अपनी कुंडली से जानें कब और कैसे होता है हृदयरोग

13. चतुर्थ भावगत षष्ठेश की यु‍ति सूर्य-शनि के साथ होने पर होता है। (जा.भू. 6।11)

14. चतुर्थगत यदि शनि, भौम, गुरु हो तो हृदयरोग होता है। (होरारत्न)

15. तृतीयेश राहु-केतु से युक्त हो तो हृदयाघात होता है। (ज्यो. र.)

16. यदि शनि निर्बल शयनावस्था में हो तो भी हृदयशूल रोग होता है। (ज्यो.र.)

17. सूर्य यदि सिंह राशिगत हो तो जातक हृदयरोग से ग्रस्त होता है। (वी.वी. रमन)

18. शनि यदि अष्टम भावगत हो तो हृदय रोग उत्पन्न करता है। (गर्ग वचन)
19. मकर राशिगत सूर्य हृदयरोग प्रदान करता है। (मू.सू. 3।2।5)

20. राहु यदि द्वादशस्थ हो तो हृदय रोग देता है। (भाव. प्र.)

21. चतुर्थेश चतुर्थ भावगत पापयुक्त हो तो हृदयरोग देता है। (गदावली 2।33)

22. सिंह राशि के द्वितीय द्रेष्काण में यदि जन्म हो तो हृदय रोग होता है। (गदावली 2।24)

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