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घर और ग्रह जानिए संकटों का रहस्य और समाधान

अनिरुद्ध जोशी 'शतायु'|
एक कुंडली में होता है और दूसरा घर वह जिसमें आप रहते हैं। जिस तरह कुंडली में ग्रह होते हैं उसी तरह आपके घर में भी ग्रह होते हैं। जिस तरह आपके घर में ग्रह होते हैं उसी तरह आपके शरीर को यदि घर माने तो उसमें भी ग्रह होते हैं। अब सवाल यह उठता है कि यह रहस्य क्या है और क्या इसका हमारे जीवन पर प्रभाव पड़ता है और क्या है समाधान?
घर में ग्रह : दरअसल, वास्तु अनुसार घर में चार कोण होते हैं, ईशान कोण, नैऋत्य कोण, आग्नेय कोण और वायव कोण। ईशान कोण जल एवं भगवान शिव का स्थान है और गुरु ग्रह इस दिशा के स्वामी है। ईशान कोण में पूजा घर, मटका, कुंवा, बोरिंग वाटरटैंक अदि का स्थान बान सकते हैं। आग्नेय कोण अग्नि एवं मंगल का स्थान है और शुक्र ग्रह इस दिशा के स्वामी है। आग्नेय कोण को रसोई या इलैक्ट्रॉनिक उपकरण आदि का स्थान बना सकते हैं। वायव कोण में वायु का स्थान है और इस दिशा के स्वामी ग्रह चंद्र है। वायव कोण को खिड़की, उजालदान आदि का स्थान बना सकते हैं। नैऋत्य कोण पृथ्‍वी तत्व का स्थान है और इस दिशा के स्वामी राहु और केतु है। नैऋत्य को ऊंचा और भारी रखना चाहिए।
 
इसी तरह चार दिशा होती है। पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण। पूर्व दिशा के स्वामी सूर्य, देवता इंद्र होते हैं। पितृस्थान की प्रतिक यह दिशा खुली होना चाहिए। पश्चिम दिशा के देवता वरूण और ग्रह स्वामी शनि है। यह दिशा भी वास्तु नियमों के अनुसार होना चाहिए।

उत्तर दिशा के देवता कुबेर और ग्रह स्वामी बुध है। यह माता का स्थान है। इसी दिशा को खाली रखना जरूरी है। दक्षिणी दिशा काल पुरुष का बायां सीना, किडनी, बाया फेफड़ा, आतें हैं एवं कुंडली का दशम घर है। यम के आधिपत्य एवं मंगल ग्रह के पराक्रम वाली दक्षिण दिशा पृथ्वी तत्व की प्रधानता वाली दिशा है। यह स्थान भी भारी होना चाहिए।

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