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शनि का मंगल में प्रवेश मचाता है उत्पात, संभलकर रहें इस दौरान...

Author पं. अशोक पँवार 'मयंक'|
शनि, मंगल की राशि वृश्चिक में आता है तब उस समयावधि में मचाता है। भूकंप, रेल दुर्घटना, आतंकवादियों से परेशानियां, देश में हलचल व राजनीति में अस्थिरता आती है। 


 

शनि भगवान नहीं, बल्कि आकाश मंडल में एक खूबसूरत ग्रह है। जिनकी पत्रिका में यह बुरी स्थिति में रहता है, उसी के समान प्रभाव देता है। 
 
जब-जब गोचर ग्रहों में भी शत्रु राशि में आता है, जातकों की पत्रिका में शनि की स्थिति अनुसार फलदायी होता है। शनि मेष में नीच का होता है, नीच में भी बुरा प्रभाव देता है। इंसान को शनि की अच्छी या बुरी दृष्टि अनुसार फल भोगना पड़ता है इसीलिए शनि को दंडात्मक कार्य करने वाला कहा गया है। 
 
शनि, गुरु की राशि धनु, मीन में रहकर हानिप्रद नहीं होता, न ही अपनी उच्च स्थिति तुला में। मकर व कुंभ इसकी अपनी राशि मानी गई है अत: अपने घर में शुभ परिणाम देता है। इसकी मित्र राशि मिथुन व कन्या है, इसमें भी शुभ ही होता है। 
 
मेष व वृश्चिक में ही इसके अशुभ फल भोगने पड़ते हैं व फल मिलते हैं। 
 
जब-जब का दृष्टि संबंध बनता है, तब-तब घटना-दुर्घटना होती है। यदि जन्म के समय व वर्तमान में ऐसी स्थिति बनती है, तब भयंकर परिणाम भुगतने पड़ते हैं। 
 
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