मॉम... बच्चे और बड़े दोनों को देखना चाहिए: श्रीदेवी

फिल्म इंडस्ट्री बहुत बदल गई है

श्रीदेवी ने 15 साल बाद जब फिल्मों की तरफ रुख किया तो उन्हें भी इल्म नहीं था कि 'इंग्लिश-विंग्लिश' में लोग उनको इतना प्यार देंगे। उनके बारे में तो रवीना टंडन ने खुद कहा है कि 'कमबैक हो तो ऐसा'। श्रीदेवी
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अब अपनी नई फिल्म के साथ सामने आ रही हैं और इस बार फिल्म का नाम है 'मॉम'।

श्रीदेवी कहती हैं कि इस फिल्म या फिर 'इंग्लिश-विंग्लिश' करने के पहले भी मैंने सोचा नहीं था कि मैं कमबैक करूं या न करूं? फिल्म सामने आई और मैंने हां कह दी। 'मॉम' के बारे में भी यही हुआ। फिल्म की कहानी पसंद आई और लगा कि काम कर लूं तो ये फिल्म कर ली। श्री आगे बताती हैं कि इस फिल्म में वे देवकी की भूमिका में हैं, जो अपनी बेटी की सुरक्षा को लेकर परेशान है। और फिर वो दुनिया को बताती है कि एक मां अपनी इस बेटी के लिए क्या कुछ नहीं कर सकती है। वो उसे परेशान करने वाले को ढूंढ निकालती है। उनसे और बात कर रही हैं 'वेबदुनिया' संवाददाता रूना आशीष
फिल्म को सेंसर बोर्ड ने कोई कट किए बगैर रिलीज करने के लिए इजाजत दे दी है?
मैं बहुत खुश हूं कि सेंसर बोर्ड ने फिल्म को किसी भी कट के बिना रिलीज करने को कहा है। वैसे भी हमने हमेशा जेहन में रखा था कि एक पारिवारिक फिल्म है और इस फिल्म को देखने के लिए बच्चों और बड़े दोनों को जाना चाहिए।

आपने फिल्म में अक्षय खन्ना के साथ काम किया है। कहीं आपको उनमें विनोद खन्ना की झलक मिलती है। आप तो उनके साथ भी 'चांदनी' जैसी फिल्म कर चुकी हैं?
विनोदजी की झलक अक्षय में है। विनोदजी का चार्म है उनमें, लेकिन काम के मामले में बिलकुल अलग ही हैं दोनों। काम के मामले में दोनों की कहीं कोई समानता नहीं है। अक्षय आज की पीढ़ी के कलाकार हैं। बहुत कम एक्टर्स मिलते हैं, जो ऐसे काम करते हैं। वे बड़ी ही गरिमा के साथ काम करते हैं। उन्हें देखकर लगता है कि इनकी परवरिश बहुत अच्छी हुई है। बहुत ही उम्दा अभिनेता हैं। वे एकदम शांत किस्म के हैं। वे बहुत ही दमदार अभिनेता हैं और उन्होंने बहुत ही अच्छा काम किया है।
आपको अपनी कितनी याद हैं?
मां की याद तो हमेशा आपके साथ होती है। हर वक्त, हर समय आप बस उसे मिस करते रहते हैं। वैसे भी मां और बेटी का रिश्ता बहत खास होता है और लफ्जों में बयां नहीं कर सकते। उसके प्यार से तो किसी भी प्यार का मुकाबला नहीं हो सकता है। मेरी मां को लेकर बहुत याद है। मेरी मां सख्त कभी नहीं थी। मैं एक चाइल्ड स्टार भी रही हूं तो बारिश हो या धूप हो या बर्फ हो, कहीं भी शूट हो, मैंने हमेशा अपनी मां को वहां पाया है। एक दिन भी मुझे याद नहीं आता, जब मां ने कहा हो कि मैं आज तुम्हारे साथ शूट पर नहीं आ सकूंगी। वे हमेशा मेरे साथ होती थीं। मुझे देखते रहती थीं कि कहीं मैं असहज तो नहीं हूं।
आपकी मां ने आपको क्या टिप्स दिए हैं?
मां ने जो मुझे टिप्स दिए हैं, वे हैं- समय पर पाबंद रहो, सबकी इज्जत करो, सबसे तमीज से पेश आओ। ये वे बातें हैं, जो हर मां अपने बच्चों को कहती है?
15 साल पहले के और आज के में कितना अंतर आया है?
आज तो इंडस्ट्री बहुत बदल गई है। तकनीक में जमीन-आसमान का अंतर आ गया है, बाकी निर्देशक का काम तो समान ही रहा है। आज का माहौल बदल गया है। पहले तो फिल्म रील का ध्यान देना पड़ता था। 10 टेक के बाद निर्माता का दूर से चेहरा दिखने लगता था। उसे रील खत्म होने का टेंशन सताने लगता था, तो तब बहुत टेंशन होता था। अब ऐसा नहीं होता। अब सब डिजिटल है। आपको जितने टेक लेना है, ले लीजिए। जब तक आप खुद खुश नहीं हो जाते, टेक ले सकते हैं। फिल्म रील खत्म होने की कोई बात ही नहीं होती। अब तो निर्माता वैनिटी वैन भी देते हैं, जो पहले नहीं होता था। महिला कलाकारों को बहुत मुश्किल होती थी। मैं तो दिनभर प्यासी रहती थी कि कहीं वॉशरूम नहीं मिले तो क्या करूंगी।
देशभर में बारिश का मौसम है और आपके बारिश वाले गाने अभी भी बहुत फेमस हैं।
रेन डांस या रेन सीक्वेंस एक टॉर्चर था मेरे लिए। जब भी इस तरह का कोई गाना शूट किया गया तो लगभग हर बार मुझे बुखार रहा है। असल जिंदगी में मैं बहुत आउटडोर शख्स हूं तो मेरे लिए बारिश मतलब घर के बाहर जॉगिंग या वॉक पर जाना बंद हो जाना, तो मैं इस मौसम को इंजॉय नहीं करती।
आपके घर वालों ने 'मॉम' फिल्म देखी?
जान्हवी ने फिल्म देखी। उसने देखकर कुछ नहीं बोला और बस हग कर लिया। खुशी ने रशेज़ देखे, फाइनल कॉपी नहीं देखी। वो अपने दोस्तों के साथ देखना चाहती है फिल्म को। जहां तक बोनीजी की बात है तो वे फिल्म को हर स्तर पर देखते आ रहे हैं, हर कदम पर। जब मैंने देखा तो मुझे वो संतोष नहीं हुआ। वैसे कोई भी एक्टर कभी अपने रोल से संतुष्ट नहीं होता। मुझे लगा कि इस शॉट में ऐसा कर लेती या वैसा कर लेती या इससे बेहतर कर लेती। हम बहुत लालची होते हैं और कभी अपने आपसे खुश नहीं होते हैं।

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