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फेसबुक पर वीडियो डालने से मिलेगा पैसा

BBC Hindi| पुनः संशोधित शुक्रवार, 3 जुलाई 2015 (13:30 IST)
- क्रिस फॉक्स (टेक्नॉलॉजी रिपोर्टर) 
 
फेसबुक पर अपने मौलिक वीडियो अपलोड करने वाले अब कमाई भी कर सकेंगे। ऐसा संभव होगा कंपनी के नए सजेस्टेड वीडियो फीचर से। इस फीचर से कई यूजर्स के वीडियो क्लिप्स और विज्ञापनों को मिलाकर अपने आप एक वीडियो तैयार हो जाता है।
इस वीडियो को जितने अधिक लोग देखेंगे, उतनी ज्यादा कमाई होगी। वीडियो में शामिल विज्ञापनों से होने वाली कमाई का 45 फीसदी हिस्सा फेसबुक का होगा। फेसबुक के अनुसार उसकी वेबसाइट पर रोजाना करीब चार अरब बार वीडियो देखे जाते हैं।
 
कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि फेसबुक पर वीडियो की बढ़ती लोकप्रियता से यूट्यूब के लिए खतरा पैदा हो गया है। आईएचएस कंसल्टेंसी की एडवरटाइजिंग एनालिस्ट एलेनी मारौली कहती हैं, 'वीडियो की दुनिया में फेसबुक बहुत आक्रामक तरीक़े से आगे बढ़ रहा है।'
 
यूट्यूब से मुकाबला : मारौली ने बताया, 'दिसंबर 2014 में फेसबुक ने व्यूज के मामले में पहली बार यूट्यूब को पीछे छोड़ा था। हमें लगता है आगामी वर्षों में यूट्यूब और पिछड़ता जाएगा।'
इस साल जून में अमेरिकी कंपनी एसबीओ ने अपने कुछ कार्यक्रमों को फेसबुक पर प्रसारित करने की घोषणा की थी। वीडियो के बदले पैसे देने से दूसरे निर्माताओं को भी अपने कंटेट फेसबुक पर अपलोड करने को बढ़ावा मिलेगा।
 
यूट्यूब वीडियो अपलोड करने वालों को उसमें दिखाए गए विज्ञापनों से होने वाली कमाई का 55 फीसदी देता है। फेसबुक इस 55 फीसदी को कई यूजर्स में बांट रहा है।
 
मारौली कहती हैं, 'ये कोई असामान्य या बहुत उदार मॉडल नहीं है। लेकिन फेसबुक और यूट्यूब के बीच वीडियो अपलोड करने वालों को लुभाने की भी होड़ लग सकती है।'
 
फेसबुक को साल 2015 की पहली तिमाही में विज्ञापनों से 3.3 अरब डॉलर की कमाई हुई है। इसका 75 फीसदी हिस्सा मोबाइल पर आने वाले विज्ञापनों से आया।
 
वीडियो मैनेज करने की सुविधा : यूट्यूब अपने यूजर्स को उनके वीडियो खुद मैनेज करने की सुविधा देता है। फेसबुक ने कहा है कि वो फिलहाल कुछ मीडिया ग्रुप और चुनिंदा लोगों के साथ मिलकर काम कर रहा है।
 
वीडियो बनाने वालों के लिए एक मुश्किल ये है कि यूट्यूब की तुलना में फेसबुक पर वीडियो सर्च करना थोड़ा मुश्किल है। मारौली मानती हैं कि पैसा निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
 
उन्होंने बीबीसी से कहा, 'इस क्षेत्र के बड़े खिलाड़ियों को अपने वीडियो पेश करने के लिए फेसबुक और यूट्यूब जैसी टेक कंपनियों की उतनी जरूरत नहीं है।' मारौली कहते हैं कि अगर बड़ी कंपनियां इस डील से ख़ुश नहीं होती तो वो अपना हाथ खींच लेंगी, जैसा कि चैनल 4 ने यूट्यूब के साथ किया।

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