आज गंगा दशहरा (दशमी) : 10 का महत्व, 10 दान, 10 पापों का नाश, इस बार बन रहे हैं 10 महासंयोग


आज जून 2019
गंगा दशहरा यानी गंगा दशमी है। इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि यह दिन 10 प्रकार के पापों का नाश करता है। इस दिन 10 पंडितों को 10 तरह के दान दिए जाते हैं। इस बार यह विलक्षण बात जुड़ रही है कि इस दिन 10 तरह के विशेष ज्योतिषीय संयोग भी बन रहे हैं।

इस 10 संयोगों के साथ गंगा में 10 डुबकी लगाएं। इस दिन अगर आप 10 चीज़ें दान करते हैं तो अत्यंत शुभ फल मिलता है। मां गंगा की पूजा में जिस भी सामग्री का उपयोग करें उसकी संख्या दस ही होनी चाहिए। जैसे 10 दीये, 10 तरह के फूल, 10 दस तरह के फल आदि। स्नान के बाद अपनी श्रद्धा अनुसार गरीबों में दान-पुण्य करें।

10 पाप : शास्त्रों के अनुसार गंगा अवतरण के इस पावन दिन गंगा जी में स्नान एवं पूजन-उपवास करने वाला व्यक्ति दस प्रकार के पापों से छूट जाता है। 10 प्रमुख पाप इस प्रकार हैं। 3 प्रकार के दैहिक, 4 वाणी के द्वारा किए हुए एवं 3 मानसिक पाप, ये सभी गंगा दशहरा के दिन पतितपावनी गंगा स्नान से धुल जाते हैं। गंगा में स्नान करते समय स्वयं श्री नारायण द्वारा बताए गए मन्त्र-''ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः'' का स्मरण करने से व्यक्ति को परम पुण्य की प्राप्ति होती है।
10 दान
गंगा दशहरे के दिन श्रद्धालुजन जिस भी वस्तु का दान करें, उनकी संख्या 10 होनी चाहिए और जिस वस्तु से भी पूजन करें, उनकी संख्या भी दस ही होनी चाहिए, ऐसा करने से शुभ फलों में वृद्धि होती है। दक्षिणा भी 10 ब्राह्मणों को देनी चाहिए। जब गंगा नदी में स्नान करें, तब 10 बार डुबकी लगानी चाहिए। : जल, अन्न, फल, वस्त्र, पूजन व सुहाग सामग्री, घी, नमक, तेल, शकर और स्वर्ण।

10 विशेष महासंयोग
विशिष्ट योग की साक्षी में गंगा माता का पूजन पितरों को तारने तथा पुत्र, पौत्र व मनोवांछित फल प्रदान करने वाला माना गया है।


देवी गंगा का 10 दिव्य योग की साक्षी में पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। ज्योतिषियों के अनुसार 12 जून को गंगा दशहरे पर वैसे ही 10 दिव्य योग का संयोग बन रहा है। बीते 75 साल में इस योग का निर्माण नहीं हुआ है। विशिष्ट योग की साक्षी में गंगा माता का पूजन पितरों को तारने तथा पुत्र, पौत्र व मनोवांछित फल प्रदान करने वाला माना गया है।
इस बार 12 जून को गंगा दशहरे पर दिव्य संयोग बन रहा है। धर्मशास्त्रीय मान्याता के अनुसार इस बार गंगा दशहरे पर वैसे ही 10 दिव्य महायोग बन रहे हैं, जिन योगों में देवी गंगा पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। पंचागीय गणना से देखें तो बीते 75 साल में इस प्रकार का दिव्य संयोग नहीं बना है। हेमाद्री कल्प में शृंगी ऋषि ने 10 दिव्य योग में काशी के वासियों को दशाश्वमेघ घाट पर गंगा का पूजन तथा अन्य तीर्थ के लोगों को समीपस्थ तीर्थ पर गंगा पूजन करने को कहा है। ऐसा करने से मनुष्य को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
कौन से 10 योग गंगा अवतरण के समय विद्यमान थे

ज्येष्ठ मास, शुक्ल पक्ष, दशमी तिथि, बुधवार का दिन, हस्त नक्षत्र, व्यतिपात योग, गर करण, आनंद योग, कन्या राशि का चंद्रमा व वृषभ राशि का सूर्य को दश महायोग कहा गया है।

-->

और भी पढ़ें :