अपनी कुंडली से जानें कब और कैसे होता है हृदयरोग

7. चन्द्रमा शत्रुक्षेत्री होने पर उत्पन्न करता है। (जा. पारि. 8।112)

8. तृतीयेश यदि केतु से युक्त हो तो जातक हृदयरोगी होता है। (जा. पारि. 12।36)

9. चतुर्थ भाव में पापग्रह हो और चतुर्थेश पापयुक्त हो तो हृदयरोग उत्पन्न करता है। (सर्वार्थचिंतामणि)

10. मकर राशिगत सूर्य सामान्य हृदयरोग उत्पन्न करता है। (जा. सारदीप)

11. सूर्य वृष राशिगत हो तो जातक हृदयरोग से ग्रस्त होता है। (हो.प्र. 10।44)

12. वृश्चिक राशिगत सूर्य हृदयरोग उत्पन्न करता है। (शम्भु हो., 10।46)

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