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चिंगारी से ही जल गया दशानन

खरगोन | Naidunia| पुनः संशोधित शुक्रवार, 7 अक्टूबर 2011 (23:51 IST)
में रंगारंग आतिशबाजी के बीच कुछ चिंगारियाँ उड़ीं और रावण का पुतला यकायक जल गया। इस कारण सजधजकर घरों से मेला मैदान के लिए निकले आधे से ज्यादा नगरवासियों को बीच रास्ते से निराश होकर अपने घर लौटना पड़ा।

नगर परिषद द्वारा गुरुवार को मेला मैदान में 45 फुट का रावण का पुतला खड़ा किया गया था। प्रतिवर्षानुसार रावण दहन के पूर्व करीब एक घंटे तक रंगारंग आतिशबाजी की जाती है। इसका आनंद लेने नगर सहित आसपास के कई गाँवों से हजारों लोग पहुँचते हैं। गुरुवार को भी शाम 6.30 बजे आतिशबाजी शुरू हुई जो करीब 15 मिनट ही चल पाई कि पटाखे की चिंगारी के कारण पुतले ने आग पकड़ ली और वह यकायक जलने लगा।

उस समय तक मेला मैदान में आधे दर्शक ही पहुँच पाए थे और ज्यादातर घरों से निकलकर रास्ते में ही थे। जब भीड़ सामने से आते देखी तो उन्हें इस बात का पता चला। इससे उन्हें भारी निराशा हुई। साथ ही जिन लोगों ने रावण दहन देखा, उन्हें भी आधी-अधूरी आतिशबाजी के कारण मजा नहीं आया। हर वर्ष रावण दहन का सौभाग्य प्राप्त करने वाले नगर के पटेल परिवार को भी निराशा हुई होगी।

दुर्घटना या आत्महत्या!

इस बीच लोगों को बधाई देने के लिए मुस्लिम समाज कमेटी टेंट लगाकर व्यवस्था बनाने में जुटी हुई थी। जब भीड़ जल्द लौटी तो कमेटी के सदर आकिल शेख सहित पार्षद तस्लीम खान, रफीक मोती खान आदि सक्रिय हो गए। उन्होंने मोबाइल पर सूचना देकर सदस्यों को जल्द पहुँचने को कहा। उधर त्योहार की बधाइयाँ देने का सिलसिला शुक्रवार को भी जारी रहा। इस दौरान कुछ लोगों ने रावण दहन को एक दुर्घटना तो कुछ लोगों ने इसे रावण की आत्महत्या कहकर खूब चटखारे लिए।


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