सूरमा : फिल्म रिव्यू

कोपल हेतावल|
आखिरकार फैंस के फेवरेट दिलजीत दोसांझ एक बार फिर फिल्म 'सूरमा' के साथ बड़े परदे पर आ ही गए। उम्मीद के मुताबिक फिल्म बॉक्स-ऑफिस पर तो अच्छा प्रदर्शन कर रही है लेकिन दर्शक इस फिल्म से कुछ असमंजस में हैं। असमंजस यह कि संदीप सिंह की यह बायोपिक 'सूरमा' आखिर उनकी इंस्पिरेशनल कहानी है या उनकी लव स्टोरी।

दरअसल, कहानी उनके 'फ्लिकर सिंह' बनने से ज़्यादा उनकी 'लव स्टोरी' बयां करती है। शुरू से शुरू करना बेहतर होगा। दिलजीत दोसांझ स्टारर हॉकी लीजेंड संदीप सिंह की यह बायोपिक 'सूरमा' शुरू होती है संदीप के बचपन से। बचपन से ही पिता ने अपने दोनों बेटों को हॉकी की ट्रेनिंग में लगा दिया था ताकि वे इंडिया टीम में सिलेक्ट होकर कोई सरकारी नौकरी पा लें। सपना ज़्यादा बड़ा नहीं थी लेकिन इस वजह से परिवार में हॉकी का ही माहौल था। संदीप ने बचपन में ही हॉकी छोड़ अपने बड़े भाई बिक्रमजीत सिंह (अंगद बेदी) का सपोर्ट किया। मस्ती करते हुए संदीप बड़े हुए और एक लड़की हरप्रीत (तापसी पन्नू) से सिर्फ आकर्षित होने पर ही हॉकी खेलने की इच्छा रखी।

बस यहीं से असली कहानी शुरू होती है। संदीप उस लड़की से मिलने के लिए रोज़ हॉकी मैदान पर जाकर प्रेक्टिस करने लगे। 9 वर्षों से हॉकी छोड़ चुके संदीप की कहानी यूं ही चलती रही और वे अपना टैलेंट दिखाते रहे। लेकिन इस लव स्टोरी में भी हमेशा की तरह एक विलेन था जिसने संदीप को आगे नहीं बढ़ने नहीं दिया और लव स्टोरी पर लग गया ब्रेक। अब कहानी आगे बढ़ाने के लिए संदीप ने अपने बड़े भाई की मदद ली। बड़े भाई के जिक्र से याद आया कि फिल्म में सबसे बेहतरीन इंस्पिरेशन यही था कि चाहे जीवन में कुछ भी हो जाए, परिवार का साथ हमेशा बहुत ज़रुरी होता है। इस बात को निर्देशक ने बहुत अच्छी तरह से दर्शाया है। बड़े भाई ने हर मोड़ पर संदीप का साथ दिया, या ऐसा कह सकते हैं कि उन्हीं की वजह से संदीप इतने बड़े प्लेयर बन पाए हैं।

लव स्टोरी और हॉकी दोनों ही बहुत बेहतरीन चल रहा था। संदीप और हरप्रीत का इंडिया टीम में सिलेक्शन भी हुआ और शादी भी तय हुई। ट्रेजेडी तब हुई जब संदीप सिंह को गोली लग गई और उनके जीवन में सब कुछ बिखर गया। निर्देशक ने फर्स्ट हाफ में कहानी को पॉइंट टू पॉइंट दर्शाया, इसलिए यह बेहतर लगी। हालांकि दर्शक कंफ्युस होना शुरू हो चुके थे कि यह इंस्पिरेशनल स्टोरी है या लव स्टोरी।

सेकंड हाफ की कहानी सभी को पता है इसलिए इसे कम शब्दों में ही बताया जा सकता है। कोमा से बाहर निकलने के बाद दोबारा अपने पैरों पर खड़े होना और हॉकी में भारत को इंटरनेशनल प्लेटफॉर्म पर रिप्रेज़ेंट करना कोई आसान बात नहीं। और यही कहानी है लीजेंड संदीप सिंह की। लेकिन दर्शकों को इसमें सबसे ज़्यादा अखरा कि इस पार्ट में भी लव स्टोरी को ज़्यादा बढ़ावा दिया गया।

'सूरमा' में दिलजीत दोसांझ की एक्टिंग दिल जीतने वाली थी। वे अपने किरदार में पूरी तरह से डुब गए थे। इसके अलावा उनका साथ दिया तापसी पन्नू ने। लव स्टोरी के तौर पर देखें तो तापसी इस फिल्म की दूसरी लीड कास्ट थी लेकिन तापसी के टैलेंट का बेहतर उपयोग निर्देशक फिल्म में नहीं कर पाए। हालांकि दोनों की हॉकी प्रैक्टिस शानदार थी और फिल्म में उन्होंने इसे बहुत अच्छे से प्रदर्शित किया है। बड़े भाई के किरदार में अंगद बेदी शानदार थे। नेहा धूपिया से शादी के बाद यह अंगद की पहली फिल्म थी और वाकई नेहा को अपने पति की एक्टिंग पर बहुत गर्व होगा। सतीश कौशिक ने भी बेहतरीन काम किया है। कोच के रूप में विजय राज़ शानदार थे। फिल्म में थोड़ा ह्युमर देने की बेहे कोशिश की गई जो कि सफल रही।


दर्शकों को इमोशनल करने की कोशिश की गई लेकिन रोना नहीं आया। कहीं सीन को जबर्दस्ती बहुत लंबा खींचा गया तो कहीं बहुत छोटे से सीन दिखाकर अधुरापन रखा गया। हालांकि फिल्म दर्शकों को सवा दो घंटे तक बांधे रखने में कामयाब रही। दर्शक फिल्म के किसी सीन से बोर नहीं हुए। दिलजीत, तापसी और अंगद की शानदार एक्टिंग और संदीप सिंह की पूरी कहानी को दर्शकों तक पहुंचाने का पूरा क्रेडिट जाता है निर्देशक शाद अली को। उन्होंने कहानी को कम समय में दर्शाने की कोशिश की जिसमें वे सफल रहे।

फिल्म के गाने और म्युज़िक कुछ खास नहीं है। हालांकि 'सूरमा एंथम' रिलीज़ होते ही बहुत फेमस हो गया था। जिसे गाया है शंकर महादेवन ने। साथ ही 'इश्क दी बाजियां' आजकल यूथ का फेवरेट लव सांग बन चुका है। इसके अलावा इस स्पोर्ट्स फिल्म को शाहरुख खान की 'चक दे इंडिया' से भी कम्पेयर किया गया था लेकिन आपको बता दें कि यह उस कहानी से बिल्कुल मेल नहीं खाती। वीकेंड एंजॉय करने के लिए यह अच्छी और पैसा वसूल पिक्चर है। वेबदुनिया की ओर से फिल्म 'सूरमा' को
3 स्टार।

निर्माता : सोनी पिक्चर्स नेटवर्क्स इंडिया, सीएस फिल्म्स
निर्देशक : शाद अली
संगीत : शंकर एहसान लॉय
कलाकार : दिलजीत दोसांझ, तापसी पन्नू, अंगद बेदी, सिद्धार्थ शुक्ला, कुलभुषण खरबंदा, पितोबश, विजय राज, हैरी तंगीरी, अम्मार तालवाला
सेंसर सर्टिफिकेट : यूए * 2 घंटे 11 मिनट
रेटिंग : 3/5





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