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तिथि से जानिए स्वर की शुभता

किस तिथि को कौन-सा स्वर चलना शुभ होता है

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मनुष्य का जीवन पर आधारित है। यदि सांस की गति तीव्र होती है तो उतनी आयु व्यक्ति की कम होती है एवं जितनी धीमी होती है उतनी आयु बढ़ती है। योगी अधिक करते हैं इसीलिए उनकी आयु अधिक होती है

सांस के माध्यम को हम योग की भाषा में स्वर कहते हैं। नाक के जिस छिद्र से सांस ली जाती है उसी छिद्र की दिशा के अनुसार ही दाएं स्वर चलना या बाएं स्वर चलना कहा जाता है।

जिस प्रकार दिन में लग्न का परिवर्तन होता है, उसी प्रकार स्वर का परिवर्तन भी उसी समय में होता है। यदि स्वर ठीक प्रकार से गति करे तो व्यक्ति के स्वस्थ होने की पूर्ण संभावना रहती है। किंतु यदि स्वर विपरीत चले तो शारीरिक के साथ दूसरी प्रकार की बाधाएं भी आने की संभावना बनती है।

स्वर की उचित-अनुचित स्थिति को तिथि के अनुसार ज्ञात किया जा सकता है। सूर्योदय के समय जो तिथि हो, उस समय वह स्वर चलना ‍चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है तो उसका तात्पर्य यह मानना चाहिए कि कहीं न कहीं कोई गड़बड़ है। तिथि के अनुसार स्वर चलना चाहिए।

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