15 जनवरी को है मकर संक्रांति, जानिए राशि पर प्रभाव


Author पं. देवेन्द्रसिंह कुशवाह|
क्या कहता है इस बार का पंचांग   
 
> नववर्ष 2015 की मकर संक्रांति हाथी पर सवार होकर गर्दभ उपवाहन के साथ मुकुट का आभूषण पहनकर पशु जाति की मकर संक्रांति गोरोचन का लेप लगाकर लाल वस्त्र और बिल्वपत्र की माला पहनकर हाथ में धनुष धारण कर हाथ में लोहे का पात्र लिए दुग्धपान करती हुई प्रौढ़ावस्था में रहेगी।
 
इस वर्ष सूर्य मकर राशि में 14 जनवरी को सूर्यास्त के बाद शाम 7 बजकर 27 मिनट पर प्रवेश करेगा। संक्रांति का पुण्यकाल 14 जनवरी की दोपहर 1 बजकर 3 मिनट पर प्रारंभ होगा, जो अगले दिन 15 जनवरी को 11 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। संक्रांति के बाद स्नान, दान और पूजा का महत्व है।
 
हिन्दू संस्कृति को त्योहारों, परंपराओं, मान्यताओं का देश माना जाता है। इन्हीं बातों के कारण हमारी सांस्कृतिक विरासत आज भी सर उठाए खड़ी है। अंग्रेजी नववर्ष के प्रारंभ होते ही देश में संक्रांति के महान पर्व का आगाज हो रहा है। दीपावली, होली के समान मकर संक्रांति ऐसा दिव्य पर्व है जिसे पूरे देश में अलग-अलग तरह और नाम से एकसाथ मनाया जाता है। इस बार मकर संक्रांति किस रूप में आपके और देश के लिए क्या क्या लेकर आ रही है, जानिए इस आलेख में...
 
आगे पढ़ें क्यों मनाई जाती है मकर संक्रांति?>  
 

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