कपिल सिब्बल ने क्यों उठाए शिक्षकों की योग्यता पर सवाल

वेबदुनिया डेस्क

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कपिल सिब्बल का कहना है कि बच्चों को शिक्षित करने के लिए अध्यापन व्यवसाय में उत्कृष्ट दिमाग वाले लोगों की जरूरत है। क्या सिब्बल के इस बयान से यह समझना चाहिए कि हमारे देश के शिक्षण संस्थानों में शिक्षा दे रहे हमारे शिक्षक इतना ज्ञान नहीं रखते कि वे हमारी आने वाली पीढ़ी को ज्ञानवान बना सकें?

अगर देश के मानव संसाधन विकास मंत्री ने यह बात कही है तो उसके पीछे कोई आधार भी होगा। बिना किसी आधार के इतने बड़े मंच से यह बयान तो नहीं दिया होगा, लेकिन यह भी सच है कि मंत्री जी ने अपने बयान के संदर्भ में कोई ठोस तर्क पेश नहीं किए। शिक्षा के संदर्भ में अगर भारत की बात की जाए तो विश्व में यहां के संस्थान और यहां कि शिक्षा सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है।

हालांकि अगर हम सिब्बल के बयान का मोटे तौर पर अर्थ लगाएं तो यह सरकारी स्कूलों के संदर्भ में दिया गया बयान मालूम पड़ता है। लेकिन आंकड़े कह‍ते हैं कि राज्य के और केंद्रीय सरकारी स्कूलों में योग्य शिक्षक अध्यापन करवा रहे हैं और इसके पक्ष में केंद्रीय विद्यालय और नवोदय जैसे स्कूलों का सफलता प्रतिशत बताया जा सकता है।

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द्वारा कें‍द्रीय सलाहकार बोर्ड की 59वीं बैठक में दिया गया वक्तव्य बहस का विषय हो सकता है। सिब्बल ने इस बैठक कहा कि देश में शिक्षक समुदाय उतना शिक्षित नहीं है जितना उसे होना चाहिए।
देश के निजी स्कूलों की हालत सरकारी स्कलों से निश्चित रूप से बेहतर है, लेकिन जब बात विषय के अच्छे जानकारों की आती है तो वे आज भी सरकारी स्कूलों में मिलेंगे। सिब्बल ने योग्य शिक्षक नहीं होने की बात कहकर खुद के विभाग की परीक्षा प्रक्रिया पर ही सवालिया निशान लगा दिया है। क्या मंत्री जी यह कहना चाहते हैं कि उनके विभाग द्वारा संचालित ‍की जाने वाली नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (नेट) जैसी विभिन्न प्रवेश परीक्षाओं का स्तर इतना ऊंचा नहीं है कि उन्हें क्लीयर करने वाला सरकारी स्कूल का टीचर बच्चों को भलीभांति पढ़ा सके।

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