राहु की अंतर्दशा ने डाला भाजपा को मुश्किल में

गुजरात चुनाव परिणाम का ज्योतिष विश्लेषण

गुजरात चुनाव के परिणाम आ चुके हैं। इस पूरे चुनाव को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जन्म कुंडली से विश्लेषित किया जा रहा था। इसकी प्रमुख वजह यह है कि मोदी स्वयं इस चुनाव को सेमीफाइनल मान कर खेल रहे थे 2019 के चुनाव यानी फाइनल में इस सेमीफाइनल के परिणाम यकीनन प्रभावित करेंगे।

राहु की अंतर्दशा के चलते भाजपा इस बार पिछली बार जितनी भी सीटें नहीं जीत पाई, जबकि लक्ष्य 150 का तय किया गया था।

मोदी का जन्म इस वर्ष के अनुसार गुरु की महादशा में हुआ। तुला लग्न में गुरु तीसरे और छठे भाव का स्वामी है। दशा के अनुसार आइए जानते हैं मोदी के जीवन की सफलता और असफलता...

1965 से 1984 तक : शनि की दशा

यह शनि की दशा का समय था। शनि तुला लग्न में योगकारक तो हैं परन्तु राजयोगकारक नहीं। साथ ही सुख भाव(चतुर्थ) से छठे भाव में बैठे हैं, अतः अत्यंत दुःख, खूब भ्रमण, आध्यात्मिक और नैतिक ज्ञान के साथ संघर्षमयी जीवन जीने को बाध्य हुए। इस दौरान, जैसा शनि का गुण है मोदी साधु-संतों की सेवा में रहे और लगभग सन्यासी का जीवन यापन किया।

1984 से जुलाई 2001 तक: यह वह समय है जहां से मोदी के राजनैतिक जीवन और अच्छे दिन की शुरुआत होती है, बुध इनकी कुंडली में भाग्येश है और अपनी उच्च राशि कन्या में द्वादश में बैठकर राजयोग भी बना रहा है। यहीं से मोदी के राजयोग की शुरुआत हो जाती है।

नरेन्द्र मोदी जी स्वतन्त्र भारत में जन्म लेने वाले ऐसे व्यक्ति हैं जो सन 2001 से 2014 तक लगभग 13 साल गुजरात के 14वें मुख्यमंत्री रहे और हिन्दुस्तान के 15वें प्रधानमंत्री बने। यद्यपि वर्ष 2008 से 2028 तक लग्नेश शुक्र की महादशा समयांतराल में अधिकतर समय मोदी जी के लिए अच्छा ही रहेगा किन्तु वर्तमान में राहु की अंतर्दशा के चलते ही भाजपा इस बार पिछली बार जितनी भी सीटें नहीं जीत पाई, जबकि लक्ष्य 150 का तय किया गया था।


शुक्र में राहु की अन्तर्दशा की वजह से गुजरात चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलना मुश्किल था। अन्य पार्टी को भी पूर्ण बहुमत मिलना आसान नहीं था। इसके बावजूद मोदी और अमित शाह के सितारे गुजरात विजय का संकेत दे रहे थे।

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