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टिप्पणियां

D B S SENGAR

इन चारो अशंतुष महादयो की पारिवारिक पृष्भूमि देखिये आप सरलता से समझ जाएंगे की इनकी स्वामिभक्ति हिलोरे मार रही हे और वर्तमान में ये लोग घुटन महसूस कर रहे हे ?
X REPORT ABUSE Date 17-01-18 (02:08 PM)

D B S SENGAR

ये सब अगले साल होने वाले आम चुनाव के पहले की अवार्ड वापसी गैंग के ही हथकंडे हे..जैसे जैसे चुनाव नजदीक आते जाएंगे वैसे वैसे ये देश किसी के लिए रहने लायक नहीं रहेगा किसी को अखबार पड़ते समय डर लगेगा..फिर चुनाव होने के बाद सब ठीक हो जाएगा ?
X REPORT ABUSE Date 17-01-18 (02:04 PM)

Himanshu

सात मई, 1997 को सुप्रीम कोर्ट ने फुल कोर्ट में न्यायाधीशों के लिए नैतिक मूल्य (रिइंस्टेटमेंट ऑफ वैल्यू ऑफ ज्युडिशियल लाइफ) स्वीकार किए थे और इसे 1999 में चीफ जस्टिस कान्फ्रेंस में मंजूरी देकर पूरी न्यायपालिका के लिए स्वीकार किया था। सोलह बिंदुओं के इन नैतिक मूल्यों का नवां बिंदु कहता है कि जजों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने फैसलों के जरिये बोलेंगे। वे प्रेस को साक्षात्कार नहीं देंगे। सुप्रीम कोर्ट द्वारा अपनाए गए नैतिक मूल्य कहते हैं कि जज प्रेस से बात नहीं करेंगे। हालांकि, यह कोई बाध्यकारी कानूनी व्यवस्था नहीं है। बल्कि न्यायपालिका द्वारा स्वेच्छा से स्वीकार किया गया नियंत्रण है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एसआर सिंह कहते हैं कि वैसे तो इस बारे में कोई कानूनी रोक नहीं है। न्यायपालिका के स्वनियंत्रण की बात है। यह रोक इसीलिए लगाई गई थी ताकि जो स्थिति आज उत्पन्न हुई है वह न पैदा हो। जैसा कि चार वरिष्ठ न्यायाधीश कह रहे हैं कि गड़बड़ी है। वैसा हो सकता है। हम उसके सही गलत होने पर नहीं जाते। लेकिन, जिस तरह से इस मामले को उठाया या उछाला गया है, उससे जनता का न्यायापालिका पर विश्वास हिलेगा उसमें कमी आएगी। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश एन. संतोष हेगड़े ने शीर्ष अदालत के चार न्यायाधीशों के कदम को पूरी तरह निंदनीय माना है। चारों न्यायाधीशों ने न्यायपालिका के आंतरिक मामले को लेकर शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन किया था। पूर्व न्यायाधीश ने शनिवार को कहा कि इससे न्यायपालिका की छवि प्रभावित होगी और इसे न्यायालय का अपमान माना जा सकता है। पर एक न्याय के एक सर्वोच्च संसथान मे ऐसा होना देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है । ये कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है और न ही कोई सार्वजानिक संसथान है । यहाँ न्याय के लिए देश के गणमान्य प्रतिष्ठित न्यायाधीशों को पहुंचने का सौभग्य प्राप्त होता है । अतः इन्हे अपने गरिमा बना कर रखना आवश्यक है ।
X REPORT ABUSE Date 15-01-18 (06:07 PM)

Rakesh Kumar Gupta

जब बहुमत की राय/विचारों की सक्षम प्राधिकारी द्वारा निरंतर उपेक्षा करके अपनी तानासाही/मनमर्जी थोपी जा रही हो तो समाज के प्रति वफादार शिकायतकर्ता के पास जनता की अदालत में जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है क्योंकि लोकतंत्र में देश की असली मालिक देश की जनता ही होती है | हमारा संविधान भी देश की जनता "भारत के लोग ....." को ही समर्पित किया गया है और बाकी सभी प्राधिकारी इसी संविधान से प्राप्त अधिकारों के तहत अपने अधिकारों का प्रयोग देश की जनता/लोकतंत्र की रक्षा के लिए करते हैं | इस प्रेस कांफ्रेंस के बाद अनेक प्राधिकारी बीच बचाव के लिए सामने आये और समस्या के उचित समाधान का मार्ग प्रशस्त हुआ | लेकिन यदि यही लोग चुप्पी लगा जाते तो शायद स्थितियां और भी बीभत्स हो सकती थी |
X REPORT ABUSE Date 15-01-18 (03:59 PM)