय और खान-पान का अनुशासन भी गर्मी में स्वस्थ रहने के लिए जरूरी है। आज पंखे, कूलर और एसी हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुके हैं, किंतु इनका विवेकपूर्ण उपयोग आवश्यक है। स्वास्थ्य और ऊर्जा संरक्षण हेतु एसी को 24 से 26 डिग्री पर चलाना और कूलर के साथ वेंटिलेशन का ध्यान रखना जरूरी है, ताकि उमस न बढ़े। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	घर के अनावश्यक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बंद रखकर भी हम आंतरिक ऊष्मा कम कर सकते हैं। आधुनिक विज्ञान भी अब पारंपरिक जीवनशैली का समर्थन कर रहा है।<br />
	<br />
	आज के दौर में हाइड्रेशन के लिए केवल सादा पानी पर्याप्त नहीं है। शरीर में लवणों की पूर्ति के लिए नींबू-पानी, ताजी छाछ, बेल का शरबत, नारियल पानी और कच्चे आम का पना जैसे देसी पेय पदार्थों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। खान-पान में तरबूज, खरबूजा, खीरा, संतरा, नारियल पानी और ककड़ी आदि जैसे मौसमी फलों का समावेश अनिवार्य है, जिनमें जल की मात्रा 90% से अधिक होती है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए सूती और हल्के रंगों के ढीले कपड़े पहनना, दोपहर 12 से 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचना और सिर को ढककर रखना बुनियादी बचाव हैं। आधुनिक तकनीक में कूल रूफ पेंट प्रचलित हो रहे है। वर्टिकल गार्डनिंग जैसे नवाचार भी घरों के भीतर के तापमान को 2-4 डिग्री तक कम करने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अंततः, बढ़ता तापमान केवल एक मौसमी समस्या नहीं है, बल्कि यह हमारे विकास के मॉडल पर भी प्रश्नचिह्न है। यदि हम चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ियां ठंडी छांव का अनुभव करें, तो हमें तात्कालिक बचाव के साथ-साथ दीर्घकालिक समाधानों पर काम करना होगा।<br />
	<br />
	वृक्षारोपण को एक उत्सव बनाना होगा और जल संरक्षण को जीवन का हिस्सा। प्रकृति का बढ़ता पारा हमें सचेत कर रहा है कि सतर्कता, संयम और संवेदनशीलता ही इस संकट से सुरक्षा का मूल मंत्र हैं। आइए, हम खुद को सुरक्षित रखें और प्यासे बेजुबानों के लिए पानी की एक बूंद सुनिश्चित कर मानवता का धर्म भी निभाएं।<br />
	<br />
	(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है...)<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/10-effective-ways-to-avoid-the-heat-in-the-summer-sun-126042800050_1.html" target="_blank">Summer health tips: गर्मी में धूप से बचने के 10 प्रभावी उपाय</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 25 May 2026 15:07:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 29 May 2026 15:51:47 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[My Blog]]></category>
      <authorname>सपना सीपी साहू 'स्वप्निल'</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[आल्हा जयंती कैसे और कब मनाई जाती है?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/religious-article/alha-and-udal-jayanti-2026-126052200033_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/religious-article/alha-and-udal-jayanti-2026-126052200033_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/22/thumb/1_1/1779443284-8084.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Legendary warriors Alha-Udal: आल्हा जयंती परंपरागत भारतीय लोक और धर्म संस्कृति में एक महत्वपूर्ण उत्सव है, खासकर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में मनाया जाता है। इन्हें भक्ति, वीरता और न्यायप्रियता के प्रतीक के रूप में देखा ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Picture depicting the tales of bravery of Aalha, the great brave warrior of Bundelkhand, on his birth anniversary" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/22/full/1779443284-8084.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Alha Jayanti celebration:</strong> बुंदेलखंड के महान और अदम्य साहसी योद्धा वीर आल्हा की जयंती हर साल 25 मई को मनाई जाती है। आल्हा और उनके छोटे भाई ऊदल (उदयसिंह), महोबा के राजा परमाल (जिन्हें इतिहास में परमर्दी देव चंदेल के नाम से जाना जाता है) के महान सेनापति थे, जिन्होंने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए 52 युद्ध लड़े थे और वे किसी भी युद्ध में पराजित नहीं हुए।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/nautapa-start-date-and-end-date-2026-126052200004_1.html" target="_blank">Navtapa 2026 dates: कब से कब तक रहेगा नौतपा?</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	आइए जानते हैं कि आल्हा जयंती कैसे और क्यों मनाई जाती है:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	आल्हा जयंती कैसे मनाई जाती है?</h3>
<p>
	आल्हा जयंती मुख्य रूप से बुंदेलखंड क्षेत्र (उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्से) में बेहद उत्साह और गर्व के साथ मनाई जाती है। इसे मनाने के पारंपरिक तरीके निम्नलिखित हैं:</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. &#39;आल्हा खंड&#39; (आल्हा गायन) का आयोजन</h3>
<p>
	इस दिन बुंदेलखंड के गांवों, चौपालों और शहरों में विशेष रूप से "आल्हा गायन" के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	महोबा के राजकवि जगनिक, जिन्हें &#39;परमाल रासो&#39; के नाम से भी जाना जाता है, द्वारा रचित &#39;आल्हा खंड&#39; (वीर रस से भरपूर महाकाव्य) को ढोलक और मंजीरों की थाप पर ऊंचे स्वर में गाया जाता है। बुंदेली भाषा में गाए जाने वाले ये गीत बहुत लोकप्रिय हैं। इसे सुनने के लिए भारी भीड़ उमड़ती है, क्योंकि इसके शब्दों और धुनों में आज भी युवाओं के रोंगटे खड़े कर देने वाला वीर रस होता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. मैहर माता मंदिर (सतना, मरणोपरांत मान्यता) में विशेष पूजा</h3>
<p>
	आल्हा को मां शारदा (सरस्वती) का परम भक्त माना जाता है। मान्यता है कि मां शारदा के आशीर्वाद से ही उन्हें अमरत्व का वरदान मिला था। इस दिन मध्य प्रदेश के महोबा और मैहर (शारदा भवानी मंदिर) में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। लोक मान्यता है कि आज भी हर सुबह मंदिर के कपाट खुलने से पहले वीर आल्हा अदृश्य रूप से आकर मां शारदा की सबसे पहली पूजा और श्रृंगार करके जाते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. शौर्य यात्राएं और प्रतिमा पूजन</h3>
<p>
	बुंदेलखंड के कई शहरों में वीर आल्हा और ऊदल की मूर्तियों पर माल्यार्पण किया जाता है। राजपूत और स्थानीय समाज के लोग इस दिन भव्य शौर्य यात्राएं निकालते हैं और उनके पराक्रम को याद करते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	आल्हा जयंती का महत्व</h3>
<p>
	<strong>अमरता की लोक मान्यता: </strong>ऐसी लोक कथाएं हैं कि आल्हा ने अपने जीवन के अंतिम समय में युद्ध छोड़कर संन्यास ले लिया था और वे आज भी अमर हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अंतिम युद्ध: </strong>आल्हा-ऊदल ने अपना आखिरी और सबसे प्रसिद्ध युद्ध दिल्ली के शासक पृथ्वीराज चौहान के साथ लड़ा था, जिसमें उनके भाई ऊदल वीरगति को प्राप्त हुए थे, लेकिन आल्हा ने अद्भुत वीरता दिखाई थी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सांस्कृतिक धरोहर: </strong>यह जयंती बुंदेलखंड की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने का माध्यम है। इसके जरिए आने वाली पीढ़ी को देश और माटी के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीरों की कहानियों से परिचित कराया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	आल्हा जयंती हर वर्ष उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। यह त्योहार भाईचारे, वीरता और ऐतिहासिक गौरव का प्रतीक है। यह पर्व प्रसिद्ध लोक नायक आल्हा और ऊदल की वीरता, पराक्रम और युद्ध कौशल को समर्पित है। आल्हा जयंती केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह वीरता, परिवार, और देशभक्ति की भावना को भी जागृत करता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-nakshatra-sign/sun-transit-in-rohini-nakshatra-2026-dos-and-donts-126052200011_1.html" target="_blank">Nautapa 2026: रोहिणी नक्षत्र में सूर्य गोचर 2026: नौतपा के 9 दिनों में क्या करें और क्या न करें?</a></strong></p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 25 May 2026 10:40:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 25 May 2026 11:32:21 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Religious Article]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[summer cooling tips: नौतपा में आग उगलेगी धरती, जानें Nautapa में घर पर राहत पाने के 7 घरेलू तरीके]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/home-remedies/relief-from-heatstroke-at-home-126052500013_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/home-remedies/relief-from-heatstroke-at-home-126052500013_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/25/thumb/1_1/1779684187-1697.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/25/thumb/1_1/1779684187-1697.jpg</image>
      <description><![CDATA[relief from heatstroke at home: नौतपा की तपन से बचने के लिए केवल शरीर को ही नहीं, बल्कि अपने आस-पास के वातावरण को भी ठंडा रखना जरूरी है। बिना एसी (AC) के भी आप कुछ पारंपरिक और देसी घरेलू तरीकों से अपने घर को प्राकृतिक रूप से ठंडा रख सकते हैं।]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="A scene showing home remedies to keep the house cool during Nautapa" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/25/full/1779684187-1697.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>stay hydrated in summer:</strong> गर्मी और उमस के कारण शरीर में हीट स्ट्रेस (नौतपा) होना आम बात है। नौतपा केवल थकान या पसीना नहीं है, बल्कि यह शरीर के तापमान और हाइड्रेशन बैलेंस को प्रभावित करता है। सही समय पर राहत न मिले तो यह हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति में बदल सकता है। घर पर कुछ सरल घरेलू उपाय अपनाकर आप अपने शरीर को ठंडा और स्वस्थ रख सकते हैं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/take-care-of-your-health-during-nautapa-learn-10-precautions-126050500033_1.html" target="_blank">Nautapa and health: नौतपा में ऐसे रखें सेहत का ध्यान, जानें 10 सावधानियां</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	यहां नौतपा से राहत पाने के प्रभावी तरीके दिए गए हैं:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. खिड़की और दरवाजों का सही प्रबंधन</h3>
<p>
	दिन में बंद, रात में खुला: सुबह 10 बजे के बाद घर की सभी खिड़कियां और दरवाजे बंद कर दें और भारी पर्दे डाल दें। शाम 7 बजे के बाद, जब बाहर की हवा ठंडी हो जाए, तब खिड़कियां खोलें ताकि Cross-Ventilation (क्रॉस-वेंटिलेशन) से घर की गर्म हवा बाहर निकल सके।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सफेद पर्दों का प्रयोग: </strong>गहरे रंग के पर्दे गर्मी को सोखते हैं। हल्के रंग या सफेद सूती पर्दों का उपयोग करें, ये सूरज की रोशनी को रिफ्लेक्ट (Reflect) कर देते हैं।</p>
<h3>
	 </h3>
<h3>
	2. खस और गीले कपड़ों का देसी नुस्खा</h3>
<p>
	खस के पर्दे: पुराने समय में खिड़कियों पर खस की टट्टियां या चटाइयां लगाई जाती थीं। आप अपनी खिड़की के पर्दों पर पानी का छिड़काव कर सकते हैं। जब बाहर की गर्म हवा गीले कपड़े से छनकर आती है, तो वह कमरे को प्राकृतिक कूलर की तरह ठंडा कर देती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	गीली चादर: रात में सोने से पहले अगर कमरे की खिड़की पर एक गीली चादर टांग दी जाए, तो कमरे का तापमान 2-3 डिग्री तक कम हो सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. फर्श की कूलिंग (Mopping)</h3>
<p>
	दिन में कम से कम दो-तीन बार फर्श पर पोछा लगाएं। फर्श पर पानी रहने से वाष्पीकरण (Evaporation) होता है, जो कमरे की गर्मी खींच लेता है। पोछे के पानी में थोड़ा नमक या नीम का तेल मिलाने से ताजगी भी बनी रहती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. इंडोर प्लांट्स (Indoor Plants)</h3>
<p>
	घर के अंदर ऐसे पौधे लगाएं जो हवा को शुद्ध और ठंडा रखते हैं। एलोवेरा, स्नेक प्लांट, मनी प्लांट और एरेका पाम प्राकृतिक रूप से कमरे की नमी बनाए रखते हैं और ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाते हैं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-nakshatra-sign/sun-transit-in-rohini-nakshatra-2026-dos-and-donts-126052200011_1.html" target="_blank">Nautapa 2026: रोहिणी नक्षत्र में सूर्य गोचर 2026: नौतपा के 9 दिनों में क्या करें और क्या न करें?</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. कूलर के लिए स्मार्ट ट्रिक</h3>
<p>
	अगर आप कूलर का उपयोग कर रहे हैं, तो उसमें बर्फ डालने के बजाय उसकी घास (Honey-comb pads) को अच्छे से साफ रखें। कूलर को खिड़की पर ऐसी जगह लगाएं जहां से उसे ताजी हवा मिले; बंद कमरे में कूलर केवल उमस (Humidity) बढ़ाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	6. किचन की गर्मी को कंट्रोल करें</h3>
<p>
	नौतपा के दौरान दोपहर में भारी खाना पकाने या लंबे समय तक गैस जलाने से बचें। खाना बनाने के बाद एग्जॉस्ट फैन (Exhaust Fan) जरूर चलाएं ताकि किचन की गर्म हवा पूरे घर में न फैले।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	7. छत को ठंडा रखें</h3>
<p>
	यदि आप सबसे ऊपर वाली मंजिल (Top Floor) पर रहते हैं, तो शाम के समय छत पर पानी का छिड़काव करें। इससे छत की तपिश कम होगी और रात को कमरा जल्दी ठंडा होगा। सफेद &#39;चूना&#39; या &#39;हीट रिफ्लेक्टिव पेंट&#39; भी छत पर लगवाना एक बेहतरीन स्थायी समाधान है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	एक मजेदार टिप: &#39;Ice Fan&#39; हैक</h3>
<p>
	एक बड़े कटोरे में ढेर सारी बर्फ लें और उसे टेबल फैन (Table Fan) के ठीक सामने रख दें। पंखे की हवा जब बर्फ से टकराकर आप तक आएगी, तो आपको बिल्कुल एसी जैसी ठंडक का अहसास होगा।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	नौतपा के इन 9 दिनों में ये छोटे बदलाव आपको लू और बेचैनी से बचा सकते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/nautapa-and-health-special-precautions-for-children-and-the-elderly-126052200006_1.html" target="_blank">Nautapa health tips: नौतपा और स्वास्थ्य: बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष सावधानियां</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 25 May 2026 10:05:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 25 May 2026 10:18:38 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[home remedies]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Nautapa 2026: नौतपा क्या है? जानें इसके कारण और लक्षण]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/what-is-nautapa-learn-about-its-causes-and-symptoms-126050800004_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/what-is-nautapa-learn-about-its-causes-and-symptoms-126050800004_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/08/thumb/1_1/1778213814-239.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/08/thumb/1_1/1778213814-239.jpg</image>
      <description><![CDATA[What is Nautapa: नौतपा भारतीय ज्योतिष और लोक परंपरा का एक ऐसा शब्द है, जो भीषण गर्मी का प्रतीक माना जाता है। जब सूर्य की तपिश अपने चरम पर होती है और धरती 'भट्टी' की तरह तपने लगती है, तब उस समय को नौतपा कहा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, जब सूर्य ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p>
		<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
			<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
				<img align="center" alt="नौतपा के दौरान प्रचंड गर्मी और सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश संबंधी जानकारी देता फोटो" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/08/full/1778213814-239.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
		</p>
	</p>
	<p>
		<strong>Nautapa causes and symptoms:</strong> नौतपा भारतीय ज्योतिष और खगोल विज्ञान की एक ऐसी अवधारणा है, जो गर्मी के भीषणतम दिनों को परिभाषित करती है। जब सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी पर पड़ती हैं और तापमान अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच जाता है, तो उस अवधि को &#39;नौतपा&#39; कहा जाता है। सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में रहने के शुरुआती 9 दिन जो सबसे अधिक गर्म माने जाते हैं, जिन्हें &#39;नौतपा&#39; कहा जाता है। इस वर्ष यह 25 मई 2026 से शुरू होकर 2 जून 2026 तक जारी रहेगा।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/nautapa-2026-rohini-nakshatra-kab-se-kab-tak-rahega-date-timing-126050400019_1.html" target="_blank">नौतपा 2026: रोहिणी नक्षत्र कब से शुरू होगा और कितने दिन तक रहेगा? जानिए पूरी जानकारी</a></strong></p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		आइए इसके वैज्ञानिक कारण, ज्योतिषीय आधार और शरीर पर दिखने वाले लक्षणों को विस्तार से समझते हैं। </h3>
	<p>
		 </p>
	<p>
		1. नौतपा क्या है?</p>
	<p>
		2. नौतपा के लक्षण</p>
	<p>
		3. नौतपा के खगोलीय एवं वैज्ञानिक कारण</p>
	<p>
		4. ज्योतिषीय कारण</p>
	<p>
		5. सावधानी की सलाह</p>
	<h3>
		 </h3>
	<h3>
		1. नौतपा क्या है?</h3>
	<p>
		नौतपा का शाब्दिक अर्थ है &#39;नौ दिनों का ताप&#39;। हिंदी कैलेंडर के अनुसार, ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो उस समय के शुरुआती 9 दिनों को &#39;नौतपा&#39; कहा जाता है। यह आमतौर पर मई के अंत या जून की शुरुआत में आता है। मान्यता है कि यदि इन 9 दिनों में खूब गर्मी पड़े, तो मानसून के दौरान बारिश बहुत अच्छी होती है।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		2. नौतपा के लक्षण</h3>
	<p>
		जब नौतपा शुरू होता है, तो वातावरण में निम्नलिखित बदलाव और लक्षण दिखाई देते हैं:</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>भीषण गर्मी और लू: </strong>तापमान अपने सामान्य स्तर से 2 से 5 डिग्री तक ऊपर चला जाता है। गर्म हवाएं (लू) तेज हो जाती हैं।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>नमी की कमी: </strong>हवा में रूखापन बढ़ जाता है, जिससे त्वचा में खिंचाव और होंठ सूखने जैसी समस्याएं होती हैं।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>जल स्रोतों का सूखना: </strong>तालाबों और नदियों का जलस्तर तेजी से गिरता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>अचानक आंधी-तूफान: </strong>शाम के समय धूल भरी आंधी या गरज-चमक के साथ हल्की बूंदाबांदी होना भी इसका एक लक्षण है, जो बढ़ती गर्मी के कारण बने कम दबाव के क्षेत्र (Low Pressure Zone) की वजह से होता है।</p>
	<h3>
		 </h3>
	<h3>
		3. नौतपा के कारण</h3>
	<p>
		नौतपा के पीछे वैज्ञानिक और ज्योतिषीय दोनों कारण महत्वपूर्ण हैं:</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		खगोलीय एवं वैज्ञानिक कारण</h3>
	<p>
		इस दौरान पृथ्वी के उत्तरी गोलार्द्ध (Northern Hemisphere) पर सूर्य की किरणें लंबवत (Vertical) पड़ती हैं।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी कम महसूस होती है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		वायुमंडल में नमी कम हो जाती है और शुष्क हवाएं (लू) चलने लगती हैं, जिससे धरती का तापमान तेजी से बढ़ता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		4. ज्योतिषीय कारण</h3>
	<p>
		सूर्य को &#39;अग्नि&#39; का कारक और चंद्रमा को &#39;शीतलता&#39; का कारक माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रोहिणी नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है, जो शीतलता का प्रतीक है। जब सूर्य (अग्नि तत्व) रोहिणी नक्षत्र में आता है, तो वह चंद्रमा की शीतलता को सोख लेता है। शीतलता के अभाव में पृथ्वी पर ताप अत्यधिक बढ़ जाता है।</p>
	<h3>
		 </h3>
	<h3>
		5. सावधानी की सलाह</h3>
	<p>
		नौतपा के दौरान निर्जलीकरण/डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) और हीट स्ट्रोक का खतरा सबसे ज्यादा होता है। इस दौरान अधिक से अधिक पानी पिएं, सूती कपड़े पहनें और दोपहर के समय बाहर निकलने से बचें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/take-care-of-your-health-during-nautapa-learn-10-precautions-126050500033_1.html" target="_blank">Nautapa and health: नौतपा में ऐसे रखें सेहत का ध्यान, जानें 10 सावधानियां</a></strong></p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Sat, 23 May 2026 13:05:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 23 May 2026 16:43:48 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[astrology articles]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Nautapa 2026: 25 मई से नौतपा: भीषण गर्मी के दिन, जानें महत्व, पर्यावरण और सेहत पर प्रभाव]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/health-care/importance-of-nautapa-know-its-effect-on-environment-and-health-126052100007_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/05/thumb/1_1/1777977938-8706.jpg"/>
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      <description><![CDATA[nautapa health care: इस बार 25 मई से 2 जून तक नौतपा रहने वाला है। नौतपा केवल थकावट या पसीने की समस्या नहीं है; यह शरीर के हाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस पर भी असर डालता है। यदि समय रहते सावधानियां न बरती जाएं, तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="The picture provides information regarding health stability during Nautapa" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/05/full/1777977938-8706.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
</p>
<p>
	<strong>what is heat exhaustion: </strong>नौतपा, जिसे आम बोलचाल में गर्मी या हीट स्ट्रेस कहा जाता है, शरीर का वह स्थिति है जब अत्यधिक गर्मी और उमस के कारण शरीर अपनी सामान्य कार्यक्षमता खो देता है। यह मुख्यतः हीट एक्सॉस्टेशन (Heat Exhaustion) और हीट स्ट्रोक (Heat Stroke) जैसी स्थितियों की शुरुआत हो सकती है। वर्ष 2026 में नौतपा 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक जारी रहेगा तथा इन 9 दिनों तक भीषण गर्मी का सामना करना पड़ेगा।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/what-is-nautapa-learn-about-its-causes-and-symptoms-126050800004_1.html" target="_blank">Nautapa 2026: नौतपा क्या है? जानें इसके कारण और लक्षण</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	नौतपा केवल थकावट या पसीने की समस्या नहीं है; यह शरीर के हाइड्रेशन और इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस पर भी असर डालता है। यदि समय रहते सावधानियां न बरती जाएं, तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में बदल सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	नौतपा का महत्व: </h3>
<p>
	आयुर्वेद और लोक मान्यताओं के अनुसार, &#39;जितना तपेगा नौतपा, उतनी होगी वर्षा&#39;। यानी नौतपा के दौरान जितनी अधिक गर्मी और कम दबाव का क्षेत्र बनेगा, समुद्र से उठने वाली मानसूनी हवाएं उतनी ही तेजी से मैदानी इलाकों की ओर बढ़ेंगी, जिससे भविष्य में अच्छी फसल और वर्षा की संभावना बढ़ जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	नौतपा के प्रभाव और लक्षण (Symptoms)</h3>
<p>
	भीषण गर्मी के कारण प्रकृति और मानव शरीर पर स्पष्ट प्रभाव दिखाई देते हैं:</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	पर्यावरण में लक्षण:</h3>
<p>
	तेज लू (Heat Waves): गर्म और शुष्क हवाओं का चलना।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>जल स्तर में गिरावट:</strong> नदियों, तालाबों और कुओं के जल स्तर का तेजी से नीचे जाना।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>आंधी-तूफान: </strong>अत्यधिक गर्मी के कारण कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) बनता है, जिससे शाम के समय धूल भरी आंधियां चलने लगती हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	शरीर पर प्रभाव (Health Symptoms):</h3>
<p>
	अत्यधिक तापमान के कारण शरीर में निम्नलिखित लक्षण दिखाई दे सकते हैं:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>डिहाइड्रेशन:</strong> शरीर में पानी की भारी कमी होना।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सनस्ट्रोक (लू लगना): </strong>तेज बुखार, सिर चकराना और बेहोशी महसूस होना।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>त्वचा की समस्याएं:</strong> सनबर्न, घमौरियां और अत्यधिक पसीना आना।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>पाचन तंत्र में गड़बड़ी</strong>: भूख कम लगना और जी मिचलाना।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/take-care-of-your-health-during-nautapa-learn-10-precautions-126050500033_1.html" target="_blank">Nautapa and health: नौतपा में ऐसे रखें सेहत का ध्यान, जानें 10 सावधानियां</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Sat, 23 May 2026 11:57:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 23 May 2026 16:38:34 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[health care]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[बाल कविता: टप्पा टप्पा टुन टुन]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/kids-poems/poem-tappa-tappa-tun-tun-126052200054_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/kids-poems/poem-tappa-tappa-tun-tun-126052200054_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/22/thumb/1_1/1779449291-5119.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/22/thumb/1_1/1779449291-5119.jpg</image>
      <description><![CDATA[टप्पा टप्पा टुन टुन। सुबह सुनहरी गुनगुन। चिड़िया दाना चुनचुन। मुन्नी हंसती खुनखुन। टप्पा टप्पा टुन टुन। सूरज निकला सुन सुन। झरना झरता झुनझुन। फूल उठाती चुनचुन। टप्पा टप्पा टुन टुन। मम्मी बोली सुनसुन।
जरा नहा लो चुनमुन। चुनमुन रोती फुन फुन।]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="बच्चों की मनोरंजक कविता पर मां-बेटी का चित्र" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/22/full/1779449291-5119.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	टप्पा टप्पा टुन टुन।</p>
<p>
	सुबह सुनहरी गुनगुन।</p>
<p>
	चिड़िया दाना चुनचुन।</p>
<p>
	मुन्नी हंसती खुनखुन।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	टप्पा टप्पा टुन टुन।</p>
<p>
	सूरज निकला सुन सुन।</p>
<p>
	झरना झरता झुनझुन।</p>
<p>
	फूल उठाती चुनचुन।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	टप्पा टप्पा टुन टुन।</p>
<p>
	मम्मी बोली सुनसुन।</p>
<p>
	जरा नहा लो चुनमुन।</p>
<p>
	चुनमुन रोती फुन फुन।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	टप्पा टप्पा टुन टुन।</p>
<p>
	पढ़ने की हो धुनधुन।</p>
<p>
	पढ़ो किताबें चुनचुन।</p>
<p>
	शुनगुन प्यारी शुनगुन।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	टप्पा टप्पा टुन टुन,</p>
<p>
	घंटी बोले घुनघुन।</p>
<p>
	पायल बाजे रुनझुन।</p>
<p>
	बूंद बरसती झुनझुन।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	टप्पा टप्पा टुन टुन।</p>
<p>
	मन के सपने बुन बुन।</p>
<p>
	मेहनत करती चुनमुन।</p>
<p>
	मिले सफलता सुन सुन।<br />
	<br />
	(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है...)</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 22 May 2026 16:51:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 22 May 2026 17:05:09 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[kids poems]]></category>
      <authorname>सुशील कुमार शर्मा</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Ganga Dussehra Bhog: गंगा दशहरा पर मैया को अर्पित करें ये विशेष भोग]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/indian-food-recipe/ganga-dussehra-bhog-prasad-2026-126052200047_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/22/thumb/1_1/1779447170-336.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/22/thumb/1_1/1779447170-336.jpg</image>
      <description><![CDATA[Ganga Puja Prasad: गंगा दशहरा पर 10 की संख्या का बड़ा महत्व है। यदि आप भी गंगा मैया से आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं तो यह कोशिश करें कि आप जो भी भोग- जैसे मालपुए, सत्तू के लड्डू या फल, अर्पित कर रहे हैं तो उनकी संख्या 10 ही हो।]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Picture giving information about the things to be offered to Mother Ganga on the occasion of Ganga Dussehra" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/22/full/1779447170-336.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Ganga Maiyas Bhog: </strong>गंगा दशहरा के पावन पर्व पर मां गंगा की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। इस दिन मैया को उनकी पसंदीदा चीजों का भोग लगाने से घर में सुख, समृद्धि और शांति आती है। चूंकि यह त्योहार भीषण गर्मी के मौसम या ज्येष्ठ मास में आता है, इसलिए मैया के भोग में शीतलता प्रदान करने वाली चीजों को मुख्य रूप से शामिल किया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अगर आप भी इस गंगा दशहरा (25 मई 2026) पर मां गंगा को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो इन विशेष भोग सामग्रियों को अपनी पूजा में जरूर शामिल करें:</strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. सत्तू का भोग (सबसे महत्वपूर्ण)</h3>
<p>
	गंगा दशहरा पर सत्तू का भोग लगाना और इसका दान करना सबसे उत्तम माना जाता है। जौ या चने के सत्तू में घी और शक्कर (या गुड़) मिलाकर लड्डू या पेड़े बनाएं और मां गंगा को अर्पित करें। यह भोग शीतलता का प्रतीक है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. मौसमी फल (तरबूज और खरबूजा)</h3>
<p>
	गर्मी के इस मौसम में आने वाले रसीले फल जैसे तरबूज, खरबूजा, और आम मां गंगा को बहुत प्रिय हैं। विशेष रूप से खरबूजे का भोग लगाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. खीर या सफेद मिठाई</h3>
<p>
	मां गंगा को सफेद रंग अत्यंत प्रिय है। आप दूध, चावल और मखाने से बनी खीर का भोग लगा सकते हैं। इसके अलावा काजू कतली, रसगुल्ला या पेड़े जैसी सफेद मिठाइयों का भोग भी मैया को लगाया जा सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. मालपुए का भोग</h3>
<p>
	कई स्थानों पर गंगा दशहरा के दिन मां गंगा को मालपुए का भोग लगाने की विशेष परंपरा है। शुद्ध देसी घी में बने मालपुए मैया को अर्पित करने से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।</p>
<h3>
	 </h3>
<h3>
	5. मिश्री और माखन</h3>
<p>
	भगवान कृष्ण की तरह मां गंगा को भी मिश्री और माखन का भोग बहुत भाता है। यह भोग मन को शांति और ठंडक प्रदान करने वाला माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	भोग लगाते समय ध्यान रखें ये &#39;विशेष नियम&#39;:</h3>
<p>
	<strong>संख्या 10 का महत्व: </strong>गंगा दशहरा पर &#39;10&#39; की संख्या का बड़ा महत्व है। कोशिश करें कि आप जो भी भोग (जैसे मालपुए, लड्डू या फल) अर्पित कर रहे हैं, उनकी संख्या 10 हो।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>10 दीपक और फल:</strong> पूजा के समय मां गंगा के सामने 10 दीपक जलाएं, 10 प्रकार के फल या फूल अर्पित करें और 10 ब्राह्मणों या जरूरतमंदों में इस भोग को प्रसाद के रूप में बांटें। इससे अनजाने में हुए सभी पापों से मुक्ति मिलती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 22 May 2026 16:30:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 22 May 2026 16:36:13 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[indian food]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Summer diet plan: गर्मी से बचने के लिए जानें आयुर्वेदिक पेय और डाइट प्लान]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/ayurveda/ayurvedic-summer-drinks-126051200029_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/ayurveda/ayurvedic-summer-drinks-126051200029_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/12/thumb/1_1/1778580804-2274.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/12/thumb/1_1/1778580804-2274.jpg</image>
      <description><![CDATA[summer health care: आयुर्वेद में पेय का महत्व सिर्फ प्यास बुझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर के वात, पित्त और कफ (त्रिदोष) के संतुलन और स्वास्थ्य सुधार में मदद करता है। यह शरीर की ताजगी, पाचन शक्ति, और ऊर्जा बढ़ाने के लिए उपयुक्त होता है। यहां ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="हेल्थ से संबंधित आयुर्वेदिक पेय, समर डाइट प्लान के अंतर्गत भोजन की जानकारी देता फोटो" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/12/full/1778580804-2274.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 732px; height: 715px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>stay cool in summer:</strong> आयुर्वेद के अनुसार, ज्येष्ठ की भीषण गर्मी और नौतपा के दौरान शरीर में &#39;पित्त&#39; दोष बढ़ जाता है। इसे शांत करने के लिए &#39;शीतवीर्य&#39; यानी ठंडी तासीर वाले आहार और विहार की आवश्यकता होती है। यहां गर्मी से लड़ने के लिए प्रभावी आयुर्वेदिक पेय और डाइट प्लान दिया गया है:<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/ways-to-avoid-heat-wave-126042000012_1.html" target="_blank">Summer Health: लू से बचना है? तो ये 5 &#39;देसी ड्रिंक्स&#39; हैं आपके रक्षक</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	1. सर्वोत्तम आयुर्वेदिक पेय (Ayurvedic Drinks)</p>
<p>
	2. आदर्श समर डाइट प्लान (Diet Plan)</p>
<p>
	3. आयुर्वेद के अनुसार कुछ &#39;खास&#39; टिप्स</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. सर्वोत्तम आयुर्वेदिक पेय (Ayurvedic Drinks)</h3>
<p>
	ये पेय न केवल प्यास बुझाते हैं, बल्कि शरीर को भीतर से ठंडा रखते हैं:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>आम पन्ना: </strong>कच्चे आम को उबालकर बनाया गया यह पेय &#39;लू&#39; का काल है। यह विटामिन C और इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर होता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>बेल का शरबत: </strong>बेल (Stone Apple) पेट की गर्मी को शांत करता है और पाचन तंत्र को लू से बचाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>चंदन और खस का शरबत: </strong>चंदन और खस की तासीर अत्यंत ठंडी होती है। यह घमौरियों और शरीर की जलन को कम करता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मिश्री-सौंफ का पानी:</strong> रात भर सौंफ को पानी में भिगो दें, सुबह मिश्री मिलाकर छानकर पिएं। यह आंखों की जलन और एसिडिटी के लिए रामबाण है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>ताजा मट्ठा (छाछ):</strong> आयुर्वेद में मट्ठे को &#39;धरती का अमृत&#39; कहा गया है। इसमें थोड़ा भुना जीरा और काला नमक मिलाकर पीने से पाचन सुधरता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/indian-food-recipe/healthy-sattu-dishes-126041500006_1.html" target="_blank">Summer Food: समर स्पेशल सत्तू के 5 हेल्दी और स्वादिष्ट व्यंजन</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. आदर्श समर डाइट प्लान (Diet Plan)</h3>
<p>
	गर्मी में आपका भोजन &#39;हल्का, ताजा और जलयुक्त&#39; होना चाहिए।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	सुबह का समय (7:00 AM - 9:00 AM)</h3>
<p>
	रात भर भीगे हुए बादाम या किशमिश से दिन की शुरुआत करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	नाश्ते में जौ का दलिया, पोहा या ताजे फलों का सेवन करें। जौ (Barley) शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में सर्वश्रेष्ठ अनाज है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	दोपहर का भोजन (12:00 PM - 1:30 PM)</h3>
<p>
	भोजन में लौकी, तोरई, टिंडा और कद्दू जैसी पानी वाली सब्जियां शामिल करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	दाल में मूंग की दाल का प्रयोग करें क्योंकि यह सबसे सुपाच्य होती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	गेहूं की रोटी में थोड़ा जौ का आटा मिलाकर खाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	खाने के साथ खीरा और ककड़ी का सलाद अवश्य लें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	शाम का नाश्ता (4:00 PM - 5:00 PM)</h3>
<p>
	नारियल पानी या मौसमी फल जैसे तरबूज, खरबूजा या अंगूर लें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	तली-भुनी चीजों की जगह सत्तू का शरबत पिएं।</p>
<h3>
	 </h3>
<h3>
	रात का भोजन (7:30 PM - 8:30 PM)</h3>
<p>
	रात का खाना बहुत हल्का रखें। मूंग की दाल की खिचड़ी या दलिया सबसे अच्छा विकल्प है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	सोने से पहले एक गिलास गुनगुने दूध में आधा चम्मच गुलकंद मिलाकर पिएं। यह गहरी नींद लाने और पित्त शांत करने में मदद करता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	आयुर्वेद के अनुसार कुछ &#39;खास&#39; टिप्स</h3>
<p>
	<strong>मिट्टी के घड़े का पानी: </strong>फ्रिज के बर्फ जैसे ठंडे पानी के बजाय मटके का पानी पिएं। यह प्राकृतिक रूप से शीतल और क्षारीय (Alkaline) होता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>विरुद्ध आहार से बचें: </strong>जैसे दूध के साथ नमक या खट्टे फल न लें। इससे स्किन एलर्जी का खतरा बढ़ जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मसालों पर नियंत्रण: </strong>लाल मिर्च, लहसुन और अदरक का प्रयोग कम करें। इनके स्थान पर धनिया, पुदीना और हरी इलायची का प्रयोग बढ़ाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>याद रखें: </strong>आयुर्वेद कहता है कि &#39;जैसा अन्न, वैसा मन&#39;। अत्यधिक गर्मी में शांति और धैर्य बनाए रखने के लिए शीतल आहार बहुत जरूरी है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/sweets-dishes/refreshing-cool-drinks-126050400011_1.html" target="_blank">Summer drinks recipe: घर पर बनाएं प्री-मिक्स से मिनटों में तैयार करें ये खास 5 कूल-कूल ड्रिंक्स</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 22 May 2026 16:04:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 23 May 2026 16:39:02 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Ayurveda]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Nautapa 2026: रोहिणी नक्षत्र में सूर्य गोचर 2026: नौतपा के 9 दिनों में क्या करें और क्या न करें?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/astrology-nakshatra-sign/sun-transit-in-rohini-nakshatra-2026-dos-and-donts-126052200011_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/astrology-nakshatra-sign/sun-transit-in-rohini-nakshatra-2026-dos-and-donts-126052200011_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/22/thumb/1_1/1779439989-0509.jpg"/>
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      <description><![CDATA[rohini nakshatra mein surya ka gochar 2026: रोहिणी नक्षत्र में सूर्य गोचर के समय सुबह जल्दी उठकर सूर्य दर्शन और हल्का जल पीना शुभ होता है। रोहिणी नक्षत्र में सूर्य गोचर 2026 के समय नौतपा के पहले 9 दिनों में क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="The pictures depict the burning sun, the time of Rohini Nakshatra, the scorching earth, people taking shelter from the sun and people performing charitable acts" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/22/full/1779439989-0509.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>surya ka gochar 2026:</strong> साल 2026 में 25 मई से 2 जून तक रहने वाला नौतपा इस बार बेहद खास होने वाला है। जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में गोचर करते हैं, तो पृथ्वी पर गर्मी अपने चरम पर होती है। इस भीषण तपन के दौरान खुद को सुरक्षित रखने और कुंडली में सूर्य-चंद्रमा की स्थिति को मजबूत करने के लिए शास्त्रों और आयुर्वेद में कुछ विशेष नियम बताए गए हैं। आइए इसे थोड़ा आसान भाषा में समझते हैं...<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/nautapa-start-date-and-end-date-2026-126052200004_1.html" target="_blank">Navtapa 2026 dates: कब से कब तक रहेगा नौतपा?</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	ज्योतिषीय और वैज्ञानिक कारण: </h3>
<p>
	हिंदू पंचांग और ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तो नौतपा की शुरुआत होती है। रोहिणी नक्षत्र को चंद्रमा का नक्षत्र माना जाता है, जो शीतलता का प्रतीक है। जब ब्रह्मांड का सबसे गर्म ग्रह (सूर्य), शीतलता के प्रतीक (रोहिणी) के घर में आता है, तो वह उसकी ठंडक को पूरी तरह सोख लेता है। इसके कारण पृथ्वी का तापमान अचानक बहुत बढ़ जाता है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी, इस दौरान सूर्य की किरणें पृथ्वी के इस हिस्से (भारतीय उपमहाद्वीप) पर बिल्कुल सीधी और लंबवत (Vertical) पड़ती हैं, जिससे गर्मी अपने चरम पर होती है।</p>
<h3>
	आइए जानते हैं कि नौतपा के इन 9 दिनों में आपको क्या करना चाहिए और किन चीजों से बचना चाहिए:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	क्या करें (Dos during Nautapa)</h3>
<h3>
	1. धार्मिक और ज्योतिषीय उपाय</h3>
<p>
	<strong>जल का दान करें:</strong> नौतपा के दौरान प्यासे इंसानों और पशु-पक्षियों को पानी पिलाना सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है। राहगीरों के लिए प्याऊ लगवाएं या मटके का दान करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>इन चीजों का दान है शुभ:</strong> इस समय सत्तू, आम, तरबूज, खरबूजा, दूध, दही, छाछ, और सूती कपड़ों का दान करने से सूर्य और चंद्रमा दोनों ग्रहों के दोष शांत होते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सूर्य देव की उपासना: </strong>रोज सुबह सूर्योदय के समय तांबे के लोटे से सूर्य देव को जल (अर्घ्य) अर्पित करें। इससे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।</p>
<h3>
	2. सेहत और खान-पान के नियम</h3>
<p>
	<strong>तरल पदार्थों का अधिक सेवन: </strong>शरीर में पानी की कमी न होने दें। पानी के साथ-साथ नींबू पानी, ओआरएस (ORS), छाछ, लस्सी, नारियल पानी और पना का सेवन करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>हल्के सूती कपड़े पहनें: </strong>धूप और गर्मी से बचने के लिए ढीले, हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें ताकि शरीर को हवा मिलती रहे।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>आंखों और सिर को ढकें: </strong>जब भी बहुत जरूरी होने पर बाहर निकलें, तो सिर पर टोपी या स्कार्फ बांधें और धूप का चश्मा (Sunglasses) जरूर लगाएं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	क्या न करें (Donts during Nautapa)</h3>
<h3>
	1. खान-पान में बरतें ये सावधानी</h3>
<p>
	<strong>तले-भुने और मसालेदार भोजन से बचें: </strong>नौतपा के दौरान पाचन अग्नि पहले से ही संवेदनशील होती है। ज्यादा तेल, मिर्च-मसाले, फास्ट फूड और गरिष्ठ (भारी) भोजन खाने से पेट खराब हो सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>बासी भोजन न खाएं: </strong>अत्यधिक गर्मी के कारण खाना बहुत जल्दी खराब होता है। इन 9 दिनों में भूलकर भी बासी भोजन न खाएं, इससे फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>कैफीन और अल्कोहल से दूरी: </strong>चाय, कॉफी और शराब का सेवन कम से कम करें, क्योंकि ये शरीर को अंदर से डिहाइड्रेट (पानी की कमी) करते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. व्यावहारिक और शारीरिक गलतियां</h3>
<p>
	<strong>दोपहर में बाहर निकलने से बचें: </strong>दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच, जब सूरज बिल्कुल सिर पर होता है, अनावश्यक रूप से घर या ऑफिस से बाहर न निकलें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>धूप से आते ही न पिएं ठंडा पानी: </strong>तेज धूप या गर्मी से तुरंत लौटकर फ्रिज का एकदम ठंडा पानी या बर्फ का पानी न पिएं। इससे &#39;सर्द-गर्म&#39; हो सकता है और आप बीमार पड़ सकते हैं। पहले शरीर का तापमान सामान्य होने दें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मांगलिक कार्यों से बचें:</strong> हालांकि नौतपा में पूजा-पाठ वर्जित नहीं है, लेकिन अत्यधिक गर्मी और सूर्य के उग्र स्वभाव के कारण इन दिनों में बड़े मांगलिक कार्य या लंबी यात्राएं टालने की सलाह दी जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>विशेष टिप:</strong> नौतपा के दौरान अपने घर की छत या बालकनी में मिट्टी के बर्तनों में दाना-पानी जरूर रखें। बेजुबान पक्षियों को इस भीषण गर्मी में आपकी छोटी सी मदद से नया जीवन मिल सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/what-is-nautapa-learn-about-its-causes-and-symptoms-126050800004_1.html" target="_blank">Nautapa 2026: नौतपा क्या है? जानें इसके कारण और लक्षण</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 22 May 2026 15:05:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 22 May 2026 14:28:57 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[nakshatra sign]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Nautapa health tips: नौतपा और स्वास्थ्य: बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष सावधानियां]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/health-care/nautapa-and-health-special-precautions-for-children-and-the-elderly-126052200006_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/health-care/nautapa-and-health-special-precautions-for-children-and-the-elderly-126052200006_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/22/thumb/1_1/1779440633-6676.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/22/thumb/1_1/1779440633-6676.jpg</image>
      <description><![CDATA[nautapa me bachchon aur bujurgon ke liye vishesh savdhaniyan: नौतपा की भीषण गर्मी का सबसे अधिक प्रभाव बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ता है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता या Immunity और शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता वयस्कों की तुलना में कम ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p>
		<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
			<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
				<img align="center" alt="View of heat relief and precautions for children and elderly during Nautapa" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/22/full/1779440633-6676.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
		</p>
	</p>
	<p>
		<strong>summer health tips: </strong>नौतपा/ Heat Exhaustion या Heat Stress यह केवल वयस्कों के लिए ही नहीं, बल्कि बच्चों और बुजुर्गों के लिए भी खतरनाक हो सकता है। इन उम्र के लोगों में शरीर की गर्मी सहन करने की क्षमता कम होती है और पानी की कमी या गर्मी के असर जल्दी दिखते हैं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/importance-of-nautapa-know-its-effect-on-environment-and-health-126052100007_1.html" target="_blank">Nautapa 2026: 25 मई से नौतपा: भीषण गर्मी के दिन, जानें महत्व, पर्यावरण और सेहत पर प्रभाव</a></strong><br />
		<br />
		<strong>आइए यहां जानते हैं बुजुर्गों और बच्चों के लिए विशेष सावधानियां...</strong><br />
		 </p>
	<h3>
		1. बच्चों के लिए विशेष सावधानियां</h3>
	<p>
		बच्चे अक्सर खेल-कूद में गर्मी और प्यास को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे वे जल्दी &#39;हीट स्ट्रोक&#39; का शिकार हो जाते हैं।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>बाहर जाने पर पाबंदी:</strong> दोपहर 11 बजे से शाम 5 बजे के बीच बच्चों को घर के अंदर ही रहने दें। उन्हें घर के भीतर खेले जाने वाले खेलों (In-door games) के लिए प्रोत्साहित करें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>हाइड्रेशन का ध्यान: </strong>बच्चों को हर एक घंटे में पानी, नींबू पानी या ताजे फलों का रस दें। छोटे बच्चों के मामले में ओआरएस (ORS) का घोल घर पर रखें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>हल्के और ढीले कपड़े: </strong>उन्हें केवल सूती और हल्के रंग के कपड़े पहनाएं जो पसीना सोख सकें। टाइट इलास्टिक या सिंथेटिक कपड़ों से बचें, क्योंकि इनसे घमौरियां हो सकती हैं।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>आहार: </strong>उन्हें जंक फूड या अधिक मीठी चीजों के बजाय खीरा, तरबूज और दही दें। रात को सोने से पहले ठंडा दूध देना फायदेमंद होता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>नहलाने का तरीका:</strong> दिन में दो बार ताजे पानी से नहलाएं। ध्यान रहें कि पानी न बहुत ठंडा और न ही गरम हो। बाहर से आते ही तुरंत न नहलाएं, शरीर का तापमान सामान्य होने दें।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/take-care-of-your-health-during-nautapa-learn-10-precautions-126050500033_1.html" target="_blank">Nautapa and health: नौतपा में ऐसे रखें सेहत का ध्यान, जानें 10 सावधानियां</a></strong></p>
	<h3>
		 </h3>
	<h3>
		2. बुजुर्गों के लिए विशेष सावधानियां</h3>
	<p>
		बढ़ती उम्र के साथ शरीर की पसीना निकालने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे बुजुर्गों को गर्मी का अहसास देर से होता है, जो खतरनाक हो सकता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>नियमित चेकअप: </strong>गर्मी में ब्लड प्रेशर (BP) ऊपर-नीचे हो सकता है। यदि वे बीपी या शुगर की दवा ले रहे हैं, तो नियमित जांच करें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>तरल पदार्थ और इलेक्ट्रोलाइट्स: </strong>बुजुर्गों को प्यास कम लगती है, इसलिए उन्हें याद दिलाकर पानी और तरल पदार्थ पिलाते रहें। नारियल पानी उनके लिए सबसे अच्छा है क्योंकि यह पोटेशियम और खनिजों की पूर्ति करता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>हल्का व्यायाम: </strong>योग या व्यायाम केवल सुबह जल्दी या सूरज ढलने के बाद घर के अंदर ही करें।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>अकेला न छोड़ें: </strong>अत्यधिक गर्मी के दौरान बुजुर्गों पर नजर रखें। यदि वे भ्रमित लगें, अधिक सुस्त हों या उन्हें बोलने में दिक्कत हो, तो यह &#39;हीट एग्जॉशन&#39; के लक्षण हो सकते हैं।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>दवाओं का भंडारण: </strong>सुनिश्चित करें कि उनकी दवाएं ठंडी और सूखी जगह पर रखी हों, क्योंकि अधिक गर्मी से दवाओं का असर कम हो सकता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		इमरजेंसी के लिए &#39;रेड फ्लैग&#39; लक्षण</h3>
	<p>
		यदि बच्चे या बुजुर्ग में निम्नलिखित लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>तेज बुखार (103°F से अधिक) लेकिन पसीना न आना।</strong></p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>लगातार उल्टियां होना।</strong></p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>बेहोशी या चक्कर आना।</strong></p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>मांसपेशियों में ऐंठन या तेज सिरदर्द।</strong></p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		छोटा सा सुझाव</h3>
	<p>
		नौतपा के दौरान अपने घर की खिड़कियों पर खस के पर्दे या मोटे पर्दे लगाएं और शाम को खिड़कियां खोलें ताकि ठंडी हवा अंदर आ सके। पक्षियों के लिए भी छत या बालकनी पर पानी रखना न भूलें।<br />
		<br />
		<p>
			अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/what-is-nautapa-learn-about-its-causes-and-symptoms-126050800004_1.html" target="_blank">Nautapa 2026: नौतपा क्या है? जानें इसके कारण और लक्षण</a></strong></p>
	</p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 22 May 2026 11:58:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 22 May 2026 14:42:17 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[health care]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Rajaram Mohan Roy: आधुनिक भारत के जनक राजाराम मोहन राय की जयंती, जानें उनके विचार]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/birth-anniversary-of-personalities/birth-anniversary-of-rajaram-mohan-roy-126052100048_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/birth-anniversary-of-personalities/birth-anniversary-of-rajaram-mohan-roy-126052100048_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/21/thumb/1_1/1779360488-1843.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/21/thumb/1_1/1779360488-1843.jpg</image>
      <description><![CDATA[Birthday of Rajaram Mohan Roy: राजाराम मोहन राय, जिन्हें आधुनिक भारत का 'समाज सुधारक' कहा जाता है, वे सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाने और शिक्षा, महिलाओं के अधिकार, और सामाजिक समानता के लिए प्रसिद्ध थे। उनकी जयंती पर हम उनके जीवन और विचारों को ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="The picture depicts Raja Ram Mohan Roy and his opposition to the practice of Sati" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/21/full/1779360488-1843.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Rajaram Mohan Roy Jyanati 2026: </strong>आधुनिक भारत के पुनर्जागरण के अग्रदूत, राजा राम मोहन राय की जयंती 22 मई को मनाई जाती है। उन्हें &#39;आधुनिक भारत का जनक&#39; (Father of Modern India) कहा जाता है क्योंकि उन्होंने उस समय भारतीय समाज को झकझोरा जब वह कुरीतियों और अंधविश्वासों की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	यहां उनके जीवन, प्रमुख सुधारों और विचारों का संक्षिप्त विवरण दिया गया है:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. जीवन परिचय</h3>
<p>
	राजाराम मोहन राय का जन्म बंगाल में 22 मई 1772 को एक शिक्षित और प्रभावशाली परिवार में हुआ था। उन्होंने संस्कृत और फारसी का अध्ययन किया था तथा आधुनिक शिक्षा के प्रति उनकी बहुत रुचि थी। उनके पिता का नाम रमाकांत तथा माता का नाम तारिणी देवी था।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. शिक्षा और पत्रकारिता में योगदान</h3>
<p>
	उनका मानना था कि केवल पश्चिमी विज्ञान और तर्कसंगत सोच ही भारतीयों को आधुनिक बना सकती है। उन्होंने 1817 में हिंदू कॉलेज (कोलकाता) की स्थापना में मदद की।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	उन्हें &#39;भारतीय पत्रकारिता का अग्रदूत&#39; भी कहा जाता है। उन्होंने फारसी में &#39;मिरात-उल-अखबार&#39; और बांग्ला भाषा में &#39;संवाद कौमुदी&#39; जैसे समाचार पत्र शुरू किए ताकि लोगों में जागरूकता फैले। </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. ब्रह्म समाज की स्थापना</h3>
<p>
	उन्होंने 1828 में &#39;ब्रह्म समाज&#39; की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य हिंदू धर्म में सुधार लाना और &#39;एकेश्वरवाद&#39; (एक ईश्वर की पूजा) का प्रचार करना था। उन्होंने मूर्ति पूजा, कर्मकांड और बलि प्रथा का कड़ा विरोध किया। उन्होंने वेदों और उपनिषदों के शुद्ध ज्ञान को जनता तक पहुंचाने के लिए उनका बांग्ला और अंग्रेजी में अनुवाद किया।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. सामाजिक समानता और महिला अधिकार</h3>
<p>
	राजा राम मोहन राय केवल सती प्रथा के विरोधी नहीं थे, बल्कि वे महिलाओं के समग्र उत्थान के पक्षधर थे:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>- विधवा विवाह: </strong>उन्होंने विधवाओं के पुनर्विवाह का समर्थन किया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>- संपत्ति का अधिकार: </strong>उन्होंने महिलाओं के लिए पैतृक संपत्ति में अधिकार की मांग की।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>- बहुविवाह और बाल विवाह: </strong>उन्होंने इन दोनों प्रथाओं को समाज के लिए अभिशाप माना और इनका विरोध किया।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	राजा राम मोहन राय के प्रमुख विचार</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>* ईश्वर- </strong>वे एक ही निराकार ईश्वर की उपासना में विश्वास रखते थे।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>* धर्म- </strong>उन्होंने सभी धर्मों की मौलिक एकता पर बल दिया और संकीर्णता का विरोध किया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>*स्वतंत्रता- </strong>वे नागरिक स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी के प्रबल समर्थक थे।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>* तर्कवाद-</strong> उनका कहना था कि किसी भी परंपरा को सिर्फ इसलिए नहीं मानना चाहिए क्योंकि वह पुरानी है; उसे तर्क की कसौटी पर कसना जरूरी है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. सती प्रथा का अंत</h3>
<p>
	राजा राम मोहन राय का सबसे बड़ा योगदान सती प्रथा जैसी अमानवीय परंपरा को समाप्त करना था। उन्होंने इसके खिलाफ जन-आंदोलन चलाया और शास्त्रों के माध्यम से यह सिद्ध किया कि सती प्रथा का धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। उनके प्रयासों के कारण ही 1829 में लॉर्ड विलियम बेंटिक ने सती प्रथा को अवैध घोषित कर दिया।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	6. विरासत</h3>
<p>
	राजा राम मोहन राय ने भारत को मध्यकाल के अंधेरे से निकालकर आधुनिक युग की ओर धकेला। मुगल सम्राट अकबर द्वितीय ने उन्हें &#39;राजा&#39; की उपाधि दी थी। 27 सितंबर 1833 को ब्रिस्टल (इंग्लैंड) में उनका निधन हुआ, लेकिन उनके द्वारा जलाई गई सामाजिक सुधार की मशाल ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम की नींव को भी मजबूत किया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/death-anniversary/rajiv-gandhi-death-anniversary-2026-126052000008_1.html" target="_blank">Rajiv Gandhi: राजीव गांधी पुण्यतिथि पर जानें उनका जीवन और 4 प्रमुख योगदान</a></strong></p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 22 May 2026 09:36:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 22 May 2026 09:40:45 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[birth anniversary of personalities]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[लघुकथा: 'क्या आपने !']]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/hindi-stories/laghukatha-kya-aapne-126052100043_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/21/thumb/1_1/1779359506-2764.jpg"/>
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      <description><![CDATA[प्रतिदिन की भांति सुबह मैं अपने मित्रगण के साथ पार्क में आसन कर रहा था। आसन करते-करते मैंने देखा कि पार्क से सटे मार्ग से श्रद्धेय दिगंबर जैन मुनि गुजर रहे हैं। यह देखकर मैं और मेरे कुछ मित्र आसन करना रोककर उन्हें प्रणाम करते हैं; मैं अपने आसन के ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="पार्क से सटे मार्ग से श्रद्धेय दिगंबर जैन मुनिगण के गुजरने का दृश्य" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/21/full/1779359506-2764.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	- लक्ष्मण शिवहरे, नागपुर<br />
	 </p>
<p>
	प्रतिदिन की भांति सुबह मैं अपने मित्रगण के साथ पार्क में आसन कर रहा था। आसन करते-करते मैंने देखा कि पार्क से सटे मार्ग से श्रद्धेय दिगंबर जैन मुनि गुजर रहे हैं। यह देखकर मैं और मेरे कुछ मित्र आसन करना रोककर उन्हें प्रणाम करते हैं; मैं अपने आसन के स्थान से ही साष्टांग प्रणाम करता हूं।<br />
	<br />
	उनके गुजर जाने के बाद एक मित्र बोला- &#39;<strong>निर्वस्त्र रहकर यदि ईश्वर मिलने लगे तो जानवरों को पहले मिलना चाहिए।&#39;</strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	यह सुनकर कुछ मित्र हंसी-ठिठोली करते हैं। अपने अपरिग्रह श्रद्धेय मुनिगण के प्रति मित्रों के आचरण से मुझे बहुत पीड़ा हुई।<br />
	<br />
	मित्र के कटाक्ष का जवाब मैं उनके पास जाकर देने ही वाला था कि पार्क में खेल रही करीब बारह वर्षीय एक बालिका दौड़कर मित्र के पास आई और जोर से बोली- <strong>&#39;अंकल, क्या आपको ईश्वर मिल गए हैं?&#39;</strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	बालिका के अप्रत्याशित प्रश्न से हम सब आसन करना छोड हतप्रभ हो उसे देखने लगे। अचानक पूछे गए जिज्ञासा भरे प्रश्न के प्रति उत्तर में उस मित्र ने बालिका से पूछा- <strong>&#39;तुम यह क्यों पूछ रही है बिटिया?&#39;</strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	बालिका ने बड़े विश्वास के साथ उत्तर दिया वो बोली-<strong> &#39;आपने कपड़े पहने हुए है इसलिए पूछ रही हूं कि क्या कपड़े पहनकर आपने ईश्वर को पा लिया है? </strong>नन्ही बालिका के ये शब्द सुनकर हम सब मित्रगण आश्चर्यचकित हो उसकी ओर देखने लगे।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	मैंने देखा कि कटाक्ष करने वाला मित्र एक पल के लिए स्तब्ध हुआ, फिर अगले ही पल अपनी आसनी बगल में दबाए शर्म से सिर झुकाए तेज कदमों से पार्क से बाहर जा रहा है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	बालिका उछलकूद करने में मग्न है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है...)</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 21 May 2026 15:31:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 21 May 2026 16:07:18 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[hindi stories]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[नार्वे में पत्रकारिता या पब्लिसिटी स्टंट?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/my-blog/journalism-or-publicity-stunt-in-norway-126052100034_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/my-blog/journalism-or-publicity-stunt-in-norway-126052100034_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/19/thumb/1_1/1779174610-9014.jpg"/>
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      <description><![CDATA[हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान ओस्लो में जो कुछ भी हुआ, वह इसी छटपटाहट और एजेंडा-आधारित पत्रकारिता का एक ज्वलंत उदाहरण है। दुःख की बात यह है कि विदेशी जमीन पर रची गई एक पब्लिसिटी स्टंट की स्क्रिप्ट पर भारत का मुख्य ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="Photos of Prime Minister Narendra Modi and journalist Helle Lyng during their visit to Norway" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/19/full/1779174610-9014.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="Norway press freedom row" /></p>
</p>
<p>
	वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती साख और मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति कुछ अंतरराष्ट्रीय तत्वों के साथ-साथ देश के भीतर बैठे विपक्ष के एक हिस्से को भी रास नहीं आ रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान ओस्लो में जो कुछ भी हुआ, वह इसी छटपटाहट और एजेंडा-आधारित पत्रकारिता का एक ज्वलंत उदाहरण है।<br />
	<br />
	दुःख की बात यह है कि विदेशी जमीन पर रची गई एक पब्लिसिटी स्टंट की स्क्रिप्ट पर भारत का मुख्य विपक्ष न केवल तालियां बजा रहा है, बल्कि अपने ही देश की छवि को धूमिल करने के लिए इसका इस्तेमाल भी कर रहा है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ नॉर्वे के प्रधानमंत्री योनास गहर स्टोर की संयुक्त प्रेस ब्रीफिंग समाप्त होने के बाद दोनों नेता मंच से प्रस्थान कर रहे थे। तब ही नॉर्वे की एक स्थानीय पत्रकार हेले लिंग ने पीछे से चिल्लाकर कहा- आप दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस से कुछ सवाल क्यों नहीं लेते?... </p>
<p>
	 </p>
<p>
	एक परिपक्व पत्रकार को, जो विश्व की सबसे स्वतंत्र पत्रकारिता वाले देश की है, उन्हें इतना बुनियादी अंतर तो पता होना ही चाहिए कि निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत होने वाली संक्षिप्त प्रेस ब्रीफिंग और एक खुली प्रेस कॉन्फ्रेंस में बहुत बड़ा अंतर होता है। ऊपर से जब आधिकारिक कार्यक्रम समाप्त हो चुका हो, तब इस तरह पीछे से आवाजें कसना पत्रकारिता नहीं, बल्कि सरेआम अटेंशन सीकिंग यानी सस्ती लोकप्रियता पाने का हथकंडा ही है।<br />
	<br />
	हेले लिंग भली-भांति जानती थीं कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेता का नाम अपने साथ जोड़कर वह रातों-रात अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ सकती हैं। उनकी यह चाल कामयाब भी हो गई; सोशल मीडिया पर पहले महज पांच सौ फॉलोअर्स वाली यह पत्रकार अचानक हजारों फॉलोअर्स बटोरकर चर्चा में आ गई।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	फिर भी, बाद में भारतीय दूतावास ने बड़े लोकतंत्र की सहिष्णुता और बड़प्पन का परिचय देते हुए उस पत्रकार को स्वयं आमंत्रित किया कि आपके मन में यदि वास्तव में कोई सवाल हैं, तो आप विदेश मंत्रालय (एम ई ए) की प्रेस कॉन्फ्रेंस में आएं। पत्रकार वहां पहुंचीं भी, लेकिन उनका मकसद सच जानना या तार्किक संवाद करना था ही नहीं। उन्होंने भारत में मानवाधिकारों और प्रेस की आजादी पर घिसे-पिटे, एजेंडा-प्रेरित सवाल दागे।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	जब विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सीबी जॉर्ज ने भारत की विशाल लोकतांत्रिक विविधता, जटिलताओं और सच का हवाला देते हुए तथ्यों के साथ जवाब देना शुरू किया, तो वह पत्रकार इतनी असहज हो गईं कि भारतीय पक्ष का तार्किक जवाब पूरा सुने बिना ही, बीच में अनुशासनहीनता और दखलअंदाजी करते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर बाहर भाग खड़ी हुईं।<br />
	<br />
	यह साफ दर्शाता है कि जब बात पूर्वाग्रह से हटकर तथ्यों पर आती है, तो पश्चिमी चश्मे से भारत को देखने वालों के पैर उखड़ जाते हैं। इससे साफ पता चलता है कि नॉर्वे की पत्रकार हेले लिंग को केवल सनसनी फैलानी थी, समाधान या उत्तर से उनका कोई सरोकार नहीं था।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	हेले लिंग को यह समझना होगा कि भारत को खुद को साबित करने की आवश्यकता नहीं है। एक ऐसा देश जहां 140 करोड़ लोग बेहद सीमित संसाधनों में अनेक चुनौतियों और एक जटिल इतिहास के बावजूद अपेक्षाकृत शांति व सद्भाव से रहते हैं, वह अपनी परीक्षा खुद दे चुका है।<br />
	<br />
	जिस समय कोविड-19 जैसे महासंकट में विकसित देश सिर्फ अपनी रिसर्च फंडिंग में व्यस्त थे और कयास लगा रहे थे कि भारत में बेहिसाब मौतें होंगी, उस समय भारत ने अद्भुत अनुशासन का परिचय दिया। भारत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने न केवल अपने नागरिकों को संभाला, बल्कि दुनिया के तमाम देशों को मुफ्त वैक्सीन बांटकर मानवता की रक्षा की।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	जिन जटिलताओं, भाषाई और धार्मिक विविधताओं के बीच भारत ने अपने लोकतंत्र को अक्षुण्ण रखा है, क्या उसका सामना पश्चिम के नॉर्वे जैसे देश, जिसकी जनसंख्या नोएडा के बराबर है, वह कर पाएंगे? जहां सामान्य मतभेद भी लोग सह नहीं पाते और अवसाद व अकेलेपन का शिकार हो जाते हैं, वहां से भारत को सहिष्णुता की सीख नहीं दी जा सकती।<br />
	<br />
	भारत ने अभावों के बावजूद आईटी, स्पेस टेक्नोलॉजी और मेडिसिन जैसे क्षेत्रों में दुनिया को अपनी जिजीविषा दिखाई है। हजारों वर्ष पुरानी हमारी सभ्यता ने कभी किसी देश पर पहले आक्रमण नहीं किया। जब दुनिया प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध की विभीषिका में जल रही थी (जो कि पश्चिम की ही देन थे), तब भारत अहिंसा और योग का संदेश दे रहा था।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	आज साधन संपन्न और बेहद कम आबादी वाले देशों में बैठकर मानवाधिकारों की बड़ी-बड़ी बातें करना मात्र एक विलासिता है। जब पेट भरा हो और अवसर प्रचुर हों, तो शांति व्यवस्था बनाए रखना बहुत आसान होता है; लेकिन असली दमदार किरदार उसका है जो तमाम अभावों और विविधताओं के बाद भी लोकतांत्रिक मूल्यों को सहेज कर रखता है।<br />
	<br />
	भारत में मानवाधिकारों के उल्लंघन के जो भी अपवाद हैं, उन्हें भारत की विशाल जनसंख्या के अनुपात में देखना चाहिए, न कि किसी दुर्भावनापूर्ण एजेंडे के तहत, या विश्व के सबसे बड़े नेता के जरिए प्रसिद्ध होने के लिए। आज तो स्थिति यह है कि खुद पश्चिम का सामाजिक ताना-बाना बिखर रहा है और उनकी जनसंख्या लगातार घट रही है। ऐसे में यह सवाल तो भारत भी कर सकता है कि हम आप पर भरोसा क्यों ही करें?</p>
<p>
	 </p>
<p>
	हैरानी की बात यह है कि इस पूरी घटना को लेकर भारत के विपक्षी नेता विदेशी प्रोपेगेंडा को संजीवनी देने में जुट गए। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस वीडियो को साझा करते हुए सरकार पर निशाना साधा। विपक्ष को यह समझने की जरूरत है कि यदि देश में अभिव्यक्ति की आजादी न होती, तो वे खुद हर मंच से देश के प्रधानमंत्री को कोसने के लिए स्वतंत्र न होते। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन जब बात देश के स्वाभिमान की हो, तो विपक्ष को परिपक्वता दिखानी चाहिए और भारत के लिए एकजुट होना चाहिए। एक अपरिपक्व विदेशी पत्रकार की अज्ञानता और चुनिंदा एजेंडे को अपने ही देश के खिलाफ हथियार बनाकर विपक्ष अपनी बची-कुची साख भी खो रहा है।<br />
	<br />
	यह वही पत्रकार हैं जो भारत के भीतर एक विशिष्ट राजनीतिक नैरेटिव को हवा देने के लिए विपक्ष के मुख्य चेहरे का साक्षात्कार करने की जमीन तलाश रही थीं, जिस पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई। इन सबके बीच भारत की जनता यह भली-भांति देख रही है कि कौन देश के गौरव के साथ खड़ा है और कौन मात्र राजनैतिक लाभ के लिए विदेशी झूठ का टूलकिट बन रहा है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	(इस लेख में व्यक्त विचार/विश्लेषण लेखक के निजी हैं। &#39;वेबदुनिया&#39; इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।)<br />
	<br />
	`- वेबदुनिया फीचर टीम</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 21 May 2026 15:05:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 21 May 2026 15:08:25 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[My Blog]]></category>
      <authorname>सपना सीपी साहू 'स्वप्निल'</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[बंगाल में राजनीतिक हिंसा रोकना भाजपा सरकार की सबसे बड़ी चुनौती]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/my-blog/stopping-political-violence-in-bengal-is-the-biggest-challenge-for-the-bjp-government-126052100013_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/my-blog/stopping-political-violence-in-bengal-is-the-biggest-challenge-for-the-bjp-government-126052100013_1.html</guid>
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      <description><![CDATA[चुनाव परिणाम के बाद बंगाल में जगह-जगह कुछ हिंसा तो तृणमूल नेताओं द्वारा मकानों, जमीनों, कार्यालयों पर कब्जे के संदर्भ में हुई जब लोग स्वयं निकलकर इसे मुक्त कराने लगे। इसी तरह हिंदुओं के कई धर्मस्थलों या धर्म स्थानों की मुक्ति के दृश्य भी सामने आए।]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="West Bengal political violence" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/07/full/1778151097-187.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 700px;" title="West Bengal political violence" /></p>
</p>
<p>
	पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार गठन के बाद उम्मीद बंधी है कि चुनाव उपरांत हिंसा नियंत्रित होगी। चार राज्यों एवं एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव हुए जिनमें तीन राज्यों पश्चिम बंगाल, केरल एवं तमिलनाडु में सत्तारूढ़ पार्टी एवं घटकों की पराजय हुई। किंतु जैसा डरावना दृश्य पश्चिम बंगाल में दिखा वैसा कहीं नहीं। चुनाव परिणाम के बाद पश्चिम बंगाल से चार तरह की नकारात्मक और चिंताजनक तस्वीरें सामने आईं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/west-bengal-assembly-election-2026-news/5-major-reasons-for-bjp-massive-victory-in-west-bengal-126050400017_1.html" target="_blank">पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी की प्रचंड जीत के 5 बड़े कारण?</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	एक, चुनाव के बाद समस्त कोशिशें के बावजूद हिंसा की घटनाएं सामने आती रही। दूसरे, तृणमूल कांग्रेस और उसकी नेत्री ममता बनर्जी विनम्रता से जनादेश स्वीकारने की जगह कह रहीं हैं कि हमारी 100 सीटें चुनाव आयोग ने लूट लिया। तीन, विपक्षी नेताओं ने सबसे ज्यादा समर्थन और सहानुभूति तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी को दिया है। केरल से माकपा नेतृत्व वाले वाम मोर्चा की सत्ता चली गई लेकिन कोई उनके लिए छाती नहीं पीट रहा है। एमके स्टालिन और द्रमुक विपक्ष के साथ भाजपा विरोधी अभियान और आक्रामकता में लगातार शामिल रहा है लेकिन उनके साथ भी यह व्यवहार नहीं। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	इन दोनों राज्यों के नेताओं ने न चुनाव आयोग पर कोई आरोप लगाया और न कहा कि हम हारे नहीं। दोनों राज्यों की स्थिति बिलकुल सामान्य है। ममता बनर्जी ने तो यहां तक कह दिया कि मैं चुनाव हारी नहीं हूं इसलिए इस्तीफा नहीं दूंगी। अंततः राज्यपाल ने संवैधानिक शक्ति का दुरुपयोग करते हुए उन्हें बर्खास्त किया। यह भारतीय राजनीति के इतिहास की असामान्य घटना थी। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	हालांकि बंगाल में इनसे अलग चौथी तस्वीर है जो हम सबको बहुत कुछ सोचने को विवश करती है। प्रदेश से आई तस्वीरों और वीडियो में लोग जगह-जगह चुनाव परिणाम का विजय उत्सव मनाते दिख रहे हैं। कहीं विजय जुलूस निकल रहे हैं, कहीं होली खेली जा रही है, कहीं कीर्तन हो रहे हैं, मानो उन्हें मुक्ति मिली हो। इनमें महिला, पुरुष, दलित, जनजाति, युवा, किशोर सब शामिल दिखाई देते हैं।<br />
	<br />
	अगर इन तस्वीरों को नजरअंदाज कर देंगे तो पश्चिम बंगाल के सत्य तक नहीं पहुंच सकते। ये सारे विजय उत्सव भाजपा द्वारा ही आयोजित नहीं थे। स्वत:स्फूर्त तरीके से लोग ऐसा कर रहे हैं। बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिनका भाजपा से किसी तरह का संबंध नहीं। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	चौथी तस्वीर बताती है कि 15 वर्षों के तृणमूल कांग्रेस शासन के विरुद्ध बड़े वर्ग में व्यापक असंतोष था जिससे वे मुक्ति चाहते थे। दूसरी ओर इसका अर्थ यह भी है कि हिंसा की तस्वीरों से ज्यादा सकारात्मक लोक मानस पूरे प्रदेश में है। यह लोक व्यवहार आश्वस्त करता है कि बंगाल हिंसा के दौर से बाहर निकलेगा तथा शांति‌ व समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होगा। किंतु यह यूं ही नहीं हो सकता। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	हालांकि प्रदेश में जगह-जगह कुछ हिंसा तो तृणमूल नेताओं द्वारा मकानों, जमीनों, कार्यालयों पर कब्जे के संदर्भ में हुई जब लोग स्वयं निकलकर इसे मुक्त कराने लगे। इसी तरह हिंदुओं के कई धर्मस्थलों या धर्म स्थानों की मुक्ति के दृश्य भी सामने आए।<br />
	<br />
	कई जगह हमने देखा कि चुनाव परिणाम के बाद गांवों में कुछ लोग नारा लगाते हुए निकले और गुस्से में कोई तृणमूल का दिखा तो उसकी हल्की पिटाई कर दिया, उसके घर पर दो-चार डंडों का प्रहार कर फिर नारा लगाते चलते बने। ये दृश्य भी हिंसा के ही है और रुकने चाहिए पर ये डरावने नहीं हैं। यह बताता है कि तृणमूल शासन में दादागिरी और माफियागिरी का साम्राज्य हो गया था। इसके विरुद्ध लोगों में गुस्सा होना स्वाभाविक है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	दूसरी ओर अगर विजय जुलूसों पर बमों से हमला हो या खींचकर मार दिया जाए या सरकार बदल गई इसके नाम पर लोगों की पिटाई हो, हत्या हो तो साफ है प्रदेश में स्वस्थ लोकतांत्रिक वातावरण नहीं है। सबसे ज्यादा चर्चा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी जो तब मुख्यमंत्री नहीं थे के सहयोगी देवनाथ रथ की हत्या की हो रही है। उन्हें उत्तर 24 परगना के मध्यग्राम में सड़क पर ढेर कर अंदर गोली मारी गई। हत्यारे इतने दुस्साहसी थे कि उन्होंने सड़क पर ओवरटेक कर गाड़ी आगे से घेरा, मोटरसाइकिल से उतरकर छाती में प्रोफेशनल हत्यारे की तरह से गोली मारी और देखा कि उनके मृत्यु हुई कि नहीं। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	इसमें गिरफ्तारियां बता रही है कि यह पूर्व नियोजित था जिसमें भाड़े के हत्यारों का उपयोग हुआ था। इसे राजनीतिक हिंसा से अलग करके नहीं देख सकते। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव परिणाम की संध्या भाजपा केंद्रीय कार्यालय में भाषण देते हुए कहा कि राजनीतिक हिंसा रुकनी चाहिए और हमें बदले की नहीं बदलाव की राजनीति करनी है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने चुनाव परिणाम के बाद ही बयान दिया था जो भी पार्टी से जुड़ा व्यक्ति हिंसा करेगा उसे निष्कासित कर दिया जाएगा। फिर इस पर पत्रकार वार्ता करके स्पष्ट अपील की गई एवं चेतावनी दी गई। सत्ता संभालते हैं शिवेंदु अधिकारी ने सबसे ज्यादा फोकस कानून व्यवस्था पर किया और धीरे-धीरे स्थिति बदलने लगी है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	चुनाव से जुड़ी हिंसा चाहे वह पूर्व हो या बाद में इस बात का प्रमाण होता है कि कोई दल या नेता हर हाल में केवल अपनी जीत देखना चाहता है। यानी कोई मतदाता उससे खुश है या नाखुश, उसका समर्थक है या नहीं यह मायने नहीं रखता बल्कि हर हाल में उसका मत उसे चाहिए। यानी अगर वह दूसरे को मत देना चाहता है तो या तो मतदान केंद्र तक न जाए या अगर दे दिया तो उसे हर हाल में सबक सिखाना है ताकि भविष्य में कोई ऐसा न कर सके। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	पश्चिम बंगाल में 1970 के दशक में कांग्रेस ने इसकी शुरुआत की, बाद में वाम मोर्चा इसके विरुद्ध आवाज उठाकर सत्ता में आया लेकिन राजनीतिक विरोधियों के विरुद्ध हिंसा, हत्या, दमन उत्पीड़न, उनकी संपत्तियों पर कब्जा, आगजनी आदि को सत्ता का संपूर्ण संरक्षण प्राप्त हुआ। ममता बनर्जी ने इसके विरुद्ध जबरदस्त संघर्ष किया, स्वयं अपने कार्यकर्ताओं के साथ वह भी सत्ता संरक्षित हिंसा का शिकार हुई। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	विडंबना देखिए कि सत्ता में आने के बाद ममता और तृणमूल वाम मोर्चा से ज्यादा खतरनाक तरीके से राजनीतिक हिंसा को आगे बढ़ा दिया। देश के सामने तृणमूल सत्ता संरक्षित हिंसा की भयानक घटनाएं 2018 पंचायत चुनाव के समय और उसके बाद सामने आए। जगह-जगह लूट, आगजनी, बलात्कार, हत्या की घटनाएं हुई तथा भारी संख्या में लोगों को अपने स्थान से दूर या राज्य से बाहर पलायन करना पड़ा। 2022 विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने 1900 से ज्यादा हिंसा की घटनाएं दर्ज की। इनमें से लगभग ढाई दर्जन हत्या के मामले की जांच सीबीआई के जिम्मे है और मुकदमा चल रहा है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	2026 के विधानसभा चुनाव बिल्कुल भिन्न था। चुनाव आयोग ने अभूतपूर्व सवा दो लाख केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल के जवान तैनात किए और गृह मंत्री अमित शाह ने घोषणा किया कि ये चुनाव के बाद दो महीने तक तैनात रहेंगे। जितना संभव हुआ पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के स्थानांतरण, चुनाव तक कार्य मुक्ति तथा उनकी जगह प्रदेश या बाहर से अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	इन सबके कारण सुरक्षा का माहौल बना और हर हाल में जीतने की लालसा वाले न आतंक का माहौल बना सके और न हिंसा कर सके। पिछले 6 दशक में बंगाल का पहला चुनाव था जिसमें कोई हत्या नहीं हुई और जो हिंसारहित था। किंतु तृणमूल कांग्रेस ने पूरे प्रदेश में सत्ता के साथ ऐसे निहित स्वार्थी तत्व खड़े कर दिए हैं जो पराजय पचा नहीं सकते क्योंकि इससे उनका जीवन सीधे प्रभावित होता है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	उदाहरण के लिए अगर बंगाल की सड़कों पर तृणमूल के लोग टोल नाका बना वसूली कर रहे थे और एक दिन में सारे बंद हो गये तो उससे कितने लोगों की अवैध आय का अंत हो गया। ऐसे लोग उनके विरुद्ध प्रतिशोध लेने की हर संभव कोशिश करेंगे तो जिन्होंने पार्टी उम्मीदवारों को हराने में भूमिका निभाई। इसी तरह हर स्तर पर कट मनी और सिंडिकेट सत्ता का स्वाभाविक अंग बन चुका था। जो लोग इन सबसे प्रभावित हुए या जिनका इनसे संघर्ष हुआ उनके अंदर भी गुस्सा होगा। सामान्य प्रशासन, पुलिस प्रशासन सबका अति तृणमूलीकरण हो चुका है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	तृणमूल से जुड़े किसी नेता के भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई का हिंसक विरोध और यहां तक कि केंद्रीय एजेंसियों पर हमले और खदेड़े जाने के दृश्य हम सबने देखे। जब उनकी नेत्री ममता बनर्जी कह रहीं हैं कि चुनाव आयोग और सुरक्षा बलों ने मिलकर उन्हें हराया और भाजपा को जिताया तो इसका संदेश इन सबके बीच क्या गया है यह बताने की आवश्यकता नहीं। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	यह एक प्रकार से अपने लोगों को उकसाना है कि आप शक्ति प्रदर्शित करो और इस चुनाव परिणाम को स्वीकार मत करो। ममता बनर्जी ने किसी बयान में नहीं कहा कि हमें हिंसा नहीं करनी है और हमारा विरोध लोकतांत्रिक तरीके से हो। इस तरह देखें तो निष्कर्ष है कि राजनीतिक हिंसा को पूरी तरह नियंत्रित करना बंगाल के लिए बड़ी चुनौती है। हालांकि दंगाइयों अपराधी यो आदि के विरुद्ध कि तेजी से कारवाइयां हो रही है उनसे उम्मीद जगाती है कि राजनीतिक हिंसा का अंत होगा।</p>
<p>
	<br />
	(इस लेख में व्यक्त विचार/विश्लेषण लेखक के निजी हैं। &#39;वेबदुनिया&#39; इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।)<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/my-blog/how-did-these-election-results-come-about-126050800007_1.html" target="_blank">आखिर कैसे आए ये चुनाव परिणाम</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 21 May 2026 11:45:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 21 May 2026 11:47:56 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[My Blog]]></category>
      <authorname>अवधेश कुमार</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[गर्मी में शरीर को रखें ठंडा, रोज करें ये 3 असरदार प्राणायाम; तुरंत मिलेगा सुकून]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/pranayama/garmi-se-bachne-ke-liye-khaas-pranayam-yog-tips-126052000026_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/20/thumb/1_1/1779261315-5314.jpg"/>
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      <description><![CDATA[कुछ प्राणायाम ऐसे है जो सर्दी में गर्मी और गर्मी में ठंडक पहुँचाते हैं। शीतली, शीतकारी और चंद्रभेदी प्राणायाम से गर्मी के मौसम से निजात पाई जा सकती है। इसके अलावा यह ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करके मन की शांति, शारीरिक शीतलता प्रदान करता है। शीतली ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="A woman practicing Pranayama in the picture." class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/20/full/1779261315-5314.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 800px;" title="योग प्राणायाम, pranayama for heating up body in cold" /></p>
	</p>
	भयंकर गर्मी और बढ़ते तापमान से न सिर्फ त्वचा झुलसती है, बल्कि शरीर का आंतरिक तापमान भी बढ़ जाता है। ऐसे में केवल बाहर से खुद को ठंडा रखना काफी नहीं है। योग में कुछ ऐसे विशेष प्राणायाम बताए गए हैं, जो आपके शरीर को प्राकृतिक रूप से अंदर से एसी (AC) जैसी ठंडक का अहसास करा सकते हैं। आइए जानते हैं गर्मी को मात देने वाले 3 सबसे असरदार प्राणायामों के बारे में।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. शीतली प्राणायाम (Sheetali Pranayama)</h3>
<p>
	यह प्राणायाम शरीर के तापमान को तुरंत कम करने के लिए सबसे ज्यादा जाना जाता है।</p>
<p>
	<strong>कैसे करें:</strong></p>
<p>
	सुखासन या पद्मासन में आराम से बैठ जाएं और आंखें बंद कर लें।</p>
<p>
	अपनी जीभ को बाहर निकालें और उसे दोनों किनारों से मोड़कर एक &#39;नली&#39; (Tube) का आकार दें।</p>
<p>
	अब इस नली जैसी बनी जीभ के माध्यम से गहरी सांस अंदर खींचें। आपको मुंह में ठंडक महसूस होगी।</p>
<p>
	मुंह बंद करें और नाक के जरिए धीरे-धीरे सांस बाहर छोड़ें।</p>
<p>
	<strong>अवधि:</strong> इसे रोजाना 15 से 20 बार दोहराएं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. शीतकारी प्राणायाम (Sitkari Pranayama)</h3>
<p>
	जिन लोगों को जीभ मोड़ने में दिक्कत होती है, उनके लिए शीतकारी प्राणायाम एक बेहतरीन विकल्प है।</p>
<p>
	<strong>कैसे करें:</strong></p>
<p>
	अपने ऊपर और नीचे के दांतों को आपस में मिला लें (भींच लें)।</p>
<p>
	होंठों को फैलाएं ताकि दांत दिखाई दें।</p>
<p>
	अब दांतों के बीच के गैप से &#39;सी-सी&#39; की आवाज करते हुए सांस अंदर खींचें।</p>
<p>
	सांस अंदर लेने के बाद मुंह बंद करें और नाक से सांस छोड़ें।</p>
<p>
	<strong>अवधि:</strong> इसे भी 10 से 15 बार करें।</p>
<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="" class="imgCont" height="675" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2025-07/25/full/1753447503-9232.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="" width="1200" /></p>
</p>
<h3>
	3. चंद्रभेदी प्राणायाम (Chandrabhedi Pranayama)</h3>
<p>
	हमारा बायां नथुना (Left Nostril) &#39;चंद्र नाड़ी&#39; से जुड़ा होता है, जो शीतलता और शांति का प्रतीक है।</p>
<p>
	<strong>कैसे करें:</strong></p>
<p>
	आराम से बैठें और दाएं हाथ के अंगूठे से अपने दाएं नथुने (Right Nostril) को बंद करें।</p>
<p>
	अब बाएं नथुने (Left Nostril) से गहरी सांस अंदर लें।</p>
<p>
	इसके बाद बाएं नथुने को बंद करें और दाएं नथुने से सांस पूरी तरह बाहर छोड़ दें।</p>
<p>
	ध्यान रहे, हर बार सांस सिर्फ बाएं से लेनी है और दाएं से छोड़नी है।</p>
<p>
	<strong>अवधि: </strong>इसे 3 से 5 मिनट तक दोहराएं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	इन प्राणायामों के मुख्य लाभ</h3>
<p>
	<strong>तापमान नियंत्रण: </strong>यह शरीर की आंतरिक गर्मी और पित्त को शांत करता है।</p>
<p>
	<strong>मानसिक शांति:</strong> गर्मी के कारण होने वाले तनाव, चिड़चिड़ेपन और गुस्से को कम करता है।</p>
<p>
	<strong>त्वचा के लिए वरदान: </strong>खून को साफ करता है, जिससे गर्मी में होने वाले मुंहासे और घमौरियां ठीक होती हैं।</p>
<p>
	<strong>ब्लड प्रेशर: </strong>हाई ब्लड प्रेशर (High BP) के मरीजों के लिए यह बेहद फायदेमंद है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	महत्वपूर्ण सावधानियां (किसे नहीं करना चाहिए?)</h3>
<p>
	<strong>लो बीपी के मरीज: </strong>जिन लोगों का ब्लड प्रेशर कम रहता है, वे इन प्राणायामों को न करें क्योंकि ये बीपी को और कम कर सकते हैं।</p>
<p>
	<strong>सर्दी-खांसी होने पर: </strong>यदि आपको कफ, अस्थमा, सर्दी या साइनस की समस्या है, तो गर्मी में भी इसे करने से बचें।</p>
<p>
	<strong>सही समय: </strong>इसे हमेशा खाली पेट, सुबह या शाम के वक्त ठंडी जगह पर बैठकर करें। तेज धूप में बैठकर इसे न करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>निष्कर्ष: </strong>इस गर्मियों में कूल-कूल रहने के लिए इन प्राणायामों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं और हाइड्रेटेड रहने के लिए खूब पानी पीते रहें!</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 20 May 2026 12:38:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 20 May 2026 14:20:27 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[pranayama]]></category>
      <authorname>अनिरुद्ध जोशी</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Rajiv Gandhi: 21 मई: राजीव गांधी पुण्यतिथि पर जानें उनका जीवन और 4 प्रमुख योगदान]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/death-anniversary/rajiv-gandhi-death-anniversary-2026-126052000008_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/death-anniversary/rajiv-gandhi-death-anniversary-2026-126052000008_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/20/thumb/1_1/1779252025-7017.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/20/thumb/1_1/1779252025-7017.jpg</image>
      <description><![CDATA[Remembering Rajiv Gandhi: 21 मई को हम भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि मनाते हैं। राजीव गांधी, भारत के छठे प्रधानमंत्री, जिन्होंने देश में आधुनिक तकनीक और युवा सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया। उनकी पुण्यतिथि पर हम उनके जीवन, उपलब्धियों ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री राजीव गांधी के पुण्‍यस्मरण दिवस पर उनका चित्र" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/20/full/1779252025-7017.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>21 May Rajiv Gandhi Memorial Day: </strong>21 मई, 2026 को भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 35वीं पुण्यतिथि है। राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को हुआ था और वे भारतीय राजनीति के एक प्रमुख और प्रभावशाली नेता थे। वे भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने और उन्होंने देश के विकास, विज्ञान, शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।<br />
	 </p>
<p>
	वर्ष 1991 में आज ही के दिन तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में एक चुनावी रैली के दौरान उनकी दुखद हत्या कर दी गई थी। उनकी याद में इस दिन को पूरे भारत में &#39;राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस&#39; (National Anti-Terrorism Day) के रूप में मनाया जाता है। राजीव गांधी न केवल भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री थे, बल्कि एक ऐसे दूरदर्शी नेता भी थे जिन्होंने देश को 21वीं सदी के लिए तैयार करने की नींव रखी। </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	आइए उनके जीवन और प्रमुख योगदानों पर एक नज़र डालते हैं:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. आधुनिक भारत के डिजिटल स्वप्नद्रष्टा</h3>
<p>
	राजीव गांधी को &#39;भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी और दूरसंचार क्रांति का जनक&#39; माना जाता है। उन्होंने समझा था कि तकनीक ही गरीबी दूर करने और विकास को गति देने का सबसे सशक्त माध्यम है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>कंप्यूटर क्रांति: </strong>उन्होंने भारत में कंप्यूटर के आयात और निर्माण को सुगम बनाया, जिसका विरोध उस समय बहुत हुआ, लेकिन आज भारत IT के क्षेत्र में विश्व गुरु है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>C-DOT की स्थापना: </strong>दूरसंचार क्षेत्र में आत्मनिर्भरता लाने के लिए उन्होंने &#39;सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स&#39; (C-DOT) की स्थापना 1984 में सैम पित्रोदा ने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समर्थन में की थी। जिसे भारत सरकार के दूरसंचार विभाग के अंतर्गत एक स्वायत्त अनुसंधान एवं विकास केंद्र के रूप में स्थापित किया गया था।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. युवाओं को राजनीतिक शक्ति</h3>
<p>
	लोकतंत्र में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने ऐतिहासिक कदम उठाया:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मतदान की आयु:</strong> 1989 में 61वें संविधान संशोधन के माध्यम से वोट डालने की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष कर दी गई। उनका मानना था कि अगर युवा अपना भविष्य चुन सकते हैं, तो वे अपनी सरकार भी चुन सकते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. शिक्षा और सामाजिक सुधार</h3>
<p>
	<strong>नवोदय विद्यालय:</strong> ग्रामीण प्रतिभाओं को निखारने के लिए उन्होंने &#39;जवाहर नवोदय विद्यालयों&#39; की शुरुआत की, जो आज भी बेहतरीन मुफ्त शिक्षा के केंद्र हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>नई शिक्षा नीति (1986): </strong>उन्होंने शिक्षा प्रणाली में आधुनिकीकरण और समानता लाने के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति पेश की।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. पंचायती राज की नींव</h3>
<p>
	हालांकि राजीव गांधी के निधन के बाद इसे संवैधानिक दर्जा मिला, लेकिन पंचायती राज और स्थानीय निकायों को सशक्त बनाने का खाका राजीव गांधी ने ही तैयार किया था। वह सत्ता के विकेंद्रीकरण (Decentralization) के प्रबल समर्थक थे।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	राजीव गांधी: एक संक्षिप्त परिचय</h3>
<p>
	जन्म- 20 अगस्त, 1944 (मुंबई)</p>
<p>
	माता-पिता: इंदिरा गांधी और फिरोज गांधी</p>
<p>
	प्रधानमंत्री कार्यकाल- 1984 - 1989 (भारत के सबसे युवा PM - 40 वर्ष की आयु में)</p>
<p>
	शिक्षा- दून स्कूल, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी और इंपीरियल कॉलेज लंदन</p>
<p>
	पेशा (राजनीति से पहले)- इंडियन एयरलाइंस में कमर्शियल पायलट</p>
<p>
	पुरस्कार- भारत रत्न (मरणोपरांत, 1991 में)</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>&#39;भारत एक प्राचीन देश है, लेकिन एक युवा राष्ट्र है... मैं युवा हूं और मेरा भी एक सपना है। मेरा सपना है भारत को मजबूत, स्वतंत्र, आत्मनिर्भर और दुनिया के सभी देशों में प्रथम स्थान पर देखना।&#39; — </strong>भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का यह प्रसिद्ध कथन है, जो 1985 में उन्होंने अमेरिका यात्रा के दौरान दिया था। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	राजीव गांधी को उनके दूरदर्शी दृष्टिकोण, युवा नेतृत्व और प्रगति के लिए किए गए प्रयासों के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने संचार और सूचना तकनीक को बढ़ावा दिया और भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद की। उनके निधन की सालगिरह पर लोग उन्हें सम्मानित करने और उनके योगदान को याद करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	आज राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर देश उन्हें न केवल एक राजनेता के रूप में, बल्कि उस &#39;आधुनिक भारत के शिल्पकार&#39; के रूप में याद करता है जिसने विज्ञान और तकनीक के जरिए आम आदमी के जीवन को बदलने का प्रयास किया।<br />
	<br />
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 20 May 2026 09:50:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 20 May 2026 10:17:01 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Death anniversary]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Cashew health effects: प्रतिदिन 5 काजू खाने से क्या होगा सेहत पर असर]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/health-care/benefits-of-eating-cashews-daily-126051900021_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/health-care/benefits-of-eating-cashews-daily-126051900021_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/19/thumb/1_1/1779181531-1477.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/19/thumb/1_1/1779181531-1477.jpg</image>
      <description><![CDATA[Eating cashews daily: काजू न केवल स्वाद में लाजवाब है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। यह एक पौष्टिक मेवा है जिसमें प्रोटीन, हेल्दी फैट, मिनरल्स और विटामिन्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि प्रतिदिन 5–6 ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="कैप्शन सेहत के लिए 'स्मार्ट इन्वेस्टमेंट' है काजू, जानें 5 फायदे" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/19/full/1779181531-1477.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Cashew Nuts:</strong> काजू एक पौष्टिक मेवा है, जिसमें प्रोटीन, हेल्दी फैट, विटामिन और मिनरल्स होते हैं। हालांकि मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है, क्योंकि ज्यादा खाने से कैलोरी बढ़ सकती है। प्रतिदिन 5 काजू खाना आपकी सेहत के लिए एक &#39;स्मार्ट इन्वेस्टमेंट&#39; की तरह है। काजू न केवल स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि पोषण का पावरहाउस भी हैं। अगर आप रोज नियम से सिर्फ 5 काजू खाते हैं, तो आपके शरीर में ये 5 मुख्य बदलाव देखने को मिल सकते हैं:<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/10-effective-ways-to-avoid-the-heat-in-the-summer-sun-126042800050_1.html" target="_blank">Summer health tips: गर्मी में धूप से बचने के 10 प्रभावी उपाय</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. दिल की सेहत होगी दुरुस्त (Heart Health)</h3>
<p>
	काजू में ओलेइक एसिड और मोनोअनसैचुरेटेड फैट्स होते हैं, जो खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को कम करने और अच्छे कोलेस्ट्रॉल (HDL) को बढ़ाने में मदद करते हैं। इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा काफी कम हो जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. दिमाग होगा तेज (Brain Booster)</h3>
<p>
	काजू में भरपूर मात्रा में मैग्नीशियम और विटामिन B6 होता है। मैग्नीशियम नसों को शांत रखता है, जिससे तनाव और चिंता कम होती है। साथ ही, यह याददाश्त (Memory) बढ़ाने और एकाग्रता में सुधार करने में मददगार है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. वजन घटाने में मददगार (Weight Management)</h3>
<p>
	सुनने में अजीब लग सकता है, लेकिन सीमित मात्रा में (जैसे 5 काजू) खाने से वजन नहीं बढ़ता। इसमें मौजूद फाइबर और प्रोटीन आपको लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराते हैं, जिससे आप फालतू की स्नैकिंग से बच जाते हैं।</p>
<h3>
	 </h3>
<h3>
	4. मजबूत हड्डियां और चमकदार त्वचा</h3>
<p>
	काजू कॉपर और फास्फोरस का अच्छा स्रोत है। कॉपर शरीर में कोलेजन बनाने में मदद करता है, जो आपकी त्वचा को जवान रखता है और हड्डियों को मजबूती देता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. आंखों की रोशनी के लिए बेहतर</h3>
<p>
	काजू में ज़ेक्सैंथिन (Zeaxanthin) नामक एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट होता है। यह आंखों की रेटिना को सुरक्षित रखता है और उम्र के साथ होने वाली नजर की कमजोरी को रोकने में मदद करता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	सावधानियां: जो आपको पता होनी चाहिए</h3>
<p>
	<strong>ज्यादा न खाएं:</strong> काजू में कैलोरी अधिक होती है, इसलिए 5-10 से ज्यादा खाना वजन बढ़ा सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>भूनने का तरीका:</strong> हमेशा सादे या सूखे भुने (dry roasted) काजू खाएं। नमक वाले या तला हुआ (fried) काजू खाने से ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>एलर्जी: </strong>कुछ लोगों को काजू से एलर्जी होती है, इसलिए पहली बार खा रहे हों तो ध्यान दें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>प्रो टिप: </strong>अगर आप काजू को रात भर पानी में भिगोकर सुबह खाते हैं, तो यह पचने में और भी आसान हो जाते हैं और इनके पोषक तत्व शरीर को बेहतर तरीके से मिलते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/heat-stroke-se-bachne-ke-5-tarike-lakshan-aur-prabhav-126051900012_1.html" target="_blank">भीषण गर्मी में हीट स्ट्रोक से बचने के 5 तरीके, जानिए लक्षण और प्रभाव</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 19 May 2026 15:39:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 19 May 2026 15:07:38 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[health care]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[लौट आई बहार भोजशाला में, मंदिर था, मंदिर रहेगा]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/religious-places/bhojshala-temple-of-mother-saraswati-126051900026_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/religious-places/bhojshala-temple-of-mother-saraswati-126051900026_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/15/thumb/1_1/1778849593-9675.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Bhojshala Vagdevi Temple: मध्यप्रदेश का धार जिला न केवल मांडवगढ़, राजा भोज, बाघ गुफ़ा के लिए ही नहीं जानता जाता, बल्कि भोजशाला स्थित वाग्देवी मंदिर के लिए भी देशभर में अलग पहचान रखता है। भोजशाला सरस्वती मंदिर मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित है। ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="धार के हिन्दू धर्मस्थल देवी सरस्वती मंदिर, भोजशाला में कैसे बनी मस्जिद इससे संबंधित जानकारी देता फोटो" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/15/full/1778849593-9675.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 800px;" title="dhar bhojshala" /></p>
</p>
<p>
	मध्यप्रदेश का धार जिला न केवल मांडवगढ़, राजा भोज, बाघ गुफ़ा के लिए ही नहीं जानता जाता, बल्कि भोजशाला स्थित वाग्देवी मंदिर के लिए भी देशभर में अलग पहचान रखता है। भोजशाला सरस्वती मंदिर मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित है। भोजशाला ऐसा धर्मस्थल है, जिसे आक्रांताओं ने नष्ट कर अथवा उसी के हिस्सों का प्रयोग कर उसे मस्ज़िद में बदल दिया।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/sanatan-dharma-history/bhojshala-ka-itihas-raja-bhoj-se-lekar-vivad-tak-poori-timeline-126051600024_1.html" target="_blank">भोजशाला का इतिहास: राजा भोज से लेकर विवाद तक, जानिए पूरी टाइमलाइन</a></strong><br />
	<br />
	भोजशाला भी उनमें से एक है, जहां वर्तमान समय में बसंत पंचमी का उत्सव भी मनाया जाता है और शुक्रवार की नमाज़ भी पढ़ी जाती है और यह सब हुआ इस्लामिक कट्टरपंथी अलाउद्दीन खिलजी के द्वारा मंदिर को नष्ट किए जाने के बाद। किन्तु शुक्रवार को उच्च न्यायालय ने भोजशाला मामले की सुनवाई पूरी कर फैसला सुनाया कि यह मंदिर था, मंदिर है और मंदिर रहेगा।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	इतिहास में भोजशाला का उल्लेख गहरा है। भारत की शासन प्रणाली के प्रांजल अध्याय के रूप में पहचाने जाने वाले परमार राजवंश के शासक राजा भोज ने धार में एक महाविद्यालय की स्थापना की थी, जिसे बाद में भोजशाला के रूप में जाना जाने लगा।<br />
	<br />
	कहा जाता है कि राजा भोज मां शारदे के महान उपासक थे और यही कारण भी था कि उनकी रुचि शिक्षा एवं साहित्य में बहुत ज़्यादा थी। राजा भोज ने ही सन् 1034 में भोजशाला के रूप में एक भव्य पाठशाला का निर्माण किया और यहाँ माता सरस्वती की एक प्रतिमा स्थापित की। इसे तब सरस्वती सदन कहा था। भोजशाला को माता सरस्वती का प्राकट्य स्थान भी माना जाता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/national-hindi-news/8-key-points-from-the-indore-high-court-s-decision-on-bhojshala-126051500066_1.html" target="_blank">भोजशाला कमाल मौला मस्जिद नहीं माता वाग्देवी मंदिर, हाईकोर्ट के फैसले की 8 बड़ी बातें</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	इतिहास में दर्ज भोजशाला मंदिर से प्राप्त कई शिलालेख 11वीं से 13वीं शताब्दी के हैं। इन शिलालेखों में संस्कृत में व्याकरण के विषय में वर्णन किया गया है। इसके अलावा कुछ शिलालेखों में राजा भोज के बाद शासन संभालने वाले राजाओं की स्तुति की गई है। कुछ ऐसे भी शिलालेख हैं जिनमें शास्त्रीय संस्कृत में नाटकीय रचनाएं उत्कीर्णित हैं। माता सरस्वती के इस मंदिर को कवि मदन ने अपनी रचनाओं में वर्णित किया था। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	यहां प्राप्त हुई माता सरस्वती की मूल प्रतिमा वर्तमान में लंदन के संग्रहालय में है। एक समय में मां सरस्वती का मंदिर होने के साथ भोजशाला भारत के सबसे बड़े विश्वविद्यालयों में से एक था। इसके आलावा यह स्थान विश्व का प्रथम संस्कृत अध्ययन केंद्र भी था। इस विश्वविद्यालय में देश-विदेश के हज़ारों विद्वान आध्यात्म, राजनीति, आयुर्वेद, व्याकरण, ज्योतिष, कला, नाट्य, संगीत, योग, दर्शन आदि विषयों का ज्ञान प्राप्त करने के लिए आते थे। इसके अतिरिक्त इस शिक्षा केंद्र में वायुयान, जलयान तथा कई अन्य स्वचालित (ऑटोमैटिक) यंत्रों के विषय में भी अध्ययन किया जाता था।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	ऐतिहासिक तथ्यों के मुताबिक सन् 1305 में मुस्लिम आक्रांता अलाउद्दीन खिलजी ने भोजशाला पर आक्रमण किया था और उसे नष्ट कर दिया था। बाद में सन् 1401 में दिलावर खां ने भोजशाला के एक भाग में मस्ज़िद का निर्माण करा दिया। अंततः सन् 1514 में महमूद शाह खिलजी ने भोजशाला के शेष बचे हिस्से पर मस्ज़िद का निर्माण करा दिया। समय के साथ यहां विवाद बढ़ता गया और अंग्रेज़ी हुक़ूमत के दौरान भोजशाला को संरक्षित स्मारक घोषित कर दिया गया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	एक रिपोर्ट के अनुसार सन् 1305 में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय भोजशाला के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने भी खिलजी की इस्लामिक सेना का विरोध किया था। खिलजी द्वारा लगभग 1,200 छात्र-शिक्षकों को बंदी बनाकर उनसे इस्लाम क़ुबूल करने के लिए कहा गया लेकिन इन सभी ने इस्लाम स्वीकार करने से मना कर दिया। इसके बाद इन विद्वानों की हत्या कर दी गई थी और उनके शव को भोजशाला के ही विशाल हवन कुंड में फेंक दिया गया था। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	16वीं शताब्दी में दिलावर खां गौरी ने मां सरस्वती के मंदिर में बने देवस्थलों को खंडित कर, कमाल मौलाना का अवैध मक़बरा बना दिया। कहा जाता है कि भोजशाला में कमाल मौलाना की मज़ार है जबकि इतिहास यह भी कहता है कि कमाल मौलाना की मृत्यु अहमदाबाद में हुई थी, जहां उनकी मज़ार स्थित है। फिर भी भोजशाला में मज़ार होने का दावा तथ्यहीन नज़र आता है। इस तरह एक और हिन्दू मंदिर कट्टरपंथ की भेंट चढ़ गया।<br />
	<br />
	भोजशाला को लेकर सन् 1952 में महाराजा भोज स्मृति बसंतोत्सव समिति ने मुक्ति के प्रयास प्रारंभ किए थे। सन् 1961 में पुरातत्ववेत्ता व इतिहासकार पद्म श्री डॉ. वाकणकर ने मां वाग्देवी की प्रतिमा का लंदन संग्रहालय में होना प्रमाणित किया। सन् 1970 के बाद मंदिर परिसर में नमाज़ भी प्रारंभ हो गई।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	सन् 1992 बसंत पंचमी को साध्वी ऋतुम्भरा जी द्वारा सरस्वती मंदिर भोजशाला में हनुमान चालीसा का आह्वान किया गया, तब अगले मंगलवार से सत्याग्रह प्रारंभ हुआ। सन् 2000 में ’घर-घर देवालय’ स्थापना के द्वारा धर्म जागरण का कार्य भी शुरू हुआ। इसके साथ सन् 2003 में लाखों श्रद्धालुओं ने माँ वाग्देवी का पूजन भोजशाला में किया। 6 फ़रवरी 2003 बसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन था, उस दिन भोजशाला मुक्ति के लिए एक लाख से अधिक धर्मरक्षकों का संगम एवं संकल्प ही हुआ। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	 </p>
<p>
	18-19 फ़रवरी 2003 को भोजशाला आंदोलन में तीन कार्यकर्ताओं का बलिदान हुआ और 1400 कार्यकर्ताओं पर प्रतिबंधात्मक कार्यवाही हुई। 08 अप्रैल 2003 को 650 वर्ष बाद हिन्दूओं को दर्शन एवं पूजन का अधिकार प्राप्त हुआ। सन् 2006 की बंसत पंचमी, शुक्रवार को पहली बार दिन भर गर्भगृह में हवन पूजन किया गया। संगठित हिन्दू समाज के पराक्रम के कारण सन् 2013 में भोजशाला परिसर के बाहर नमाज़ हुई।<br />
	<br />
	2016 में सूर्योदय के साथ ही गर्भ गृह में सरस्वती माता के तेल चित्र की पूजा-स्थापना के साथ यज्ञ प्रारंभ हुआ। संघर्ष, संगठन और पराक्रम के बल पर वर्ष में 52 दिन पूजन का अधिकार प्राप्त हुआ है। 750 वर्ष से चले रहे संघर्ष की पूर्णाहुति लंदन में रखी वाग्देवी सरस्वती की प्रतिमा की सरस्वती मंदिर भोजशाला में पुनर्स्थापना के साथ होगी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	बसंत पंचमी के दिन समस्त हिन्दू समाजजन यहां माता सरस्वती की उपासना करने के लिए आते हैं, लेकिन यह पूजा-पाठ भी कानून के दायरे में रहकर और भीषण सुरक्षा-व्यवस्था के बीच संपन्न होती है। सन् 2013 में बसंत पंचमी, शुक्रवार के दिन ही थी, जिसके कारण भोजशाला में सांप्रदायिक तनाव की स्थिति निर्मित हो गई थी और पुलिस को यहां कार्रवाई करनी पड़ी थी।<br />
	<br />
	उसी दौरान हिन्दूवादी संघर्षक, भोजशाला मुक्ति मोर्चा के संयोजक नवलकिशोर शर्मा पुलिसिया बर्बरता के शिकार हुए थे। इसके अतिरिक्त सैंकड़ो संघर्षों की गवाह रही भोजशाला में आज तक माँ वाग्देवी की मूल प्रतिमा स्थापित नहीं हो पाई है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	शुक्रवार 15 मई 2026 को एएसआई सर्वे की रिपोर्ट इत्यादि के बाद उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद में में बड़ा फैसला सुनाते हुए परिसर को हिंदू मंदिर माना है। इस मामले पर अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि इंदौर उच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 7 अप्रैल, 2003 के एएसआई के आदेश को आंशिक रूप से रद्द कर दिया है। इसके अलावा, न्यायालय ने हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार प्रदान किया है और भोजशाला परिसर को राजा भोज की संपत्ति के रूप में मान्यता दी है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	लंदन के एक संग्रहालय में रखी हमारी मूर्ति को वापस लाने की मांग के संबंध में, न्यायालय ने सरकार को इस अनुरोध पर विचार करने का निर्देश दिया है; न्यायालय ने यह भी कहा है कि मुस्लिम पक्ष भी सरकार के समक्ष अपने विचार रखने के लिए स्वतंत्र है। इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने सरकार से मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक भूमि आवंटित करने पर विचार करने को कहा है। न्यायालय ने हमें पूजा-अर्चना करने का अधिकार प्रदान किया है और सरकार को स्थल के प्रबंधन की निगरानी करने का निर्देश दिया है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	एएसआई का पिछला आदेश, जिसमें नमाज अदा करने का अधिकार दिया गया था, पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है; अब से वहां केवल हिंदू पूजा-अर्चना ही होगी। इस शुभ दिन के बाद भोजशाला को सदा-सदा के लिए मंदिर घोषित करके न्यायालय ने कोटिशः हिन्दूजनों के आस्था के अध्याय को सर्वदा के लिए अमर कर दिया। भोजशाला में वाग्देवी की प्रतिमा की वापसी भी निश्चित होगी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	[लेखक डॉ. अर्पण जैन &#39;अविचल&#39; मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं तथा देश में हिन्दी भाषा के प्रचार हेतु हस्ताक्षर बदलो अभियान, भाषा समन्वय आदि का संचालन कर रहे हैं]<br />
	<br />
	(इस लेख में व्यक्त विचार/विश्लेषण लेखक के निजी हैं। &#39;वेबदुनिया&#39; इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।)<strong>ALSO READ: </strong><strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/national-hindi-news/architect-padma-shri-chandrakrant-sompura-is-ready-to-design-a-grand-temple-in-bhojshala-on-the-lines-of-ram-temple-126051600033_1.html" target="_blank">राम मंदिर के तर्ज पर भोजशाला में बनेगा भव्य मंदिर?, राम मंदिर के शिल्पकार चंद्रक्रांत सोमपुरा डिजाइन करने को तैयार</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 19 May 2026 15:08:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 19 May 2026 15:07:14 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Religious Places]]></category>
      <authorname>डॉ. अर्पण जैन 'अविचल'</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[भीषण गर्मी में हीट स्ट्रोक से बचने के 5 तरीके, जानिए लक्षण और प्रभाव]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/health-care/heat-stroke-se-bachne-ke-5-tarike-lakshan-aur-prabhav-126051900012_1.html</link>
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      <description><![CDATA[हीट स्ट्रोक से बचने के 5 तरीके: हाइड्रेटेड रहें, तेज धूप से बचने के लिए टोपी, स्कार्फ या छाता, सनस्क्रीन और सनग्लासेज जरूर इस्तेमाल करें, भारी भोजन से परहेज करें, प्याज का प्रयोग करें, बर्फ या ठंडी पट्टियों का प्रयोग करें, सूती कपड़े पहनें। हीट ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="In the image, a girl wiping away sweat, with the sun in the background, and the caption: '5 Ways to Avoid Heatstroke'." class="imgCont" height="800" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/19/full/1779174856-195.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="Home Remedies For Heat Stroke" width="1200" /></p>
	</p>
	मई के इस माह में भीषण गर्मी पड़ रही है। लू की लपट चल रही है जिसके चलते कई लोगों को डिहाइड्रेशन हो चला है तो कुछ को तो लू लगने के चलते अस्पताल तक में भर्ती होने की नौबत तक आ गई है। वर्तमान में भारत के कई हिस्सों में पारा 45 डिग्री के आसपास है। ऐसे में डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक से बचने के लिए आजमाएं 5 तरीके। </p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/home-remedies/safar-mein-garmi-se-bachne-ke-5-desi-upay-126042900008_1.html" target="_blank">सफर में गर्मी से बचना है? अपनाएं ये 5 आसान देसी उपाय, नहीं होगा हीट स्ट्रोक</a></strong></p>
</p>
<h3>
	हीट स्ट्रोक के लक्षण और प्रभाव: </h3>
<ul>
	<li>
		अचानक शरीर का तापमान बढ़ जाना</li>
	<li>
		सिर में तेज दर्द</li>
	<li>
		लू लगने से दिमाग, किडनी और दिल की कार्यक्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ता है। </li>
	<li>
		नाड़ी या सांस की गति तेज हो जाती है। </li>
	<li>
		त्वचा पर लाल दाने हो जाते हैं </li>
	<li>
		बार बार पेशाब आना </li>
	<li>
		शरीर में जकड़न होना </li>
	<li>
		बुखार, त्वचा का रूखा होना, गर्म होना, नम होना, </li>
	<li>
		चक्कर आना, जी-मिचलाना, घबराहट होना, </li>
	<li>
		अधिक पसीना आना और बेहोश होना आदि।</li>
	<li>
		लू लगने के कार डायरिया होने, पेचिस और उल्टियां होने की संभावना बढ़ जाती है।</li>
	<li>
		कई बार सिर में खून के गर्म होने से व्यक्ति की जान भी चली जाती है।</li>
</ul>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/ways-to-avoid-heat-wave-126042000012_1.html" target="_blank">Summer Health: लू से बचना है? तो ये 5 &#39;देसी ड्रिंक्स&#39; हैं आपके रक्षक</a></strong></p>
</p>
<h3>
	हीट स्ट्रोक से बचने के 5 तरीके:</h3>
<p>
	<strong>1. हाइड्रेटेड रहें: </strong>खूब पानी पिएं। नींबू पानी, नारियल पानी, बेल का शरबत, खस का शरबत, आम पन्ना और छाछ जैसे तरल पदार्थों का सेवन करें। नींबू पानी, ORS या ग्लूकोज लेते रहें। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>2. तेज धूप से बचें: </strong>दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक धूप में निकलने से बचें। यदि जाना ही हो तो सिर पर मोटा सूती कपड़ा बांधकर जाएंगे। या, बाहर निकलते समय टोपी, स्कार्फ या छाता और सनग्लासेज जरूर इस्तेमाल करें। जेब में एक प्याज रखें और साथ में ORS या ग्लूकोज मिला पानी भी रखें। सूती कपड़े पहनें जो शरीर को ठंडक दें। घर से बाहर निकलने से 20 मिनट पहले कम से कम SPF 30 वाली सनस्क्रीन लगाएं। यह आपकी त्वचा को हानिकारक UV किरणों और टैनिंग से बचाती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>3. भारी भोजन से परहेज करें: </strong>हल्का और सुपाच्य भोजन करें। भोजन में ककड़ी, प्याज, छाछ और दही की मात्रा बढ़ा दें। ताजे फल जैसे तरबूज, खरबूजा, खीरा और संतरा खाएं। तली-भुनी और मसालेदार चीजों से बचें। ये शरीर में गर्मी बढ़ाते हैं। </p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/healthy-food/summer-health-tips-n-drinks-126040700047_1.html" target="_blank">Summer health tips: लू और डिहाइड्रेशन से बचाने वाले 10 घरेलू पेय और हेल्थ टिप्स</a></strong></p>
</p>
<p>
	<strong>4. प्याज का प्रयोग करें: </strong>प्याज लू से बचाव में बहुत असरदार होता है। एक प्याज को काटकर उसके रस को पैरों के तलवों पर या कान के पीछे रगड़ें। कच्चा प्याज भी खाने में शामिल करें। बाहर जाते समय एक कटा प्याज जेब में रखें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>5. बर्फ या ठंडी पट्टियों का प्रयोग करें: </strong>अगर बहुत ज्यादा गर्मी लग रही हो, तो एक गीला रुमाल अपनी गर्दन या माथे पर रखें। यह शरीर के तापमान को तुरंत कम करने में मदद करता है। जब भी बाहर से घर पर आएं तो बर्फ की पट्टियों को गर्दन, अंडरआर्म्स, हाथ और पैरों पर लगाएं। इससे शरीर का टेम्परेचर जल्दी कम होता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सुझाव: </strong>अपने घर को ठंडा बनाए रखने के उपाय करें। दिन के समय खिड़कियों पर पर्दे डालकर रखें ताकि सीधी धूप अंदर न आए। शाम को जब तापमान कम हो जाए, तब खिड़कियां खोलें। इस बीच कूलर से घर को ठंडा बनाकर रखें। एसी का उपयोग कम से कम करें।</p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 19 May 2026 12:42:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 19 May 2026 14:22:56 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[health care]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग 'थाइमस', जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं, यह क्यों खास है हमारी सेहत के लिए]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/international-hindi-news/importance-of-thymus-gland-for-immunity-126051800035_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/international-hindi-news/importance-of-thymus-gland-for-immunity-126051800035_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/18/thumb/1_1/1779098842-3328.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Thymus Gland Immunity: आमतौर पर कई सालों से, डॉक्टर 'थाइमस' को बचपन का अंग मानते थे जो अधेड़ उम्र तक कमज़ोर पड़ जाता है। लेकिन, दो नए अध्ययनों से पता चलता है कि नजरअंदाज की जाने वाली ग्लैंड बड़ों भी में एक्टिव रहता है और लंबे समय तक सेहत और बीमारी ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="" class="imgCont" height="675" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/18/full/1779098842-3328.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="" width="1200" /></p>
	</p>
	<br />
	Thymus Gland Immunity: आमतौर पर कई सालों से, डॉक्टर &#39;थाइमस&#39; को बचपन का अंग मानते थे जो अधेड़ उम्र तक कमज़ोर पड़ जाता है। लेकिन, दो नए अध्ययनों से पता चलता है कि नजरअंदाज की जाने वाली ग्लैंड बड़ों भी में एक्टिव रहता है और लंबे समय तक सेहत और बीमारी से लड़ने में बड़ी भूमिका निभाता है। हेल्दी थाइमस होने से मौत का खतरा कम होता है और कैंसर इम्यूनोथेरेपी के नतीजे बेहतर होते हैं।</p>
<h3>
	कैसा होता है थाइमस?</h3>
<p>
	थाइमस एक छोटा, तितली के आकार का अंग है जो ब्रेस्टबोन के पीछे होता है। इसका मुख्य काम T सेल्स को ट्रेन करना है, जो इन्फेक्शन और कैंसर के खिलाफ इम्यून सिस्टम के फ्रंट-लाइन फाइटर हैं। थाइमस (Thymus) हमारे शरीर की एक बेहद महत्वपूर्ण ग्रंथि है, जो हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) का मुख्य आधार मानी जाती है। यह छाती के बीचों-बीच, फेफड़ों के बीच और दिल के ठीक ऊपर स्थित होती है।<br />
	<br />
	आम तौर पर माना जाता रहा है कि उम्र के साथ यह बेकार हो जाता है। पेन्सिलवेनिया यूनिवर्सिटी के पेरेलमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन में मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ. माइकल डी. सिरिग्लियानो ने &#39;द एपोक टाइम्स&#39; को बताया कि &#39;थाइमस ग्लैंड&#39; जिसके बारे में मुझे मानना ​​होगा कि यह मरीजों की देखभाल के मामले में सोच कहीं ज्यादा जरूरी है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	नेचर में छपी पहली स्टडी में, रिसर्चर्स ने 27,000 से ज़्यादा लोगों के चेस्ट स्कैन को एनालाइज़ करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल किया और रूटीन इमेजिंग में ऑर्गन के दिखने के आधार पर थाइमिक हेल्थ स्कोर बनाया। ज़्यादा स्कोर का मतलब थाइमस का ज्यादा हेल्दी और ज्यादा फंक्शनल होना था।</p>
<h3>
	बेहतर थाइमिक फंक्शन यानी रिस्क कम</h3>
<p>
	बेहतर थाइमिक फंक्शन का संबंध सभी वजहों से मौत के कम रिस्क से था, जिसमें लंग कैंसर, कार्डियोवैस्कुलर बीमारी और दूसरी बीमारियां शामिल हैं। 12 साल के फॉलोअप में, बेहतर थाइमिक फंक्शन वाले लोगों में मौत का रिस्क लगभग 50 परसेंट कम, कार्डियोवैस्कुलर मौत का रिस्क 63 परसेंट कम और कम थाइमिक हेल्थ वाले लोगों की तुलना में लंग कैंसर होने का रिस्क 36 परसेंट कम था।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	नेचर में पब्लिश हुई एक दूसरी बड़ी प्रॉस्पेक्टिव स्टडी में 25,000 से ज़्यादा एडल्ट्स को ट्रैक किया गया और उन नतीजों को और पक्का किया गया। बेहतर थाइमिक हेल्थ का मतलब था कि उम्र, लिंग और स्मोकिंग की आदतों से अलग, लंबी उम्र, फेफड़ों के कैंसर का खतरा कम और कार्डियोवैस्कुलर मृत्यु दर कम होगी।</p>
<h3>
	कैंसर के इलाज के लिए एक गेम चेंजर</h3>
<p>
	इसका असर उम्र बढ़ने से कहीं ज़्यादा है। दूसरी स्टडी में, इम्यूनोथेरेपी से इलाज किए गए 1200 से ज़्यादा कैंसर मरीज़ों में यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें ट्यूमर से लड़ने के लिए इम्यून सिस्टम का इस्तेमाल होता है, हेल्दी थाइमस वाले मरीजों का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा। जिन मरीजों की थाइमिक हेल्थ ज्यादा मजबूत थी, उनमें कैंसर बढ़ने का खतरा लगभग 37 परसेंट कम था और मौत का खतरा 44 परसेंट कम था, भले ही मरीज, ट्यूमर और इलाज के दूसरे फैक्टर्स को ध्यान में रखा गया हो।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	स्टडीज में यह भी पाया गया कि थाइमिक हेल्थ सिर्फ उम्र का फंक्शन नहीं है। यह बड़ों में बहुत अलग-अलग होता है और हमारे कंट्रोल में आने वाले फैक्टर्स से बनता है। महिलाओं में आमतौर पर पुरुषों की तुलना में थाइमस ज्यादा हेल्दी होता है। पहली स्टडी ने कम थाइमिक हेल्थ को सिस्टमिक इंफ्लेमेशन, मोटापा, स्मोकिंग और डायबिटीज जैसे मेटाबोलिक डिसऑर्डर से भी जोड़ा, ये सभी तेजी से उम्र बढ़ने और बीमारी के बढ़ते रिस्क से जुड़े हैं।<br />
	<br />
	सिरिग्लियानो ने कहा कि डेटा साफ दिखाता है कि लाइफस्टाइल &#39;निश्चित रूप से&#39; थाइमिक हेल्थ पर असर डालती है। उन्होंने कहा कि हालांकि इन कनेक्शन को कन्फर्म करने के लिए और रिसर्च की ज़रूरत है, लेकिन इस लंबे समय से नजरअंदाज किए गए अंग पर ध्यान देना ठीक वैसा ही हो सकता है जैसा डॉक्टर ने कहा था। नतीजों से पता चलता है कि थाइमिक फंक्शन को बनाए रखना या सुधारना हेल्दी एजिंग को बढ़ावा देने, बीमारी के खतरे को कम करने और कैंसर ट्रीटमेंट के नतीजों को बेहतर बनाने के लिए एक अच्छी स्ट्रेटेजी हो सकती है।</p>
<h3>
	उम्र के साथ बदलाव</h3>
<p>
	थाइमस ग्रंथि की सबसे खास बात यह है कि यह बचपन में सबसे बड़ी और सक्रिय होती है। यह बच्चों में रोगों से लड़ने की शक्ति विकसित करने के लिए बहुत सक्रिय रहती है। जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं, थाइमस सिकुड़ने लगता है और धीरे-धीरे वसा (Fat) में बदल जाता है। इसीलिए बुजुर्गों में नई बीमारियों से लड़ने की क्षमता युवाओं के मुकाबले कम हो सकती है। यह थाइमोसिन (Thymosin) नामक हार्मोन छोड़ता है, जो T-सेल्स के बनने और उनके कार्य करने की क्षमता को नियंत्रित करता है। अगर थाइमस सही से काम न करे, तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता खत्म हो सकती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है या शरीर अपनी ही कोशिकाओं पर हमला करने लगता है।</p>
<p>
	Edited by: Vrijendra Singh Jhala </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 18 May 2026 15:32:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 18 May 2026 15:40:03 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[International News]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया न्यूज़ टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[भारतीय नौसेना के लिए जर्मन पनडुब्बियां, जो मुंबई में बनेंगी]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/national-hindi-news/germany-submarine-for-india-126051600023_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/national-hindi-news/germany-submarine-for-india-126051600023_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/16/thumb/1_1/1778920776-8838.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Made in India German Submarines: जर्मनी की जगप्रसिद्ध इस्पात (स्टील) निर्माता कंसर्न थ्यिसनक्रुप केवल इस्पात ही नहीं, हथियार आदि भी बनाती है। जर्मनी के धुर उत्तर में स्थित बंदरगाह नगर कील में 'थ्यिसनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS)' नाम की उसकी शाखा ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Made in India German Submarines" class="imgCont" height="675" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/16/full/1778920776-8838.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="" width="1200" /></p>
	</p>
	<br />
	Made in India German Submarines: जर्मनी की जगप्रसिद्ध इस्पात (स्टील) निर्माता कंसर्न थ्यिसनक्रुप केवल इस्पात ही नहीं, हथियार आदि भी बनाती है। जर्मनी के धुर उत्तर में स्थित बंदरगाह नगर कील में &#39;थ्यिसनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS)&#39; नाम की उसकी शाखा समुद्री जहाज़ और नौसैनिक पनडुब्बियां बनाने के लिए प्रसिद्ध है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अकेले &#39;थ्यिसनक्रुप मरीन सिस्टम्स&#39; का कोरोबार ही उसके इतिहास में इस समय सबसे अधिक तेज़ी से बढ़ रहा है। पिछले छह महीनों में उसे 20 अरब 60 करोड़ यूरो (1 यूरो=112 रुपए) के बराबर नए ऑर्डर मिले। जल्द ही भारत से भी एक बड़ा ऑर्डर मिलने वाला है। भारत की P75(I) खरीद योजना के तहत, भारतीय नौसेना के लिए छह अत्याधुनिक पनडुब्बियां बनाई जानी हैं—जिनकी कुल कीमत लगभग आठ अरब यूरो होगी।</p>
<h3>
	इस समय बातचीत अंतिम चरण में है</h3>
<p>
	TKMS और मुंबई स्थित भारत की सरकारी कंपनी &#39;मज़गांव डॉक शिपयार्ड&#39; (MDL), सितंबर 2025 से भारतीय खरीद प्राधिकरण के साथ आधिकारिक बातचीत कर रहे हैं। TKMS के मीडिया अधिकारी नील्स बायर का कहना है कि &#39;TKMS और भारतीय खरीद प्राधिकरण इस समय बातचीत के अंतिम चरण में हैं। ...हम इस समय किसी भी खास जानकारी के बारे में कोई विवरण नहीं देना चाहते।&#39;</p>
<p>
	 </p>
<p>
	भारत के साथ इस सौदे के महत्व को रेखांकित करते हुए बायर का मत है कि &#39;भारत, रणनीतिक रूप से दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्रों में से एक है— और प्रोजेक्ट P75(I) भारत की सागरीय क्षमताओं को मज़बूत करने का एक अहम प्रोग्राम है। TKMS के लिए, यह संभावित साझेदारी एक महत्वपूर्ण औद्योगिक अवसर और एक लंबे समय तक चलने वाला रणनीतिक सहयोग, दोनों का प्रतिनिधित्व करती है।&#39;</p>
<h3>
	पनडुब्बियां मुंबई में बनेंगी</h3>
<p>
	पनडुब्बियां जर्मनी में नहीं, मुंबई में बनाई जाएंगी। TKMS डिज़ाइन और टेक्नॉलॉजी पार्टनर की भूमिका निभाएगा। वह भारत को पनडुब्बी का डिज़ाइन, उससे जुड़ी ज़रूरी जानकारी और दुनिया भर में इसी तरह के पनडुब्बी प्रोग्रामों से मिला अपना अनुभव भारत को देगा — जिसमें वायुमुक्त प्रणोदन (एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन) और पनडुब्बियों को अदृश्य बनाए रखने के स्टेल्थ सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकें भी शामिल हैं। तकनीकी प्रणालियों का समेकन और पनडुब्बियों की डिलीवरी, भारत में ही स्थानीय स्तर पर होगी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अप्रैल के अंत में, भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके जर्मन समकक्ष बोरिस पिस्टोरियुस ने कील में पनडुब्बी निर्माण स्थल की यात्रा की। यह एक असामान्य रूप से उच्च-स्तरीय यात्रा थी जो इस सौदे के महत्व को रेखांकित करती है। पनडुब्बियों के निर्माण-परिसर के दौरे और एक पनडुब्बी U34 पर जाने के बाद, पिस्टोरियुस ने कहा कि &#39;जर्मन-भारतीय पनडुब्बी परियोजना P75(I) को एक संभावित प्रमुख परियोजना माना जाता है। मुझे पूरा विश्वास है कि हम बहुत जल्द ही इस समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे।&#39; इस यात्रा के बाद, राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि उन्हें &#39;अत्याधुनिक तकनीकों और उन्नत समुद्री-सैन्य क्षमताओं&#39; से परिचित कराया गया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	संभावित सौदे के पूरक के तौर पर, दोनों सरकारों ने बर्लिन में रक्षा औद्योगिक सहयोग के लिए एक दस-वर्षीय रोडमैप पर हस्ताक्षर किए, साथ ही संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों से संबंधित सहयोग के एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए। </p>
<h3>
	इस साल भारत-जर्मन राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होंगे</h3>
<p>
	भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की यह यात्रा प्रतीकात्मक रूप से एक महत्वपूर्ण वर्ष के दौरान हुई है: 2026 में, जर्मनी और भारत अपने बीच राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मनाएंगे। इस संदर्भ में, जर्मन रक्षा मंत्री पिस्टोरियुस ने इस समय के वैश्विक भू-राजनीतिक आयाम की ओर ध्यान खींचते हुए कहा: &#39;हमारे लिए, भारत हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक है।&#39;</p>
<p>
	 </p>
<p>
	कहने की आवश्यकता नहीं कि रक्षा के क्षेत्र में, भारत रूस के साथ अपना चिरपरिचित सहयोग जारी रखे हुए है, पर साथ ही अन्य देशों के साथ भी अपने सहयोग-क्षेत्र का विस्तार कर रहा है। जर्मनी ऐसे ही अन्य देशों में से एक है। प्रधानमंत्री मोदी का भारत अब केवल ख़रीददार नहीं रहना चाहता। वह जो भी हथियार या सामग्री ख़रीदता है, उसे इस शर्त पर ख़रीदता है कि उसके निर्माण की तकनीक भारत को हस्तांतरित की जाएगी, ताकि भारत जल्द ही उसे स्वयं बना सके। इसीलिए, सौदा पट जाने पर जर्मनी से ख़रीदी जा रही 6 नौसैनिक पनडुब्बियां, कील में नहीं मुंबई में बनेंगी। प्रतिरक्षा के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भर भारत बनने का यह एक और बड़ा उदाहरण होगा।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Sat, 16 May 2026 14:04:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 16 May 2026 14:09:54 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[national news]]></category>
      <authorname>राम यादव</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[भोजशाला: सत्य अतीत, सनातन की न्यायिक जीत]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/my-blog/bhojshala-the-true-past-sanatan-judicial-victory-126051600005_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/my-blog/bhojshala-the-true-past-sanatan-judicial-victory-126051600005_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/16/thumb/1_1/1778908206-3083.jpg"/>
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      <description><![CDATA[मां वाग्देवी का मंदिर, भोजशाला मध्य प्रदेश के ​धार में स्थित केवल पत्थरों का ऐतिहासिक ढांचा नहीं है, बल्कि यह भारत की उस ज्ञान परंपरा का जीवंत साक्ष्य है, जिसे सदियों के संघर्ष और आक्रमणों ने मिटाने का विफल प्रयास किया। आज मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Bhojshala" class="imgCont" height="800" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/16/full/1778908206-3083.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="Bhojshala" width="1200" /></p>
	</p>
	मां वाग्देवी का मंदिर, भोजशाला मध्य प्रदेश के ​धार में स्थित केवल पत्थरों का ऐतिहासिक ढांचा नहीं है, बल्कि यह भारत की उस ज्ञान परंपरा का जीवंत साक्ष्य है, जिसे सदियों के संघर्ष और आक्रमणों ने मिटाने का विफल प्रयास किया। आज मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ का हालिया निर्णय भारतीय न्यायिक इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय की तरह है, जिसने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर यह स्पष्ट कर दिया कि अतीत के सत्य को लंबे समय तक झुठलाया नहीं जा सकता। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की व्यापक और तकनीक-आधारित रिपोर्ट ने उन सभी पर्दों को हटा दिया है, जिन्होंने दशकों तक इस विवाद को उलझाए रखा था। यह निर्णय केवल एक कानूनी जीत नहीं है, बल्कि यह भारत की उस आध्यात्मिक चेतना की पुनर्स्थापना है, जो 11वीं सदी के विद्वान, प्रतापी राजा भोज के स्वप्निल भारत की आधारशिला थी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	​ऐतिहासिक दृष्टि से देखें तो मालवा के परमार वंश के ओजस्वी शासक राजा भोज ने 1034 ईस्वी में धार को विद्या की राजधानी के रूप में स्थापित किया था। राजा भोज द्वारा रचित- सरस्वती कंठाभरण और उनसे जुड़ी किंवदंतियों जैसे भोज प्रबंध में उल्लेख मिलता है कि मां वाग्देवी की कृपा उन पर सदैव रही। विशेष रूप से धार स्थित सरस्वती मंदिर और भोजशाला के निर्माण के संदर्भ में लोकमान्यता है कि देवी ने उन्हें स्वप्न में दर्शन या प्रेरणा दी थी। फलस्वरूप उन्होंने धार में सरस्वती सदन या भोजशाला की स्थापना की। यह एक ऐसा विश्वविद्यालय था जहां व्याकरण, खगोल शास्त्र, ज्योतिष, दर्शन, कला और साहित्य की अविरल धारा बहती थी। यह स्थान नालंदा और तक्षशिला की भांति ही वैश्विक ख्याति प्राप्त था। यहां मां सरस्वती की स्फटिक की दिव्य प्रतिमा स्थापित थी, जिसके समक्ष बैठकर देश-विदेश के विद्वान और विद्यार्थी ज्ञान की साधना व शास्त्रार्थ करते थे। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	13वीं और 14वीं शताब्दी के कालखंड में जब भारत की सांस्कृतिक धरोहरों पर हमले हुए, तो धार की यह ज्ञानस्थली भी आक्रांताओं के निशाने पर आई।अलाउद्दीन खिलजी (1305 ई.), ​दिलावर खान (1401 ई.), महमूद खिलजी (1436-1469 ई.) जैसे आक्रांताओं ने इस मंदिर के स्वरूप को नष्ट करने और इसके अवशेषों पर मस्जिद का वैकल्पिक ढांचा खड़ा करने का जो कृत्य किया, वह इतिहास के सबसे दुखद अध्यायों में से एक है। इन्होंने राजा भोज द्वारा उकेरे गए शिलालेखों को ढंक दिया और मंदिर के खंभों पर जबरन बाहरी चिन्ह अंकित किए, ताकि इसकी मूल पहचान को मिटा सके।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	​वर्तमान समय में जब आधुनिक विज्ञान और न्याय का मिलन हुआ, तो एएसआई की वैज्ञानिक रिपोर्ट ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया। ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार (जीपीआर) और कार्बन डेटिंग जैसी उच्च स्तरीय तकनीकों ने यह प्रमाणित किया कि वर्तमान संरचना के नीचे छिपे हुए आधार और स्तंभ स्पष्ट रूप से प्राचीन हिंदू मंदिर वास्तुकला के हैं। खुदाई में मिले नक्काशीदार पत्थर, देवी-देवताओं के अवशेष और संस्कृत के श्लोक इस बात का निर्विवाद प्रमाण हैं कि यह स्थान मूलतः और पूर्णतः एक सरस्वती मंदिर, शिक्षा का केंद्र ही था। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	न्यायालय का यह फैसला कि यहां हिंदुओं को पूजा का पूर्ण अधिकार है, वास्तव में करोड़ों सनातनियों की उस आस्था का सम्मान है जो सदियों से इस स्थान को अपनी माता का मंदिर मानते है। यह निर्णय स्पष्ट करता है कि मध्यकालीन बर्बरता को आधुनिक लोकतांत्रिक भारत में वैध नहीं ठहराया जा सकता।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	​भोजशाला की मुक्ति का यह अभियान तब तक अधूरा है, जब तक मां वाग्देवी की वह मूल प्रतिमा भारत वापस नहीं आ जाती। 1875 में अंग्रेज अधिकारी मेजर किनकेड द्वारा इस प्रतिमा को चोरी करके ले जाना और आज भी उसका लंदन के ब्रिटिश म्यूजियम की गैलरी में होना, हर भारतीय के स्वाभिमान को कचोटता है। भले ही भारत और हम भारतीय 1947 में राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त कर चुके हो, लेकिन हमारी आध्यात्मिक, सांस्कृतिक स्वतंत्रता आज भी लंदन के संग्रहालयों में कैद है। पिछले कुछ वर्षों में भारत सरकार ने कूटनीतिक स्तर पर जिस तरह से विदेशों से सैकड़ों चोरी हुई प्राचीन धरोहरें वापस लाने में सफलता पाई है, उससे यह उम्मीद जागी है कि अब वाग्देवी की घर वापसी का समय भी निकट है। यह केवल एक कलाकृति की वापसी नहीं, बल्कि धार की खोई हुई आध्यात्मिक ऊर्जा की पुनर्स्थापना होगी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	​इस ऐतिहासिक मोड़ पर समाज और प्रशासन दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। यह समय किसी सांप्रदायिक वैमनस्यता का नहीं, बल्कि ऐतिहासिक भूलों के सुधारकर उत्सव मनाने का है। उच्च न्यायालय ने जिस प्रकार मुस्लिम पक्ष के लिए भी न्यायसंगत दृष्टिकोण अपनाया है, और कहा कि वे अपने लिए दूसरी जगह जमीन लेकर सूफी संत कमाल मौला की मस्जिद बना सकते है, यह भारतीय संविधान की खूबसूरती है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	अब, भारत सरकार का अगला कदम नालंदा विश्वविद्यालय की तरह ही भोजशाला के भव्य जीर्णोद्धार और इसे पुनः एक वैश्विक ज्ञान केंद्र के रूप में विकसित करने का होना चाहिए। भोजशाला का पुनरुद्धार केवल एक धार्मिक कार्य नहीं है, बल्कि यह राजा भोज की उस विरासत को सम्मान देना है जिन्होंने शिक्षा और कला को राष्ट्र की उन्नति का आधार माना था।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	​अंततः भोजशाला का संघर्ष अब अपने तार्किक अंत की ओर बढ़ रहा है। सत्य की विजय के इस संकल्प में अब पूरे राष्ट्र को एक स्वर में वाग्देवी के आगमन की मांग करनी चाहिए। जिस दिन मां सरस्वती की मूल प्रतिमा धार की पावन धरा पर पुनः प्रतिष्ठित होगी उस दिन भोजशाला के प्रांगण में पुनः वेदों और व्याकरण के सूत्रों का उच्चारण होगा, उसी दिन मालवा का सांस्कृतिक पुनर्जागरण पूर्ण होगा। यह निर्णय भविष्य की पीढ़ियों को संदेश देता है कि सत्य भले ही समय की धूल में दब जाए, लेकिन वह कभी समाप्त नहीं होता। न्याय की यह मशाल, एक नए ज्ञानोदय की ओर ले जाने को तत्पर है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Sat, 16 May 2026 10:31:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 16 May 2026 10:40:31 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[My Blog]]></category>
      <authorname>सपना सीपी साहू 'स्वप्निल'</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[World Telecommunication Day 2026: विश्व दूरसंचार दिवस क्यों मनाया जाता है?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/important-days-and-dates/world-telecommunication-day-17-may-126051500006_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/important-days-and-dates/world-telecommunication-day-17-may-126051500006_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/15/thumb/1_1/1778822018-7736.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/15/thumb/1_1/1778822018-7736.jpg</image>
      <description><![CDATA[World Telecommunication Day: हर साल 17 मई को दुनिया भर में विश्व दूरसंचार और सूचना समाज दिवस मनाया जाता है। ITU की स्थापना 1865 में हुई थी और इसे मनाने के पीछे मुख्य ऐतिहासिक और सामाजिक कारण निम्नलिखित हैं...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="On World Telecommunication Day, a photo gives special information about increasing digital networks to face disasters or attacks in the world" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/15/full/1778822018-7736.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>World Telecommunication and Information Society Day: </strong>विश्व दूरसंचार दिवस हर साल 17 मई को मनाया जाता है। यह दिन हमें दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी के महत्व की याद दिलाता है और दुनिया भर में सशक्त डिजिटल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। दूरसंचार ने हमारे जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। चाहे वह इंटरनेट, मोबाइल नेटवर्क, सैटेलाइट संचार या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म हों, ये सभी तकनीकें आज के युग में हमारी जिंदगी का अनिवार्य हिस्सा बन गई हैं। डिजिटल युग में संचार केवल संदेश भेजने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, व्यवसाय, स्वास्थ्य, सरकारी सेवाओं और वैश्विक सहयोग का आधार भी बन गया है।</p>
<h3>
	 </h3>
<h3>
	विश्व दूरसंचार दिवस मनाने का मुख्य कारण</h3>
<p>
	ITU की स्थापना: 17 मई, 1865 को पेरिस में पहले &#39;अंतरराष्ट्रीय टेलीग्राफ कन्वेंशन&#39; पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसके परिणामस्वरूप अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) की स्थापना हुई। यह संगठन दुनिया भर में संचार नेटवर्क और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कार्यरत है। इसी ऐतिहासिक दिन की याद में 1969 से यह दिवस मनाया जा रहा है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>जागरूकता फैलाना:</strong> इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर लोगों को यह बताना है कि सूचना और संचार तकनीक (ICT) और इंटरनेट हमारे समाज और अर्थव्यवस्था को कैसे बदल सकते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>डिजिटल अंतर को कम करना:</strong> दुनिया के कई हिस्सों में अभी भी इंटरनेट और तकनीक की पहुंच नहीं है। यह दिन सरकारों और संगठनों को इस &#39;डिजिटल डिवाइड&#39; को कम करने के लिए प्रेरित करता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	इस दिवस का महत्व</h3>
<p>
	यह दिन हमें याद दिलाता है कि कैसे कनेक्टिविटी ने टेलीफोन, मोबाइल और इंटरनेट ने दुनिया को एक &#39;ग्लोबल विलेज&#39; बना दिया है। जिसके उद्देश्य स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि जैसे क्षेत्रों में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देना। विकासशील और कम विकसित देशों को तकनीक के जरिए सशक्त बनाना, आर्थिक उन्नति करना, ताकि वे वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ कदम मिला सकें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	ऐतिहासिक तथ्य</h3>
<p>
	<strong>प्रथम आयोजन: </strong>पहली बार इसे 1969 में मनाया गया था।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>नाम परिवर्तन: </strong>साल 2006 तक इसे केवल &#39;विश्व दूरसंचार दिवस&#39; कहा जाता था। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने इसमें &#39;सूचना समाज दिवस&#39; को भी जोड़ दिया, जिससे अब इसे विश्व दूरसंचार और सूचना समाज दिवस के रूप में जाना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	विश्व दूरसंचार दिवस 2026 की थीम</h3>
<p>
	वर्ष 2026 में विश्व दूरसंचार दिवस 2026 की थीम-<strong> &#39;डिजिटल जीवन रेखाएं: एक संयोजित दुनिया में लचीलेपन को मजबूत करना&#39; (Digital lifelines: Strengthening resilience in a connected world) </strong>तय की गई है। जिसका उद्देश्य डिजिटल बुनियादी ढांचे को सुरक्षित और मजबूत बनाने पर ध्यान केंद्रित करना है।<br />
	<br />
	अत: 17 मई को पूरी दुनिया इस दिवस को मनाएगी। हर साल इसकी एक विशेष थीम रखी जाती है, जो वर्तमान वैश्विक चुनौतियों- जैसे एआई, साइबर सुरक्षा या ग्रामीण कनेक्टिविटी पर आधारित होती है। विश्व दूरसंचार दिवस का आयोजन अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU – International Telecommunication Union) द्वारा किया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/important-days-and-dates/international-family-day-learn-how-to-stay-connected-with-family-in-the-digital-age-126051300051_1.html" target="_blank">International Family Day: अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस, जानें डिजिटल युग में परिवार के साथ जुड़ाव बनाए रखने के तरीके</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 15 May 2026 11:25:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 15 May 2026 10:48:16 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Important Days and Dates]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[International Family Day: अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस, जानें डिजिटल युग में परिवार के साथ जुड़ाव बनाए रखने के तरीके]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/important-days-and-dates/international-family-day-learn-how-to-stay-connected-with-family-in-the-digital-age-126051300051_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/13/thumb/1_1/1778672107-9342.jpg"/>
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      <description><![CDATA[International Day of Families: हर साल 15 मई को अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस मनाया जाता है। आज के दौर में हम एक ही छत के नीचे रहकर भी अक्सर अपनी डिजिटल दुनिया में खोए रहते हैं। स्क्रीन टाइम बढ़ने से 'डिजिटल डिस्टेंस' पैदा हो गया है। लेकिन तकनीक के साथ ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="इमेज कैप्शन के साथ अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस पर संयुक्त परिवार संग जुड़े रहने का महत्व दर्शाता दृश्य" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/13/full/1778672107-9342.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>happy family tips: </strong>परिवार हमारे जीवन का सबसे मूल्यवान हिस्सा है। चाहे हम कितने भी व्यस्त क्यों न हों, परिवार ही वह आधार है जो हमें मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाता है। अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस हर साल 15 मई को मनाया जाता है ताकि हम परिवार के महत्व को समझें और इसके साथ अपने संबंधों को मजबूत करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	आज के डिजिटल युग में, जहां मोबाइल, सोशल मीडिया और इंटरनेट हमारे समय का बड़ा हिस्सा लेते हैं, परिवार के साथ सच्चा जुड़ाव बनाना कभी-कभी चुनौतीपूर्ण हो जाता है। बच्चों और वयस्कों का ध्यान अक्सर स्क्रीन पर केंद्रित हो जाता है, जिससे पारिवारिक बातचीत और समय कम हो जाता है। इसलिए, अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस के अवसर पर यह जरूरी है कि हम परिवार से जुड़ने के स्मार्ट तरीके अपनाएं। छोटे-छोटे कदम जैसे एक-दूसरे के साथ भोजन करना, डिजिटल डिटॉक्स करना, साझा गतिविधियां करना, और खुली बातचीत परिवार को मजबूत और खुशहाल बनाने में मदद कर सकते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	1. &#39;नो गैजेट ज़ोन&#39; और समय निर्धारित करें</p>
<p>
	2. तकनीक को जुड़ाव का जरिया बनाएं</p>
<p>
	3. डिजिटल शिष्टाचार का पालन</p>
<p>
	4. ऑफ-स्क्रीन एक्टिविटीज</p>
<p>
	5. फैमिली ग्रुप का सकारात्मक उपयोग</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	यहां डिजिटल युग में पारिवारिक रिश्तों को मजबूत बनाने के कुछ प्रभावी तरीके दिए गए हैं:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. &#39;नो गैजेट ज़ोन&#39; और समय निर्धारित करें</h3>
<p>
	घर में कुछ स्थान और समय ऐसे होने चाहिए जहां मोबाइल या लैपटॉप का प्रवेश वर्जित हो।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>भोजन की मेज:</strong> खाना खाते समय फोन को दूर रखने का नियम बनाएं। यह समय बातचीत और दिनभर के अनुभव साझा करने के लिए होना चाहिए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>बेडरूम रूटीन:</strong> सोने से कम से कम 30 मिनट पहले स्क्रीन को अलविदा कहें ताकि परिवार के सदस्य एक-दूसरे से बात कर सकें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. तकनीक को जुड़ाव का जरिया बनाएं</h3>
<p>
	डिजिटल उपकरणों का विरोध करने के बजाय उन्हें साथ आने का माध्यम बनाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मल्टीप्लेयर गेम्स: </strong>बच्चों के साथ वीडियो गेम खेलें या ऑनलाइन लूडो/चेस के जरिए मुकाबला करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>फैमिली मूवी नाइट: </strong>हफ्ते में एक दिन तय करें जब पूरा परिवार साथ बैठकर कोई फिल्म या डॉक्यूमेंट्री देखें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>डिजिटल कोलाज: </strong>साथ बैठकर पुरानी डिजिटल तस्वीरों को देखें और उनकी यादें ताज़ा करें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. डिजिटल शिष्टाचार का पालन</h3>
<p>
	अक्सर हम सामने बैठे व्यक्ति की बात सुनने के बजाय फोन नोटिफिकेशन पर ध्यान देते हैं। इसे बदलें:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सक्रिय श्रवण:</strong> जब परिवार का कोई सदस्य बात कर रहा हो, तो फोन नीचे रख दें और उनसे आंखें मिलाकर बात करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मैसेज के बजाय कॉल:</strong> घर के बड़ों को मैसेज करने के बजाय कॉल या वीडियो कॉल करें, उन्हें आपकी आवाज सुनकर अधिक खुशी होगी।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. ऑफ-स्क्रीन एक्टिविटीज </h3>
<p>
	डिजिटल थकान को कम करने के लिए साथ में कुछ &#39;एनालॉग&#39; काम करें:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>गार्डनिंग या कुकिंग:</strong> साथ में पौधा लगाना या कोई नई डिश बनाना टीम वर्क और हंसी-मजाक को बढ़ावा देता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>बोर्ड गेम्स: </strong>कैरम, ताश या मोनोपॉली जैसे खेल आज भी रिश्तों की गर्माहट बनाए रखने में बेजोड़ हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. फैमिली ग्रुप का सकारात्मक उपयोग</h3>
<p>
	अगर परिवार के सदस्य दूर रहते हैं, तो व्हाट्सएप या अन्य ऐप्स का इस्तेमाल सिर्फ सूचना देने के लिए नहीं, बल्कि जुड़ाव के लिए करें:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	एक-दूसरे को पुराने किस्से, प्रेरणादायक बातें या बस एक &#39;आई लव यू&#39; मैसेज भेजें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	ग्रुप पर &#39;पोल&#39; के जरिए वीकेंड प्लान या खाने की पसंद तय करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>परिवार दिवस का मुख्य मंत्र:</strong> &#39;कनेक्शन (Connection) और कन्वर्सेशन (Conversation) में फर्क होता है।&#39; वाई-फाई से कनेक्ट होना आसान है, लेकिन दिल से कन्वर्सेशन करना ही असली जुड़ाव है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/relationship/family-is-an-important-basis-for-the-expansion-of-indianness-126021600011_1.html" target="_blank">भारतीयता के विस्तार का महत्वपूर्ण आधार है परिवार</a></strong></p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 15 May 2026 09:35:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 15 May 2026 09:36:02 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Important Days and Dates]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[किडनी की सफाई के लिए 3 घरेलू उपाय, डॉक्टर की सलाह से आजमाएं]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/home-remedies/how-to-cleanse-your-kidneys-kidney-ki-safai-ke-liye-3-gharelu-upay-126051200035_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/home-remedies/how-to-cleanse-your-kidneys-kidney-ki-safai-ke-liye-3-gharelu-upay-126051200035_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/12/thumb/1_1/1778580811-3593.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/12/thumb/1_1/1778580811-3593.jpg</image>
      <description><![CDATA[Kidney Cleansing: किडनी (वृक्क) हमारे शरीर का फिल्टर है, जो रक्त से गंदगी और विषाक्त पदार्थों (Toxins) को बाहर निकालती है। इसे स्वस्थ और साफ रखने के लिए किचन में मौजूद कुछ चीजें बहुत प्रभावी हो सकती हैं। किडनी की प्राकृतिक सफाई के लिए यहाँ कुछ ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="How to Cleanse Your Kidneys Cleansing" class="imgCont" height="800" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/12/full/1778580811-3593.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="How to Cleanse Your Kidneys" width="1200" /></p>
	</p>
	Kidney Cleansing: किडनी (वृक्क) हमारे शरीर का फिल्टर है, जो रक्त से गंदगी और विषाक्त पदार्थों (Toxins) को बाहर निकालती है। इसे स्वस्थ और साफ रखने के लिए किचन में मौजूद कुछ चीजें बहुत प्रभावी हो सकती हैं। किडनी की प्राकृतिक सफाई के लिए यहाँ कुछ प्रमुख घरेलू उपाय दिए गए हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. हर्बल ड्रिंक्स और काढ़ा:</h3>
<p>
	<strong>धनिया काढ़ा: </strong>मुट्ठी भर खड़ा धनिया लें और उसे रात को पानी में भिगो दें। सुबह उसे 10 मिनट तक गुनगुने पानी में उबालें। इसे छानकर ठंडा होने पर पिएं। यह किडनी से नमक और गंदगी बाहर निकालने में मदद करता है। यदि आप चाहें तो उबालते वक्त इसमें थोड़ा अदरक, कालीमीर्च, हल्दी और शहद मिलाकर अंत में आधा नींबू भी निचोड़ देंगे तो यह एकदम जबरदस्त काढ़ा बन जाएगा।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अदरक की चाय: </strong>अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो किडनी की सूजन कम करते हैं। इसे पानी में उबालकर या शहद मिलाकर पीना फायदेमंद है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>भुट्टे के बाल (Corn Silk): </strong>मक्के के दानों पर जो सुनहरे बाल होते हैं, उन्हें पानी में उबालकर चाय की तरह पिएं। यह यूरिन इन्फेक्शन को रोकता है और किडनी की सफाई करता है।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/healthy-food/summer-health-tips-n-drinks-126040700047_1.html" target="_blank">Summer health tips: लू और डिहाइड्रेशन से बचाने वाले 10 घरेलू पेय और हेल्थ टिप्स</a></strong></p>
</p>
<h3>
	2. फलों का रस</h3>
<p>
	नींबू का रस: नींबू में सिट्रिक एसिड होता है जो कैल्शियम को जमने से रोकता है, जिससे पथरी (Kidney Stone) होने का खतरा कम हो जाता है। रोज सुबह गुनगुने पानी में नींबू निचोड़कर पिएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>क्रैनबेरी जूस (Cranberry): </strong>यह यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTI) के लिए रामबाण है और किडनी के बैक्टीरिया को साफ करता है। ध्यान रहे कि जूस बिना चीनी वाला हो।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सेब का सिरका (Apple Cider Vinegar): </strong>एक गिलास पानी में 1-2 चम्मच सेब का सिरका मिलाकर पीने से ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कम होता है और किडनी स्वस्थ रहती है।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/hypertension-in-elderly-patients-symptoms-125111800025_1.html" target="_blank">Sixty Plus Life: 60 साल की उम्र में BP बढ़ने पर हृदय रोग, स्ट्रोक और किडनी का खतरा सबसे ज्यादा, जानें कैसे बचें?</a></strong></p>
</p>
<h3>
	3. खान-पान में बदलाव</h3>
<p>
	<strong>पानी की पर्याप्त मात्रा: </strong>किडनी की सफाई का सबसे सरल तरीका दिन भर में कम से कम 8-10 गिलास पानी पीना है। यह टॉक्सिन्स को पतला करके बाहर निकाल देता है।</p>
<p>
	<strong>सब्जियों का सेवन: </strong>मूली, गोभी, लहसुन और प्याज को डाइट में शामिल करें। लहसुन में मौजूद &#39;एलिसिन&#39; किडनी को भारी धातुओं के नुकसान से बचाता है।</p>
<p>
	<strong>लाल अंगूर: </strong>इसमें फ्लेवोनोइड्स होते हैं जो किडनी की कार्यक्षमता बढ़ाते हैं और सूजन कम करते हैं।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/roasted-potatoes-health-benefits-125112400011_1.html" target="_blank">Health Benefits of Roasted Potatoes : भुने आलू खाने से हेल्थ को मिलते हैं ये 6 सेहतमंद फायदे</a></strong></p>
</p>
<h3>
	क्या करें</h3>
<ul>
	<li>
		नमक (सोडियम) का सेवन कम करें।</li>
	<li>
		व्यायाम और योग को दिनचर्या में शामिल करें।</li>
	<li>
		यूरिन को देर तक रोक कर न रखें।</li>
	<li>
		साफ सुथरा और पर्याप्त मात्रा में पानी ही पिएं।</li>
</ul>
<h3>
	क्या न करें</h3>
<ul>
	<li>
		अधिक पेनकिलर्स (Dolo, Combiflam आदि) न खाएं।</li>
	<li>
		शराब और धूम्रपान से परहेज करें।</li>
	<li>
		जंक फूड और पैकेट बंद खाने से बचें।</li>
</ul>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>चेतावनी: </strong>अगर आपको पहले से किडनी की कोई गंभीर बीमारी है, आप डायलिसिस पर हैं, किडनी स्टोन है, लो या हाई ब्लड प्रेशर है, शुगर है, ब्लड पतला करने की दवा ले रहे हैं या आप गर्भवती महिला हैं, तो इनमें से कोई भी उपाय अपनाने से पहले अपने डॉक्टर (Nephrologist) से सलाह जरूर लें। अत्यधिक मात्रा में किसी भी काढ़े का सेवन न करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अस्वीकरण (Disclaimer): </strong>चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।</p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 14 May 2026 15:15:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 15 May 2026 16:43:54 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[home remedies]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Watermelon Granita: तरबूज के छिलकों को फेंकने से पहले देखें यह रेसिपी, बन जाएगी शानदार डिश]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/sweets-dishes/watermelon-granita-recipe-126051400013_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/sweets-dishes/watermelon-granita-recipe-126051400013_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/14/thumb/1_1/1778739343-9011.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/14/thumb/1_1/1778739343-9011.jpg</image>
      <description><![CDATA[Zero Waste Recipe: अक्सर हम तरबूज खाकर छिलके फेंक देते हैं, लेकिन उन छिलकों के पास लगा सफेद हिस्सा बेहद गुणकारी होता है। इसे फेंकने के बजाय बनाएं एक इटालियन स्टाइल 'ग्रैनिटा' जो शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करेगी।]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Pictured is a scene from the making of Watermelon Granita, a traditional Italian summer dessert." class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/14/full/1778739343-9011.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>The Granita Technique:</strong> गर्मियों के मौसम में तरबूज की ग्रैनिटा से बेहतर और कुछ नहीं हो सकता। यह एक पारंपरिक इटालियन डेजर्ट है, जो बनाने में बेहद आसान है और खाने में एकदम ताज़ा। इसमें आइसक्रीम की तरह क्रीम नहीं होती, बल्कि यह बर्फ के क्रिस्टल्स जैसा होता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/sweets-dishes/refreshing-cool-drinks-126050400011_1.html" target="_blank">Summer drinks recipe: घर पर बनाएं प्री-मिक्स से मिनटों में तैयार करें ये खास 5 कूल-कूल ड्रिंक्स</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	यहां स्टेप-बाय-स्टेप रेसिपी दी गई है:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	तरबूज ग्रैनिटा के लिए सामग्री</h3>
<p>
	<strong>तरबूज</strong>: 4-5 कप तरबूज तथा तरबूज के लाल हिस्से और छिलके के बीच वाले सफेद हिस्से को निकाल लें (कटा हुआ और बीज निकला हुआ)। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>चीनी:</strong> 1/4 कप (तरबूज की मिठास के अनुसार कम या ज्यादा कर सकते हैं) या मेपल सिरप</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>नींबू का रस:</strong> 1 बड़ा चम्मच (ताजगी के लिए)</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>पुदीने के पत्ते:</strong> गार्निश के लिए</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>काला नमक: </strong>एक चुटकी (ऑप्शनल, स्वाद निखारने के लिए)</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	बनाने की विधि</h3>
<p>
	<strong>1. प्यूरी तैयार करें:</strong></p>
<p>
	सबसे पहले तरबूज के टुकड़ों को ब्लेंडर में डालें। साथ ही चीनी और नींबू का रस भी डाल दें। इसे तब तक ब्लेंड करें जब तक कि यह एकदम स्मूद प्यूरी न बन जाए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>2. छान लें:</strong></p>
<p>
	अगर आप बहुत ही स्मूद टेक्सचर चाहती हैं, तो इस मिश्रण को एक छलनी से छान लें ताकि कोई रेशे या बीज न रहें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>3. फ्रीजर में रखें:</strong></p>
<p>
	अब इस मिश्रण को एक चौड़े और उथले मेटल या प्लास्टिक के कंटेनर में डालें। ध्यान रहे कि बर्तन गहरा न हो ताकि बर्फ जल्दी और सही तरीके से जमे। इसे ढककर 2 घंटे के लिए फ्रीजर में रख दें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>4. बर्फ को खुरचें:</strong></p>
<p>
	2 घंटे बाद कंटेनर निकालें। अब तक किनारे जमने लगे होंगे। एक कांटा (fork) लें और जमी हुई बर्फ को खुरचकर बीच में लाएं। इसे वापस फ्रीजर में रख दें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>5. प्रक्रिया दोहराएं:</strong></p>
<p>
	हर 30 से 45 मिनट में इसे बाहर निकालें और कांटे से खुरचते रहें। ऐसा 3-4 बार करें। इससे बड़े बर्फ के टुकड़े नहीं बनेंगे, बल्कि आपको बारीक, बर्फीले क्रिस्टल्स मिलेंगे।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>6. सर्व करें:</strong></p>
<p>
	जब पूरा मिश्रण दानेदार बर्फ जैसा बन जाए, तो इसे ठंडे गिलास या बाउल में निकालें। ऊपर से ताजे पुदीने के पत्ते लगाएं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	प्रो टिप्स:</h3>
<p>
	<strong>ट्विस्ट के लिए:</strong> आप ब्लेंड करते समय इसमें 2-3 पुदीने के पत्ते भी डाल सकती हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>चीनी का विकल्प: </strong>अगर आप हेल्थ को लेकर सजग हैं, तो चीनी की जगह शहद या मेपल सिरप का इस्तेमाल कर सकती हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सर्विंग स्टाइल: </strong>इसे सर्व करने से ठीक पहले ही फ्रीजर से निकालें, क्योंकि यह बहुत जल्दी पिघलने लगता है।<br />
	<br />
	<h3>
		FAQs: </h3>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>1. ग्रैनिटा और आइसक्रीम में क्या फर्क है? </strong></p>
	<p>
		ग्रैनिटा बर्फ के दानों जैसा होता है, इसमें दूध या क्रीम नहीं होती।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>2. क्या यह वजन घटाने में मदद करता है? </strong></p>
	<p>
		हां, इसमें कैलोरी बहुत कम होती है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/ways-to-avoid-heat-wave-126042000012_1.html" target="_blank">Summer Health: लू से बचना है? तो ये 5 &#39;देसी ड्रिंक्स&#39; हैं आपके रक्षक</a></strong></p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 14 May 2026 12:03:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 14 May 2026 12:10:22 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Sweets Dishes]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Lord Shantinath jayanti: जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर भगवान शांतिनाथ की जयंती]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/jain-religion/lord-shantinath-jayanti-2026-126051200009_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/jain-religion/lord-shantinath-jayanti-2026-126051200009_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/12/thumb/1_1/1778566797-0726.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Bhagwan Shantinath Jayanti: जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर, भगवान शांतिनाथ की जयंती यानी जन्म कल्याणक जैन समाज के लिए अत्यंत पवित्र और मंगलकारी दिन है। उनके जीवन का संदेश शांति, अहिंसा और करुणा पर आधारित है। जैन मंदिरों में इस दिन विशेष पूजा, भजन, ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="फोटो में शांतचित्त मुद्रा में शांति और अहिंसा के प्रतीक जैन धर्म के 16वें तीर्थंकर शांतिनाथ भगवान" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/12/full/1778566797-0726.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>16th Jain Tirthankar Lord Shantinath:</strong> जैन शास्त्रों के अनुसार, उन्होंने अपने जीवन में अत्यंत धैर्य, आत्म-नियंत्रण और अहिंसा का पालन किया। भगवान शांतिनाथ के उपदेश मुख्यतः सत्य, अहिंसा, क्षमा और मोक्ष पर आधारित हैं। जैन धर्म में भगवान शांतिनाथ का महत्व इसलिए भी है क्योंकि वे आध्यात्मिक शांति और मानसिक स्थिरता के प्रतीक हैं। उनके अनुयायी उन्हें श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजते हैं और उनके जीवन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन में संयम और शांति लाने का प्रयास करते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<ul>
	<li>
		तिथि और समय</li>
	<li>
		भगवान शांतिनाथ का संक्षिप्त परिचय</li>
	<li>
		जयंती का महत्व और परंपरा</li>
	<li>
		एक महान संदेश</li>
	<li>
		भगवान शांतिनाथ का अर्घ्य</li>
	<li>
		मंत्र</li>
</ul>
<p>
	 </p>
<h3>
	यहां उनके जन्म और जयंती से जुड़ी मुख्य जानकारी दी गई है:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	तिथि और समय</h3>
<p>
	<p>
		भगवान शांतिनाथ का जन्म ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को हुआ था, अत: इस तिथि को आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है। भगवान शांतिनाथ ने वैराग्य के बाद ज्येष्ठ कृष्णा चतुर्दशी को दीक्षा ग्रहण की, पौष शुक्ला दशमी को केवलज्ञान की प्राप्ति हुई और ज्येष्ठ कृष्णा चौदस को श्री सम्मेद शिखर जी से मोक्ष प्राप्त किया था।</p>
</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	भगवान शांतिनाथ का संक्षिप्त परिचय</h3>
<p>
	तीर्थंकर क्रम: 16वें तीर्थंकर</p>
<p>
	जन्म स्थान: हस्तिनापुर (उत्तर प्रदेश)</p>
<p>
	माता-पिता: माता ऐरा देवी और पिता राजा विश्वसेन</p>
<p>
	चिह्न: हिरण</p>
<p>
	वर्ण (रंग): सुवर्ण (स्वर्ण के समान आभा)</p>
<p>
	शांतिनाथ के शरीर की स्वर्ण के समान आभा दिखाई देती थी। उनके शरीर पर सूर्य, चन्द्र, ध्वजा, शंख, चक्र और तोरण के शुभ मंगल चिह्न अंकित थे। जन्म से ही उनकी जिह्वा पर मां सरस्वती देवी विराजमान थीं।</p>
<p>
	विशेष उपलब्धि<span style="white-space:pre"> </span>: वे &#39;चक्रवर्ती&#39; सम्राट और &#39;कामदेव&#39; भी थे।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	जयंती का महत्व और परंपरा</h3>
<p>
	भगवान शांतिनाथ को &#39;शांति के पुंज&#39; के रूप में पूजा जाता है। उनकी जयंती पर श्रद्धालु निम्नलिखित अनुष्ठान करते हैं:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>शांति विधान: </strong>विश्व में सुख-शांति की कामना के लिए विशेष &#39;शांति मंडल विधान&#39; का आयोजन किया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अभिषेक और पूजन: </strong>मंदिरों में भगवान की प्रतिमा का पंचामृत अभिषेक किया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>शांतिधारा: </strong>विशेष मंत्रोच्चार के साथ शांतिधारा की जाती है, जिसे बाधाओं और व्याधियों को दूर करने वाला माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>दान-पुण्य</strong>: इस दिन जीव दया (पशु-पक्षियों की सेवा) और निर्धनों की सहायता को विशेष महत्व दिया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	एक महान संदेश</h3>
<p>
	भगवान शांतिनाथ ने धैर्य, संयम और अहिंसा का संदेश दिया। उनका जीवन जैन धर्म के अनुयायियों के लिए आध्यात्मिक अनुशासन और संयम का आदर्श है। भगवान शांतिनाथ का जीवन हमें सिखाता है कि भौतिक साम्राज्य का त्याग कर आत्मिक शांति प्राप्त करना ही जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है। उनके नाम का स्मरण मात्र ही मन को स्थिरता और शांति प्रदान करने वाला माना गया है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	भगवान शांतिनाथ का अर्घ्य </h3>
<p>
	 </p>
<p>
	बसु द्रव्य संवारी तुम ढिग सारी, आनन्द कारी छग प्यारी।</p>
<p>
	तुम हो भवतारी, करुणा धारी, यातैं थारी शरणारी।</p>
<p>
	श्री शान्ति जिनेश, नुतनाक्रेशं वृष चक्रेशं, चक्रेशं।</p>
<p>
	हनि अरि चक्रेशं, हे गुनधेशं, दया मृतेशं, मक्रेशं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	मंत्र-</h3>
<p>
	- ॐ ह्रीं श्रीं शांतिनाथ जिनेन्द्राय नमः</p>
<p>
	- ॐ ह्रीं श्रीं अर्हं श्री शांतिनाथ जिनेन्द्राय नमः</p>
<p>
	 </p>
<p>
	शांतिनाथ जयंती हर साल बड़ी श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। इस दिन मंदिरों में विशेष पूजा, भजन, प्रवचन और दान-पुण्य का आयोजन होता है। जैन अनुयायी इस दिन उपवास, ध्यान और धर्मचर्चा के माध्यम से भगवान शांतिनाथ के आदर्शों को अपनाने का प्रयास करते हैं।<br />
	<br />
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Thu, 14 May 2026 09:24:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 14 May 2026 09:26:42 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Jain Religion]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[वास्तु टिप्स: खुशहाल घर और खुशहाल जीवन के 10 सरल उपाय vastu tips]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/vastu-fengshui/vastu-tips-for-happy-home-126051300048_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/vastu-fengshui/vastu-tips-for-happy-home-126051300048_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/13/thumb/1_1/1778667886-6982.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/13/thumb/1_1/1778667886-6982.jpg</image>
      <description><![CDATA[Vastu Shastra n Happy Home Tips: खुशहाल घर ही खुशहाल जीवन की नींव है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की ऊर्जा हमारे स्वास्थ्य, रिश्तों और आर्थिक स्थिति पर सीधा असर डालती है। यहां खुशहाल घर बनाए रखने और खुशहाल जीवन के लिए 10 सबसे सरल और प्रभावी वास्तु ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="क्या आपका घर वास्तु सम्मत है? इन 10 आसान उपायों को अपनाएं और अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव महसूस करें!" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/13/full/1778667886-6982.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>sukhi ghar ke liye vastu tips:</strong> एक खुशहाल घर ईंट-पत्थरों से नहीं, बल्कि उसमें रहने वाले लोगों के बीच के सामंजस्य, प्रेम और सकारात्मक ऊर्जा से बनता है। इसके लिए आपको घर के वास्तु पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। यदि आप भी अपने घर में तनावग्रस्त रहते हैं, या कलह निरंतर बनी रहती है तो अपने जीवन और घर को खुशहाल बनाने के लिए आप वास्तुनुसार छोटे-छोटे बदलाव करके तथा वास्तु सलाह पर ध्यान देकर घर में खुशहाली ला सकते हैं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vastu-fengshui/ways-to-protect-south-direction-from-negative-energy-in-home-126040700036_1.html" target="_blank">South Direction Home Vastu Tips: घर की दक्षिण दिशा को इन 5 तरीकों से अशुभता से बचाएं</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	आइए यहां जानते हैं घर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के लिए 10 वास्तु टिप्स...</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. मुख्य द्वार पर &#39;स्वास्तिक&#39; और &#39;ॐ&#39;:</h3>
<p>
	घर के मुख्य दरवाजे पर सिंदूर से स्वास्तिक या ॐ का चिन्ह बनाएं। यह नकारात्मक ऊर्जा को घर में प्रवेश करने से रोकता है और शुभता लाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. ईशान कोण (North-East) को रखें खाली:</h3>
<p>
	घर के उत्तर-पूर्वी कोने को देवताओं का स्थान माना जाता है। यहां कभी भी भारी सामान या कबाड़ न रखें। इस जगह को हमेशा साफ-सुथरा और खुला रखें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. नमक के पानी का पोंछा:</h3>
<p>
	हफ्ते में कम से कम दो बार पानी में थोड़ा समुद्री नमक (Sea Salt) मिलाकर पोंछा लगाएं। यह घर की नकारात्मक तरंगों को सोख लेता है और सकारात्मकता बढ़ाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. ईशान कोण में जल का पात्र:</h3>
<p>
	घर की उत्तर-पूर्व दिशा में एक तांबे के लोटे में पानी भरकर रखें। इसे रोज बदलें। यह घर में सुख और शांति का संचार करता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. किचन में &#39;अग्नि&#39; और &#39;जल&#39; की दूरी:</h3>
<p>
	वास्तु के अनुसार चूल्हा यानी अग्नि और पानी का सिंक एक-दूसरे के बगल में नहीं होने चाहिए। इनके बीच कम से कम 2-3 फीट की दूरी रखें या बीच में कोई लकड़ी का बोर्ड रख दें।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vastu-fengshui/vastu-tips-for-rented-house-126050100005_1.html" target="_blank">Vastu tips: किराए के घर में रह रहे हैं? तो जान लें ये 8 वास्तु टिप्स, जो बदल देंगे आपकी किस्मत</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	6. शाम को जलाएं कपूर:</h3>
<p>
	रोजाना शाम के समय घर में कपूर जलाकर पूरे घर में उसका धुआं दिखाएं। इससे घर के सूक्ष्म वास्तु दोष दूर होते हैं और वातावरण शुद्ध होता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	7. टूटी-फूटी चीजें तुरंत हटाएं:</h3>
<p>
	घर में बंद घड़ी, टूटा हुआ कांच, या दरार वाले बर्तन न रखें। ये चीजें विकास में बाधा डालती हैं और घर में दरिद्रता लाती हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	8. जूते-चप्पल की सही जगह:</h3>
<p>
	मुख्य द्वार के ठीक सामने कभी भी जूते-चप्पल का ढेर न लगाएं। इसे हमेशा साइड में या रैक के अंदर रखें, ताकि घर में आने वाली सकारात्मक ऊर्जा का रास्ता न रुके।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	9. बेडरूम में आईना (Mirror) न हो:</h3>
<p>
	सोते समय आईने में आपका शरीर नहीं दिखना चाहिए। अगर बेडरूम में आईना है, तो रात को उसे किसी कपड़े से ढक दें। इससे मानसिक तनाव कम होता है और वैवाहिक जीवन सुखद रहता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	10. सकारात्मक पौधों का चुनाव:</h3>
<p>
	घर में मनी प्लांट, तुलसी या एलोवेरा जैसे पौधे लगाएं। कांटेदार पौधे (जैसे कैक्टस) घर के अंदर लगाने से बचें, क्योंकि ये रिश्तों में कड़वाहत ला सकते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vastu-fengshui/vastu-remedies-for-business-success-126050500015_1.html" target="_blank">Vastu tips: क्या आपका बिजनेस स्टक महसूस कर रहा है? तो अपनाएं ये 10 टिप्स और देखें मुनाफे का जादू</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 13 May 2026 16:30:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 13 May 2026 16:21:18 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Vastu Fengshui]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[स्वस्थ एवं सशक्त भारत की बुनियाद बनेगा 'स्वस्थ भारत पोर्टल']]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/my-blog/swasth-bharat-portal-foundation-of-empowered-india-126051300076_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/my-blog/swasth-bharat-portal-foundation-of-empowered-india-126051300076_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/13/thumb/1_1/1778685849-401.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/13/thumb/1_1/1778685849-401.jpg</image>
      <description><![CDATA[स्वास्थ्य हर नागरिक का मूल अधिकार है। सशक्त भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है और इस सपने की बुनियाद स्वस्थ भारत ही है। आगे चलकर “सशक्त भारत” और “स्वस्थ भारत” की यह संकल्पना “सबका साथ, सबका विकास” से भी जुड़ जाती है।]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="" class="imgCont" height="675" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/13/full/1778685849-401.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="" width="1200" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	swasth bharat Portal: स्वास्थ्य हर नागरिक का मूल अधिकार है। सशक्त भारत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है और इस सपने की बुनियाद स्वस्थ भारत ही है। आगे चलकर “सशक्त भारत” और “स्वस्थ भारत” की यह संकल्पना “सबका साथ, सबका विकास” से भी जुड़ जाती है।</p>
<h3>
	सबके स्वस्थ होने के बहुआयामी और दूरगामी लाभ</h3>
<p>
	सबके स्वस्थ रहने के बहुआयामी और दूरगामी लाभ हैं। स्वस्थ व्यक्ति ही अपने परिवार, समाज और देश को अपना श्रेष्ठतम योगदान दे सकता है। इसका सीधा संबंध उसकी उत्पादकता और देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ता है। भारत दुनिया का सर्वाधिक आबादी वाला देश है। अब भी यहां आर्थिक असमानता मौजूद है। कई इलाके पहुंच के लिहाज से दुरूह हैं। ऐसे क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार समय पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण होता है, खासकर गंभीर रोगों में उपचार का शुरुआती “गोल्डन पीरियड” अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।</p>
<h3>
	स्वास्थ्य सेवाओं के एकीकरण की दिशा में बड़ा कदम</h3>
<p>
	इन चुनौतियों के समाधान की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा हाल ही में लॉन्च किया गया “स्वस्थ भारत पोर्टल” भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को डिजिटल रूप से एकीकृत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	यह पोर्टल आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM — Ayushman Bharat Digital Mission) के अनुरूप विकसित API (Application Programming Interface) आधारित फेडरेटेड आर्किटेक्चर पर काम करता है। इसका उद्देश्य विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अलग-अलग डिजिटल सिस्टम को एक मंच पर लाना है। यह डेटा डुप्लिकेशन कम करने, फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों का प्रशासनिक बोझ घटाने तथा डेटा आधारित निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।</p>
<h3>
	क्या थीं देश की स्वास्थ्य प्रणाली की चुनौतियां</h3>
<ul>
	<li>
		भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली लंबे समय से विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों — जैसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मातृ स्वास्थ्य, टीकाकरण, रोग निगरानी और पोषण कार्यक्रम — के अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्मों के कारण खंडित रही है।</li>
	<li>
		अलग-अलग सॉफ्टवेयर होने से डेटा एंट्री में दोहराव, रिपोर्टिंग में देरी तथा संसाधनों की बर्बादी जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं।</li>
	<li>
		स्वस्थ भारत पोर्टल को इन चुनौतियों के समाधान की दिशा में विकसित किया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने हाल ही में 10वें नेशनल समिट ऑन इनोवेशन एंड इनक्लूसिविटी के दौरान इसे लॉन्च किया। यह पोर्टल ABDM का अभिन्न हिस्सा है तथा आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ABHA — Ayushman Bharat Health Account) से जुड़कर सुरक्षित डेटा आदान-प्रदान सुनिश्चित करता है।</li>
</ul>
<h3>
	पोर्टल की संरचना और प्रमुख खूबियां</h3>
<p>
	इस पोर्टल की सबसे बड़ी विशेषता इसका एकीकृत इंटरफेस है। इसके जरिए विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों के सिस्टम को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाया गया है, जिससे कई लॉगिन और बार-बार डेटा एंट्री की आवश्यकता कम हो सकती है। यह रोगी-केंद्रित डेटा प्रबंधन तथा उसकी निरंतर स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करने में मददगार हो सकता है।</p>
<p>
	रीयल-टाइम डैशबोर्ड, बेहतर निगरानी और साक्ष्य-आधारित योजना निर्माण की सुविधा के कारण यह आशा और एएनएएम जैसी फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का प्रशासनिक बोझ कम कर सकता है।</p>
<h3>
	पोर्टल के लाभ</h3>
<p>
	सरकारी अनुमानों के अनुसार, इस पोर्टल से इंफ्रास्ट्रक्चर लोड में 20-30 प्रतिशत, डेटा एंट्री प्रयासों में 20-40 प्रतिशत तथा मानव संसाधन डुप्लिकेशन में भी उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है।<br />
	 </p>
<p>
	इस पोर्टल के लागू होने के बाद स्वास्थ्य कर्मियों को मरीजों की देखभाल के लिए अधिक समय मिल सकेगा। किसी रोग के संक्रमण की स्थिति में निगरानी और रोकथाम का रिस्पॉन्स टाइम बेहतर हो सकता है। इसके अनुसार आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी आसान होगा। इससे संसाधनों की बर्बादी कम होगी और उनका उपयोग अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।<br />
	 </p>
<p>
	कुल मिलाकर स्वस्थ भारत पोर्टल भारत में रोगों की रोकथाम, पूर्वानुमान और व्यक्तिगत स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव लाने की क्षमता रखता है।इससे स्वास्थ्य सेवाएं अधिक तेज, पारदर्शी और गुणवत्ता पूर्ण हो सकती हैं। आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं का प्रशासनिक काम कम होने से वे मरीजों की देखभाल, घर-घर जागरूकता, टीकाकरण तथा रोगों की रोकथाम से जुड़े कार्यों पर अधिक समय दे सकेंगी।</p>
<p>
	स्वास्थ्य केंद्रों पर लोगों को बेहतर और अधिक व्यक्तिगत सेवाएं मिलने की संभावना बढ़ेगी। कागजी कार्रवाई कम होने तथा रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध रहने से नाम, परिवार विवरण और स्वास्थ्य इतिहास जैसी जानकारी एक जगह सुरक्षित रहेगी।<br />
	 </p>
<p>
	जरूरत पड़ने पर यह डेटा आसानी से रेफरल अस्पतालों तक पहुंचाया जा सकेगा। मेडिकल हिस्ट्री उपलब्ध होने से बीपी और शुगर जैसी दीर्घकालिक बीमारियों के मरीजों का नियमित फॉलो-अप आसान हो सकेगा। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की लगातार निगरानी तथा फॉलो-अप भी बेहतर हो सकेगा।<br />
	 </p>
<p>
	इसके साथ ही टीकाकरण, मातृ स्वास्थ्य और संचारी रोगों जैसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की रीयल-टाइम निगरानी मजबूत होगी। बेहतर डेटा उपलब्ध होने से सरकार स्वास्थ्य शिक्षा और पोषण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी तरीके से लागू कर सकेगी।<br />
	 </p>
<p>
	हालांकि, इसकी सफलता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि जमीनी स्तर पर कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों को आवश्यक प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता कितनी प्रभावी ढंग से मिलती है। यदि ऐसा हुआ तो यह पोर्टल न केवल स्वास्थ्य प्रणाली की दक्षता बढ़ाएगा, बल्कि “स्वस्थ भारत” के राष्ट्रीय लक्ष्य को साकार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।</p>
<p>
	Edited by: Vrijendra Singh Jhala </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 13 May 2026 15:36:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 13 May 2026 20:54:58 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[My Blog]]></category>
      <authorname>गिरीश पांडेय</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[छत्रपति संभाजी महाराज: मौत सामने थी, फिर भी धर्म और स्वाभिमान से नहीं किया समझौता]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/inspiring-personality/shrimant-chhatrapati-sambhaji-maharaj-126051300029_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/inspiring-personality/shrimant-chhatrapati-sambhaji-maharaj-126051300029_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/13/thumb/1_1/1778660041-359.jpg"/>
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      <description><![CDATA[भारतीय इतिहास का आकाश अनगिनत वीरों की गाथाओं से देदीप्यमान है, किंतु कुछ नाम ऐसे हैं जो केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि राष्ट्र की चेतना में अमर हो जाते हैं। श्रीमंत छत्रपति संभाजी महाराज एक ऐसा ही अद्वितीय व्यक्तित्व हैं, जिनका जीवन ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="" class="imgCont" height="800" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/13/full/1778660041-359.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="Shrimant Chhatrapati Sambhaji Maharaj" width="1200" /></p>
	</p>
	<strong><span style="color:#800000;">- अमित राव पवार (युवा लेखक-साहित्यकार)</span></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	भारतीय इतिहास का आकाश अनगिनत वीरों की गाथाओं से देदीप्यमान है, किंतु कुछ नाम ऐसे हैं जो केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि राष्ट्र की चेतना में अमर हो जाते हैं। श्रीमंत छत्रपति संभाजी महाराज एक ऐसा ही अद्वितीय व्यक्तित्व हैं, जिनका जीवन साहस, स्वाभिमान, विद्वता और आत्मोत्सर्ग का अद्भुत संगम था।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	यह विडंबना ही है कि इतिहास की मुख्यधारा में उनके व्यक्तित्व को वह विस्तार और सम्मान नहीं मिल पाया, जिसके वे वास्तविक अधिकारी थे। अक्सर उनके जीवन को केवल युद्धों और उनके बलिदान तक सीमित कर दिया गया, जबकि वास्तविकता यह है कि वे केवल एक अजेय योद्धा ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और राष्ट्रवाद के प्रखर प्रहरी थे। आज के दौर में, जब समाज वैचारिक भ्रम और सांस्कृतिक विस्मृति के दौर से गुजर रहा है, संभाजी महाराज का जीवन हमें स्मरण कराता है कि राष्ट्र केवल सीमाओं से नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और दृढ़ संकल्प से सुरक्षित रहता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	संघर्षों में बीता बाल्यकाल: फौलाद की नींव</h3>
<p>
	14 मई 1657 को पुरंदर के अभेद्य किले में जन्मे संभाजी महाराज ने बचपन से ही संघर्ष को अपनी नियति के रूप में स्वीकार किया। वे छत्रपति शिवाजी महाराज के ज्येष्ठ पुत्र थे, परंतु राजमहलों का सुख-वैभव उनके हिस्से में बहुत कम आया। शैशवास्था में ही माता सईबाई का देहांत हो गया, जिसके उपरांत उनका पालन-पोषण राजमाता जीजाबाई के संरक्षण में हुआ। राजमाता ने उनके भीतर धर्म, स्वराज्य और राष्ट्र-गौरव के वे संस्कार बीजारोपित किए, जो जीवन के अंतिम क्षण तक उनके व्यक्तित्व की आधारशिला बने रहे।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	मात्र नौ वर्ष की कोमल आयु में &#39;पुरंदर की संधि&#39; के कारण उन्हें मुगल दरबार में एक राजनीतिक बंधक के रूप में रहना पड़ा। जिस आयु में बालक खेल-कूद की दुनिया में मग्न रहते हैं, उस आयु में संभाजी महाराज शत्रुओं के बीच रहकर राजनीति के छल-प्रपंच और सत्ता के कठोर यथार्थ को समझ रहे थे। इन्हीं विपरीत परिस्थितियों ने उनके भीतर एक अदम्य साहस को जन्म दिया और उन्हें लोहे से भी अधिक सुदृढ़ बना दिया।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	शस्त्र और शास्त्र का समन्वय: एक अद्वितीय विद्वान</h3>
<p>
	संभाजी महाराज की छवि प्रायः केवल एक आक्रामक योद्धा की रही है, किंतु वे एक असाधारण बुद्धिजीवी और बहुभाषाविद् भी थे। संस्कृत, मराठी, हिंदी, फारसी और पुर्तगाली जैसी भाषाओं पर उनका पूर्ण अधिकार था। इतनी कम आयु में उन्होंने &#39;बुधभूषणम्&#39; जैसे संस्कृत ग्रंथ की रचना कर यह सिद्ध कर दिया कि उनकी तलवार जितनी तीव्र थी, उनकी लेखनी और बुद्धि उतनी ही प्रखर। वे इस सत्य से भली-भांति परिचित थे कि किसी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसकी सेना के साथ-साथ उसकी ज्ञान परंपरा और संस्कृति में निहित होती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	रणकौशल और स्वराज्य की रक्षा</h3>
<p>
	1680 में छत्रपति शिवाजी महाराज के महाप्रयाण के बाद हिंदवी स्वराज्य पर संकट के बादल मँडराने लगे। एक ओर आंतरिक मतभेद थे, तो दूसरी ओर औरंगजेब अपनी विशाल सेना के साथ दक्षिण को रौंदने के लिए निकल पड़ा था। उसे विश्वास था कि शिवाजी महाराज के बाद स्वराज्य का स्वप्न बिखर जाएगा, किंतु संभाजी महाराज ने उसके इस भ्रम को धूल चटा दी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	16 जनवरी 1681 को उन्होंने सिंहासन संभाला और अगले नौ वर्षों तक मुगलों के विरुद्ध ऐसा भीषण प्रतिरोध खड़ा किया कि औरंगजेब की महात्वाकांक्षाएं धराशायी हो गईं। अपने संक्षिप्त शासनकाल में उन्होंने लगभग 140 युद्ध लड़े और आश्चर्यजनक रूप से एक भी युद्ध नहीं हारा। यह उनकी असाधारण युद्ध नीति, छापामार रणनीति और अटूट राष्ट्रनिष्ठा का ही परिणाम था।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	बलिदान: जब मृत्यु भी नतमस्तक हो गई</h3>
<p>
	फरवरी 1689 में संगमेश्वर में हुए एक विश्वासघात के कारण वे मुगलों द्वारा बंदी बना लिए गए। इसके बाद इतिहास ने क्रूरता का वह भयावह चेहरा देखा, जिसकी मिसाल विश्व में कहीं और नहीं मिलती। औरंगजेब ने उनके सामने धर्म परिवर्तन और आत्मसमर्पण का प्रस्ताव रखा, जिसके बदले उन्हें जीवनदान देने का वादा किया गया। किंतु संभाजी महाराज के लिए यह केवल धर्म का नहीं, बल्कि स्वराज्य की अस्मिता का प्रश्न था।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	उन पर 40 दिनों तक अमानवीय यातनाएं बरसाई गईं। उनके शरीर को क्षत-विक्षत किया गया, उन्हें अपमानित किया गया, किंतु उनकी आत्मा को झुकाया नहीं जा सका। 11 मार्च 1689 को तुलापुर के तट पर उनकी निर्मम हत्या कर दी गई। किंतु उस दिन एक योद्धा का अंत नहीं हुआ, बल्कि एक &#39;विचार&#39; अमर हो गया। उनके बलिदान ने मराठा साम्राज्य में वह ज्वाला प्रज्वलित की जिसने अंततः मुगल साम्राज्य की नींव हिला दी। जिस औरंगजेब ने स्वराज्य को मिटाने का स्वप्न देखा था, उसे स्वयं दक्कन की इसी मिट्टी में दफन होना पड़ा।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	प्रेरणा का शाश्वत स्रोत</h3>
<p>
	आज समय की माँग है कि श्रीमंत संभाजी महाराज को केवल इतिहास की पुस्तकों तक सीमित न रखकर, उन्हें भारतीय स्वाभिमान के जीवंत प्रतीक के रूप में आत्मसात किया जाए। उनका जीवन हमें सिखाता है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी प्रतिकूल क्यों न हों, यदि मनुष्य के भीतर राष्ट्रप्रेम और आत्मबल हो, तो वह बड़े से बड़े साम्राज्य के विरुद्ध खड़ा हो सकता है। संभाजी महाराज केवल मराठा इतिहास के नायक नहीं, बल्कि उस अपराजेय भारतीय चेतना के प्रतिनिधि हैं जो अन्याय के सामने कभी घुटने नहीं टेकती। उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव यह मार्ग प्रशस्त करेगा कि स्वाभिमान की रक्षा ही सबसे बड़ा राष्ट्रधर्म है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 13 May 2026 13:28:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 13 May 2026 13:56:05 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[inspiring personality]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[बंगाल जीत के बाद भाजपा की अगली राजनीति]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/my-blog/bjp-future-political-strategy-after-west-bengal-win-expansion-plan-126051200047_1.html</link>
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      <description><![CDATA[BJP West Bengal Victory: भाजपा के खाते में पश्चिम बंगाल की जीत आने के बाद देश की राजनीति का माहौल तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है। यह सिर्फ एक राज्य का चुनाव परिणाम नहीं है। इसके राजनीतिक संदेश दूर तक जाएंगे। अब साफ दिखने लगा है कि भाजपा केवल अपनी ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="" class="imgCont" height="592" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2024-04/18/full/1713443398-7192.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="BJP_TMC" width="740" /></p>
	<br />
	BJP West Bengal Victory: भाजपा के खाते में पश्चिम बंगाल की जीत आने के बाद देश की राजनीति का माहौल तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है। यह सिर्फ एक राज्य का चुनाव परिणाम नहीं है। इसके राजनीतिक संदेश दूर तक जाएंगे। अब साफ दिखने लगा है कि भाजपा केवल अपनी पुरानी जमीन बचाने की राजनीति नहीं कर रही, बल्कि लगातार नया भूगोल जोड़ने में लगी है। दूसरी तरफ विपक्ष अभी भी अपनी बची हुई जमीन बचाने की लड़ाई लड़ रहा है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	पश्चिम बंगाल लंबे समय तक ऐसा राज्य रहा जहां भाजपा को बाहरी पार्टी माना जाता था। पहले वामपंथ और बाद में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने वहां राजनीति को अपने तरीके से चलाया। भाजपा कई चुनाव लड़ती रही, लेकिन सत्ता तक पहुंच नहीं पाई। इसलिए बंगाल की इस जीत को भाजपा साधारण घटना की तरह नहीं देख रही। पार्टी इसे अपनी वैचारिक और राजनीतिक दोनों तरह की बड़ी उपलब्धि बताकर पेश कर रही है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अब देश के लगभग बाइस राज्यों में भाजपा या एनडीए की सरकारें हैं। कई राज्यों में क्षेत्रीय दल जरूर अपने-अपने प्रभाव के सहारे टिके हुए हैं, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा की बढ़ती ताकत साफ दिखाई दे रही है। यही वजह है कि आने वाले विधानसभा चुनावों को अब सिर्फ राज्य स्तर की लड़ाई नहीं माना जा रहा।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	आने वाले वर्षों में जिन राज्यों में चुनाव होने हैं, उनमें उत्तर प्रदेश सबसे अहम होगा। दिल्ली की सत्ता का रास्ता आज भी लखनऊ से होकर गुजरता है। विपक्ष चाहे जितनी बैठकें कर ले, लेकिन फिलहाल ऐसा माहौल नहीं दिखता कि भाजपा को सीधी चुनौती मिल रही हो। बिहार और बंगाल के चुनावों के बाद विपक्षी गठबंधन को लेकर जो उत्साह दिखा था, वह अब ठंडा पड़ चुका है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	भाजपा की ताकत सिर्फ उसका प्रचार नहीं है। उसकी असली ताकत यह है कि पार्टी और उससे जुड़े संगठन लगातार मैदान में सक्रिय रहते हैं। चुनाव खत्म होने के बाद भी भाजपा अगले चुनाव की तैयारी में लग जाती है। बूथ स्तर तक सक्रिय कार्यकर्ता, योजनाओं का सीधा लाभ लेने वाला वर्ग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता भाजपा को बढ़त दिलाती है। यही वजह है कि कई जगह सरकार के खिलाफ नाराजगी होने के बाद भी भाजपा मुकाबले में कमजोर नहीं पड़ती।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	बंगाल की जीत भाजपा को सिर्फ एक और राज्य नहीं देगी, बल्कि पार्टी के भीतर यह विश्वास भी मजबूत करेगी कि अब वह देश के किसी भी हिस्से में सत्ता तक पहुँच सकती है। यही कारण है कि आने वाले समय में भाजपा और ज्यादा आक्रामक राजनीतिक विस्तार की रणनीति पर चल सकती है। दक्षिण भारत से लेकर पंजाब तक, पार्टी उन राज्यों पर ध्यान बढ़ाएगी जहाँ अभी उसकी पकड़ पूरी तरह मजबूत नहीं है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	इसके साथ-साथ पंजाब की राजनीति पर भी नजर रहेगी। पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने वहाँ नई चर्चाएं शुरू कर दी हैं। राज्यसभा सांसदों के भाजपा के करीब जाने की खबरों के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या आने वाले समय में पंजाब सरकार पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि केवल राज्यसभा सांसदों के जाने से सरकार नहीं गिरती, क्योंकि सरकार विधानसभा के बहुमत से चलती है। लेकिन राजनीति में संकेत हमेशा सीधे नहीं होते। कई बार छोटे घटनाक्रम आगे चलकर बड़े बदलाव की भूमिका बन जाते हैं। भाजपा यदि पंजाब में अपना संगठन बढ़ाने और विपक्षी दलों में सेंध लगाने की रणनीति पर चलती है, तो आने वाले समय में वहां की राजनीति और दिलचस्प हो सकती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	हालांकि राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं होता। जनता कब किसे ऊपर उठाए और किसे नीचे ले आए, इसका अंदाजा बड़े-बड़े दल नहीं लगा पाते। लंबे समय तक सत्ता में रहने वाली हर पार्टी को एक समय बाद नाराजगी, थकान और स्थानीय असंतोष का सामना करना पड़ता है। भाजपा के सामने भी आगे यही चुनौती होगी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	लेकिन फिलहाल तस्वीर साफ है। भाजपा आक्रामक विस्तार की राजनीति कर रही है और विपक्ष अभी भी अपने बिखरे हुए कुनबे को संभालने में लगा है। अब सवाल यह नहीं रह गया कि भाजपा कितने राज्य और जीतेगी। बड़ा सवाल यह है कि उसे रोकने की ताकत कौन जुटाएगा। (यह लेखक के अपने वि‍चार हैं, वेबदुनिया का इनसे सहमत होना जरूरी नहीं है)</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 12 May 2026 17:35:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 12 May 2026 17:39:53 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[My Blog]]></category>
      <authorname>श्याम यादव</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[kids entertaining story: कहानी: जादुई मटका और स्मार्ट कौआ (The 2026 Twist)]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/kids-stories/story-the-magic-pot-and-the-thirsty-crow-126051200041_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/kids-stories/story-the-magic-pot-and-the-thirsty-crow-126051200041_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/12/thumb/1_1/1778585424-8125.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/12/thumb/1_1/1778585424-8125.jpg</image>
      <description><![CDATA[modern twist in the kids story: यहां प्रस्तुत हैं 'जादुई मटका और प्यासा कौआ' की कहानी का एक एकदम नया और 'स्मार्ट' वर्जन है, जो आज के बच्चों को खूब पसंद आएगा। किसी समय की बात है, भीषण गर्मी पड़ रही थी। सूरज आसमान से आग उगल रहा था। आगे पढ़ें पूरी कहानी]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="फोटो में जादुई मटका और प्यासा कौआ की कहानी का एकदम नया और 'स्मार्ट' वर्जन, इमेज कैप्शन के साथ" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/12/full/1778585424-8125.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>entertaining story for children: </strong>किसी समय की बात है, भीषण गर्मी पड़ रही थी। सूरज आसमान से आग उगल रहा था। चार्ली नाम का एक बहुत ही बुद्धिमान कौआ पानी की तलाश में शहर की ओर उड़ रहा था। चार्ली कोई मामूली कौआ नहीं था, वह &#39;यूट्यूब&#39; देखने वाले बच्चों को गौर से देखता था और इंसानों की तकनीक को समझने की कोशिश करता था।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	जब शहर में पड़ा सूखा</h3>
<p>
	उड़ते-उड़ते चार्ली का गला सूख गया। वह एक मॉडर्न सोसाइटी की बालकनी में उतरा। वहां एक मटका तो रखा था, लेकिन उसमें पानी बहुत नीचे था। चार्ली ने अपनी चोंच डाली, पर पानी तक पहुंच नहीं पाया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	चार्ली ने चारों तरफ देखा। पुरानी कहानी के अनुसार उसे कंकड़ ढूंढने थे, लेकिन वहां हर तरफ टाइल्स और साफ़-सफाई थी। कंकड़ का नामो-निशान नहीं था। तभी उसे कोने में कुछ &#39;कलरफुल&#39; चीज़ें दिखीं- वे प्लास्टिक के छोटे खिलौने और कुछ बेकार पड़े ब्लॉक (Legos) थे।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	चार्ली का &#39;स्मार्ट&#39; आइडिया</h3>
<p>
	चार्ली ने सोचा, "अगर मैं ये प्लास्टिक के खिलौने मटके में डालूं, तो पानी ऊपर तो आएगा, लेकिन प्लास्टिक से पानी गंदा हो जाएगा और मुझे बीमार कर सकता है!"</p>
<p>
	 </p>
<p>
	तभी उसकी नज़र पास ही टेबल पर रखे एक &#39;रीयूजेबल स्ट्रॉ&#39; (Reusable Straw) पर पड़ी, जिसे घर का बच्चा जूस पीकर छोड़ गया था। चार्ली के दिमाग की बत्ती जली!</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	नया प्रयोग</h3>
<p>
	चार्ली ने अपनी चोंच से उस स्ट्रॉ को उठाया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	उसने स्ट्रॉ का एक सिरा मटके के गहरे पानी में डाला।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	लेकिन एक समस्या थी- स्ट्रॉ से पानी ऊपर खींचने के लिए उसे &#39;सक्शन&#39; (Vacuum) की जरूरत थी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	चार्ली ने देखा कि पास ही एक वैक्यूम क्लीनर का छोटा सा हिस्सा (हैंडी क्लीनर) रखा था जो धूप से चार्ज हो रहा था।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	चार्ली ने अपनी चोंच से उस स्ट्रॉ को एक खाली बोतल से जोड़ा और चालाकी से वैक्यूम पंप का बटन दबा दिया। देखते ही देखते, साइंस के जादू (Air Pressure) से मटके का ठंडा पानी बोतल में आ गया!</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	जादुई अहसास</h3>
<p>
	चार्ली ने भरपेट ठंडा पानी पिया। उसे ऐसा लगा जैसे वह मटका नहीं, बल्कि कोई &#39;मैजिक डिस्पेंसर&#39; था। उसने न केवल अपनी प्यास बुझाई, बल्कि पास ही प्यास से तड़प रही एक छोटी गौरैया को भी पानी पिलाया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	चार्ली समझ गया था कि जमाना बदल गया है; अब सिर्फ मेहनत (कंकड़ डालना) से काम नहीं चलता, बल्कि &#39;स्मार्ट वर्क&#39; और &#39;साइंस&#39; की भी जरूरत होती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है?</h3>
<p>
	<strong>बदलाव को अपनाएं: </strong>समय के साथ समस्याएं बदलती हैं, तो समाधान भी नए होने चाहिए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>प्रदूषण के प्रति जागरूकता: </strong>चार्ली ने प्लास्टिक के कंकड़ नहीं डाले क्योंकि उसे अपनी सेहत और पर्यावरण की फिक्र थी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>स्मार्ट वर्क:</strong> कठिन परिश्रम जरूरी है, लेकिन सही दिशा में लगाया गया दिमाग काम को आसान बना देता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>बच्चों के लिए एक्टिविटी: </strong>अगली बार जब आप बाहर पक्षियों को देखें, तो उनके लिए एक मिट्टी के बर्तन में पानी रखें, ताकि किसी &#39;चार्ली&#39; को स्ट्रॉ की तलाश न करनी पड़े!<br />
	<br />
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।</p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 12 May 2026 17:06:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 12 May 2026 17:05:34 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[kids stories]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[International Nurses Day 2026: अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस कब और क्यों मनाया जाता है? जानें 2026 की थीम]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/important-days-and-dates/when-and-why-is-international-nurses-day-celebrated-126051100039_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/important-days-and-dates/when-and-why-is-international-nurses-day-celebrated-126051100039_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/11/thumb/1_1/1778494355-8483.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/11/thumb/1_1/1778494355-8483.jpg</image>
      <description><![CDATA[International Nurses Day: अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस हर साल 12 मई को पूरी दुनिया में मनाया जाता है। यह दिन स्वास्थ्य सेवा में नर्सों के अतुलनीय योगदान को सम्मान देने का एक जरिया है। इस दिन नर्सों को सम्मानित किया जाता है। इसे मनाए जाने के मुख्य कारण ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="इंटरनेशनल नर्सिंग डे पर मानवता के प्रति सजग और मरीजों की देखभाल करती नर्सों का चित्र" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/11/full/1778494355-8483.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
	<br />
	<strong>antarraashtreey nars divas 2026:</strong> 12 मई को हर साल दुनिया भर में अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस मनाया जाता है। यह दिन न केवल नर्सों के अद्भुत योगदान को मान्यता देने के लिए है, बल्कि यह आधुनिक नर्सिंग के संगठित और पेशेवर स्वरूप की शुरुआत करने वाली महान महिला फ्लोरेंस नाइटिंगेल/ Florence Nightingale की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है। अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस हमें यह याद दिलाता है कि नर्सिंग केवल पेशा नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और मानवता का प्रतीक है। इस दिन नर्सों को सम्मान देना और उनके योगदान को स्वीकार करना बेहद जरूरी है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/take-care-of-your-health-during-nautapa-learn-10-precautions-126050500033_1.html" target="_blank">Nautapa and health: नौतपा में ऐसे रखें सेहत का ध्यान, जानें 10 सावधानियां</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	1. फ्लोरेंस नाइटिंगेल का जन्मदिन</p>
<p>
	2. नर्सों के प्रति कृतज्ञता</p>
<p>
	3. जागरूकता और सम्मान</p>
<p>
	4. एक खास परंपरा: &#39;फ्लोरेंस नाइटिंगेल मेडल&#39;</p>
<p>
	5. उत्सव के तरीके</p>
<p>
	6. अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस थीम 2026</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. फ्लोरेंस नाइटिंगेल का जन्मदिन</h3>
<p>
	यह दिन आधुनिक नर्सिंग की जननी फ्लोरेंस नाइटिंगेल (Florence Nightingale) की याद में चुना गया है। उनका जन्म 12 मई, 1820 को हुआ था। उन्होंने नर्सिंग को एक पेशा ही नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक आधार और सम्मानजनक दर्जा दिलाने में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. नर्सों के प्रति कृतज्ञता</h3>
<p>
	अस्पतालों में डॉक्टर इलाज की योजना बनाते हैं, लेकिन उस योजना को 24 घंटे लागू करना और मरीज की हर छोटी-बड़ी जरूरत का ख्याल रखना नर्सों का काम होता है। उनकी कड़ी मेहनत, धैर्य और सेवा भाव को सराहने के लिए यह दिन मनाया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. जागरूकता और सम्मान</h3>
<p>
	वैश्विक मान्यता: इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ नर्स (ICN) 1965 से इस दिन को मना रहा है। हर साल इस दिन के लिए एक विशेष &#39;थीम&#39; रखी जाती है, जो नर्सों के सामने आने वाली चुनौतियों और स्वास्थ्य प्रणाली में सुधारों पर केंद्रित होती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. एक खास परंपरा: &#39;फ्लोरेंस नाइटिंगेल मेडल&#39;</h3>
<p>
	अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस का उद्देश्य नर्सों की मेहनत, समर्पण और मरीजों के प्रति उनकी निष्ठा को समाज के सामने लाना है। नर्सिंग केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा और जीवन बचाने की मिशाल है। इस दिन अस्पतालों और नर्सिंग संस्थानों में कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, इस अवसर पर दुनिया भर में उत्कृष्ट सेवा देने वाली नर्सों को सम्मानित किया जाता है और नए नर्सिंग पेशेवरों को प्रेरित किया जाता है।। भारत में भी राष्ट्रपति द्वारा &#39;नेशनल फ्लोरेंस नाइटिंगेल पुरस्कार&#39; प्रदान किए जाते हैं, जो नर्सिंग के क्षेत्र में दिया जाने वाला सबसे बड़ा सम्मान है।</p>
<h3>
	 </h3>
<h3>
	5. उत्सव के तरीके</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	* अस्पतालों और नर्सिंग संस्थानों में कार्यक्रम आयोजित करना।</p>
<p>
	* नर्सों को सम्मानित करना।</p>
<p>
	* स्वास्थ्य शिक्षा और जागरूकता अभियान चलाना।</p>
<p>
	* बच्चों और युवाओं को नर्सिंग पेशे के महत्व से अवगत कराना।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	6. अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस थीम 2026</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	इस बार 12 मई 2026 को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस (International Nurses Day) की थीम &#39;हमारी नर्सें। हमारा भविष्य। सशक्त नर्सें जीवन बचाती हैं।&#39; (Our Nurses. Our Future. Empowered Nurses Save Lives) तय की गई है। जिसका अर्थ स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने हेतु नर्सों को सम्मान और अधिकार तथा बेहतर उपकरण देने पर जोर देती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	&#39;नर्सें स्वास्थ्य सेवा की रीढ़ होती हैं। यदि डॉक्टर किसी बीमारी का इलाज करते हैं, तो नर्सें उस व्यक्ति का इलाज करती हैं जो उस बीमारी से जूझ रहा है।&#39;</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/birth-anniversary-of-personalities/florence-nightingales-jyanati-2026-126051100008_1.html" target="_blank">Florence Nightingales: 12 मई जयंती विशेष: फ्लोरेंस नाइटिंगेल की कहानी क्या है?</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 12 May 2026 09:30:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 12 May 2026 09:40:10 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Important Days and Dates]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Florence Nightingales: 12 मई जयंती विशेष: फ्लोरेंस नाइटिंगेल की कहानी क्या है?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/birth-anniversary-of-personalities/florence-nightingales-jyanati-2026-126051100008_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/birth-anniversary-of-personalities/florence-nightingales-jyanati-2026-126051100008_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/11/thumb/1_1/1778473274-0194.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/11/thumb/1_1/1778473274-0194.jpg</image>
      <description><![CDATA[Florence Nightingales Birthday: फ्लोरेंस नाइटिंगेल का नाम नर्सिंग और मानव सेवा के क्षेत्र में स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया है। उन्हें अक्सर 'लैडी विद द लैम्प' के नाम से भी जाना जाता है। उनका जन्म 12 मई 1820 को इटली के फ्लोरेंस शहर में हुआ था, इसलिए ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="चित्र में नर्सिंग तथा मानव सेवा के क्षेत्र में 'द लेडी विद द लैंप' के नाम से मशहूर फ्लोरेंस नाइटिंगेल" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/11/full/1778473274-0194.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Florence Nightingales Birth Anniversary: </strong>पूरी दुनिया 12 मई को &#39;अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस&#39; के रूप में मनाती है, क्योंकि इसी दिन आधुनिक नर्सिंग की संस्थापक फ्लोरेंस नाइटिंगेल का जन्म हुआ था। उनकी कहानी सिर्फ सेवा की नहीं, बल्कि सांख्यिकी (Statistics) और सुधार की भी एक अद्भुत मिसाल है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	1. &#39;लेडी विद द लैंप&#39; की शुरुआत</p>
<p>
	2. आंकड़ों की जादूगर</p>
<p>
	3. नर्सिंग का आधुनिक स्वरूप</p>
<p>
	4. भारत से जुड़ाव</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	यहां उनकी प्रेरणादायक जीवन यात्रा के मुख्य बिंदु दिए गए हैं:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. &#39;लेडी विद द लैंप&#39; की शुरुआत</h3>
<p>
	फ्लोरेंस एक धनी और शिक्षित परिवार में पैदा हुई थीं। बचपन से ही उन्हें लोगों की सेवा करने और बीमारों की मदद करने का गहरा लगाव था। उन्होंने परिवार की इच्छाओं के बावजूद नर्स बनने का निर्णय लिया, क्योंकि उनका मानना था कि सेवा और दया ही जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	1850 के दशक में जब क्रीमिया का युद्ध चल रहा था, तब फ्लोरेंस ने 38 नर्सों के एक दल के साथ तुर्की के सैन्य अस्पतालों की कमान संभाली। उस समय अस्पतालों की हालत बहुत खराब थी—गंदगी, संक्रमण और संसाधनों की भारी कमी थी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	मशहूर नाम: वह रात के अंधेरे में भी हाथ में लालटेन (Lamp) लेकर घायल सैनिकों की देखरेख करने निकलती थीं। सैनिकों ने उन्हें प्यार से &#39;द लेडी विद द लैंप&#39; कहना शुरू कर दिया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	बदलाव: उन्होंने साफ-सफाई और स्वच्छता (Sanitation) पर जोर दिया, जिससे अस्पताल में होने वाली मौतों की दर में भारी गिरावट आई।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. आंकड़ों की जादूगर</h3>
<p>
	फ्लोरेंस सिर्फ एक दयालु नर्स नहीं थीं, बल्कि एक तेज दिमाग गणितज्ञ भी थीं। उन्होंने यह साबित करने के लिए डेटा का इस्तेमाल किया कि सैनिक युद्ध के घावों से ज्यादा अस्पताल की गंदगी और संक्रमण से मर रहे हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	उन्होंने &#39;पोलर एरिया डायग्राम&#39;, जिसे &#39;नाइटिंगेल रोज़ डायग्राम&#39; भी कहा जाता है का आविष्कार किया ताकि वह जटिल आंकड़ों को ग्राफ के जरिए सेना और सरकार को समझा सकें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	वह &#39;रॉयल स्टैटिस्टिकल सोसाइटी&#39; की पहली महिला सदस्य बनीं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. नर्सिंग का आधुनिक स्वरूप</h3>
<p>
	युद्ध से लौटने के बाद उन्होंने नर्सिंग को एक सम्मानित और पेशेवर करियर बनाने का बीड़ा उठाया:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	नाइटिंगेल ट्रेनिंग स्कूल: 1860 में लंदन के सेंट थॉमस अस्पताल में उन्होंने दुनिया का पहला धर्मनिरपेक्ष नर्सिंग स्कूल खोला।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	लेखन: उनकी किताब &#39;नोट्स ऑन नर्सिंग&#39; आज भी इस क्षेत्र की आधारशिला मानी जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. भारत से जुड़ाव</h3>
<p>
	कम ही लोग जानते हैं कि फ्लोरेंस नाइटिंगेल की भारत के स्वास्थ्य सुधारों में भी बड़ी भूमिका थी। उन्होंने भारत में स्वच्छता की स्थिति पर एक व्यापक सांख्यिकीय विश्लेषण किया था और यहां के ग्रामीण इलाकों में बेहतर जल निकासी और सफाई व्यवस्था लागू करने के लिए ब्रिटिश सरकार को प्रभावित किया था।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	उनकी विरासत</h3>
<p>
	फ्लोरेंस नाइटिंगेल का मानना था कि &#39;नर्सिंग एक कला है, और यदि इसे कला बनाना है, तो इसके लिए उसी तरह की भक्ति और तैयारी की आवश्यकता होती है जैसे किसी चित्रकार या मूर्तिकार के काम में होती है।&#39;</p>
<p>
	 </p>
<p>
	आज भी, नर्सिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्र &#39;नाइटिंगेल प्लेज&#39; (Nightingale Pledge) लेते हैं, जो रोगियों की सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	सीख: फ्लोरेंस नाइटिंगेल की कहानी हमें यह सिखाती है कि सच्ची सेवा और निस्वार्थ समर्पण से दुनिया में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। उनका जीवन यह उदाहरण है कि एक व्यक्ति की लगन और कर्म समाज को बेहतर बना सकते हैं।</h3>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 11 May 2026 09:55:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 11 May 2026 10:26:46 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[birth anniversary of personalities]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Nautapa and health: नौतपा में ऐसे रखें सेहत का ध्यान, जानें 10 सावधानियां]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/health-care/take-care-of-your-health-during-nautapa-learn-10-precautions-126050500033_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/health-care/take-care-of-your-health-during-nautapa-learn-10-precautions-126050500033_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/05/thumb/1_1/1777977938-8706.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/05/thumb/1_1/1777977938-8706.jpg</image>
      <description><![CDATA[nautapa se bachaav tips: ज्येष्ठ मास के वे 9 दिन जब सूर्य पृथ्वी के सबसे करीब होता है वह नौतपा, जिसमें भीषण गर्मी और लू का प्रकोप अपने चरम पर होता है। इस दौरान शरीर का तापमान संतुलित रखना और डिहाइड्रेशन से बचना सबसे बड़ी चुनौती होती है। नौतपा के ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="तस्वीर में नौतपा के दिनों में स्वास्थ्य और सेहतमंद रहने संबंधी जागरूकता बढ़ाता फोटो" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/05/full/1777977938-8706.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Precautions for Heat Exhaustion: </strong>इस बार नौतपा (Nautapa) की शुरुआत 25 मई 2026 से हो रही है तथा नौतपा की समाप्ति 2 जून 2026 को होगी। नौतपा, जिसे अक्सर गर्मियों के मौसम में बढ़ते तापमान और उमस के कारण देखा जाता है, हमारे शरीर और सेहत पर कई तरह के असर डाल सकता है। यह एक सामान्य मौसम संबंधी स्थिति है, लेकिन अगर समय रहते सावधानियां नहीं बरती जाएं तो यह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। नौतपा का मुख्य कारण शरीर का अत्यधिक पसीना, निर्जलीकरण, और इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन होता है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों में यह अधिक खतरनाक साबित हो सकता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/home-remedies/safar-mein-garmi-se-bachne-ke-5-desi-upay-126042900008_1.html" target="_blank">सफर में गर्मी से बचना है? अपनाएं ये 5 आसान देसी उपाय, नहीं होगा हीट स्ट्रोक</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	इसलिए नौतपा के दौरान सही सावधानियां बरतना बेहद ज़रूरी है। इसमें खाने-पीने की आदतों, पानी की मात्रा, ठंडक बनाए रखने और शरीर को थकान से बचाने की टिप्स शामिल हैं। इस लेख में हम आपको नौतपा से जुड़े प्रमुख उपाय बताएंगे...</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	नौतपा के लिए 10 जरूरी सावधानियां</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>1. भरपूर पानी पिएं: </strong>प्यास न लगने पर भी थोड़े-थोड़े अंतराल में पानी पीते रहें। शरीर में नमी बनाए रखने के लिए यह सबसे प्राथमिक नियम है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>2. तरल पदार्थों का सेवन:</strong> डाइट में छाछ/ मट्ठा, नींबू पानी, नारियल पानी, बेल का शरबत और आम पन्ना शामिल करें। ये प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स का काम करते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>3. धूप से बचाव:</strong> दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचें। यदि निकलना जरूरी हो, तो सिर को कपड़े या टोपी से ढंककर रखें और छाते का प्रयोग करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>4. सूती कपड़े पहनें: </strong>गहरे रंग और सिंथेटिक कपड़ों के बजाय हल्के रंग के ढीले और सूती कपड़े पहनें। यह पसीना सोखने और शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>5. एसी से निकलकर तुरंत धूप में न जाएं: </strong>शरीर के तापमान में अचानक बदलाव (AC की ठंडक से सीधे लू में जाना) से &#39;तापीय आघात&#39; यानी Thermal Shock लग सकता है, जिससे बुखार या सर्दी-जुकाम हो सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>6. लू के लक्षणों को पहचानें: </strong>यदि चक्कर आना, अत्यधिक सिरदर्द, उल्टी या तेज बुखार महसूस हो, तो तुरंत ठंडी जगह पर आराम करें और डॉक्टर से संपर्क करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>7. खाली पेट बाहर न जाएं:</strong> तेज धूप में कभी भी खाली पेट न निकलें। घर से निकलने से पहले कुछ खाकर और पर्याप्त पानी पीकर ही बाहर जाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>8. आंखों और त्वचा का ध्यान: </strong>बाहर जाते समय सनग्लासेस पहनें और सनस्क्रीन का प्रयोग करें ताकि सनबर्न से बचाव हो सके।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>9. हल्का और ताजा भोजन: </strong>गर्मी में पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है। इसलिए गरिष्ठ, तला-भुना या बासी भोजन न करें। खीरा, ककड़ी, तरबूज और लौकी जैसी पानी से भरपूर सब्जियों का सेवन करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>10. कैफीन और शराब से दूरी: </strong>चाय, कॉफी और शराब का सेवन कम करें, क्योंकि ये शरीर को डीहाइड्रेट यानी पानी की कमी करते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>घरेलू नुस्खा: </strong>नौतपा के दौरान बाहर जाते समय अपनी जेब में एक छोटा कच्चा प्याज रखना पुरानी परंपरा है। माना जाता है कि प्याज शरीर की गर्मी को सोख लेता है और लू से बचाने में मदद करता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सावधानी: </strong>अगर आपको घर में बुजुर्ग या बच्चे हैं, तो उनका विशेष ध्यान रखें क्योंकि उन्हें लू लगने का खतरा सबसे अधिक होता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer): चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/home-remedies/loo-lagne-par-gharelu-upchar-126043000031_1.html" target="_blank">गर्मी में यदि लू लग जाए तो करें ये घरेलू उपचार</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 11 May 2026 09:21:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 19 May 2026 12:41:52 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[health care]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[विजय सिंह चौहान की 10 लघुकथाएं]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/hindi-stories/10-short-stories-by-vijay-singh-chauhan-126051400082_1.html</link>
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      <description><![CDATA[शहर का यह कोना यूँ ही नहीं पहचाना जाता था। सैकड़ों हरे–भरे वृक्ष और हजारों परिंदों का संयुक्त परिवार इसकी साँसों में बसता था। अलसुबह परिंदों का दाने–पानी की खोज में उड़ जाना और गोधूलि पर चहचहाते हुए लौट आना इतना उत्सवपूर्ण होता कि शहर का कोलाहल भी ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
	<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
		<img align="center" alt="" class="imgCont" height="675" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/14/full/1778770154-1612.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="" width="1200" /></p>
</p>
<h3>
	<br />
	1. मौन संवाद</h3>
<p>
	“…अजीब बात है,” साहब कुर्सी की पीठ से टिकते हुए बोले, “कुछ दिनों से दफ्तर के बाहर पक्षियों की फौज दिखाई नहीं देती। न चहचहाहट, न शोर। लगता है तुम लोग दाना–पानी रखना भूल जाते हो।” स्वर में चिंता कम, रौब अधिक था।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	शहर का यह कोना यूँ ही नहीं पहचाना जाता था। सैकड़ों हरे–भरे वृक्ष और हजारों परिंदों का संयुक्त परिवार इसकी साँसों में बसता था। अलसुबह परिंदों का दाने–पानी की खोज में उड़ जाना और गोधूलि पर चहचहाते हुए लौट आना इतना उत्सवपूर्ण होता कि शहर का कोलाहल भी बौना पड़ जाता।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	कड़क आवाज के उत्तर में एक मुस्कान धीरे से उगी और बोली… “साहब, आप तो जानते ही हैं, मुख्यालय का विस्तार प्रस्तावित है। पेड़ काटने का आदेश… आपके ही हस्ताक्षर से निकला था।”</p>
<p>
	 </p>
<p>
	क्षणभर के लिए शब्द ठिठक गए। कमरे में एक ऐसा मौन उतर आया जो किसी आदेश से भी भारी था। फिर मध्यम स्वर मुखर हुआ, “शायद यह बात परिंदों को समझ आ गई इसलिए वे चुप हैं। वे जान गए हैं कि जहाँ आदेश बोलते हैं, वहाँ परिंदे चहचहाना भूल हैं।”</p>
<h3>
	2. रविवार</h3>
<p>
	रात की चांदनी परदों से छनकर कमरे में बिखर रही थी। सुधाकर ने करवट बदलते हुए कहा, “माधुरी, कल रविवार है, ज़रा देर से जगाना और दाल-बाटी के साथ लहसुन की चटनी भी बना देना।” वह मुस्कराई ही थी कि बच्चे उछलते हुए आ गए, “मम्मी, कल हमारे लिए पिज़्ज़ा बनाना, खूब सारा चीज़ डालकर!” खाने की बात चल ही रही थी कि अंदर वाले कमरे से दादी की आवाज़ भी आ गई, “बहू, कल मक्के की रोटी और सरसों का साग बना देना, रविवार है न।”</p>
<p>
	 </p>
<p>
	माधुरी कुछ पल चुप रही। तीनों पीढ़ियों की तीन इच्छाएँ उसके मन में जैसे सूची बनकर उभर आईं। उसने धीमे से कहा, “ठीक है, सबका रविवार पूरा होगा।” रात गहराने लगी, छत निहारते हुए माधुरी बुदबुदाई, “काश… कभी मेरा भी रविवार आता।”<br />
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="" class="imgCont" height="488" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2019-05/15/full/1557920308-9723.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="Bride" width="740" /></p>
</p>
<h3>
	3. पीले हाथ</h3>
<p>
	हाथ पीले कर शिवांगी विदा हो रही थी। दहलीज़ लाँघते-लाँघते वह अचानक मुड़ी और सुधाकर के गले लग गई। भीगी पलकों की कोर पोंछते हुए बोली- “पापा, आप बेशक सब कुछ छोटे को दे दीजिए… बस मेरा कमरा, मेरा रहने देना। मैं नहीं चाहती कि हर बार मायके आकर बुआ की तरह पूछूँ— भैया, मैं कहाँ सोऊँ? यह सूटकेस कहाँ रखूँ?”</p>
<p>
	 </p>
<p>
	बिलखते सुधाकर ने उसे दोनों हाथों से थाम लिया, जैसे बिखरती आशंका को समेट रहा हो। सुधाकर की आवाज़ में विश्वास था, हाथों में आसमान सी छत। “नहीं बेटी, ऐसा कभी मत सोचना। यह घर तेरा था और तेरा ही रहेगा।” सुकून से बिदा होते समय दोनों की आँखों से मीठे पानी का दरिया चुपचाप बह निकला।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. आस का पंछी</h3>
<p>
	दो साल बाद आया था… विनय। कुल जमा दस दिन के लिए। दो दिन ससुराल में बीत गए। दो दिन—मामी के अवसान पर ननिहाल में। दो दिन वीज़ा, पासपोर्ट और बैंक की लंबी कतारों में फिसल गए। जो दिन बचे, वे भी ज़िद्दी सर्दी–जुकाम की गिरफ्त में धीरे-धीरे घुलते रहे।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	कल सांध्य बेला में, पंछी घोंसलों की ओर लौट रहे थे तभी विनय ने परदेस के लिए उड़ान भरी। माँ की आँखों से फूटते मौन प्रवाह पर अपनी हथेली रखकर उसने कहा… “माँ, अब अगले दो साल बाद ही आ सकूँगा…</p>
<p>
	 </p>
<p>
	बेटे की पढ़ाई है, उसमें व्यवधान ठीक नहीं। फिक्र न करना, वीडियो कॉल पर तो रोज़ ही मिलते हैं।” विनय मन समझाकर चला गया और बूढ़े माँ-बाप? अपनी थरथराती देह, धड़कते मन और धीमे पड़ चुके सपनों को समेटते हुए</p>
<p>
	फिर लौट आए उस घर में, जहाँ अब सिर्फ़ तन्हाई पसरी है, और दरवाज़े पर टंगा है इंतज़ार का अनंत-सा पल।</p>
<h3>
	<br />
	5. असली मुस्कान</h3>
<p>
	सारा दिन मोबाइल पर अंगूठा रगड़ते-रगड़ते सिरदर्द और आँखों का धुंधलापन बढ़ता जा रहा था। पढ़ाई हो या मन का कोई प्रश्न, सुनयना हर जवाब अपनी आभासी यूनिवर्सिटी, मोबाइल, से खोज लेती थी। दादी जी सुनयना का यह व्यवहार चुपचाप पढ़ती-समझती रहतीं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	एक दिन दादी जी ने कुछ करने का निश्चय किया। उन्होंने आसपास के बच्चों को बुलाया और आँगन में बैठाकर सितोलिया, छुपा-छाई, भंवरा, मांडना और रंगोली की पुरानी कहानियाँ सुनानी शुरू कर दीं। बच्चों की खिलखिलाहट से पूरा आँगन चहक उठा।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	शोर सुनकर सुनयना भी बाहर आई, पहले झिझकते हुए, फिर आकर्षित होकर। पहली बार सुनयना ने रील लाइफ़ से नज़रें हटाकर रियल लाइफ़ को स्पर्श किया, खेलों की मिट्टी को छुआ, और बच्चों संग अपनी हँसी बाँटी, तो उसके चेहरे पर वह असली मुस्कान खिली, जो न किसी फ़िल्टर से आती है, न किसी ‘लाइक’ या कमेंट से।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	चमकती आँखों को देखकर दादी जी ने कहा- “असली मुस्कान फ़िल्टरों में नहीं, रिश्तों की खिलखिलाहट में मिलती है, बिटिया।”</p>
<h3>
	6. तृप्ति</h3>
<p>
	मन भर आशीष लुटाने के बाद वृद्धा चौखट पर ठिठक गई और मध्यम स्वर में बोली- “बहू… भूख लगी है।” आगे के शब्द उसके काँपते होंठों में ही अटक गए। बड़ी बहू ने सुधा को कहा, “बेटा, दो रोटियाँ और थोड़ी सूखी सब्ज़ी दे आ।”</p>
<p>
	 </p>
<p>
	वृद्धा ने कंपकंपाते हाथों से रोटियां लीं और अंतिम कौर तक आनंद से भोजन ग्रहण किया। पर्दे की ओट से झाँकती सुधा को अचानक अपनी ही थाली याद आई… वही थाली, जिसमें वह रोज़ रोटी-सब्ज़ी यूँ ही छोड़ देती थी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	भूख से तृप्ति की इस सरल यात्रा ने सुधा के अंतर्मन को गहराई तक झकझोर दिया।</p>
<h3>
	7. सौंधी चमक</h3>
<p>
	हाट-बाज़ार में देसी सादगी और विदेशी चमक आमने–सामने सजी थीं। रंग-बिरंगी कारीगरी से सुसज्जित चीनी मिट्टी का प्याला अपनी चिकनाई पर इठला रहा था, वहीं देसी मिट्टी के बर्तन अपनी सुवास में सौंधापन घोल रहे थे।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	माधुरी का हाथ बस बढ़ने ही वाला था कि पास बैठा कुम्हार संकोच से अपने बर्तन आगे सरका गया— “बहिनजी… ये अपने गाँव की मिट्टी से बने हैं। खरीद लोगी तो मेरे घर का चूल्हा भी जल जाएगा।”</p>
<p>
	 </p>
<p>
	उसकी हथेलियों की दरारों में सूखी मिट्टी अटकी थी, और आँखों में अपनेपन की नमी तैर रही थी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	माधुरी के कदम ठिठक गए। अगले ही पल उसने मिट्टी की उस सौंधी खुशबू को आत्मसात किया और कुम्हार के चेहरे पर उग आई मुस्कान का मूल्य चुका दिया।</p>
<h3>
	8. कच्ची लकड़ी</h3>
<p>
	अलाव के पास सब गोल घेरा बनाकर सुलगती आग से गर्माहट समेट रहे थे। बच्चों की निगाहें लहसुन, बटला और हरे चनों पर जमी थीं, जो अंगारों पर धीरे–धीरे पक रहे थे, तभी मेघा ने एक गीली लकड़ी आग में डाल दी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	कच्ची–पक्की लकड़ियों की जुगलबंदी से धुआँ चारों ओर फैल गया। आँखों में जलन तैरने लगी। दादाजी ने अपनी छड़ी से गीली लकड़ी अलग करते हुए बोले- “बिटिया, गीली लकड़ी जलती नहीं… बस धुआँ करती है। जाओ, पकी लकड़ी ले आओ।”</p>
<p>
	 </p>
<p>
	मुनिया के कदम बढ़े ही थे कि जिज्ञासा ने कदम रोक लिए। “दादाजी… एक बात पूछूँ?”</p>
<p>
	दादाजी मुस्कुराए “एक नहीं, दो पूछ।”</p>
<p>
	 </p>
<p>
	मेघा ने हिचकते हुए कहा- “दादाजी… मैं भी तो अभी गीली लकड़ी जैसी ही हूँ। न पढ़ाई पूरी हुई, न समझ पकी है… फिर आप सब मेरी शादी की इतनी जल्दी क्यों कर रहे हो, अभी तो मुझे पढ़ना है… अपने पैरों पर खड़ा होना है।”</p>
<p>
	 </p>
<p>
	बिटिया के शब्दों की तपिश दादाजी तक पहुँची। कुछ पल वे अलाव को देखते रहे, फिर सिर पर हाथ फेरते हुए बिटिया को गले लगा लिया।<br />
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="" class="imgCont" height="675" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2025-07/24/full/1753375439-3412.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="Court" width="1200" /></p>
</p>
<h3>
	9. विरासत</h3>
<p>
	“ऑर्डर! ऑर्डर! गूंजते ही कचहरी में फैला शोर अचानक शांत हो गया। दोनों पक्ष सगे भाई-बहन, नज़रें झुकाए खड़े थे।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	धीमी आवाज़ ने दिल पर दस्तक दी, “बड़ी बहन… माँ समान और बड़ा बेटा, परिवार का संरक्षक होता है। माता-पिता ने तिल-तिल करके जोड़ी विरासत का यही सम्मान किया है तुम दोनों ने जो आज अदालत में आ खड़े हो?”</p>
<p>
	 </p>
<p>
	तल्ख आवाज से बहन की पलकों पर नमी तैर गई वहीं भाई की उंगलियाँ फाइल पर थरथराने लगीं। आवाज फिर मुखर हुई,संपत्ति का विवाद, वाद से नहीं… संवाद से सुलझाइए। अपने-अपने बच्चों को प्यार की सौगात दीजिए, मनमुटाव की नहीं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	दोनों कुछ क्षण मौन रहे तभी बड़ी बहन ने भाई के सिर पर हाथ फेरा, और भाई फफक कर रो पड़ा।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	10. सिंदूरी सांझ</h3>
<p>
	गोधूलि बेला में धूल उड़ाती पगडंडी से घिरी गायें ग्वालों के संग लौट रही थीं। सिंदूरी सांझ के साथ घर वापसी को बेताब मन प्रफुल्लित था।  नीम के झाड़ की छाँह में कक्काजी रोज़ की तरह कभी ढीली चारपाई की रस्सियाँ कसते, तो कभी उस पर चादर झाड़कर बिछा देते।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	उड़ती धूल पर पानी के छींटे मारते हुए एक दिन पड़ोसी हरिया पूछ ही बैठा… “कक्काजी, रोज़ चारपाई की कसाई-बिछाई और सफाई किसके लिए? कोई आने वाला है क्या?”  कक्काजी हल्के से मुस्कुराए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	तपती दुपहर की थकान उतारते हुए बोले… “पहले यहीं बैठकर मेरा बेटा घंटों बतियाता था। नौकरी के लिए शहर क्या गया, वहीं का होकर रह गया।”  यह कहते-कहते उनका गला भर्रा गया… “जाने वाला तो आता नहीं… पर उसकी यादें रोज़ आकर यहीं बैठ जाती हैं।”  देखते ही देखते सिंदूरी सांझ, घुप्प अँधेरे में घुलने लगी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>लेखक परिचय : </strong>विजय सिंह चौहान मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में अधिवक्ता है। उनकी शब्दघोष, सरस्वती सुमन, साक्षात्कार, लघुकथा कलश, वीणा, विश्वगाथा, संगिनी, स्मेश, चिकीर्षा, आदिज्ञान, समकालीन त्रिवेणी, अविलोम, राजपूत वाणी, प्रभाष बंधु (यू.एस.ए. से प्रकाशित बांग्ला पत्रिका) समेत अन्य पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। चौहान ने इसके अलावा विधि पुस्तकों में विधि रिपोर्ट्स, आलेख एवं संपादन भी किया है।<br />
	<br />
	इन्हें विभिन्न मंचों सम्मानित किया गया है। इनमें डॉ. एस.एन. तिवारी स्मृति पुरस्कार, इंदौर लघुकथा श्री (लघुकथा शोध केंद्र, भोपाल) कृति "संवेदनाओं का आचमन", स्व. सतीश राज पुष्करणा स्मृति सम्मान (संस्था क्षितिज, 2022), साहित्य साधक सम्मान (संस्कृति एवं साहित्य शोध समिति, बालाघाट, 2023), कृति सम्मान (कथा दर्पण साहित्य मंच, इंदौर, 2023), जयपुर साहित्य सम्मान, 2024, क्षितिज लघुकथा रत्न सम्मान -2025, क्षितिज कृति सम्मान, लघुकथा संग्रह पत्थर पर बुवाई प्रमुख हैं। आकाशवाणी से वार्ता एवं लघुकथा का नियमित प्रसारण, लघुकथाओं का मालवी, निमाड़ी, उड़िया, बांग्ला में अनुवाद व प्रकाशन। </p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Sun, 10 May 2026 20:11:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Thu, 14 May 2026 20:26:03 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[hindi stories]]></category>
      <authorname>विजय सिंह चौहान</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[मदर्स डे पर मां को दें ये खास तोहफा, चेहरे पर आ जाएगी प्यारी सी मुस्कान; देखें लिस्ट]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/mothers-day-special/mothers-day-special-gift-ideas-for-mother-to-bring-smile-on-her-face-list-in-hindi-126050900047_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/mothers-day-special/mothers-day-special-gift-ideas-for-mother-to-bring-smile-on-her-face-list-in-hindi-126050900047_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/09/thumb/1_1/1778325303-9792.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/09/thumb/1_1/1778325303-9792.jpg</image>
      <description><![CDATA[10 मई 2026 रविवार के दिन मातृ दिवस है। मदर्स डे पर मां को कोई महंगा उपहार देने से कहीं ज्यादा जरूरी है उन्हें यह महसूस कराना कि वे आपके जीवन में कितनी खास हैं। यहाँ कुछ चुनिंदा और दिल छू लेने वाले उपहारों की लिस्ट दी गई है, जिन्हें आप अपनी मां की ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Mothers Day 2026 Gifts The image depicts a daughter affectionately doting on her mother while holding a bouquet of flowers; at the bottom are jewelry, a handbag, a photo frame, a handmade card, and a cake." class="imgCont" height="800" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/09/full/1778325303-9792.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="Mother's Day 2026 Gifts" width="1200" /></p>
	</p>
	10 मई 2026 रविवार के दिन मातृ दिवस है। मदर्स डे पर मां को कोई महंगा उपहार देने से कहीं ज्यादा जरूरी है उन्हें यह महसूस कराना कि वे आपके जीवन में कितनी खास हैं। यहाँ कुछ चुनिंदा और दिल छू लेने वाले उपहारों की लिस्ट दी गई है, जिन्हें आप अपनी मां की पसंद के अनुसार चुन सकते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. भावनात्मक उपहार (Emotional Gifts)</h3>
<p>
	<strong>हस्तलिखित पत्र (Handwritten Letter): </strong>डिजिटल युग में अपने हाथों से लिखा एक पत्र सबसे कीमती तोहफा है। इसमें उनके प्रति अपना आभार और बचपन की कोई प्यारी याद लिखें।</p>
<p>
	<strong>फोटो एलबम या कस्टमाइज्ड फ्रेम: </strong>आपकी और मां की बचपन से लेकर अब तक की चुनिंदा तस्वीरों का एक कोलाज या एलबम उन्हें पुरानी यादों में ले जाएगा।</p>
<p>
	<strong>वीडियो मैसेज: </strong>यदि आप उनसे दूर हैं, तो परिवार के सभी सदस्यों के छोटे-छोटे संदेशों को जोड़कर एक वीडियो बनाकर उन्हें भेजें।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/mothers-day-special/mothers-day-2026-7-interesting-facts-about-matru-diwas-and-mothers-day-126050900043_1.html" target="_blank">Mother Day 2026: मातृ दिवस से जुड़े 7 रोचक तथ्य जो शायद आप नहीं जानते</a></strong></p>
</p>
<h3>
	2. आराम और सुकून (Self-Care & Comfort)</h3>
<p>
	घर पर &#39;स्पा&#39; का अनुभव: मां अक्सर अपनी सेहत को नजरअंदाज करती हैं। आप उन्हें फुट मसाजर, अच्छी क्वालिटी के स्किनकेयर प्रोडक्ट्स या बॉडी स्पा का वाउचर दे सकते हैं।</p>
<p>
	<strong>किचन से छुट्टी: </strong>मदर्स डे पर खुद खाना बनाएं या उनके पसंदीदा रेस्टोरेंट से खाना ऑर्डर करें। उन्हें पूरे दिन के काम से आराम दें।</p>
<p>
	<strong>आरामदायक कपड़े: </strong>एक अच्छी सिल्क की साड़ी, आरामदायक सूट या एक सॉफ्ट शॉल भी बेहतरीन विकल्प हो सकता है।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/mothers-day-special/mothers-day-2026-why-celebrated-on-second-sunday-of-may-history-and-significance-126050900036_1.html" target="_blank">Mother’s Day 2026: मई के दूसरे रविवार को ही क्यों मनाया जाता है मदर्स डे? जानिए इतिहास</a></strong></p>
</p>
<h3>
	3. उनकी पसंद और शौक (Hobby-Based Gifts)</h3>
<p>
	<strong>किताबें:</strong> यदि उन्हें पढ़ने का शौक है, तो उनके पसंदीदा लेखक की कोई नई किताब या कोई आध्यात्मिक पुस्तक भेंट करें।</p>
<p>
	<strong>इनडोर प्लांट्स (पौधे): </strong>अगर उन्हें गार्डनिंग पसंद है, तो तुलसी, एलोवेरा या कोई सुंदर फूलों वाला पौधा दें। यह उपहार उनके पास हमेशा जीवंत रहेगा।</p>
<p>
	<strong>किचन गैजेट्स: </strong>यदि उन्हें कुकिंग का शौक है, तो कोई ऐसा गैजेट (जैसे एयर फ्रायर या कॉफी मेकर) दें जो उनके काम को आसान बना सके।</p>
<p>
	<p>
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</p>
<h3>
	4. व्यक्तिगत आभूषण (Personalized Jewelry)</h3>
<ul>
	<li>
		मां के नाम का पेंडेंट या उनके नाम के अक्षर वाली अंगूठी।</li>
	<li>
		ऐसी चूड़ियां या कंगन जिन्हें वे रोज पहन सकें और आपको याद कर सकें।</li>
</ul>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. सबसे खास तोहफा: &#39;आपका समय&#39;</h3>
<ul>
	<li>
		किसी भी वस्तु से बढ़कर मां के लिए आपका समय कीमती है।</li>
	<li>
		उनके साथ बैठकर पुरानी बातें करें।</li>
	<li>
		उनकी पसंदीदा फिल्म साथ देखें।</li>
	<li>
		उन्हें उनके पुराने दोस्तों से मिलवाने ले जाएं।</li>
</ul>
<p>
	<p>
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</p>
<p>
	<strong>एक छोटा सा टिप:</strong> उपहार चाहे छोटा हो या बड़ा, उसे एक सफेद या लाल कार्नेशन के फूल के साथ दें। जैसा कि अन्ना जार्विस ने शुरू किया था, यह फूल माँ के प्रति शुद्ध प्रेम का प्रतीक है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Sat, 09 May 2026 16:41:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 09 May 2026 16:46:22 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[mothers day]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Mother Day 2026: मातृ दिवस से जुड़े 7 रोचक तथ्य जो शायद आप नहीं जानते]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/mothers-day-special/mothers-day-2026-7-interesting-facts-about-matru-diwas-and-mothers-day-126050900043_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/mothers-day-special/mothers-day-2026-7-interesting-facts-about-matru-diwas-and-mothers-day-126050900043_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/09/thumb/1_1/1778321028-2727.jpg"/>
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      <description><![CDATA[प्राचीन ग्रीस में भी मदर्स डे जैसा उत्सव मनाया जाता था, जो देवताओं की माता 'रिया' (Rhea) को समर्पित था। 10 मई 2026 रविवार को मदर्स डे है। मदर्स डे के इस खास मौके पर, आइए जानते हैं इस दिन से जुड़े 5 बेहद रोचक और अनूठे तथ्य, जो शायद आप नहीं जानते ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="mothers day 2026 7 interesting facts about" class="imgCont" height="800" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/09/full/1778321028-2727.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="mothers day 2026 7 interesting facts about" width="1200" /></p>
	</p>
	प्राचीन ग्रीस में भी मदर्स डे जैसा उत्सव मनाया जाता था, जो देवताओं की माता &#39;रिया&#39; (Rhea) को समर्पित था। 10 मई 2026 रविवार को मदर्स डे है। मदर्स डे के इस खास मौके पर, आइए जानते हैं इस दिन से जुड़े 5 बेहद रोचक और अनूठे तथ्य, जो शायद आप नहीं जानते होंगे।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. अन्ना जार्विस: वह महिला जिन्होंने शुरुआत की</h3>
<p>
	मदर्स डे की शुरुआत का श्रेय अमेरिका की एन्ना जार्विस (Anna Jarvis) को जाता है। अन्ना अपनी मां, एन रीव्स जार्विस से बहुत प्यार करती थीं। उनकी मां एक शांति कार्यकर्ता थीं जो गृहयुद्ध (Civil War) के दौरान घायल सैनिकों की सेवा करती थीं। उनकी इच्छा थी कि दुनिया में एक दिन ऐसा हो जो माताओं के बलिदान और उनके काम को समर्पित हो। </p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/mothers-day-special/mothers-day-2026-why-celebrated-on-second-sunday-of-may-history-and-significance-126050900036_1.html" target="_blank">Mother’s Day 2026: मई के दूसरे रविवार को ही क्यों मनाया जाता है मदर्स डे? जानिए इतिहास</a></strong></p>
</p>
<h3>
	2. मई के दूसरे रविवार को मनाते हैं मदर्स डे </h3>
<p>
	आज भारत सहित दुनिया के 40 से ज्यादा देशों में मई के दूसरे रविवार को ही मदर्स डे मनाया जाता है, हालाँकि कुछ देशों में इसकी तारीखें अलग भी हैं (जैसे ब्रिटेन में मार्च में)। अन्ना जार्विस की मां का निधन 9 मई 1905 को हुआ था, जो उस वर्ष मई का दूसरा रविवार था। इसलिए मई के दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाते हैं। </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. टेलीफोन कॉल्स का सबसे बड़ा दिन</h3>
<p>
	दुनिया भर में मदर्स डे के दिन फोन कॉल्स की संख्या में भारी बढ़ोतरी होती है। आंकड़ों के अनुसार, साल के किसी भी अन्य दिन की तुलना में मदर्स डे पर सबसे ज्यादा लॉन्ग डिस्टेंस कॉल किए जाते हैं। अकेले अमेरिका में इस दिन लगभग 122 मिलियन कॉल्स अपनी मां को की जाती हैं।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/mothers-day-special/mothers-day-2026-matru-word-origin-history-and-meaning-in-different-languages-126050900020_1.html" target="_blank">मदर्स डे 2026: मातृ शब्द कैसे बना दुनिया की कई भाषाओं का हिस्सा, मां कहें या मम्मी?</a></strong></p>
</p>
<h3>
	4. &#39;म&#39; (M) अक्षर का वैश्विक संबंध</h3>
<p>
	दुनिया की लगभग हर भाषा में &#39;मां&#39; शब्द की शुरुआत &#39;म&#39; (M) अक्षर से ही होती है। चाहे वह हिंदी में माँ, अंग्रेजी में Mother, स्पेनिश में Madre, या जर्मन में Mutter हो। विशेषज्ञों का मानना है कि &#39;म&#39; की ध्वनि शिशुओं के लिए बोलना सबसे आसान होता है, इसलिए यह शब्द हर संस्कृति में समान रूप से उभरा।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. फूलों का महत्व और परंपरा</h3>
<p>
	मदर्स डे फूलों के व्यापार के लिए साल का सबसे बड़ा दिन माना जाता है। आंकड़ों के अनुसार, पूरे वर्ष में बिकने वाले कुल फूलों और पौधों का लगभग 25% हिस्सा अकेले इसी दिन खरीदा जाता है। इस अवसर पर &#39;कार्नेशन&#39; के फूलों की सबसे अधिक मांग रहती है। इसके पीछे एक विशेष परंपरा है।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/mothers-day-special/mothers-day-essay-2026-126050800054_1.html" target="_blank">Mothers Day Essay: निस्वार्थ प्रेम का उत्सव मदर्स डे, पढ़ें मातृ दिवस पर बेहतरीन हिन्दी निबंध</a></strong></p>
</p>
<p>
	<strong>सफेद कार्नेशन: </strong>अन्ना जार्विस ने इसे मां के शुद्ध प्रेम के प्रतीक के रूप में चुना था। आज यह स्वर्गवासी माताओं को याद करने के लिए उपयोग किया जाता है।</p>
<p>
	<strong>लाल कार्नेशन: </strong>यह जीवित माताओं के प्रति सम्मान और प्रेम प्रकट करने के लिए पहना या दिया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	6. अन्ना जार्विस और व्यवसायीकरण का विरोध</h3>
<p>
	मदर्स डे की संस्थापक अन्ना जार्विस इस दिन को एक पवित्र और व्यक्तिगत भावना के रूप में देखती थीं। हालांकि, जैसे-जैसे इस दिन की लोकप्रियता बढ़ी, कंपनियों ने इसे कार्ड, उपहार और फूलों के व्यापार का जरिया बना लिया। अन्ना इस व्यावसायीकरण (Commercialization) के सख्त खिलाफ थीं। उन्होंने विरोध प्रदर्शन भी किए क्योंकि वह नहीं चाहती थीं कि मां के प्रति प्यार दिखाने के लिए लोग महंगे उपहारों का सहारा लें।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/mothers-day-special/mothers-day-essay-2026-126050800054_1.html" target="_blank">Mothers Day Essay: निस्वार्थ प्रेम का उत्सव मदर्स डे, पढ़ें मातृ दिवस पर बेहतरीन हिन्दी निबंध</a></strong></p>
</p>
<h3>
	7. खान-पान और रेस्टोरेंट की लोकप्रियता</h3>
<p>
	मदर्स डे पर परिवार के साथ बाहर जाकर खाना खाना अब एक वैश्विक परंपरा बन चुकी है। यह साल का वह दिन होता है जब रेस्टोरेंट्स में सबसे ज्यादा भीड़ देखी जाती है। इसके पीछे का मुख्य उद्देश्य मां को रसोई के दैनिक कार्यों से छुट्टी देना और उन्हें विशेष महसूस कराना होता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सार: </strong>यह जानकारी हमें बताती है कि मदर्स डे जहाँ एक तरफ भावनाओं और परंपराओं से जुड़ा है, वहीं दूसरी ओर यह वैश्विक स्तर पर व्यापार और सामाजिक व्यवहार का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Sat, 09 May 2026 15:32:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 09 May 2026 15:37:33 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[mothers day]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Mother’s Day 2026: मई के दूसरे रविवार को ही क्यों मनाया जाता है मदर्स डे? जानिए इतिहास]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/mothers-day-special/mothers-day-2026-why-celebrated-on-second-sunday-of-may-history-and-significance-126050900036_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/mothers-day-special/mothers-day-2026-why-celebrated-on-second-sunday-of-may-history-and-significance-126050900036_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/09/thumb/1_1/1778319228-8942.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/09/thumb/1_1/1778319228-8942.jpg</image>
      <description><![CDATA[मदर्स डे को मई के दूसरे रविवार को मनाने के पीछे एक बेहद भावुक कर देने वाली कहानी है। इसकी शुरुआत किसी उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि एक बेटी के अपनी मां के प्रति सम्मान और एक सामाजिक सुधार की भावना के साथ हुई थी। आइए जानते हैं इसका दिलचस्प इतिहास।]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="In the image, a mother is embracing her daughter. At the bottom is Anna Jarvis, and the caption reads 'Mother's Day 2026'." class="imgCont" height="800" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/09/full/1778319228-8942.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="History of Mother's Day" width="1200" /></p>
	</p>
	<br />
	मदर्स डे को मई के दूसरे रविवार को मनाने के पीछे एक बेहद भावुक कर देने वाली कहानी है। इसकी शुरुआत किसी उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि एक बेटी के अपनी मां के प्रति सम्मान और एक सामाजिक सुधार की भावना के साथ हुई थी। आइए जानते हैं इसका दिलचस्प इतिहास।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. अन्ना जार्विस: वह महिला जिन्होंने शुरुआत की</h3>
<p>
	मदर्स डे की शुरुआत का श्रेय अमेरिका की अन्ना जार्विस (Anna Jarvis) को जाता है। अन्ना अपनी मां, एन रीव्स जार्विस से बहुत प्यार करती थीं। उनकी मां एक शांति कार्यकर्ता थीं जो गृहयुद्ध (Civil War) के दौरान घायल सैनिकों की सेवा करती थीं। उनकी इच्छा थी कि दुनिया में एक दिन ऐसा हो जो माताओं के बलिदान और उनके काम को समर्पित हो।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/mothers-day-special/mothers-day-2026-matru-word-origin-history-and-meaning-in-different-languages-126050900020_1.html" target="_blank">मदर्स डे 2026: मातृ शब्द कैसे बना दुनिया की कई भाषाओं का हिस्सा, मां कहें या मम्मी?</a></strong></p>
</p>
<h3>
	2. 1905 से शुरू हुआ संघर्ष</h3>
<p>
	जब 1905 में अन्ना की मां का निधन हुआ, तो उन्होंने अपनी मां की उस इच्छा को पूरा करने का संकल्प लिया। उन्होंने तर्क दिया कि एक बच्चा अपनी मां के लिए जो करता है, वह दुनिया के किसी भी अन्य व्यक्ति के मुकाबले सबसे बड़ा होता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. मई का दूसरा रविवार ही क्यों?</h3>
<p>
	<strong>मां की पुण्यतिथि: </strong>अन्ना जार्विस की मां का निधन 9 मई 1905 को हुआ था, जो उस वर्ष मई का दूसरा रविवार था।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>श्रद्धांजलि: </strong>अपनी मां की याद में अन्ना ने 1908 में वर्जीनिया के ग्राफ्टन में एक मेमोरियल सर्विस आयोजित की। उन्होंने वहां मौजूद लोगों को अपनी मां का पसंदीदा फूल &#39;सफेद कार्नेशन&#39; (White Carnation) बांटा।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. आधिकारिक मान्यता: 1914 का ऐतिहासिक दिन</h3>
<p>
	अन्ना जार्विस के लंबे संघर्ष और कैंपेन के बाद, अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति वुडरो विल्सन (Woodrow Wilson) ने 9 मई 1914 को एक कानून पारित किया। इसमें घोषणा की गई कि हर साल मई के दूसरे रविवार को &#39;मदर्स डे&#39; के रूप में मनाया जाएगा और इस दिन राष्ट्रीय अवकाश रहेगा।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/mothers-day-special/mothers-day-essay-2026-126050800054_1.html" target="_blank">Mothers Day Essay: निस्वार्थ प्रेम का उत्सव मदर्स डे, पढ़ें मातृ दिवस पर बेहतरीन हिन्दी निबंध</a></strong></p>
</p>
<h3>
	मदर्स डे से जुड़े कुछ रोचक तथ्य</h3>
<p>
	<strong>कार्नेशन फूल का महत्व: </strong>अन्ना जार्विस ने सफेद कार्नेशन को माँ के प्रतीक के रूप में चुना था क्योंकि यह माँ के प्यार की तरह &#39;शुद्ध&#39; और &#39;सफेद&#39; होता है। बाद में, जीवित माँ के लिए लाल कार्नेशन और स्वर्गवासी माँ के लिए सफेद कार्नेशन पहनने की परंपरा शुरू हुई।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अन्ना जार्विस का अफसोस: </strong>जैसे-जैसे यह दिन लोकप्रिय हुआ, कंपनियों ने इसे व्यापार (कार्ड, फूल, उपहार) का जरिया बना लिया। अन्ना को यह व्यावसायिकता इतनी नापसंद थी कि उन्होंने बाद में इस दिन का विरोध भी किया था, क्योंकि वह इसे पूरी तरह से &#39;भावनाओं&#39; का दिन रखना चाहती थीं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>भारत और दुनिया: </strong>आज भारत सहित दुनिया के 40 से ज्यादा देशों में मई के दूसरे रविवार को ही मदर्स डे मनाया जाता है, हालाँकि कुछ देशों में इसकी तारीखें अलग भी हैं (जैसे ब्रिटेन में मार्च में)।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/mothers-day-special/mothers-day-special-5-things-we-often-forget-to-say-to-our-mothers-126050600053_1.html" target="_blank">Mothers Day 2026: मदर्स डे स्पेशल: वो 5 बातें जो हम अक्सर अपनी मां से कहना भूल जाते हैं</a></strong></p>
</p>
<p>
	मदर्स डे 2026 इस बार 10 मई को पड़ रहा है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि भले ही हम हर दिन मां को याद करें, लेकिन एक विशेष दिन उनके प्रति आभार व्यक्त करने के लिए समर्पित करना एक सुखद एहसास है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Sat, 09 May 2026 14:55:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 09 May 2026 15:04:09 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[mothers day]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Mothers Day Gift Idea: सिर्फ गिफ्ट ही नहीं, अपनी राशिनुसार मां को दें ये खास तोहफा, बढ़ेगा सौभाग्य!]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/special-gifts-for-mother-by-zodiac-sign-126050900013_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/special-gifts-for-mother-by-zodiac-sign-126050900013_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/09/thumb/1_1/1778308544-6098.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/09/thumb/1_1/1778308544-6098.jpg</image>
      <description><![CDATA[Mothers Day Astrology: वैसे तो मदर्स डे पर मां को दिया गया प्यार और सम्मान ही सबसे बड़ा उपहार है। लेकिन यदि आप इस दिन को और भी खास बनाना चाहते हैं, तो ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अपनी राशि के मुताबिक कुछ विशेष कार्य या उपहार चुन सकते हैं। मान्यता है ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="हैप्पी मदर्स डे पर मां के लिए खास तोहफा देने संबंधी ज्योतिष और 12 राशिनुसार गाइड करता फोटो" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/09/full/1778308544-6098.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Happy Mothers Day Astrology Gifts 2026: </strong>मां, हमारे जीवन का सबसे अनमोल रत्न हैं। उनका प्यार, उनकी दुआएं और उनका साथ हमारी खुशियों की सबसे बड़ी वजह हैं। मदर डे का मौका उनके प्रति अपने प्यार और कृतज्ञता को जताने का सबसे सुंदर अवसर है। इस दिन सिर्फ फूल और चॉकलेट्स ही नहीं, बल्कि ऐसा तोहफा देना चाहिए जो मां के व्यक्तित्व और उनकी राशि के अनुसार उन्हें खुश करे और उनके जीवन में सौभाग्य बढ़ाए।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/astrology-articles/numerology-horoscope-11-17-may-2026-126050900006_1.html" target="_blank">Numerology Horoscope 2026: साप्ताहिक अंक राशिफल (11 से 17 मई), आपके अंक बता रहे हैं भविष्य की दिशा</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	वर्ष 2026 में 10 मई, रविवार के दिन मातृ दिवस या मदर्स डे मनाया जा रहा है। ज्योतिष के अनुसार हर राशि के लोगों की पसंद, नकारात्मक ऊर्जा से बचाव और सौभाग्य बढ़ाने के तरीके अलग-अलग होते हैं। इस कारण, राशिनुसार गिफ्ट चुनना न सिर्फ thoughtful gesture है बल्कि यह मां के लिए एक शुभ और मंगलकारी उपहार भी साबित हो सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	इस लेख में हम मां के लिए कुछ राशिनुसार गिफ्ट आइडियाज साझा कर रहे हैं, जो उनकी राशि और ज्योतिषीय प्रभावों के अनुसार उन्हें प्रसन्न करेंगे और सौभाग्य बढ़ाएंगे।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	आइए जानते हैं किस राशि के जातक को अपनी मां के लिए क्या करना चाहिए:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	मेष राशि (Aries)</h3>
<p>
	मेष राशि का स्वामी मंगल है। आपको अपनी मां को लाल रंग की कोई वस्तु (जैसे साड़ी, सूट या लाल गुलाब) भेंट करनी चाहिए। साथ ही, उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें, इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	वृषभ राशि (Taurus)</h3>
<p>
	इस राशि के जातक अपनी मां को चांदी का कोई आभूषण या सफेद रंग की मिठाई भेंट करें। वृषभ राशि के लिए मां की सेवा करना आर्थिक उन्नति के द्वार खोलता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	मिथुन राशि (Gemini)</h3>
<p>
	मिथुन राशि वाले अपनी मां को हरे रंग के कपड़े या कोई इंडोर प्लांट (पौधा) गिफ्ट करें। यदि संभव हो तो उनके साथ समय बिताएं और उनकी पसंद का भोजन कराएं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	कर्क राशि (Cancer)</h3>
<p>
	कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा है, जो स्वयं &#39;मां&#39; का कारक है। आपको मां को मोती की माला या सफेद रेशमी वस्त्र देने चाहिए। इससे आपके मन को शांति मिलेगी और करियर में तरक्की होगी।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	सिंह राशि (Leo)</h3>
<p>
	सिंह राशि के जातक अपनी मां को सुनहरे रंग की वस्तु या तांबे का कोई पात्र भेंट करें। मां को कोई ऐसी चीज दें जिससे उनका मान-सम्मान बढ़े, इससे आपका सूर्य मजबूत होगा।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	कन्या राशि (Virgo)</h3>
<p>
	कन्या राशि वाले अपनी मां को धार्मिक पुस्तकें या डायरी-पेन जैसी बौद्धिक चीजें भेंट करें। उनकी सेहत का ध्यान रखना और उन्हें कोई औषधीय पौधा देना भी शुभ रहेगा।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	तुला राशि (Libra)</h3>
<p>
	तुला राशि के जातक अपनी मां को परफ्यूम (इत्र), सौंदर्य प्रसाधन या रेशमी कपड़े गिफ्ट कर सकते हैं। इससे आपके जीवन में शुक्र का प्रभाव शुभ होगा और सुख-सुविधाएं बढ़ेंगी।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	वृश्चिक राशि (Scorpio)</h3>
<p>
	वृश्चिक राशि वाले अपनी मां को तांबे की कोई वस्तु या लाल रंग की मिठाई खिलाएं। यदि मां से कोई मनमुटाव है, तो आज के दिन उसे खत्म कर आशीर्वाद लें, भाग्य चमक उठेगा।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	धनु राशि (Sagittarius)</h3>
<p>
	धनु राशि के जातक अपनी मां को पीले रंग की मिठाई, केसर या कोई धार्मिक यात्रा का टिकट या (तीर्थ दर्शन) गिफ्ट करें। इससे आपके ज्ञान और सम्मान में वृद्धि होगी।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	मकर राशि (Capricorn)</h3>
<p>
	मकर राशि वाले अपनी मां को कीमती धातु या कोई पुरानी यादों से जुड़ा फोटो फ्रेम भेंट करें। उनकी थकान दूर करने के लिए उन्हें फुट मसाजर जैसा गैजेट भी दे सकते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	कुंभ राशि (Aquarius)</h3>
<p>
	कुंभ राशि के जातक अपनी मां को इलेक्ट्रॉनिक गैजेट या नीले रंग के वस्त्र भेंट करें। मां की सेवा करने से आपके जीवन के संघर्ष कम होंगे और सफलता के रास्ते खुलेंगे।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	मीन राशि (Pisces)</h3>
<p>
	मीन राशि वाले अपनी मां को धार्मिक ग्रंथ, चंदन की माला या पीले वस्त्र भेंट करें। उनके साथ किसी मंदिर में दर्शन करने जाएं, यह आपके लिए सबसे बड़ा सौभाग्य लेकर आएगा।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>खास बात: </strong>उपहार चाहे छोटा हो या बड़ा, उसे देते समय आपके मन में श्रद्धा और प्रेम का भाव होना सबसे जरूरी है। ज्योतिष में मां को साक्षात &#39;चंद्रमा&#39; माना गया है, जिनकी खुशी आपके जीवन में मानसिक शांति का आधार है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	सभी माताओं को मदर्स डे की ढेरों शुभकामनाएं!</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/ganga-dussehra/ganga-dussehra-2026-puja-shubh-muhurat-date-and-significance-126050900011_1.html" target="_blank">गंगा दशहरा 2026 कब है? जानिए पूजा का शुभ मुहूर्त और स्नान का सही समय</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Sat, 09 May 2026 14:04:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 09 May 2026 15:10:40 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[astrology articles]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[मदर्स डे 2026: मातृ शब्द कैसे बना दुनिया की कई भाषाओं का हिस्सा, मां कहें या मम्मी?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/mothers-day-special/mothers-day-2026-matru-word-origin-history-and-meaning-in-different-languages-126050900020_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/09/thumb/1_1/1778312947-5276.jpg"/>
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      <description><![CDATA[दुनिया की लगभग हर भाषा में 'म' (M) ध्वनि माँ के लिए उपयोग होती है। इसका कारण यह है कि जब बच्चा बोलना शुरू करता है, तो 'म' सबसे आसान ध्वनि होती है जिसे बच्चा अपने होठों को जोड़कर निकालता है। मदर्स डे (Mother's Day) 2026 के इस विशेष अवसर पर, आइए जानते ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="A picture of a mother affectionately embracing her daughter, with the caption 'Mother's Day 2026'." class="imgCont" height="800" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/09/full/1778312947-5276.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="Meaning of the word Mother" width="1200" /></p>
	</p>
	दुनिया की लगभग हर भाषा में &#39;म&#39; (M) ध्वनि माँ के लिए उपयोग होती है। इसका कारण यह है कि जब बच्चा बोलना शुरू करता है, तो &#39;म&#39; सबसे आसान ध्वनि होती है जिसे बच्चा अपने होठों को जोड़कर निकालता है। मदर्स डे (Mother&#39;s Day) 2026 के इस विशेष अवसर पर, आइए जानते हैं संस्कृत के मातृ शब्द का अर्थ और इसके अन्य भाषा में इसके बदलते स्वरूप और अर्थ को। यह शब्द कैसे मां, माता और फिर मदर बन गया। चलिए जानते हैं दिलचस्प जानकारी।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. मातृ शब्द शाब्दिक अर्थ:</h3>
<p>
	&#39;मातृ&#39; शब्द संस्कृत का मूल शब्द (प्रातिपदिक) है, जिससे हिंदी का &#39;माता&#39; और &#39;मां&#39; शब्द निकला है। यह शब्द केवल एक संबंध को नहीं, बल्कि एक संपूर्ण दर्शन को दर्शाता है।</p>
<p>
	&#39;मातृ&#39; शब्द संस्कृत की &#39;मा&#39; धातु से बना है, जिसका अर्थ होता है- &#39;मापना&#39; या &#39;निर्माण करना&#39;।</p>
<p>
	<strong>निर्मात्री: </strong>वह जो गर्भ में शिशु के शरीर का निर्माण करती है।</p>
<p>
	नियमन करने वाली: वह जो बालक के आचरण और संस्कारों को मापती है और उन्हें सही दिशा देती है।</p>
<p>
	<strong>म- </strong> ममता का सागर</p>
<p>
	<strong>ता- </strong>तारने वाली (कष्टों से उबारने वाली)</p>
<p>
	<strong>अर्थात्, </strong>वह स्त्री जो अपने संतान के सभी दुखों को हर ले और उसे ममता की छाया में सुरक्षित रखे, वही &#39;माता&#39; है। एक प्रसिद्ध उक्ति है: "कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति" (पुत्र बुरा हो सकता है, लेकिन माता कभी बुरी नहीं हो सकती)।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/mothers-day-special/mothers-day-essay-2026-126050800054_1.html" target="_blank">Mothers Day Essay: निस्वार्थ प्रेम का उत्सव मदर्स डे, पढ़ें मातृ दिवस पर बेहतरीन हिन्दी निबंध</a></strong></p>
</p>
<h3>
	2. &#39;मातृ&#39; शब्द के विविध रूप</h3>
<p>
	इस मूल शब्द से ही संसार की विभिन्न भाषाओं के शब्द विकसित हुए हैं, जो इसके महत्व को वैश्विक बनाते हैं।</p>
<p>
	<strong>संस्कृत: </strong>मातृ (Matra)</p>
<p>
	<strong>हिंदी: </strong>माता/ माँ (Maa) </p>
<p>
	<strong>लैटिन: </strong>ममा, मेटर (Mater)</p>
<p>
	<strong>अंग्रेजी: </strong>मदर, माम (Mother)<br />
	<p>
		<strong>अरबी: </strong>उम्म, उम्मी, वालिदा, वालिदैन, मुमिया</p>
	<p>
		<strong>फारसी:</strong> मादर, मम</p>
	<p>
		<strong>उर्दू: </strong>अम्मी</p>
</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. अम्बा कैसे बना अम्मा और आई:</h3>
<p>
	क्या आप जानते हैं कि संस्कृत में &#39;माता&#39; के लिए &#39;अम्बा&#39; शब्द का भी प्रयोग होता है? आज भी भारत के कई हिस्सों में माँ को &#39;अम्मा&#39; या &#39;आई&#39; (मराठी में, जो &#39;आर्या&#39; से प्रेरित है) कहकर पुकारा जाता है, जो इसी भाषाई परंपरा का हिस्सा है। भारत की भाषाई विविधता इतनी समृद्ध है कि यहाँ &#39;माता&#39; के लिए अनेक शब्द प्रचलित हैं। दिलचस्प बात यह है कि इनमें से अधिकांश शब्द संस्कृत के &#39;मातृ&#39;, &#39;अम्बा&#39; या प्राकृत के &#39;आई&#39; से निकले हैं।</p>
<p>
	 </p>
<ol>
	<li>
		हिंदी: माँ, माता, मैया, जननी</li>
	<li>
		पंजाबी: माँ, बेबे, माता जी</li>
	<li>
		कश्मीरी: मोज (Maaj)</li>
	<li>
		डोगरी: अम्मा, माँ</li>
	<li>
		सिंधी: अम्मां, माउ</li>
	<li>
		तमिल: अम्मा (Amma), थाई (Thai)</li>
	<li>
		तेलुगु: अम्मा (Amma), तल्ली (Thalli)</li>
	<li>
		कन्नड़: अम्मा (Amma), थायी (Thaayi)</li>
	<li>
		मलयालम: अम्मा (Amma)</li>
	<li>
		मराठी: आई (Aai), माता, मातृ</li>
	<li>
		गुजराती: बा, मम्मी, माँ</li>
	<li>
		कोंकणी: आवय (Aavai), अम्मा</li>
	<li>
		बंगाली: माँ (Maa), माई</li>
	<li>
		ओड़िया: माँ (Maa), बऊ (Bau)</li>
	<li>
		असमिया: आइ (Aai), माँ</li>
	<li>
		मैथिली: माय, माता</li>
	<li>
		मणिपुरी: ईमा (Eema)</li>
</ol>
<p>
	<strong>अम्मा: </strong>यह शब्द दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत (खासकर ग्रामीण क्षेत्रों) तक सबसे अधिक लोकप्रिय है।</p>
<p>
	<strong>आई: </strong>महाराष्ट्र में प्रचलित यह शब्द संस्कृत के &#39;आर्या&#39; या &#39;अम्बिका&#39; का अपभ्रंश माना जाता है।</p>
<p>
	<strong>बऊ: </strong>ओड़िशा के ग्रामीण अंचलों में माँ को बहुत प्रेम से &#39;बऊ&#39; कहा जाता है।</p>
<p>
	ईमा: मणिपुर में माँ को &#39;ईमा&#39; कहते हैं, और वहाँ का प्रसिद्ध &#39;ईमा मार्केट&#39; (Mother&#39;s Market) पूरी तरह महिलाओं द्वारा संचालित है।</p>
<p>
	<strong>मम्मी: </strong>यह माना जाता है कि &#39;मम्मी&#39; शब्द की उत्पत्ति लैटिन शब्द &#39;Mamma&#39; से हुई है। मम्मा&#39; से धीरे-धीरे अंग्रेजी में &#39;मम&#39; (Mum) बना और फिर प्यार से पुकारने के लिए इसमें &#39;Y&#39; जोड़कर इसे &#39;मम्मी&#39; (Mummy) या &#39;मॉम&#39; (Mom) बना दिया गया।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/mothers-day-special/mothers-day-special-5-things-we-often-forget-to-say-to-our-mothers-126050600053_1.html" target="_blank">Mothers Day 2026: मदर्स डे स्पेशल: वो 5 बातें जो हम अक्सर अपनी मां से कहना भूल जाते हैं</a></strong></p>
</p>
<h3>
	4. व्यापक परिभाषा (सप्त-माता)</h3>
<p>
	हिंदू धर्मग्रंथों में केवल जन्म देने वाली को ही नहीं, बल्कि इन सात को भी &#39;मातृ&#39; (माता) के समान सम्मान दिया गया है:</p>
<ol>
	<li>
		जननी: जन्म देने वाली माँ।</li>
	<li>
		गुरुमां: गुरु की पत्नी।</li>
	<li>
		ब्राह्मणी: ब्राह्मण की पत्नी।</li>
	<li>
		राजमाता: राजा की पत्नी (रानी)।</li>
	<li>
		गौमाता: गाय, जो पोषण देती है (धेनु)।</li>
	<li>
		धात्री: पालन-पोषण करने वाली (धाय माँ)।</li>
	<li>
		पृथ्वी: धरती माँ, जो सबका बोझ सहती है।</li>
</ol>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/mothers-day-special/mothers-day-2026-matru-word-origin-history-and-meaning-in-different-languages-126050900020_1.html" target="_blank">मदर्स डे 2026: मातृ शब्द कैसे बना दुनिया की कई भाषाओं का हिस्सा, मां कहें या मम्मी?</a></strong></p>
</p>
<p>
	<strong>एक रोचक बात: </strong>भारत में अंग्रेजी शिक्षा के प्रभाव के कारण हम &#39;मम्मी&#39; शब्द का उपयोग करने लगे, लेकिन आज भी हमारी अपनी भाषाओं के शब्द (जैसे माँ, अम्मा, आई) भावनाओं के अधिक करीब माने जाते हैं क्योंकि उनमें &#39;ममता&#39; की गूंज है।<br />
	<strong>संकलन: </strong>अनिरुद्ध जोशी</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Sat, 09 May 2026 12:46:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 09 May 2026 13:19:27 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[mothers day]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Mothers Day 2026: मदर्स डे स्पेशल: वो 5 बातें जो हम अक्सर अपनी मां से कहना भूल जाते हैं]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/mothers-day-special/mothers-day-special-5-things-we-often-forget-to-say-to-our-mothers-126050600053_1.html</link>
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      <description><![CDATA[5 Things to say to Mom:मदर्स डे हर साल हमें यह याद दिलाता है कि हमारी मां का जीवन में कितना महत्व है। लेकिन अक्सर हम अपने व्यस्त जीवन में वे पांच छोटी-छोटी बातें भूल जाते हैं, जो अपनी मां को सीधे दिल से कहनी चाहिए। आज मदर्स डे 2026 के मौके पर यह सही ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="A touching moment depicting the love between mother and child on the occasion of Mothers Day and a beautiful Happy Mothers Day photo decorated with flowers and butterflies" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/06/full/1778066703-8955.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Heartfelt Messages for Mom: </strong>मदर्स डे सिर्फ उपहार देने का दिन नहीं, बल्कि उन भावनाओं को व्यक्त करने का दिन है जो साल भर हमारे दिल के किसी कोने में दबी रह जाती हैं। भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर यह मान लेते हैं कि हमारी मां तो सब जानती ही हैं, लेकिन कभी-कभी शब्दों में कही गई बात उनके दिल को जो सुकून देती है, उसकी तुलना किसी कीमती तोहफे से नहीं की जा सकती।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	इस लेख में हम बताएंगे 5 बातें जो आप अपनी मां से अक्सर कहना भूल जाते हैं, और कैसे इन्हें कहकर आप उनके दिन को और भी खास बना सकते हैं। यह न केवल आपके रिश्ते को मजबूत करेगा, बल्कि मां के चेहरे पर एक प्यारी मुस्कान भी ला देगा।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. &#39;थैंक यू, आपने मेरे लिए जो भी किया&#39;</h3>
<p>
	हम अक्सर अपनी पसंद का खाना बनने पर या कोई काम होने पर &#39;थैंक यू&#39; कहते हैं, लेकिन उन अनगिनत रातों के लिए शुक्रिया कहना भूल जाते हैं जब वे हमारे बीमार होने पर जागी थीं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>क्या कहें:</strong></p>
<h3>
	<strong>&#39;मम्मी, आपने अपनी खुशियों से पहले हमेशा मेरी खुशियों को रखा, उसके लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया।&#39;</strong></h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. &#39;आई एम सॉरी, अगर मैंने कभी आपका दिल दुखाया हो&#39;</h3>
<p>
	अनजाने में या गुस्से में हम अक्सर अपनी मां पर चिल्ला देते हैं या उनकी बात को अनसुना कर देते हैं। मां माफ तो कर देती हैं, लेकिन वो कसक मन में रह जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>क्या कहें:</strong></p>
<h3>
	&#39;कभी-कभी मैं अपनी उलझनों में आप पर गुस्सा कर देता/देती हूं, मुझे उस बात का दुख है। प्लीज मुझे माफ कर देना।&#39;</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. &#39;आप सिर्फ एक मां नहीं, एक प्रेरणा हैं&#39;</h3>
<p>
	हम अक्सर भूल जाते हैं कि मां की भी अपनी एक पहचान है। वह एक बेहतरीन कुक, एक कुशल मैनेजर, या एक मजबूत कामकाजी महिला हो सकती हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>क्या कहें:</strong></p>
<h3>
	&#39;मुझे गर्व है कि मैं आपकी संतान हूं। आप जिस तरह से सब कुछ संभालती हैं, वह मेरे लिए सबसे बड़ी सीख है।&#39;</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. &#39;अब आप थोड़ा अपने लिए भी जिएं&#39;</h3>
<p>
	एक उम्र के बाद बच्चे सेटल हो जाते हैं, लेकिन मां की चिंताएं खत्म नहीं होतीं। उन्हें यह एहसास दिलाना जरूरी है कि अब उनकी जिम्मेदारियां पूरी हुईं और उन्हें अपने शौक पूरे करने चाहिए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>क्या कहें:</strong></p>
<h3>
	&#39;मम्मी, अब आप अपनी सेहत और अपनी पसंद के कामों पर ध्यान दें। हम सब आपके साथ हैं, आप बस मुस्कुराती रहें।&#39;</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. &#39;मैं आपसे बहुत प्यार करता/करती हूं&#39;</h3>
<p>
	यह दुनिया का सबसे साधारण वाक्य है, लेकिन एक मां के लिए सबसे ताकतवर है। हम बड़े होते-होते इस वाक्य को कहना कम कर देते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>क्या कहें:</strong></p>
<h3>
	बिना किसी खास वजह के, बस उन्हें गले लगाकर कहें— &#39;मम्मी, मैं आपसे बहुत प्यार करता या करती हूं।&#39;</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>एक छोटी सी सलाह: </strong></p>
<h3>
	इस मदर्स डे, इन बातों को सिर्फ मैसेज पर न भेजें। उनके पास बैठें, उनका हाथ थामें और आंखों में देखकर कहें। यकीन मानिए, उनके चेहरे की वह मुस्कान आपके दिन को यादगार बना देगी।</h3>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।</p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Sat, 09 May 2026 12:05:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 09 May 2026 15:08:31 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[mothers day]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Mothers Day Essay: निस्वार्थ प्रेम का उत्सव मदर्स डे, पढ़ें मातृ दिवस पर बेहतरीन हिन्दी निबंध]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/mothers-day-special/mothers-day-essay-2026-126050800054_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/mothers-day-special/mothers-day-essay-2026-126050800054_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/08/thumb/1_1/1778239451-9145.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/08/thumb/1_1/1778239451-9145.jpg</image>
      <description><![CDATA[happy mothers day essay: मां केवल घर की देखभाल नहीं करती, बल्कि वह हमारी सबसे बड़ी शिक्षक और मार्गदर्शक भी होती है। वह हमारे दुख-सुख में हमेशा हमारे साथ होती है और हमें हिम्मत देती है। मदर्स डे का उद्देश्य मां के इस अटूट प्रेम और बलिदान को याद करना ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="मातृ दिवस पर मां के निस्वार्थ प्रेम को दर्शाता मां-बेटी का चित्र। इमेज कैप्शन में 'हैप्पी मदर्स डे'" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/08/full/1778239451-9145.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Essay on mothers day 2026:</strong> &#39;मंजिल दूर और सफर बहुत है, छोटी सी जिंदगी की फिक्र बहुत है, मार डालती यह दुनिया कब की हमें, लेकिन मां की दुआओं में असर बहुत है।&#39; जी हां, यह पंक्तियां हमें मां के हाथों में ताउम्र महफूज रखती है। मां का स्थान हमारे जीवन में सबसे ऊँचा और अनमोल होता है। मां वह व्यक्ति है जो हमें जन्म देती है, हमारी परवरिश करती है और हमें सही और गलत की शिक्षा देती है। मां का प्रेम निस्वार्थ और असीम होता है। इसलिए हर साल मां के सम्मान में मदर्स डे मनाया जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	प्रस्तावना</h3>
<p>
	संसार में &#39;मां&#39; वह शब्द है जिसमें पूरी कायनात का प्रेम और सुख समाया हुआ है। एक बच्चा जब बोलना शुरू करता है, तो उसके मुख से निकलने वाला पहला शब्द अक्सर &#39;मां&#39; ही होता है। मदर्स डे या मातृ दिवस केवल एक तारीख नहीं, बल्कि उस निस्वार्थ ममता, त्याग और धैर्य के प्रति आभार व्यक्त करने का दिन है, जो एक मां अपने बच्चों के लिए ताउम्र समर्पित करती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	मदर्स डे का महत्व</h3>
<p>
	मदर्स डे हर साल मई महीने के दूसरे रविवार को मनाया जाता है। यह दिन हमें अपनी मां के प्रति कृतज्ञता और प्रेम व्यक्त करने का अवसर देता है। यूं तो मां के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए किसी खास दिन की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि मां का हर दिन हमारे जीवन के लिए एक उपहार है। फिर भी, आधुनिक भागदौड़ भरी जिंदगी में हम अक्सर उन एहसानों को भूल जाते हैं जो मां ने हमारे लिए किए हैं। मदर्स डे हमें रुककर यह सोचने का अवसर देता है कि हम अपनी मां को कितना प्यार करते हैं और उनका हमारे जीवन में क्या स्थान है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	मां: ईश्वर का प्रतिरूप</h3>
<p>
	कहा जाता है कि ईश्वर हर जगह मौजूद नहीं रह सकता था, इसलिए उसने &#39;मां&#39; बनाई। एक मां अपने बच्चों के लिए:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>प्रथम गुरु:</strong> वह हमें जीवन के पहले अक्षर से लेकर नैतिकता के पाठ तक सब सिखाती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सुरक्षा कवच: </strong>दुनिया की हर मुसीबत से पहले मां ढाल बनकर खड़ी हो जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>अथाह धैर्य: </strong>बच्चों की गलतियों को माफ करना और उन्हें फिर से सही राह दिखाना मां की सबसे बड़ी खूबी है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	यह दिन कैसे मनाएं?</h3>
<p>
	मदर्स डे मनाने का सबसे बेहतरीन तरीका यह है कि हम अपनी मां को यह महसूस कराएं कि वे हमारे लिए कितनी खास हैं। इसके लिए महंगे उपहारों की जरूरत नहीं होती, बल्कि छोटे-छोटे प्रयास भी काफी हैं:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>समय दें: </strong>उनके साथ बैठकर बातें करें और उनके पुराने अनुभवों को सुनें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>मदद करें: </strong>घर के कामों में हाथ बटाएं ताकि उन्हें थोड़ा आराम मिल सके।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>आभार जताएं:</strong> एक हाथ से लिखा हुआ पत्र या उनके पसंद का भोजन बनाना उनके दिल को छू सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	निष्कर्ष</h3>
<p>
	मां वह नींव है जिस पर एक सुखी परिवार और सभ्य समाज की इमारत खड़ी होती है। मदर्स डे की सार्थकता तभी है जब हम केवल एक दिन ही नहीं, बल्कि साल के 365 दिन अपनी मां का सम्मान करें और उन्हें कभी अकेलापन महसूस न होने दें। हमें यह याद रखना चाहिए कि हम चाहे कितने भी बड़े क्यों न हो जाएं, मां की ममता की छांव हमारे लिए हमेशा सबसे सुरक्षित जगह रहेगी।<br />
	<br />
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/mothers-day-special/mothers-day-special-5-things-we-often-forget-to-say-to-our-mothers-126050600053_1.html" target="_blank">Mothers Day 2026: मदर्स डे स्पेशल: वो 5 बातें जो हम अक्सर अपनी मां से कहना भूल जाते हैं</a></strong></p>
	<p>
		 </p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Sat, 09 May 2026 10:04:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 09 May 2026 15:08:39 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[mothers day]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Maharana Pratap Wishes 2026: महाराणा प्रताप की जयंती पर अपनों को भेजें ये 10 वीरताभरे प्रेरक शुभकामना संदेश]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/important-days-and-dates/heartfelt-wishes-on-maharana-pratap-jayanti-2026-126050900005_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/09/thumb/1_1/1778299787-3481.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/09/thumb/1_1/1778299787-3481.jpg</image>
      <description><![CDATA[Maharana Pratap Jayanti quotes: महाराणा प्रताप की जयंती केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि स्वाभिमान और साहस का पर्व है। इस अवसर पर हम सभी अपने जीवन में उनकी तरह साहस, धैर्य और आत्मसम्मान का पालन करने का संकल्प लें। मेवाड़ के महाराजा महाराणा प्रताप की जयंती ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="चित्र में वीर योद्धा महाराणा प्रताप अपने हाथ में 81 किलो का भाला लिए हुए, साथ में उनका प्रिय घोड़ा चेतक, हजारों की संख्या में राजपूत योद्धाओं की टुकड़ी तथा किला" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/09/full/1778299787-3481.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Rajput warrior Maharana Pratap quotes: </strong>महाराणा प्रताप जयंती भारत के वीर शूरवीर महाराणा प्रताप की जयंती के रूप में हर साल मनाई जाती है। यह दिन राजस्थान के मेवाड़ के महान राजा और स्वतंत्रता के प्रतीक महाराणा प्रताप की वीरता, साहस और अदम्य भावना को याद करने का अवसर है। महाराणा प्रताप का जन्म 09 मई 1540 को कुंभलगढ़ किले में हुआ था। उन्होंने कभी भी अपने राज्य और अपने लोगों की आज़ादी के लिए समझौता नहीं किया और मुगल साम्राज्य के खिलाफ कई युद्धों में अपना अद्भुत शौर्य दिखाया।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	उनकी कुर्बानी और वीरता आज भी हमें प्रेरणा देती है कि किसी भी परिस्थिति में अपने सिद्धांतों और स्वाभिमान के लिए डट कर खड़ा होना चाहिए। महाराणा प्रताप जयंती केवल उनके जन्मदिन का उत्सव नहीं है, बल्कि यह हमें देशभक्ति, साहस और निस्वार्थ सेवा की सीख भी देती है। </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	इस खास मौके पर आप अपने मित्रों और परिजनों को ये 10 जोश भर देने वाले शुभकामना संदेश भेज सकते हैं:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	महाराणा प्रताप जयंती: टॉप 10 शुभकामना संदेश</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	1. "झुके नहीं जो मुगलों के आगे, </p>
<p>
	जिसने अपना मान बचाया था, </p>
<p>
	मातृभूमि की रक्षा की खातिर, </p>
<p>
	जिसने जंगल में वक्त बिताया था।" </p>
<h3>
	महाराणा प्रताप जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं! </h3>
<p>
	 </p>
<p>
	2. "हल्दीघाटी के युद्ध में, </p>
<p>
	दुश्मन को पानी पिलाया था, </p>
<p>
	चेतक पर होकर सवार, </p>
<p>
	जिसने वीरता का परचम लहराया था।" </p>
<p>
	नमन है ऐसे वीर योद्धा को! </p>
<h3>
	जयंती की बधाई!</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	3. "अकबर की नींद उड़ जाती थी, </p>
<p>
	जिसके मात्र एक नाम से,</p>
<p>
	स्वाभिमान का वो शेर था, </p>
<p>
	जो डरा नहीं किसी मुकाम से।" </p>
<h3>
	मेवाड़ केसरी महाराणा प्रताप जयंती की शुभकामनाएं!</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	4. "सिर कट जाए पर झुके नहीं, </p>
<p>
	यही राजपूत की शान है, </p>
<p>
	महाराणा प्रताप इस पावन धरा के, </p>
<p>
	सबसे बड़े सम्मान हैं।" </p>
<h3>
	महाराणा प्रताप जयंती पर शत-शत नमन!</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	5. "घास की रोटी खाकर भी, </p>
<p>
	जिसने स्वाभिमान को जिंदा रखा, </p>
<p>
	रणभूमि में अपनी तलवार से, </p>
<p>
	जिसने इतिहास को लिख डाला।" </p>
<h3>
	जय मेवाड़! जय प्रताप!</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	6. "जब-जब उठती है बात वीरता की, </p>
<p>
	प्रताप का नाम सबसे पहले आता है, </p>
<p>
	उनकी हुंकार से आज भी, </p>
<p>
	दुश्मन का कलेजा कांप जाता है।" </p>
<h3>
	महाराणा प्रताप जयंती की ढेरों बधाई! </h3>
<p>
	 </p>
<p>
	7. "चेतक जैसा घोड़ा था, </p>
<p>
	और फौलाद जैसा सीना था, </p>
<p>
	आजादी की खातिर मरना, </p>
<p>
	गुलामी में क्या जीना था!" </p>
<h3>
	वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती की शुभकामनाएं! </h3>
<p>
	 </p>
<p>
	8. "मातृभूमि के मान के खातिर, </p>
<p>
	सब कुछ वार देने वाले, </p>
<p>
	अजेय योद्धा महाराणा प्रताप के </p>
<p>
	चरणों में कोटि-कोटि वंदन।" </p>
<h3>
	शुभ महाराणा प्रताप जयंती!</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	9. "वो स्वाभिमानी, वो बलिदानी, </p>
<p>
	वो हिंदुस्तान का तारा था, </p>
<p>
	जिसकी ललकार पर मुगल भी बोले—<br />
	वह शेर बड़ा ही प्यारा था।" </p>
<h3>
	प्रताप जयंती की बधाई!</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	10. "जिसकी तलवार की चमक से, </p>
<p>
	अकबर का दिल दहल जाता था, </p>
<p>
	वो कोई और नहीं, </p>
<p>
	मेवाड़ का शेर &#39;प्रताप&#39; कहलाता था।" </p>
<h3>
	जय राजपूताना! जय महाराणा!</h3>
<p>
	 </p>
<p>
	<span style="color:#800000;"><strong>सोशल मीडिया टिप</strong></span>: इन संदेशों को महाराणा प्रताप की तस्वीर के साथ अपने व्हाट्सएप स्टेटस या इंस्टाग्राम स्टोरी पर शेयर करें। यह आपके राष्ट्रप्रेम और गौरव को प्रकट करने का बेहतरीन तरीका है!</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/birth-anniversary-of-personalities/maharana-pratap-jayanti-2026-126050800047_1.html" target="_blank">Maharana Pratap:जयंती विशेष : मेवाड़ का शेर- महाराणा प्रताप के वो 10 सच, जो आपके रोंगटे खड़े कर देंगे</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Sat, 09 May 2026 09:45:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 09 May 2026 09:49:09 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Important Days and Dates]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Maharana Pratap:जयंती विशेष : मेवाड़ का शेर- महाराणा प्रताप के वो 10 सच, जो आपके रोंगटे खड़े कर देंगे]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/birth-anniversary-of-personalities/maharana-pratap-jayanti-2026-126050800047_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/birth-anniversary-of-personalities/maharana-pratap-jayanti-2026-126050800047_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/08/thumb/1_1/1778236400-0582.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/08/thumb/1_1/1778236400-0582.jpg</image>
      <description><![CDATA[Maharana Pratap Birth Anniversary: महाराणा प्रताप केवल एक राजा नहीं थे, बल्कि देशभक्ति और वीरता का पर्याय थे। उनकी गाथा, चाहे वह हल्दीघाटी का युद्ध हो या उनकी कठिनाइयों से भरी जीवन यात्रा, हर भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इस महाराणा प्रताप की ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="इमेज कैप्शन में महाराणा प्रताप की जयंती पर उनकी वीर गाथा बताता उनका प्रिय घोड़ा चेतक, भाला, छाती पर कवच और दो तलवारें" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/08/full/1778236400-0582.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<span style="color:#000080;"><strong>Veer Shiromani Maharana Pratap Jayanti: </strong></span>9 मई का दिन भारतीय इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों से लिखा गया है। यह दिन है उस महायोद्धा की जयंती का, जिसका नाम सुनते ही आज भी दुश्मनों के पसीने छूट जाते हैं। अदम्य साहस और स्वाभिमान के साक्षात अवतार महाराणा प्रताप की जयंती पर आइए जानते हैं उनके जीवन के वो 10 अध्याय, जो हर भारतीय को गौरवान्वित करते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. मिट्टी का लाल: जन्म और विरासत</h3>
<p>
	महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई, 1540 को राजस्थान के कुंभलगढ़ दुर्ग में हुआ। महाराजा उदयसिंह और माता जीवत कंवर के इस लाड़ले को बचपन में प्यार से &#39;कीका&#39; कहा जाता था। उन्होंने मेवाड़ की माटी को मुगलों के आतंक से आजाद कराने का संकल्प लिया था।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. फौलादी शरीर और भारी-भरकम हथियार</h3>
<p>
	महाराणा प्रताप कोई साधारण योद्धा नहीं थे। उनकी कदकाठी और ताकत हैरान करने वाली थी:</p>
<p>
	 </p>
<p>
	लंबाई: 7 फीट 5 इंच</p>
<p>
	 </p>
<p>
	वजन: करीब 110 किलोग्राम</p>
<p>
	 </p>
<p>
	हथियार: वे 81 किलो का भाला, 72 किलो का छाती कवच और दो तलवारें (कुल वजन करीब 208 किलो) लेकर युद्ध के मैदान में उतरते थे।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. हल्दीघाटी: जब 20 हजार भारी पड़े 80 हजार पर</h3>
<p>
	1576 के हल्दीघाटी युद्ध में प्रताप ने दिखा दिया कि हौसला तादाद से बड़ा होता है। मात्र 20 हजार राजपूत योद्धाओं के साथ उन्होंने अकबर के सेनापति मानसिंह की 80 हजार की फौज के दांत खट्टे कर दिए थे।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. चेतक: वफादारी की जीती-जाती मिसाल</h3>
<p>
	हल्दीघाटी के युद्ध को &#39;चेतक&#39; के बिना अधूरा माना जाता है। जख्मी होने के बावजूद चेतक ने प्रताप को बचाने के लिए 26 फीट ऊंचे नाले के ऊपर से छलांग लगा दी। खुद वीरगति को प्राप्त हो गया, लेकिन अपने स्वामी की जान बचा ली।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. सिंहासन नहीं, स्वाभिमान चुना</h3>
<p>
	अकबर की गुलामी स्वीकार करने के बजाय प्रताप ने जंगलों में भटकना बेहतर समझा। जब कई राजा मुगलों से वैवाहिक संबंध बनाकर अपनी सत्ता बचा रहे थे, तब प्रताप ने स्पष्ट कर दिया कि "मेवाड़ झुकेगा नहीं।"</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	6. अकबर की &#39;अधूरी&#39; जीत</h3>
<p>
	कहा जाता है कि हल्दीघाटी के युद्ध का कोई स्पष्ट परिणाम नहीं निकला। अकबर न तो प्रताप को बंदी बना सका और न ही उनके स्वाभिमान को तोड़ सका। प्रताप ने आजीवन संघर्ष किया और अकबर के घमंड को चूर-चूर कर दिया।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	7. घास की रोटी और संघर्ष की पराकाष्ठा</h3>
<p>
	जंगलों में रहते हुए एक समय ऐसा आया जब शाही सुख भोगने वाले प्रताप के परिवार को घास की रोटी खानी पड़ी। लेकिन जब एक जंगली बिल्ली ने उनके बेटे अमर सिंह के हाथ से वह रोटी भी छीन ली, तो प्रताप का हृदय द्रवित हो उठा, पर संकल्प नहीं टूटा।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	8. उस एक पत्र ने जगाया स्वाभिमान</h3>
<p>
	जब अफवाह फैली कि प्रताप संधि कर रहे हैं, तब बीकानेर के कवि पृथ्वीराज राठौड़ ने उन्हें एक पत्र लिखा। उस पत्र की पंक्तियों ने प्रताप के भीतर की सोई हुई ज्वाला को फिर से दहका दिया और उन्होंने अंतिम सांस तक मुगलों की गुलामी नहीं की।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	9. जब अकबर भी रो पड़ा</h3>
<p>
	19 जनवरी 1597 को चावंड में धनुष की डोर खींचते समय लगी चोट के कारण इस महानायक का निधन हुआ। कहते हैं जब अकबर को प्रताप की मृत्यु की खबर मिली, तो उसकी आंखों में भी आंसू आ गए थे। उसने स्वीकार किया था कि &#39;प्रताप जैसा वीर कोई दूसरा नहीं।&#39;</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	10. अजर-अमर है शौर्य गाथा</h3>
<p>
	आज भी मेवाड़ की हवाओं में प्रताप का नाम गूंजता है। उन्होंने सिखाया कि संसाधन कम हों तब भी धर्म और स्वतंत्रता के लिए बलिदान दिया जा सकता है।</p>
<h3>
	 </h3>
<h3>
	वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती पर उन्हें शत्-शत् नमन!</h3>
<p>
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।</p>
	<p>
		 </p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Sat, 09 May 2026 09:05:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Sat, 09 May 2026 09:06:00 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[birth anniversary of personalities]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[9 मई को है रवींद्रनाथ टैगोर जयंती 2026, पढ़ें गुरुदेव से जुड़ी 12 दिलचस्प बातें]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/inspiring-personality/rabindranath-tagore-jayanti-2026-12-interesting-facts-in-hindi-126050700031_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/inspiring-personality/rabindranath-tagore-jayanti-2026-12-interesting-facts-in-hindi-126050700031_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/07/thumb/1_1/1778145865-2697.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/07/thumb/1_1/1778145865-2697.jpg</image>
      <description><![CDATA[Rabindranath Tagore Jayanti: रवींद्रनाथ टैगोर (1861-1941 ई.) एक बंगाली बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे, जिन्होंने बंगाली साहित्य और संगीत के साथ-साथ भारतीय कला को भी 'प्रासंगिक आधुनिकतावाद' के माध्यम से एक नया रूप दिया। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Rabindranath Tagore" class="imgCont" height="800" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/07/full/1778145865-2697.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="Rabindranath Tagore" width="1200" /></p>
	</p>
	Rabindranath Tagore Jayanti: रवींद्रनाथ टैगोर (1861-1941 ई.) एक बंगाली बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे, जिन्होंने बंगाली साहित्य और संगीत के साथ-साथ भारतीय कला को भी &#39;प्रासंगिक आधुनिकतावाद&#39; के माध्यम से एक नया रूप दिया। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, उनका जन्म 7 मई 1861 को रहेगा जबकि बंगाली कैलेंडर के अनुसार 9 मई को रहेगा। </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. पच्चीशे बैशाख को मनाते हैं जयंती:</h3>
<p>
	पश्चिम बंगाल में, रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती स्थानीय बंगाली कैलेंडर के अनुसार मनाई जाती है। रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म कोलकाता में उनके माता-पिता देवेंद्रनाथ टैगोर और शारदा देवी के घर हुआ था। बंगाली कैलेंडर के अनुसार, उनका जन्म वैशाख महीने के 25वें दिन, 1422 बंगाली संवत में हुआ था। वैशाख महीने का 25वां दिन, ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार वर्तमान में 8 मई या 9 मई को पड़ता है। हालांकि, अन्य राज्यों में रवींद्रनाथ टैगोर जयंती ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार 7 मई को मनाई जाती है। कोलकाता में, टैगोर जयंती को &#39;पच्चीशे वैशाख&#39; के नाम से जाना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. जन्म और पारिवारिक पृष्ठभूमि</h3>
<p>
	रवींद्रनाथ ठाकुर का जन्म 7 मई, 1861 को कोलकाता के प्रसिद्ध &#39;जोड़ासाँको ठाकुरबाड़ी&#39; में हुआ था। उनका परिवार न केवल समृद्ध था, बल्कि बौद्धिक रूप से भी बहुत उन्नत था। उनके पिता, महर्षि देबेंद्रनाथ ठाकुर, एक प्रख्यात दार्शनिक और ब्रह्म समाज के स्तंभ थे। बचपन से ही उन्हें घर में कला, संगीत और साहित्य का ऐसा वातावरण मिला, जिसने उनकी बहुमुखी प्रतिभा की नींव रखी।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. &#39;ठाकुर&#39; से &#39;टैगोर&#39; बनने का भाषाई सफर</h3>
<p>
	शुरुआती दौर में उन्हें केवल &#39;रवींद्रनाथ ठाकुर&#39; के नाम से ही पहचाना जाता था। &#39;टैगोर&#39; शब्द उनके मूल उपनाम का कोई नया संस्करण नहीं, बल्कि &#39;ठाकुर&#39; का आंग्ल रूपांतरण (Anglicized version) है। ब्रिटिश काल के दौरान, अंग्रेज अधिकारियों और लेखकों को बंगाली उपनामों के उच्चारण और वर्तनी में कठिनाई होती थी, जिसके कारण वे अपनी सुविधा के अनुसार नामों का अंग्रेजी लिप्यंतरण (Transliteration) कर देते थे।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>उपनाम के विभिन्न अंग्रेजी स्वरूप</strong></p>
<p>
	मूल शब्द &#39;ठाकुर&#39; एक सम्मानजनक उपाधि है। अंग्रेजों ने इसे अपनी लेखनी में अलग-अलग तरह से ढाला:</p>
<p>
	Tagore (जो सबसे अधिक प्रचलित हुआ)</p>
<p>
	Tagor</p>
<p>
	Thakoor</p>
<p>
	रवींद्रनाथ के परिवार के अन्य सदस्य भी उस दौर में अपनी पसंद के अनुसार अलग-अलग स्पेलिंग का उपयोग करते थे।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. नोबेल पुरस्कार और वैश्विक पहचान</h3>
<p>
	रवींद्रनाथ के नाम के साथ &#39;Tagore&#39; स्पेलिंग के स्थायी होने के पीछे सबसे बड़ा कारण 1913 का नोबेल पुरस्कार था। जब उन्हें साहित्य के क्षेत्र में विश्व का यह सर्वोच्च सम्मान मिला, तो अंतरराष्ट्रीय मीडिया, नोबेल कमेटी और पश्चिमी प्रकाशकों ने &#39;Rabindranath Tagore&#39; नाम का ही उपयोग किया। इस वैश्विक कवरेज ने &#39;टैगोर&#39; उपनाम को पूरी दुनिया में उनकी स्थायी पहचान बना दिया।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. नाम के प्रति स्वयं रवींद्रनाथ का दृष्टिकोण</h3>
<p>
	स्वयं रवींद्रनाथ ठाकुर ने अपने नाम की अंग्रेजी स्पेलिंग को लेकर कभी कोई विशेष आग्रह या विरोध नहीं किया। उनके लिए &#39;ठाकुर&#39; और &#39;टैगोर&#39; दोनों ही उनके पारिवारिक मूल को दर्शाते थे। उन्होंने इस भाषाई बदलाव को सहजता से स्वीकार किया, क्योंकि यह किसी विशेष निर्णय के तहत नहीं बल्कि समय और अनुवाद की स्वाभाविक प्रक्रिया का परिणाम था।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	6. वर्तमान प्रासंगिकता: क्षेत्रीय बनाम वैश्विक पहचान</h3>
<p>
	<strong>आज भी रवींद्रनाथ की पहचान दो रूपों में समानांतर चलती है:</strong></p>
<p>
	<strong>भारत और बंगाली समुदाय: </strong>यहाँ वे आज भी आत्मीयता के साथ &#39;रवींद्रनाथ ठाकुर&#39; के नाम से पुकारे जाते हैं।</p>
<p>
	<strong>अंतर्राष्ट्रीय स्तर:</strong> वैश्विक मंच पर वे हमेशा &#39;रवींद्रनाथ टैगोर&#39; के रूप में विख्यात रहेंगे।</p>
<p>
	यह भाषाई रूपांतरण उस महान कवि की वैश्विक यात्रा का प्रतीक है, जिन्होंने बंगाल की गलियों से निकलकर पूरी दुनिया के साहित्य को अपनी लेखनी से समृद्ध किया।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	7. परिचय और मानवतावादी दृष्टिकोण</h3>
<p>
	रवींद्रनाथ टैगोर साहित्य, संगीत, कला और शिक्षा के क्षेत्र में एक अद्वितीय प्रतिभा थे। वे एक मानवतावादी विचारक थे जिन्हें प्रकृति से गहरा लगाव था। उनका अटूट विश्वास था कि विद्यार्थियों को प्रकृति के करीब रहकर ही शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए, और इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन्होंने शांति निकेतन की स्थापना की थी।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	8. विश्वव्यापी सम्मान और अद्वितीय उपलब्धि</h3>
<p>
	<strong>टैगोर विश्व के संभवतः </strong>एकमात्र ऐसे कवि हैं जिनकी रचनाओं को दो अलग-अलग देशों ने अपना राष्ट्रगान बनाया। उनकी कुशाग्र बुद्धि ने न केवल भारतीय बल्कि विदेशी साहित्य, दर्शन और संस्कृति को भी आत्मसात किया था। 1913 में उनकी कालजयी कृति &#39;गीतांजलि&#39; के लिए उन्हें साहित्य के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जिससे वे पूरे विश्व में विख्यात हुए।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	9. प्रमुख उपन्यास और साहित्यिक कृतियाँ</h3>
<p>
	टैगोर ने एक दर्जन से अधिक उपन्यास लिखे, जिनमें मध्यम वर्गीय समाज का सजीव चित्रण मिलता है।</p>
<p>
	<strong>गोरा: </strong>यह उपन्यास ब्रिटिश कालीन भारत की समस्याओं, राष्ट्रीयता, मानवता और हिंदू-ब्रह्म समाज के वैचारिक द्वंद्व को दर्शाता है। यह एक ईसाई संतान की कहानी है जो हिंदू परिवार में पलती है और सत्य जानने के बाद मानवीय संबंधों को सर्वोपरि मानने लगती है।</p>
<p>
	<strong>अन्य प्रमुख उपन्यास:</strong> &#39;चोखेर बाली&#39; और &#39;घरे बाहिरे&#39;।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	10. काव्य, संगीत और चित्रकला</h3>
<p>
	<strong>काव्य प्रतिभा: </strong>उन्होंने अपनी पहली कविता मात्र 8 वर्ष की आयु में लिखी थी। उनकी कविताओं में प्रकृति से लेकर अध्यात्मवाद के विभिन्न रंग मिलते हैं।</p>
<p>
	<strong>रवींद्र संगीत: </strong>उन्होंने 2000 से अधिक गीतों की रचना की, जो आज बांग्ला संस्कृति का अटूट हिस्सा हैं। उनके गीत हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत से प्रभावित और मानवीय भावनाओं से ओतप्रोत हैं।</p>
<p>
	<strong>चित्रकला: </strong>जीवन के अंतिम पड़ाव में उनकी सृजनात्मकता चित्रकला के रूप में भी प्रकट हुई।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	11. नाटकों में सांकेतिकता और बहुमुखी लेखन</h3>
<p>
	टैगोर के नाटक अपनी सांकेतिकता के लिए विशेष रूप से पहचाने जाते हैं। साहित्य की ऐसी कोई विधा नहीं है—चाहे वह कविता हो, कहानी, उपन्यास, नाटक या गीत—जिसमें उन्होंने अपनी सशक्त कलम का परिचय न दिया हो। उनकी रचनाओं के अंग्रेजी अनुवाद ने वैश्विक स्तर पर उनकी प्रतिभा को स्थापित किया।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	12. प्रारंभिक जीवन, यात्राएं और महाप्रयाण</h3>
<p>
	रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई, 1861 को कोलकाता के जोड़ासाँको में हुआ था। उन्होंने केवल 16 वर्ष की आयु में अपनी पहली लघुकथा प्रकाशित की। उन्होंने अमेरिका, ब्रिटेन, जापान और चीन जैसे कई देशों की यात्राएं कीं और भारतीय संस्कृति का संदेश फैलाया। मानवता की सेवा और साहित्य साधना करते हुए 7 अगस्त, 1941 को इस महान विभूति का देहावसान हो गया।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 08 May 2026 14:47:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 08 May 2026 17:16:33 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[inspiring personality]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[साहित्य का 'नोबेल' पाने वाले पहले एशियाई: आखिर क्यों रवींद्रनाथ टैगोर ने लौटा दी थी अंग्रेजों की दी हुई 'नाइटहुड' की उपाधि?]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/hindi-literature-articles/rabindranath-tagore-birth-anniversary-2026-126050500042_1.html</link>
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      <description><![CDATA[Rabindranath Tagore biography: एक बहुआयामी प्रतिभा के धनी रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, 7 मई 1861 को हुआ था, जबकि बंगाली कैलेंडर के अनुसार 9 मई को मनाया जा रहा है। उनके पिता, महाराजा देवेंद्रनाथ टैगोर, एक धार्मिक और दार्शनिक ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="इमेज में हिन्दी के साहित्यकार और गीतांजलि काव्य रचना हेतु नोबेल पुरस्कार से सम्मानित तथा बहुआयामी प्रतिभा के धनी रवींद्रनाथ टैगौर का चित्र" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/05/full/1777981246-7183.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Rabindranath Tagore: </strong>एक बहुआयामी प्रतिभा के धनी रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, 7 मई 1861 को कोलकाता के प्रतिष्ठित &#39;जोड़ासांको ठाकुरबाड़ी&#39; (पश्चिम बंगाल, भारत) में हुआ था, जबकि बंगाली कैलेंडर के अनुसार 9 मई को मनाया जा रहा है।  वे एक प्रतिष्ठित बंगाली परिवार से थे, जिनके घर का वातावरण कला, साहित्य और संस्कृति से भरपूर था। रवींद्रनाथ टैगोर केवल एक कवि नहीं थे। वे एक दार्शनिक, चित्रकार, संगीतकार, नाटककार और शिक्षाविद भी थे। उन्होंने दुनिया को दिखाया कि कला और साहित्य की कोई सीमा नहीं होती।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	नोबेल पुरस्कार और विश्वव्यापी पहचान</h3>
<p>
	1913 में जब उनकी काव्य रचना &#39;गीतांजलि&#39; (Gitanjali) के लिए उन्हें साहित्य का नोबेल पुरस्कार मिला, तो वे यह सम्मान पाने वाले पहले गैर-यूरोपीय और पहले एशियाई बने। उनकी कविताओं में ईश्वर के प्रति समर्पण और प्रकृति के प्रति अगाध प्रेम झलकता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	दो देशों की आवाज़: राष्ट्रगान का निर्माण</h3>
<p>
	टैगोर दुनिया के इकलौते ऐसे कवि हैं, जिनकी रचनाएं दो अलग-अलग देशों का राष्ट्रगान बनीं। जो 24 जनवरी 1950 को भारत का राष्ट्रीय गान घोषित किया गया। इस गीत में भारत की विविधता, संस्कृति और एकता का सुन्दर चित्रण है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>भारत का राष्ट्रगान: &#39;जन गण मन&#39;</strong></p>
<p>
	<strong>बांग्लादेश का राष्ट्रगान: &#39;आमार शोनार बांग्ला&#39;</strong></p>
<p>
	(इतना ही नहीं, श्रीलंका के राष्ट्रगान की प्रेरणा भी टैगोर के विचारों से ही मिली मानी जाती है।)</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	शांतिनिकेतन: शिक्षा का नया सवेरा</h3>
<p>
	टैगोर किताबी ज्ञान से ज्यादा प्रकृति के सानिध्य में सीखने पर जोर देते थे। इसी सोच के साथ उन्होंने &#39;शांतिनिकेतन&#39; (विश्व भारती विश्वविद्यालय) की स्थापना की। यहां खुले आसमान के नीचे, पेड़ों की छांव में गुरु-शिष्य की परंपरा आज भी आधुनिक शिक्षा को एक नई दिशा देती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	देशभक्ति और स्वाभिमान</h3>
<p>
	टैगोर का हृदय जितना कोमल था, उनका स्वाभिमान उतना ही अडिग। 1919 में हुए भीषण जलियांवाला बाग हत्याकांड के विरोध में उन्होंने अंग्रेजों द्वारा दी गई &#39;नाइटहुड&#39; (सर) की उपाधि वापस लौटा दी थी। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि मानवता और देशप्रेम से बढ़कर कोई सम्मान नहीं है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	टैगोर का संगीत: &#39;रवींद्र संगीत&#39;</h3>
<p>
	उन्होंने लगभग 2,230 गीतों की रचना की, जिन्हें आज &#39;रवींद्र संगीत&#39; के नाम से जाना जाता है। बंगाल के हर घर में और दुनिया भर के बंगाली समुदाय के लिए ये गीत उनकी संस्कृति की धड़कन हैं। बता दें कि रवींद्र संगीत या टैगोर गीत, रवींद्रनाथ टैगोर की रचनात्मक प्रतिभा से उत्पन्न एक अनूठी संगीत शैली है। जिसमें भारतीय शास्त्रीय संगीत के साथ पश्चिमी संगीत और बंगाली लोक परंपराओं के तत्व शामिल हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	गुरुदेव का कालजयी संदेश</h3>
<p>
	टैगोर मानते थे कि "मनुष्य की सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है।" उन्होंने संकीर्ण राष्ट्रवाद के बजाय &#39;विश्व-मानव&#39; की कल्पना की, जहां पूरी दुनिया एक परिवार की तरह रहे।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	साहित्यिक विस्तार</h3>
<p>
	रवींद्रनाथ टैगोर को विश्व साहित्य में विशेष स्थान प्राप्त है। उन्होंने कविता, नाटक, कहानी, उपन्यास, गीत, और निबंधों की रचना की। उनका साहित्य केवल भारतीय नहीं, बल्कि वैश्विक संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। रवींद्रनाथ टैगोर की कहानियों जैसे &#39;काबुलीवाला&#39;, &#39;गोरा&#39; और &#39;पोस्टमास्टर&#39; आज भी विश्व साहित्य की श्रेष्ठ रचनाओं में गिनी जाती हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	टैगोर के जीवन से जुड़े 5 रोचक तथ्य:</h3>
<p>
	उपनाम- महात्मा गांधी ने उन्हें &#39;गुरुदेव&#39; की उपाधि दी थी।</p>
<p>
	टैगोर ने ही गांधी जी को &#39;महात्मा&#39; कहकर पुकारा था।</p>
<p>
	आइंस्टीन से मिलन- 1930 में टैगोर और महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन की मुलाकात हुई थी, जहां विज्ञान और धर्म पर लंबी चर्चा हुई।</p>
<p>
	चित्रकारी- उन्होंने 60 वर्ष की उम्र के बाद पेंटिंग शुरू की और करीब 3,000 चित्र बनाए।</p>
<p>
	अनमोल विचार: "प्रसन्न रहना बहुत सरल है, लेकिन सरल होना बहुत कठिन है।" - रवींद्रनाथ टैगोर</p>
<p>
	 </p>
<p>
	रवींद्रनाथ टैगोर ने 7 अगस्त 1941 को इस नश्वर संसार को छोड़ दिया था, लेकिन उनके विचार और उनकी रचनाएं आज भी करोड़ों लोगों के जीवन में रोशनी भर रही हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 08 May 2026 12:30:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 08 May 2026 16:32:54 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Hindi Literature Articles]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[आखिर कैसे आए ये चुनाव परिणाम]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/my-blog/how-did-these-election-results-come-about-126050800007_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/my-blog/how-did-these-election-results-come-about-126050800007_1.html</guid>
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      <description><![CDATA[वैसे तो असम में भी भाजपा की तीसरी बार लगातार विजय महत्वपूर्ण है पर ये दोनों घटनाएं ऐतिहासिक और युगांतरकारी हैं। बंगाल में एक तिहाई मुस्लिम मतदाताओं के बहुमत का खतरनाक तरीके से हर हाल में भाजपा को सत्ता में आने से रोकने और तृणमूल के समर्थन में ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="पांच राज्यों के चुनाव परिणाम संबंधी जानकारी देती तस्वीर" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/04/full/1777895645-9925.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="election results" /></p>
</p>
<p>
	पांच राज्यों के चुनाव परिणामों पर कोई एक सुसंबद्ध टिप्पणी संपूर्ण स्थितियों का विश्लेषण नहीं कर सकता। सारे राज्यों के राजनीतिक समीकरण और स्थानीय मुद्दे अलग-अलग थे तथा मतदाताओं ने उसी अनुसार मतदान किया। किंतु सबको मिलाकर एक तस्वीर बनाएं तो इसमें दो ऐतिहासिक युगांतरकारी परिणतियां हैं। एक, पश्चिम बंगाल में भाजपा की ऐसी विजय जो एक समय अकल्पनीय थी तथा तमिलनाडु में थलापति विजय की पार्टी टीवीके का चमत्कारिक प्रदर्शन। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	वैसे तो असम में भी भाजपा की तीसरी बार लगातार विजय महत्वपूर्ण है पर ये दोनों घटनाएं ऐतिहासिक और युगांतरकारी हैं। बंगाल में एक तिहाई मुस्लिम मतदाताओं के बहुमत का खतरनाक तरीके से हर हाल में भाजपा को सत्ता में आने से रोकने और तृणमूल के समर्थन में आक्रामकता से काम करने के बावजूद भाजपा की इतनी बढ़त सामान्य घटना नहीं है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	आम सोच यही थी कि ममता की शुरुआत ही 30 प्रतिशत मत और लगभग 65-70 सीटों से होती है जबकि भाजपा को शून्य से शुरुआत करनी होगी। वैसे असम में इससे ज्यादा मुस्लिम आबादी के बावजूद भाजपा ने जीत हासिल कर कई मिथकों को तोड़ा। पर असम और बंगाल की राजनीति और सत्ता के चरित्र में मौलिक अंतर है। ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में पूरी राजनीति और सत्ता का चरित्र ऐसा बना दिया था जिसमें किसी भी पार्टी के लिए उसको भेजना असंभव सी चुनौती थी। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	पिछले एक दशक से ज्यादा समय के चुनावों का एक पहलू हर जगह लागू होता है वह यह कि हिंदुत्व व अपनी संस्कृति‌, धर्म के प्रति हिंदुओं के पुनर्जागरण के कारण एक निश्चित वोट का आधार हर राज्य में निर्मित हो गया है और यह मत भाजपा से संतुष्ट असंतुष्ट या कुछ मायनो में नाराज होने के बावजूद वह हारे या जीते उसे या साथी दलों या उसकी अनुपस्थिति में दूसरे दलों को जाता है। स्वाभाविक ही इसके समानांतर प्रतिक्रिया में भाजपा विरोधी मतों का एक अंश भी उसे चुनौती देने वाले प्रमुख दल या उसके साथियों के खाते चला जाता है। यह प्रवृत्ति पांचो राज्यों में रही है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	आप देखेंगे कि पांचो राज्यों के परिणाम निर्धारण में इनकी भूमिका है। भाजपा स्थानीय-क्षेत्रिय मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए भी चुनावों को मतदाताओं को सीधे अपील करने वाले राष्ट्रीय विषयों के साथ संबद्ध करती है। भाजपा ने राष्ट्रीय सुरक्षा और जनसांख्यिकी को बंगाल एवं असम दोनों जगह प्रमुख मुद्दे के रूप स्थापित कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा महिलाओं के उत्थान संबंधी कार्यों तथा नारी शक्ति वंदन अधिनियम यानी महिला आरक्षण को लागू करने की संसदीय पहल ने भी चुनावी माहौल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	वस्तुत: बंगाल के परिणाम ने उन सबको चौंकाया है जो जमीनी वास्तविकता और 2018 से मतदाताओं मुख्यतः हिन्दुओं के बड़े वर्ग के अंदर बदलाव की छटपटाहट को महसूस नहीं कर रहे थे। बंगाल में सुरक्षित वातावरण में शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव करा पाना चुनाव आयोग, न्यायिक संस्थाएं और पूरे देश के लिए चुनौती बन गई थी। तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी के नेतृत्व में सत्ता और पूरी राजनीति को निहित स्वार्थी तत्वों की गिरफ्त में दिए जाने से बंगाल की संस्कृति चुनावों को हर हाल में अपने पक्ष में करने की हो चुकी है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	कट्टरपंथी तत्वों को प्रत्यक्ष-परोक्ष संरक्षण और प्रोत्साहन के कारण पूरा प्रदेश हमेशा सांप्रदायिक भय और तनाव की स्थिति में रहा। मतदाताओं की इच्छा नहीं तृणमूल नेताओं की चाहत से आप मतदान करिए या चुपचाप घर बैठिये अन्यथा हिंसा, आगजनी, दमन, उत्पीड़न और संबंधित स्थान या प्रदेश से पलायन का दंश झेलिये। साइलेंट रीगिंग बंगाल की मुख्य चुनावी प्रवृत्ति रह रही है। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	पहले इसी रास्ते वाम मोर्चा ने लगातार जीत सुनिश्चित किया और उसके विरुद्ध लंबा संघर्ष करते-करते ममता बनर्जी ने भी अपनी पूरी पार्टी को उससे ज्यादा हिंसक और दमनकारी तत्वों में परिणत कर दिया। 2019 के लोकसभा चुनाव परिणाम के बाद तृणमूल की सत्ता और राजनीति विरोधियों के विरुद्ध ज्यादा खूंखार हुई अन्यथा 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव परिणाम वैसे नहीं आते।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	पलायन या हिंसा की सर्वाधिक शिकार महिलाएं होतीं हैं। पुरुषों के मुकाबले 1.5 महिलाओं ने ज्यादा मतदान किया महिला होने के बावजूद ममता बनर्जी के विरुद्ध इनका बहुत बड़ा मत भाजपा को गया है। भाजपा पर ध्रुवीकरण का आरोप लगाकर सतही विश्लेषण करने वाले विचार करें कि भद्र लोक माने जाने वाले बंगाल के हिंदुओं ने ममता बनर्जी की सत्ता संस्कृति के विरुद्ध विद्रोह कर भाजपा को मत दिया तो क्या इसे केवल ध्रुवीकरण कहेंगे और ऐसा हुआ भी तो क्यों?</p>
<p>
	 </p>
<p>
	बंगाल में राजनीतिक संघर्ष वास्तविक लोकतंत्र की पुनर्स्थापना तथा सत्ता संस्कृति को सर्वसमावेशी बनाने का था। यह जिम्मेवारी मुख्यत: प्रदेश के गैर मुस्लिमों यानी हिंदुओं को ही लेना था। धीरे-धीरे हिंदुओं के बहुमत के अंदर अगर यह भाव पैदा हुआ कि इस सरकार के रहते हमारा अस्तित्व संकट में है तो इसके कारण अत्यंत गहरे हैं। बांग्लादेश की घटनाओं ने इस मनोविज्ञान को सशक्त किया कि हमें कुछ हद तक जान की बाजी लगानी होगी। हिंदू आबादी में लगभग 75 प्रतिशत ने भाजपा के पक्ष में वोट दिया। यह बहुत बड़ी बात है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	तमाम विरोधों के बावजूद एसआईआर में 90 लाख से ज्यादा मृत, संदिग्ध और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने के कारण फर्जी मतदाताओं का खेल खत्म हो गया। सवा 2 लाख केंद्रीय बलों की उपस्थिति, चुनाव के बाद भी सुरक्षा बलों के बने रहने की घोषणा, दूसरे राज्यों के अधिकारियों को चुनाव पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्ति, प्रदेश के अधिकारियों का व्यापक पैमाने पर स्थानांतरण या चुनाव प्रक्रिया तक कार्य मुक्ति तथा चुनावी हिंसा वाले चिन्हित व्यक्तित्वों के विरुद्ध कार्रवाई व सतर्क दृष्टि आदि ने भय व संशयग्रस्त मतदाताओं के अंदर सुरक्षा को लेकर आश्वस्त किया जिससे चुनावी वातावरण में आमूल परिवर्तन आया। भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में पहले दिन से यह विश्वास दिलाने की रणनीति अपनाई कि हम सत्ता में आ रहे हैं तथा किसी के साथ अन्याय हुआ तो पूरी पार्टी खड़ी रहेगी। इन सबका सम्मिलित परिणाम है असंभव सा लगने वाला सत्ता परिवर्तन। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	असम में पहले दिन से स्पष्ट था कि  वह भाजपा को बड़ी चुनौती नहीं है। किंतु गौरव गोगोई भी जोरहाट से हार जाएंगे इसकी कल्पना कांग्रेस को नहीं रही होगी। कांग्रेस ने शुरुआत देर से की तथा राहुल गांधी एवं प्रियंका वाड्रा व उनके रणनीतिकारों के कारण टिकट बंटवारे तक नेता पार्टी छोड़कर जाते रहे। हिमंतो विस्वासरमा के पूर्व कांग्रेसी होने के कारण उन नेताओं का सीधा संपर्क भी रहा इसलिए उन्हें भाजपा में शामिल होने में समस्या नहीं आई। दूसरे, भाजपा ने पिछले लंबे समय से असम अस्मिता व आसामी संस्कृति को भारत के व्यापक हिंदुत्व संस्कृति और राष्ट्रभाव से जोड़ने में सफलता पाई है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	मुगलों से युद्ध करने वाले लचित बरफ़ुकन से लेकर महाराज शंकर देव को जिस तरह भाजपा ने प्रस्तुत किया एवं जनजाति गौरव को निचले स्तर तक ले गए उन सबसे सामाजिक सांस्कृतिक पुनर्जागरण हुआ है। सरकार की आर्थिक, सामाजिक और सुरक्षा नीति ने उसे बल दिया है। हिमांतो की छवि देश में भले घुसपैठी और मुस्लिम विरोधी बनाई गई किंतु इसके साथ असम में उन्होंने बच्चों व युवाओं के मामा और महिलाओं के भाई के रूप में भी छवि बनई है। गौरव गोगोई के प्रति अहोम समुदाय का आकर्षण तो था किंतु राज्यव्यापी लोकप्रियता हिंमातों की ही थी। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	जमीनी कार्यों उदाहरण के लिए तीन लाख चाय बागान मजदूरों के परिवारों को जमीन का पट्टा मिलना महत्वपूर्ण घटना थी। अंग्रेज उन्हें काम पर ले गए, उन्हें जमीन का पट्टा नहीं दिया। असम में घुसपैठ लंबे समय से मुद्दा रहा है और इसके आधार पर वहां 80 के दशक में छात्र नेताओं की सरकार बनी। तो यह मुद्दा समाप्त नहीं हो सकता और बाकी पार्टियों ने इसका उपहास उड़ाया और भाजपा आज भी इस पर कायम है। इन सबका असर हुआ है और भाजपा तीसरी बार सत्ता बनाए रखने में कामयाब रही।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	तमिलनाडु के परिणामों की तो शायद ही किसी ने कल्पना की होगी। थलापति विजय की टीवीके या तमिलगा वेत्री कझगम दोनों मुख्य गठबंधन द्रमुक नेतृत्व वाला आईडिया तथा अन्य धार्मिक भाजपा गठबंधन नंबर एक की पार्टी बन जाएगी इसकी भी कल्पना किसी को नहीं थी। दरअसल, द्रमुक के विरुद्ध सत्ता विरोधी रुझान जमीन पर दिख रहा था।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	इसी कारण एमके स्टालिन ने एक तिहाई विधायकों का टिकट काटा। वहां जहरीली शराब पीने से मृत्यु की घटनाएं लगातार हुई और पिछले चुनाव में उन्होंने महिलाओं के समक्ष शराबबंदी लागू करने का वादा किया था। लागू नहीं करने से महिलाओं में नाराजगी थी। सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप भी थे और दो मंत्री जेल जा चुके थे। उन्होंने तमिलवाद और तमिल भाषा को लेकर आक्रामक राजनीति की। पूरी पार्टी और कांग्रेस को छोड़कर गठबंधन सनातन और हिंदुत्व के विरुद्ध जहर उगलने लगी।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	विधानसभा में अलग से तमिल राष्ट्रगान तक की परंपरा शुरू कर दी। सब अपनी सत्ता बचाने की ही कवायदें थीं। आम लोगों को इस तरह का अतिवाद स्वीकार नहीं था और द्रमुक को इसका आभास हुआ। चुनाव आते-आते सनातन विरोधी वक्तव्य बंद हो गए और उदयनिधि स्टालिन जो एक समय सनातन के समूल नाश की बात करते थे, मंदिर-मंदिर घूमने लगे। अन्नाद्रमुक और भाजपा गठबंधन यद्यपि बेहतर चुनाव लड़ी। सत्ता विरोधी जन असंतोष और लोगों की आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करने में सफल नहीं रहे और इसका लाभ विजय को मिला। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	वैसे भी भाजपा वहां केवल 27 सीटों पर लड़ रही थी। विजय फिल्मी करियर छोड़कर तमिलनाडु की राजनीति बदलने की घोषणा के साथ आए और 2024 में पार्टी बनाने के बाद लगातार सक्रिय रहे। यद्यपि उन्होंने दोनों पक्षों का मत काटा किंतु द्रमुक को ज्यादा क्षति पहुंचाई। ईसाई होने के कारण लगभग चार प्रतिशत ईसाइयों के मत का बड़ा हिस्सा उनके खाते आया और मुस्लिम मतों का भी। यहां से तमिलनाडु की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत हो रही है और एमजी रामचंद्रन के बाद विजय दूसरे बड़े फिल्म स्टार होंगे जिनके राजनीति में लंबे समय तक रहने की संभावना है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	केरल में प्रति पांच-छ वर्ष पर सरकार बदलती रही है। किंतु राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के दुर्बल व दिशाहीन होने के कारण प्रदेश में भी पार्टी प्रभावित हुई और माकपा के बुजुर्ग पी विजयन के नेतृत्व में वाम मोर्चा 2021 में भी दूसरी बार सत्ता कायम रखने में कामयाब हुई थी। भाजपा ने वहां खूब काम किया,  जमीनी मुद्दे उठाए, धार्मिक प्रवृत्ति को देखते हुए लोगों की इच्छा को वाणी भी दी। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	इन सबके परिणामस्वरूप उसके जनाधार में उछाल आया, 2024 में त्रिशूर लोकसभा सीट पर जीत तथा तिरुवनंतपुरम के नगर निगम पर आधिपत्य इसका प्रमाण है। कुछ वर्ष पहले तक इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। किंतु अभी प्रदेश में व्यापक जनाधार और चुनावी सफलता की दृष्टि से यह कम है। हालांकि भाजपा के कारण मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण कांग्रेस नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा या यूडीएफ के पक्ष में हुआ। </p>
<p>
	 </p>
<p>
	तो कुल मिलाकर इन परिणामों का भी निष्कर्ष यही है कि राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य 2024 के लोकसभा चुनाव के समय से काफी बदल चुका है। भारत के लोगों के लिए भाजपा अभी भी व्यक्तिगत-आंतरिक व राष्ट्रीय सुरक्षा, हिंदुत्व अभिप्रेरित व्यापक राष्ट्रवाद तथा, क्षेत्रीय अस्मिता को सकारात्मक महत्व देने वाली, आर्थिक विकास के प्रति प्रतिबद्ध, विरासत के संरक्षण तथा  सामाजिक न्याय व लैंगिक समानता को सही परिप्रेक्ष्य में जमीन पर उतरने वाली पार्टी के रूप में मुख्य विकल्प बनी हुई है।<br />
	<br />
	प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्वमें 2014 लोकसभा चुनाव परिणाम से यह मिथक टूटा था कि बगैर मुस्लिम मत के केंद्र में किसी पार्टी को अकेले बहुमत नहीं मिल सकता। बंगाल के चुनाव परिणाम ने इस मिथक को अंतिम बार ध्वस्त कर दिया।<br />
	<br />
	<p>
		(इस लेख में व्यक्त विचार/विश्लेषण लेखक के निजी हैं। &#39;वेबदुनिया&#39; इसकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं लेती है।)</p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 08 May 2026 09:40:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 08 May 2026 10:29:45 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[My Blog]]></category>
      <authorname>अवधेश कुमार</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[World Red Cross Day: मानवता और सेवा का प्रतीक विश्व रेडक्रॉस दिवस, जानें 2026 की थीम]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/important-days-and-dates/world-red-cross-day-2026-126050600048_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/06/thumb/1_1/1778064625-9514.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Red Cross Day 8th May: विश्वभर में मानवता की सेवा के लिए समर्पित 'विश्व रेडक्रॉस दिवस' हर साल 8 मई को मनाया जाता है। यह दिन उन लाखों स्वयंसेवकों के प्रति आभार व्यक्त करने का है जो बिना किसी स्वार्थ के आपदा, युद्ध और महामारी के समय लोगों की जान बचाते ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p>
		<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
			<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
				<img align="center" alt="Picture giving the message of blood donation, health awareness campaign and humanity through hands on World Red Cross Day" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/06/full/1778064625-9514.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
		</p>
	</p>
	<p>
		<strong>Importance of Red Cross Day: </strong>विश्व रेडक्रॉस दिवस हर साल 8 मई को मनाया जाता है। यह दिन उस महान व्यक्ति हेनरी ड्यूनां (Henry Dunant) की याद में मनाया जाता है, जिन्होंने रेडक्रॉस आंदोलन की स्थापना की। 8 मई को उनके जन्मदिन के अवसर पर यह दिवस मनाया जाता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		रेडक्रॉस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य मानवता की सेवा करना, युद्ध और आपदा के समय घायल और जरूरतमंद लोगों की मदद करना और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में योगदान देना है। यह दिन न केवल सेवा और सहयोग की भावना को बढ़ावा देता है, बल्कि समाज में सहानुभूति, करुणा और एकता का संदेश भी देता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		इस अवसर पर रेडक्रॉस और रेडक्रेसेंट सोसाइटी विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करती है, जैसे कि रक्तदान शिविर, स्वास्थ्य जागरूकता अभियान और मानवीय सहायता कार्य। विश्व रेडक्रॉस दिवस हमें याद दिलाता है कि आपसी मदद और सहयोग से ही समाज में सच्ची मानवता का संचार हो सकता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		यहां इस विशेष दिन के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है:</h3>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		1. क्यों मनाया जाता है विश्व रेडक्रॉस दिवस?</h3>
	<p>
		यह दिन रेडक्रॉस की अंतरराष्ट्रीय समिति (ICRC) के संस्थापक जीन हेनरी डुनेंट (Henry Dunant) के जन्मदिन की याद में मनाया जाता है। डुनेंट का जन्म 8 मई 1828 को हुआ था।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>इतिहास: </strong>1859 में इटली के सोल्फेरिनो युद्ध की विभीषिका को देखकर डुनेंट का हृदय कांप उठा था। उन्होंने घायलों की मदद के लिए एक तटस्थ संस्था बनाने का विचार दिया, जिसके परिणामस्वरूप 1863 में रेडक्रॉस की स्थापना हुई।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>पहला नोबेल:</strong> हेनरी डुनेंट को उनकी मानवीय सेवाओं के लिए दुनिया का पहला नोबेल शांति पुरस्कार (1901) दिया गया था।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		2. विश्व रेडक्रॉस दिवस 2026 की थीम</h3>
	<p>
		वर्ष 2026 के लिए इस विशेष दिन की थीम <strong>&#39;मानवता को जीवित रखना&#39; (Keeping Humanity Alive) </strong>रखी गई है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>महत्व: </strong>यह थीम इस बात पर जोर देती है कि युद्ध, प्राकृतिक आपदा और कठिन समय में भी हमारी सबसे बड़ी शक्ति &#39;मानवता&#39; है। यह उन अग्रिम पंक्ति के नायकों (Frontline Heroes) को समर्पित है जो दूसरों के गौरव और जीवन की रक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं।</p>
	<h3>
		 </h3>
	<h3>
		3. रेडक्रॉस के 7 आधारभूत सिद्धांत</h3>
	<p>
		यह संस्था सात मुख्य सिद्धांतों पर काम करती है, जो किसी भी देश की राजनीति या धर्म से ऊपर हैं:</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>मानवता : </strong>पीड़ा को कम करना और जीवन की रक्षा करना।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>निष्पक्षता : </strong>जाति, धर्म या राष्ट्रीयता के आधार पर भेदभाव न करना।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>तटस्थता : </strong>विवादों में किसी भी पक्ष का साथ न देना।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>स्वतंत्रता : </strong>सरकारों से स्वतंत्र रहकर मानवीय नियमों का पालन करना।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>स्वैच्छिक सेवा : </strong>बिना किसी लाभ के सेवा करना।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>एकता : </strong>एक देश में केवल एक ही रेडक्रॉस सोसाइटी हो सकती है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>सार्वभौमिकता : </strong>यह एक वैश्विक आंदोलन है जहाँ सभी देशों की संस्थाएं समान हैं।</p>
	<p>
		 </p>
	<h3>
		4. यह दिन कैसे मनाया जाता है?</h3>
	<p>
		<strong>रक्तदान शिविर: </strong>दुनिया भर में बड़े स्तर पर ब्लड डोनेशन कैंप लगाए जाते हैं।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>सम्मान समारोह: </strong>उत्कृष्ट सेवा देने वाले वॉलिंटियर्स को सम्मानित किया जाता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>जागरूकता अभियान: </strong>स्कूलों और कॉलेजों में प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) और सामाजिक जिम्मेदारी पर सेमिनार आयोजित किए जाते हैं।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>एक रोचक तथ्य: </strong>मुस्लिम देशों में इस संस्था को &#39;रेड क्रीसेंट&#39; (Red Crescent) कहा जाता है और इसका प्रतीक चिन्ह &#39;लाल अर्धचंद्र&#39; होता है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		<strong>निष्कर्ष: </strong>विश्व रेडक्रॉस दिवस हमें याद दिलाता है कि भले ही दुनिया तकनीक और सीमाओं में बँट गई हो, लेकिन एक इंसान का दूसरे इंसान के काम आना ही सबसे बड़ा धर्म है।</p>
	<p>
		 </p>
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/hindi-literature-articles/rabindranath-tagore-birth-anniversary-2026-126050500042_1.html" target="_blank">Rabindranath Tagore Jayanti: रवींद्रनाथ टैगोर: साहित्य, संगीत और मानवता के महाशिल्पी</a></strong></p>
</p>
<br />]]></content:encoded>
      <pubDate>Fri, 08 May 2026 09:20:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Fri, 08 May 2026 09:43:13 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Important Days and Dates]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[हंता वायरस क्या है? लक्षण, फैलने का तरीका और बचाव के जरूरी उपाय]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/health-news/hantavirus-symptoms-prevention-hindi-126050600059_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/health-news/hantavirus-symptoms-prevention-hindi-126050600059_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/06/thumb/1_1/1778070309-9648.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/06/thumb/1_1/1778070309-9648.jpg</image>
      <description><![CDATA[Hantavirus: 5 मई को, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा कि उसे एक लग्जरी क्रूज जहाज पर बहुत करीबी संपर्क में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में हंता वायरस के संचरण के कई मामलों का संदेह है, जिसमें 3 मौतों सहित 7 पुष्ट या संदिग्ध मामले दर्ज किए ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="Hanta virus" class="imgCont" height="800" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/06/full/1778070309-9648.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="Hanta virus" width="1200" /></p>
	</p>
	Hantavirus: 5 मई को, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा कि उसे एक लग्जरी क्रूज जहाज पर बहुत करीबी संपर्क में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में हंता वायरस के संचरण के कई मामलों का संदेह है, जिसमें 3 मौतों सहित 7 पुष्ट या संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं। यह खबर वायरल होने के बाद लोग हंता वायरस के बारे में सर्च करने लगे हैं। चलिए जानते हैं कि यह वायरस क्या है, कैसे फैलता और क्या है इससे बचने के उपाय। </p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/healthy-food/summer-health-tips-n-drinks-126040700047_1.html" target="_blank">Summer health tips: लू और डिहाइड्रेशन से बचाने वाले 10 घरेलू पेय और हेल्थ टिप्स</a></strong></p>
</p>
<h3>
	क्या है हंता वायरस?</h3>
<p>
	हंता या हंटा वायरस मुख्य रूप से चूहों और गिलहरियों के जरिए फैलने वाला एक गंभीर वायरस है। यह कोई नई बीमारी नहीं है, लेकिन समय-समय पर इसके मामले सामने आते रहते हैं। यह वायरस इंसान के फेफड़ों और गुर्दों पर सीधा हमला करता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. यह कैसे फैलता है? (Sancharan)</h3>
<p>
	यह वायरस हवा के जरिए एक इंसान से दूसरे इंसान में नहीं फैलता (कोविड-19 की तरह)। इसके फैलने के मुख्य तरीके ये हैं:</p>
<p>
	<strong>सांस के जरिए: </strong>जब चूहों का सूखा मल, मूत्र या लार हवा में बारीक कणों के रूप में मिल जाते हैं और इंसान उस हवा में सांस लेता है।</p>
<p>
	<strong>सीधा संपर्क: </strong>संक्रमित चूहे के मल-मूत्र को छूने के बाद अपनी नाक, मुंह या आंखों को छूना।</p>
<p>
	<strong>काटना: </strong>यदि कोई संक्रमित चूहा इंसान को काट ले (यह बहुत दुर्लभ है)।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/regional-hindi-news/bengaluru-zombie-drug-rumor-viral-video-police-fact-check-126041000066_1.html" target="_blank">What is zombie drug : आखिर क्या है भारत में जॉम्बी वायरस का सच, युवाओं के वायरल वीडियोज से मचा हड़कंप</a></strong></p>
</p>
<h3>
	2. मुख्य लक्षण (Symptoms)</h3>
<p>
	इसके लक्षण दिखने में 1 से 8 हफ़्तों का समय लग सकता है। इसे दो चरणों में समझा जा सकता है:</p>
<p>
	<strong>शुरुआती लक्षण (फ्लू जैसे): </strong>बुखार, अत्यधिक थकान, मांसपेशियों में दर्द (विशेषकर कूल्हों, पीठ और कंधों में), सिरदर्द, चक्कर आना और पेट दर्द।</p>
<p>
	<strong>गंभीर लक्षण (फेफड़ों पर असर): </strong>4-10 दिनों के बाद फेफड़ों में पानी भर जाना, सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई, तेज खांसी और सीने में जकड़न। इसे &#39;हंता वायरस पल्मोनरी सिंड्रोम&#39; (HPS) कहा जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. हंता वायरस के दो मुख्य रूप</h3>
<p>
	<strong>HPS (Hantavirus Pulmonary Syndrome): </strong>यह मुख्य रूप से अमेरिका में पाया जाता है और फेफड़ों को प्रभावित करता है। इसकी मृत्यु दर लगभग 38% है।</p>
<p>
	<strong>HFRS (Hemorrhagic Fever with Renal Syndrome): </strong>यह मुख्य रूप से यूरोप और एशिया में पाया जाता है और यह गुर्दों (Kidneys) को प्रभावित करता है।</p>
<p>
	<p>
		<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/iran-israel-war-news/iran-us-war-putin-warning-global-impact-covid-like-crisis-middle-east-tensions-126032600072_1.html" target="_blank">कोरोना वायरस महामारी से भी बदतर होंगे ईरान-अमेरिका युद्‍ध के परिणाम, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चेतावनी में क्या कहा</a></strong></p>
</p>
<h3>
	4. बचाव के उपाय (Prevention)</h3>
<p>
	हंता वायरस से बचने का सबसे प्रभावी तरीका चूहों से दूरी बनाए रखना है:</p>
<p>
	<strong>घर की सफाई: </strong>चूहों के छिपने की जगहों को सील करें और घर में साफ-सफाई रखें।</p>
<p>
	<strong>सफाई का तरीका: </strong>चूहों के मल-मूत्र वाली जगह पर सीधी झाड़ू न लगाएं (इससे धूल उड़ती है)। सफाई से पहले वहां कीटाणुनाशक (Disinfectant) या ब्लीच का छिड़काव करें और मास्क पहनें।</p>
<p>
	<strong>भोजन की सुरक्षा: </strong>अपने खाने-पीने की चीजों को ढककर रखें ताकि चूहे उन तक न पहुंच सकें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>महत्वपूर्ण बात: </strong>अच्छी खबर यह है कि हंता वायरस आम तौर पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है, इसलिए इससे घबराने की जरूरत नहीं है, बस सावधानी जरूरी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) इस बात पर ज़ोर देता है कि मनुष्यों से मनुष्यों में संक्रमण होना बहुत दुर्लभ है। एजेंसी यह भी पुष्टि करती है कि आम जनता के लिए जोखिम कम है, क्योंकि हंतावायरस मुख्य रूप से कृन्तकों से मनुष्यों में फैलता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का अनुमान है कि दुनिया भर में हर साल हंतावायरस के 10,000 से 100,000 मामले दर्ज किए जाते हैं। अर्जेंटीना अमेरिका महाद्वीप के उन देशों में से एक है जहां सबसे अधिक मामले हैं, और यहां मृत्यु दर लगभग 32% है, जो वैश्विक औसत से अधिक है।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Wed, 06 May 2026 17:49:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Wed, 06 May 2026 17:58:04 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[health news]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Vastu tips: क्या आपका बिजनेस स्टक महसूस कर रहा है? तो अपनाएं ये 10 टिप्स और देखें मुनाफे का जादू]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/vastu-fengshui/vastu-remedies-for-business-success-126050500015_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/vastu-fengshui/vastu-remedies-for-business-success-126050500015_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/05/thumb/1_1/1777958237-174.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/05/thumb/1_1/1777958237-174.jpg</image>
      <description><![CDATA[Business growth Vastu tips: बिजनेस या कारोबार में कड़ी मेहनत के साथ-साथ सही ऊर्जा का होना भी बहुत जरूरी है। कई बार सब कुछ सही होने के बाद भी तरक्की रुक जाती है, जिसे वास्तु की मदद से ठीक किया जा सकता है। आइए यहां जानते हैं बिजनेस के लिए सही वास्तु ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="तस्वीर में बिजनेस या ऑफिस को ऊंचाइयों पर ले जाने संबंधी कैसे करें सही वास्तु का चयन। साथ ही बॉस या मालिक की ऑफिस में बैठने की सही दिशा दर्शाता चित्र" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/05/full/1777958237-174.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>Business ideas 2026: </strong>आज के समय में व्यापार और व्यवसाय केवल मेहनत से नहीं, बल्कि स्मार्ट रणनीति, सही दिशा और सकारात्मक ऊर्जा से भी चलता है। हर व्यवसायी का लक्ष्य होता है- मुनाफा बढ़ाना, ग्राहक संतुष्टि और ऑफिस का वातावरण सुधारना। चाहे वो घर से बिजनेस कर रहा हो, या शॉप से... ऐसे में वास्तु और डिज़ाइन का महत्व बढ़ जाता है। वास्तु शास्त्र केवल पुराने नियम नहीं बल्कि आधुनिक ऑफिस और व्यवसाय के लिए सकारात्मक ऊर्जा और वित्तीय सफलता लाने का विज्ञान है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vastu-fengshui/how-to-attract-positive-energy-from-main-door-126032500007_1.html" target="_blank">Main Door Vastu: मुख्य दरवाजे पर भूलकर भी न लगाएं ऐसी तस्वीरें, घर में आती है बदहाली</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<p>
	सही तरीके से ऑफिस की व्यवस्था, डिज़ाइन, और डिजिटल मार्केटिंग की रणनीति आपके व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	यहां बिजनेस में मुनाफा और सफलता पाने के लिए 10 अचूक वास्तु उपाय दिए गए हैं:</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	1. ऑफिस में बैठने की दिशा</h3>
<p>
	बिजनेस के मालिक या बॉस को हमेशा ऑफिस के दक्षिण-पश्चिम (South-West) कोने में बैठना चाहिए। बैठते समय आपका चेहरा उत्तर (North) या पूर्व (East) दिशा की ओर होना चाहिए। यह स्थिति नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति को बढ़ाती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	2. मुख्य द्वार को रखें बाधा मुक्त</h3>
<p>
	व्यापारिक संस्थान का मुख्य द्वार हमेशा साफ-सुथरा और सजा हुआ होना चाहिए। द्वार के सामने कोई खंभा, पेड़ या गड्ढा नहीं होना चाहिए, वास्तु के अनुसार इसे द्वार वेध माना जाता है, जो सकारात्मक ऊर्जा और ग्राहकों को आने से रोकता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. भारी फर्नीचर की सही जगह</h3>
<p>
	ऑफिस या दुकान में भारी अलमारियां, शोकेस या भारी स्टॉक हमेशा दक्षिण (South) या पश्चिम (West) दीवारों के साथ रखना चाहिए। उत्तर और पूर्व दिशा को जितना हो सके खाली और हल्का रखें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. पानी की सही दिशा</h3>
<p>
	ऑफिस में पीने का पानी या छोटा वाटर फाउंटेन उत्तर-पूर्व (North-East) दिशा में रखें। बहता हुआ पानी धन के प्रवाह (Cash Flow) को सुचारू बनाए रखता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. कैश काउंटर का वास्तु</h3>
<p>
	दुकान या ऑफिस का कैश बॉक्स/ तिजोरी इस तरह रखें कि वह उत्तर दिशा की ओर खुले। उत्तर दिशा धन के देवता कुबेर की दिशा मानी जाती है। ध्यान रहे कि कैश बॉक्स कभी खाली न रहे।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	6. रोशनी का महत्व</h3>
<p>
	ऑफिस के केंद्र यानी ब्रह्मस्थान में पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए। प्राकृतिक रोशनी सबसे अच्छी है, लेकिन अगर खिड़की नहीं है, तो वहां चमकदार लाइट्स लगाएं। अंधेरा कोना बिजनेस में सुस्ती और मंदी लाता है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vastu-fengshui/vastu-defects-signs-126042300043_1.html" target="_blank">Vastu Tips for Home: कैसे पता करें कि घर में वास्तु दोष है? जानें 13 काम की बातें</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	7. इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जगह</h3>
<p>
	कंप्यूटर, सर्वर, प्रिंटर या बिजली के मेन बोर्ड को हमेशा दक्षिण-पूर्व (South-East) यानी आग्नेय कोण में रखें। यह अग्नि की दिशा है, जो मशीनों को खराब होने से बचाती है और कार्यक्षमता बढ़ाती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	8. ईशान कोण में मंदिर</h3>
<p>
	ऑफिस में छोटा सा मंदिर या इष्ट देव की तस्वीर हमेशा उत्तर-पूर्व (North-East) कोने में लगाएं। यहां रोजाना सुबह दीया या अगरबत्ती जलाने से व्यापार में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	9. स्वागत कक्ष (Reception)</h3>
<p>
	ऑफिस में रिसेप्शन हमेशा उत्तर-पूर्व या पूर्व दिशा में होना चाहिए। रिसेप्शनिस्ट का चेहरा उत्तर या पूर्व की ओर हो, ताकि आने वाले ग्राहकों पर सकारात्मक प्रभाव पड़े।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	10. रंगों का चयन</h3>
<p>
	बिजनेस में तरक्की के लिए ऑफिस की दीवारों पर क्रीम, सफेद, हल्का नीला या हरा रंग करवाएं। लाल या गहरे काले रंगों से बचें, क्योंकि ये आक्रामकता और तनाव पैदा कर सकते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/vastu-fengshui/vastu-tips-for-rented-house-126050100005_1.html" target="_blank">Vastu tips: किराए के घर में रह रहे हैं? तो जान लें ये 8 वास्तु टिप्स, जो बदल देंगे आपकी किस्मत</a></strong></p>
<p>
	 </p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 05 May 2026 11:02:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 05 May 2026 11:33:13 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Vastu Fengshui]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया धर्म-ज्योतिष टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[cold water: ज्यादा ठंडा पानी पीना सही है या गलत? जानें सच]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/health-care/cold-water-drinking-benefits-and-risks-126042700018_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/health-care/cold-water-drinking-benefits-and-risks-126042700018_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/27/thumb/1_1/1777271048-7785.jpg"/>
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      <description><![CDATA[summer season health tips: गर्मियों में चिलचिलाती धूप से आते ही फ्रिज का बर्फ जैसा ठंडा पानी पीना स्वर्ग जैसा अहसास देता है, लेकिन क्या यह आपकी सेहत के लिए सही है? आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही 'अत्यधिक ठंडे पानी' को लेकर कुछ चेतावनी देते हैं। ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="ठंडा पानी पीना अच्छा है या बुरा" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-04/27/full/1777271048-7785.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="cold water" /></p>
</p>
<p>
	<strong>thanda paanee peena achchha hai ya bura:</strong> गर्मियों का मौसम हो या धूप में बाहर जाना, अक्सर हम ठंडा पानी पीने की आदत रखते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि ठंडा पानी पीना हमेशा सही नहीं होता? कई लोग फ्रिज का ठंडा पानी तुरंत पीने से बचते हैं, जबकि कुछ इसे गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने का सबसे अच्छा तरीका मानते हैं।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/healthy-food/summer-health-tips-n-drinks-126040700047_1.html" target="_blank">Summer health tips: लू और डिहाइड्रेशन से बचाने वाले 10 घरेलू पेय और हेल्थ टिप्स</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	तो सवाल यह उठता है– ठंडा पानी पीना सही है या गलत? इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे।</h3>
<p>
	 </p>
<h3>
	क्यों गलत है ज्यादा ठंडा पानी?</h3>
<h3>
	पाचन में बाधा:</h3>
<p>
	हमारा शरीर भोजन को पचाने के लिए एक निश्चित तापमान (लगभग 37°C) बनाए रखता है। जब हम बर्फ जैसा पानी पीते हैं, तो शरीर को उस पानी को गर्म करने के लिए अपनी ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है, जिससे पाचन प्रक्रिया धीमी हो जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	वेगस तंत्रिका पर असर:</h3>
<p>
	बहुत ठंडा पानी गले की &#39;वेगस नर्व&#39; को प्रभावित कर सकता है, जो शरीर के स्वायत्त कार्यों को नियंत्रित करती है। इससे हृदय गति कुछ समय के लिए कम हो सकती है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/sattu-a-boon-for-health-in-summer-126040900005_1.html" target="_blank">10 Health benefits of Sattu: सत्तू के सेवन से सेहत को मिलेंगे ये 10 फायदे</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	पोषक तत्वों का अवशोषण रुकना:</h3>
<p>
	ठंडा पानी पीने से रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिससे शरीर खाए गए भोजन से विटामिन और पोषक तत्वों को पूरी तरह सोख नहीं पाता।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	गले में संक्रमण और बलगम:</h3>
<p>
	ठंडा पानी गले में &#39;म्यूकस&#39; (बलगम) की परत बना सकता है, जिससे गले में खराश, टॉन्सिल और सांस की नली में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	दांतों के लिए नुकसानदेह:</h3>
<p>
	अगर आपके दांत संवेदनशील हैं, तो बहुत ठंडा पानी इनेमल को नुकसान पहुंचा सकता है और तेज झनझनाहट पैदा कर सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	क्या है सही तरीका?</h3>
<p>
	<strong>मटके का पानी: </strong>आयुर्वेद और विज्ञान दोनों मटके के पानी को सर्वश्रेष्ठ मानते हैं। यह पानी को स्वाभाविक रूप से उतना ही ठंडा करता है जितना शरीर के लिए सुरक्षित है। इसका pH लेवल भी क्षारीय होता है जो एसिडिटी कम करता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>सामान्य तापमान:</strong> प्यास बुझाने और हाइड्रेटेड रहने के लिए सामान्य या हल्का ठंडा पानी सबसे बेहतर है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	धूप से आते ही न पिएं: बाहर की गर्मी से आने के तुरंत बाद पानी न पिएं। 5-10 मिनट रुकें, जब शरीर का तापमान सामान्य हो जाए, तब पानी पिएं।</h3>
<h3>
	क्या कभी ठंडा पानी सही होता है?</h3>
<p>
	जी हां, भारी वर्कआउट के बाद बहुत मामूली ठंडा पानी शरीर के कोर तापमान को कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन वह भी &#39;बर्फ जैसा&#39; नहीं होना चाहिए।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	 </p>
<h3>
	ठंडा पानी-FAQs </h3>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>1. क्या ठंडा पानी पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है?</strong></p>
<p>
	ठंडा पानी पीने से तुरंत कोई गंभीर नुकसान नहीं होता, लेकिन लंबे समय तक या अत्यधिक ठंडा पानी पीने से पाचन में समस्या, गले में खराश, या सर्दी-जुकाम का खतरा बढ़ सकता है। गर्मियों में हल्का ठंडा या कमरे के तापमान का पानी पीना शरीर के लिए अधिक सुरक्षित माना जाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>2. धूप में ठंडा पानी पीना सही है या गलत?</strong></p>
<p>
	धूप में बहुत ठंडा पानी पीने से शरीर को शॉक लग सकता है, जिससे सिरदर्द या पेट में गड़बड़ी हो सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि धूप में कमरे के तापमान वाला पानी या हल्का ठंडा पानी पीना बेहतर है, ताकि शरीर को धीरे-धीरे ठंडक मिले।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>3. फ्रिज का पानी सीधे पीना सुरक्षित है?</strong></p>
<p>
	फ्रिज का पानी सीधे पीना अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित है, लेकिन अत्यधिक ठंडा पानी पेट और पाचन तंत्र के लिए भारी हो सकता है। विशेषकर वृद्ध या पेट की समस्या वाले लोग इसे हल्का गर्म करके पी सकते हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/health-care/ways-to-avoid-heat-wave-126042000012_1.html" target="_blank">Summer Health: लू से बचना है? तो ये 5 &#39;देसी ड्रिंक्स&#39; हैं आपके रक्षक</a></strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Tue, 05 May 2026 09:05:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 05 May 2026 14:39:13 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[health care]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[ध्यान पर दोहे: भटके पथ से लौटकर, मन पाए विश्राम]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/hindi-poems/couplets-on-meditation-126050400049_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/hindi-poems/couplets-on-meditation-126050400049_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-01/29/thumb/1_1/1769681396-6896.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-01/29/thumb/1_1/1769681396-6896.jpg</image>
      <description><![CDATA[मन चंचल घोड़े सदिश, खींचे ध्यान लगाम। भटके पथ से लौटकर, मन पाए विश्राम।। शब्द भाव जब सब थमें, भीतर बहे प्रकाश। ध्यान वही क्षण मौन का, आत्म बने आकाश।। श्वासों की सरिता बहे, लय हो जाती मंद। ध्यान जगा दे अंतरा, जैसे जागे छंद।।]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<img align="center" alt="ध्यान-योगा के जरिये मन पर कंट्रोल करने का चित्र" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-01/29/full/1769681396-6896.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
</p>
<p>
	मन चंचल घोड़े सदिश, खींचे ध्यान लगाम।</p>
<p>
	भटके पथ से लौटकर, मन पाए विश्राम।।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	शब्द भाव जब सब थमें, भीतर बहे प्रकाश।</p>
<p>
	ध्यान वही क्षण मौन का, आत्म बने आकाश।।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	श्वासों की सरिता बहे, लय हो जाती मंद।</p>
<p>
	ध्यान जगा दे अंतरा, जैसे जागे छंद।।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	जग के कोलाहल तले, दबता हृदय विधान।</p>
<p>
	ध्यान सुनाता मौन में, जीवन अंतर्गान।।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	लोभ मोह की धूल को, धोता निर्मल ध्यान।</p>
<p>
	अंतर का दर्पण बने, उज्ज्वल हो पहचान।।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	द्वेष घृणा मन जब रहे, क्रोधित हृदय अशांत।</p>
<p>
	ध्यान प्रकाशित मंत्र है, दूर करे सब भ्रांत।।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	ध्यान योग आयाम है, मन होता निष्काम।</p>
<p>
	ध्यान स्वयं से है मिलन, आत्मतत्त्व का धाम।।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	क्षण भर की एकाग्रता, दे अनंत विस्तार।</p>
<p>
	ध्यान बूंद में खोज ले, सागर भर संसार।।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	जिसके अंतर ध्यान है, मिटे सकल अभिमान।</p>
<p>
	ध्यान झुकाता है अहम, देता दिव्य विधान।।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	नित अभ्यासित ध्यान से, निर्मल हो व्यवहार।</p>
<p>
	भीतर अंतर्मन जगे, बाहर नव संसार।।<br />
	<br />
	(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है...)</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 04 May 2026 16:35:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 04 May 2026 17:03:22 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[hindi poems]]></category>
      <authorname>सुशील कुमार शर्मा</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[शब्द-ब्रह्म के अप्रतिम साधक और रंगों के इंद्रधनुषी शिल्पकार: प्रभु जोशी का अमर अवदान]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/hindi-literature/prabhu-joshi-artist-126050400015_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/hindi-literature/prabhu-joshi-artist-126050400015_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/04/thumb/1_1/1777874762-5355.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/04/thumb/1_1/1777874762-5355.jpg</image>
      <description><![CDATA[4 मई की तिथि का आना मात्र कैलेंडर का पन्ना बदलना नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी रिक्तता का बोध है जिसे समय की धारा भी भरने में असमर्थ है। मेरे बचपन के अभिन्न सखा (पिपलरांवा, देवास) प्रभु जोशी जी का भौतिक शरीर भले ही हमसे दूर हो गया हो, परंतु उनकी चेतना, ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="prabhu joshi painting" class="imgCont" height="674" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/04/full/1777874762-5355.jpg" style="border: 1px solid #DDD; margin-right: 0px; float: none; z-index: 0;" title="prabhu joshi" width="1200" /></p>
	</p>
	<strong>एक युगपुरुष का अवसान</strong></p>
<p>
	4 मई की तिथि का आना मात्र कैलेंडर का पन्ना बदलना नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी रिक्तता का बोध है जिसे समय की धारा भी भरने में असमर्थ है। मेरे बचपन के अभिन्न सखा (पिपलरांवा, देवास) प्रभु जोशी जी का भौतिक शरीर भले ही हमसे दूर हो गया हो, परंतु उनकी चेतना, उनकी कलम और उनकी तूलिका आज भी कालखंडों को चुनौती देती हुई हमारे बीच जीवंत है। वे केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक संस्था थे- सरस्वती के वे वरद पुत्र, जिन्होंने अपनी मेधा और सृजन से हिंदी साहित्य को एक नई दृष्टि प्रदान की।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	बहुआयामी सृजनशीलता</h3>
<p>
	प्रभु जोशी जी की रचनात्मकता बहुआयामी थी। वे एक ऐसे विलक्षण व्यक्तित्व थे, जिनके भीतर एक संवेदनशील कवि, तीक्ष्ण बुद्धि लेखक, गहन दार्शनिक और जलरंगों का जादुई चित्रकार एक साथ वास करता था। जब वे लिखते थे, तो उनके शब्द कागज़ पर नहीं, सीधे पाठक के अंतर्मन पर अंकित होते थे। उनकी लेखनी में वह धार थी जो सामाजिक कुरीतियों और मानवीय विडंबनाओं को चीरकर सत्य को सामने लाने का सामर्थ्य रखती थी। उनकी कृति &#39;उखड़ता हुआ बरगद&#39; केवल एक कहानी नहीं, बल्कि विस्थापन की उस वेदना का महाकाव्य है जिसे केवल एक संवेदनशील हृदय ही महसूस कर सकता है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	साहित्यिक एवं पत्रकारिता अवदान</h3>
<p>
	साप्ताहिक &#39;धर्मयुग&#39;, &#39;हिंदुस्तान&#39;, &#39;कादम्बिनी&#39; और &#39;नवनीत&#39; जैसे कालजयी प्रकाशनों में जब प्रभु जी की रचनाएं प्रकाशित होती थीं, तो मानो साहित्य जगत में एक नया सूर्योदय होता था। वे निपानिया, हुर हुर और पिपलरवा भूतेश्वर जैसे ग्रामीण परिवेश की सोंधी मिट्टी की गंध को अपने शब्दों में पिरोकर अंतरराष्ट्रीय फलक तक ले जाने की कला में सिद्धहस्त थे। &#39;नईदुनिया&#39; के संपादकीय पृष्ठों को उन्होंने जिस बौद्धिक ऊँचाई और वैचारिक स्पष्टता से संवारा, वह पत्रकारिता के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय है। वे ज्ञान के उस हिमालय के समान थे जिसकी चोटियाँ सदैव सत्य की खोज में अडिग रहीं।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	कला और आधुनिकता का संगम</h3>
<p>
	एक चित्रकार के रूप में उनकी दृष्टि और भी सूक्ष्म थी। उन्होंने रंगों के माध्यम से उन भावनाओं को मूर्त रूप दिया जिन्हें शब्द शायद कभी व्यक्त न कर पाते। उनकी चित्रकारी की शांति और गहराई उनके व्यक्तित्व का ही प्रतिबिंब थी। वे &#39;वेबदुनिया&#39; जैसे डिजिटल मंचों से उनके शुरुआती दिनों में ही जुड़ गए थे, जो उनकी दूरदर्शिता को दर्शाता है। वे जड़ता के विरोधी और निरंतर परिवर्तन के समर्थक थे; उनका मानना था कि साहित्य और कला को अपनी जड़ों से जुड़े रहकर समय के साथ आगे बढ़ना चाहिए।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	सम्मान और स्मृतियाँ</h3>
<p>
	वर्ष 2010-11 में, जब मैं शासकीय महाराजा भोज स्नातकोत्तर महाविद्यालय (धार) का प्राचार्य था, तब मुझे उन्हें ससम्मान आमंत्रित करने का सौभाग्य मिला। वे और श्रीमती अनीता जोशी हमारे महाविद्यालय के सबसे प्रतिष्ठित अतिथि थे। वहां समाज सुधार पर दिया गया उनका कालजयी व्याख्यान भारत के सभी प्रमुख समाचार पत्रों में प्रकाशित हुआ। प्रभु जोशी जी को उनकी उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए &#39;लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड&#39; और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। उनके उस विश्वस्तरीय उद्बोधन का लाभ समस्त प्राध्यापकों, छात्रों और साहित्यकारों को मिला।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	एक अक्षय धरोहर</h3>
<p>
	आज जब मैं उन्हें स्मरण करता हूँ, तो उनका वह सौम्य और जिज्ञासु चेहरा आँखों के सामने आ जाता है। एक वैज्ञानिक के रूप में मैं जीवन की नश्वरता को समझता हूँ, परंतु प्रभु जोशी जैसे रचनाधर्मी कभी मृत नहीं होते। वे अपनी कहानियों के पात्रों, पेंटिंग्स के रंगों और अपने विचारों की उस ऊर्जा में सदैव जीवित रहेंगे जो उन्होंने आने वाली पीढ़ियों के लिए छोड़ी है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	श्रद्धांजलि</h3>
<p>
	प्रभु जी, आपका जाना साहित्य जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। आपने सिखाया कि जीवन को एक कला की तरह कैसे जिया जाता है। आपकी मेधा, विनम्रता और निश्छल व्यक्तित्व मेरे लिए एक अमूल्य धरोहर है। माँ सरस्वती के इस सच्चे साधक और मेरे मित्र को इस 4 मई 2026 के दिन मेरा शत-शत नमन। आपकी स्मृतियाँ तब तक अक्षुण्ण रहेंगी, जब तक हिंदी भाषा और साहित्य का अस्तित्व रहेगा।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>- डॉ. तेज प्रकाश पूर्णानन्द व्यास पीएच.डी., डी.लिट्., डी.एससी. पादप पोषक तत्व वैज्ञानिक</strong></p>
<p>
	<strong>(सेवानिवृत्त प्राचार्य, शासकीय महाराजा भोज पीजी कॉलेज, धार, म.प्र.)</strong></p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 04 May 2026 11:34:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 04 May 2026 11:36:49 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[hindi literature]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[Summer drinks recipe: घर पर बनाएं प्री-मिक्स से मिनटों में तैयार करें ये खास 5 कूल-कूल ड्रिंक्स]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/sweets-dishes/refreshing-cool-drinks-126050400011_1.html</link>
      <guid>https://hindi.webdunia.com/sweets-dishes/refreshing-cool-drinks-126050400011_1.html</guid>
      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/04/thumb/1_1/1777871697-7142.jpg"/>
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      <description><![CDATA[Pre-mix refreshing drinks: यदि आप घर पर ही ताजगीभरे और कूल-कूल पेय प्री-मिक्स (ready to mix) तैयार करना चाहते हैं, तो आपको बेसिक सामग्री और फ्लेवर कॉम्बिनेशन का ध्यान रखना होगा। यहां 5 खास ड्रिंक्स के आसान प्री-मिक्स रेसिपी दी रहा रही है, जिन्हें आप ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p>
	<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
		<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
			<img align="center" alt="तस्वीर में गर्मी के दिनों में सेहतमंद बने रहने हे‍तु कूल-कूल ड्रिंक्स बनाने संबंधी जानकारी देता फोटो" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/04/full/1777871697-7142.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 675px;" title="" /></p>
	</p>
</p>
<p>
	<strong>summer beverages collection: </strong>भीषण गर्मी के इस मौसम में जब भी बाहर से घर आओ, तो कुछ ठंडा पीने का मन करता है। बाजार के केमिकल वाले सॉफ्ट ड्रिंक्स से बेहतर है कि आप घर पर ही &#39;कूल-कूल ड्रिंक प्री-मिक्स&#39; तैयार करके रखें। इन्हें बस पानी या दूध में मिलाना है और आपकी ताजगीभरी ड्रिंक तैयार!<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/indian-food-recipe/healthy-sattu-dishes-126041000004_1.html" target="_blank">Sattu Recipes: गर्मी में सेहत को लाभ देगी सत्तू की 5 बेहतरीन रेसिपीज</a></strong></p>
<p>
	 </p>
<h3>
	यहां 5 शानदार और हेल्दी ड्रिंक प्री-मिक्स की रेसिपी दी गई है:</h3>
<h3>
	 </h3>
<h3>
	1. शाही तरबतर &#39;ठंडाई प्री-मिक्स&#39;</h3>
<p>
	यह न केवल दिमाग को शांत करती है, बल्कि पोषण से भी भरपूर है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<span style="color:#4b0082;"><strong>सामग्री: </strong></span>1/2 कप बादाम, 1/4 कप काजू, 2 चम्मच खसखस, 2 चम्मच सौंफ, 1 चम्मच काली मिर्च, थोड़ी केसर और इलायची।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong style="color: rgb(0, 0, 128);">कैसे बनाएं: </strong>सभी सामग्री को हल्का रोस्ट (भून) लें ताकि नमी निकल जाए। ठंडा होने पर मिक्सी में महीन पाउडर बना लें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<span style="color:#800000;"><strong>कैसे इस्तेमाल करें:</strong></span> एक गिलास ठंडे दूध में 2 चम्मच प्री-मिक्स और स्वादानुसार चीनी/मिश्री मिलाएं। और तैयार ताजगीभरी ड्रिंक का आनंद लें।</p>
<h3>
	 </h3>
<h3>
	2. इंस्टेंट &#39;शिकंजी मसाला&#39;</h3>
<p>
	नींबू पानी को खास बनाने के लिए यह मसाला महीनों तक खराब नहीं होता।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong style="color: rgb(75, 0, 130);">सामग्री: </strong>1/2 कप भुना जीरा पाउडर, 1/4 कप काला नमक, 1/2 चम्मच पिसी काली मिर्च, 1 चम्मच सोंठ (अदरक पाउडर) और स्वादानुसार सादा नमक।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong style="color: rgb(0, 0, 128);">कैसे बनाएं: </strong>सभी मसालों को मिलाकर एक एयरटाइट जार में भर लें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong style="color: rgb(128, 0, 0);">कैसे इस्तेमाल करें: </strong>ठंडे पानी में नींबू निचोड़ें, चीनी मिलाएं और ऊपर से 1/2 चम्मच यह मसाला डालें। गिलास में भरें और इंस्टेंट &#39;मसाला शिकंजी&#39; का लुत्फ उठायें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	3. रिफ्रेशिंग &#39;पुदीना-नींबू शरबत&#39; प्री-मिक्स</h3>
<p>
	पुदीना पेट की जलन को शांत करता है और लू से बचाता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong style="color: rgb(75, 0, 130);">सामग्री: </strong>ढेर सारा सूखा पुदीना (छाया में सुखाया हुआ), पिसी चीनी और सिट्रिक एसिड (नींबू सत्व)।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong style="color: rgb(0, 0, 128);">कैसे बनाएं: </strong>सूखे पुदीने के पत्तों को पीसकर पाउडर बना लें। इसमें पिसी चीनी और थोड़ा सा सिट्रिक एसिड मिलाएं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong style="color: rgb(128, 0, 0);">कैसे इस्तेमाल करें: </strong>एक गिलास पानी में 2 चम्मच यह मिक्स डालें और बर्फ डालकर सर्व करें।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	4. देसी एनर्जी ड्रिंक &#39;सत्तू नमकीन मिक्स&#39;</h3>
<p>
	यह गर्मियों का &#39;सुपरफूड&#39; है जो तुरंत ऊर्जा देता है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong style="color: rgb(75, 0, 130);">सामग्री: </strong>2 कप भुने चने का सत्तू, बारीक कटा सूखा पुदीना, भुना जीरा, काला नमक और हींग।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong style="color: rgb(0, 0, 128);">कैसे बनाएं: </strong>सत्तू में सभी सूखे मसाले मिला लें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong style="color: rgb(128, 0, 0);">कैसे इस्तेमाल करें: </strong>ठंडे पानी में 3 चम्मच मिक्स डालें, अच्छे से घोलें और ऊपर से चाहें तो बारीक कटी हरी मिर्च या प्याज डालें और सर्व करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	नोट: इसमें चीनी नहीं डाली जाती है।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	5. गुलाब-इलायची कूलेंट </h3>
<p>
	यह ड्रिंक मन को प्रसन्न और शरीर को ठंडा रखने के लिए बेस्ट है।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong style="color: rgb(75, 0, 130);">सामग्री: </strong> 1 कप पिसी चीनी, 1/2 कप सूखे गुलाब की पंखुड़ियां (Rose Petals) और 10-12 इलायची।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<span style="color:#000080;"><strong>कैसे बनाएं: </strong></span>गुलाब की पंखुड़ियों और इलायची को चीनी के साथ बहुत बारीक पीस लें। इस पाउडर को छान लें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong style="color: rgb(128, 0, 0);">कैसे इस्तेमाल करें: </strong>इसे आप ठंडे दूध या पानी, दोनों में मिला सकते हैं। यह हल्का गुलाबी और खुशबूदार पेय बनेगा।</p>
<p>
	 </p>
<h3>
	स्टोरेज टिप्स:</h3>
<p>
	इन सभी प्री-मिक्स को हमेशा कांच के एयरटाइट जार में रखें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	इन्हें नमी से बचाने के लिए सूखे चम्मच का ही प्रयोग करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	मिश्री का पाउडर चीनी के मुकाबले ज्यादा ठंडक देता है, इसलिए हो सके तो पिसी चीनी की जगह धागे वाली मिश्री का उपयोग करें।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	<strong>SEO टिप: </strong>इन होममेड प्री-मिक्स का उपयोग करके आप न केवल पैसे बचा सकते हैं, बल्कि अपनी सेहत को भी सुरक्षित रख सकते हैं।<br />
	<br />
	<p>
		अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।<strong>ALSO READ: <a href="https://hindi.webdunia.com/indian-food-recipe/healthy-sattu-dishes-126041500006_1.html" target="_blank">Summer Food: समर स्पेशल सत्तू के 5 हेल्दी और स्वादिष्ट व्यंजन</a></strong></p>
</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Mon, 04 May 2026 10:55:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Mon, 04 May 2026 10:55:11 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[Sweets Dishes]]></category>
      <authorname>वेबदुनिया फीचर टीम</authorname>
    </item>
    <item>
      <title><![CDATA[जर्मन मांस उद्योग में नौकरियों का गोरख धंधा, भारतीय भी प्रभावित]]></title>
      <link>https://hindi.webdunia.com/international-hindi-news/massive-extortion-in-name-of-jobs-in-german-meat-industry-126050300001_1.html</link>
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      <media:thumbnail url="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/05/thumb/1_1/1777924664-1156.jpg"/>
      <image>https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/05/thumb/1_1/1777924664-1156.jpg</image>
      <description><![CDATA[जर्मनी के मांस उद्योग में कर्मचारियों की भारी कमी है। भारत, चीन और वियतनाम जैसे देशों से नए कर्मचारी भर्ती किए जा रहे हैं, पर नौकरी के नाम पर उनसे भारी रकमें वसूली जाती हैं। कर्ज़ में डूबे विदेशी श्रमिक जर्मनी पहुंचने पर बहुत दयनीय परिस्थितियों में ...]]></description>
      <content:encoded><![CDATA[<p style="float: left;width:100%;text-align:center;">
	<p style="position:relative;display: inline-block;color: #fff;">
		<img align="center" alt="Massive Extortion in Name of Jobs in German Meat Industry" class="imgCont" src="https://nonprod-media.webdunia.com/public_html/_media/hi/img/article/2026-05/05/full/1777924664-1156.jpg" style="border: 1px solid rgb(221, 221, 221); margin-right: 0px; z-index: 0; width: 1200px; height: 800px;" title="" /></p>
</p>
<p>
	जर्मनी के मांस उद्योग में कर्मचारियों की भारी कमी है। भारत, चीन और वियतनाम जैसे देशों से नए कर्मचारी भर्ती किए जा रहे हैं, पर नौकरी के नाम पर उनसे भारी रकमें वसूली जाती हैं। कर्ज़ में डूबे विदेशी श्रमिक जर्मनी पहुंचने पर बहुत दयनीय परिस्थितियों में रहने और काम करने के लिए विवश हो जाते हैं।<br />
	<br />
	वे अधिकतर भारत और वियतनाम जैसे तृतीय देशों के ऐसे युवा पुरुष हैं, जो रोज़गार पाने की लालच में जर्मनी जाते हैं। जर्मनी में कोई काम-धंधा पाने की संभावना उन देशों के लोगों को विशेष रूप से आकर्षित करती है, जहां जर्मनी की तुलना में बहुत कम वेतन मिलते हैं, किंतु यूरोप के इस संपन्न देश में रहने और कमाने का सपना, भारत, चीन या वियतनाम जैसे देशों के लोगों के लिए एक भयावह छलावा सिद्ध होने लगा है: प्रायः वे नौकरी दिलाने वाली बिचौलिया एजेंसियों पर निर्भरता की शोषणकारी जटिलताओं में फंस जाते हैं। बिचौलिया एजेंसिंया चार से पांच अंकों वाली फ़ीस मांगती हैं<br />
	<br />
	जर्मनी में नौकरी दिलाने वाली बिचौलिया एजेंसिंया, कुशलकर्मी या मौसमी कामगारों वाले वीज़ा पर जर्मनी जाने से पहले, भावी नौकरियों के लिए चार से पांच अंकों वाली एक फ़ीस मांगती हैं। यह फ़ीस अधिकतर ऐसे कर्ज़ के रूप में होती है, जिसे चुकाने के लिए जर्मनी में कभी-कभी वर्षों तक काम करना पड़ सकता है। &#39;एआरडी&#39; जर्मनी का सबसे बड़ा सार्वजनिक टेलीविज़न प्रसारक है। उसकी राजनीतिक पत्रिका &#39;मॉनिटर&#39; द्वारा भारत और वियतनाम में की गई एक जांच से पता चला है कि जर्मन मांस उद्योग के लिए एशिया में कर्मचारी चुनने वाली एजेंसियां, लगातार सस्ते श्रमिकों को यूरोप की ओर आकर्षित कर रही हैं और खूब कमाई कर रही हैं।</p>
<p>
	 </p>
<p>
	&#39;वेस्टफ्लाइश&#39; जर्मनी में मांस उद्योग की एक बड़ी और नामी कंपनी है। उसमें काम करने के लिए पिछले साल भारत के केरल राज्य से जर्मनी आए एक युवक ने &#39;मॉनिटर&#39; को बतायाः मेरे लिए मेरे परिवार ने अपना सारा सोना बेच दिया। यह कोई अकेला मामला नहीं है।<br />
	<br />
	जर्मनी पहुंचे &#39;वेस्टफ्लाइश&#39; के कई कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें इस कंपनी में नौकरी पाने के लिए ऊंची रकमें चुकानी पड़ी हैं। यह शिकायत करने वालों में भारतीय ही नहीं, वियतनामी भी शामिल हैं। वियतनामियों में से एक ने कहाः हमारी शादी के बाद मेरे और मेरी पत्नी के पास कुछ पैसे बचे थे। बाकी पैसे मैंने पड़ोसियों, रिश्तेदारों और भाई-बहनों से उधार लिए।<br />
	<br />
	&#39;वेस्टफ्लाइश&#39; कंपनी ने स्वीकार किया है कि एशिया में नए कर्मचारियों की भर्ती करने वाली एजेंसियों ने 15,000 यूरो (1 यूरो=111रुपए) तक का शुल्क वसूला है। कंपनी ने कहा कि मांगी गई रकमें उसके अपने मूल्यों के “बिल्कुल विपरीत है।...हम इस प्रथा की कड़ी निंदा करते हैं; एक नियोक्ता के रूप में अपने कर्मचारियों के साथ खड़े हैं।</p>
<h3>
	<br />
	भर्ती कुशलकर्मी के तौर पर, वेतन अकुशल श्रमिकों जैसा</h3>
<p>
	जर्मनी जाने का कुशलकर्मी वीज़ा पाने के लिए श्रमिकों को अपनी शैक्षणिक योग्यता प्रमाणित करनी होती है, तभी वे जर्मनी में कसाई के रूप में काम कर सकते हैं। इस योग्यता के लिए कसाई बनने का बाक़ायदा मान्यता प्राप्त शिक्षण-प्रशिक्षण मिला होना चाहिए। हालांकि &#39;मॉनिटर&#39; द्वारा जांची गई वेतन-पर्चियों से पता चला कि &#39;वेस्टफ्लाइश&#39; कंपनी में उन्हें केवल &#39;उत्पादन सहायक&#39; के तौर पर वेतन दिया जाता है। पूछताछ करने पर &#39;वेस्टफ्लाइश&#39; कंपनी का कहना था कि वह सभी कानूनी नियमों का पालन करती है।<br />
	<br />
	कहने के लिए तो कसाई का काम करने वाले श्रमिकों को प्रति घंटे 14.50 यूरो के हिसाब से, पूरे महीने प्रतदिन 8 घंटे काम के लिए कुल मिलाकर 2320 यूरो वेतन मिलना चाहिए, पर जर्मनी में लागू आयकर तथा स्वास्थ्य, पेंशन, बेरोज़गारी, नर्सिंग और दुर्घटना जैसे समयों के लिए अनिवार्य बीमा नियमों के कारण महीने के अंत में 1700 यूरो ही मिल सकते हैं। मांस उद्योग के श्रमिकों के आवास के किराए और परिवहन आदि का ख़र्च काट कर अंत में उन्हें 1300 यूरो के आसपास ही वेतन मिल पाता है।</p>
<h3>
	<br />
	किसी भी समय बर्ख़ास्तगी</h3>
<p>
	&#39;एआरडी&#39; के &#39;मॉनिटर&#39; कार्यक्रम के पत्रकार, जर्मन मांस उत्पादी कंपनियों के लिए श्रमिकों की भर्ती करने वाली दक्षिणी जर्मनी की एक एजेंसी के साथ अपनी पहचान छिपाते हुए हफ्तों तक गोपनीय संपर्क बनाए रखने में सफल रहे। अतीत में वह एजेंसी &#39;वेस्टफ्लाइश&#39; कंपनी के लिए भी अन्य देशों देशों से 100 से अधिक लोगों की भर्ती कर चुकी है। गोपनीय पत्रकारों से बातचीत में इस दूसरी एजेसी के प्रबंध-निदेशक ने बताया कि तीसरे देशों से आए श्रमिकों को किसी भी समय (यहां तक कि परिवीक्षा (प्रोबेशन) अवधि के बाद भी) बर्ख़ास्त किया जा सकता है।<br />
	<br />
	&#39;मॉनिटर&#39; की खोज के अनुसार, अन्य देशों में सस्ते श्रमिकों की भर्ती करने वाली इस दूसरी एजेंसी के ग्राहकों में मांस उद्योग की अन्य कंपनियां भी शामिल थीं, जिनमें जर्मन मांस उद्योग की दिग्गज कंपनी &#39;टॉनीज़&#39; (अब &#39;प्रीमियम फ़ूड ग्रुप&#39;) भी शामिल है। इस कंपनी का कहना है कि उसके यहां श्रमिकों की भर्ती &#39;पूरी तरह से कानून के अनुसार&#39;, की जाती है। उसके कहने के अनुसार, भारत से भर्ती किए गए उसके सभी श्रमिक आज भी काम कर रहे हैं।</p>
<h3>
	<br />
	बीमारी के कारण भी बर्ख़ास्तगी?</h3>
<p>
	अन्य भारतीय श्रमिकों ने बताया कि उन्हें परिवीक्षा (प्रोबेशन) अवधि के दौरान बीमारी के कारण बर्खास्त कर दिया गया। इस नियुक्ति प्रणाली में नियोक्ता अक्सर आवास भी प्रदान करता है और किराया सीधे श्रमिकों के वेतन से काट लेता है, इसलिए उन्हें अपने रहने-सोने के कमरे भी खाली करने पड़े। एक पूछताछ के जवाब में&#39; वेस्टफ्लाइश&#39; ने कहा कि अतीत में कुछ मामलों में... कर्मचारियों के साथ सहयोग समाप्त कर दिया गया है। &#39;कंपनी की नई योजना&#39; विशेष रूप से प्रभावित कर्मचारियों के लिए वित्तीय सहायता पैकेज स्थापित कर की है।<br />
	<br />
	&#39;मॉनिटर&#39; ने अपनी जांच में पाया कि &#39;वेस्टफ्लाइश&#39; कंपनी ने वियतनाम में भर्ती किए गए कर्मचारियों से खुद भर्ती-शुल्क वसूला था। कंपनी ने माना कि अस्थायी रूप से ऐसा भी हुआ है, लेकिन ऐसा वियतनाम में प्रचलित और कानूनी रूप से मान्य नियमों का पालन करते हुए हुआ। वे शुल्क &#39;उचित और न्यायसंगत&#39; थे। उनमें अन्य बातों के अलावा जर्मन भाषा के पाठ्यक्रम का ख़र्च भी शामिल था।</p>
<h3>
	<br />
	मानवीय गरिमा का उल्लंघन</h3>
<p>
	जर्मन मांस उद्योग अतीत में अपने श्रमिकों के शोषण और उनकी भर्ती के लिए ठेकेदारों को माध्यम बनाने के कारण सुर्खियों में रहा है। उस समय सुधार के कई वादे किए गए थे। राजनेताओं ने कड़े कानून बनाकर अपनी प्रतिक्रिया दी थी। इस क्षेत्र में ऐसे तथाकथित &#39;सेवा-अनुबंधों&#39; (सर्विस कॉन्ट्रैक्ट) पर प्रतिबंध लगा दिया गया, जिनके अधीन कर्मचारियों को सीधे मांस कंपनियों द्वारा नहीं, बल्कि ठेकेदारों द्वारा नियोजित किया जाता था।<br />
	<br />
	मांस कंपनियों द्वारा अपनी ज़िम्मेदारी से बचने की इस प्रथा को हमेशा के लिए समाप्त किया जाना था। जर्मनी के सबसे अधिक जनसंख्या वाले नॉर्थ राइन-वेस्टफेलिया राज्य के श्रममंत्री, कार्ल-योज़ेफ लाउमान ने उस समय मांस उद्योग की स्थिति को &#39;संगठित गैरजि़म्मेदा&#39; के रूप में वर्णित किया था।<br />
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	किंतु उन्हीं लाउमान को आज के कानूनी ढांचे में बदलाव का कोई कारण नहीं दिखता। वे कहते हैं, यदि (विदेशी) कर्मचारियों को योग्य रोज़गार नहीं दिया जाता या उनके आने के बाद उन्हें वेतन नहीं दिया जाता, तो यह कानून का उल्लंघन है। लेकिन इस उल्लंघन को रोकने के लिए क़ानून में किसी संशोधन की या कोई नया क़ानून बनाने की आवश्‍यकता वे नहीं देखते।</p>]]></content:encoded>
      <pubDate>Sun, 03 May 2026 00:03:00 +0530</pubDate>
      <updatedDate>Tue, 05 May 2026 01:37:18 +0530</updatedDate>
      <category><![CDATA[International News]]></category>
      <authorname>राम यादव</authorname>
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