अंधेरे के बाद ही उजाला

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-कमल शर्मा
भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था के बैरोमीटर बॉम्‍बे स्‍टॉक एक्‍सचेंज का सेंसेक्‍स पिछले दो दिन में एक हजार अंक गिर चुका है और निवेशकों में बेचैनी छा गई है। निवेशकों के मुरझाए चेहरों पर एक ही सवाल है कि सेंसेक्‍स और शेयर बाजार में आगे क्‍या होगा। क्‍या यह मंदी और बढ़ेगी या फिर मार्केट की रौनक लौट आएगी।

हर निवेशक को यह जान लेना चाहिए कि शेयर बाजार में न तो सब कुछ मिटने जा रहा है और न ही बड़ी तेजी आएगी। लेकिन यह बात ध्‍यान रखनी चाहिए कि हर तगड़ी तेजी के बाद कुछ करेक्‍शन आता ही है, लेकिन ऐसे करेक्‍शन स्‍थायी नहीं हैं और शेयर बाजार नई बुलंदियों को छूता रहेगा।

बीएसई सेंसेक्‍स जब पाँच हजार अंक था और आठ हजार अंक पर आया तब भी यही बातें होती थी कि अब बहुत बढ़ गया बाजार, कभी भी औंधे मुँह गिरेगा। आठ से 15 हजार अंक पहुँचा तब भी इसी तरह की बातें होती थी और आज भी हो रही है। इस तरह की बातों को सोचने के पीछे हमारी गलती नहीं है, बल्कि हमारी मानसिकता आड़े आ जाती है क्‍योंकि हम तगड़ी तेजी देखने के आदी नहीं रहे और पहली बार बाजार में आग लगते हुए देख रहे हैं लेकिन एक गिरावट ब्‍लड प्रेशर गड़बड़ा देती है।

यदि इतिहास देखा जाए तो सेंसेक्‍स ने जब भी बड़ा गोता लगाया, वह अगली बार दोगुने जोश से आगे बढ़ा है। इस समय की मंदी की बड़ी वजह निवेशकों की नए पब्लिक इश्‍यू में पैसा लगाने के लिए निकली बिकवाली है। आम निवेशक को चिंतित होने की जरूरत नहीं है। सेंसेक्‍स को अभी बड़ी मंजिल तय करनी है।

हर निवेशक से कहना है कि यदि आपने देश की क्रीम कंपनियों में निवेश किया है तो बिलकुल न घबराएँ, चाहे सेंसेक्‍स किसी भी स्‍तर पर दिखे। साथ ही ऐसी कंपनियों के शेयर छोटे-मोटे लाभ के लिए न बेचें, बल्कि लांग टर्म के आधार पर अपने निवेश को बनाए रखें।

हालाँकि, बाजार पर बुरा असर डालने वाली कोई बड़ी खबर आ रही हो तो आप कुछ समय के लिए अपने शेयर बेच सकते हैं लेकिन उन्‍हें घटे स्‍तर पर खरीदने की तैयारी भी रखें। यदि आप ऑपरेटरों और पंटरों के मन को पढ़ सकते हैं तो यह जान लें कि जब बाजार में चौतरफा यह तय हो जाता है कि बाजार में अब गिरावट नहीं आएगी और यह उठता ही रहेगा तभी इतना तगड़ा झटका दिया जाता है कि निवेशकों की बड़ी संख्‍या संभल ही नहीं पाती।

कई बार यह धक्‍का प्‍यार से दिया जाता है...यानी 80/100/150 अंक की रोज-रोज गिरावट एवं आम निवेशक यह सोचता रहता है कि आज गिरा है, कल बाजार उठेगा। परसों तो दम आएगा ही, लेकिन ऐसा नहीं होता और पता चलता है कि बाजार तो डेढ़ हजार अंक का गोता लगा गया।

यह ध्‍यान रखें पैसा कमाने के लिए धैर्य जरूरी है और घबराहट के किसी भी कारण के समय आत्‍मचिंतन जरूर करें अन्‍यथा आप गेनर के बजाय लूजर बन सकते हैं। भेड़चाल का हिस्‍सा न बनते हुए किसी भी कंपनी के शेयर खरीदते और बेचते समय यह जरूर सोचें कि यह खरीद कितने समय के लिए है और यदि शेयर बेच रहे हैं तो यह देखें कि जिस भाव पर आप शेयर बेच रहे हैं क्‍या उसके बाद इसमें बढ़ोतरी की बड़ी गुंजाइश नहीं बची है। यदि गुंजाइश है तो शेयर बेचने का आपका फैसला गलत हो सकता है।

सच्‍चा खिलाड़ी वह है जो हर बड़ी गिरावट में बेहतर शेयर छोटी-छोटी मात्रा में खरीदता है। आपको कई बार यह लगता है कि मैंने अमुक कंपनी के शेयर नहीं लिए या चूक गया, लेकिन ऐसी गिरावट आपको बेहतर कंपनियों या अपनी पसंदीदा कंपनियों के शेयर खरीदने के मौके देती है।

गिरावट के समय जो सबसे बड़ा मंत्र है, पहले आप शांत मन से अपनी पसंदीदा कंपनियों की सूची का विश्‍लेषण करें और यह देखें कि जिन कंपनियों के शेयर आप खरीदना चाहते हैं उनके नतीजे पिछले तीन सालों में किस तरह के आए हैं, प्रबंधन कैसा है, जिस क्षेत्र से कंपनी जुड़ी हैं, उस उद्योग का भविष्‍य कैसा है।

शेयर खरीदने के बाद आपकी होल्डिंग क्षमता कैसी है। इस तरह के अनेक कारक हैं जिन पर आप विचार कर हर गिरावट में बेस्‍ट कंपनियों के शेयर ले सकते हैं, लेकिन याद रखिए आपकी यह खरीद छोटी छोटी मात्रा में होनी चाहिए ताकि अगली गिरावट पर भी आपके पास लिक्विडीटी बनी रहे।

गुजरात स्‍टेट पेट्रोनेट : डार्क हॉर्स
गुजरात स्‍टेट पेट्रोनेट लिमिटेड (जीएसपीएल) ने वित्‍त वर्ष 2007 में अपनी पाइपलाइन नेटवर्क को 1130 किलोमीटर कर दिया, जो वित्‍त वर्ष 2006 में केवल 510 किलोमीटर थी। यानी एक ही साल में पाइपलाइन नेटवर्क दोगुना। यह कंपनी पाइपलाइन के निर्माण और इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर स्‍थापित करने के लिए पहले ही दो अरब रुपए निवेश कर चुकी है।

कंपनी ने जामनगर और हलोल के इलाके को जोड़ने के लिए दो अरब रुपए का अतिरिक्‍त पूँजीगत खर्च करने की योजना बनाई है। कंपनी मोरबी से मुंद्रा पोर्ट और पीपावाव पोर्ट से जामनगर के इलाके को कवर करने के लिए पाइपलाइन गैस ग्रिड स्‍थापित करने की भी योजना बना रही है। पूँजीगत खर्च के लिए आईएफसी ने लगभग 123 करोड़ रुपए का इक्विटी निवेश किया है और 338 करोड़ रुपए का कर्ज दिया है।

जीएसपीएल शुद्ध रूप से गैस ट्रांसमीशन कंपनी है और मौजूदा समय में यह अपने ग्राहकों को लगभग 18 एमएमएससीएमडी गैस सप्‍लाई कर रही है। वर्ष 2009 तक कंपनी चरणबद्ध रूप से अपने इस वोल्‍यूम को बढ़ाएगी। वर्ष 2009 की चौथी तिमाही से कंपनी का रिलायंस इंडस्‍ट्रीज के साथ भरूच से जामनगर के बीच 11 एमएमएससीएमडी गैस के ट्रांसपोर्टेशन का 15 साल का अनुबंध अमल में आएगा। अप्रैल 2008 से टोरेंट पावर जनरेशन लिमिटेड के लिए 4.5 एमएमएससीएमडी गैस के ट्रांसपोर्टेशन का 20 वर्षीय अनुबंध अमल में आ जाएगा।

क्रिसिल के मुताबिक कुल गैस खपत में शहरी गैस वितरण का हिस्‍सा वर्ष 2011-2012 में 14 फीसदी पहुँच जाएगा जो कि इस समय आठ फीसदी है। गुजरात स्‍टेट पेट्रोनेट इस मौके का लाभ उठाने के लिए अपने समूह की विभिन्‍न कंपनियों में रणनीतिक निवेश करने जा रही है, जो कि शहरी गैस वितरण से जुड़ी हुई हैं।

कंपनी तकरीबन 60 करोड़ रुपए अपनी पूर्ण सब्‍सिडीयरी जीएसपीसी गैस, साबरमती गैस (बीपीसीएल के साथ जीएसपीसी का संयुक्‍त उद्यम) और कृष्‍णा गोदावरी गैस नेटवर्क लिमिटेड में निवेश करेगी। कंपनी प्रबंधन इन उद्यमों का कार्पोरेट ढाँचा तीन से चार महीनों में तैयार कर लेगा।

गुजरात में व्‍यापक नेटवर्क के साथ काम कर रही जीएसपीएल ने राजस्‍थान, आंध्रप्रदेश और महाराष्‍ट्र में अपना कारोबार फैलाने की योजना बनाई है। हालाँकि इस संबंध में कंपनी अभी कुछ भी खुलकर बोलना नहीं चाहती। लेकिन इतना तय है कि इस विस्‍तार का कंपनी को भविष्‍य में भारी लाभ मिलेगा। प्राथमिक ऊर्जा स्‍त्रोत में नैचुरल गैस तेजी से आगे बढ़ता ऊर्जा स्रोत साबित हो रहा है।

गुजरात स्‍टेट पेट्रोनेट की शेयरधारिता को देखें तो प्रमोटरों की हिस्‍सेदारी 39 फीसदी है, जबकि विदेशी संस्‍थागत निवेशकों के पास 14 फीसदी, म्‍युच्‍युअल फंडों व संस्‍थागत निवेशकों के पास नौ फीसदी और अन्‍य के पास 28 फीसदी हिस्‍सेदारी है। जबकि आम जनता के पास इस कंपनी के केवल दस फीसदी हिस्‍सेदारी है। कंपनी के कामकाज को देखें तो वर्ष 2007 में इसकी कुल आय 335.4 करोड़ रुपए थी, जो वर्ष 2008 में बढ़कर 430.3 करोड़ रुपए और वर्ष 2009 में 579.9 करोड़ रुपए और वर्ष 2010 में 815.6 करोड़ रुपए पहुँच जाने की उम्‍मीद है।

कंपनी का शुद्ध लाभ वर्ष 2007 में 89.4 करोड़ रुपए रहा जिसके वर्ष 2008 में 87 करोड़ रुपए, वर्ष 2009 में 117.4 करोड़ रुपए और वर्ष 2010 में 212.2 करोड़ रुपए पहुँचने की आस है। कंपनी की पूँजी 56.19 करोड़ रुपए है।

गुजरात स्‍टेट पेट्रोनेट का शेयर इस समय तकरीबन 88 रुपए में मिल रहा है। कंपनी की भावी योजना और नेचुरल गैस के मोर्चे पर जिस तरह प्रगति हो रही है उसमें गुजरात स्‍टेट पेट्रोनेट डार्क हॉर्स शेयर साबित होगा और इसे मध्‍यम से लंबी अवधि के लिए रखा जा सकता है। हालाँकि शार्ट टर्म में इसका लक्ष्‍य 130 रुपए है।

स्‍पष्‍टीकरण : गुजरात स्‍टेट पेट्रोनेट में खरीद सलाह जारी करते समय मेरा अपना निवेश है।
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