शिक्षाविद् शालिनीताई मोघे का निधन

इंदौर| ND| पुनः संशोधित शुक्रवार, 1 जुलाई 2011 (09:37 IST)
शहर की प्रसिद्ध शिक्षाविद् पद्मश्री शालिनीताई मोघे का गुरुवार रात पौने नौ बजे यहाँ उनके निवास पर हो गया। वे 98 वर्ष की थीं तथा पिछले छः महीनों से बीमार थीं।

शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए शालिनीताई को कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया था। शालिनीताई महात्मा गाँधी और विनोबा भावे की सच्ची अनुयाई थीं।

गुरुवार शाम अचानक उनकी तबीयत और बिगड़ गई तथा उनका निधन हो गया। उनकी इच्छानुसार उनका पार्थिव शरीर शुक्रवार 1 जुलाई को उनकी कर्मभूमि बाल निकेतन संघ पागनीसपागा में दर्शनार्थ रखा जाएगा। स्कूल की नियमित प्रार्थना होगी तथा सभी बच्चे व शिक्षक श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
इस स्कूल की स्थापना उन्होंने 1944 में की थी। शुक्रवार दोपहर 3 बजे अंतिम यात्रा स्कूल भवन से रामबाग मुक्तिधाम जाएगी। उनके दो पुत्र विजय एवं सुधीर मोघे तथा पुत्रियाँ मीना फड़के व डॉ.निलिमा अदमणे हैं।

1965 में शालिनीताई को बाल शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन ने पद्मश्री से सम्मानित किया। 1985 में बाल शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैलसिंह ने विशेष पुरस्कार से सम्मानित किया।
1992 में उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति के आर. नारायणन ने जमनालाल बजाज पुरस्कार दिया। 1992 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. शंकरदयाल शर्मा ने राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया। (नईदुनिया)


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