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सीक्रेट सुपरस्टार : फिल्म समीक्षा

गुरुवार,अक्टूबर 19, 2017
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शेफ : फिल्म समीक्षा

शुक्रवार,अक्टूबर 6, 2017
शेफ 2014 में इसी नाम से बनी अमेरिकन मूवी का ऑफिशियल रीमेक है। अभिनय की दृष्टि से 'शेफ' सैफ के करियर की बेहतरीन फिल्मों ...
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जुड़वा 2 एक टाइमपास मूवी है। डेविड और वरुण धवन से डबल धमाल की उम्मीद थी, वो पूरी नहीं हो पाती। वरुण धवन ने पूरी फिल्म ...
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फिल्म का नाम न्यूटन क्यों है? नूतन कुमार (राजकुमार राव) को यह नाम पसंद नहीं है इसलिए वह नू को न्यू और तन को टन बना कर ...
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दाऊद पर कई फिल्में बनी हैं, लेकिन पहली बार उसकी बहन हसीना पारकर को केन्द्र में रख कर 'हसीना पारकर' नाम से फिल्म बनाई गई ...
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भूमि : फिल्म समीक्षा

शुक्रवार,सितम्बर 22, 2017
भूमि का पहला सीन आता है जब संजय दत्त और शेखर सुमन बैठ कर शराब पी रहे हैं। कहने को तो ये कॉमिक सीन है, लेकिन खीज पैदा ...
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फरहान अख्तर ने 'लखनऊ सेंट्रल' में अभिनय करने की रजामंदी इसीलिए दी होगी क्योंकि यह एक बैंड आधारित फिल्म है। कहने को तो ...
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सिमरन : फिल्म समीक्षा

शुक्रवार,सितम्बर 15, 2017
सिमरन फिल्म के साथ दिक्कत यह है कि यदि आपको यह किरदार पसंद नहीं आता तो आप इस फिल्म से जुड़ाव महसूस नहीं कर पाते। वैसे ...
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'पोस्टर बॉयज़' इसी नाम की मराठी फिल्म का हिंदी रिमेक है। इस कहानी पर हास्य फिल्म बनाने की भरपूर गुंजाइश थी, लेकिन इस ...
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शुभ मंगल सावधान में मर्दाना कमजोरी जैसे गंभीर मुद्दे को फिल्म में हल्के-फुल्के अंदाज से दिखाया गया है। हल्की-फुल्की ...
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बादशाहो की कहानी उस समय की है जब आपातकाल लगा था। अजय देवगन और इमरान हाशमी ने अपने अभिनय के बूते पर फिल्म को उठाए रखा है ...
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बाबूमोशाय बंदूकबाज देखते समय आपको कई फिल्में याद आएंगी क्योंकि चिर-परिचित सेटअप है। इस फिल्म का निर्देशन कुशाण नंदी ने ...
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कई बार ऐसी फिल्में अच्‍छी लगती हैं जिसमें गुडलुकिंग हीरो-हीरोइन हो, खूबसूरत लोकेशन हो, स्टाइलिश एक्शन हो, भले ही ...
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बरेली की बर्फी यूपी के बरेली में सेट है। यह फिल्म फ्रेंच बुक 'द इनग्रेडिएंट्स ऑफ लव' से प्रेरित है। पेरिस से कहानी को ...
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टॉयलेट- एक प्रेम कथा के नाम से ही स्पष्ट है कि यह प्रेम कहानी टॉयलेट के इर्दगिर्द घूमती है। केशव (अक्षय कुमार) और जया ...
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जब हैरी मेट सेजल देखते समय निगाह बार-बार घड़ी की ओर जाती है और यह किसी भी फिल्म के लिए अच्छा लक्षण नहीं है। इस फिल्म ...
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इनसाइड एज में हकीकत और कल्पना को बहुत ही अच्‍छे तरीके से बुना गया है। क्रिकेट, स्टार खिलाड़ी, टीमें, फिल्म स्टार्स, ...
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'इंदु सरकार' विषय के साथ पूरी तरह न्याय नहीं कर पाती। चांदनी बार, सत्ता, पेज 3, कारपोरेट जैसी फिल्मों में मधुर विषय की ...
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च्युइंगम की तरह है 'मुबारकां'। पहले थोड़ी स्वादिष्ट लगती है, फिर बेस्वाद हो जाती है। फिर जब तक आपको चबाने की क्रिया ...
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'लिपस्टिक इन माय बुरखा' में चार स्त्रियां फिल्म की प्रमुख पात्र हैं जो अलग-अलग उम्र और वर्ग की हैं, लेकिन चारों की हालत ...
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