अब छोड़ दो शर्माना

प्यार
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संकोची और लोगों की सबसे बड़ी समस्या बनती जा रही है। यह ऐसी समस्या है जिसका शिकार एक बार व्यक्ति में हो जाए तो ताउम्र उससे निकलने में परेशानी होती है इसलिए इससे निकलना बचपन में ही जरूरी बन जाता है। शर्मीला व्यक्ति कई बार का स्वाद सिर्फ इसलिए चखता है कि वह अपने आप को ठीक से प्रस्तुत नहीं कर पाता है।

अपने शर्मीले स्वभाव के कारण ऐसे लोगों को भीड़ देखते ही घबराहट होती है। कई बार तो यह शर्मीलापन, घबराहट जैसी दूसरी बीमारियों में तब्दील हो जाती है । ऐसे में डॉक्टरी इलाज का सहारा लेना पड़ता है। विशेषज्ञों के मुताबिक अपने आपको जरूरत से ज्यादा ध्यान देना, बाहर के लोगों को देखकर काँप उठना, किसी काम को करने से पहले ही हार मान लेना आदि शर्मीलेपन की निशानी है।
डॉ. ज्ञानेंद्र राव के मुताबिक लोगों को यह समझना जरूरी है कि यह कोई बीमारी नहीं बल्कि एक समस्या है। कई लोग मंच पर खड़े होने पर घबराते हैं तो कुछ लोग बाहर के लोगों को देखकर। ऐसे लोगों को हर वक्त यह लगता रहता है कोई उन्हें देख रहा है इसलिए हर मरीज को अलग-अलग तरीके से निकालने की जरूरत होती है। इस बीमारी से निकलने के लिए मरीज में बढ़ाना सबसे जरूरी है।
शर्मीलेपन से निकलने के उपाय :

जब भी किसी से मिले मुस्कराकर मिलें। ऐसे करने से आपमें आत्मविश्वास आएगा और धीरे-धीरे आप मिलनसार बन जाएँगे।

अनजान लोगों से मिलने पर ज्यादा बोलने से अच्छा है कि उनकी बातों को ध्यान से सुनें।
यदि आप इंटरव्यू देने जा रहे हैं या फिर आप किसी से मिलने जा रहे हैं तो उनके बारे में जानकारी पहले से ले लें। उनका नाम याद रखें ताकि ऐन वक्त पर आपको घबराहट महसूस न हो।

दूसरे की तारीफ करने से परहेज मत करें। ऐसा करने से आपमें आत्मविश्वास बढ़ता है । साथ ही आप अपने संकोची स्वभाव से निकलने लगते हैं।
अपने से ध्यान हटाकर दूसरों के बारे में सोचें। ऐसा करने से घबराहट की समस्या से निजात मिलेगी।

अपने रहन-सहन में बदलाव लाएँ। वही पहने जिससे आपका आत्मविश्वास बढ़ता हो।

अपने आपको उसी काम-काज में ढालें जिसमें आपकी रुचि हो।

एकाग्रता बढ़ाने के लिए व्यायाम करें।
सुबह उठते ही शीशे के सामने खड़े होकर यह बोले कि आज के दिन आप किस काम को पूरा करना चाहते हैं। ऐसा कर रोजाना आप एक काम को अपना लक्ष्य बना सकते हैं। काम होने के बाद आप यह विचार करें आपके काम में क्या खामियाँ रहीं ।

अपने आप पर विश्वास रखें। जीवन में हार की सोच अपने दिमाग में भूल से भी न आने दें। हमेशा याद रखें कि आप वही काम कर सकते हैं जहां आप अपना दिमाग का इस्तेमाल कर रहे हैं। हार या का फैसला आपके हाथ में नहीं है।


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